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Thursday, 21 May 2026

May 21, 2026

रोहित शर्मा की फिटनेस चिंता! 2027 वनडे वर्ल्ड कप के लिए BCCI का नया बैकअप प्लान तैयार, इशान किशन बन सकते हैं ओपनिंग विकल्प

रोहित शर्मा की फिटनेस चिंता! 2027 वनडे वर्ल्ड कप के लिए BCCI का नया बैकअप प्लान तैयार, इशान किशन बन सकते हैं ओपनिंग विकल्प
-Friday World-21 May 2026
नई दिल्ली, 21 मई 2026 — भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान रोहित शर्मा की फिटनेस एक बार फिर सुर्खियों में है। 2027 ODI विश्व कप को ध्यान में रखते हुए BCCI ने बैकअप प्लान पर काम तेज कर दिया है। अगर रोहित पूर्ण रूप से फिट नहीं हुए तो युवा विकेटकीपर-बल्लेबाज **इशान किशन** को ओपनिंग भूमिका में तैयार किया जा रहा है। अफगानिस्तान के खिलाफ आने वाली वनडे सीरीज से पहले यह अपडेट भारतीय क्रिकेट जगत में चर्चा का विषय बन गया है।

BCCI के सिलेक्टर्स और टीम मैनेजमेंट अब हर संभावित स्थिति के लिए तैयार हो रहे हैं। रोहित की उम्र 40 पार कर चुकी है और IPL-2026 में मांसपेशियों की समस्या के कारण उनका पूरा सीजन प्रभावित रहा। क्या रोहित 2027 विश्व कप तक टॉप फॉर्म में लौट पाएंगे? या BCCI नई पीढ़ी को तैयार करके जोखिम कम करना चाहती है?

 रोहित शर्मा की फिटनेस की चिंता क्यों बढ़ गई?

IPL-2026 में रोहित शर्मा को मांसपेशियों (मसल) की गंभीर समस्या हुई। इसके चलते वे लगभग तीन हफ्ते मैदान से दूर रहे। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि रोहित ने BCCI के सेंटर ऑफ एक्सलेंस को अपनी चोट की सही जानकारी नहीं दी। बोर्ड और टीम मैनेजमेंट इस मुद्दे पर काफी नाराज है।

वनडे क्रिकेट में इंपैक्ट प्लेयर नियम नहीं है। एक बल्लेबाज को पूरे 50 ओवर या 40+ ओवर खेलने पड़ सकते हैं। 40 वर्षीय रोहित का शरीर हाई-इंटेंसिटी मैचों का दबाव कितना सहन कर पाएगा — यही BCCI की सबसे बड़ी चिंता है।

हालांकि रोहित ने जब भी मैदान पर उतरे, दमदार प्रदर्शन किया। मात्र 4 मैचों में उन्होंने 146 रन बनाए। उनकी बल्लेबाजी अभी भी क्लास दिखाती है, लेकिन फिटनेस और स्टैमिना पर सवाल उठ रहे हैं।

मुंबई इंडियंस प्लेऑफ से बाहर हो चुकी है। 24 मई को उनकी आखिरी लीग मैच है। इसके बाद रोहित को फिटनेस रिकवर करने के लिए काफी समय मिल जाएगा। अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज में उनका खेलना फिटनेस पर निर्भर करेगा।

 2027 वर्ल्ड कप के लिए BCCI का बैकअप प्लान

BCCI ने 2027 ODI विश्व कप (जो भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में होना है) को लेकर प्लानिंग शुरू कर दी है। शुरुआत में **यशस्वी जायसवाल** को रोहित का विकल्प माना जा रहा था, लेकिन सिलेक्टर्स का मानना है कि जायसवाल को वनडे फॉर्मेट में अभी पर्याप्त मैच नहीं मिले हैं।

इसीलिए इशान किशन को अगले कुछ महीनों में ओपनिंग रोल में तैयार किया जा रहा है। इशान आक्रामक ओपनर हैं, अच्छी फील्डिंग करते हैं और विकेटकीपिंग भी कर सकते हैं। इससे टीम को फ्लेक्सिबिलिटी मिलेगी।

टीम मैनेजमेंट शुभमन गिल और यशस्वी जायसवाल की संभावित चोट की स्थिति को भी ध्यान में रख रहा है। अगर इन दोनों में से कोई भी उपलब्ध नहीं रहा तो इशान तीसरे ओपनिंग विकल्प के रूप में तैयार रहेंगे। BCCI अब “कवरेज डेप्थ” पर विशेष जोर दे रही है।

 भारतीय ओपनिंग कॉम्बिनेशन के संभावित विकल्प

1. शुभमन गिल + रोहित शर्मा (अगर फिट रहे तो)
2. शुभमन गिल + यशस्वी जायसवाल
3. शुभमन गिल + इशान किशन (नया प्रयोग)
4. यशस्वी जायसवाल + इशान किशन

इशान किशन ने पिछले कुछ वनडे मैचों में अच्छी शुरुआत की है। उनकी पावर-हिटिंग मध्य ओवरों में भी उपयोगी साबित हो सकती है।

 रोहित शर्मा का करियर और विरासत

रोहित शर्मा भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल सफेद गेंद वाले बल्लेबाजों में से एक हैं। उन्होंने दो विश्व कप (2019 और 2023) में शानदार प्रदर्शन किया। 2023 विश्व कप में उन्होंने कप्तानी में टीम को फाइनल तक पहुंचाया। उनकी “हिटमैन” स्टाइल और बड़े टूर्नामेंटों में प्रदर्शन लीजेंडरी है।

लेकिन उम्र और बार-बार चोटें अब चुनौती बन रही हैं। BCCI रोहित को सम्मान देते हुए भी टीम को भविष्य के लिए तैयार करना चाहती है। रोहित अगर फिट रहते हैं तो 2027 में भी वे टीम का अहम हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन बैकअप तैयार रखना स्मार्ट रणनीति है।

 अफगानिस्तान सीरीज: टेस्टिंग ग्राउंड

भारत और अफगानिस्तान के बीच एक टेस्ट और तीन वनडे मैच होने वाले हैं। यह सीरीज रोहित और युवा खिलाड़ियों दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।

- रोहित के लिए: फिटनेस टेस्ट
- इशान, जायसवाल, गिल के लिए: विश्व कप की तैयारी
- टीम के लिए: नई कम्बिनेशन आजमाने का मौका

अफगानिस्तान हाल के वर्षों में मजबूत टीम बनकर उभरी है। राशिद खान, रहमानुल्लाह गुरबाज जैसे खिलाड़ी किसी भी टीम को परेशान कर सकते हैं।

 BCCI की दूरदर्शिता

BCCI सिर्फ एक खिलाड़ी पर निर्भर नहीं रहना चाहती। 2027 विश्व कप घरेलू परिस्थितियों में खेला जाएगा, जहां उम्मीदें बहुत ऊंची होंगी। बोर्ड ने चोट प्रबंधन, वर्कलोड मैनेजमेंट और युवा खिलाड़ियों के विकास पर भारी निवेश किया है।

