Breaking

यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Thursday, 19 February 2026

February 19, 2026

राजस्थान के कोटा में एक व्यक्ति ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित 25 कांग्रेस सांसदों को खुलेआम गोली मारने की धमकी

राजस्थान के कोटा में एक व्यक्ति ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित 25 कांग्रेस सांसदों को खुलेआम गोली मारने की धमकी
-Friday World 19th Feb 2026
सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। यह घटना राजनीतिक बहस को तेज कर रही है, जहां कांग्रेस इसे साजिश और वैचारिक उन्माद का नतीजा बता रही है, जबकि बीजेपी और संबंधित संगठनों ने आरोपी से किसी भी जुड़ाव से इनकार किया है। 

 धमकी वाले वीडियो में क्या कहा गया? वीडियो में आरोपी, जिसकी पहचान राज सिंह आमेरा (या राज अमेरा/राजसिंह आमेरा) के रूप में हुई है, खुद को करणी सेना का संभागीय प्रवक्ता और बीजेपी कार्यकर्ता बताते नजर आता है। वह लोकसभा में बजट सत्र के दौरान कांग्रेस सांसदों पर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से कथित तौर पर गाली-गलौज करने का आरोप लगाते हुए कहता है कि अगर कांग्रेस के 25 सांसदों ने माफी नहीं मांगी या उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया, तो उनके घरों में घुसकर तोड़फोड़ की जाएगी और गोली मार दी जाएगी।

 उसने स्पष्ट रूप से राहुल गांधी को संबोधित करते हुए कहा, "राहुल गांधी, कान खोलकर सुन लो... अगर दोबारा ऐसी घटना हुई तो तेरे घर में घुसकर गोली मार देंगे।" साथ ही उसने 24 घंटे के अंदर सांसदों की गिरफ्तारी की मांग की और धमकी दी कि अन्यथा "एक-एक करके सबको गोली मार देंगे।"

 वीडियो के बैकग्राउंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्पीकर ओम बिरला की फोटो भी दिखाई दे रही थी, जिससे यह और विवादास्पद हो गया। 

 पुलिस की त्वरित कार्रवाई कोटा पुलिस ने वीडियो वायरल होते ही सुओ मोटो (स्वत: संज्ञान) लेते हुए आरोपी को बोरखेड़ा पुलिस स्टेशन क्षेत्र से हिरासत में लिया और बाद में गिरफ्तार कर लिया। कोटा की पुलिस अधीक्षक तेजस्विनी गौतम ने बताया कि:

 - आरोपी के खिलाफ पहले से ही चार आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, जो उसकी आपराधिक प्रवृत्ति को दर्शाते हैं। 

- अभी तक यह पुष्टि नहीं हुई कि वह किसी संगठन से आधिकारिक रूप से जुड़ा है, लेकिन जांच जारी है।

 - वीडियो में किए गए कृत्यों के आधार पर उचित धाराओं (जैसे धारा 506 - आपराधिक धमकी, और अन्य गंभीर धाराएं) के तहत कार्रवाई की जाएगी। 

पुलिस ने पूछताछ शुरू कर दी है और मामले की गहराई से जांच कर रही है। 

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं कांग्रेस ने इस धमकी को गंभीरता से लिया है। पार्टी के आधिकारिक एक्स हैंडल पर पोस्ट किया गया कि "आखिर इस गुंडे की इतनी हिम्मत कैसे हुई कि उसने ओम बिरला का नाम लेते हुए धमकी भरा वीडियो बनाया? इस मामले में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और इस बात की जांच की जाए कि किसके कहने पर यह धमकी दी गई।" 

राजस्थान कांग्रेस प्रमुख गोविंद सिंह डोटासरा ने इसे "वैचारिक उन्माद" और "गोडसे फैक्ट्री" की साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी करोड़ों लोगों की आवाज हैं और ऐसी धमकियां लोकतंत्र के लिए खतरा हैं।

 दूसरी ओर, बीजेपी और करणी सेना दोनों ने आरोपी से किसी भी संबंध से इनकार किया है। बीजेपी कोटा शहर अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी अनुशासित है और ऐसी भाषा उसकी विचारधारा के खिलाफ है। करणी सेना के एक वरिष्ठ नेता ने भी यही बात दोहराई। 

क्या यह घटना बड़ी साजिश का संकेत? कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि सोशल मीडिया पर "मोदी भक्तों" और संगठनों द्वारा फैलाई जा रही नफरत की भाषा से ऐसे लोग प्रेरित हो रहे हैं। वे जांच की मांग कर रहे हैं कि क्या कोई बड़ा नेटवर्क इसमें शामिल है।

 यह मामला राजनीतिक ध्रुवीकरण को और बढ़ा सकता है, खासकर जब लोकतंत्र में असहमति की जगह हिंसा की धमकियां ले रही हों। पुलिस की जांच से आगे की सच्चाई सामने आएगी, लेकिन फिलहाल यह घटना पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है।
 Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 19th Feb 2026
February 19, 2026

