May 25, 2026
ट्रंप-नेतन्याहू की दरार: ईरान पर 'को-पायलट' से 'साइडलाइन' मुसाफिर तक का सफर
ट्रंप-नेतन्याहू की दरार: ईरान पर 'को-पायलट' से 'साइडलाइन' मुसाफिर तक का सफर
-Friday World 25 May 2026
वाशिंगटन-तेहरान-यरुशलम। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच ईरान मुद्दे पर गहराती दरार अब खुलकर सामने आ रही है। जहां एक समय नेतन्याहू ट्रंप के सबसे करीबी सहयोगी और ईरान नीति के 'को-पायलट' माने जाते थे, वहीं आज वे महज 'साथी मुसाफिर' बनकर रह गए हैं। ट्रंप की टीम ईरान के साथ पर्दे के पीछे गंभीर वार्ता कर रही है, लेकिन इजरायल को इस प्रक्रिया से पूरी तरह अलग-थलग कर दिया गया है।
न्यूयॉर्क टाइम्स और एक्सियोस की हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायल को अमेरिका-ईरान वार्ताओं की भनक तक नहीं लग रही। उसे जानकारी जुटाने के लिए खुफिया एजेंसियों और क्षेत्रीय कूटनीतिक चैनलों का सहारा लेना पड़ रहा है। नेतन्याहू का अमेरिकी फैसलों पर नियंत्रण लगभग खत्म हो चुका है। यह बदलाव मध्य पूर्व की भू-राजनीति में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है।
तनाव भरी फोन कॉल और 'लेटर ऑफ इंटेंट'
एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, मई 2026 के तीसरे सप्ताह में ट्रंप और नेतन्याहू के बीच एक लंबी और 'डिफिकल्ट' फोन कॉल हुई। ट्रंप ने नेतन्याहू को बताया कि मध्यस्थ देश (खासकर कतर और पाकिस्तान) एक 'लेटर ऑफ इंटेंट' (सहमति पत्र) तैयार कर रहे हैं। इस पत्र पर अमेरिका और ईरान के हस्ताक्षर होने हैं, जिसका मकसद युद्ध को औपचारिक रूप से समाप्त करना और एक महीने (कुछ रिपोर्ट्स में 30-60 दिन) की बातचीत का रास्ता खोलना है।
इस पत्र में मुख्य मुद्दे शामिल हैं:
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना
- ईरान के यूरेनियम स्टॉकपाइल (लगभग 400 किलो निकट-हथियार ग्रेड) का प्रबंधन
- आर्थिक प्रतिबंधों में राहत
- सीजफायर को मजबूत करना
कॉल के बाद एक अमेरिकी सूत्र ने बताया कि नेतन्याहू के “होश उड़ गए थे” (hair was on fire)। इजरायली सूत्रों के मुताबिक, दोनों नेताओं में आगे की रणनीति को लेकर गहरी असहमति थी। नेतन्याहू नए सैन्य हमलों और ईरान को और कमजोर करने पर जोर दे रहे थे, जबकि ट्रंप डील की ओर बढ़ रहे हैं।
इजरायल की 'साइडलाइनिंग': NYT का खुलासा
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में दो इजरायली डिफेंस अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि इजरायल अमेरिका-ईरान वार्ताओं से “लगभग पूरी तरह बाहर” (almost entirely out of the loop) है। फरवरी 2026 में शुरू हुए संघर्ष (Operation Epic Fury) के दौरान अमेरिका और इजरायल घनिष्ठ समन्वय में थे, लेकिन अब ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ अप्रत्यक्ष वार्ताओं में इजरायल को अपडेट नहीं दे रहा।
इजरायल को अब क्षेत्रीय नेताओं, राजनयिकों और अपनी खुफिया एजेंसियों के जरिए जानकारी जुटानी पड़ रही है। नेतन्याहू ने अपने सहयोगियों से निजी तौर पर स्वीकार किया है कि ट्रंप के फैसलों पर उनका प्रभाव बहुत सीमित रह गया है।
ट्रंप का नया गेम प्लान