NCA (नेशनल क्रिकेट एकेडमी) में फिटनेस ट्रेनिंग को और सख्त बनाया गया है। खिलाड़ियों को अब चोट की रिपोर्टिंग अनिवार्य कर दी गई है। रोहित का मामला इस दिशा में एक सबक बन सकता है।

 युवा खिलाड़ियों पर नजर

- यशस्वी जायसवाल: टेस्ट में सफल, वनडे में अभी पक्का ओपनर नहीं बने।
- इशान किशन: आक्रामक, लेकिन consistency की जरूरत।
- शुभमन गिल: टीम के भविष्य के कप्तान, लेकिन चोट से बचना जरूरी।
- विराट कोहली: अगर फॉर्म में रहे तो मिडिल ऑर्डर का सहारा।

टीम मैनेजमेंट इन सभी को संतुलित तरीके से तैयार कर रही है।

 संतुलित टीम तैयार करना जरूरी

रोहित शर्मा भारतीय क्रिकेट के लिए आईकॉन हैं। उनकी अनुभव और लीडरशिप टीम के लिए अमूल्य है। लेकिन क्रिकेट एक टीम गेम है और समय के साथ बदलाव अनिवार्य है। BCCI का बैकअप प्लान इसी बदलाव की तैयारी है।

2027 वर्ल्ड कप में भारत फिर से चैंपियन बनना चाहता है। इसके लिए फिट खिलाड़ी, गहराई और स्मार्ट प्लानिंग की जरूरत है। इशान किशन जैसे युवा खिलाड़ी अगर मौका मिला तो इसे भुनाने के लिए तैयार हैं।

रोहित की फिटनेस पर सभी की नजरें हैं। अगर वे फिट रहते हैं तो टीम और मजबूत बनेगी। अगर नहीं, तो BCCI का नया प्लान इशान किशन को ओपनिंग में आजमाकर नई शुरुआत कर सकता है।

क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह समय रोमांचक है।
पुरानी पीढ़ी और नई पीढ़ी का सुंदर मेलजोल भारत को फिर से विश्व चैंपियन बना सकता है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-21 May 2026
May 21, 2026

कॉकरोचों का विस्फोट: मोदी सरकार क्यों डर गई? कॉकरोच जनता पार्टी का X अकाउंट भारत में बंद, इंस्टाग्राम पर हैक की आशंका

कॉकरोचों का विस्फोट: मोदी सरकार क्यों डर गई? कॉकरोच जनता पार्टी का X अकाउंट भारत में बंद, इंस्टाग्राम पर हैक की आशंका
-Friday World-21 May 2026
नई दिल्ली, 21 मई 2026 — मात्र कुछ दिनों में सोशल मीडिया पर एक अनोखा तूफान उठ खड़ा हुआ है। नाम है कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)। बेरोजगार युवाओं, NEET पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था की खामियों और न्यायपालिका की कुछ टिप्पणियों पर व्यंग्य करते हुए शुरू हुई यह मूवमेंट आज करोड़ों युवाओं की आवाज बन चुकी है। लेकिन इसी तेज रफ्तार ने सत्ता को बेचैन कर दिया। X (पूर्व ट्विटर) पर CJP का आधिकारिक अकाउंट भारत में बंद करवा दिया गया, जबकि इंस्टाग्राम पेज पर हैकिंग की कोशिशों की खबरें सामने आ रही हैं। फॉलोअर्स की संख्या BJP के आधिकारिक अकाउंट को पार कर चुकी है। क्या यह युवा क्रांति है या सत्ता की नजर में खतरा?

यह लेख तथ्यों, युवा आक्रोश और डिजिटल युग की राजनीति पर आधारित है।

 कहानी शुरू कहां से हुई?

सब कुछ शुरू हुआ सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की एक टिप्पणी से। कुछ बेरोजगार युवा कार्यकर्ताओं और फेक डिग्री वाले मामलों पर सुनवाई के दौरान उन्होंने "कॉकरोच" शब्द का इस्तेमाल किया। चाहे यह टिप्पणी फेक डिग्री धारकों के लिए थी, लेकिन युवाओं ने इसे अपने ऊपर लिया। Boston University के छात्र और पूर्व AAP वॉलंटियर **अभिजीत दीपके** ने इसे व्यंग्य का हथियार बनाया। उन्होंने "कॉकरोच जनता पार्टी" नाम से एक Google फॉर्म, वेबसाइट और सोशल मीडिया अकाउंट्स शुरू किए।

परिणाम? आग की तरह फैलाव। 

इंस्टाग्राम पर @cockroachjantaparty अकाउंट ने महज 4-6 दिनों में 1.3 करोड़ से ज्यादा फॉलोअर्स जुटा लिए — BJP के आधिकारिक हैंडल (लगभग 88 लाख) और कांग्रेस (लगभग 1.33 करोड़) को पीछे छोड़ते हुए। दीया मिर्जा, कोंकणा सेन शर्मा, फातिमा सना शेख, अनुराग कश्यप जैसे सेलेब्रिटी भी फॉलो करने वालों में शामिल हो गए। 3.5 लाख से ज्यादा युवाओं ने सदस्यता फॉर्म भरा।

युवा कह रहे हैं — "अगर हम कॉकरोच हैं, तो हम एकजुट होकर सिस्टम को चबा जाएंगे।"

 X अकाउंट पर पाबंदी: सेंसरशिप या कानूनी कार्रवाई?

21 मई को CJP का X अकाउंट @CJP_2029 भारत में "legal demand" के आधार पर withhold कर दिया गया। अकाउंट अब भारत में दिखाई नहीं दे रहा, हालांकि विदेश से एक्सेसिबल है। अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि पहले हैकिंग की कोशिश हुई, फिर अकाउंट सस्पेंड कर दिया गया। X प्लेटफॉर्म ने स्थानीय कानून, कोर्ट ऑर्डर या शिकायत का हवाला दिया।

समर्थक इसे "डेमोक्रेसी अटैक" बता रहे हैं। Dhruv Rathee जैसे क्रिटिक्स ने भी आवाज उठाई। विपक्षी नेता इसे मोदी सरकार की बौखलाहट का सबूत मान रहे हैं। वहीं सरकार या BJP की तरफ से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सोशल मीडिया पर BJP समर्थक इसे "फेक फॉलोअर्स" और "विदेशी साजिश" बता रहे हैं।

क्या सत्ता वाकई "करोड़ों युवा कॉकरोचों" से डर गई है? 

 युवा आक्रोश की आग: क्यों फैल गई यह मूवमेंट?

भारत में युवा बेरोजगारी एक गंभीर मुद्दा है। NSSO और CMIE डेटा के अनुसार, स्नातक युवाओं में बेरोजगारी 15-20% के आसपास है। NEET, NET, UPSC जैसी परीक्षाओं में पेपर लीक, देरी और सिलेबस बदलाव युवाओं को तोड़ रहे हैं। शिक्षा महंगी हो रही है, जॉब्स कम। इसी बीच, राजनीतिक पार्टियां युवाओं को सिर्फ वोट बैंक समझती हैं।

CJP ने इन मुद्दों को व्यंग्य, मीम्स, रैप और सड़क प्रदर्शनों के जरिए उठाया। मेनिफेस्टो में मांगें शामिल हैं:
- न्यायाधीशों के पोस्ट-रिटायरमेंट जॉब्स पर रोक
- मीडिया पर औद्योगिक घरानों का नियंत्रण खत्म
- शिक्षा सुधार
- युवा प्रतिनिधित्व बढ़ाना

यह कोई पारंपरिक पार्टी नहीं — यह Gen-Z का डिजिटल विद्रोह है। कॉकरोच कॉस्ट्यूम पहनकर क्लीनअप ड्राइव और प्रोटेस्ट करना इसका प्रतीक बन गया है। "हम कॉकरोच हैं, हम मरते नहीं, बढ़ते हैं" — यह नारा अब वायरल है।

 इंस्टाग्राम पर हैकिंग की तैयारी?

