-Friday World 20th Feb 2026
मुंबई: महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर ठाकरे परिवार के बीच तनाव की लहरें उठ रही हैं। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने राज ठाकरे और एकनाथ शिंदे की मुलाकात के ठीक बाद एक बड़ा और तेज फैसला लिया है, जिससे महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) को करारा झटका लगा है। यह फैसला बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के नामित (नॉमिनेटेड) नगरसेवकों से जुड़ा है, जहां उद्धव ठाकरे ने अपने कोटे की तीनों सीटों पर अपने ही पार्टी के नेताओं के नाम फाइनल कर दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, उद्धव ठाकरे ने साईनाथ दुर्गे, माधुरी मांजरेकर और कैलाश पाठक के नामों पर मुहर लगा दी है। इन नामों की आधिकारिक घोषणा 28 फरवरी को होने की संभावना है। यह कदम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि राज ठाकरे ने उद्धव से मनसे को एक नामित सीट देने की मांग की थी, लेकिन उद्धव ने इसे सिरे से खारिज कर दिया।
शिंदे-राज मुलाकात ने बदले सियासी समीकरण सब कुछ बुधवार को शुरू हुआ, जब मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के आधिकारिक निवास 'नंदनवन' में उनसे मुलाकात की। यह मुलाकात बीएमसी चुनावों के बाद दोनों नेताओं की पहली आमने-सामने की बातचीत थी। मुलाकात के दौरान विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह साफ संकेत माना जा रहा है कि राज ठाकरे शिंदे गुट के साथ नजदीकियां बढ़ा रहे हैं।
राज ठाकरे ने हाल ही में बीएमसी चुनाव में उद्धव गुट के साथ गठबंधन किया था, लेकिन परिणाम निराशाजनक रहे। मनसे को महज 6 सीटें मिलीं। अब शिंदे से मुलाकात के बाद राज ठाकरे की मांग को उद्धव ने ठुकरा दिया, जिससे ठाकरे बंधुओं के बीच पुरानी रंजिश फिर उभर आई है। उद्धव गुट का मानना है कि राज ठाकरे को शिंदे या भाजपा से दूरी बनाए रखनी चाहिए थी, लेकिन यह मुलाकात सब कुछ बदल गई।
बीएमसी चुनावों ने उलट दिया पुराना वर्चस्व बीएमसी चुनाव जनवरी 2026 में हुए थे, जिनके नतीजों ने मुंबई की राजनीति में 44 साल पुराना इतिहास बदल दिया। 227 सदस्यीय बीएमसी में भाजपा ने 89 सीटें जीतीं, जबकि शिंदे गुट की शिवसेना को 29 सीटें मिलीं। इस तरह महायुति गठबंधन (भाजपा + शिंदे सेना) के पास 118 सीटें आईं, जो बहुमत के आंकड़े 114 से ज्यादा हैं।
दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को 65 सीटें मिलीं और उनके सहयोगी मनसे को सिर्फ 6 सीटें। इससे उद्धव गुट विपक्ष में सिमट गया। चुनाव के बाद भाजपा की रितु तावड़े मुंबई की पहली महिला मेयर बनीं, जिससे शिवसेना का तीन दशक पुराना वर्चस्व खत्म हो गया।
बीएमसी में नामित सदस्यों की व्यवस्था विशेषज्ञों, महिलाओं, अल्पसंख्यकों आदि के लिए होती है। पिछली बार 5 नामित थे, लेकिन अब 10 हो गए हैं। भाजपा को 4, उद्धव सेना को 3, कांग्रेस, एआईएमआईएम और शिंदे सेना को 1-1 नामित सीट मिलती है। उद्धव ने अपनी तीनों सीटों पर अपने विश्वसनीय लोगों को चुना, ताकि विपक्ष में रहते हुए भी बीएमसी में मजबूत पकड़ बनी रहे।
उद्धव का यह फैसला क्यों लिया गया इतनी जल्दी? राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि उद्धव ठाकरे ने यह फैसला इसलिए तेजी से लिया क्योंकि वे राज ठाकरे के शिंदे से बढ़ते रिश्ते से सतर्क हैं। मनसे को एक सीट देने से उद्धव गुट की ताकत कम हो सकती थी। यह कदम उद्धव सेना को मजबूत करने और अपने संगठन में एकजुटता दिखाने का संकेत है।
उद्धव गुट शिंदे सेना को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानता है। अब जब राज ठाकरे शिंदे से मिल रहे हैं, तो उद्धव नामित सदस्यों के जरिए बीएमसी में अपनी आवाज बुलंद रखना चाहते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ठाकरे बंधुओं के बीच यह खाई और गहरी होती है या कोई नया मोड़ आता है।
यह घटनाक्रम महाराष्ट्र की सियासत को नई दिशा दे सकता है, जहां परिवारवाद और गुटबाजी फिर से सुर्खियों में है। मुंबई जैसे महानगर में बीएमसी का नियंत्रण किसके हाथ में रहेगा, यह सवाल अब और गहरा हो गया है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 20th Feb 2026