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यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Sunday, 5 July 2026

July 05, 2026

ईरान का कूटनीतिक संदेश: शहीद खामेनेई के अंतिम संस्कार में विदेशी डेलिगेशनों को दी गई प्रतीकात्मक कुरानी आयतो से संदेश

ईरान का कूटनीतिक संदेश: शहीद खामेनेई के अंतिम संस्कार में विदेशी डेलिगेशनों को दी गई प्रतीकात्मक कुरानी आयतो से संदेश
-Friday World 5 Jul 2026
– राजनीति और आस्था का अनोखा मेल
ईरान ने अपने शहीद पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई के भव्य अंतिम संस्कार समारोह को मात्र शोक का अवसर नहीं बनाया, बल्कि एक गहरा कूटनीतिक और प्रतीकात्मक संदेश देने का माध्यम बनाया। तेहरान और मशहद में चल रहे इस ऐतिहासिक आयोजन के दौरान विभिन्न देशों के डेलिगेशनों को विशेष रूप से चुनी गई कुरान की आयतें सुनाई गईं। हर आयत उस देश की भूमिका, वर्तमान स्थिति या ईरान के साथ संबंधों से जोड़ी गई, जो अंतरराष्ट्रीय राजनीति में ईरान की रणनीतिक समझदारी को दर्शाती है। 

यह आयोजन न केवल लाखों ईरानियों की भावुक विदाई का प्रतीक बना, बल्कि क्षेत्रीय शक्तियों को संदेश देने का मंच भी साबित हुआ। सऊदी अरब, तुर्की, लेबनान, हिज्बुल्लाह, हमास, हूथी और कतर जैसे देशों को दी गई आयतों ने वैश्विक ध्यान खींचा।

 सऊदी अरब को दी गई आयत: विश्वास और अविश्वास की जंग

सऊदी अरब के डेलिगेशन को दो सेनाओं के युद्ध वाली आयत सुनाई गई – एक पक्ष विश्वास करने वालों का और दूसरा अविश्वासियों का। यह आयत सऊदी अरब की हालिया नीतियों और क्षेत्रीय संघर्षों के संदर्भ में देखी जा रही है। ईरान और सऊदी अरब के बीच पिछले वर्षों में तनाव रहा है, लेकिन हाल के समझौतों के बावजूद यह संदेश दोनों देशों के बीच विश्वास की लड़ाई को रेखांकित करता है। 

ईरान इस आयत के माध्यम से संकेत दे रहा है कि सच्चे विश्वास और प्रतिरोध की राह चुनने वालों की जीत तय है। सऊदी अरब की भूमिका को “अविश्वासी” पक्ष से जोड़कर ईरान ने अपने क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी को सूक्ष्म संदेश दिया है।

 तुर्की को संदेश: लड़ने वालों की श्रेष्ठता

तुर्की के डेलिगेशन को वह आयत सुनाई गई जिसमें लड़ने वालों को “बैठने” वालों से ऊंचा बताया गया है। यह आयत तुर्की की सक्रिय विदेश नीति, क्षेत्रीय हस्तक्षेप और संघर्षों में भागीदारी को रेखांकित करती है। 

ईरान और तुर्की के बीच सीरिया, इराक और क्यूरद मुद्दों पर मतभेद रहे हैं। इस आयत के जरिए ईरान तुर्की को बधाई देते हुए साथ ही यह भी संकेत दे रहा है कि निष्क्रिय रहने वालों से बेहतर है सक्रिय संघर्ष। तुर्की की “नीओ-ओटोमन” महत्वाकांक्षा को इस प्रतीकात्मक संदेश से जोड़ा जा रहा है।

 लेबनान और हिज्बुल्लाह: कुर्बानी और दृढ़ता का संदेश

लेबनानी सरकार को वह आयत सुनाई गई जिसमें कहा गया कि यदि कुर्बानी मांगी जाए तो वे देने से इनकार कर सकते हैं। यह लेबनान की आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और ईरान-समर्थित हिज्बुल्लाह की भूमिका को दर्शाता है। 

दूसरी ओर, हिज्बुल्लाह डेलिगेशन को “कमजोर मत पड़ो या दुखी मत हो — तुम बेहतर हो” वाली आयत सुनाई गई। यह आयत हिज्बुल्लाह की इजराइल के खिलाफ लड़ाई, त्याग और दृढ़ता की सराहना करती है। ईरान हिज्बुल्लाह को अपना प्रमुख सहयोगी मानता है और इस आयत के जरिए उसकी भूमिका को मजबूत संदेश दिया गया।

 हमास को सम्मान: वादा पूरा करने वालों की मिसाल

हमास डेलिगेशन को उन लोगों की प्रशंसा वाली आयत सुनाई गई जिन्होंने अल्लाह से किया वादा पूरा किया – “कुछ शहीद हो गए, कुछ इंतजार कर रहे हैं”। यह आयत गाजा में इजराइल के खिलाफ हमास की लड़ाई, त्याग और शहादत को सीधे संदर्भित करती है। 

ईरान हमास को क्षेत्रीय प्रतिरोध का प्रतीक मानता है। इस आयत ने हमास के संघर्ष को ईरानी समर्थन का स्पष्ट संदेश दिया और शहीद खामेनेई की विरासत को प्रतिरोध आंदोलनों से जोड़ा।

 हूथियों को सराहना: अटूट विश्वास की लड़ाई

यमन के हूथी डेलिगेशन को उन विश्वासियों की तारीफ वाली आयत सुनाई गई जो बिना कमजोर पड़े लड़े। यह आयत हूथियों की सऊदी गठबंधन के खिलाफ लंबी लड़ाई, धैर्य और दृढ़ता को रेखांकित करती है। 

ईरान हूथियों को लाल सागर और क्षेत्रीय सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका वाला सहयोगी मानता है। इस प्रतीकात्मक आयत ने हूथी आंदोलन को ईरानी समर्थन का मजबूत संदेश दिया।

 कतर को मध्यस्थता का संदेश: माफी और मेहरबानी

कतर को माफी और अल्लाह की मेहरबानी वाली आयत सुनाई गई, जिसे उसकी मध्यस्थता भूमिका से जोड़ा गया। कतर ईरान-वेस्ट और क्षेत्रीय विवादों में मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है। 

