National News
August 09, 2026
ममता बनर्जी के काफिले पर हमला: पत्थर-कीचड़-जूतों की बौछार, टीएमसी का ‘जानलेवा साजिश’ का आरोप
ममता बनर्जी के काफिले पर हमला: पत्थर-कीचड़-जूतों की बौछार, टीएमसी का ‘जानलेवा साजिश’ का आरोप
-Friday World 10 Aug 2026
पश्चिम बंगाल के उत्तर २४ परगना जिले के हलीशहर इलाके में ९ अगस्त २०२६ को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काफिले पर हमला हुआ। ममता बनर्जी उस समय टीएमसी कार्यकर्ता बिरजू केवट के परिजनों से मिलने जा रही थीं। बिरजू की हालिया पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी, जिसने राजनीतिक तनाव बढ़ा दिया था।
प्रदर्शनकारियों ने ममता बनर्जी की गाड़ी को घेर लिया। रिपोर्ट्स के अनुसार भीड़ ने गाड़ी पर कीचड़, जूते, पानी की बोतलें और पत्थर/ईंटें फेंकीं। ‘चोर-चोर’ और ‘डकैत रानी’ जैसे नारे लगाए गए। ममता बनर्जी ने बाद में मीडिया से कहा कि पुलिस के सामने ही असामाजिक तत्वों ने बड़े पत्थर फेंके। उन्होंने दावा किया कि अगर गाड़ी की खिड़कियां खुली होतीं तो सिर फट सकता था और वे मारे जा सकते थे। उन्होंने इसे साजिश बताया और पुलिस पर आरोप लगाया कि वे मूकदर्शक बनी रहीं तथा भाजपा की रक्षा कर रही हैं।
टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने इसे हत्या का प्रयास करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पत्थर जानबूझकर ममता बनर्जी को निशाना बनाने के लिए फेंके गए और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के इशारे पर यह हुआ। अभिषेक बनर्जी ने भी कानून-व्यवस्था के पूर्ण पतन का आरोप लगाते हुए कहा कि पहले उन पर हमला हुआ था, अब अध्यक्ष पर। टीएमसी का कहना है कि भाजपा हिंसा से डराने की कोशिश कर रही है क्योंकि ममता बनर्जी अभी भी राजनीतिक चुनौती बनी हुई हैं।
दूसरी ओर भाजपा ने हिंसा की निंदा की। राज्य भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य और अन्य नेताओं ने कहा कि यह बंगाल की संस्कृति नहीं है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि ममता बनर्जी की जेड-प्लस सुरक्षा वापस नहीं ली गई है, मौके पर वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे और पुलिस ने अपना काम किया। उन्होंने आरोपों को राजनीति बताया।
यह घटना पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद राजनीतिक तापमान का नया उदाहरण है। मई २०२६ में भाजपा सरकार बनने के बाद टीएमसी नेताओं पर हमलों और विरोध के कई मामले सामने आए हैं। बिरजू केवट की हिरासत में मौत ने पहले से तनाव बढ़ा रखा था। ममता बनर्जी का काफिला परिवार से मिलने जा रहा था, लेकिन रास्ते में विरोध प्रदर्शन हिंसक रूप ले गया।
राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। टीएमसी इसे भाजपा द्वारा रची गई साजिश और हिंसा बता रही है, जबकि भाजपा इसे स्थानीय गुस्से और टीएमसी की राजनीति से जोड़ रही है। पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर फैले, जिनमें भीड़ गाड़ी के आसपास दिख रही है और कीचड़-जूते फेंके जा रहे हैं।
बंगाल की राजनीति लंबे समय से हिंसा और आरोपों से घिरी रही है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर ‘जंगल राज’ और ‘डराने’ की राजनीति का आरोप लगाते रहे हैं। इस घटना ने फिर से कानून-व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक सहनशीलता पर बहस छेड़ दी है। ममता बनर्जी ने कानूनी कार्रवाई की बात कही है। प्रशासन को निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करनी होगी ताकि दोषी चाहे कोई भी हो, सजा पाए।
यह सिर्फ एक काफिले पर हमला नहीं, बल्कि राज्य की वर्तमान राजनीतिक स्थिति का प्रतिबिंब है। जहां एक तरफ पूर्व मुख्यमंत्री सुरक्षा में सवाल उठा रही हैं, वहीं सत्ता पक्ष हिंसा की निंदा करते हुए पुलिस की कार्रवाई का बचाव कर रहा है। आम नागरिकों की सुरक्षा और लोकतंत्र की मर्यादा दोनों पक्षों की जिम्मेदारी है। हिंसा से कोई भी पक्ष लाभ नहीं कमा सकता। बंगाल को शांति और विकास की जरूरत है, न कि लगातार तनाव और आरोपों की।
घटना की जांच आगे बढ़ेगी। दोनों दलों को संयम बरतना चाहिए। पत्थर और कीचड़ फेंकने से राजनीतिक मतभेद हल नहीं होते। लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन हिंसा अस्वीकार्य है। ममता बनर्जी सुरक्षित रहीं, यह राहत की बात है, लेकिन ऐसी घटनाएं राज्य की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 10 Aug 2026
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