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Saturday, 14 February 2026

अमेरिका का बड़ा सैन्य दांव: दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर USS जेराल्ड आर. फोर्ड मिडिल ईस्ट रवाना, ईरान पर दबाव बढ़ाने की तैयारी

अमेरिका का बड़ा सैन्य दांव: दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर USS जेराल्ड आर. फोर्ड मिडिल ईस्ट रवाना, ईरान पर दबाव बढ़ाने की तैयारी
-Friday world 14th Feb 2026
मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका ने अपना सबसे शक्तिशाली और दुनिया का सबसे बड़ा न्यूक्लियर-पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर USS जेराल्ड आर. फोर्ड (CVN-78) को कैरेबियन सागर से मिडिल ईस्ट भेज दिया है। यह कदम ईरान के साथ परमाणु समझौते पर चल रही बातचीत के बीच उठाया गया है, जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि अगर डील नहीं हुई तो ईरान के लिए स्थिति "बहुत दर्दनाक" हो सकती है। रॉयटर्स, न्यूयॉर्क टाइम्स और अन्य प्रमुख मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दो अमेरिकी अधिकारियों ने शुक्रवार को पुष्टि की कि फोर्ड अब मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ रहा है और वहां पहुंचने में करीब एक हफ्ता लगेगा।

 यह दूसरा अमेरिकी कैरियर स्ट्राइक ग्रुप है जो क्षेत्र में तैनात हो रहा है। पहले से ही USS अब्राहम लिंकन अरब सागर में मौजूद है, जिसके साथ गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स, फाइटर जेट्स और सर्विलांस एयरक्राफ्ट भी हैं। अमेरिकी नौसेना के पास कुल सिर्फ 11 एयरक्राफ्ट कैरियर हैं, इसलिए दो कैरियरों की एक साथ तैनाती बहुत बड़ी रणनीतिक चाल मानी जा रही है। 

 USS जेराल्ड आर. फोर्ड: दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे उन्नत कैरियर USS जेराल्ड आर. फोर्ड अमेरिकी नौसेना का सबसे नया और सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर है। यह फोर्ड-क्लास का पहला जहाज है, जो 100,000 टन से ज्यादा वजन का है और न्यूक्लियर रिएक्टर से चलता है। इसमें 75 से ज्यादा फाइटर जेट्स और अन्य विमान तैनात किए जा सकते हैं, जैसे: 

- F/A-18 सुपर हॉर्नेट फाइटर जेट्स

 - EA-18G ग्राउलर इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर विमान 

- E-2 हॉकआई अर्ली वॉर्निंग एयरक्राफ्ट

 इसमें एडवांस्ड रडार सिस्टम, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट और एडवांस्ड अरेस्टिंग गियर हैं, जो इसे दुनिया का सबसे घातक कैरियर बनाते हैं। फोर्ड जून 2025 से लगातार समुद्र में तैनात है – पहले यूरोप में, फिर नवंबर 2025 में अचानक कैरेबियन सागर भेजा गया, जहां यह वेनेजुएला में अमेरिकी ऑपरेशन में शामिल रहा। अब तीसरी बार अटलांटिक पार करके मिडिल ईस्ट जा रहा है। नेवी चीफ ने पहले ही इस लंबी तैनाती पर चिंता जताई थी, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने इसे मंजूरी दी है। अगर यह अप्रैल-मई तक रहता है, तो यह पोस्ट-वियतनाम युद्ध का सबसे लंबा कैरियर डिप्लॉयमेंट रिकॉर्ड तोड़ सकता है। 

 ईरान पर दबाव: ट्रंप की 4 शर्तें और ईरान का जवाब ट्रंप ने फरवरी 2026 में साफ कहा कि ईरान के साथ डील अगले एक महीने में हो सकती है, वरना स्थिति "बहुत गंभीर और पीड़ादायक" होगी। अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने ईरान को 4 मुख्य शर्तें रखी हैं: 

1. यूरेनियम एनरिचमेंट पर पूर्ण प्रतिबंध

 2. पहले से एनरिच्ड यूरेनियम को हटाना

 3. लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों की संख्या सीमित करना

 4. क्षेत्रीय प्रॉक्सी दलों (जैसे हिजबुल्लाह, हूती) को मदद बंद करना ट्रंप ने कहा, 

"ईरान अब बात करने के लिए तैयार लगता है, लेकिन अगर डील नहीं हुई तो बहुत बुरा दिन आएगा।" उन्होंने ईरान में रिजीम चेंज की भी बात की और कहा कि यह "सबसे अच्छी चीज" होगी। 

ईरान ने इन शर्तों को सिरे से खारिज कर दिया। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने 8 फरवरी को कहा, "अमेरिका हमें डराकर कुछ नहीं करवा सकता। यूरेनियम एनरिचमेंट हमारी नीति का हिस्सा है और इसे किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे।" ईरान ने कहा कि कोई भी देश उसे निर्देश नहीं दे सकता और अमेरिकी सैन्य तैनाती नाकाम रहेगी। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने चेतावनी दी कि अगर हमला हुआ तो अमेरिकी बेस पर जवाबी कार्रवाई होगी। 

क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य बिल्डअप: क्या हो रहा है? 

- USS अब्राहम लिंकन जनवरी 2026 में अरब सागर पहुंचा, जहां से ईरान के कई शहरों पर स्ट्राइक रेंज में है। 

- हाल के हफ्तों में कई गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स, फाइटर जेट्स और सर्विलांस प्लेन भेजे गए।

 - कतर के अल-उदीद बेस (अमेरिका का सबसे बड़ा मिडिल ईस्ट बेस) पर पैट्रियट मिसाइल सिस्टम को ट्रकों पर मोबाइल लॉन्चर में तैनात किया गया, जिससे तेजी से पोजिशन बदलना आसान हो गया।

 - सैटेलाइट इमेजरी से पता चला कि फरवरी में बेस पर विमानों और मिसाइलों की संख्या बढ़ी है।

 अमेरिका के मिडिल ईस्ट में इराक, जॉर्डन, कुवैत, सऊदी अरब, कतर, बहरीन, यूएई, ओमान और तुर्की में कई बेस हैं। यह बिल्डअप ईरान के परमाणु ठिकानों, सैन्य अड्डों और कमांड सेंटर्स पर समुद्र और हवा से हमले की क्षमता बढ़ा रहा है। 

 आगे क्या? डील या युद्ध? ट्रंप ने कहा कि ईरान अब डील चाहता है, लेकिन अगर नहीं हुआ तो "ट्रॉमेटिक" परिणाम होंगे। ईरान ने जवाब दिया कि डरावनी रणनीति काम नहीं करेगी। ओमान में अप्रत्यक्ष बातचीत हुई, लेकिन कोई ब्रेकथ्रू नहीं। इजरायल के पीएम नेतन्याहू ने ट्रंप से मुलाकात में मिसाइल और प्रॉक्सी मुद्दों को शामिल करने की मांग की। 

यह तैनाती सिर्फ दिखावा नहीं, बल्कि रणनीतिक दबाव है। अगर डील हुई तो शांति, नहीं तो क्षेत्र में बड़ा संघर्ष संभव है। दुनिया की नजरें अब ट्रंप और ईरान के अगले कदम पर टिकी हैं। 

Sajjadali Nayani ✍
 Friday world 14th Feb 2026