-Friday World 20th Feb 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की आर्थिक नीति को आज सबसे बड़ा झटका लगा है। अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी 2026 को एक ऐतिहासिक फैसले में ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक ग्लोबल टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया। कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया कि राष्ट्रपति ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का दुरुपयोग कर टैरिफ लगाए, जो उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है।
यह फैसला ट्रंप की "लिबरेशन डे" टैरिफ नीति पर सीधा हमला है, जिसके तहत उन्होंने दुनिया के लगभग हर देश पर 10% से ज्यादा टैरिफ लगाए थे। चीन, मैक्सिको, कनाडा, यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया और भारत जैसे प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर विशेष रूप से उच्च टैरिफ लगाए गए थे। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि संविधान के अनुसार टैरिफ (आयात कर) लगाने की शक्ति कांग्रेस के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास।
चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत की ओर से लिखा, "राष्ट्रपति ने खुद को असीमित टैरिफ लगाने की शक्ति का दावा किया है—किसी भी देश पर, किसी भी उत्पाद पर, किसी भी दर से और अनिश्चित समय के लिए। लेकिन IEEPA कानून ऐसा कोई स्पष्ट अधिकार नहीं देता। बिना कांग्रेस की स्पष्ट मंजूरी के ऐसा नहीं किया जा सकता।"
फैसले की मुख्य बातें
- 6-3 बहुमत: चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स के नेतृत्व में तीन उदारवादी जजों और कुछ कंजर्वेटिव जजों (एमी कोनी बैरेट, नील गोरसच) ने बहुमत में शामिल होकर ट्रंप के खिलाफ फैसला दिया।
- IEEPA का दुरुपयोग: यह 1977 का कानून राष्ट्रीय आपातकाल में विदेशी खतरों से निपटने के लिए बनाया गया था। इसमें "रगुलेट इम्पोर्टेशन" शब्द है, लेकिन टैरिफ लगाने का स्पष्ट उल्लेख नहीं। कोर्ट ने कहा कि आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल कर सामान्य व्यापार नीति नहीं बनाई जा सकती।
- ट्रंप की प्रतिक्रिया: ट्रंप ने फैसले को "डिसग्रेस" (शर्मनाक) बताया। उन्होंने कहा कि यह उनके आर्थिक एजेंडे पर हमला है और वे अन्य कानूनों के तहत टैरिफ दोबारा लगाने की कोशिश करेंगे।
- असहमति: जस्टिस क्लेरेंस थॉमस, सैमुअल अलिटो और ब्रेट कवानॉ ने असहमति जताई। कवानॉ ने लिखा कि टैरिफ नीति सही हो या गलत, लेकिन यह कानूनी है।
आर्थिक प्रभाव और रिफंड की संभावना अमेरिकी सरकार ने 2025 से अब तक IEEPA के तहत लगभग 135-175 अरब डॉलर (कुछ अनुमानों में 200 अरब तक) टैरिफ इकट्ठा किए हैं। कोर्ट के फैसले के बाद आयातकों को रिफंड मिलने की उम्मीद है। हालांकि फैसले में रिफंड की प्रक्रिया पर स्पष्ट निर्देश नहीं दिए गए हैं।
- कंपनियां अब यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में केस दाखिल कर रिफंड मांग सकती हैं।
- अनुमान है कि रिफंड प्रक्रिया जटिल होगी और खजाने पर भारी बोझ पड़ेगा।
- अमेरिकी उपभोक्ताओं पर टैरिफ के कारण बढ़ी कीमतें अब कम हो सकती हैं, लेकिन वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता बढ़ गई है।
वैश्विक प्रभाव: भारत और अन्य देशों पर क्या असर? ट्रंप ने टैरिफ को विदेश नीति का हथियार बनाया था। भारत, चीन, मैक्सिको जैसे देशों पर लगे टैरिफ से अमेरिकी आयात महंगा हुआ था। इस फैसले से:
- भारत जैसे देशों के निर्यातकों को राहत मिल सकती है।
- वैश्विक व्यापार युद्ध की आशंका कम हुई है।
- ट्रंप की "अमेरिका फर्स्ट" नीति को बड़ा झटका लगा, क्योंकि टैरिफ उनकी मुख्य हथियार थे।
ट्रंप के एजेंडे पर क्या असर? यह ट्रंप के दूसरे कार्यकाल का पहला बड़ा सुप्रीम कोर्ट झटका है। कोर्ट ने पहले कई मुद्दों पर ट्रंप का साथ दिया था, लेकिन यहां संविधान की मूल भावना—कांग्रेस की टैक्सेशन शक्ति—को प्राथमिकता दी गई। व्हाइट हाउस ने कहा है कि वे अन्य कानूनों (जैसे सेक्शन 232 या 301) के तहत टैरिफ दोबारा लगाने की कोशिश करेंगे, लेकिन वे ज्यादा सीमित और प्रक्रिया-आधारित होंगे।
यह फैसला अमेरिकी लोकतंत्र की शक्ति पृथक्करण की जीत है। ट्रंप की आक्रामक व्यापार नीति अब कानूनी जांच के दायरे में आएगी। दुनिया भर के व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है, क्योंकि अनियंत्रित टैरिफ से मुद्रास्फीति और व्यापार युद्ध बढ़ सकते थे।
क्या ट्रंप कांग्रेस से मंजूरी लेकर टैरिफ दोबारा लगाएंगे? या यह उनके एजेंडे का अंत होगा? आने वाले दिनों में जवाब मिलेगा। लेकिन आज का फैसला इतिहास में दर्ज हो चुका है—राष्ट्रपति टैरिफ का राजा नहीं हैं!
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 20th Feb 2026