यह आयत कतर की कूटनीति की सराहना करती है और ईरान-कतर संबंधों की गर्मजोशी को दर्शाती है। दोनों देश गैस परियोजनाओं और क्षेत्रीय स्थिरता में साझेदार हैं।

 ईरान की रणनीति: आस्था और राजनीति का मेल

यह आयोजन ईरान की परंपरागत कूटनीति को दर्शाता है, जहां धार्मिक प्रतीकवाद को राजनीतिक संदेश देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। शहीद खामेनेई की विरासत “प्रतिरोध की धुरी” (Axis of Resistance) को मजबूत करने वाली है। 

समारोह में लाखों लोग जुटे, मेट्रो पर रिकॉर्ड यात्राएं दर्ज हुईं और विश्व भर से डेलिगेशन पहुंचे। ईरान इस मौके को अपनी एकता, शक्ति और क्षेत्रीय प्रभाव दिखाने के लिए उपयोग कर रहा है।

 वैश्विक प्रभाव और भविष्य

ये प्रतीकात्मक आयतें न केवल डेलिगेशनों को सम्मान देती हैं बल्कि ईरान की अपेक्षाओं को भी स्पष्ट करती हैं। सऊदी और तुर्की जैसे देशों को संतुलित संदेश, जबकि हमास-हिज्बुल्लाह-हूथी जैसे सहयोगियों को प्रोत्साहन। 

कतर की मध्यस्थता को सराहना ईरान की व्यावहारिक कूटनीति को दिखाती है। 

यह आयोजन ईरान को मजबूत स्थिति में रखता है। शहीद खामेनेई की याद में पूरा देश एकजुट है और नई पीढ़ी को प्रतिरोध की प्रेरणा मिल रही है।


ईरान ने खामेनेई के अंतिम संस्कार को शोक से आगे ले जाकर क्षेत्रीय संदेश दिया। कुरान की आयतें राजनीतिक कूटनीति का अनोखा माध्यम बनीं। यह घटना इतिहास में दर्ज होगी – जहां आस्था ने राजनीति को नई दिशा दी। 

ईरान की यह रणनीति क्षेत्रीय संतुलन, प्रतिरोध और कूटनीति का मिश्रण है। शहीद नेता की विरासत अब इन प्रतीकों के माध्यम से जीवित रहेगी।

अल्लाह शहीद खामेनेई की रूह को जन्नतुल फिरदौस अता फरमाए।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World 5 Jul 2026
July 05, 2026

ईरान का ऐतिहासिक शोक: शहीद सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में ७१ लाख से अधिक मेट्रो यात्राएँ, लाखों की भीड़ ने दी भावुक विदाई

ईरान का ऐतिहासिक शोक: शहीद सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में ७१ लाख से अधिक मेट्रो यात्राएँ, लाखों की भीड़ ने दी भावुक विदाई
-Friday World 5 Jul 2026
ईरान की राजधानी तेहरान इन दिनों शोक और एकजुटता की मिसाल बन गया है। शहीद सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई के विदाई समारोह के दौरान तेहरान मेट्रो नेटवर्क पर मात्र २४ घंटे से भी कम समय में ७१,४१,२१२ यात्राएँ दर्ज की गई हैं। सरकारी मीडिया के अनुसार, शनिवार सुबह ५:३० बजे से रविवार सुबह ७:०० बजे के बीच यह अभूतपूर्व आंकड़ा सामने आया है। लाखों-करोड़ों शोकाकुल ईरानी नागरिक ग्रैंड इमाम खुमैनी मुसल्ला पहुंचकर अपने प्रिय नेता को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। यह संख्या ईरान की जनता में खामेनेई के प्रति गहरे लगाव और राष्ट्रीय एकता को दर्शाती है।

तेहरान मेट्रो के संचार निदेशक हादी ज़ंद ने यह जानकारी देते हुए बताया कि शोक मनाने वाले मेट्रो का इस्तेमाल कर मुसल्ला पहुंच रहे थे और वापस लौट रहे थे। सामान्य दिनों में तेहरान मेट्रो पर औसतन २० लाख के आसपास यात्राएँ होती हैं, लेकिन इस शोक सभा के दौरान यह संख्या कई गुना बढ़ गई। अधिकारियों ने शोकाकुलों की सुविधा के लिए मेट्रो सेवाओं को विशेष रूप से बढ़ाया और २४ घंटे संचालित रखा। यह आंकड़ा न केवल लॉजिस्टिक्स की सफलता दर्शाता है बल्कि ईरानी समाज की सामूहिक भावना को भी उजागर करता है।

 शहीद नेता की विरासत और विदाई का भव्य आयोजन

आयतुल्लाह अली खामेनेई ईरान के दूसरे सर्वोच्च नेता थे, जिन्होंने दशकों तक देश का मार्गदर्शन किया। फरवरी २०२६ में अमेरिका-इजराइल संघर्ष के दौरान हुए हमले में वे शहीद हो गए। उनकी शहादत के बाद ईरान में राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया। उनका अंतिम संस्कार समारोह ४ जुलाई से शुरू होकर कई दिनों तक चलेगा। 

शनिवार को तेहरान के ग्रैंड इमाम खुमैनी मुसल्ला में मुख्य विदाई समारोह शुरू हुआ, जो रविवार को भी जारी रहा। लाखों लोग काले कपड़ों में, सीने पीटते हुए और नारे लगाते हुए पहुंचे। समारोह में "मौत अमेरिका को", "मौत इजराइल को" जैसे नारे गूंजे। सोमवार को तेहरान में मुख्य जुलूस निकाला जाएगा। इसके बाद क़ुम, इराक के नजफ और कर्बला में समारोह होंगे तथा गुरुवार को मशहद के इमाम रज़ा के रोज़े में उनका दफन होगा। 

यह आयोजन न केवल शोक का है बल्कि ईरानी क्रांति की भावना, प्रतिरोध और एकता का प्रतीक भी है। दुनिया भर से सैकड़ों प्रतिनिधिमंडल पहुंचे हैं। ईरान सरकार ने यातायात, भोजन, पानी और आवास की व्यवस्था की है। होटलों में छूट दी गई है, बसें और ट्रेनें अतिरिक्त चलाई जा रही हैं।