अभिजीत दीपके और टीम ने दावा किया है कि इंस्टाग्राम पेज पर भी हैकिंग अटेम्प्ट हो रहे हैं। फॉलोअर्स BJP से दोगुने होने की राह पर हैं। अगर इंस्टाग्राम भी प्रभावित होता है, तो यह डिजिटल सेंसरशिप की नई मिसाल बनेगा।

भारत में IT Rules 2021 और बार-बार प्लेटफॉर्म्स पर दबाव की आलोचना होती रही है। 2026 में भी X, Meta और YouTube पर हजारों अकाउंट्स ब्लॉक किए जा चुके हैं। सरकार कहती है यह राष्ट्रीय सुरक्षा और फेक न्यूज के लिए है, जबकि आलोचक इसे विपक्षी आवाज दबाने का तरीका बताते हैं।

CJP के मामले में सवाल उठता है — क्या एक व्यंग्यात्मक मूवमेंट इतना खतरनाक है कि उसे दबाया जाए? या यह वाकई फेक फॉलोअर्स और विदेशी फंडिंग का मामला है?

 राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

- विपक्ष: इसे लोकतंत्र पर हमला बताते हुए समर्थन दे रहा है। महुआ मोइत्रा, किरीट आजाद जैसे नेताओं ने सदस्यता ली।


- BJP समर्थक: इसे कांग्रेस-AAP की साजिश या "टूलकिट" मान रहे हैं। कह रहे हैं कि CJI की टिप्पणी फेक डिग्री वाले युवाओं के लिए थी, पूरे युवा वर्ग के लिए नहीं।

- युवा: दोनों तरफ से निराश। CJP को "नई उम्मीद" मान रहे हैं, भले ही यह अभी सिर्फ ऑनलाइन है।

 क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

सोशल मीडिया एनालिस्ट्स का कहना है कि यह "मेमे टू मूवमेंट" का क्लासिक केस है। 2010 के Arab Spring से लेकर 2020 के किसान आंदोलन तक, सोशल मीडिया ने युवाओं को जोड़ा है। लेकिन चुनौती स्थायित्व की है। क्या CJP ऑफलाइन संगठन बना पाएगी? क्या यह चुनावी ताकत बनेगी या सिर्फ वायरल ट्रेंड रह जाएगी?

आर्थिक विशेषज्ञ चेताते हैं — युवा बेरोजगारी अगर अनसुलझी रही तो सामाजिक अस्थिरता बढ़ेगी। Skill India, Startup India जैसे कार्यक्रमों के बावजूद ग्राउंड रियलिटी अलग है।

भविष्य क्या होगा?

1. CJP का अगला कदम: नए X अकाउंट्स, ऑफलाइन रैलियां, राज्य स्तर की यूनिट्स।

2. सरकार का रुख: अगर और पाबंदियां लगीं तो backlash बढ़ेगा। अगर इग्नोर किया तो मूवमेंट और फैलेगा।

3. युवाओं के लिए सबक: डिजिटल आवाज मजबूत है, लेकिन सस्टेनेबल बदलाव के लिए संगठन, नीति और वोट बैंक की जरूरत है।

: कॉकरोच जनता पार्टी कोई पारंपरिक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि युवा आक्रोश का प्रतीक है। X अकाउंट बंद होना और इंस्टाग्राम पर खतरा इसे और लोकप्रिय बना रहा है। सत्ता को समझना चाहिए — युवाओं को दबाने से समस्या हल नहीं होती, उसे सुनना पड़ता है।

करोड़ों युवा "कॉकरोच" अब जाग चुके हैं। वे मरते नहीं, बल्कि हर कोने में फैलते हैं। सिस्टम को बदलने की ताकत रखते हैं। मोदी सरकार या कोई भी सत्ता, अगर युवाओं की आवाज को दबाएगी तो इतिहास गवाह है — आंधियां हमेशा छोटी चिंगारियों से शुरू होती हैं।

समय आ गया है कि राजनीति युवा मुद्दों — रोजगार, शिक्षा, न्याय — पर फोकस करे, न कि अकाउंट्स बंद करने पर।

भारत का युवा जाग रहा है। कॉकरोच बनकर।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-21 May 2026
May 21, 2026

पेट्रोल-डीजल की किल्लत: इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री बढ़ाने का छिपा मास्टर प्लान?

पेट्रोल-डीजल की किल्लत: इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री बढ़ाने का छिपा मास्टर प्लान?
-Friday World-21 May 2026
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, वैश्विक तेल संकट और आपूर्ति की अस्थिरता की खबरें अक्सर सुर्खियों में रहती हैं। 2026 में मध्य पूर्व की अस्थिरता के कारण ब्रेंट क्रूड $112 प्रति बैरल तक पहुंच गया है, जिससे ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ा है। ऐसे में सरकार, कंपनियां और मीडिया EV (इलेक्ट्रिक वाहन) को बढ़ावा दे रहे हैं। लेकिन सवाल यह है — क्या पेट्रोल-डीजल की तंगी की आड़ में EV बिक्री को जबरन बढ़ाने की कोई रणनीति तो नहीं चल रही? क्या यह पर्यावरण और आत्मनिर्भरता का सचमुच का समाधान है, या आयातित बैटरी, चार्जिंग इंफ्रा की कमी और रीसाइक्लिंग की अनुपस्थिति वाले एक बड़े खतरे की ओर धकेलना? 

यह लेख तथ्यों, चुनौतियों और वास्तविकता पर आधारित है। EV का भविष्य उज्ज्वल हो सकता है, लेकिन बिना तैयारी के इसे थोपना देश की अर्थव्यवस्था और आम आदमी दोनों के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है।

 पेट्रोल-डीजल संकट की पृष्ठभूमि
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। 2026 में ईरान संकट और मध्य पूर्व अस्थिरता के कारण वैश्विक तेल कीमतें 60% तक बढ़ गईं। भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रखने के लिए सब्सिडी दी जा रही है, लेकिन लंबे समय तक यह टिकाऊ नहीं। ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पर्याप्त स्टॉक होने का दावा कर रही हैं, फिर भी सोशल मीडिया पर अफवाहों से पैनिक बाइंग हो रही है।

इसी बीच EV बिक्री में उछाल आया है। मार्च-अप्रैल 2026 में EV की बिक्री 70-80% बढ़ी, टाटा मोटर्स, महिंद्रा और Ola Electric जैसी कंपनियों की पूछताछ बढ़ गई। सरकार FAME, PM E-DRIVE और PLI स्कीम के तहत EV को प्रोत्साहन दे रही है। लक्ष्य 2030 तक 30% EV पेनेट्रेशन है। लेकिन क्या ईंधन की महंगाई EV को स्वाभाविक विकल्प बना रही है, या इसे आर्टिफिशियल तरीके से बढ़ावा दिया जा रहा है?

