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Wednesday, 3 June 2026

June 03, 2026

गुंडा टैक्स' के खिलाफ निहंगों का बिगुल: कीरतपुर साहिब में 'खालसा राज टैक्स' शुरू, हिमाचल-पंजाब बॉर्डर पर बढ़ा तनाव

गुंडा टैक्स' के खिलाफ निहंगों का बिगुल: कीरतपुर साहिब में 'खालसा राज टैक्स' शुरू, हिमाचल-पंजाब बॉर्डर पर बढ़ा तनाव- Friday World 3 Jun 2026
हिमाचल प्रदेश में वाहनों से वसूले जा रहे एंट्री टैक्स को लेकर विवाद अब सड़कों पर उतर आया है। पंजाब के कीरतपुर साहिब के पास कुल्लू-मनाली हाईवे पर निहंग सिख संगठन 'तरना दल' ने बुधवार से एक अनोखा विरोध शुरू किया है। हिमाचल सरकार के एंट्री टैक्स के जवाब में निहंगों ने मोरा टोल प्लाजा के नजदीक 'खालसा राज टैक्स' के नाम पर वाहनों से स्वैच्छिक चंदा वसूलना शुरू कर दिया है। उनका साफ कहना है कि जब तक हिमाचल सरकार यह टैक्स पूरी तरह से खत्म नहीं कर देती, तब तक उनका यह विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।

कैसे शुरू हुआ 'खालसा राज टैक्स' का विरोध
तरना दल के निहंग अछर सिंह की अगुवाई में यह अभियान चलाया जा रहा है। कीरतपुर साहिब के पास मोरा टोल प्लाजा पर निहंग सिंहों का जत्था तैनात है। हिमाचल की तरफ से पंजाब में दाखिल होने वाले वाहनों को रोककर उनसे 'खालसा राज टैक्स' की मांग की जा रही है। 

टैक्स की रकम वाहन के हिसाब से तय की गई है:  
- कार और छोटे वाहन: 100 रुपये  
- छोटे कमर्शियल वाहन: 200 रुपये  
- बड़े वाहन, ट्रक और बस: 300 से 500 रुपये  

निहंग अछर सिंह ने स्पष्ट किया कि इस वसूली में किसी तरह की जोर जबरदस्ती नहीं है। जो वाहन चालक अपनी मर्जी और श्रद्धा से दान देना चाहता है, सिर्फ उसी से रकम ली जा रही है। जो लोग नहीं देना चाहते उन्हें बिना किसी रोकटोक के जाने दिया जा रहा है। निहंगों का कहना है कि उनका मकसद सरकार तक अपना संदेश और विरोध दर्ज कराना है।

NHAI के टोल पर ऐतराज नहीं, हिमाचल का टैक्स 'गुंडा टैक्स' 
निहंगों का कहना है कि उनका विरोध किसी भी टोल टैक्स के खिलाफ नहीं है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी NHAI जो टैक्स लेती है उसके बदले में अच्छी सड़कें और सुविधाएं देती है। इसलिए NHAI के टोल को लेकर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।

लेकिन हिमाचल प्रदेश सरकार जो राज्य की सीमा पर एंट्री टैक्स वसूल रही है, उसे उन्होंने 'गुंडा टैक्स' करार दिया है। निहंगों का आरोप है कि इस टैक्स के नाम पर व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों और आम यात्रियों पर बेवजह आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। हिमाचल में सबसे ज्यादा ट्रैफिक पंजाब और हरियाणा से जाता है, इसलिए इस टैक्स की सबसे ज्यादा मार इन्हीं दो राज्यों के लोगों पर पड़ रही है।

सरकार को खुली चेतावनी
तरना दल के निहंगों ने हिमाचल और पंजाब दोनों सरकारों को चेतावनी दी है। उनका कहना है कि अगर उनके इस शांतिपूर्ण और स्वैच्छिक विरोध को रोकने की कोशिश की गई तो नतीजे अच्छे नहीं होंगे। निहंग सिंह अपनी पारंपरिक वेशभूषा और शस्त्रों के साथ हाईवे पर मौजूद हैं, जिससे माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है।

फिलहाल पुलिस प्रशासन अलर्ट पर है। थाना प्रभारी इंस्पेक्टर राहुल शर्मा अपनी टीम के साथ हालात पर लगातार नजर रख रहे हैं। पुलिस की कोशिश है कि कानून व्यवस्था न बिगड़े और हाईवे पर ट्रैफिक सुचारू रूप से चलता रहे। अभी तक कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है क्योंकि निहंग भी जबरदस्ती नहीं कर रहे हैं।

क्या है हिमाचल का एंट्री टैक्स विवाद? पूरी कहानी समझिए 
हिमाचल प्रदेश में बाहर से आने वाले वाहनों से एंट्री टैक्स वसूलने की परंपरा बरसों पुरानी है। यह टैक्स राज्य सरकार की आय का एक बड़ा जरिया है।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई
1. साल 2025: हिमाचल सरकार ने एंट्री टैक्स में मामूली बढ़ोतरी की थी। उस समय विरोध हुआ लेकिन मामला शांत हो गया था।  

2. फरवरी 2026: सरकार ने नई टोल नीति जारी की। इस नीति में एंट्री टैक्स की दरों में भारी इजाफा कर दिया गया। छोटे वाहनों से लेकर भारी वाहनों तक, सब पर टैक्स बढ़ा दिया गया।  

3. उग्र विरोध: हिमाचल में सबसे ज्यादा पर्यटक और मालवाहक वाहन पंजाब और हरियाणा से आते हैं। टैक्स में भारी बढ़ोतरी से ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ गया। इसका सीधा असर माल के दाम पर पड़ा। इसलिए पंजाब और हरियाणा के ट्रांसपोर्ट यूनियन, व्यापारी संगठनों और किसान संगठनों ने उग्र विरोध शुरू कर दिया।  

4. सरकार का दखल: विवाद इतना बढ़ा कि 31 मार्च 2026 को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को खुद दखल देना पड़ा। उन्होंने निजी कारों और कुछ यात्री वाहनों पर लगाई गई बढ़ोतरी को वापस लेने का ऐलान किया।

मौजूदा टैक्स की दरें क्या हैं
सरकार ने आंशिक राहत दी है, फिर भी टैक्स वसूला जा रहा है। मौजूदा दरें इस प्रकार हैं:  
- कार, जीप, वैन: 100 रुपये 
-  
- 6 से 12 सीट वाले वाहन: 130 रुपये  
- ट्रैक्टर: 100 रुपये  
- भारी वाहन, ट्रक, बस: 800 रुपये तक  

निहंगों और व्यापारी संगठनों की मांग है कि यह टैक्स पूरी तरह से खत्म किया जाए। सिर्फ कमी करने से काम नहीं चलेगा।

व्यापार पर असर और ट्रांसपोर्टरों का दर्द
हिमाचल प्रदेश सेब, आलू और ऑफ सीजन सब्जियों के लिए जाना जाता है। पंजाब और हरियाणा के हजारों व्यापारी रोज यह माल खरीदने हिमाचल जाते हैं। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि एंट्री टैक्स बढ़ने से एक ट्रक पर 800 से 1000 रुपये का अतिरिक्त खर्च आ रहा है।

एक ट्रांसपोर्टर के मुताबिक, पहले दिल्ली से शिमला माल ले जाने का खर्च 18,000 रुपये था, जो अब टैक्स और डीजल की बढ़ोतरी के बाद 20,500 रुपये तक पहुंच गया है। यह बढ़ा हुआ बोझ आखिर में आम ग्राहक पर पड़ता है। सेब, टमाटर, मटर महंगे हो जाते हैं।

पंजाब के किसान भी नाराज हैं। हिमाचल की मंडियों में पंजाब से गेहूं, धान और कपास जाता है। टैक्स की वजह से उनकी फसल की कीमत में प्रतिस्पर्धा कम हो जाती है।

विवाद का राजनीतिक रंग
यह विवाद अब सिर्फ आर्थिक नहीं रहा, इसे राजनीतिक रंग भी मिल गया है। पंजाब के विपक्षी दलों ने हिमाचल सरकार पर तीखा हमला बोला है। उनका कहना है कि कांग्रेस शासित हिमाचल सरकार जानबूझकर पंजाब के लोगों पर बोझ डाल रही है।

दूसरी तरफ, हिमाचल सरकार का तर्क है कि राज्य की आर्थिक हालत ठीक नहीं है। प्राकृतिक आपदाओं और कर्ज के कारण खजाना खाली है। राज्य के विकास और सड़कों की मरम्मत के लिए यह टैक्स जरूरी है। बाहर के वाहन सड़कों को नुकसान पहुंचाते हैं, इसलिए वसूली जायज है।

तरना दल ने ऐलान किया है कि जब तक हिमाचल सरकार इस 'गुंडा टैक्स' को पूरी तरह बंद नहीं करेगी, तब तक कीरतपुर साहिब में उनका 'खालसा राज टैक्स' चलता रहेगा। वे आने वाले दिनों में इस विरोध को और तेज करने की तैयारी भी कर रहे हैं। दूसरे किसान और व्यापारी संगठन भी उन्हें समर्थन दे रहे हैं।