 मेट्रो का रिकॉर्ड: जनता की भावनाओं का आईना

७.१४ मिलियन यात्राओं का आंकड़ा ऐतिहासिक है। तेहरान मेट्रो प्रणाली पहले से ही व्यस्त रहती है, लेकिन इस बार यह शोक की लहर बनकर उभरी। हादी ज़ंद के अनुसार, लोगों को मेट्रो का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया गया ताकि सड़कों पर ट्रैफिक जाम न हो। स्वयंसेवक पानी, तरबूज, सैंडविच और शर्बत बांट रहे हैं। सड़कों पर कोहरा छिड़कने वाली मशीनें लगाई गई हैं ताकि गर्मी से राहत मिले।

यह रिकॉर्ड ईरानी जनता की अनुशासनबद्धता और संगठन क्षमता को दिखाता है। लाखों लोग दूर-दूर से पैदल, बसों और मेट्रो से पहुंचे। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, तेहरान में १-२ करोड़ से अधिक लोग जुट सकते हैं। यह संख्या ईरान की जनसंख्या के हिसाब से बेहद महत्वपूर्ण है।

 खामेनेई की विरासत: प्रतिरोध और विकास की मिसाल

आयतुल्लाह खामेनेई ईरान की इस्लामिक क्रांति के प्रमुख स्तंभ थे। उन्होंने इमाम खुमैनी के बाद नेतृत्व संभाला और देश को क्षेत्रीय चुनौतियों से निपटने में मार्गदर्शन किया। उनके कार्यकाल में ईरान ने परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल प्रौद्योगिकी और क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ाया। आर्थिक प्रतिबंधों के बावजूद देश की प्रगति जारी रही। 

शोकाकुल लोग उन्हें "शहीद" कहकर याद कर रहे हैं। उनके पुत्रों ने भी समारोह में भाग लिया। नए सर्वोच्च नेता की भूमिका पर चर्चा हो रही है, लेकिन इस शोक में पूरा देश एकजुट दिख रहा है। 

समारोह के दौरान सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद है। विदेशी मेहमानों का स्वागत किया जा रहा है। यह आयोजन ईरान को दुनिया के सामने मजबूत और एकजुट दिखाने का अवसर भी है।

 वैश्विक प्रतिक्रियाएं और महत्व

दुनिया भर के नेता और मीडिया इस भव्य समारोह पर नजर रखे हुए हैं। कुछ देशों ने शोक संदेश भेजे हैं तो कुछ ने राजनीतिक विश्लेषण किया। ईरान के शत्रु देशों में भी इस जनसैलाब को लेकर चर्चा है। 

ईरानी मीडिया ने इसे "राष्ट्रीय जागृति" बताया है। स्वयंसेवी संगठन, धार्मिक संस्थाएं और सरकार पूरे समन्वय से काम कर रही हैं। मेट्रो के अलावा बसों, टैक्सियों और ट्रेनों को भी विशेष रूप से चलाया जा रहा है।

भावुक क्षण और जनता की आवाज

मुसल्ला परिसर में काले झंडे लहरा रहे हैं। लोग रोते हुए, सीने पीटते हुए गुजर रहे हैं। कई युवा पहली बार ऐसे बड़े समारोह में शामिल हो रहे हैं। बुजुर्ग नेता की विरासत को याद कर भावुक हो जाते हैं। महिलाएं और बच्चे भी बड़ी संख्या में पहुंचे हैं। 

एक शोकाकुल नागरिक ने कहा, "खामेनेई साहब हमारी आंखों के तारे थे। उनकी शहादत ने हमें और मजबूत किया है।" ऐसे कई बयान समारोह की भावुकता बढ़ा रहे हैं।

 आगे का कार्यक्रम और तैयारी

- सोमवार: तेहरान में मुख्य जुलूस  

- क़ुम: धार्मिक समारोह  

- नजफ और कर्बला (इराक): महत्वपूर्ण पड़ाव  

- गुरुवार: मशहद में इमाम रज़ा रोज़े में दफन  

सरकार ने पूरे देश में सुरक्षा और सुविधाओं की व्यापक तैयारी की है। लाखों तीर्थयात्री और शोकाकुल इराक सीमा पार भी जा रहे हैं।

 एकता की मिसाल

७१ लाख से अधिक मेट्रो यात्राएँ केवल एक आंकड़ा नहीं हैं। यह ईरानी जनता की एकजुटता, अनुशासन और अपने नेता के प्रति समर्पण की कहानी है। आयतुल्लाह खामेनेई की शहादत के बाद देश न केवल शोक मना रहा है बल्कि उनकी विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प ले रहा है। 

यह समारोह ईरान के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होगा। शहीद सुप्रीम लीडर की यादें सदैव ईरानी दिलों में जिंदा रहेंगी। 

अल्लाह शहीद खामेनेई की रूह को जन्नतुल फिरदौस अता फरमाए।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 5 Jul 2026
July 05, 2026

આદિવાસી સમાજના અગ્રણી પથદર્શક: પૂર્વ વનમંત્રી મોહનસિંહ રાઠવાનું ૮૨ વર્ષની વયે દુ:ખદ અવસાન

આદિવાસી સમાજના અગ્રણી પથદર્શક: પૂર્વ વનમંત્રી મોહનસિંહ રાઠવાનું ૮૨ વર્ષની વયે દુ:ખદ અવસાન
-Friday World 5 Jul 2026

છોટા ઉદેપુર જિલ્લાના ઉમરવા ગામે આજે એક યુગનો અંત આવ્યો છે. ગુજરાતના આદિવાસી વિસ્તારોના અવાજ, વિકાસના સ્થપતિ અને ૧૦ વખતના ધારાસભ્ય પૂર્વ વનમંત્રી શ્રી મોહનસિંહ છોટુભાઈ રાઠવા હવે આપણી વચ્ચે નથી. લાંબા સમયથી બીમારી સાથે સંઘર્ષ કરતા તેઓ ૮૨ વર્ષની વયે પોતાના વતનમાં અંતિમ શ્વાસ લીધા. તેમના અવસાનથી આદિવાસી સમાજમાં શોકની લહેર છવાઈ ગઈ છે અને રાજકીય જગતમાં ખાલીપો સર્જાયો છે.