 EV के फायदे: सच या प्रचार?
EV के फायदे स्पष्ट हैं:

- कम चलने का खर्च: एक EV प्रति किमी 1-1.5 रुपये में चलती है, जबकि पेट्रोल कार 5-7 रुपये।

- शून्य टेलपाइप उत्सर्जन: शहरों की हवा साफ करने में मदद।

- सरकारी इंसेंटिव: GST में छूट, सब्सिडी, रजिस्ट्रेशन फीस माफी।

- शोर-रहित ड्राइविंग और त्वरित टॉर्क।

टाटा नेक्सॉन EV, महिंद्रा XUV400 जैसी कारें लोकप्रिय हो रही हैं। 2026 में EV सेल्स 24 लाख यूनिट्स के पार पहुंच गई। युवा और मध्यम वर्ग ईंधन की अनिश्चितता से बचने के लिए EV की ओर रुख कर रहा है।

लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू भी कम नहीं।

 EV की वास्तविक चुनौतियां
1. चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी*: 2026 में भारत में 29,000 पब्लिक चार्जिंग स्टेशन हैं, लेकिन EV-to-Charger रेशियो 1:235 है। ग्रामीण इलाकों और हाईवे पर स्थिति और खराब। लंबी यात्रा में रेंज एंग्जायटी बनी रहती है।

2. बैटरी की कीमत और जीवन: बैटरी EV की कुल कीमत का 40% है। 6-8 साल बाद रिप्लेसमेंट महंगा। भारत में लिथियम आयात दस गुना बढ़ गया है — चीन पर निर्भरता बढ़ रही है।

3. बैटरी रीसाइक्लिंग का संकट: EV बैटरी रीसाइक्लिंग अभी शैशवावस्था में है। 90% अनौपचारिक क्षेत्र में होती है, जो पर्यावरण के लिए खतरनाक। 2030 तक लाखों बैटरियां खत्म होंगी, लेकिन क्षमता सिर्फ 2 GWh है जबकि जरूरत 128 GWh। मूल्यवान लिथियम, कोबाल्ट बर्बाद हो रहे हैं और जहरीले पदार्थ मिट्टी- पानी को दूषित कर सकते हैं।

4. बिजली उत्पादन: भारत की अधिकांश बिजली कोयला-आधारित है। EV चार्ज करने से अप्रत्यक्ष उत्सर्जन बढ़ सकता है। ग्रिड को EV के लिए तैयार करने में भारी निवेश चाहिए।

5. आर्थिक प्रभाव: छोटे पेट्रोल पंप वाले, मैकेनिक, तेल उद्योग से जुड़े लाखों लोग प्रभावित होंगे। EV पार्ट्स मुख्यतः आयातित, इसलिए विदेशी मुद्रा का बहाव।

सरकार आत्मनिर्भरता की बात करती है, लेकिन बैटरी सेल्स और खनिजों में चीन की दबदबा बना हुआ है।

 क्या यह प्लान है?
ईंधन संकट के समय EV डिस्काउंट, प्रचार और पॉलिसी पुश देखकर लगता है कि सरकार और कंपनियां मौके का फायदा उठा रही हैं। पेट्रोल महंगा होने की आशंका से लोग EV की ओर जा रहे हैं। लेकिन क्या बुनियादी ढांचा तैयार है? क्या आम आदमी को महंगी बैटरी वाली कार खरीदकर बाद में पछतावा नहीं होगा?

कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि EV संक्रमण अनिवार्य है, लेकिन जल्दबाजी में थोपना गलत। हाइब्रिड, CNG, इथेनॉल ब्लेंडिंग जैसे विकल्पों को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए।

 भविष्य का रास्ता
- बैटरी रीसाइक्लिंग को बढ़ावा: EPR (Extended Producer Responsibility) को सख्ती से लागू करें। स्टार्टअप्स और टाटा जैसे बड़े प्लेयर्स को इनसेंटिव दें।

- घरेलू लिथियम और रिफाइनिंग: J&K जैसे डिपॉजिट को तेजी से विकसित करें।

- चार्जिंग नेटवर्क: हाईवे पर सोलर-पावर्ड स्टेशन, स्टैंडर्डाइजेशन।

- रिसर्च: सॉलिड स्टेट बैटरी, स्वैपिंग टेक्नोलॉजी।

- संतुलित नीति: सिर्फ EV नहीं, क्लीन फ्यूल विकल्प भी।

EV क्रांति भारत के लिए अवसर है, लेकिन बिना तैयारी के यह बोझ बन सकती है। पेट्रोल-डीजल की तंगी वास्तविक है, लेकिन इसे EV को जबरन थोपने का बहाना नहीं बनाना चाहिए। उपभोक्ता को सूचित निर्णय लेने का अधिकार है — लागत, सुविधा और लंबी अवधि के प्रभाव को समझकर।

भारत को सस्टेनेबल मोबिलिटी चाहिए, न कि सिर्फ EV क्वोटा पूरा करने का प्रचार। सच्ची आत्मनिर्भरता तभी आएगी जब हम बैटरी से लेकर बिजली तक सब कुछ लोकल बनाएं।


 EV का समर्थन करें, लेकिन आंख बंद करके नहीं। पेट्रोल-डीजल की समस्या का समाधान बहु-आयामी होना चाहिए — EV, हाइब्रिड, बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट और ऊर्जा सुरक्षा सब शामिल। सूचित रहें, स्मार्ट चुनें।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-21 May 2026
May 21, 2026

राजीव गांधी: शहीद की अमर श्रद्धांजली — आधुनिक भारत के वास्तुकार की अनंत यात्रा

राजीव गांधी: शहीद की अमर श्रद्धांजली — आधुनिक भारत के वास्तुकार की अनंत यात्रा
-Friday World-21 May 2026
21 मई 1991 का वह काला दिन भारत के इतिहास में सदैव अंकित रहेगा। श्रीपेरुंबुदूर के मैदान में लोकतंत्र के महान योद्धा, युवा ऊर्जा के प्रतीक और आधुनिक भारत के स्वप्नद्रष्टा राजीव गांधी आत्मघाती हमले में शहीद हो गए। उनकी शहादत ने पूरे देश को झकझोर दिया, लेकिन उनकी विरासत आज भी हर भारतीय के दिल में जीवित है। आज, उनके शहीद दिवस पर हम उन महान नेता को श्रद्धांजली अर्पित करते हैं जिन्होंने भारत को 21वीं सदी की दहलीज पर खड़ा करने का बीड़ा उठाया था।