"बिल गेट्स की AI समिट से पीछे हटने की वजह: एपस्टीन फाइल्स में नाम आने पर लिया फैसला, अब अंकुर वोरा देंगे भाषण"

"बिल गेट्स की AI समिट से पीछे हटने की वजह: एपस्टीन फाइल्स में नाम आने पर लिया फैसला, अब अंकुर वोरा देंगे भाषण"
-Friday World 19th Feb 2026
नई दिल्ली में चल रही 'इंडिया AI इम्पैक्ट समिट २०२६' में एक बड़ा उलटफेर हुआ है। माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक और दुनिया के सबसे बड़े परोपकारी बिल गेट्स ने अपना मुख्य भाषण रद्द कर दिया है। गेट्स फाउंडेशन ने आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की कि यह फैसला "बहुत सोच-विचार" के बाद लिया गया, ताकि समिट का पूरा फोकस AI की वैश्विक प्राथमिकताओं पर बना रहे। 

फाउंडेशन ने बताया कि बिल गेट्स की जगह अब अंकुर वोरा, जो गेट्स फाउंडेशन के अफ्रीका और भारत कार्यालयों के अध्यक्ष हैं, समिट में फाउंडेशन का प्रतिनिधित्व करेंगे। अंकुर वोरा आज समिट के एक प्रमुख सत्र में बोलेंगे। वे लंबे समय से फाउंडेशन के भारत और अफ्रीका कार्यक्रमों की देखरेख कर रहे हैं और AI के माध्यम से स्वास्थ्य, शिक्षा और गरीबी उन्मूलन जैसे क्षेत्रों में फाउंडेशन के प्रयासों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। 

एपस्टीन फाइल्स ने फिर उछाला विवाद बिल गेट्स के समिट से हटने का सबसे बड़ा कारण जेफ्री एपस्टीन से जुड़े हाल ही में जारी किए गए गोपनीय दस्तावेजों में उनका नाम आना बताया जा रहा है। अमेरिकी अदालतों द्वारा सार्वजनिक किए गए इन दस्तावेजों में एपस्टीन के साथ गेट्स के कई मुलाकातों और ईमेल संवाद का जिक्र है। एपस्टीन, जो यौन अपराधी और नाबालिगों की तस्करी के आरोपी थे, की २०१९ में जेल में मौत के बाद ये फाइलें धीरे-धीरे सामने आ रही हैं। दस्तावेजों में दावा किया गया है कि: 

- एपस्टीन ने गेट्स को कई बार मिलने के लिए आमंत्रित किया। 

- गेट्स ने एपस्टीन के साथ न्यूयॉर्क, पाम बीच और अन्य जगहों पर कई बैठकें कीं। 

- कुछ दावों में कहा गया कि एपस्टीन ने गेट्स के वैवाहिक जीवन और अन्य निजी मामलों में "मदद" करने की कोशिश की। 

बिल गेट्स ने पहले भी इन मुलाकातों पर पछतावा जताया था। एक पुराने इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, "मुझे एपस्टीन से मिलने का फैसला बहुत गलत था। मैं उस समय से बहुत अफसोस महसूस करता हूं और इसके लिए माफी मांगता हूं।" लेकिन नई फाइलों के जारी होने के बाद सोशल मीडिया पर फिर से पुराने विवाद गरम हो गए। कई लोग इसे "AI समिट में गेट्स की मौजूदगी अनुचित" बता रहे थे।

 ऐसे में गेट्स फाउंडेशन ने फैसला लिया कि समिट का फोकस AI के सकारात्मक प्रभावों पर ही रहे, न कि किसी व्यक्तिगत विवाद पर। 

एनवीडिया CEO जेन्सन हुआंग ने भी भारत यात्रा टाली समिट में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिला। 
एनवीडिया के CEO जेन्सन हुआंग, जो AI चिप्स के क्षेत्र में दुनिया के सबसे बड़े नाम हैं, भी कार्यक्रम में शामिल होने वाले थे, लेकिन उन्होंने आखिरी समय में अपना दौरा रद्द कर दिया। कंपनी ने कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया, लेकिन अटकलें लगाई जा रही हैं कि बिल गेट्स की मौजूदगी या एपस्टीन विवाद से जुड़े माहौल ने इस फैसले को प्रभावित किया हो सकता है। 

समिट में अभी भी गूगल के CEO सुंदर पिचाई, ओपनAI के सैम ऑल्टमैन, माइक्रोसॉफ्ट के अन्य टॉप एग्जीक्यूटिव्स और कई वैश्विक AI लीडर्स मौजूद हैं। 

पीएम मोदी ने किया उद्घाटन, थीम 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने १६ फरवरी को भारत मंडपम में 'इंडिया AI इम्पैक्ट समिट २०२६' का उद्घाटन किया। उन्होंने स्टार्टअप पवेलियन्स का दौरा किया और युवा इनोवेटर्स से मिलकर उनके AI समाधानों के बारे में जाना। समिट २० फरवरी तक चलेगी।