મોહનસિંહ રાઠવા માત્ર એક રાજનેતા નહોતા, પરંતુ આદિવાસીઓના હક્કો માટે સતત લડનાર એક સમર્પિત સેવક હતા. તેમની લાંબી રાજકીય કારકિર્દીમાં તેઓ વન વિસ્તારોના વિકાસ, પર્યાવરણ સંરક્ષણ, આદિવાસી સમાજના ઉત્થાન અને ગ્રામીણ વિસ્તારોની સુધારણા માટે અવિરત કાર્યરત રહ્યા. તેમના અવસાન પર વડાપ્રધાન નરેન્દ્ર મોદી અને મુખ્યમંત્રી ભુપેન્દ્ર પટેલે શોક વ્યક્ત કર્યો છે અને તેમના યોગદાનને યાદ કર્યું છે.

 સરપંચથી ધારાસભ્ય સુધીની અદ્ભુત સફર

મોહનસિંહ રાઠવાનો જન્મ ૪ એપ્રિલ ૧૯૪૪ના રોજ પાવી જેતપુર તાલુકાના બાર ગામમાં થયો હતો. તેમના પિતા છોટુભાઈ અને માતા સંજુબેનના સંસ્કારોમાં તેઓ મોટા થયા. એસ.એસ.સી. સુધીનું શિક્ષણ પ્રાપ્ત કર્યા પછી તેઓ ખેતી અને સામાજિક કાર્યોમાં જોડાયા. 

તેમની રાજકીય યાત્રા ૧૯૬૭માં બાર ગામના સરપંચ તરીકે શરૂ થઈ. ૧૯૭૨માં તેઓ પાવી જેતપુર બેઠક પરથી પ્રથમ વખત ધારાસભ્ય બન્યા. ત્યારબાદ તેમની જીતની સિલસિલો ચાલુ રહ્યો. ૧૯૭૫માં તત્કાલીન મુખ્યમંત્રી ચીમનભાઈ પટેલને હરાવીને તેઓ ફરી વિજયી બન્યા. જનતા પાર્ટી, જનતા દળ અને પછી કોંગ્રેસ સાથે જોડાઈને તેઓ ૧૯૮૦, ૧૯૮૫, ૧૯૯૦, ૧૯૯૫, ૧૯૯૮, ૨૦૦૭, ૨૦૧૨ અને ૨૦૧૭માં ધારાસભ્ય તરીકે ચૂંટાયા. માત્ર ૨૦૦૨ની ચૂંટણીમાં તેઓ હાર્યા હતા. આમ, તેઓ ૧૦ વખત વિધાનસભામાં પહોંચ્યા અને આદિવાસી વિસ્તારોનું પ્રતિનિધિત્વ કર્યું.

તેઓ વિધાનસભામાં વિરોધપક્ષના નેતા તરીકે પણ સેવા આપી ચૂક્યા હતા. ૧૯૯૦થી ૧૯૯૫ સુધી તેઓ મંત્રીમંડળમાં હતા અને વન તેમજ પંચાયત વિભાગની જવાબદારીઓ સંભાળી હતી. વન વિસ્તારોના વિકાસ અને આદિવાસીઓના અધિકારો માટે તેમના પ્રયાસો આજે પણ યાદ કરવામાં આવે છે.

આદિવાસી સમાજ માટે અમર યોગદાન

મોહનસિંહ રાઠવા આદિવાસી સમાજના જીવનમાં ઊંડી અસર છોડી ગયા છે. તેઓ હંમેશા ગરીબ, પછાત અને આદિવાસી વિસ્તારોના વિકાસને પ્રાથમિકતા આપતા. વન વિસ્તારોમાં પાણી, વીજળી, રસ્તા અને શિક્ષણની સુવિધાઓ વધારવામાં તેમનું મહત્વનું પ્રદાન છે. પર્યાવરણ સંરક્ષણ અને જંગલોના ટકાવી રાખવા માટે તેઓ સતત જાગૃતિ ફેલાવતા રહ્યા.

તેમની વ્યક્તિગત જીવનશૈલી સાદી અને સંસ્કારી હતી. વર્ષો સુધી તેઓ નવા વર્ષે શુકનના સિક્કા આપવાની પરંપરા જાળવી રાખતા હતા, જે તેમના સમાજ પ્રત્યેના પ્રેમને દર્શાવે છે. તેમના પુત્રો રાજેન્દ્રસિંહ, રણજીતસિંહ અને અન્ય સંતાનો આ જ પરંપરાને આગળ વધારી રહ્યા છે.

૨૦૨૨માં તેઓ કોંગ્રેસ છોડી ભાજપમાં જોડાયા અને રાજકીય સંન્યાસ લીધો. તેમના પુત્ર રાજેન્દ્રસિંહ રાઠવા હાલ છોટા ઉદેપુરના ધારાસભ્ય છે અને પિતાના વારસને આગળ વહન કરી રહ્યા છે.

રાજકીય અને સામાજિક અગ્રણીઓની પ્રતિક્રિયાઓ

વડાપ્રધાન નરેન્દ્ર મોદીએ કહ્યું કે, “મોહનસિંહ રાઠવા સાથે વિધાનસભામાં કામ કરવાનો અવસર મળ્યો. આદિવાસી સમાજના સર્વાંગી વિકાસ માટે તેમનું સમર્પણ અને લોકસેવા હંમેશા યાદ રહેશે.” મુખ્યમંત્રી ભુપેન્દ્ર પટેલે પણ તેમના આદિવાસી ઉત્થાન અને પર્યાવરણ જાગૃતિના યોગદાનને યાદ કર્યું. 

આદિવાસી પંથકમાં શોકનું વાતાવરણ છે. અનેક નેતાઓ, સમાજસેવકો અને લોકો તેમના પરિવારને સાંત્વના આપવા ઉમરવા પહોંચી રહ્યા છે. સાંજે પાવી જેતપુર સ્મશાનગૃહે અંતિમ સંસ્કાર કરવામાં આવ્યા.

અમર થઈ ગયેલી વ્યક્તિત્વ

મોહનસિંહ રાઠવા એક સાચા લોકસેવક હતા. તેઓ વિધાનસભામાં અનુશાસન માટે પણ પ્રસિદ્ધ હતા. સ્પીકરે અનેક વખત તેમની પ્રશંસા કરી હતી. તેમનું જીવન સરળતા, સમર્પણ અને સેવાનું પ્રતીક હતું. આદિવાસી સમાજના યુવાનો માટે તેઓ પ્રેરણાસ્ત્રોત બની રહેશે.

તેમના અવસાનથી ગુજરાતે એક અનુભવી નેતા ગુમાવ્યો છે, પરંતુ તેમના કાર્યો અને વિચારો હંમેશા જીવંત રહેશે. 

