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Sunday, 22 February 2026

February 22, 2026

दक्षिण अफ्रीका की धमाकेदार जीत: भारत की 76 रनों से हार, टी-20 विश्व कप 2026 में भारत की पहली हार!

दक्षिण अफ्रीका की धमाकेदार जीत: भारत की 76 रनों से हार, टी-20 विश्व कप 2026 में भारत की पहली हार!
-Friday 🌎 World 22 February 2026
टी-20 विश्व कप 2026 के सुपर-8 स्टेज में एक ऐसा मुकाबला हुआ, जिसने पूरी क्रिकेट दुनिया को हिला दिया। दक्षिण अफ्रीका ने भारत को 76 रनों से करारी शिकस्त दी – यह भारत की इस टूर्नामेंट में पहली हार थी और साथ ही उनकी 12 मैचों की लगातार जीत का सिलसिला भी टूट गया। नरेंद्र मोदी स्टेडियम, अहमदाबाद में खेले गए इस हाई-वोल्टेज मैच में प्रोटियाज ने हर विभाग में भारत पर भारी पड़कर अपनी ताकत का लोहा मनवाया। 

टॉस और दक्षिण अफ्रीका की मजबूत शुरुआत दक्षिण अफ्रीका के कप्तान एडेन मार्करम ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। लेकिन शुरुआत भारत के तेज गेंदबाजों ने शानदार की। जसप्रीत बुमराह और अर्शदीप सिंह ने कसी हुई गेंदबाजी से प्रोटियाज को शुरुआती झटके दिए। क्विंटन डी कॉक को बुमराह ने बोल्ड किया, मार्करम को अर्शदीप ने पवेलियन भेजा, और रिकल्टन भी ज्यादा देर नहीं टिक सके। 4 ओवर में 20/3 – दक्षिण अफ्रीका दबाव में दिख रही थी। 

मिलर-ब्रेविस की तूफानी पार्टनरशिप ने पलटा मैच यहाँ से मैच का रुख बदल गया। डेविड मिलर और युवा डेवाल्ड ब्रेविस ने काउंटर-अटैक शुरू किया। दोनों के बीच चौथे विकेट के लिए 97 रनों की जबरदस्त साझेदारी हुई (51 गेंदों में)। ब्रेविस ने 29 गेंदों में 45 रन ठोके, जिसमें आक्रामक शॉट्स शामिल थे। मिलर ने 35 गेंदों में 63 रन बनाए – 7 चौके और 3 छक्कों की मदद से। उनकी पारी ने दक्षिण अफ्रीका को मजबूत आधार दिया। 

ट्रिस्टन स्टब्स ने भी अंत में नाबाद 44 रन (24 गेंदें) बनाकर स्कोर को 187/7 तक पहुँचाया। बुमराह सबसे सफल गेंदबाज रहे – 4 ओवर में 15 रन देकर 3 विकेट। अर्शदीप ने 2, जबकि शिवम दुबे और वरुण चक्रवर्ती को 1-1 विकेट मिला। 188 रनों का लक्ष्य भारत के लिए चुनौतीपूर्ण था, खासकर धीमी पिच पर। 

भारत की बल्लेबाजी धराशायी: 

शुरुआत से अंत तक संघर्ष** चेज में भारत की शुरुआत बेहद खराब रही। ईशान किशन पहले ओवर में ही 0 पर आउट। तिलक वर्मा 1 रन बनाकर दूसरे ओवर में पवेलियन लौटे। अभिषेक शर्मा ने कुछ संघर्ष किया, लेकिन 26 के स्कोर पर तीसरा विकेट गिरा। वाशिंगटन सुंदर (11) और कप्तान सूर्यकुमार यादव (18) भी जल्दी आउट हो गए। 9.1 ओवर में 51/5 – भारत बैकफुट पर। 

हार्दिक पंड्या और शिवम दुबे ने थोड़ा संभाला, लेकिन केशव महाराज ने 15वें ओवर में कमाल किया – हार्दिक (18), रिंकू सिंह (0) और अर्शदीप सिंह (1) को लगातार आउट किया। दुबे ने 37 गेंदों में 42 रन बनाकर भारत को 100 के पार पहुँचाया, लेकिन मार्को यानसन ने उनका विकेट लेकर अंत की उम्मीद खत्म कर दी। भारत 18.5 ओवर में 111 रन पर ऑलआउट। 

यानसन और महाराज की घातक गेंदबाजी 

दक्षिण अफ्रीका की गेंदबाजी ने कमाल दिखाया। मार्को यानसन ने 4/22 के शानदार आंकड़े लिए, केशव महाराज ने 3/24 झटके। लुंगी एनगिडी ने 4 ओवर में महज 15 रन देकर दबाव बनाए रखा। भारत की बल्लेबाजी पूरी तरह चरमरा गई – कोई भी बल्लेबाज 20 से ज्यादा नहीं बना सका (दुबे को छोड़कर)। 

डेविड मिलर बने प्लेयर ऑफ द मैच 

मिलर की 63 रनों की पारी और पूरी टीम की क्लिनिकल परफॉर्मेंस ने उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना। यह जीत दक्षिण अफ्रीका के लिए सुपर-8 में शानदार शुरुआत साबित हुई, जबकि भारत को अब अगले मैचों में वापसी करनी होगी। 

यह हार क्यों महत्वपूर्ण?