ट्रंप ने ईरान युद्ध को समाप्त करने के लिए कई अरब और मुस्लिम देशों (सऊदी अरब, UAE, कतर, पाकिस्तान, टर्की, मिस्र आदि) के नेताओं से कॉन्फ्रेंस कॉल की। उन्होंने साफ कहा कि अगर ईरान के साथ डील होती है, तो वे चाहते हैं कि ये देश इजरायल के साथ अब्राहम एक्सॉर्ड्स या शांति समझौते करें।
ट्रंप ने नेतन्याहू को आश्वासन दिया कि कोई भी डील इजरायल की सुरक्षा को ध्यान में रखकर होगी, लेकिन व्यवहार में इजरायल को प्रक्रिया से दूर रखा जा रहा है। ट्रंप ने एक बयान में यहां तक कहा कि नेतन्याहू “जो मैं चाहूंगा, वही करेंगे”।
'को-पायलट' से 'मुसाफिर' तक
ट्रंप के पहले कार्यकाल और 2025-26 के शुरुआती दौर में नेतन्याहू ईरान के खिलाफ 'मैक्सिमम प्रेशर' कैंपेन के प्रमुख समर्थक थे। इजरायल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और प्रॉक्सी नेटवर्क (हिजबुल्लाह, हमास आदि) के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में अमेरिका का साथ दिया। लेकिन फरवरी 2026 के बाद की स्थिति बदल गई।
युद्ध के परिणामस्वरूप स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से वैश्विक तेल कीमतें बढ़ीं, क्षेत्रीय अस्थिरता फैली और ट्रंप अब डील के जरिए 'विजयी समाप्ति' चाहते हैं। इजरायल के लिए यह डील 'कैपिटुलेशन' (समर्पण) जैसी लग रही है, क्योंकि इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइलों और क्षेत्रीय प्रॉक्सियों पर पर्याप्त अंकुश नहीं दिख रहा।
क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव
यह दरार मध्य पूर्व की शक्ति संतुलन को प्रभावित कर रही है।
- ईरान को यह अमेरिकी-इजरायली एकता में दरार के रूप में फायदा पहुंचा सकता है।
- अरब देश अब्राहम एक्सॉर्ड्स विस्तार की उम्मीद कर रहे हैं।
- चीन और रूस जैसे देश इस स्थिति का फायदा उठा सकते हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति अब इजरायल को भी अपने हितों के अनुरूप ढाल रही है। नेतन्याहू घरेलू स्तर पर भी दबाव में हैं, जहां विपक्ष उन्हें ट्रंप पर निर्भरता का आरोप लगा रहा है।
क्या आगे होगा?
ट्रंप ने कहा है कि वे जल्द ही ईरान डील की घोषणा कर सकते हैं। यदि 'लेटर ऑफ इंटेंट' पर हस्ताक्षर होते हैं, तो 30-60 दिनों की बातचीत शुरू होगी। इजरायल इस दौरान नए सैन्य विकल्पों पर जोर दे सकता है, लेकिन अमेरिकी समर्थन के बिना यह चुनौतीपूर्ण होगा।
नेतन्याहू के लिए यह स्थिति राजनीतिक और रणनीतिक दोनों रूप से नाजुक है। एक तरफ वे ट्रंप के साथ संबंध बनाए रखना चाहते हैं, दूसरी तरफ इजरायल की सुरक्षा चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
बदलते गठबंधन की नई कसौटी
ट्रंप और नेतन्याहू के बीच ईरान मुद्दे पर बढ़ती दरार दर्शाती है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कोई स्थायी दोस्ती नहीं होती—केवल हित होते हैं। जहां कल तक दोनों नेता ईरान के खिलाफ एकजुट दिखते थे, आज ट्रंप बड़े सौदे की तलाश में इजरायल को साइडलाइन कर रहे हैं।
यह घटनाक्रम न केवल मध्य पूर्व बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन को नया आकार दे सकता है। आने वाले दिनों में यदि डील हुई तो क्षेत्र में शांति की उम्मीद बढ़ेगी, लेकिन यदि विफल रही तो नया संघर्ष अपरिहार्य हो सकता है। फिलहाल, नेतन्याहू को अपने सबसे बड़े सहयोगी की नीतियों का इंतजार करना पड़ रहा है—बिना पूर्ण जानकारी के।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 25 May 2026