- Friday World-24 May 2026
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक, स्ट्रीट ऑफ होर्मुज, एक बार फिर सुर्खियों में है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) नेवी ने एक बड़ा बयान जारी करते हुए दावा किया है कि पिछले 24 घंटों में 25 जहाजों ने इस रणनीतिक जलडमरूमध्य से सफलतापूर्वक पारगमन किया। इन जहाजों में ऑयल टैंकर, कंटेनर शिप और अन्य व्यावसायिक पोत शामिल थे, जो ईरान की पूर्व अनुमति और सुरक्षा समन्वय के बाद गुजरे।
यह दावा ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है। फरवरी 2026 में अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज को प्रभावी रूप से बंद कर दिया था, लेकिन अब IRGC अपनी नियंत्रण क्षमता का प्रदर्शन कर रही है।
स्ट्रीट ऑफ होर्मुज: विश्व अर्थव्यवस्था की धमनी
स्ट्रीट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। यह संकरी जलडमरूमध्य लगभग 21 मील (33 किलोमीटर) चौड़ा है, लेकिन नौवहन के लिए उपलब्ध चैनल और भी संकरे हैं। दुनिया का लगभग 20-25% तेल और प्राकृतिक गैस का व्यापार इसी रास्ते से होता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, UAE, ईरान और कतर जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों के लिए यह एकमात्र समुद्री निकास है।
किसी भी बड़े संकट में होर्मुज का बंद होना वैश्विक तेल कीमतों को आसमान छूने पर मजबूर कर देता है। 2026 के संकट ने पहले ही विश्व बाजार को हिला दिया है। IRGC का यह दावा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाता है कि ईरान अभी भी इस क्षेत्र पर अपना नियंत्रण बनाए हुए है, भले ही अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर ब्लॉकेड लगा रखा हो।
IRGC का बयान: पूर्ण नियंत्रण का संदेश
IRGC नेवी ने शनिवार को जारी अपने आधिकारिक बयान में कहा कि इन 25 जहाजों को पूर्व अनुमति के बाद और IRGC की सुरक्षा छत्रछाया में गुजरने की इजाजत दी गई। बयान में जोर दिया गया कि क्षेत्र में अमेरिकी उपस्थिति के बावजूद ईरानी नौसेना समुद्री मार्गों पर नजर रखे हुए है और वैश्विक व्यापार को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रही है।
यह दावा IRGC की नियमित अपडेट्स का हिस्सा लगता है, जिसमें वे अपनी क्षमता प्रदर्शित कर रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स में संख्या 26 या 31 तक बताई गई है, लेकिन मूल संदेश एक ही है – बिना ईरान की मंजूरी के कोई जहाज नहीं गुजर सकता।
कैसे शुरू हुआ संकट? फरवरी 2026 का टर्निंग पॉइंट
सब कुछ फरवरी 2026 में बदल गया। अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त सैन्य कार्रवाई की, जिसमें ईरानी सैन्य ठिकानों, कमांड सेंटर्स और परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाया गया। जवाब में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की घोषणा कर दी। IRGC ने चेतावनी जारी की कि अमेरिका, इजरायल या उनके सहयोगी देशों के जहाजों को गुजरने की अनुमति नहीं होगी।
इसके परिणामस्वरूप दैनिक 50-60 जहाजों का ट्रैफिक लगभग शून्य हो गया। IRGC ने कुछ जहाजों पर हमले, बोर्डिंग और समुद्री माइन्स बिछाने जैसे कदम उठाए। अमेरिका ने जवाब में ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक ब्लॉकेड लगा दिया, जिससे ईरान की तेल निर्यात क्षमता बुरी तरह प्रभावित हुई।
अप्रैल 2026 में एक नाजुक सीजफायर हुआ, लेकिन होर्मुज पर तनाव बरकरार रहा। ईरान अब "अनुमति और टोल" व्यवस्था लागू करने की कोशिश कर रहा है, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी मुक्त नौवहन की मांग कर रहे हैं।
वैश्विक प्रभाव: तेल कीमतें, अर्थव्यवस्था और भारत
इस संकट का सबसे बड़ा असर ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। तेल की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे मुद्रास्फीति का खतरा बढ़ गया। भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए यह गंभीर चिंता का विषय है। भारत अपना बड़ा हिस्सा तेल होर्मुज के रास्ते ही आयात करता है।
- आर्थिक नुकसान: बीमा दरें बढ़ गई हैं, शिपिंग कंपनियां वैकल्पिक (लेकिन लंबे और महंगे) रास्ते चुन रही हैं।
- भू-राजनीतिक खेल: चीन और रूस जैसे देश ईरान के साथ खड़े दिख रहे हैं, जबकि पश्चिमी देशों का दबाव जारी है।
- क्षेत्रीय सुरक्षा: खाड़ी के अन्य देश (UAE, सऊदी) भी चिंतित हैं, क्योंकि उनका तेल निर्यात इसी रास्ते पर निर्भर है।
IRGC की रणनीति: नियंत्रण और प्रतिरोध
IRGC नेवी ईरान की सैन्य शक्ति का मजबूत स्तंभ है। इसमें स्पीड बोट्स, मिसाइलें, ड्रोन और सबमरीन्स शामिल हैं जो असममित युद्ध (asymmetric warfare) में माहिर हैं। छोटे-छोटे हमलों, माइन्स और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर से वे बड़े नौसैनिक बेड़े को भी चुनौती दे सकते हैं।
यह दावा IRGC को दो संदेश देता है:
1. हम अभी भी यहां मालिक हैं।
2. बिना हमारी अनुमति के कोई व्यापार नहीं हो सकता।
ईरान "ट्रांजिट फीस" या "सुरक्षा इंश्योरेंस" के रूप में शुल्क वसूलने की भी कोशिश कर रहा है, खासकर चीन और रूस जैसे सहयोगी देशों से।
क्या है आगे का रास्ता?
वर्तमान में अमेरिका-ईरान के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत चल रही है (पाकिस्तान जैसे माध्यमों के जरिए), लेकिन कोई ठोस समझौता नहीं हुआ। ईरान पूर्ण संप्रभुता की मान्यता और ब्लॉकेड हटाने की मांग कर रहा है, जबकि अमेरिका मुक्त नौवहन चाहता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर संकट लंबा खिंचा तो वैश्विक मंदी का खतरा बढ़ जाएगा। साथ ही, कोई भी गलतफहमी बड़े संघर्ष को जन्म दे सकती है।
शक्ति प्रदर्शन या शांति का संदेश?
IRGC का 25 जहाजों वाला दावा एक तरफ अपनी ताकत दिखाता है, तो दूसरी तरफ यह संकेत भी देता है कि ईरान नियंत्रित तरीके से व्यापार जारी रखना चाहता है – बशर्ते उसकी शर्तें मानी जाएं।
स्ट्रीट ऑफ होर्मुज सिर्फ एक जलडमरूमध्य नहीं, बल्कि विश्व शक्ति संतुलन का प्रतीक बन चुका है। भविष्य में क्या होता है, यह निर्भर करेगा कि कूटनीति जीतती है या टकराव। फिलहाल, IRGC का नियंत्रण जारी है और दुनिया इस संकरे रास्ते की ओर सांस रोके देख रही है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-24 May 2026