पुलिस और प्रशासन की दुविधा  
पंजाब पुलिस के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बन गई है। एक तरफ निहंग कह रहे हैं कि वे जोर जबरदस्ती नहीं कर रहे, सिर्फ स्वैच्छिक दान ले रहे हैं। भारतीय कानून के मुताबिक सड़क पर रोककर पैसे मांगना कानूनी नहीं है, लेकिन अगर कोई स्वेच्छा से दे तो उसे दान माना जा सकता है।

दूसरी तरफ, अगर पुलिस कार्रवाई करती है तो धार्मिक भावनाएं भड़क सकती हैं और मामला और बिगड़ सकता है। फिलहाल पुलिस 'वेट एंड वॉच' की नीति अपना रही है। अधिकारी दोनों पक्षों से बातचीत करके रास्ता निकालने की कोशिश में हैं।

इतिहास में ऐसे विरोध के उदाहरण
यह पहली बार नहीं है जब टैक्स के खिलाफ इस तरह का अनोखा विरोध हुआ हो। 2017 में भी पंजाब के किसान संगठनों ने टोल प्लाजा पर कब्जा कर लिया था। उस समय सरकार को झुकना पड़ा था। निहंग पंथ का इतिहास भी ऐसे विरोधों से भरा है। मुगल काल और अंग्रेजों के समय भी निहंगों ने जजिया कर और दूसरे टैक्सों का विरोध किया था। 

'खालसा राज' की अवधारणा सिख इतिहास में गहरी है। 18वीं सदी में जब सिख मिसलों का राज था, तब 'राखी प्रणाली' चलती थी। लोग सुरक्षा के बदले स्वेच्छा से कर देते थे। निहंग उसी परंपरा का हवाला दे रहे हैं।

आगे क्या हो सकता है
1. बातचीत का रास्ता: हिमाचल और पंजाब सरकार आपस में बात करके कोई बीच का रास्ता निकाल सकती हैं। केंद्र सरकार भी दखल दे सकती है।  

2. कोर्ट में मामला: व्यापारी संगठन इस टैक्स को हाईकोर्ट में चुनौती दे सकते हैं। अगर कोर्ट ने स्टे दिया तो वसूली रुक जाएगी।  
3. विरोध का विस्तार: अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो यह विरोध दूसरे बॉर्डर पॉइंट्स जैसे ऊना, स्वारघाट तक फैल सकता है।  

हिमाचल का एंट्री टैक्स विवाद अब अंतरराज्यीय मुद्दा बन चुका है। एक तरफ राज्य की आय का सवाल है, तो दूसरी तरफ लाखों व्यापारियों, किसानों और ट्रांसपोर्टरों के हित का सवाल है। निहंगों द्वारा शुरू किया गया 'खालसा राज टैक्स' सरकार पर दबाव बनाने का एक नया तरीका है। यह विरोध कितना लंबा चलेगा और सरकार इसका क्या हल निकालेगी, इस पर सबकी नजर रहेगी। फिलहाल कीरतपुर साहिब का हाईवे इस अनोखे विरोध का केंद्र बना हुआ है। 

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 3 Jun 2026
June 03, 2026

મંજૂરી 6 રૂમની, ચલાવતા હતા 24... એક જ ગેટ અને બેઝમેન્ટના તાળાએ લીધા 21 જીવ: માલવીય નગર હોટલ અગ્નિકાંડની ભયાવહ અંદરની કહાણી

મંજૂરી 6 રૂમની, ચલાવતા હતા 24... એક જ ગેટ અને બેઝમેન્ટના તાળાએ લીધા 21 જીવ: માલવીય નગર હોટલ અગ્નિકાંડની ભયાવહ અંદરની કહાણી
- Friday World 3 Jun 2026
દિલ્હી - દિલ્હીના માલવીય નગરમાં બુધવારની સવાર કાળ બનીને આવી. એક હોટલમાં લાગેલી ભીષણ આગે 21 નિર્દોષ લોકોના જીવ લઈ લીધા. આ માત્ર આગની ઘટના નહોતી, પરંતુ બેદરકારી, લાલચ અને નિયમોના ધજાગરા ઉડાવવાનું જીવતું-જાગતું ઉદાહરણ હતી. જે ઈમારતમાં માત્ર 6 રૂમના 'બેડ એન્ડ બ્રેકફાસ્ટ' ચલાવવાની મંજૂરી હતી, ત્યાં 4 ગણા એટલે કે 24 રૂમની હોટલ ધમધમતી હતી. એક જ ગેટ, ફાયર NOC નહીં અને બેઝમેન્ટમાં તાળું... આ ત્રણ નહીં, પરંતુ પાંચ-પાંચ કારણોએ આ દુર્ઘટનાને આમંત્રણ આપ્યું. 

સવારના 8:50 વાગ્યે મોતનો તાંડવ શરૂ થયો

બુધવાર, સવારના લગભગ 8:50 વાગ્યાનો સમય. માલવીય નગરની સાંકડી ગલીઓમાં આવેલી 'ફ્લરિશ ઇન' હોટલમાં લોકો પોતાના રોજિંદા કામમાં વ્યસ્ત હતા. આ હોટલમાં મોટાભાગે નજીકની ખાનગી હોસ્પિટલોમાં સારવાર માટે આવતા દર્દીઓ અને તેમના સગા-સંબંધીઓ રોકાતા હતા. કેટલાક વિદેશી નાગરિકો પણ અહીં ઉતર્યા હતા. અચાનક બેઝમેન્ટમાંથી ધુમાડાના ગોટેગોટા નીકળવા લાગ્યા. જોતજોતામાં આગે વિકરાળ સ્વરૂપ ધારણ કરી લીધું અને 4 માળની આખી ઈમારતને લપેટમાં લઈ લીધી. 

આગ એટલી ભયાનક હતી કે લોકોને સંભાળવાની તક પણ ન મળી. કેટલાક લોકો જીવતા ભુંજાઈ ગયા, તો કેટલાક ધુમાડાના કારણે ગૂંગળાઈને મોતને ભેટ્યા. જીવ બચાવવા માટે કેટલાક લોકોએ ત્રીજા અને ચોથા માળેથી છલાંગ લગાવી દીધી. ચીસો, રડવાનો અવાજ અને ધુમાડાથી આખો વિસ્તાર ભયના ઓથાર હેઠળ આવી ગયો. ફાયર બ્રિગેડને જાણ થતાં જ ટીમ ઘટનાસ્થળે પહોંચી, પરંતુ ત્યાં સુધીમાં ઘણું મોડું થઈ ચૂક્યું હતું. 

દુર્ઘટના પાછળના 5 ચોંકાવનારા કારણો

પ્રાથમિક તપાસમાં જે હકીકતો સામે આવી છે તે હચમચાવી દેનારી છે. આ આગ કોઈ અકસ્માત નહીં, પરંતુ સિસ્ટમની નિષ્ફળતા અને સંચાલકોની ગુનાહિત બેદરકારીનું પરિણામ હોવાનું સ્પષ્ટ દેખાય છે. 

1. લાઇસન્સ 6 રૂમનું, હોટલ ચાલતી હતી 24 રૂમની
'ફ્લરિશ ઇન' હોટલને 'બેડ એન્ડ બ્રેકફાસ્ટ' સ્કીમ હેઠળ માત્ર 6 રૂમ ચલાવવાની મંજૂરી મળી હતી. B&B એટલે નાના સ્તર પર ઘરમાં જ મહેમાનોને રાખવાની સુવિધા. પરંતુ હોટલ માલિકે નિયમોને નેવે મૂકીને 4 માળની ઈમારતમાં 24 રૂમ બનાવી દીધા હતા. ઘટના સમયે મોટાભાગના રૂમ ભરેલા હતા. વધુ નફો કમાવવાની લાલચે 21 લોકોના જીવ જોખમમાં મૂકી દીધા. 

2. ફાયર સેફ્ટીના નામે મીંડું: NOC જ નહોતી
સૌથી ચોંકાવનારી બાબત એ છે કે આટલી મોટી હોટલ પાસે ફાયર વિભાગનું NOC એટલે કે 'નો ઓબ્જેક્શન સર્ટિફિકેટ' જ નહોતું. એટલે કે આગ બુઝાવવાના સાધનો, ફાયર એલાર્મ, સ્પ્રિંકલર સિસ્ટમ જેવી કોઈ જ વ્યવસ્થા ત્યાં નહોતી. આગ લાગી ત્યારે લોકોને ચેતવવા માટે કોઈ એલાર્મ વાગ્યું નહીં અને આગ પર કાબૂ મેળવવા માટે પ્રાથમિક સાધનો પણ ઉપલબ્ધ ન હતા. 