- भारत की टी-20 विश्व कप में लगातार 12 जीत का सिलसिला टूटा (ग्रुप स्टेज में 4/4 जीत के बाद)। 

- यह भारत की टी-20 विश्व कप इतिहास की सबसे बड़ी रनों से हारों में से एक है। 

- दक्षिण अफ्रीका ने दिखाया कि वे खिताब के मजबूत दावेदार हैं – बैटिंग रिकवरी और बोलिंग डिसिप्लिन दोनों में मास्टरक्लास।

 क्रिकेट का यह मुकाबला याद रखा जाएगा – एक तरफ भारत की मजबूत लाइन-अप, दूसरी तरफ दक्षिण अफ्रीका की भूख और क्लिनिकल अप्रोच। अब सवाल यह है कि क्या टीम इंडिया इस झटके से उबर पाएगी और सेमीफाइनल की राह पर लौटेगी? 

Sajjadali Nayani 
 Friday 🌎 World 22 February 2026
February 22, 2026

ट्रम्प की सुरक्षा में बड़ी चूक! मार-ए-लागो रिसॉर्ट में सशस्त्र घुसपैठिए ने तोड़ा घेरा, सीक्रेट सर्विस ने गोली मारकर ढेर किया

ट्रम्प की सुरक्षा में बड़ी चूक! मार-ए-लागो रिसॉर्ट में सशस्त्र घुसपैठिए ने तोड़ा घेरा, सीक्रेट सर्विस ने गोली मारकर ढेर किया 
-Friday World – 23 February 2026

रविवार, 22 फरवरी 2026 को अमेरिका के फ्लोरिडा में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रसिद्ध मार-ए-लागो रिसॉर्ट में सुरक्षा व्यवस्था की एक बड़ी खामी सामने आई। एक 20-21 वर्षीय युवक ने सशस्त्र होकर रिसॉर्ट के सुरक्षित परिधि में घुसने की कोशिश की, लेकिन यूएस सीक्रेट सर्विस के एजेंटों और पाम बीच काउंटी शेरिफ डिप्टी ने उसे गोली मारकर मौके पर ही ढेर कर दिया। यह घटना सुबह करीब 1:30 बजे उत्तर द्वार के पास हुई, जब युवक एक शॉटगन और गैस कैन (ईंधन का डिब्बा) लेकर अंदर घुसा। 

यूएस सीक्रेट सर्विस के आधिकारिक बयान के अनुसार, युवक को "अनधिकृत प्रवेश" करते देखा गया। वह उत्तर द्वार से एक वाहन के बाहर निकलते समय अंदर घुस गया। सीक्रेट सर्विस एजेंटों और पाम बीच काउंटी शेरिफ ऑफिस (PBSO) के डिप्टी ने उसे रोका और हथियार गिराने का आदेश दिया। युवक ने गैस कैन तो गिरा दिया, लेकिन शॉटगन को गोली चलाने की स्थिति में उठा लिया। इसके बाद अधिकारियों ने गोलीबारी की और वह घटनास्थल पर ही मारा गया। 

महत्वपूर्ण तथ्य जो सामने आए

 - मृतक की पहचान: जांचकर्ताओं ने उसे ऑस्टिन टकर मार्टिन (Austin Tucker Martin) के रूप में पहचाना, जो उत्तरी कैरोलिना का 21 वर्षीय निवासी था। परिवार को सूचना दी जा रही है। 

- ट्रम्प कहाँ थे?: घटना के समय राष्ट्रपति ट्रम्प और फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रम्प वाशिंगटन डीसी के व्हाइट हाउस में थे। वे उस वीकेंड फ्लोरिडा नहीं गए थे, इसलिए रिसॉर्ट में कोई खतरा नहीं था।

 - कोई घायल नहीं: सीक्रेट सर्विस एजेंटों या डिप्टी को कोई चोट नहीं आई। कोई अन्य व्यक्ति प्रभावित नहीं हुआ। 

- हथियार: युवक के पास शॉटगन और गैस कैन थे, जिससे संभावित खतरनाक मंशा का अंदेशा जताया जा रहा है (जैसे आग लगाने या हमला करने की योजना)। 

- तपास: FBI, यूएस सीक्रेट सर्विस और पाम बीच काउंटी शेरिफ ऑफिस संयुक्त रूप से जांच कर रही है। मकसद, मानसिक स्थिति और बैकग्राउंड की जांच जारी है। शामिल एजेंटों को जांच पूरी होने तक प्रशासनिक छुट्टी पर भेज दिया गया है (रूटीन प्रक्रिया)। 

- सुरक्षा बढ़ाई गई: घटना के बाद रिसॉर्ट के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। 

मार-ए-लागो क्या है और क्यों है इतना संवेदनशील? मार-ए-लागो (Mar-a-Lago) ट्रम्प का निजी क्लब और प्राथमिक निवास है, जो "विंटर व्हाइट हाउस" के नाम से जाना जाता है। यह पाम बीच, फ्लोरिडा में स्थित है और 1927 में बना था। ट्रम्प अक्सर यहां वीकेंड बिताते हैं, लेकिन इस बार वे वाशिंगटन में थे। यह जगह राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां विदेशी मेहमान, राजनीतिक बैठकें और निजी कार्यक्रम होते हैं। 

यह घटना ट्रम्प की सुरक्षा में एक गंभीर चूक दर्शाती है, खासकर जब हाल के वर्षों में उनके खिलाफ कई धमकियां और हमले की कोशिशें हो चुकी हैं। हालांकि, सीक्रेट सर्विस की त्वरित कार्रवाई से बड़ा हादसा टल गया। 

क्या सवाल उठ रहे हैं? 

- युवक का मकसद क्या था? क्या यह राजनीतिक था, व्यक्तिगत या मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा?

 - सुरक्षा घेरे में कैसे घुस पाया? क्या कोई सिस्टम फेलियर था?

 - क्या यह अकेला था या कोई संगठित साजिश का हिस्सा?

 - ट्रम्प की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत क्यों नहीं समझी गई?