 बचपन और प्रारंभिक जीवन: एक राजकुमार से पायलट तक

राजीव रत्न गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को मुंबई में हुआ। वे भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नाती और इंदिरा गांधी तथा फिरोज गांधी के बड़े पुत्र थे। उनका बचपन राजनीतिक परिवार की छत्रछाया में बीता, लेकिन वे खुद राजनीति से दूर रहना चाहते थे। शिक्षा के लिए उन्होंने इंग्लैंड के ट्रिनिटी कॉलेज, कैम्ब्रिज में दाखिला लिया, जहां उन्होंने मैकेनिकल साइंस पढ़ी। हालांकि डिग्री पूरी नहीं की, लेकिन उन्होंने कमर्शियल पायलट की ट्रेनिंग ली और इंडियन एयरलाइंस में पायलट के रूप में सेवा की।

राजीव गांधी एक साधारण, विनम्र और आधुनिक युवा थे। उनकी शादी इटली की सोनिया मेनो (सोनिया गांधी) से 1968 में हुई। उनके दो बच्चे राहुल और प्रियंका हैं। जीवन का बड़ा हिस्सा उन्होंने परिवार और उड़ानों के बीच बिताया। लेकिन 1980 में छोटे भाई संजय गांधी की विमान दुर्घटना में मृत्यु के बाद राजनीतिक दबाव बढ़ा। 1981 में अमेठी से लोकसभा चुनाव लड़कर वे संसद पहुंचे। फिर 31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी की हत्या के बाद, मात्र 40 वर्ष की आयु में वे भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने।

 प्रधानमंत्री काल: परिवर्तन की लहर

1984 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस ने अभूतपूर्व 414 सीटों का बहुमत हासिल किया। राजीव गांधी ने इसे "सद्भावना का जनादेश" कहा। उन्होंने भारत को पुरानी सोच से निकालकर नई दिशा देने की ठानी। उनका नारा था — "21वीं सदी में भारत को ले जाना"।

प्रौद्योगिकी और दूरसंचार क्रांति:
राजीव गांधी को भारत का "कंप्यूटर प्रधानमंत्री" कहा जाता है। उन्होंने कंप्यूटर और टेलीकॉम क्षेत्र को खोला। MTNL की स्थापना हुई, PCO (पब्लिक कॉल ऑफिस) गांव-गांव पहुंचे। करों में छूट, आयात नियमों में ढील और टेक्नोलॉजी मिशनों ने भारत को आईटी हब बनाने की नींव रखी। आज का भारत जिस आईटी सेक्टर पर गर्व करता है, उसकी शुरुआत राजीव जी के दूरदर्शी कदमों से हुई।

शिक्षा सुधार:
1986 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति लाई गई। जवाहर नवोदय विद्यालय की स्थापना हुई, जो ग्रामीण प्रतिभाओं को निशुल्क बेहतर शिक्षा देता है। उच्च शिक्षा के विस्तार और आधुनिकीकरण पर जोर दिया गया।

पंचायती राज व्यवस्था:
वे लोकतंत्र को जड़ों तक पहुंचाना चाहते थे। 73वें और 74वें संशोधन (जो बाद में लागू हुए) की नींव उन्होंने रखी। महिलाओं, दलितों और पिछड़ों को पंचायतों में आरक्षण का विचार उनका था। इससे ग्रामीण भारत सशक्त हुआ।

युवा सशक्तिकरण:
18 वर्ष की आयु में मताधिकार देने का प्रावधान मजबूत किया। युवाओं को राजनीति और विकास में भागीदारी दी।

अन्य प्रमुख योगदान:
- विज्ञान और प्रौद्योगिकी को बढ़ावा: मिशन मोड पर तेल, दूध, साक्षरता, जल आदि मिशन शुरू किए।  

- अर्थव्यवस्था में उदारीकरण की शुरुआत: लाइसेंस राज को कम करने के प्रयास।  

- रक्षा क्षेत्र: मिराज-2000 और अन्य आधुनिक हथियारों की खरीद।  

- पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण पर ध्यान।

उनके कार्यकाल में भारत ने वैश्विक पटल पर अपनी छवि सुधारी। पाकिस्तान, चीन और अमेरिका जैसे देशों के साथ संबंध सुधारने के प्रयास किए।

 चुनौतियां और विवाद

हर नेता की तरह राजीव गांधी पर भी आलोचनाएं हुईं। बोफोर्स घोटाला, शाह बानो मामले में पलटाव, पंजाब और श्रीलंका नीति (IPKF) पर सवाल उठे। 1989 के चुनाव में कांग्रेस हारी, लेकिन उन्होंने विपक्ष में भी सक्रिय भूमिका निभाई। 1991 में वे फिर चुनावी मैदान में थे, क्योंकि उन्हें विश्वास था कि देश को उनकी जरूरत है।

शहादत: अमर बलिदान

21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरुंबुदूर में चुनावी सभा के दौरान LTTE (लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम) की महिला आत्मघाती हमलावर धनु ने उन पर बम विस्फोट कर दिया। उनकी मृत्यु हो गई। यह हत्या इंदिरा गांधी की हत्या का बदला थी, क्योंकि राजीव जी ने IPKF भेजकर LTTE को रोकने की कोशिश की थी।

पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। लाखों लोग वीर भूमि पर श्रद्धांजलि देने पहुंचे। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और करोड़ों भारतीयों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। 1991 में उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

 विरासत: आज भी प्रासंगिक

राजीव गांधी की विरासत केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि वैचारिक है। उन्होंने साबित किया कि राजनीति युवा, ईमानदार और विज्ञान-प्रधान हो सकती है। आज डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, पंचायती राज की मजबूती और शिक्षा के विस्तार में उनका योगदान दिखता है।

समीर पित्रोदा जैसे सहयोगी आज भी कहते हैं कि राजीव जी ने टेलीकॉम, आईटी, सुपरकंप्यूटिंग और टेक्नोलॉजी मिशनों के माध्यम से भारत को आधुनिक बनाने का सपना साकार किया।

वे कहते थे — "मेरा सपना है एक समृद्ध, एकजुट और प्रगतिशील भारत का।" उनकी शहादत ने हमें सिखाया कि लोकतंत्र के लिए बलिदान कितना महंगा हो सकता है, लेकिन यह अमर भी होता है।

 व्यक्तिगत छवि: एक संवेदनशील इंसान

राजीव गांधी सिर्फ नेता नहीं, एक अच्छे पिता, पति और दोस्त भी थे। वे संगीत पसंद करते थे, फोटोग्राफी के शौकीन थे और प्रकृति प्रेमी थे। राजनीति में भी वे भ्रष्टाचार मुक्त शासन चाहते थे। "मेरा भारत भ्रष्टाचार मुक्त बने" — उनका यह सपना आज भी प्रेरणा स्रोत है।

नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा

आज के युवाओं को राजीव गांधी से सीखना चाहिए — सपनों को बड़ा देखो, तकनीक को अपनाओ, जड़ों से जुड़े रहो और देश के लिए समर्पित हो जाओ। उनकी शहादत हमें याद दिलाती है कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए सतर्क रहना जरूरी है।

 श्रद्धांजलि

राजीव गांधी जी, आपकी शहादत व्यर्थ नहीं गई। आपकी याद में लाखों युवा आज देशसेवा में लगे हैं। आपकी नीतियां भारत को विश्व गुरु बनाने में मदद कर रही हैं। वीर भूमि पर आपकी समाधि न सिर्फ पत्थर की है, बल्कि करोड़ों भारतीयों के दिलों में बसती है।

तुम जियो हजारों साल, ऐसे शहीदों को सलाम!"