3. આવવા-જવાનો એક જ રસ્તો, મોતનું પિંજરું બની ગઈ ઈમારત
4 માળની આ ઈમારતમાં પ્રવેશ અને બહાર નીકળવા માટે માત્ર એક જ ગેટ હતો. આગ લાગ્યા બાદ ધુમાડો અને ભાગદોડના કારણે આ એકમાત્ર ગેટ પર લોકો ફસાઈ ગયા. ઉપરના માળે રોકાયેલા લોકો નીચે ઉતરી જ ન શક્યા. ઈમરજન્સી એક્ઝિટની કોઈ જ સુવિધા ન હોવાથી હોટલ મોતના પિંજરામાં ફેરવાઈ ગઈ. 

4. બેઝમેન્ટમાં ચાલતું હતું રસોડું, દરવાજે માર્યું હતું તાળું
સ્થાનિક લોકોના જણાવ્યા મુજબ, ઈમારતના બેઝમેન્ટમાં ગેરકાયદેસર રીતે રસોડું ચલાવવામાં આવતું હતું. એટલું જ નહીં, બેઝમેન્ટમાં કેટલાક રૂમ પણ બનાવેલા હતા જેમાં લોકો રોકાયા હતા. આગ લાગી ત્યારે બેઝમેન્ટના ગેટ પર તાળું મારેલું હતું. બચાવ કામગીરી માટે પહોંચેલી ફાયરની ટીમે તાળું તોડીને અંદર ફસાયેલા લોકોને બહાર કાઢ્યા, પરંતુ ત્યાં સુધીમાં ઘણા લોકો ગૂંગળાઈને મૃત્યુ પામ્યા હતા. 

5. ધુમાડો બહાર નીકળવાની જગ્યા જ નહીં, ઈમારત બની 'ચીમની'
સાઉથ ઝોનના ચીફ ફાયર ઑફિસર એ.કે. મલિકે ઘટનાસ્થળની મુલાકાત લીધા બાદ જણાવ્યું કે આખી ઈમારત ચારેબાજુથી સીલ પેક હતી. "મેં આખી ઇમારત ઉપરથી નીચે સુધી જોઈ છે, કોઈ એવી જગ્યા નહોતી જ્યાંથી ધુમાડો બહાર નીકળી શકે. આ પ્રકારની ઇમારત આગ લાગવાના સમયે ચીમનીની જેમ કામ કરે છે." એટલે કે આગ અને ધુમાડો ઝડપથી ઉપરના માળે પહોંચી ગયા અને લોકોને બહાર નીકળવાનો મોકો જ ન મળ્યો. વેન્ટિલેશનનો સંપૂર્ણ અભાવ આટલા મોટા મોતનું મુખ્ય કારણ બન્યો. 

જીવ બચાવવા બારીમાંથી કૂદ્યા, 39 લોકોને બચાવાયા

ફાયર વિભાગની ટીમે ખૂબ જ હિંમતથી કામગીરી કરી. ફાયરમેનોએ પોતાનો જીવ જોખમમાં મૂકીને 39 લોકોને CATS એમ્બ્યુલન્સ મારફતે બહાર કાઢીને અલગ-અલગ હોસ્પિટલમાં ખસેડ્યા. આ બચાવ કામગીરી દરમિયાન એક ફાયરમેન પણ ઘાયલ થયો હતો. પ્રત્યક્ષદર્શીઓના જણાવ્યા મુજબ, કેટલાક લોકોએ જીવ બચાવવા માટે બારીઓના કાચ તોડીને નીચે છલાંગ લગાવી દીધી હતી. હોસ્પિટલમાં સારવાર લઈ રહેલા ઘણા લોકોની હાલત હજુ પણ ગંભીર છે. 

ઉપહાર કાંડની યાદ અપાવતી દુર્ઘટના, MCD કડક કાર્યવાહીના મૂડમાં

આ દુર્ઘટનાએ દિલ્હીના લોકોને 1997ના ઉપહાર સિનેમા અગ્નિકાંડની યાદ અપાવી દીધી છે. ઉપહાર કાંડમાં પણ બહાર નીકળવાના દરવાજા બંધ હોવાના કારણે 59 લોકોના મોત થયા હતા. માલવીય નગરની આ ઘટનાને દિલ્હીની ત્રણ સૌથી મોટી આગની ઘટનાઓમાંની એક માનવામાં આવી રહી છે. 

ઘટના બાદ દિલ્હી મ્યુનિસિપલ કોર્પોરેશન એટલે કે MCD હરકતમાં આવી છે. MCDના અધિકારીઓએ જણાવ્યું છે કે શહેરમાં ગેરકાયદેસર રીતે ચાલતી હોટલો અને ગેસ્ટ હાઉસ સામે કડક કાર્યવાહી કરવામાં આવશે. જે ઈમારતોમાં ફાયર સેફ્ટીના નિયમોનું પાલન નહીં થતું હોય તેને તાત્કાલિક સીલ કરવામાં આવશે. 

સવાલો અનેક, જવાબ કોણ આપશે?

આ દુર્ઘટના બાદ અનેક સવાલો ઉભા થાય છે. શું ફક્ત 6 રૂમની મંજૂરી ધરાવતી હોટલમાં 24 રૂમ કેવી રીતે ચાલતા હતા? MCD અને ફાયર વિભાગના અધિકારીઓની નજરથી આ બધું કેવી રીતે છૂપું રહ્યું? ફાયર NOC વગર વર્ષોથી હોટલ કેવી રીતે ધમધમતી હતી? બેઝમેન્ટમાં ગેરકાયદેસર રસોડું અને રૂમ બનાવવાની મંજૂરી કોણે આપી? 

આ સવાલોના જવાબ હજુ મળવાના બાકી છે. પરંતુ એક વાત નક્કી છે કે, તંત્રની મીલીભગત અને હોટલ માલિકની લાલચે 21 પરિવારોના માળા વિખેરી નાખ્યા. હોસ્પિટલમાં પોતાના સ્વજનોની સારવાર કરાવવા આવેલા લોકોએ સપનામાં પણ નહીં વિચાર્યું હોય કે તેઓ જે હોટલમાં રાત વિતાવી રહ્યા છે, તે જ તેમની કાયમી કબર બની જશે. 

સરકારે આ ઘટનાની ઉચ્ચ સ્તરીય તપાસના આદેશ આપ્યા છે અને મૃતકોના પરિવારજનોને સહાયની જાહેરાત કરી છે. પરંતુ સવાલ એ છે કે શું આ સહાયથી ગયેલા જીવ પાછા આવશે? શું ઉપહાર અને હવે માલવીય નગર કાંડમાંથી તંત્ર કોઈ બોધપાઠ લેશે? કે પછી આગામી કોઈ મોટી દુર્ઘટનાની રાહ જોવાશે? સમય જ કહેશે. હાલ તો આખું દિલ્હી આ દર્દનાક ઘટનાથી હચમચી ગયું છે. 

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 3 Jun 2026

Tuesday, 2 June 2026

June 02, 2026

કુંભારામાં પ્રેમપ્રકરણ બન્યું જીવલેણ? ઝાડે લટકતી લાશ મળી, પરિવારનો આક્ષેપ: આત્મહત્યા નહીં, હત્યા છે! FIR વિના લાશ સ્વીકારવાનો ઇનકાર

કુંભારામાં પ્રેમપ્રકરણ બન્યું જીવલેણ? ઝાડે લટકતી લાશ મળી, પરિવારનો આક્ષેપ: આત્મહત્યા નહીં, હત્યા છે! FIR વિના લાશ સ્વીકારવાનો ઇનકાર
- Friday World 3 Jun 2026
બોટાદ જિલ્લાના કુંભારા ગામમાંથી એક ચોંકાવનારો કિસ્સો સામે આવ્યો છે. વાડી વિસ્તારમાં ઝાડ સાથે લટકતી હાલતમાં યુવકની લાશ મળતા સમગ્ર પંથકમાં ચકચાર મચી ગઈ છે. પોલીસ આ ઘટનાને આત્મહત્યા માની તપાસ કરી રહી છે, જ્યારે મૃતકના પરિવારજનો સ્પષ્ટપણે હત્યાનો આક્ષેપ કરી રહ્યા છે. પોલીસ દ્વારા FIR નોંધવામાં ન આવતા પરિવારે પોસ્ટમોર્ટમ બાદ પણ લાશ સ્વીકારવાનો ઇનકાર કરી દેતા મામલો વધુ ગરમાયો છે.

ઘટનાની શરૂઆત કેવી રીતે થઈ?
પાળીયાદ પોલીસને બાતમી મળી હતી કે બોટાદ તાલુકાના કુંભારા ગામની સીમમાં આવેલ એક વાડીમાં ઝાડ સાથે એક યુવકની લાશ લટકી રહી છે. માહિતી મળતા જ પાળીયાદ પોલીસ સ્ટેશનનો સ્ટાફ તાત્કાલિક ઘટના સ્થળે દોડી ગયો હતો. પોલીસે પંચનામું કરી લાશની ઓળખ કરવાની કામગીરી હાથ ધરી હતી. તપાસ દરમિયાન મૃતકની ઓળખ હાર્દિકભાઈ મનસુખભાઈ દુમાદીયા તરીકે થઈ હતી. 