ઓમ શાંતિ!

તેમના આત્માને શાંતિ મળે અને પરિવારને આ દુ:ખ સહન કરવાની શક્તિ મળે. આદિવાસી વિસ્તારોનો વિકાસ તેમના સપનાની પૂર્તિમાં જ તેમની સાચી શ્રદ્ધાંજલિ છે.

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World 5 Jul 2026
July 05, 2026

श्रीगंगानगर मे दरिंदगी: 13 साल की बच्ची से 5 दिन में 32 बार दरिंदगी, 4 होटल गिराए, 12 गिरफ्तार

श्रीगंगानगर मे दरिंदगी: 13 साल की बच्ची से 5 दिन में 32 बार दरिंदगी, 4 होटल गिराए, 12 गिरफ्तार
-Friday World 5 Jul 2026
श्रीगंगानगर, राजस्थान 
18 जून को घर जाने के लिए ई-रिक्शा में बैठी 13 साल की एक बच्ची अगले 5 दिन तक नर्क से गुजरी। पुलिस ने 22 जून को उसे श्रीगंगानगर के एक होटल से सकुशल बरामद किया। इस दौरान उसे 4 अलग-अलग लोकल होटलों में ले जाया गया, नशा देकर बेहोश किया गया और कथित रूप से सामूहिक यौन शोषण किया गया।

इस जघन्य अपराध ने पूरे राजस्थान को झकझोर कर रख दिया है। प्रशासन ने इस मामले से जुड़े सभी होटलों को गिराने का आदेश दिया है और अब तक 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिसमें ई-रिक्शा चालक भी शामिल है।

घटना की टाइमलाइन
18 जून: बच्ची स्कूल से घर लौट रही थी। आरोप है कि ई-रिक्शा चालक ने उसे घर छोड़ने के बजाय अगवा कर लिया।  
18 से 22 जून: पुलिस जांच के मुताबिक इस दौरान बच्ची को शहर के 4 अलग-अलग होटलों में ले जाया गया। उसे चुप कराने के लिए शराब दी गई।  
22 जून: मुखबिर की सूचना और CCTV फुटेज के आधार पर पुलिस ने एक होटल पर छापा मारकर बच्ची को मुक्त कराया और आरोपी को पकड़ा।

पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक बयान और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर सामूहिक दुष्कर्म की पुष्टि हुई है।

प्रशासन की कार्रवाई
1. होटल सील और ध्वस्त: जिन 4 होटलों में बच्ची को रखा गया था, जिला प्रशासन ने उन्हें अवैध गतिविधियों में शामिल पाए जाने पर गिराने का आदेश दिया। 
2. गिरफ्तारियां: अब तक 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें रिक्शा चालक, होटल संचालक और अन्य संदिग्ध शामिल हैं। पुलिस बाकी आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही है।
3. POCSO और अन्य धाराएं: सभी आरोपियों पर पॉक्सो एक्ट, अपहरण, सामूहिक दुष्कर्म और मानव तस्करी की गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है।

पुलिस अधीक्षक ने कहा, "यह मानवता को शर्मसार करने वाली घटना है। हम फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई कराकर दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाएंगे।"

बच्ची की स्थिति
बरामदगी के बाद बच्ची को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों की टीम उसका इलाज कर रही है। साथ ही चाइल्ड वेलफेयर कमेटी और मनोचिकित्सक उसकी काउंसलिंग कर रहे हैं। 

सरकार ने बच्ची और उसके परिवार को सुरक्षा और आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।

समाज और कानून की मांग
इस घटना के बाद श्रीगंगानगर में गुस्सा है। नागरिक समूहों और महिला संगठनों ने सड़कों पर उतरकर दोषियों के लिए मौत की सजा की मांग की।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि POCSO एक्ट में नाबालिग से दुष्कर्म के लिए न्यूनतम 20 साल से लेकर आजीवन कारावास तक का प्रावधान है। जघन्य मामलों में मृत्युदंड भी दिया जा सकता है।

बाल अधिकार कार्यकर्ता डॉ. रीना शर्मा कहती हैं, "इस तरह के अपराध समाज के सबसे कमजोर वर्ग पर हमला हैं। हमें सिर्फ सजा नहीं, बल्कि रोकथाम पर काम करना होगा। ई-रिक्शा, होटल और स्कूल के आसपास निगरानी बढ़ानी होगी।"

इससे हम क्या सीखें
1. बच्चों की सुरक्षा: अकेले बच्चों को ऑटो/ई-रिक्शा में न भेजें। स्कूल और घर के बीच "सेफ कॉरिडोर" बनाए जाएं।
2. होटलों पर निगरानी: बिना पहचान पत्र के नाबालिगों को कमरा न देने के नियम को सख्ती से लागू किया जाए। पुलिस को नियमित जांच करनी चाहिए।
3. रिपोर्टिंग: अगर आसपास कुछ संदिग्ध दिखे तो तुरंत 1098 - चाइल्ड हेल्पलाइन या 112 - पुलिस को कॉल करें। चुप्पी अपराधियों को ताकत देती है।


एक 13 साल की बच्ची के साथ हुए इस अपराध ने समाज के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन असली जीत तब होगी जब ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

दोषियों को कानून के अनुसार सबसे सख्त सजा मिले, ताकि यह एक उदाहरण बने। और सबसे जरूरी, उस बच्ची को न्याय, इलाज और एक सामान्य जिंदगी वापस मिले।

अगर आप या आपके आसपास कोई बच्चा खतरे में है तो तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर कॉल करें।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World 5 Jul 2026

#JusticeForGirl  
#StopChildAbuse  
#POCSOAct  
#ChildSafetyFirst  
#HangTheRapists  


July 05, 2026

ग्रैंड मोसल्ला में एकजुट दिखा परिवार: शहीद अली खामेनेई के सभी बेटे जनाज़े में शामिल

ग्रैंड मोसल्ला में एकजुट दिखा परिवार: शहीद अली खामेनेई के सभी बेटे जनाज़े में शामिल
- Friday World 5 Jul 2026
तेहरान
ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर शहीद अली खामेनेई के जनाज़े में एक तस्वीर ने सबका ध्यान खींचा। तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला में नमाज़-ए-जनाज़ा के दौरान उनके सभी बेटे एक साथ मौजूद थे। परिवार की इस एकजुटता को ईरानी जनता ने श्रद्धा और सम्मान के प्रतीक के रूप में देखा।