 यह घटना अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा पर नए सिरे से बहस छेड़ सकती है। जांच पूरी होने पर और तथ्य सामने आएंगे। फिलहाल, अधिकारियों ने स्थिति को नियंत्रित बताते हुए लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

 Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World – 23 February 2026


February 22, 2026

1980 में भारत चीन से दोगुना आगे था... फिर क्या हुआ कि भारत पीछे रह गया? चीन की अद्भुत आर्थिक उड़ान और भारत की धीमी गति के रहस्य!

1980 में भारत चीन से दोगुना आगे था... फिर क्या हुआ कि भारत पीछे रह गया? चीन की अद्भुत आर्थिक उड़ान और भारत की धीमी गति के रहस्य!
-Friday World – 22 February 2026
भारत और चीन – दुनिया के दो सबसे ज्यादा आबादी वाले देश! दोनों की जनसंख्या लगभग 1.4 अरब के आसपास है। 1960 के दशक में दोनों देशों की आर्थिक स्थिति लगभग एक जैसी थी। विश्व बैंक के डेटा के अनुसार, 1960 में भारत की प्रति व्यक्ति आय $84 थी और चीन की $89। लेकिन 1980 तक तस्वीर बदल गई – भारत की प्रति व्यक्ति आय लगभग $267-$582 (विभिन्न स्रोतों के अनुसार) पहुंच गई, जबकि चीन की सिर्फ $195-$312 ही थी। यानी उस समय भारत चीन से लगभग दोगुना समृद्ध था! चीन को तब गरीब अफ्रीकी देशों जैसा माना जाता था। 

लेकिन पिछले 45 सालों में चीन ने असाधारण प्रगति की और भारत को पीछे छोड़ दिया। आज चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जबकि भारत पांचवें स्थान पर है। आइए जानते हैं इस अंतर के मुख्य कारण। 

वर्तमान आर्थिक तस्वीर: आंकड़े बोलते हैं! IMF के अक्टूबर 2025 अनुमान के अनुसार (2025 के लिए): 

- चीन की प्रति व्यक्ति आय: लगभग $13,806-$14,730 (करीब ₹11.5-12.5 लाख) 

- भारत की प्रति व्यक्ति आय: लगभग $2,818-$3,050 (करीब ₹2.3-2.6 लाख)

 चीन की प्रति व्यक्ति आय भारत से 4-5 गुना ज्यादा है! कुल GDP में चीन $19-20 ट्रिलियन है, जबकि भारत $4-4.5 ट्रिलियन। PPP (परचेजिंग पावर पैरिटी) में चीन $40 ट्रिलियन से ज्यादा के साथ आगे है, भारत $17-18 ट्रिलियन। 

PPP क्या है?

यह एक आर्थिक विधि है जो देशों की अर्थव्यवस्था की तुलना करते समय सिर्फ मुद्रा विनिमय दर नहीं, बल्कि पैसे से कितनी चीजें खरीदी जा सकती हैं, उस पर ध्यान देती है। उदाहरण: भारत में ₹100 में भरपेट भोजन मिल जाता है, अमेरिका में इसके लिए $15-20 लगते हैं। PPP में भारत और चीन दोनों की खरीद शक्ति ज्यादा दिखती है, लेकिन चीन अभी भी आगे है। 

चीन की सफलता के रहस्य: 1978 के क्रांतिकारी सुधार 

1978 में डेंग शियाओपिंग के नेतृत्व में चीन ने 'रिफॉर्म एंड ओपनिंग अप' नीति अपनाई: 

- कृषि में 'हाउसहोल्ड रिस्पॉन्सिबिलिटी सिस्टम' – जमीन सरकारी रहे, लेकिन उत्पादन और लाभ परिवार को। ग्रामीण आय 5 साल में दोगुनी हो गई! 

- स्पेशल इकोनॉमिक जोन्स (SEZs) जैसे शेनजेन – विदेशी निवेश के लिए टैक्स और नियमों में छूट।

 - बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्यात पर फोकस – GDP ग्रोथ रेट लंबे समय तक 8-10%।

 - शहरीकरण: 1980 में 19% से आज 60%+। 

- एक बच्चा नीति और शिक्षा-स्वास्थ्य में निवेश से 1978-2015 में 80 करोड़ लोग गरीबी से बाहर। 

भारत के सुधार: देर से और अधूरे भारत ने 1991 में LPG (उदारीकरण, निजीकरण, वैश्वीकरण) सुधार शुरू किए – चीन से 13 साल बाद! 

- औद्योगिक लाइसेंस घटाए, विदेशी निवेश मंजूर, आयात ड्यूटी कम की। 

- GDP ग्रोथ 7-8% तक पहुंची, लेकिन राजनीतिक अस्थिरता, नौकरशाही और धीमे अमल से गति कम रही। 

- भारत ने IT और सेवा क्षेत्र पर ज्यादा फोकस किया, चीन ने मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर पर।

 - असमान विकास: आय और अवसरों की असमानता से गरीबी घटी लेकिन खत्म नहीं हुई। 

 पड़ोसियों से तुलना: हैरान करने वाली हकीकत! 

- बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति आय 2025 में लगभग $2,734-$2,960 (भारत $2,818-$3,050 से थोड़ी कम या बराबर)। बांग्लादेश ने टेक्सटाइल निर्यात और महिला भागीदारी से प्रगति की।

 - पाकिस्तान पीछे ($1,500 के आसपास), राजनीतिक अस्थिरता के कारण। 

- चीन का GDP भारत के सभी पड़ोसियों (पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल आदि) के कुल GDP से 4 गुना! 

भारत चीन से क्या सीख सकता है?

