-Friday World-22 May 2026
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग पर एक नया अध्याय लिखा जा रहा है। ईरान अब होर्मुज जलडमरू (Strait of Hormuz) को लेकर न सिर्फ बातचीत कर रहा है, बल्कि उसे स्थायी रूप से नियंत्रित करने की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है। ओमान के साथ स्थायी टोल प्रणाली पर चर्चा और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के फुजैरा बंदरगाह के आसपास के क्षेत्रों पर दावा—ये दोनों घटनाएं वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, तेल व्यापार और क्षेत्रीय संतुलन को गहराई से प्रभावित करने वाली हैं।
होर्मुज: दुनिया का तेल गला
होर्मुज जलडमरू पृथ्वी पर सबसे संवेदनशील जलमार्गों में से एक है। इसकी चौड़ाई सबसे कम जगह पर महज 21 मील (लगभग 34 किलोमीटर) है। इसके एक तरफ ईरान और दूसरी तरफ ओमान। दुनिया का करीब 20-21% तेल इसी रास्ते से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, UAE और ईरान जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों का निर्यात इसी जलडमरू पर निर्भर है।
2026 की शुरुआत में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच हुए संघर्ष के बाद स्थिति और जटिल हो गई। ईरान ने इस दौरान जलमार्ग पर नियंत्रण सख्त किया, कुछ जहाजों से भारी टोल वसूला और कई जहाजों की आवाजाही रोक दी। अब ईरान इसे संस्थागत बनाने जा रहा है।
ईरान के फ्रांस में राजदूत मोहम्मद अमीन-नेजाद ने हाल ही में ब्लूमबर्ग को दिए इंटरव्यू में साफ कहा कि ईरान और ओमान दोनों को सुरक्षा सेवाएं प्रदान करने और नेविगेशन प्रबंधन के लिए अपने संसाधनों को एकजुट करना चाहिए। दोनों देश मिलकर स्थायी टोल सिस्टम विकसित करने की दिशा में बातचीत कर रहे हैं।
यह टोल सिस्टम सिर्फ पैसे कमाने का जरिया नहीं, बल्कि ईरान की रणनीतिक ताकत को वैधता देने का प्रयास है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ जहाजों से 10 लाख से 20 लाख डॉलर तक का टोल लिया जा रहा है। ईरान इसे नियमित और कानूनी रूप देना चाहता है।
फुजैरा पर ईरान का दावा: होर्मुज का विकल्प बंद?
फुजैरा UAE का पूर्वी बंदरगाह है जो होर्मुज जलडमरू से बाहर, गल्फ ऑफ ओमान में स्थित है। यह UAE के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि हबशान-फुजैरा पाइपलाइन के जरिए तेल को होर्मुज से बचाकर सीधे यहां लाया जाता है। इस पाइपलाइन की क्षमता 18 लाख बैरल प्रतिदिन तक है।
ईरान ने हाल ही में एक नक्शा जारी किया जिसमें फुजैरा के दक्षिणी पानी सहित UAE तट के बड़े हिस्से को अपने नियंत्रण वाले क्षेत्र में दिखाया गया है। ईरान की नई "पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी" ने घोषणा की कि इस क्षेत्र से होकर गुजरने वाले जहाजों को उसके साथ समन्वय और अनुमति लेनी होगी।
यह दावा सिर्फ कागजी नहीं है। मई 2026 में ईरानी ड्रोन हमलों में फुजैरा ऑयल इंडस्ट्री जोन में आग लगी, कुछ लोग घायल हुए। हालांकि ईरान ने इसे "योजनाबद्ध हमला" नहीं बताया, लेकिन संदेश साफ था—फुजैरा अब सुरक्षित विकल्प नहीं रहा।
क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव
1. तेल की कीमतें और वैश्विक अर्थव्यवस्था:
होर्मुज पर टोल और फुजैरा पर दबाव से तेल आपूर्ति बाधित होने का खतरा है। इससे कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया जैसे बड़े आयातक देश सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।
2. ओमान की भूमिका:
ओमान हमेशा से क्षेत्र में मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है। लेकिन ईरान के साथ टोल सिस्टम पर सहयोग उसे मुश्किल स्थिति में डाल सकता है। ओमान अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ भी अच्छे संबंध रखता है। अगर वह ईरान के साथ जाता है तो उस पर दबाव बढ़ेगा।
3. UAE और GCC देशों की चिंता:
UAE पहले ही होर्मुज बाईपास पाइपलाइन और पूर्वी बंदरगाहों (फुजैरा और खोर फक्कान) पर निर्भर है। ईरान के विस्तारित नियंत्रण का दावा UAE की संप्रभुता पर सीधा हमला है। GCC देशों में एकजुटता बढ़ सकती है।
4. अमेरिका और ट्रंप की प्रतिक्रिया:
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टोल सिस्टम को सख्ती से खारिज किया है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका होर्मुज पर नियंत्रण रखता है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इसे "अवैध" बताया है।
ऐतिहासिक संदर्भ
ईरान लंबे समय से होर्मुज को अपनी "आंतरिक जल सीमा" मानता आया है। 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध के दौरान यहां टैंकर युद्ध हुआ था। 2019-2021 के बीच ईरान ने कई विदेशी टैंकरों को जब्त किया। अब 2026 के संघर्ष के बाद वह इसे स्थायी बनाने की कोशिश कर रहा है।
ईरान की रणनीति स्पष्ट है—अगर दुनिया उसे आर्थिक दबाव में रखती है तो वह ऊर्जा मार्गों को हथियार बनाएगा। टोल सिस्टम से ईरान को न सिर्फ राजस्व मिलेगा, बल्कि क्षेत्रीय प्रभाव भी बढ़ेगा।
संभावित परिदृश्य
- सबसे खराब स्थिति: यदि ईरान और ओमान मिलकर टोल लागू करते हैं और फुजैरा क्षेत्र को प्रभावित करते हैं, तो वैश्विक तेल आपूर्ति 15-20% तक प्रभावित हो सकती है। कीमतें 150-200 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं।
- मध्य मार्ग: कूटनीतिक बातचीत से सीमित टोल या सुरक्षा शुल्क तय हो सकता है।
- सबसे अच्छी स्थिति: अंतरराष्ट्रीय दबाव और अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी से ईरान पीछे हटे।
नई भू-राजनीतिक वास्तविकता
ईरान का होर्मुज पर स्थायी टोल और फुजैरा क्षेत्र पर नियंत्रण का दावा सिर्फ एक स्थानीय विवाद नहीं है। यह 21वीं सदी की ऊर्जा भू-राजनीति का केंद्र है। दुनिया अब देख रही है कि क्या पश्चिमी शक्तियां, GCC देश और एशियाई अर्थव्यवस्थाएं मिलकर इस चुनौती का सामना कर पाती हैं या ईरान अपनी शर्तों पर नया सामान्य (new normal) थोप देगा।
यह संघर्ष सिर्फ तेल और पैसे का नहीं—यह नियंत्रण, संप्रभुता और वैश्विक व्यापार की आजादी का है। आने वाले दिनों में होर्मुज की लहरें न सिर्फ पानी में, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था में उथल-पुथल मचाने वाली हैं।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-22 May 2026