ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने एक बार फिर दुनिया को भरोसा दिलाया है कि उनका देश परमाणु हथियार हासिल करने की कोई कोशिश नहीं कर रहा है। इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी (IRNA) के मुताबिक, राष्ट्रपति ने अपने टेलीग्राम पोस्ट में दिवंगत सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई के फतवे का हवाला देते हुए कहा कि ईरान न केवल परमाणु हथियारों से दूर रहना चाहता है, बल्कि इसकी पुष्टि के लिए कोई भी सत्यापन प्रक्रिया स्वीकार करने को तैयार है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान के बीच अप्रत्यक्ष परमाणु वार्ता तेज हो गई है और क्षेत्रीय तनाव चरम पर है।
ईरानी राष्ट्रपति का ऐतिहासिक संदेश
राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामेनेई ने अपनी शहादत से पहले घोषणा की थी और हम अब भी इसे दोहराते हैं कि हम दुनिया को यह भरोसा दिलाने के लिए तैयार हैं कि हम परमाणु हथियार नहीं चाहते।” उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान क्षेत्रीय अस्थिरता नहीं चाहता, बल्कि इसराइली शासन ही इस इलाके में अशांति फैलाने का जिम्मेदार है।
यह बयान महज एक साधारण घोषणा नहीं है। यह ईरान की लंबे समय से चली आ रही नीति का प्रतिबिंब है, जिसमें खामेनेई का फतवा (धार्मिक आदेश) परमाणु हथियारों को इस्लामी सिद्धांतों के खिलाफ मानता है। राष्ट्रपति ने वार्ताकारों को निर्देश दिया कि वे देश की गरिमा और सम्मान पर कोई समझौता न करें, लेकिन शांतिपूर्ण संवाद का रास्ता हमेशा खुला रखें।
ईरान का परमाणु कार्यक्रम और वैश्विक संदेह
ईरान का परमाणु कार्यक्रम पिछले दो दशकों से अंतरराष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बिंदु रहा है। 2015 में JCPOA (Joint Comprehensive Plan of Action) समझौते के तहत ईरान ने अपने कार्यक्रम पर कुछ प्रतिबंध स्वीकार किए थे, जिसके बदले प्रतिबंध हटाए गए थे। लेकिन 2018 में अमेरिका (तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप) के एकतरफा निकलने के बाद तनाव बढ़ गया। ईरान ने फिर यूरेनियम संवर्धन बढ़ाया, लेकिन बार-बार कहा कि यह शांतिपूर्ण उद्देश्यों — चिकित्सा, कृषि और ऊर्जा — के लिए है।
2026 में स्थिति और जटिल हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फिर सत्ता में हैं और विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिए हैं कि ट्रंप जल्द ही ईरान के साथ बातचीत पर कोई बड़ा ऐलान कर सकते हैं। ईरान ने हमेशा दावा किया है कि उसका कार्यक्रम पारदर्शी है और IAEA (International Atomic Energy Agency) के निरीक्षकों को पहुंच दी गई है। फिर भी, इजराइल और कुछ पश्चिमी देश इसे हथियार कार्यक्रम मानते हैं।
पेज़ेश्कियान सरकार इस संदेह को दूर करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि ईरान “क्षेत्रीय अस्थिरता” नहीं फैलाना चाहता, बल्कि पड़ोसी देशों के साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर जोर देता है।
खामेनेई का फतवा: धार्मिक और रणनीतिक आधार
आयतुल्लाह खामेनेई का फतवा ईरान की परमाणु नीति की रीढ़ है। उन्होंने परमाणु हथियारों को मानवता के खिलाफ मानते हुए इसे प्रतिबंधित किया था। राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान ने इसे दोहराते हुए कहा कि सुप्रीम लीडर झूठ नहीं बोल सकते। यह बयान ईरान के अंदरूनी राजनीतिक एकजुटता को भी दर्शाता है — जहां सुधारवादी और रूढ़िवादी दोनों परमाणु हथियारों के खिलाफ खड़े हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फतवा ईरान को नैतिक उच्चता प्रदान करता है। जब भी पश्चिमी देश आरोप लगाते हैं, ईरान इसे धार्मिक और नैतिक आधार पर खारिज कर देता है।