હાર્દિકના મોતના સમાચાર વાયુવેગે તેના પરિવાર સુધી પહોંચ્યા હતા. દીકરાના મોતની જાણ થતાં જ પરિવારજનો હૈયાફાટ રૂદન સાથે ઘટના સ્થળે પહોંચી ગયા હતા. પોલીસે કાયદેસરની કાર્યવાહી કરી લાશને ઝાડ પરથી નીચે ઉતારી હતી અને વધુ તપાસ માટે પોસ્ટમોર્ટમ અર્થે ભાવનગરની સરકારી હોસ્પિટલમાં મોકલી આપી હતી.

પરિવારનો ગંભીર આક્ષેપ: આત્મહત્યા નહીં, આયોજનબદ્ધ હત્યા
પોલીસ ઘટનાને આત્મહત્યા તરીકે જોઈ રહી હતી, પરંતુ લાશ જોતા જ પરિવારજનો ચોંકી ઉઠ્યા હતા. પરિવારનું માનવું છે કે હાર્દિક આત્મહત્યા કરે તેવો છોકરો નહોતો. તેની હત્યા કરી અને આત્મહત્યાનું રૂપ આપવા માટે લાશને ઝાડ સાથે લટકાવી દેવામાં આવી છે. 

આ આક્ષેપ સાથે હાર્દિકના પરિવારજનો સીધા પાળીયાદ પોલીસ સ્ટેશને પહોંચ્યા હતા. તેમણે પોલીસ સમક્ષ લેખિત ફરિયાદ આપીને સ્પષ્ટ જણાવ્યું કે હાર્દિકનું મોત આત્મહત્યાથી નહીં પણ હત્યાથી થયું છે. પરિવારે હત્યાનો ગુનો નોંધી તાત્કાલિક આરોપીઓની ધરપકડ કરવાની માંગ કરી હતી.

પ્રેમપ્રકરણ અને ધમકી: હત્યા પાછળનું કારણ?
પરિવારજનોએ પોલીસને હત્યા પાછળનું સંભવિત કારણ પણ જણાવ્યું હતું. તેમના જણાવ્યા મુજબ, હાર્દિકને એક યુવતી સાથે પ્રેમસંબંધ હતો. આ વાતની જાણ યુવતીના પરિવારને થઈ ગઈ હતી. પ્રેમસંબંધની જાણ થયા બાદ યુવતીનો પરિવાર રોષે ભરાયો હતો. 

પરિવારનો આક્ષેપ છે કે થોડા સમય પહેલા જ યુવતીના પરિવારજનો હાર્દિકના ઘરે ધસી આવ્યા હતા. તેમણે હાર્દિકને અને તેના પરિવારને ગાળો ભાંડી હતી, માર મારવાની ધમકી આપી હતી અને જાનથી મારી નાખવાની પણ ખુલ્લી ધમકી આપી હતી. આ ઘટના બાદ પરિવાર ડરેલા રહેતો હતો.

ગુમ થયાનો સિલસિલો અને શંકાસ્પદ સંજોગો
મૃત્યુના દિવસની ઘટના વિશે પરિવારે જણાવ્યું કે હાર્દિક ઘરેથી ફોન પર કોઈની સાથે વાત કરતો કરતો બહાર નીકળ્યો હતો. લાંબો સમય થવા છતાં તે ઘરે પરત ન ફરતા પરિવારજનોએ તેની શોધખોળ શરૂ કરી હતી. આસપાસમાં અને સગા સંબંધીઓને ત્યાં તપાસ કરવા છતાં હાર્દિકનો કોઈ પત્તો નહોતો લાગ્યો. 

દરમિયાન ગામ લોકો દ્વારા પરિવારને જાણ થઈ કે વાડી વિસ્તારમાં એક લાશ લટકતી હાલતમાં મળી છે. પરિવાર ત્યાં દોડી ગયો અને લાશ હાર્દિકની હોવાની ઓળખ થઈ. પરિવારનું માનવું છે કે યુવતીના પરિવારજનોએ જૂની અદાવત રાખીને હાર્દિકનું અપહરણ કર્યું, તેની હત્યા કરી અને ત્યારબાદ પુરાવાનો નાશ કરવા અને કેસને આત્મહત્યામાં ખપાવવા માટે લાશને ઝાડ સાથે લટકાવી દીધી.

FIR ન નોંધાતા વિવાદ વકર્યો
પરિવારની લેખિત ફરિયાદ છતાં પાળીયાદ પોલીસ દ્વારા હત્યાનો ગુનો ન નોંધાતા પરિવારમાં ભારે રોષ ફેલાયો છે. પોલીસ હાલ આકસ્મિક મોતનો ગુનો નોંધી તપાસ કરી રહી છે. પોલીસનું કહેવું છે કે PM રિપોર્ટ આવ્યા બાદ અને તમામ પાસાઓની તપાસ કર્યા પછી આગળની કાર્યવાહી કરવામાં આવશે.

બીજી તરફ, પોલીસની આ કાર્યવાહીથી નારાજ પરિવારજનોએ કડક વલણ અપનાવ્યું છે. ભાવનગર હોસ્પિટલમાં હાર્દિકનું પોસ્ટમોર્ટમ પૂર્ણ થઈ ગયું હોવા છતાં પરિવારે લાશ સ્વીકારવાનો સ્પષ્ટ ઇનકાર કરી દીધો છે. પરિવારજનોની એક જ માંગ છે કે પહેલા તેમની ફરિયાદના આધારે હત્યાનો ગુનો નોંધવામાં આવે અને શંકાસ્પદ આરોપીઓની તાત્કાલિક ધરપકડ કરવામાં આવે. 

ફોટોગ્રાફ્સ બન્યા શંકાનું કારણ
પરિવારજનોનું કહેવું છે કે તેમણે ઘટના સ્થળના ફોટોગ્રાફ્સ જોયા છે. આ ફોટા જોતા સ્પષ્ટ થાય છે કે આ આત્મહત્યા ન હોઈ શકે. લાશની સ્થિતિ, શરીર પરના નિશાન અને આસપાસના સંજોગો શંકા ઉપજાવે તેવા છે. પરિવારનો દાવો છે કે કોઈ વ્યક્તિ પોતે આવી રીતે ગળેફાંસો ખાઈ શકે નહીં. આથી તેમને પૂર્ણ વિશ્વાસ છે કે હાર્દિકની હત્યા કરવામાં આવી છે.

શું છે પરિવારની માંગ?
હાલ સમગ્ર પરિવાર ભારે આઘાતમાં છે. દીકરો ગુમાવવાના દુઃખ સાથે ન્યાય માટે લડી રહ્યો છે. પરિવારે ચીમકી ઉચ્ચારી છે કે જ્યાં સુધી પોલીસ હત્યાનો ગુનો નહીં નોંધે અને જે લોકોના નામ તેમણે ફરિયાદમાં આપ્યા છે તેમની ધરપકડ નહીં થાય, ત્યાં સુધી તેઓ હાર્દિકની લાશનો સ્વીકાર કરશે નહીં અને અંતિમ સંસ્કાર કરશે નહીં.

આગળ શું?
આ ઘટનાએ અનેક સવાલો ઉભા કર્યા છે. શું ખરેખર આ પ્રેમપ્રકરણમાં હત્યા થઈ છે? જો હત્યા થઈ હોય તો પોલીસ FIR કેમ નથી નોંધી રહી? PM રિપોર્ટમાં શું સામે આવશે? શું પોલીસ ઉચ્ચ અધિકારીઓની દરમિયાનગીરી બાદ પરિવારની ફરિયાદના આધારે ગુનો નોંધશે? 

હાલ તો લાશ ભાવનગર હોસ્પિટલના કોલ્ડ સ્ટોરેજમાં છે અને પરિવાર ન્યાયની રાહ જોઈ રહ્યો છે. આ કેસમાં પોલીસ તપાસ અને PM રિપોર્ટ ખૂબ મહત્વના પુરવાર થશે. જો રિપોર્ટમાં હત્યાના પુરાવા મળશે તો પોલીસે ફરજિયાત હત્યાનો ગુનો નોંધવો પડશે. સમગ્ર બોટાદ પંથકની નજર હવે પોલીસની આગામી કાર્યવાહી પર ટકેલી છે. 


Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 3 Jun 2026
June 02, 2026

अमेरिका में 'ऑपरेशन चेकमेट' का कहर: 30 भारतीय ट्रक ड्राइवर समेत 52 गिरफ्तार, तुरंत देश निकाला तय, अवैध इमिग्रेशन पर बाइडेन युग के EAD भी बेअसर

अमेरिका में 'ऑपरेशन चेकमेट' का कहर: 30 भारतीय ट्रक ड्राइवर समेत 52 गिरफ्तार, तुरंत देश निकाला तय, अवैध इमिग्रेशन पर बाइडेन युग के EAD भी बेअसर
- Friday World 2 Jun 2026
अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे अप्रवासियों पर अब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन का शिकंजा और कसता जा रहा है। खासतौर पर उन कमर्शियल ड्राइवरों को निशाना बनाया जा रहा है जो बिना वैध दस्तावेजों के अमेरिकी सड़कों पर ट्रक चला रहे हैं। ताजा कार्रवाई में US बॉर्डर पेट्रोल ने एरिजोना के युमा सेक्टर में 'ऑपरेशन चेकमेट' चलाकर 52 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें सबसे ज्यादा 30 नागरिक भारतीय हैं जो ट्रक ड्राइवर के तौर पर काम कर रहे थे। 

क्या है 'ऑपरेशन चेकमेट' जिसने मचाई खलबली?

US कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) के मुताबिक यह पूरा ऑपरेशन 11 मई से 15 मई के बीच चलाया गया। इसका मकसद साफ है: उन सभी कमर्शियल मोटर व्हीकल ऑपरेटर्स को पकड़ना जो गैरकानूनी तरीके से अमेरिका में रह रहे हैं और भारी वाहनों को चला रहे हैं। 

युमा सेक्टर बॉर्डर पेट्रोल ने इस दौरान हाईवे पर चलने वाले कमर्शियल ट्रकों की सघन जांच की। जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। 

गिरफ्तारी का पूरा ब्यौरा:
- कुल गिरफ्तारियां: 52 
- भारतीय नागरिक: 30 
- अन्य देश: 6 लोग मेक्सिको, अल साल्वाडोर और रूस से 
- बिना लाइसेंस: 3 ड्राइवरों के पास किसी भी तरह का ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था 

बाइडेन युग के EAD अब रद्दी कागज? 

इस कार्रवाई में सबसे बड़ा खुलासा 'एम्प्लॉयमेंट ऑथराइजेशन डॉक्यूमेंट' यानी EAD को लेकर हुआ। गिरफ्तार किए गए ज्यादातर भारतीय ड्राइवरों ने बताया कि उनके पास EAD मौजूद है। ये दस्तावेज उन्हें जो बाइडेन प्रशासन के कार्यकाल में मिले थे। 

लेकिन अब ट्रंप प्रशासन ने साफ कर दिया है कि पुराने EAD मान्य नहीं होंगे। अगर कोई व्यक्ति अवैध रूप से अमेरिका में दाखिल हुआ है, तो सिर्फ EAD के दम पर वह कमर्शियल ड्राइविंग नहीं कर सकता। नियमों में सख्ती के बाद इन सभी EAD को अमान्य घोषित कर दिया गया है। यही वजह है कि वैध वर्क परमिट दिखाने के बावजूद इन 30 भारतीयों को हिरासत में ले लिया गया।

क्यों लिया गया इतना कड़ा एक्शन? 

US बॉर्डर पेट्रोल के एक्टिंग चीफ पेट्रोलिंग एजेंट डस्टिन डब्ल्यू. कोडले ने इस ऑपरेशन के पीछे की वजह बताई। उनके मुताबिक इसका मकसद सिर्फ इमिग्रेशन कानून लागू करना नहीं है। 

1. सार्वजनिक सुरक्षा सर्वोपरि: अमेरिकी सड़कों को सुरक्षित बनाना पहली प्राथमिकता है। बिना ट्रेनिंग और बिना वैध लाइसेंस के 18 पहियों वाले भारी ट्रक चलाना सीधे तौर पर हजारों लोगों की जान जोखिम में डालना है। 

2. घातक हादसों पर लगाम: पिछले कुछ महीनों में अवैध भारतीय ट्रक ड्राइवरों की वजह से कई जानलेवा सड़क हादसे हुए हैं। इन घटनाओं के बाद प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया था। 

कोडले ने दो टूक कहा कि गिरफ्तार किए गए सभी लोगों के खिलाफ फेडरल कानून के तहत कार्रवाई होगी और प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें डिपोर्ट कर दिया जाएगा। 

वो 2 हादसे जिन्होंने बदल दिया पूरा खेल 

अमेरिका में ट्रकिंग इंडस्ट्री बहुत बड़ी है, लेकिन कुछ घटनाओं ने अवैध ड्राइवरों को लेकर माहौल बेहद सख्त कर दिया। 

1. कैलिफोर्निया हादसा, अक्टूबर 2025:
जशनप्रीत सिंह नाम के एक भारतीय ड्राइवर ने नशे की हालत में ट्रक चलाते हुए एक SUV को टक्कर मार दी। इस भीषण हादसे में 3 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। जांच में सामने आया कि जशनप्रीत 2022 में मेक्सिको बॉर्डर से अवैध रूप से अमेरिका में दाखिल हुआ था। उसके पास कमर्शियल लाइसेंस भी नहीं था। 

2. फ्लोरिडा हादसा, अगस्त 2025:
हरजिंदर सिंह नाम के ड्राइवर ने हाईवे पर गलत तरीके से U-Turn ले लिया। पीछे से तेज रफ्तार में आ रही कारें ट्रक से टकरा गईं और 3 लोगों ने जान गंवा दी। हरजिंदर भी वैध दस्तावेजों के बिना ट्रक चला रहा था। 

इन दोनों मामलों के बाद अमेरिकी संसद और स्थानीय मीडिया में अवैध कमर्शियल ड्राइवरों का मुद्दा जोर-शोर से उठा। 'ऑपरेशन चेकमेट' उसी का नतीजा माना जा रहा है। 

भारतीय ट्रक ड्राइवर क्यों बनते हैं निशाना? 

अमेरिका में ट्रक ड्राइवर की भारी कमी है। अमेरिकन ट्रकिंग एसोसिएशन के अनुसार, देश में 80,000 से ज्यादा ड्राइवरों की शॉर्टेज है। एक लॉन्ग हॉल ट्रक ड्राइवर सालाना 60,000 से 1,10,000 डॉलर यानी 50 लाख से 90 लाख रुपये तक कमा लेता है। 

ज्यादा सैलरी के लालच में कई भारतीय एजेंटों के जरिए 'डंकी रूट' से अमेरिका पहुंचते हैं। वहां पहुंचने के बाद शरण मांगकर EAD हासिल कर लेते हैं। फिर कुछ महीनों की ट्रेनिंग के बाद ट्रकिंग कंपनियों में नौकरी शुरू कर देते हैं। कई कंपनियां भी ड्राइवरों की कमी के कारण दस्तावेजों की गहराई से जांच नहीं करतीं। 

लेकिन अब नियम बदल गए हैं। DOT यानी डिपार्टमेंट ऑफ ट्रांसपोर्टेशन और बॉर्डर पेट्रोल मिलकर कमर्शियल ड्राइवरों का डेटा बेस खंगाल रहे हैं। 

आगे क्या होगा? भारतीय समुदाय पर असर 

1. तुरंत डिपोर्टेशन: CBP ने साफ किया है कि इन 52 लोगों को 'एक्सपीडाइटेड रिमूवल' के तहत देश से निकाला जाएगा। यानी लंबी कानूनी प्रक्रिया के बजाय सीधे डिपोर्ट किया जाएगा। 

2. ट्रकिंग कंपनियों पर छापे: जिन कंपनियों ने इन ड्राइवरों को बिना पूरी जांच के नौकरी पर रखा, उन पर भी 10,000 डॉलर प्रति अवैध कर्मचारी के हिसाब से जुर्माना लग सकता है। 

3. वैध भारतीय ड्राइवरों की मुश्किलें: इस कार्रवाई के बाद वैध H-1B या अन्य वर्क वीजा पर काम कर रहे भारतीय ट्रक ड्राइवरों की जांच भी सख्त हो सकती है। उन्हें बार-बार दस्तावेज दिखाने पड़ सकते हैं। 

4. EAD धारकों में डर: हजारों भारतीय जो बाइडेन के समय मिले EAD पर ट्रक चला रहे हैं, उनमें अब गिरफ्तारी का डर बैठ गया है। इमिग्रेशन वकीलों के पास सलाह के लिए कॉल्स बढ़ गई हैं। 

एक्सपर्ट्स की राय: अब क्या करें? 

इमिग्रेशन लॉ एक्सपर्ट्स का मानना है कि जिन लोगों के पास सिर्फ EAD है और वे शरणार्थी केस के फैसले का इंतजार कर रहे हैं, उन्हें तुरंत कमर्शियल ड्राइविंग बंद कर देनी चाहिए। जब तक ग्रीन कार्ड या वैध वर्क वीजा न मिल जाए, तब तक भारी वाहन चलाना जोखिम भरा है। 

एक गलती सिर्फ डिपोर्टेशन ही नहीं करवाएगी, बल्कि भविष्य में अमेरिका में एंट्री पर हमेशा के लिए बैन भी लगवा सकती है। 

 सख्ती का दौर शुरू
'ऑपरेशन चेकमेट' से ट्रंप प्रशासन ने साफ संदेश दे दिया है कि अमेरिकी सड़कों पर सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा। अवैध इमिग्रेशन और बिना लाइसेंस कमर्शियल ड्राइविंग को अब आपराधिक नजरिए से देखा जाएगा। 

30 भारतीयों की गिरफ्तारी उन हजारों युवाओं के लिए चेतावनी है जो लाखों रुपये खर्च कर अवैध रास्तों से अमेरिका पहुंचते हैं और ट्रक ड्राइवर बनने का सपना देखते हैं। अब अमेरिका का कानून बदल चुका है। बाइडेन युग की नरमी अब इतिहास बन चुकी है और 'चेकमेट' जैसे ऑपरेशन बताते हैं कि प्रशासन अब शह और मात के मूड में है। 

जो भी भारतीय अमेरिका में हैं, उनके लिए जरूरी है कि वे अपने दस्तावेज किसी इमिग्रेशन अटॉर्नी से तुरंत चेक करवाएं। कानून की जानकारी न होना अब बचाव नहीं बन सकता।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 2 Jun 2026
June 02, 2026

भारत ने होर्मुज में शुरू किया मिशन: 13 भारतीय जहाजों को सुरक्षित निकालने का ऑपरेशन तेज!