 - तेज निर्णय और अमल: चीन की केंद्रीय व्यवस्था ने सुधार तेज किए। 

- मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्यात में बड़ा निवेश। 

- जनसंख्या नियंत्रण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट पर फोकस। 

- महिला भागीदारी और निर्यात-आधारित विकास (बांग्लादेश से भी सीखें!)।

 आज भारत दुनिया की सबसे तेज बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है, लेकिन चीन जैसी गति पाने के लिए अभी बहुत काम बाकी है। कड़े सुधार, समान विकास और निवेश से भारत भी महाशक्ति बन सकता है! 

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World – 22 February 2026
February 22, 2026

1980માં ભારત ચીન કરતાં બમણું આગળ હતું... પછી શું થયું કે ભારત પાછળ રહી ગયું? ચીનની અદ્ભુત આર્થિક ઉડાન અને ભારતની ધીમી ગતિના રહસ્યો!

1980માં ભારત ચીન કરતાં બમણું આગળ હતું... પછી શું થયું કે ભારત પાછળ રહી ગયું? ચીનની અદ્ભુત આર્થિક ઉડાન અને ભારતની ધીમી ગતિના રહસ્યો!
-Friday World 22 February 2026
ભારત અને ચીન – વિશ્વના બે સૌથી મોટી વસ્તીવાળા દેશો! બંનેની વસ્તી લગભગ 1.4 અબજની આસપાસ છે. 1960ના દાયકામાં બંને દેશોની આર્થિક સ્થિતિ લગભગ સમાન હતી. વર્લ્ડ બેંકના ડેટા મુજબ, 1960માં ભારતની માથાદીઠ આવક $84 હતી અને ચીનની $89. પરંતુ 1980 સુધીમાં ચિત્ર બદલાઈ ગયું 

– ભારતની માથાદીઠ આવક આશરે $267-$582 (વિવિધ સ્ત્રોતો અનુસાર) પહોંચી ગઈ, જ્યારે ચીનની માત્ર $195-$307 જ હતી. એટલે કે ભારત તે સમયે ચીન કરતાં લગભગ બમણું આગળ હતું! ચીનને ત્યારે આફ્રિકાના ગરીબ દેશો જેવું ગણવામાં આવતું હતું.

 પરંતુ છેલ્લા 40-45 વર્ષમાં ચીને અદ્ભુત પ્રગતિ કરી અને ભારતને પાછળ છોડી દીધું. આજે ચીન વિશ્વની બીજી સૌથી મોટી અર્થવ્યવસ્થા છે, જ્યારે ભારત પાંચમા ક્રમે છે. ચાલો, જાણીએ કયા મુખ્ય કારણોસર આ તફાવત આવ્યો. 

વર્તમાન આર્થિક તુલના: આંકડા બોલે છે! આંતરરાષ્ટ્રીય મુદ્રા નિધિ (IMF)ના 2025ના અંદાજ મુજબ: 

- ચીનની માથાદીઠ આવક: આશરે $13,687-$14,730 (લગભગ ₹11-12 લાખ)

 - ભારતની માથાદીઠ આવક: આશરે $2,878-$3,051 (લગભગ ₹2.4-2.6 લાખ)

 ચીનની માથાદીઠ આવક ભારત કરતાં 4-5 ગણી વધુ છે! કુલ GDPમાં ચીન $19-20 ટ્રિલિયન છે, જ્યારે ભારત $4-4.5 ટ્રિલિયન. પરચેઝિંગ પાવર પેરિટી (PPP)માં પણ ચીન $40 ટ્રિલિયનથી વધુ સાથે આગળ છે, જ્યારે ભારત $17-18 ટ્રિલિયન. 

પરચેઝિંગ પાવર પેરિટી (PPP) શું છે? આ એક અર્થશાસ્ત્રીય પદ્ધતિ છે જે દેશોની અર્થવ્યવસ્થાની તુલના કરતી વખતે માત્ર ચલણના વિનિમય દરને નહીં, પરંતુ પૈસાથી કેટલી વસ્તુઓ ખરીદી શકાય તેને ધ્યાનમાં લે છે. ઉદાહરણ તરીકે, ભારતમાં ₹100માં ભરપેટ ભોજન મળે છે, જ્યારે અમેરિકામાં તેના માટે $15-20 જોઈએ. PPPમાં ભારત અને ચીન બંનેની ખરીદ શક્તિ વધુ દેખાય છે, પરંતુ ચીન હજુ આગળ છે. 

ચીનની અદ્ભુત સફળતાના રહસ્ય: 1978ના સુધારા 1978માં ડેંગ ઝિયાઓપિંગના નેતૃત્વમાં ચીને 'રિફોર્મ એન્ડ ઓપનિંગ અપ' નીતિ અપનાવી:

 - કૃષિમાં 'હાઉસહોલ્ડ રિસ્પોન્સિબિલિટી સિસ્ટમ' લાગુ કરી – જમીન સરકારી રહે, પરંતુ ઉત્પાદન અને લાભ પરિવારને મળે. ગ્રામીણ આવક 5 વર્ષમાં બમણી થઈ! 

- સ્પેશિયલ ઈકોનોમિક ઝોન્સ (SEZs) બનાવ્યા, જેમ કે શેનઝેન. વિદેશી કંપનીઓને આકર્ષવા માટે ટેક્સ અને નિયમોમાં છૂટ આપી. 

- મોટા પાયે ઉત્પાદન (મેન્યુફેક્ચરિંગ), ઇન્ફ્રાસ્ટ્રક્ચર અને નિકાસ પર ફોકસ. GDP વૃદ્ધિ દર લાંબા સમય સુધી 8-10% રહ્યો. 

- શહેરીકરણ: 1980માં 19% હતું, આજે 60%થી વધુ. 