लाखों लोगों की भीड़ के बीच खामेनेई परिवार के सदस्यों का एक साथ दिखना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि कठिन समय में भी परिवार और राष्ट्र एकजुट हैं।

ग्रैंड मोसल्ला का नज़ारा
सुबह से ही ग्रैंड मोसल्ला और उसके आसपास के इलाके लोगों से भर गए थे। काले परचम, बैनर और "या हुसैन" के नारों के बीच माहौल बेहद भावुक था।

सरकारी मीडिया के अनुसार नमाज़ की इमामत वरिष्ठ धर्मगुरु ने की। इसी दौरान कैमरों में कैद हुआ कि खामेनेई के सभी बेटे पहली पंक्ति में मौजूद थे। उन्होंने सफेद कफन और काली पगड़ी पहन रखी थी। भीड़ में खड़े लोग जैसे ही उन्हें देखते, "अल्लाहु अकबर" के नारे और तेज हो जाते।

विश्लेषकों का कहना है कि ईरान में धार्मिक और राजनीतिक परिवारों का सार्वजनिक रूप से एक साथ आना जनता के लिए एकजुटता का संदेश होता है।

परिवार की भूमिका
ईरान में धार्मिक नेताओं के परिवारों को समाज में खास सम्मान दिया जाता है। खामेनेई परिवार भी दशकों से ईरानी समाज और राजनीति से जुड़ा रहा है। 

जनाज़े में सभी बेटों की मौजूदगी को कई लोगों ने "विरासत और जिम्मेदारी" के रूप में देखा। आम नागरिकों का मानना था कि यह दिखाता है कि परिवार अपने पिता के आदर्शों और देश की सेवा के साथ खड़ा है।

एक स्थानीय नागरिक ने कहा, "जब पूरा परिवार यहां है तो हमें लगता है कि हम अकेले नहीं हैं। यह हमारे लिए ताकत की बात है।"

जनता का जुड़ाव
ग्रैंड मोसल्ला में उमड़ी भीड़ अपने आप में एक रिकॉर्ड थी। बुजुर्ग, महिलाएं, छात्र और सैनिक सभी नम आंखों से शामिल हुए। कई लोग सैकड़ों किलोमीटर दूर से आए थे।

भीड़ में "राहबर" और "शहादत" के पोस्टर लहराए गए। सोशल मीडिया पर भी #KhameneiFamily और #GrandMosalla ट्रेंड करने लगे। लोगों ने परिवार की तस्वीरों को साझा करते हुए लिखा कि "नेतृत्व चला जाता है, लेकिन सोच जिंदा रहती है।"

विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं
राजनीतिक विश्लेषक डॉ. फरहाद अली का कहना है, "ईरान में नेतृत्व के बाद परिवार का सार्वजनिक रूप से सामने आना बहुत मायने रखता है। यह निरंतरता और स्थिरता का संदेश देता है।"

तेहरान यूनिवर्सिटी के प्रो. मरियम हुसैनी कहती हैं, "यह सिर्फ एक जनाज़ा नहीं था। यह ईरानी समाज के लिए एक भावनात्मक मौका था। परिवार का एक साथ होना लोगों को भरोसा देता है कि देश की दिशा नहीं बदलेगी।"

क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय असर
खामेनेई के जनाज़े में 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इराक, लेबनान, यमन और सीरिया से आए डेलिगेशन्स ने भी परिवार से मुलाकात की। 

कई देशों ने इसे "इस्लामी एकता" का उदाहरण बताया। संयुक्त राष्ट्र ने भी शोक संदेश भेजा और कहा कि क्षेत्र में शांति के लिए संवाद जरूरी है।

वहीं अमेरिका और यूरोप इस घटनाक्रम को बारीकी से देख रहे हैं। व्हाइट हाउस ने बयान में कहा कि अमेरिका क्षेत्र में स्थिरता चाहता है।


1. स्मृति कार्यक्रम: आने वाले 40 दिनों तक ईरान के अलग-अलग शहरों में शोक सभाएं होंगी। इनमें परिवार के सदस्य भी शामिल हो सकते हैं।
2. 
2. जनता से संवाद: विश्लेषकों का मानना है कि परिवार अब सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रमों में ज्यादा सक्रिय दिखेगा।
3. राष्ट्रीय एकता: इतनी बड़ी भीड़ और परिवार की मौजूदगी ने दिखा दिया कि ईरान में राष्ट्रीय भावना अब भी मजबूत है।


तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला में सिर्फ एक जनाज़ा नहीं हुआ। वह एक ऐसा पल था जहां एक परिवार, एक कौम और एक सोच एक साथ दिखी।

शहीद अली खामेनेई के सभी बेटों का वहां मौजूद होना ईरानी जनता के लिए भावनात्मक सहारा बना। यह तस्वीरें आने वाले समय में भी याद रखी जाएंगी।

ईरान के लिए यह दुख का समय है, लेकिन इसी दुख में एकजुटता की नई मिसाल भी लिखी गई।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 5 Jul 2026

#KhameneiFamily  
#GrandMosalla  
#TehranFuneral  
#UnityAndRespect  
#IranMourning

July 05, 2026

ट्रंप हैरान: "इतने लोग उनसे प्यार करते थे" - ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर के जनाज़े में उमड़ा जनसैलाब

ट्रंप हैरान: "इतने लोग उनसे प्यार करते थे" - ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर के जनाज़े में उमड़ा जनसैलाब
-Friday World 5 Jun 2026

ट्रंप हैरान: "इतने लोग उनसे प्यार करते थे" - ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर के जनाज़े में उमड़ा जनसैलाब

वॉशिंगटन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर के जनाज़े में शामिल भारी भीड़ को देखकर हैरानी जताई है। व्हाइट हाउस के एक बयान में ट्रंप ने कहा कि वह इस बात से हैरान हैं कि इतने सारे लोग दिवंगत लीडर से प्यार करते थे और उन्हें आखिरी विदाई देने आए।

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब तेहरान के ग्रैंड मुसल्ला में लाखों लोगों ने नमाज़-ए-जनाज़ा में हिस्सा लिया। सरकारी मीडिया द्वारा जारी हेलीकॉप्टर फुटेज में पूरे शहर में इंसानों का समंदर दिखाई दिया।