आपकी अमर आत्मा को शत-शत नमन। 🇮🇳

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-21 May 2026

Wednesday, 20 May 2026

May 20, 2026

दिल्ली की सीक्रेट शुद्धि सभा: हर सप्ताह 400 मुस्लिम हिंदू बन रहे, राजा मानसिंह के वंशज अनवर अब नरेश सिंह – सालाना 2.5 लाख घर वापसी का दावा!

दिल्ली की सीक्रेट शुद्धि सभा: हर सप्ताह 400 मुस्लिम हिंदू बन रहे, राजा मानसिंह के वंशज अनवर अब नरेश सिंह – सालाना 2.5 लाख घर वापसी का दावा!
- Friday World-21 May 2026
28 अप्रैल 2026, दिल्ली का कमला नगर। आर्य समाज मंदिर के कुंड से उठता पवित्र धुआं, हवन की सुगंध हवा में फैली हुई थी। मंदिर के सेवादार से पूछने पर उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा – “हाँ, अभी-अभी शुद्धि हुई है।” बाहर सफेद पट्टिका पर लिखा था – भारतीय हिंदू शुद्धि सभा। यह कोई साधारण मंदिर नहीं, बल्कि हजारों लोगों के धर्म परिवर्तन का गुप्त केंद्र बन चुका है, जहाँ हर सप्ताह औसतन 400 मुस्लिम हिंदू धर्म में वापस लौट रहे हैं।

यह कोई अफवाह नहीं, बल्कि ग्राउंड रिपोर्ट पर आधारित सच्ची घटना है। शुद्धि सभा के कार्यकर्ता दावा करते हैं कि पूरे देश में सालाना लगभग 2.5 लाख लोग गृह वापसी कर रहे हैं, जिनमें मुस्लिम बहुसंख्यक हैं। यह आंकड़ा चौंकाने वाला है और हिंदू समाज में नई चेतना जगा रहा है।

शुद्धि आंदोलन का इतिहास: महर्षि दयानंद से लेकर आज तक

शुद्धि की अवधारणा नई नहीं है। महर्षि दयानंद सरस्वती, आर्य समाज के संस्थापक, ने 19वीं शताब्दी में ही इसे मजबूत आधार दिया। उन्होंने कहा था कि हिंदू धर्म कोई जन्म-आधारित नहीं, बल्कि कर्म और संस्कार पर आधारित है। जो व्यक्ति वेदों को स्वीकार करे, वह हिंदू है। 

1923 में आगरा में भारतीय हिंदू शुद्धि सभा की औपचारिक स्थापना हुई। उस समय राजपूत शुद्धि सभा ने हजारों नव-मुस्लिमों को वापस हिंदू समाज में शामिल किया। 1931 तक सभा ने 1.83 लाख से अधिक लोगों का शुद्धिकरण किया था। स्वामी श्रद्धानंद जैसे संतों ने इसे राष्ट्रीय आंदोलन का रूप दिया। आज वही परंपरा दिल्ली के कमला नगर में जीवित है।

आर्य समाज मंदिर के बगल में स्थित शुद्धि सभा कार्यालय में रोजाना लोग आते हैं। कार्यकर्ता बताते हैं कि प्रक्रिया सरल लेकिन प्रभावशाली है – हवन, वेद मंत्रोच्चार, संस्कार और नए नाम का विधिवत समारोह।

राजा मानसिंह के वंशज की घर वापसी: ऐतिहासिक क्षण

सबसे चर्चित मामला है अनवर रजा का, जो अब नरेश सिंह नाम से जाने जाते हैं। वे राजा मानसिंह (मिर्जा राजा, आमेर के कछवाहा शासक) के वंशज बताए जाते हैं। 1980 से अमेरिका में रह रहे नरेश सिंह ने बताया कि उनके परिवार में सदियों से इस्लाम था, लेकिन रक्त में राजपूत वीरता बची हुई थी।

*l“मैं अपने पूर्वजों की भूमि पर लौट आया हूँ।”– नरेश सिंह।

राजा मानसिंह मुगल काल के महान योद्धा थे। उन्होंने अकबर की सेना में सेवा की लेकिन हिंदू मंदिरों की रक्षा की, सैकड़ों मंदिर बनवाए और हिंदू हितों की रक्षा की। उनका वंशज हिंदू धर्म में लौटना प्रतीकात्मक है – जैसे 400 साल बाद इतिहास खुद को दोहरा रहा हो। यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी है और हिंदू युवाओं में गर्व की लहर पैदा कर रही है।

 शुद्धि सभा कैसे काम करती है? ग्राउंड रिपोर्ट

दिल्ली के इस केंद्र में प्रक्रिया गोपनीय रखी जाती है। लोग परिवार सहित आते हैं। कुछ प्रेम विवाह के बाद, कुछ जिज्ञासा से, कुछ सामाजिक दबाव या व्यक्तिगत अनुभव से। शुद्धि सभा के पदाधिकारी कहते हैं:

- हर सप्ताह 400-500 शुद्धिकरण होते हैं।

- अधिकांश मुस्लिम पृष्ठभूमि के।

- ईसाई परिवार भी शामिल।

- सभी दस्तावेजीकरण किया जाता है – नाम, पता, पुराना और नया धर्म।

सभा का दावा है कि यह जबरदस्ती नहीं, बल्कि **स्वेच्छा से** होता है। वे वेद पाठ, आर्य समाज के सिद्धांत और हिंदू संस्कृति से परिचय कराते हैं। हवन के बाद नए नाम दिए जाते हैं – जैसे अनवर से नरेश।

 क्यों बढ़ रही है घर वापसी?

इसकी कई वजहें हैं:

1. सूचना क्रांति: सोशल मीडिया, यूट्यूब और व्हाट्सएप पर वेद, पुराण और हिंदू इतिहास आसानी से उपलब्ध। युवा पीढ़ी सवाल पूछ रही है।

2. सामाजिक परिवर्तन: कई मुस्लिम परिवारों में शिक्षा बढ़ी है, वे रूढ़िवादी परंपराओं से ऊब चुके हैं।

3. आर्य समाज का सक्रिय प्रचार: गुरुकुल, सत्संग और शुद्धि शिविर।

4. राजनीतिक और सांस्कृतिक जागरण: राम मंदिर, समान नागरिक संहिता जैसी घटनाओं ने बहस छेड़ी है।

5. व्यक्तिगत कहानियाँ: कई लोग बताते हैं कि वे “कुछ गलत महसूस” कर रहे थे। हिंदू संस्कार उन्हें शांति दे रहा है।

चुनौतियाँ और विवाद

शुद्धि सभा को विपक्ष का सामना करना पड़ता है। कुछ संगठन इसे “लुभावना” या “जबरदस्ती” बताते हैं। कानूनी चुनौतियाँ भी आती हैं। लेकिन सभा के लोग कहते हैं – “हम कोई conversion नहीं, बल्कि re-conversion कर रहे हैं। जो पहले हिंदू थे, वे वापस लौट रहे हैं।”

भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में धर्म परिवर्तन संवेदनशील मुद्दा है। संविधान अनुच्छेद 25 धार्मिक स्वतंत्रता देता है, लेकिन जबरन या प्रलोभन से परिवर्तन अवैध है। शुद्धि सभा जोर देती है कि उनका कार्य पूरी तरह कानूनी और स्वैच्छिक है।

हिंदू समाज के लिए सबक

यह आंदोलन हिंदू समाज को आईना दिखाता है। अगर हजारों लोग वापस लौट रहे हैं तो हमें उन्हें अपनाने की तैयारी रखनी चाहिए। जाति-पाति, छुआछूत जैसी कुरीतियाँ दूर करनी होंगी। शुद्धि सिर्फ नाम बदलना नहीं, बल्कि संस्कारों में शामिल होना है।

आर्य समाज का संदेश सरल है – वेदों की ओर लौटो, एक ईश्वर, एक मानवता।

भविष्य की दिशा

दिल्ली का यह केंद्र सिर्फ शुरुआत है। देशभर में आर्य समाज शाखाएँ सक्रिय हैं। अगर दावा सही है तो सालाना 2.5 लाख घर वापसी का मतलब है कि अगले 10 साल में 25 लाख से अधिक लोग हिंदू धर्म में शामिल हो सकते हैं। यह जनसांख्यिकीय परिवर्तन का संकेत है।


शुद्धि सभा की यह गतिविधि सिर्फ धर्म परिवर्तन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनरुत्थान है। राजा मानसिंह के वंशज नरेश सिंह की कहानी प्रेरणा देती है कि रक्त की पुकार कभी दबती नहीं। दिल्ली के कमला नगर में जलते हवन कुंड की लपटें सिर्फ धुआं नहीं, बल्कि नई चेतना की ज्योति फैला रही हैं।

जो हिंदू था, वह फिर हिंदू बन रहा है। गृह वापसी का यह सिलसिला जारी रहेगा या नहीं, यह समाज की एकता और जागरूकता पर निर्भर करता है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-21 May 2026
May 20, 2026

डिप्लोमेसी का बेताज बादशाह: डॉ. अब्बास अराघची ने ट्रंप को कैसे दी मात? ईरान की अजेय कूटनीतिक पारी

डिप्लोमेसी का बेताज बादशाह: डॉ. अब्बास अराघची ने ट्रंप को कैसे दी मात? ईरान की अजेय कूटनीतिक पारी -Friday World-20 May 2026

दुनिया के सबसे जटिल भू-राजनीतिक संकटों में से एक में, जहां अमेरिका और इजरायल जैसे शक्तिशाली गठबंधनों ने ईरान पर सैन्य दबाव बढ़ाया, वहां ईरान के विदेश मंत्री डॉ. अब्बास अराघची ने कूटनीति के मैदान में एक अनोखी मिसाल कायम की है। सैन्य मोर्चे पर पीछे हटने को मजबूर अमेरिका अब डिप्लोमेसी के मोर्चे पर भी नाकों चने चबा रहा है। 20 वर्षों की अनुभवी पारी खेलते हुए अराघची 'बातचीत का चलता-फिरता विश्वकोश' साबित हो रहे हैं। मुंबई स्थित ईरानी मिशन की सोशल मीडिया पोस्ट ने इस शख्सियत को वैश्विक स्तर पर और चमका दिया।

ईरानी मिशन ने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा: "बातचीत की मेज पर 20 साल। म्यूनिख 2006 से तेहरान 2026 तक। डॉ. अब्बास अराघची बातचीत का चलता-फिरता विश्वकोश हैं। इसे कहते हैं असली 'खिलाड़ी', बाकी सब तो सिर्फ फील्डिंग कर रहे हैं!" यह पोस्ट महज एक प्रशंसा नहीं, बल्कि ईरानी कूटनीति की निरंतरता और अराघची की दूरदर्शिता का प्रतीक है।

 शुरुआती जीवन: क्रांति से कूटनीति तक

5 दिसंबर 1962 को तेहरान में जन्मे अब्बास अराघची का परिवार इस्फहान से जुड़ा है। किशोरावस्था में 1979 की इस्लामिक क्रांति में शामिल होने के बाद उन्होंने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) में सेवा की और ईरान-इराक युद्ध (1980-88) में भाग लिया। युद्ध के बाद 1989 में विदेश मंत्रालय में शामिल होकर उन्होंने कूटनीति की नींव रखी। उन्होंने मंत्रालय से जुड़े स्कूल ऑफ इंटरनेशनल रिलेशंस से बैचलर डिग्री, इस्लामिक आजाद यूनिवर्सिटी से मास्टर्स इन पॉलिटिकल साइंस और ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी ऑफ केंट से पीएचडी (पॉलिटिकल थॉट) प्राप्त की। उनकी थीसिस "इस्लामिक पॉलिटिकल थॉट में पॉलिटिकल पार्टिसिपेशन" ने पश्चिमी लोकतंत्र और इस्लामी शासन के बीच सामंजस्य पर गहरा विश्लेषण प्रस्तुत किया।

अराघची बहुभाषी हैं — अंग्रेजी और अरबी में निपुण। फिनलैंड (1999-2003) और जापान (2008-2011) में राजदूत के रूप में सेवा कर चुके हैं। उन्होंने विदेश मंत्रालय में प्रवक्ता, लीगल एंड इंटरनेशनल अफेयर्स डिप्टी मिनिस्टर, पॉलिटिकल डिप्टी मिनिस्टर जैसे अहम पद संभाले। 2013 से 2021 तक वे ईरान के न्यूक्लियर नेगोशिएटर रहे, जहां उन्होंने जोइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (JCPOA) 2015 न्यूक्लियर डील में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

 2024-26: संकट का दौर और अराघची का उदय

2024 में राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के नेतृत्व में अराघची को विदेश मंत्री बनाया गया। यह नियुक्ति ईरान की पश्चिम के साथ सैंक्शंस राहत और डिप्लोमेसी पर जोर देने की नीति का प्रतीक थी। लेकिन क्षेत्रीय घटनाक्रम — इजरायल-हमास युद्ध, हिजबुल्लाह और सीरिया में बदलाव, 2024-25 के प्रत्यक्ष टकराव और 2026 का बड़ा ईरान युद्ध — ने सब बदल दिया।

अमेरिका-इजरायल के हमलों में ईरान के कई वरिष्ठ नेता प्रभावित हुए, लेकिन अराघची बार-बार सार्वजनिक रूप से सक्रिय रहे। वे पश्चिम में सम्मानित JCPOA नेगोशिएटर के रूप में जाने जाते हैं, जो हार्डलाइनर्स और पश्चिम दोनों के बीच विश्वसनीय सेतु साबित हो सकते हैं। 2026 के युद्ध के दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा कि "कोई सैन्य समाधान नहीं है, डिप्लोमेसी ही रास्ता है", लेकिन "निष्पक्ष और संतुलित डील" के बिना आगे नहीं बढ़ेंगे।