- વસ્તી નિયંત્રણ (એક બાળક નીતિ) અને શિક્ષણ-આરોગ્યમાં રોકાણથી ગરીબી લગભગ નાબૂદ થઈ (1978-2015માં 80 કરોડ લોકો ગરીબીમાંથી બહાર). 

 ભારતના સુધારા: મોડા અને અધૂરા ભારતે 1991માં LPG (Liberalization, Privatization, Globalization) સુધારા શરૂ કર્યા – 13 વર્ષ મોડા! 


- ઔદ્યોગિક લાઇસન્સ ઘટાડ્યા, વિદેશી રોકાણ મંજૂર કર્યું, આયાત ડ્યુટી ઘટાડી. 

- GDP વૃદ્ધિ 7-8% સુધી પહોંચી, પરંતુ રાજકીય અસ્થિરતા, બ્યુરોક્રસી અને ધીમા અમલને કારણે ઝડપ ઓછી રહી. 

- ભારતે સેવા ક્ષેત્ર (IT, સોફ્ટવેર) પર વધુ ફોકસ કર્યું, જ્યારે ચીને મેન્યુફેક્ચરિંગ અને ઇન્ફ્રાસ્ટ્રક્ચર પર.

 - અસમાન વિકાસ: આવક, શિક્ષણ અને તકોની અસમાન વહેંચણીથી ગરીબી ઘટી (2004માં 38%થી 2011માં 21%), પરંતુ હજુ 15-20% વસ્તી ગરીબ છે. 

પડોશીઓ સાથે તુલના: આશ્ચર્યજનક વાત! 

- બાંગ્લાદેશની માથાદીઠ આવક આજે ભારત કરતાં થોડી વધુ અથવા બરાબર ($2,700-$2,900 vs ભારત $2,700-$3,000). બાંગ્લાદેશે ટેક્સટાઇલ નિકાસ અને મહિલા ભાગીદારીથી પ્રગતિ કરી. 

- પાકિસ્તાન પાછળ રહ્યું ($1,500 આસપાસ), રાજકીય અસ્થિરતાને કારણે. 

- ચીનનું GDP ભારતના તમામ પડોશીઓ (પાકિસ્તાન, બાંગ્લાદેશ, નેપાળ વગેરે)ના કુલ GDP કરતાં 4 ગણું છે! 

 ભારત શું શીખી શકે? - ઝડપી નિર્ણય અને અમલ: ચીનની એકપક્ષીય વ્યવસ્થાએ ઝડપી સુધારા શક્ય બનાવ્યા. 

- મેન્યુફેક્ચરિંગ અને ઇન્ફ્રાસ્ટ્રક્ચરમાં મોટું રોકાણ.

 - વસ્તી નિયંત્રણ, શિક્ષણ અને સ્કિલ ડેવલપમેન્ટ પર ફોકસ. 

- નિકાસ-આધારિત વૃદ્ધિ અને મહિલા ભાગીદારી (બાંગ્લાદેશ પાસેથી શીખો!). 

આજે ભારત વિશ્વની સૌથી ઝડપી વિકસતી મોટી અર્થવ્યવસ્થા છે, પરંતુ ચીન જેવી ઝડપ મેળવવા માટે હજુ ઘણું કામ બાકી છે. સુધારા, રોકાણ અને સમાન વિકાસથી ભારત પણ મહાસત્તા બની શકે છે! 

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 22 February 2026
February 22, 2026

ખાડો ખોદે તે પડે! AMCનું ડમ્પર જ ખુદના ખાડામાં ફસાયું, માત્ર માટી નાખીને 'કામ પૂર્ણ' માનનાર તંત્રની પોલ ખુલી!

ખાડો ખોદે તે પડે! AMCનું ડમ્પર જ ખુદના ખાડામાં ફસાયું, માત્ર માટી નાખીને 'કામ પૂર્ણ' માનનાર તંત્રની પોલ ખુલી! -Friday World 22 February 2026
અમદાવાદમાં રોડ ખોદકામના નામે ચાલતા ભ્રષ્ટાચાર અને બેદરકારીનો તાજો એક નમૂનો સામે આવ્યો છે. CTM ચાર રસ્તા પાસે અમદાવાદ મ્યુનિસિપલ કોર્પોરેશન (AMC) દ્વારા ખોદવામાં આવેલા ખાડામાં જ કોર્પોરેશનનું પોતાનું ભારેભરખમ ડમ્પર ફસાઈ ગયું! આ ઘટના એટલી વિરોધાભાસી છે કે લોકોમાં હાસ્ય અને આક્રોશ બંને એકસાથે ફાટી નીકળ્યા છે. જે તંત્ર શહેરને 'ઓલિમ્પિક સિટી' બનાવવાના મોટા-મોટા સપના બતાવે છે, તે જ તંત્રના કામની આ ખરેખરી સ્થિતિ જોવા મળી. 

 શું બન્યું હતું? મળતી માહિતી અનુસાર, AMCએ CTM ચાર રસ્તા વિસ્તારમાં રસ્તાના વિકાસ અને સુધારણાના નામે ઊંડો ખાડો ખોદ્યો હતો. આ કામ પૂર્ણ થયા બાદ નિયમ મુજબ રસ્તાને મજબૂત પુરાણ (પેવિંગ) કરવાનું હતું – જેમાં કોમ્પેક્ટેડ સોઇલ, ગ્રેવલ, સીમેન્ટ કંક્રીટ કે અન્ય મજબૂત સામગ્રીનો ઉપયોગ થાય છે. પરંતુ અહીં તો માત્ર ઢીલી માટી નાખીને 'સંતોષ' માની લેવામાં આવ્યો! આવા અધૂરા અને નબળા પુરાણને કારણે ખાડો ફરીથી ધસી પડ્યો અને તેમાં જ AMCનું ડમ્પર ફસાઈ ગયું. 