ट्रंप ने क्या कहा
ऑफिशियल बयान के अनुसार राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "मैं देख रहा था कि ईरान में कितनी बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए। ईमानदारी से कहूं तो मैं हैरान हूं कि इतने सारे लोग उनसे प्यार करते थे। यह अपने आप में एक बड़ी बात है।"

उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका दुनिया भर में हो रही घटनाओं पर नजर रख रहा है और वह क्षेत्र में शांति चाहता है। ट्रंप ने यह भी दोहराया कि अमेरिका का ईरान के नेतृत्व को खत्म करने का कोई इरादा नहीं है।

तेहरान में कैसा था नज़ारा
ईरान के सरकारी मीडिया की फुटेज के मुताबिक ग्रैंड मुसल्ला और उसके आसपास के इलाके पूरी तरह भर गए थे। बुजुर्ग, महिलाएं, युवा और बच्चे सभी काले झंडे और बैनर लेकर पहुंचे थे। नमाज़ की इमामत आयतुल्लाह शैख़ जाफ़र सुब्हानी ने की।

रिपोर्ट्स के मुताबिक 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधिमंडल और 30 से ज्यादा देशों के हाई-लेवल डेलिगेशन्स भी इस मौके पर मौजूद थे। इस नज़ारे को कई विश्लेषकों ने "इस्लामी एकता की मिसाल" बताया।

विशेषज्ञों की राय
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि ट्रंप का हैरानी जताना स्वाभाविक है। प्रो. अमित वर्मा कहते हैं, "पश्चिमी मीडिया में अक्सर ईरान के नेतृत्व को लेकर एकतरफा तस्वीर पेश की जाती है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ईरान में सुप्रीम लीडर का एक बड़ा जनाधार है। लाखों लोगों का सड़कों पर आना उसी का सबूत है।"

विदेश नीति विशेषज्ञ डॉ. निधि शर्मा का मानना है, "ट्रंप का यह बयान कूटनीतिक भी है। वह यह संदेश देना चाहते हैं कि अमेरिका ईरानी जनता के खिलाफ नहीं है। उनका टकराव सिर्फ नीतियों से है, लोगों से नहीं।"

अमेरिका-ईरान संबंधों पर असर
ट्रंप के इस बयान को कई लोग तनाव कम करने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं। पिछले कुछ महीनों से अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाजी तेज थी। परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध और क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर दोनों देशों में तल्खी थी।

लेकिन अब ट्रंप का नरम रुख और "प्यार" शब्द का इस्तेमाल संकेत देता है कि वॉशिंगटन सीधे टकराव से बचना चाहता है। व्हाइट हाउस के सूत्रों का कहना है कि अमेरिका अब ईरान के साथ किसी नए समझौते के विकल्प तलाश रहा है।

दुनिया की प्रतिक्रिया
ट्रंप के बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। कई लोगों ने कहा कि यह पहली बार है जब किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरानी लीडर के लिए जनसमर्थन को स्वीकार किया है।

यूरोपीय संघ ने कहा कि किसी भी नेता के प्रति लोगों की भावना का सम्मान किया जाना चाहिए। रूस ने भी कहा कि हर देश को अपने नेताओं को याद करने का अधिकार है।

वहीं ईरान में इस बयान को मिश्रित प्रतिक्रिया मिली। कुछ लोगों ने इसे सकारात्मक कदम बताया, तो कुछ ने कहा कि अमेरिका को पहले प्रतिबंध हटाने चाहिए।

आगे का रास्ता क्या

1. कूटनीति की संभावना: ट्रंप के इस बयान के बाद ईरान और अमेरिका के बीच बैकचैनल बातचीत शुरू होने की अटकलें तेज हो गई हैं। ओमान और कतर मध्यस्थता कर सकते हैं।
2. 
2. जनता की भूमिका: इतनी बड़ी भीड़ ने दिखा दिया कि ईरान में नेतृत्व को लेकर जनता का जुड़ाव गहरा है। अब कोई भी बाहरी फैसला ईरानी जनता की भावनाओं को नजरअंदाज नहीं कर सकता।
3. 
3. क्षेत्रीय स्थिरता: अगर अमेरिका और ईरान तनाव कम करते हैं तो इसका फायदा पूरे मध्य पूर्व को मिलेगा। इराक, सीरिया और यमन में भी हालात बेहतर हो सकते हैं।


डोनाल्ड ट्रंप का "हैरान हूं कि इतने लोग उनसे प्यार करते थे" वाला बयान सिर्फ एक टिप्पणी नहीं है। यह इस बात की तरफ इशारा है कि दुनिया को ईरान को सिर्फ प्रतिबंधों और टकराव के चश्मे से नहीं देखना चाहिए।

जनाज़े में उमड़ी भीड़ ने दुनिया को दिखा दिया कि नेतृत्व और जनता के बीच का रिश्ता कितना गहरा हो सकता है। अब गेंद अमेरिका और ईरान दोनों के पाले में है। क्या दोनों देश इस मौके का फायदा उठाकर बातचीत का रास्ता चुनेंगे, यह आने वाले दिन बताएंगे।

फिलहाल ट्रंप के शब्दों ने एक नई बहस जरूर शुरू कर दी है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World 5 Jun 2026


#TrumpOnIran  
#TehranFuneral  
#MassiveGathering  
#PublicMourning  
#GlobalReaction  


July 05, 2026

ગીર સોમનાથના સુલતાનપુરમાં પાણીમાં ફસાયેલા 4 લોકોનું SDRF અને તંત્ર દ્વારા સફળ રેસ્ક્યૂ

ગીર સોમનાથના સુલતાનપુરમાં પાણીમાં ફસાયેલા 4 લોકોનું SDRF અને તંત્ર દ્વારા સફળ રેસ્ક્યૂ
-Friday World 5 Jul 2026
ગીર સોમનાથ, ઉના
ભારે વરસાદ અને નીચાણવાળા વિસ્તારોમાં પાણી ભરાવાની સ્થિતિ વચ્ચે ગીર સોમનાથ જિલ્લાના ઉના તાલુકાના સુલતાનપુર ગામમાંથી એક રાહતભર્યા સમાચાર સામે આવ્યા છે. મધ્યરાત્રિએ ઘરમાં ફસાયેલા 4 નાગરિકોને જિલ્લા વહીવટીતંત્ર અને SDRFની ટીમે સમયસર પહોંચીને સુરક્ષિત બહાર કાઢ્યા. આ સમગ્ર ઓપરેશનમાં તંત્રની સતર્કતા અને સ્થાનિકોના સહકારના કારણે કોઈ જાનહાનિ થઈ નથી.