भारत ने होर्मुज में शुरू किया मिशन: 13 भारतीय जहाजों को सुरक्षित निकालने का ऑपरेशन तेज!
-Friday World 2 Jun 2026
नई दिल्ली। अमेरिका-ईरान तनाव के बीच विश्व की ऊर्जा आपूर्ति की जीवन रेखा होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे 13 भारतीय ध्वज वाले जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए भारत सरकार ने उच्च प्राथमिकता वाला व्यापक ऑपरेशन शुरू कर दिया है। यह कदम भारतीय खलासियों, नौसेना हितों और देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

विदेश मंत्रालय, पोर्ट्स-शिपिंग मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के समन्वय से चलाए जा रहे इस ऑपरेशन में हर भारतीय जहाज और उसके चालक दल की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। शिपिंग मंत्रालय के डायरेक्टर ओपेश कुमार शर्मा ने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता उन जहाजों को तुरंत निकालना है जो फिलहाल होर्मुज क्षेत्र में मौजूद हैं।

 होर्मुज संकट: पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के तेल व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण चोक पॉइंट है। यहां से लगभग 20-25% वैश्विक कच्चा तेल गुजरता है। अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव, हमलों और नौसैनिक गतिविधियों के कारण इस क्षेत्र में यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ईरान ने कई बार क्षेत्र को "बंद" करने की धमकी दी है, जबकि अमेरिका ने जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए अपनी पहल शुरू की है।

इसी बीच भारत ने अपने हितों की रक्षा के लिए स्वतंत्र और सक्रिय रणनीति अपनाई है। ओपेश कुमार शर्मा ने बताया कि **एक एलपीजी टैंकर, पांच क्रूड ऑयल टैंकर, एक केमिकल/प्रोडक्ट टैंकर, तीन कंटेनर जहाज, दो बल्क कैरियर और एक ड्रेजर** सहित कुल 13 भारतीय ध्वज वाले जहाज इस क्षेत्र में हैं।

सरकार ने इन सभी जहाजों के लिए समन्वित योजना तैयार कर ली है। नौसेना और मर्चेंट नेवी के समन्वय से इन जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान किया जा रहा है।

 सफल उदाहरण: मार्शल आइलैंड्स का टैंकर निकला

एक सकारात्मक खबर यह है कि मार्शल आइलैंड्स ध्वज वाला क्रूड ऑयल टैंकर **निसोस केरोस** (लगभग 2.7 लाख मेट्रिक टन कच्चा तेल लेकर) 25-26 मई को होर्मुज को सुरक्षित पार कर चुका है। यह 3 जून को विशाखापट्टनम पहुंचने वाला है। इस जहाज पर कोई भारतीय खलासी नहीं था, लेकिन इसका सफल ट्रांजिट क्षेत्र में तनाव के बावजूद सुरक्षित नेविगेशन की संभावना को दर्शाता है।

 खलासियों की सुरक्षा: सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता

भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय खलासी सुरक्षित हैं। अब तक किसी भी भारतीय या विदेशी ध्वज वाले वाणिज्यिक जहाज पर भारतीय नागरिकों से जुड़ी कोई अप्रिय घटना रिपोर्ट नहीं हुई है।

शिपिंग मंत्रालय के इमरजेंसी कंट्रोल सेंटर पर खलासियों और उनके परिवारों से हजारों कॉल और ईमेल आ रहे हैं। पिछले 96 घंटों में ही 500 से अधिक कॉल और 1,332 ईमेल प्राप्त हुए हैं। अब तक 3,400 से अधिक भारतीय खलासियों को क्षेत्र से सुरक्षित वापस लाया जा चुका है।

विदेश मंत्रालय ने ईरान यात्रा से बचने की सलाह दी है। ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों को राजदूतावास से संपर्क कर तुरंत निकलने की सलाह दी गई है।

ऊर्जा सुरक्षा: 30 दिनों का एलपीजी स्टॉक तैयार

इस संकट को देखते हुए तेल मंत्रालय ने रिफाइनरियों को कम से कम **30 दिनों का एलपीजी स्टोरेज** बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। तीन प्रमुख ऑयल पीएसयू को अतिरिक्त स्टोरेज क्षमता बढ़ाने के लिए प्लान तैयार करने को कहा गया है। सरकार व्यूहात्मक पेट्रोलियम रिजर्व पर भी तेजी से काम कर रही है।

यह कदम घरेलू एलपीजी आपूर्ति को प्रभावित होने से बचाने और महंगाई पर नियंत्रण रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

 भारत की समुद्री कूटनीति: सक्रिय और सशक्त

भारत लंबे समय से होर्मुज संकट पर नजर रखे हुए है। ऑपरेशन संकल्प और ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा जैसे प्रयासों के तहत भारतीय नौसेना ने क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाई है। नौसेना के युद्धपोत भारतीय जहाजों को एस्कॉर्ट करने के लिए तैयार हैं।

यह ऑपरेशन केवल जहाज निकालने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की समुद्री सुरक्षा नीति की परिपक्वता को दर्शाता है। भारत न तो किसी एक पक्ष का समर्थन कर रहा है और न ही तनाव बढ़ाने का पक्ष ले रहा है। वह केवल अपने नागरिकों, जहाजों और आर्थिक हितों की रक्षा पर जोर दे रहा है।

 ऐतिहासिक संदर्भ

भारत हमेशा से खाड़ी क्षेत्र में शांति और स्थिरता का पक्षधर रहा है। लाखों भारतीय खाड़ी देशों में काम करते हैं और अरब सागर-होर्मुज मार्ग भारत की ऊर्जा आयात का मुख्य रास्ता है। 90% से अधिक कच्चा तेल इसी रास्ते से आता है। इसलिए इस क्षेत्र में कोई भी अस्थिरता सीधे भारतीय अर्थव्यवस्था, मुद्रास्फीति और विदेशी मुद्रा भंडार को प्रभावित करती है।

 आगे की चुनौतियां और रणनीति

- नौसैनिक एस्कॉर्ट: जरूरत पड़ने पर भारतीय नौसेना जहाजों को एस्कॉर्ट करेगी।

- वैकल्पिक मार्ग: लंबे रूट से जहाजों को भेजने की तैयारी।

- डिप्लोमेसी: दोनों पक्षों से बातचीत कर सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करना।

- घरेलू तैयारियां: पेट्रोलियम उत्पादों के स्टॉक बढ़ाना और आयात स्रोतों में विविधता लाना।

 उपसंहार: भारत तैयार है, सतर्क भी

होर्मुज में 13 जहाजों को निकालने का यह ऑपरेशन भारत की "सुरक्षा पहले" वाली नीति का प्रतीक है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार हर स्तर पर समन्वय बनाए हुए है। विदेश मंत्रालय, शिपिंग मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और खुफिया एजेंसियां 24x7 निगरानी रख रही हैं।

भारत दुनिया को यह संदेश दे रहा है कि वह अपने हितों की रक्षा करने में सक्षम है, लेकिन शांति और स्थिरता का पक्षधर भी है। जब तक क्षेत्र में तनाव कम नहीं होता, तब तक सतर्कता बरती जाएगी।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 2 Jun 2026
June 02, 2026

मध्य पूर्व में फिर युद्ध के बादल: ईरान ने अमेरिका से बातचीत रोकी, ट्रंप का सख्त रुख!