આ ઘટનાના વીડિયો સોશિયલ મીડિયા પર વાયરલ થઈ ગયા છે, જેમાં ડમ્પરના પૈડાં અડધા ઊંડા ખાડામાં ધંસી ગયેલા જોવા મળે છે. સ્થાનિક લોકો તરફથી તાત્કાલિક આક્રોશ વ્યક્ત થયો અને તેઓએ પૂછ્યું – જો AMCનું પોતાનું ભારે વાહન આમ ફસાઈ શકે છે, તો સામાન્ય નાગરિકની કાર કે બાઇક ફસાઈ જાય તો શું થાય? કોઈ ગંભીર અકસ્માત થાય તો જવાબદાર કોણ? 

 ઓલિમ્પિક સિટીના સપના વચ્ચે વાસ્તવિકતા અમદાવાદને વર્લ્ડ ક્લાસ ઇન્ફ્રાસ્ટ્રક્ચર સાથે 'ઓલિમ્પિક સિટી' તરીકે વિકસાવવાના દાવા કરનાર AMC આજે આવા નાના-નાના પરંતુ ગંભીર કિસ્સાઓમાં ફસાઈ રહ્યું છે. ઠેર-ઠેર ખોદકામ ચાલુ છે, પરંતુ કામની ગુણવત્તા અને જવાબદારીનો અભાવ સ્પષ્ટ દેખાય છે. અધિકારીઓ અને કોન્ટ્રાક્ટરો વચ્ચેની મિલીભગતથી આવા અધૂરા કામો થતા હોવાની શંકા લોકોમાં વધી રહી છે. 

આ ઘટના એક મોટો સંદેશ આપે છે – ખાડો ખોદનારને જ તેમાં પડવું પડે છે! પરંતુ અહીં તો ખોદનાર તંત્ર પોતે જ પડ્યું છે, તો પછી સામાન્ય નાગરિકની સુરક્ષા કેવી રીતે સુનિશ્ચિત થશે? 

સવાલો અને જવાબદારીની માંગ 

- શું આ ઘટના બાદ જવાબદાર અધિકારીઓ અને કોન્ટ્રાક્ટર સામે કાર્યવાહી થશે? 

- શું રસ્તાના પુરાણના નિયમોનું સખતપણે પાલન થશે? 

- ભવિષ્યમાં આવા અકસ્માતો અટકાવવા માટે કઈ કડક પગલાં લેવાશે?

 જ્યાં સુધી જવાબદારી નિશ્ચિત ન થાય અને ભ્રષ્ટાચાર પર રોક ન લાગે, ત્યાં સુધી અમદાવાદના રસ્તાઓ પર આવા 'ખાડા ખોદે તે પડે' જેવા કિસ્સા વધતા જ રહેશે. લોકો હવે માત્ર મોટી વાતો નહીં, પણ વાસ્તવિક કામ અને જવાબદારીની અપેક્ષા રાખે છે. 

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 22 February 2026
February 22, 2026

वैश्विक मंच पर 'शर्टलेस' प्रदर्शन: पीएम मोदी ने कांग्रेस को लगाई फटकार, कहा—सारी मर्यादाएं तोड़ीं, देश का अपमान किया; कॉमनवेल्थ गेम्स में भी भाजपा ने विरोध किया था

वैश्विक मंच पर 'शर्टलेस' प्रदर्शन: पीएम मोदी ने कांग्रेस को लगाई फटकार, कहा—सारी मर्यादाएं तोड़ीं, देश का अपमान किया; कॉमनवेल्थ गेम्स में भी भाजपा ने विरोध किया था
 -Friday World 22 February 2026
20 फरवरी 2026 को दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित **इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट** भारत के लिए एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण क्षण था। इसमें 80 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए, जहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के नैतिक उपयोग, समावेशिता और पारदर्शिता पर गहन चर्चा हुई। यह आयोजन भारत की तकनीकी प्रगति और 'विकसित भारत' की दिशा में महत्वपूर्ण कदम था। लेकिन इसी वैश्विक मंच पर इंडियन यूथ कांग्रेस (आईवाईसी) के कुछ कार्यकर्ताओं ने टी-शर्ट उतारकर 'शर्टलेस' विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने पीएम मोदी और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ नारे लगाए, जिससे विवाद खड़ा हो गया। 

प्रदर्शनकारियों ने विदेशी मेहमानों के सामने टी-शर्ट उतारकर स्लोगन लगाए और सरकार पर 'कॉम्प्रोमाइज्ड' होने का आरोप लगाया। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और करीब 10 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। चार प्रमुख नाम—कृष्णा हरि (बिहार), कुंदन यादव (बिहार), अजय कुमार (उत्तर प्रदेश) और नरसिम्हा यादव (तेलंगाना)—को पटियाला हाउस कोर्ट ने 5 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। यूथ कांग्रेस ने इसे "बेरोजगार युवाओं की आवाज" करार दिया, जबकि विरोधियों ने इसे "देश की अंतरराष्ट्रीय छवि खराब करने वाला कृत्य" बताया। 

इस घटना पर 22 फरवरी 2026 को मेरठ में दिल्ली-मेरठ नमो भारत आरआरटीएस (82 किमी कॉरिडोर) के शेष हिस्सों के उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देशवासी भारत को विकसित बनाने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं, लेकिन कुछ राजनीतिक दल भारत की सफलता को पचा नहीं पा रहे।

 पीएम मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा 
 "एआई समिट भाजपा का समारोह नहीं था, यह देश का कार्यक्रम था, देश के सम्मान का कार्यक्रम था। लेकिन कांग्रेस और उसके इकोसिस्टम ने भारत के इस वैश्विक आयोजन को गंदी राजनीति का अखाड़ा बना दिया।" 

उन्होंने आगे जोड़ा 

"कांग्रेस ने सारी मर्यादाएं तोड़ दीं। विदेशी मेहमानों के सामने कपड़े उतारकर प्रदर्शन किया। देश पहले से ही जानता है कि आप 'नंगे' हैं, फिर और क्यों उतारने की जरूरत पड़ी?"