કેવી રીતે બની ઘટના
છેલ્લા 24 કલાકથી સૌરાષ્ટ્રના દરિયાકાંઠાના વિસ્તારોમાં ધોધમાર વરસાદ પડી રહ્યો છે. ઉના તાલુકામાં પણ સત વરસાદને કારણે સુલતાનપુર ગામના નીચાણવાળા ભાગમાં પાણી ભરાવા લાગ્યા. રાત્રે લગભગ 12:30 વાગ્યે ગામના એક ઘરમાં રહેતા 4 લોકો પાણીના કારણે ઘરની બહાર નીકળી શક્યા. ઘરની આસપાસ લગભગ 3 થી 4 ફૂટ પાણી ભરાઈ ગયું હતું. 

પરિવારના સભ્યોએ તરત જ 108 અને ગામના સરપંચનો સંપર્ક કર્યો. માહિતી મળતા જ મામલતદાર, તાલુકા વિકાસ અધિકારી અને SDRFની ટીમને તાત્કાલિક ઘટનાસ્થળે મોકલવામાં આવી.

SDRF અને તંત્રનું સંયુક્ત ઓપરેશન
SDRFની ટીમ બોટ અને અન્ય સાધનો સાથે 45 મિનિટમાં સુલતાનપુર પહોંચી ગઈ. રાતનો સમય, અંધારું અને પાણીનો વહેણ હોવા છતાં ટીમે હિંમત બતાવી. પહેલા વૃદ્ધ મહિલા અને બાળકને સુરક્ષિત બહાર કાઢવામાં આવ્યા. ત્યારબાદ ઘરમાં રહેલા અન્ય બે પુરુષોને પણ રેસ્ક્યૂ કરવામાં આવ્યા. સમગ્ર ઓપરેશન લગભગ 1 કલાકમાં પૂર્ણ થયું.

રેસ્ક્યૂ કરાયેલા 4 લોકોમાં 1 વૃદ્ધ મહિલા, 1 બાળક અને 2 પુરુષોનો સમાવેશ થાય છે. તમામ લોકો સલામત છે અને તેમને કોઈ ઈજા થઈ નથી.

રાહત છાવણીમાં વ્યવસ્થા 
રેસ્ક્યૂ બાદ તમામ 4 લોકોને સુલતાનપુર પ્રાથમિક શાળામાં બનાવેલી કામચલાઉ રાહત છાવણીમાં શિફ્ટ કરવામાં આવ્યા. જિલ્લા વહીવટીતંત્ર દ્વારા તેમના માટે રહેવા, જમવા, પીવાના પાણી અને પ્રાથમિક આરોગ્ય સેવાની સંપૂર્ણ વ્યવસ્થા કરવામાં આવી છે. શાળામાં ધાબળા, ગાદલા અને જરૂરી દવાઓ પણ ઉપલબ્ધ કરાવવામાં આવી છે.

મામલતદારે જણાવ્યું કે, "હવામાન વિભાગની આગાહીને ધ્યાનમાં રાખીને અમે પહેલેથી જ એલર્ટ પર હતા. ગામના સરપંચ અને ગ્રામજનોએ પણ તાત્કાલિક માહિતી આપી જેના કારણે સમયસર રેસ્ક્યૂ શક્ય બન્યું."

ગામમાં સતર્કતા
સુલતાનપુર સહિત ઉના તાલુકાના અન્ય નીચાણવાળા ગામોમાં પણ તંત્ર દ્વારા સત પેટ્રોલિંગ કરવામાં આવી રહ્યું છે. જરૂર પડે તો વધુ લોકોને સુરક્ષિત સ્થળે ખસેડવા માટે એમ્બ્યુલન્સ, બોટ અને ખાદ્ય સામગ્રીનો જથ્થો તૈયાર રાખવામાં આવ્યો છે. ગ્રામજનોને અપીલ કરવામાં આવી છે કે વરસાદ દરમિયાન નદી-નાળા અને નીચાણવાળા વિસ્તારોમાં ન જાય.

સ્થાનિકોનો પ્રતિભાવ
રેસ્ક્યૂ થયેલા પરિવારના એક સભ્યએ કહ્યું, "રાત્રે અચાનક પાણી વધી ગયું હતું. અમને લાગ્યું કે હવે શું થશે. પણ પોલીસ અને SDRFના જવાનો સમયસર આવી ગયા અને અમને બચાવી લીધા. સરકારનો ખૂબ ખૂબ આભાર."

ગામના સરપંચે પણ તંત્રની ઝડપી કાર્યવાહીને બિરદાવી અને કહ્યું કે આવા સમયે વહીવટીતંત્ર અને લોકોનો સહકાર જીવન બચાવે છે.

હવામાનની સ્થિતિ
હવામાન વિભાગની આગાહી મુજબ આગામી 48 કલાક સુધી ગીર સોમનાથમાં હળવાથી મધ્યમ વરસાદ ચાલુ રહેવાની શક્યતા છે. માછીમારોને દરિયો ન ખેડવાની સૂચના આપવામાં આવી છે. જિલ્લા કલેક્ટરે તમામ તાલુકા અધિકારીઓને 24x7 કંટ્રોલ રૂમ સક્રિય રાખવા અને કોઈપણ કટોકટીની સ્થિતિમાં તાત્કાલિક પગલાં લેવા સૂચના આપી છે.

સુલતાનપુરનું આ રેસ્ક્યૂ ઓપરેશન બતાવે છે કે યોગ્ય આયોજન અને ઝડપી પ્રતિભાવથી મોટી દુર્ઘટનાને ટાળી શકાય છે. SDRFના જવાનોની બહાદુરી, વહીવટીતંત્રની સજાગતા અને સ્થાનિકોના સહયોગથી 4 જિંદગીઓ બચી ગઈ. વરસાદની સિઝનમાં તંત્રની આ તત્પરતા ગીર સોમનાથના લોકો માટે રાહતરૂપ બની છે.

હાલ તમામ ફસાયેલા લોકો સુરક્ષિત છે અને રાહત છાવણીમાં તેમની સંપૂર્ણ કાળજી લેવાઈ રહી છે.

 Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World 5 Jul 2026