- Friday World 24 May 2026
कीव, 24 मई 2026– रूस ने यूक्रेन पर एक बार फिर भारी हमले किए हैं। शनिवार-रविवार की दरमियानी रात सैकड़ों ड्रोन और दर्जनों मिसाइलें, जिनमें घातक हाइपरसोनिक 'ओरेशनिक' मिसाइलें भी शामिल हैं, यूक्रेनी आकाश में गूँज उठीं। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने इसे "बड़े पैमाने का हमला" बताया, जिसमें राजधानी कीव मुख्य निशाना था, लेकिन पूरे देश के कई इलाकों में धमाकों की भयानक आवाजें गूँजीं।
इस हमले में अब तक कम से कम 83 लोग घायल हो चुके हैं, जबकि कीव और आसपास के इलाकों में चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। रिहायशी इमारतें, स्कूल और नागरिक बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुँचा है। कई इलाकों में बिजली और पानी की आपूर्ति ठप हो गई है।
रूस का दावा: जवाबी कार्रवाई
रूस के रक्षा मंत्रालय ने हमलों की जिम्मेदारी ली और कहा कि यह यूक्रेन की तरफ से "नागरिक इंफ्रास्ट्रक्चर" पर किए गए हमलों का जवाब है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को स्टारोबिल्स्क शहर में एक छात्रावास पर हुए हमले का हवाला दिया, जिसमें 21 लोगों की मौत हो गई थी। पुतिन ने इसे "बार्बेरिक आतंकवादी कार्रवाई" करार दिया।
यूक्रेन की सशस्त्र सेनाओं के जनरल स्टाफ ने स्वीकार किया कि शुक्रवार रात स्टारोबिल्स्क के पास एक हमला किया गया था, लेकिन दावा किया कि निशाना रूसी सेना की एक विशेष सैन्य इकाई थी, न कि नागरिक इमारत।
हाइपरसोनिक 'ओरेशनिक' – मौत की बेजोड़ रफ्तार
इस हमले को खास बनाने वाली बात 'ओरेशनिक' हाइपरसोनिक मिसाइल का इस्तेमाल है। रूस का दावा है कि यह मिसाइल आवाज की रफ्तार से 10 गुना से भी ज्यादा तेज़ (मैक 10+) चलती है। इतनी तेज रफ्तार और अनोखी उड़ान पथ के कारण इसे रोक पाना लगभग असंभव माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मिसाइल पारंपरिक एंटी-मिसाइल सिस्टम को चकमा देने में सक्षम है।
ज़ेलेंस्की ने कुछ दिन पहले ही चेतावनी दी थी कि रूस बड़े हमले की तैयारी कर रहा है और हो सकता है कि 'ओरेशनिक' मिसाइल का इस्तेमाल किया जाए। उनकी चेतावनी सही साबित हुई।
मैदान पर स्थिति
यूक्रेन के विभिन्न शहरों और क्षेत्रों से धमाकों और आग की लपटों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। कीव में रात भर एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय रहा, लेकिन हाइपरसोनिक मिसाइलों के सामने पारंपरिक बचाव नाकाफी साबित हुआ। कई इलाकों में बचाव दल अभी भी मलबे में फंसे लोगों को निकालने की कोशिश कर रहे हैं।
यूक्रेनी अधिकारियों ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे आश्रय स्थलों में रहें और अनावश्यक रूप से बाहर न निकलें। अस्पतालों में आपात स्थिति घोषित कर दी गई है।
युद्ध का नया अध्याय
यह हमला रूस-यूक्रेन युद्ध के अब तक के सबसे तीव्र चरणों में से एक है। युद्ध शुरू हुए चार साल से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच कोई ठोस शांति वार्ता नहीं हो पाई है। रूस का कहना है कि वह अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लड़ रहा है, जबकि यूक्रेन और पश्चिमी देश इसे बिना उकसावे की आक्रामकता मानते हैं।
पिछले कुछ महीनों में यूक्रेन ने रूसी क्षेत्रों में गहरे हमले किए हैं, जिनमें ड्रोन हमले और मिसाइल हमले शामिल हैं। रूस इन्हें "नागरिकों पर हमला" बता रहा है, जबकि यूक्रेन इन्हें सैन्य लक्ष्यों पर कार्रवाई बताता है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएँ
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने दोनों पक्षों से तुरंत हिंसा रोकने की अपील की है। अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस ने रूस की निंदा की है और यूक्रेन के साथ एकजुटता जताई है। वहीं चीन और भारत जैसे देशों ने संयम बरतने की सलाह दी है।
यूरोपीय संघ ने रूस पर नए प्रतिबंध लगाने की चर्चा शुरू कर दी है। NATO के महासचिव ने कहा, "यह हमला यूक्रेन की संप्रभुता पर हमला है और पूरे यूरोप की सुरक्षा को चुनौती है।"
मानवीय संकट गहराता जा रहा है
युद्ध के कारण लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं। ऊर्जा संकट, खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी असर पड़ा है। सर्दियों में पहले भी यूक्रेन में बिजली की कमी से लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। अब नए हमलों से बुनियादी ढांचे को और नुकसान होने की आशंका है।
मानवाधिकार संगठन इस हमले में नागरिकों की मौत और घायलों पर चिंता जता रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) पहले ही दोनों पक्षों के कुछ नेताओं और कमांडरों के खिलाफ वारंट जारी कर चुका है।
भविष्य की संभावनाएँ
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस की हाइपरसोनिक मिसाइलों का इस्तेमाल युद्ध की प्रकृति बदल रहा है। पारंपरिक रक्षा प्रणालियाँ इनके सामने कमजोर पड़ रही हैं। यूक्रेन अब पश्चिमी देशों से उन्नत एंटी-मिसाइल सिस्टम और हवाई सुरक्षा की मांग तेज करेगा।
दूसरी ओर, रूस अपने सैन्य उत्पादन को बढ़ा रहा है और लंबे समय तक युद्ध जारी रखने की तैयारी दिखा रहा है।
यह हमला सिर्फ सैन्य टकराव नहीं, बल्कि मानवीय त्रासदी का नया अध्याय है। दोनों देशों के आम नागरिक इस युद्ध की भारी कीमत चुका रहे हैं। कीव की सड़कें, स्टारोबिल्स्क का छात्रावास, और हजारों परिवारों की चीखें याद दिलाती हैं कि युद्ध में कोई विजेता नहीं होता – सिर्फ हार और विनाश होता है।
शांति वार्ता की मांग हर तरफ से उठ रही है, लेकिन विश्वास की कमी और जिद दोनों पक्षों को आगे बढ़ने से रोक रही है। क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस चक्र को तोड़ पाएगा? या युद्ध और गहराता जाएगा? समय ही बताएगा।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 24 May 2026