 प्रधानमंत्री ने कांग्रेस को "विचारधारात्मक रूप से दिवालिया और गरीब" करार दिया। उन्होंने कहा कि इस कृत्य पर पूरे देश में थू-थू हो रही है, लेकिन दुर्भाग्य है कि इतनी पुरानी पार्टी के नेता शर्मिंदा होने के बजाय गरजते हैं।

 पीएम मोदी ने यह भी उल्लेख किया 

 "इस घटना के बाद कांग्रेस के सारे साथी दल चौंक गए हैं और उन्होंने किनारा कर लिया। अन्य विपक्षी दल भी इस कृत्य की निंदा कर रहे हैं, जो राष्ट्रीय गौरव के साथ खड़े हैं।"

 यह विरोध राजनीतिक बयानबाजी का नया स्तर साबित हुआ। भाजपा ने इसे "140 करोड़ भारतीयों का अपमान" बताया। कांग्रेस ने जवाब में पुरानी घटनाओं का हवाला दिया, खासकर 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स का। कांग्रेस नेताओं जैसे गुरदीप सिंह सप्पल और हरीश रावत ने कहा कि उस समय भाजपा ने भी अंतरराष्ट्रीय आयोजन के दौरान विरोध प्रदर्शन किए थे—नितिन गडकरी ने बैरिकेड चढ़कर प्रदर्शन किया, सड़कों पर रैलियां निकालीं और भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन किया, जिससे देश की छवि पर असर पड़ा था। कांग्रेस ने पूछा कि तब इसे "लोकतांत्रिक अधिकार" कहा गया, तो अब क्यों "राष्ट्रीय अपमान"?

 भाजपा का तर्क है कि 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स में विरोध मुख्य रूप से भ्रष्टाचार और आयोजन की खामियों पर केंद्रित था—जैसे निर्माण में अनियमितताएं, सुरक्षा चूक और बजट की बर्बादी—और यह सड़कों/रैलियों पर हुआ, न कि वैश्विक मंच के अंदर विदेशी मेहमानों के सामने 'शर्टलेस' रूप में। कांग्रेस का कहना है कि विरोध का अधिकार सबको है, लेकिन तरीके पर सवाल उठाना दोहरा मापदंड है। 

एआई इम्पैक्ट समिट भारत की तकनीकी उपलब्धि का प्रतीक था, लेकिन इस प्रदर्शन ने वैश्विक मेहमानों के सामने छवि पर सवाल उठाए। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह विपक्ष की हताशा दिखाता है—जहां सरकार विकास परियोजनाओं (जैसे आरआरटीएस) को आगे बढ़ा रही है, वहीं विरोधी दल ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। 

पीएम मोदी ने स्पीच में विकास पर फोकस रखा, लेकिन कांग्रेस के कदम को "देशद्रोही" करार देते हुए कहा कि ऐसे कृत्य राष्ट्र की प्रगति नहीं रोक सकते। उन्होंने मीडिया से अपील की कि कांग्रेस के व्यवहार को सही ढंग से रिपोर्ट करें।

 कांग्रेस ने "गंदी और नंगी राजनीति" वाले बयान पर पलटवार किया और पुरानी भाजपा विरोध प्रदर्शनों (कॉमनवेल्थ गेम्स सहित) का जिक्र किया। मुख्य सवाल वही है—राजनीतिक विरोध में मर्यादाएं बनाए रखना जरूरी नहीं? 

यह घटना भारतीय राजनीति में अनुशासन, राष्ट्रीय गौरव और विरोध के अधिकार के बीच संतुलन की लड़ाई को उजागर करती है। एआई जैसे क्षेत्र में भारत वैश्विक नेता बन रहा है, लेकिन घरेलू राजनीति इसे प्रभावित न करे—यही सबसे बड़ी चुनौती है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World 22 February 2026
February 22, 2026

बहुजन राजनीति की मौन हार: 2014 के बाद सत्ता ने कैसे बदली भारत की राजनीतिक शर्तें

बहुजन राजनीति की मौन हार: 2014 के बाद सत्ता ने कैसे बदली भारत की राजनीतिक शर्तें
-Friday World 22 February 2026
2014 में भाजपा की सत्ता में वापसी के साथ भारतीय राजनीति में एक मौलिक बदलाव आया। यह बदलाव सिर्फ सत्ताधारी दल का नहीं, बल्कि पूरे राजनीतिक मैदान की नियमावली का था। जहां कांग्रेस जैसी पारंपरिक पार्टियाँ सत्ता से बाहर हुईं, लेकिन उनका सामाजिक आधार बरकरार रहा, वहीं बहुजन समाज—OBC, SC, ST और अल्पसंख्यक—की अपनी स्वतंत्र राजनीतिक आवाज़ को व्यवस्थित रूप से दबाया गया। 

यह रणनीति दो स्तरों पर काम करती रही: एक ओर सत्ता, एजेंसियों और संसाधनों का दबाव, दूसरी ओर बहुजन समाज के भीतर भ्रम, डर और विभाजन पैदा करना। भाजपा ने सफलतापूर्वक यह नैरेटिव गढ़ा कि बहुजन समाज की अलग राजनीति 'अनावश्यक' है। नतीजा? बहुजन पार्टियाँ—जैसे BSP, SP, RJD—न सिर्फ चुनावी ताकत खो रही हैं, बल्कि अपने ही आधार में राजनीतिक भरोसा भी गंवा रही हैं। 

 बहुजन पार्टियों का दोहरा हमला: क्यों बनीं सबसे बड़ा निशाना?