मध्य पूर्व में फिर युद्ध के बादल: ईरान ने अमेरिका से बातचीत रोकी, ट्रंप का सख्त रुख!
- Friday World 2 Jun 2026
मध्य पूर्व एक बार फिर से तनाव की आग में घिर गया है। ईरान ने अमेरिका के साथ चल रही अहम वाटाघाटों को स्थगित करने की घोषणा कर दी है। इसका कारण इजरायल द्वारा लेबनान में बढ़ाए गए सैन्य अभियानों को बताया जा रहा है, जिसे ईरान युद्धविराम का उल्लंघन मानता है। यह घटनाक्रम न केवल अमेरिका-ईरान संबंधों को नया मोड़ दे रहा है, बल्कि पूरे क्षेत्र में बड़े संघर्ष की आशंकाओं को भी बढ़ा रहा है।

: एक नाजुक युद्धविराम की कहानी

2026 की शुरुआत में अमेरिका और ईरान के बीच एक युद्धविराम समझौता हुआ था, जिसमें हॉर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी हटाने और कुछ प्रतिबंधों में राहत जैसे मुद्दे शामिल थे। लेकिन यह युद्धविराम शुरू से ही नाजुक रहा। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर उल्लंघन के आरोप लगाए। इजरायल-हिजबुल्लाह संघर्ष में ईरान की भूमिका और लेबनान में इजरायली कार्रवाइयों ने स्थिति को और जटिल बना दिया।

ईरानी राज्य मीडिया 'तस्नीम' के अनुसार, ईरान की वार्ता टीम ने अमेरिका के साथ मध्यस्थों के माध्यम से होने वाले संवाद को रोक दिया है। ईरान का कहना है कि लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्धविराम का उल्लंघन हुआ है, इसलिए पूरे समझौते को प्रभावित माना जाएगा। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट चेतावनी दी: "एक मोर्चे पर उल्लंघन सभी मोर्चों पर उल्लंघन है। इसके परिणामों के लिए अमेरिका और इजरायल जिम्मेदार होंगे।"

 ट्रंप का प्रतिक्रिया: "चुप रहना बेहतर है"

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस विकास पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें ईरान की तरफ से ऐसी कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली, लेकिन अगर बातचीत रुकी भी है तो "ठीक है"। ट्रंप ने सोशल मीडिया और बयानों में जोर दिया कि "बहुत ज्यादा बोलना अच्छा नहीं। चुप रहना बेहतर है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि चुप्पी का मतलब बमबारी शुरू करना नहीं है, बल्कि मजबूत आर्थिक नाकाबंदी जारी रखना है।

ट्रंप ने कहा, "ईरान भारी नुकसान झेल रहा है। मैं जितना समय चाहें इंतजार कर सकता हूं।" कुछ रिपोर्टों में ट्रंप ने वार्ता को "रैपिड पेस" पर जारी बताते हुए विरोधाभासी संकेत भी दिए। यह ट्रंप की typical negotiating style को दर्शाता है—दबाव बनाए रखना और लचीलापन दिखाना।

लेबनान संकट: जड़ में छिपा असली मुद्दा

वर्तमान तनाव की जड़ लेबनान में इजरायल-हिजबुल्लाह संघर्ष है। इजरायल ने हाल के दिनों में लेबनान पर हमले तेज कर दिए हैं, जिसमें दक्षिणी इलाकों में गहरी घुसपैठ शामिल है। ईरान हिजबुल्लाह का प्रमुख समर्थक है और लेबनान को युद्धविराम समझौते का हिस्सा मानता है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि लेबनान में युद्धविराम की शर्तों का पालन न होना पूरे क्षेत्रीय समझौते को कमजोर कर रहा है।

इस बीच, अमेरिका ने हॉर्मुज स्ट्रेट के पास ईरानी रडार और ड्रोन साइट्स पर हमले किए, जबकि ईरान ने जवाबी कार्रवाई की। दोनों पक्षों के बीच मिसाइल और ड्रोन हमलों की घटनाएं बढ़ रही हैं।

 क्षेत्रीय प्रभाव: तेल, सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था

मध्य पूर्व की अस्थिरता का असर वैश्विक स्तर पर पड़ रहा है। हॉर्मुज स्ट्रेट दुनिया के तेल निर्यात का प्रमुख रास्ता है। अगर ईरान इसे फिर बंद करने की धमकी देता है, तो तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। कई देश पहले से ही आपूर्ति श्रृंखला पर असर से चिंतित हैं।

- इजरायल: सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए हिजबुल्लाह को कमजोर करने की कोशिश में लगा है।
- सऊदी अरब और खाड़ी देश: स्थिरता चाहते हैं, लेकिन ईरान के बढ़ते प्रभाव से सतर्क।
- रूस और चीन: ईरान के करीबी, जो अमेरिकी दबाव के खिलाफ खड़े होते हैं।
- भारत: ऊर्जा आयात और क्षेत्रीय भारतीय समुदाय की सुरक्षा के लिहाज से नजर रख रहा है।

 ऐतिहासिक संदर्भ: अमेरिका-ईरान संबंधों की उथल-पुथल

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव नया नहीं है। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद संबंध बिगड़े। परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रॉक्सी युद्ध (सीरिया, यमन, लेबनान) और प्रतिबंधों ने स्थिति को जटिल बनाया। ट्रंप के पहले कार्यकाल में 'मैक्सिमम प्रेशर' कैंपेन चला, जिसमें कासेम सुलेमानी की हत्या भी शामिल रही।

बाइडेन काल में कुछ राहत की कोशिश हुई, लेकिन ट्रंप के वापसी के बाद फिर सख्ती आई। 2026 का युद्धविराम एक अस्थायी राहत था, लेकिन लेबनान जैसे मुद्दों ने इसे चुनौती दी।

 संभावित परिदृश्य: क्या होगा आगे?

1. कूटनीतिक प्रयास: मध्यस्थ देश (कतर, ओमान) वार्ता बहाल करने की कोशिश कर सकते हैं।
2. तनाव वृद्धि: अगर लेबनान में इजरायली अभियान बढ़ा तो ईरान बड़े हमलों का जवाब दे सकता है।
3. आर्थिक दबाव: अमेरिका अपनी नाकाबंदी मजबूत रखेगा, ईरान की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा।
4. क्षेत्रीय युद्ध: पूर्ण युद्ध की आशंका कम है, लेकिन गलतफहमी से बड़ा टकराव हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों पक्ष पूर्ण युद्ध नहीं चाहते, लेकिन घरेलू राजनीति और क्षेत्रीय सहयोगियों का दबाव स्थिति को नियंत्रण से बाहर कर सकता है।

#मानवीय पक्ष: युद्ध की कीमत

लेबनान और गाजा में आम नागरिकों की दुर्दशा बढ़ रही है। हजारों लोग विस्थापित हुए, अर्थव्यवस्थाएं चरमरा गईं। ईरान में आर्थिक संकट से जनता प्रभावित है। किसी भी बड़े संघर्ष में सबसे ज्यादा नुकसान आम लोगों का होता है।

शांति की राह चुनौतीपूर्ण लेकिन जरूरी

ईरान की वार्ता स्थगित करने की घोषणा मध्य पूर्व में नए अध्याय की शुरुआत हो सकती है। ट्रंप की "चुप रहो, लेकिन मजबूत रहो" वाली रणनीति दिलचस्प है। दुनिया इस समय उम्मीद करती है कि कूटनीति हावी हो और बंदूकों की आवाज न बढ़े।

भारत जैसे देशों को सतर्क रहना होगा। ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता हमारे हित में है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को संयम बरतने और संवाद को बढ़ावा देने की जरूरत है।

मध्य पूर्व का इतिहास संघर्ष और सहयोग दोनों से भरा है। उम्मीद है कि इस बार बुद्धिमत्ता और समझौते की जीत होगी, न कि विनाश की।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 2 Jun 2026
June 02, 2026

"નેપાળી PM બાલેન શાહને ભારતનો મક્કમ જવાબ: “98% સરહદ પહેલેથી નક્કી, ત્રીજા દેશની કોઈ જરૂર નથી!"

"નેપાળી PM બાલેન શાહને ભારતનો મક્કમ જવાબ: “98% સરહદ પહેલેથી નક્કી, ત્રીજા દેશની કોઈ જરૂર નથી!" -Friday World 2 Jun 2026
ભારત અને નેપાળ વચ્ચેના સદીઓ જૂના રક્ત અને સંસ્કૃતિના સંબંધોમાં તાજેતરમાં એક નવું વિવાદાસ્પદ પ્રકરણ ઉમેરાયું છે. નેપાળના વડાપ્રધાન બાલેન્દ્ર શાહ (બાલેન શાહ)ના સંસદમાં આપેલા નિવેદને બંને દેશોના કૂટનીતિક વર્તુળોમાં ચર્ચાનો મુદ્દો બનાવી દીધો છે. જ્યારે નેપાળી PMએ સરહદ વિવાદને “એકપક્ષીય નહીં” કહીને નવો આંગળો ઉઠાવ્યો, ત્યારે ભારતીય વિદેશ મંત્રાલય (MEA)એ સ્પષ્ટ, તથ્યપૂર્ણ અને મક્કમ જવાબ આપીને વાતને વ્યવસ્થિત કરી દીધી. 

આ લેખમાં અમે આ સમગ્ર ઘટનાક્રમ, તેના ઐતિહાસિક પાયા, કૂટનીતિક અસર અને ભવિષ્યની સંભાવનાઓનું વિસ્તૃત વિશ્લેષણ કરીશું.