वर्तमान भू-राजनीतिक संदर्भ
2026 में मध्य पूर्व की स्थिति बेहद नाजुक है। इजराइल-ईरान के बीच छिटपुट टकराव, गाजा और लेबनान में जारी संघर्ष, और अमेरिका की सैन्य उपस्थिति ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर रखा है। राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान ने इजराइल को क्षेत्र की अस्थिरता का मुख्य कारण बताया।
ट्रंप प्रशासन की “मैक्सिमम प्रेशर” नीति फिर सक्रिय हो रही है। अमेरिका ईरान से पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण और क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों (जैसे हिजबुल्लाह, हमास) से दूरी की मांग कर रहा है। ईरान का जवाब साफ है — हम संवाद के लिए तैयार हैं, लेकिन अपनी संप्रभुता और शांतिपूर्ण अधिकारों पर कोई समझौता नहीं।
राष्ट्रपति ने कहा, “हमारी वार्ता टीम देश की गरिमा और सम्मान की रक्षा करेगी।” यह बयान घरेलू स्तर पर भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि ईरानी जनता आर्थिक प्रतिबंधों से थक चुकी है और शांतिपूर्ण समाधान चाहती है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं और प्रभाव
इस बयान पर विश्व स्तर पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं आई हैं। पश्चिमी देशों ने इसे सकारात्मक कदम माना है, लेकिन सत्यापन की मांग दोहराई है। इजराइल ने इसे “धोखा” करार दिया है। चीन और रूस जैसे देशों ने ईरान के शांतिपूर्ण कार्यक्रम का समर्थन किया है।
भारत के लिए यह विकास महत्वपूर्ण है। भारत ईरान से तेल आयात करता रहा है और चाबहार बंदरगाह जैसे प्रोजेक्ट्स में निवेश किया है। स्थिर मध्य पूर्व भारत की ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय हितों के लिए जरूरी है।
ईरान की चुनौतियां और संभावनाएं
ईरान की अर्थव्यवस्था प्रतिबंधों के कारण दबाव में है। मुद्रास्फीति, मुद्रा अवमूल्यन और युवाओं की बेरोजगारी बड़े मुद्दे हैं। राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान सुधारवादी छवि वाले नेता हैं, जो संवाद और आर्थिक राहत पर जोर देते हैं।
परमाणु वार्ता सफल हुई तो ईरान को राहत मिल सकती है, लेकिन विफलता से नया संघर्ष शुरू हो सकता है। ईरान का बल्कि मजबूत मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव इसे मजबूत स्थिति में रखता है।
शांति की राह: संवाद या टकराव?
ईरान का यह बयान संवाद का निमंत्रण है। दुनिया को अब फैसला करना है — क्या वह ईरान के शब्दों पर भरोसा करेगा या पुराने संदेहों में उलझा रहेगा?
राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान का संदेश स्पष्ट है: ईरान परमाणु हथियार नहीं चाहता, लेकिन अपनी गरिमा, संप्रभुता और शांतिपूर्ण विकास के अधिकार से कभी पीछे नहीं हटेगा।
यह बयान न केवल परमाणु मुद्दे पर है, बल्कि बड़े पैमाने पर क्षेत्रीय शांति, आर्थिक सहयोग और कूटनीतिक समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अगर अमेरिका और अन्य देश इसे सकारात्मक रूप से लें, तो मध्य पूर्व में नया अध्याय शुरू हो सकता है।
ईरान का परमाणु कार्यक्रम विवादास्पद रहा है, लेकिन राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान का हालिया बयान उम्मीद की किरण दिखाता है। अब समय है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय सत्यापन और संवाद के माध्यम से विश्वास निर्माण करे। शांति की राह चुनौतीपूर्ण है, लेकिन असंभव नहीं। ईरान तैयार है — बाकी दुनिया पर निर्भर करता है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 24 May 2026