 कांग्रेस सत्ता खोकर भी अपने को 'राष्ट्रीय पार्टी' के रूप में बनाए रख सकी, लेकिन बहुजन नेतृत्व वाली पार्टियाँ सीधे निशाने पर रहीं। 2014 के बाद उत्तर भारत में भाजपा ने 'सामाजिक इंजीनियरिंग' के जरिए गैर-प्रभुत्वशाली जातियों को अपने पाले में लाया। उदाहरणस्वरूप, उत्तर प्रदेश में गैर-यादव OBC और गैर-जाटव दलितों को लक्षित किया गया। BSP और SP के वोट बैंक में सेंध लगाई गई, जिससे इन पार्टियों का आधार सिकुड़ता चला गया। 

यह सिर्फ चुनावी रणनीति नहीं थी—यह वैचारिक स्तर पर बहुजन समाज को यह विश्वास दिलाने की कोशिश थी कि उनकी अपनी राजनीति 'विभाजनकारी' है, जबकि 'राष्ट्रवाद' और 'विकास' सबके लिए एक ही रास्ता है। परिणामस्वरूप, बहुजन समाज में हताशा फैली: "अब कुछ हो नहीं सकता" वाली भावना सत्ता का सबसे मजबूत हथियार बन गई। 

"देश के 90% त्रस्त हैं"—फिर सत्ता क्यों अडिग? बेरोजगारी, महंगाई, किसानों-श्रमिकों की बदहाली, शिक्षा-स्वास्थ्य का निजीकरण, आरक्षण पर हमले—ये सब मौजूद हैं। फिर भी सत्ता डगमगाती क्यों नहीं? क्योंकि यह अब 'प्रबंधित लोकतंत्र' (managed democracy) से चल रही है। साम, दाम, दंड, भेद—ये अब चुनावी कार्यशैली का हिस्सा हैं। 

इस्तीफा अब नैतिकता का प्रतीक नहीं, कमजोरी का प्रतीक बन गया है। पहले बड़े घोटाले या नैतिक संकट पर इस्तीफा राजनीतिक दबाव होता था। अब इसे 'अपराध स्वीकार' की तरह प्रचारित किया जाता है। नतीजा? कानूनी-नैतिक संकटों के बावजूद मंत्री नहीं हटते, व्यवस्था नहीं हिलती। यह जवाबदेही के ढांचे का टूटना है। 

अंतरराष्ट्रीय तुलना में भारत का परिदृश्य और गहरा है। कई देशों में नैतिक संकट पर नेता इस्तीफा देते हैं। लेकिन यहां सवाल उठाना ही 'देशद्रोह' बन जाता है। लोकतंत्र राष्ट्रवाद के शोर में दब जाता है। 

बहुजन राजनीति की सबसे बड़ी हार: मनोवैज्ञानिक स्तर पर सबसे खतरनाक नुकसान वैचारिक है। बहुजन समाज में अब BJP की ताकत से ज्यादा डर यह है कि "विकल्प नहीं है"। OBC, SC/ST पार्टियाँ चुनाव हार रही हैं, लेकिन असली हार उनके समाज में राजनीतिक भरोसे की है। 

भविष्य में सत्ता परिवर्तन 'लगभग नामुमकिन' लगने लगा है—सिवाय जनविद्रोह के। लेकिन जनविद्रोह अचानक नहीं फूटता। यह लंबे दमन, अपमान और संगठित चेतना से पैदा होता है। आज असंतोष बहुत है, लेकिन वह बहुजन संगठनों से नहीं जुड़ पा रहा। 

असली सवाल: बहुजन राजनीति का पुनर्जीवन BJP को हटाना अब पर्याप्त नहीं। असली चुनौती बहुजन राजनीति को फिर से खड़ा करने की है। क्या OBC, SC/ST और अल्पसंख्यक नेतृत्व वाली पार्टियाँ शिक्षा, आरक्षण, बैकलॉग, निजीकरण, प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर साझा वैचारिक भाषा बना पा रही हैं?

 आज बहुजन राजनीति की सबसे बड़ी विफलता चुनावी हार नहीं, बल्कि सत्ता के विरुद्ध सुसंगत वैचारिक विकल्प न खड़ा कर पाना है। 2014 के बाद सबसे ज्यादा क्षतिग्रस्त हुआ कांग्रेस नहीं—बल्कि बहुजन समाज की स्वतंत्र राजनीतिक संभावना है।

 अगर यह संभावना दोबारा नहीं गढ़ी गई, तो सत्ता परिवर्तन का रास्ता और कठिन होता जाएगा। समय है कि बहुजन समाज अपनी आवाज़ को फिर से संगठित करे—न सिर्फ विरोध में, बल्कि एक मजबूत, वैकल्पिक राजनीतिक दृष्टि के साथ। क्योंकि लोकतंत्र तभी बचता है, जब हर वर्ग की राजनीतिक संभावना जीवित रहती है।

2014 के बाद भारत में सत्ता की संरचना ने बहुजन समाज की स्वतंत्र राजनीतिक संभावना को सबसे गहरा नुकसान पहुँचाया है। यह कोई संयोग नहीं, बल्कि एक सुनियोजित रणनीति का परिणाम है, जिसने OBC, SC और ST नेतृत्व वाली पार्टियों और आंदोलनों को कमजोर किया। 
 Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World 22 February 2026