 બાલેન શાહનું વિવાદાસ્પદ નિવેદન

31 મે, 2026ના રોજ નેપાળની સંસદમાં પ્રથમ વખત મુખ્ય પ્રશ્નોત્તર સત્રમાં ભાગ લેતા વડાપ્રધાન બાલેન શાહે કહ્યું:

“તમને એક તથ્ય જાણીને આશ્ચર્ય થશે, જે મને વડાપ્રધાન બન્યા પછી જ ખબર પડી છે. ભારતે માત્ર નેપાળી ક્ષેત્રો પર અતિક્રમણ નથી કર્યું, પરંતુ નેપાળે પણ અનેક સ્થળોએ ભારતના વિસ્તારો પર કબજો કર્યો છે. હવે બંને દેશોએ તથ્યોનો અભ્યાસ કરવો જોઈએ અને મિત્રતાપૂર્વક સાથે બેસીને આ મુદ્દાનો ઉકેલ લાવવો જોઈએ.”

તેમણે વધુમાં જણાવ્યું કે સરહદ વિવાદ માટે ઇતિહાસકારો, નિષ્ણાતો અને સર્વેક્ષકોની મદદ લેવામાં આવશે. સાથે જ આ મુદ્દો ચીન અને બ્રિટન સમક્ષ પણ ઉઠાવવામાં આવ્યો છે. આ નિવેદને નેપાળની સંસદમાં જ તીવ્ર વિરોધ જગાવ્યો અને વિરોધ પક્ષોએ તેમને જવાબદાર ઠેરવ્યા.

નેપાળના વિદેશ મંત્રાલયે પછી સ્પષ્ટતા કરી કે PMનું નિવેદન મુખ્યત્વે “નો-મેન્સ લેન્ડ” (દસગજા વિસ્તાર) અને નદીઓના પ્રવાહમાં ફેરફારને કારણે ઉદ્ભવેલા ક્રોસ-બોર્ડર કબજાને લગતું છે, નહીં કે મુખ્ય વિવાદિત વિસ્તારો (કલાપાની, લિપુલેખ, લિમ્પિયાધુરા)માં નેપાળના સત્તાવાર દાવાને બદલવું.

 ભારતનો જડબાતોડ અને તથ્યપૂર્ણ જવાબ

ભારતીય વિદેશ મંત્રાલયે તરત જ પ્રતિક્રિયા આપી. MEAના નિવેદનમાં કહેવામાં આવ્યું:

“ભારત-નેપાળ સરહદનો આશરે 98% હિસ્સો પહેલેથી જ નક્કી થઈ ચૂક્યો છે. ગંડક નદીના પ્રવાહમાં આવેલા બદલાવને કારણે કેટલાક નાના હિસ્સાઓનો ઉકેલ લાવવાનો હજુ બાકી છે. સરહદના નિર્ધારિત હિસ્સાઓમાં ગેરકાયદેસર કબજા અને નો-મેન્સ લેન્ડ પર અતિક્રમણના કેટલાક કિસ્સાઓ છે, જેનું બંને દેશો સંયુક્ત રીતે મેપિંગ કરી રહ્યા છે. આ તમામ બાબતો માટે મજબૂત દ્વિપક્ષીય તંત્ર કાર્યરત છે. તેથી સ્પષ્ટ હોવું જોઈએ કે આ દ્વિપક્ષીય મામલામાં કોઈ ત્રીજા પક્ષની કોઈ ભૂમિકા નથી.”

આ જવાબમાં ભારતે ત્રણ મુખ્ય બાબતો પર ભાર મૂક્યો:
- 98% સરહદ પહેલેથી સેટલ્ડ છે.
- બાકીના મુદ્દા તકનીકી અને નદી-સંબંધિત છે.
- કોઈ ત્રીજા દેશ (ચીન કે બ્રિટન)ની જરૂર નથી.

ઐતિહાસિક પૃષ્ઠભૂમિ: સુગૌલીની સંધિથી આજ સુધી

ભારત-નેપાળ સરહદ વિવાદના મૂળ 1816ની સુગૌલી સંધિમાં છે. આ સંધિ અંગ્રેજો અને નેપાળ વચ્ચે થઈ હતી, જેમાં કાલી (મહાકાલી) નદીને પશ્ચિમી સરહદ તરીકે નક્કી કરવામાં આવી હતી. પરંતુ નદીના મૂળ (સોર્સ) અંગે અસ્પષ્ટતા રહી ગઈ. 

નેપાળ લિમ્પિયાધુરાને કાલી નદીનું મૂળ માને છે, જ્યારે ભારત લિપુલેખ અને કલાપાની વિસ્તારને પોતાનો ભાગ ગણે છે. 1962ના ભારત-ચીન યુદ્ધ પછી ભારતીય સેનાએ કલાપાનીમાં હાજરી વધારી, જેને નેપાળે વિરોધ કર્યો ન હતો તે સમયે. 2020માં નેપાળે નવું નકશો જારી કરીને svd વિસ્તારો પોતાના દાવા કર્યા, જેનાથી તણાવ વધ્યો.

આ ઉપરાંત સુસ્તા જેવા અન્ય વિસ્તારોમાં પણ વિવાદ છે, જે મુખ્યત્વે નદીના કુર્સ બદલાવને કારણે છે.

કેમ મહત્વનો છે આ વિવાદ?

1. વ્યૂહાત્મક મહત્વ: કલાપાની-લિપુલેખ ત્રિ-સંધિ (ભારત-નેપાળ-ચીન) છે. આ વિસ્તારમાંથી ભારત કૈલાશ-માનસરોવર યાત્રા માટે રસ્તો વાપરે છે.

2. ખુલ્લી સરહદ: ભારત-નેપાળ વચ્ચે 1850 કિ.મી.થી વધુ ખુલ્લી સરહદ છે. લાખો નેપાળી નાગરિકો ભારતમાં કામ કરે છે અને વેપાર થાય છે.

3. સાંસ્કૃતિક અને ધાર્મિક જોડાણ: હિંદુ અને બૌદ્ધ તીર્થસ્થાનો, પશુપતિનાથ, અયોધ્યા-જનકપુર જેવા સંબંધો.

4. ચીનનો પરિબળ: નેપાળમાં ચીનનું વધતું પ્રભાવ (BRI પ્રોજેક્ટ્સ)ને કારણે ભારત સતર્ક છે.

 બંને દેશો માટે પાઠ અને આગળનો રસ્તો

બાલેન શાહનું નિવેદન નેપાળની આંતરિક રાજનીતિમાં પણ વિવાદાસ્પદ બન્યું. વિરોધ પક્ષોએ તેમને “ભારતને નબળા” પાડવાનો આરોપ મૂક્યો. તેમની સરકારે સ્પષ્ટતા કરીને વાતને સમાધાન તરફ વાળવાનો પ્રયાસ કર્યો. 

ભારતનો અભિગમ સ્પષ્ટ છે — દ્વિપક્ષીય વાતચીત, તથ્યો અને વર્તમાન વ્યવહારિક વાસ્તવિકતા પર આધારિત ઉકેલ. છેલ્લા કેટલાક વર્ષોમાં બંને દેશોએ વેપાર, વીજળી, પર્યટન અને કનેક્ટિવિટીમાં સારી પ્રગતિ કરી છે. આ વિવાદને આગળ વધારવાથી બંનેને નુકસાન થશે.

સંભવિત ઉકેલો
- સંયુક્ત ટેકનિકલ કમિટી દ્વારા સર્વે અને મેપિંગ.
- ઐતિહાસિક દસ્તાવેજો અને આધુનિક GPS તકનીકનો ઉપયોગ.
- વિવાદિત વિસ્તારોમાં આર્થિક સહયોગ અને સંયુક્ત વિકાસ પ્રોજેક્ટ્સ.
- ઉચ્ચ સ્તરીય દ્વિપક્ષીય વાતચીત (બંને વડાપ્રધાનોની મુલાકાત).

 મિત્રતા જ વિજય છે

ભારત અને નેપાળ એકબીજાના પડોશી નથી, પરંતુ પરિવાર છે. ભાષા, સંસ્કૃતિ, ધર્મ અને અર્થતંત્રના અનેક તાર વણાયેલા છે. સરહદ વિવાદ એક તક છે — જો બંને પક્ષ તથ્યો, વિશ્વાસ અને પરસ્પર લાભના આધારે આગળ વધશે તો આ વિવાદ પણ મિત્રતાને મજબૂત કરશે.

બાલેન શાહના નિવેદન પર ભારતનો જવાબ એક સંદેશ છે — અમે તૈયાર છીએ વાત કરવા, પરંતુ અમારી સાર્વભૌમત્વ અને વ્યવહારિક વાસ્તવિકતાને સ્વીકારીને. 98% સરહદ પહેલેથી નક્કી છે અને બાકીના 2% માટે પણ દ્વિપક્ષીય માર્ગ જ શ્રેષ્ઠ છે.

આપણા પરંપરાગત સંબંધોને વધુ મજબૂત બનાવવાની જ આ વખતે છે. “રોટી-બેટી”ના સંબંધને કોઈ વિવાદ તોડી ન શકે — આ જ સંદેશ બંને દેશોના લોકોનો છે.

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 2 Jun 2026