म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस 2006 से शुरू हुई उनकी यात्रा 2026 के तेहरान तक पहुंची है। उन्होंने यूरोपीय देशों को "अप्रासंगिक" और "पैरालिसिस" का शिकार बताया। म्यूनिख को "सर्कस" कहते हुए उन्होंने लिखा कि ई3 (ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी) अब क्षेत्रीय मुद्दों में किनारे पर हैं, जबकि गल्फ देश ज्यादा प्रभावी साबित हो रहे हैं।

 ट्रंप के साथ सामना: डिप्लोमेसी की मास्टरक्लास

डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ने ईरान पर दबाव बढ़ाया, लेकिन अराघची ने दृढ़ता दिखाई। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत अब एजेंडा पर नहीं है, क्योंकि पहले प्रगति के बावजूद हमले हुए। ओमान, चीन और अन्य मध्यस्थों के जरिए संदेश आए, लेकिन "ट्रस्ट की कमी" सबसे बड़ी बाधा बनी। अराघची ने BRICS मीटिंग में और अन्य मंचों पर ईरान की स्थिति स्पष्ट की — आत्मरक्षा का अधिकार असीमित है, लेकिन डिप्लोमेसी बेहतर विकल्प है।

उनकी रणनीति बहुआयामी रही:
- क्षेत्रीय गठबंधन: रूस, चीन और BRICS देशों के साथ समन्वय।

- सार्वजनिक संदेश: पश्चिमी मीडिया इंटरव्यू में ईरान की लचीलापन और दृढ़ता दोनों दिखाई।

- ऐतिहासिक निरंतरता: JCPOA अनुभव का उपयोग कर "निष्पक्ष डील" की मांग।

- घरेलू संतुलन: हार्डलाइनर्स को विश्वास दिलाते हुए पेजेश्कियन सरकार की डिप्लोमेसी को आगे बढ़ाया।

मुंबई ईरानी मिशन की पोस्ट इसी निरंतरता को रेखांकित करती है। 20 साल में अराघची ने सैकड़ों दौर की बातचीत की, असफलताओं से सीखा और ईरानी हितों की रक्षा की।

वैश्विक प्रभाव और चुनौतियां

अराघची की कूटनीति सिर्फ ईरान-अमेरिका तक सीमित नहीं। उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, तेल बाजार, क्षेत्रीय सुरक्षा और न्यूक्लियर कार्यक्रम जैसे मुद्दों पर ईरान की आवाज को मजबूत किया। उनकी पृष्ठभूमि — IRGC सेवा से लेकर पश्चिमी शिक्षा तक — उन्हें अनोखा बनाती है। वे कहते हैं, "सैनिक दोस्तों, वही कमांडर जिसने तुम्हें यूनिफॉर्म दी, मुझे सूट दिया है।"

विश्लेषक उन्हें "रीजनलिस्ट और प्रैग्मेटिस्ट" दोनों मानते हैं। 2026 के संकट में उन्होंने दिखाया कि सैन्य हमलों के बावजूद ईरान टूटा नहीं, बल्कि डिप्लोमेसी के जरिए मजबूती से खड़ा है। ट्रंप प्रशासन के दावों के बावजूद, अराघची ने स्पष्ट किया कि कोई "आसान" समझौता नहीं होगा।

 भविष्य की दिशा

ईरान की कूटनीति अब बहुपक्षीय है — BRICS, शंघाई सहयोग संगठन और क्षेत्रीय मध्यस्थों पर जोर। अराघची जैसे अनुभवी खिलाड़ी सुनिश्चित करते हैं कि ईरान न सिर्फ टिके, बल्कि प्रभावशाली बने। मुंबई पोस्ट याद दिलाती है कि असली खिलाड़ी मैदान में फील्डिंग नहीं, बल्कि गेम प्लान बनाते हैं।

डॉ. अब्बास अराघची की कहानी सिर्फ एक राजनयिक की नहीं, बल्कि संकट के समय में दूरदर्शी नेतृत्व की है। 20 साल की पारी अब नई ऊंचाइयों को छू रही है। चाहे म्यूनिख का सर्द हॉल हो या तेहरान की रणनीतिक बैठकें, अराघची साबित कर रहे हैं कि शब्दों की ताकत तोपों से कम नहीं होती।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-20 May 2026
May 20, 2026

प्रदेश महामंत्री, अखिल भारतीय कोली समाज, का पेट्रोलियम मंत्री को किसान के लिए डीजल सप्लाई की अपील

प्रदेश महामंत्री, अखिल भारतीय कोली समाज, का पेट्रोलियम मंत्री को किसान के लिए डीजल सप्लाई की अपील -Friday World 20 may 2026

प्रति,
माननीय मंत्री महोदय,

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय,

भारत सरकार, नई दिल्ली।

विषय:कृषि कार्य के लिए किसानों को पर्याप्त मात्रा में और समय पर डीजल उपलब्ध कराने के संबंध में प्रस्तुतीकरण।

आदरणीय मंत्री जी,

सश्रम वंदे, सविनय निवेदन है कि हमारी अर्थव्यवस्था कृषि आधारित है और देश के विकास में किसानों का योगदान सर्वोपरि है। वर्तमान में कृषि में बढ़ते यंत्रीकरण के कारण ट्रैक्टर, थ्रेशर, पंपसेट और अन्य कृषि उपकरणों के लिए डीजल किसानों की प्राथमिक और अनिवार्य आवश्यकता बन गया है।

परंतु, पिछले कुछ समय से ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त डीजल आपूर्ति की कमी के कारण किसानों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति का सीधा असर कृषि उत्पादन पर पड़ने की गंभीर आशंका है।

इस संवेदनशील मामले की ओर आपका ध्यान आकर्षित करते हुए, किसानों की ओर से निम्नलिखित मांगों के साथ यह प्रस्तुतीकरण किया जा रहा है:

कृषि के मुख्य सीजन (बुवाई और कटाई) के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों के पेट्रोल पंपों पर डीजल का पर्याप्त स्टॉक बना रहे, ऐसी व्यवस्था की जाए।पेट्रोल पंपों पर किसानों को कृषि उपकरणों के लिए प्राथमिकता के आधार पर डीजल उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए जाएं। संकट या कमी के समय कृषि कार्य बाधित न हो, इसके लिए स्थानीय डिपो स्तर पर किसानों के लिए डीजल का एक निश्चित कोटा (जहाज) आरक्षित रखने का प्रावधान किया जाए।किसान जब कृषि कार्य के लिए केन (कैन) या बैरल में डीजल लेने जाएं, तब उन्हें किसी भी प्रकार की प्रशासनिक या तकनीकी दिक्कतों का सामना न करना पड़े, इसकी सुदृढ़ निगरानी की जाए।

किसान देश के अन्नदाता हैं। यदि उन्हें समय पर ईंधन नहीं मिलेगा, तो बुवाई या कटाई के कार्य रुक जाएंगे, जिसका सीधा असर देश की खाद्य सुरक्षा पर पड़ सकता है।

पूर्ण आशा है कि आप इस विषय की गंभीरता को समझते हुए संबंधित अधिकारियों और तेल कंपनियों को इस संबंध में उचित कदम उठाने के लिए तत्काल निर्देश जारी करेंगे।

किसान हित में सकारात्मक निर्णय की अपेक्षा के साथ।

भवदीय,

(रसिक चावडा)
Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World 20 may 2026