 इसके साथ ही 'इंडिया AI इम्पैक्ट एक्सपो २०२६' भी चल रहा है, जहां दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियां अपने लेटेस्ट AI टूल्स, रोबोटिक्स, हेल्थकेयर AI, एग्री-टेक और एजुकेशन टूल्स प्रदर्शित कर रही हैं। आम लोग भी यहां आकर देख सकते हैं कि AI वास्तविक जीवन में कैसे काम करता है और भविष्य में खेती, स्वास्थ्य, शिक्षा, ट्रांसपोर्ट जैसे क्षेत्रों में क्या बड़े बदलाव आने वाले हैं। 

समिट की थीम 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' है, जो भारत के राष्ट्रीय विजन से प्रेरित है। इसका मकसद AI के वैश्विक सिद्धांतों को मानवता के हित में इस्तेमाल करना है। इस समिट में ११० से ज्यादा देशों और ३० अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हैं। लगभग २० देशों के राष्ट्राध्यक्ष और ४५ से ज्यादा मंत्री इस आयोजन में हिस्सा ले रहे हैं।

 AI का भविष्य विवादों से परे** बिल गेट्स का पीछे हटना भले ही एपस्टीन फाइल्स से जुड़ा विवाद माना जा रहा हो, लेकिन यह घटना दर्शाती है कि AI जैसे महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दे पर चर्चा के दौरान व्यक्तिगत छवि और विश्वसनीयता कितनी अहम हो जाती है। गेट्स फाउंडेशन ने सही कदम उठाते हुए फोकस को AI के सकारात्मक प्रभावों पर बनाए रखा।

 अंकुर वोरा जैसे अनुभवी लीडर के हाथों में फाउंडेशन का भारत और अफ्रीका कार्यक्रम मजबूत हैं। समिट अभी भी AI के भविष्य को लेकर उम्मीदों से भरी हुई है। दुनिया को ऐसे प्लेटफॉर्म्स की जरूरत है जहां टेक्नोलॉजी मानवता के हित में काम करे, न कि विवादों का शिकार बने।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 19th Feb 2026
February 19, 2026

Iran Earthquake or Nuclear Explosion? 5.5 Magnitude Tremor Sparks Global Panic, Social Media Flooded with Rumors

Iran Earthquake or Nuclear Explosion? 5.5 Magnitude Tremor Sparks Global Panic, Social Media Flooded with Rumors
-Friday World – February 19, 2026
Tensions are at a boiling point across the globe. The United States and Iran stand on the brink of war-like confrontation. With Donald Trump issuing repeated threats of military action, ongoing disputes over Iran's nuclear program, and escalating conflicts in the Middle East, a 5.5 magnitude earthquake struck southern Iran early Thursday morning. The event not only terrified local residents but also ignited a storm of speculation worldwide. Social media platforms are buzzing with one burning question: Was this a natural earthquake, or did Iran secretly conduct a nuclear test? 

Where Was the Epicenter? According to the German Research Centre for Geosciences (GFZ), the earthquake's epicenter was located at 27.36°N latitude and 52.60°E longitude—approximately 35 kilometers southwest of Mohr city in Fars province. The quake occurred at a shallow depth of just 10 kilometers, which amplified the shaking felt on the surface. Local time was around 7:13 a.m. (approximately 3:43 GMT). Tremors were felt across nearby farmlands, coastal towns, and key natural gas fields such as Tabnak, Homa, Shanol, and Varavi. 

Iran sits in one of the world's most seismically active zones due to the constant movement of tectonic plates. A magnitude of 5.5 at 10 km depth is entirely consistent with natural tectonic activity. International agencies like the USGS and GFZ have classified it as a natural event. No major damage or loss of life has been reported so far. Iranian authorities have placed disaster management teams on high alert and urged residents to remain calm. 

Why the Nuclear Test Rumors?

The Iran-U.S. standoff has reached a critical stage. The Trump administration has adopted a hardline stance on the nuclear deal. If negotiations fail, threats of strikes loom large. Against this backdrop, the earthquake triggered an immediate wave of online speculation:

 - Did Iran carry out a covert nuclear test? 

- Was the tremor the result of an underground nuclear explosion?

 - Is Iran now on the verge of developing nuclear weapons?

 Videos, posts, and threads went viral on YouTube, X (formerly Twitter), and Facebook. Some users claimed the location was near nuclear-related sites in Fars province. Others dubbed it "Khamenei's new test." Sensational headlines like "U.S. bases on alert for Iranian attack" even appeared on certain channels.

 This is not the first time. In early February 2026, a 5.2–5.3 magnitude quake hit Bushehr province—home to Iran's main nuclear power plant—sparking identical rumors of secret testing. In October 2024, a 4.5 magnitude event faced similar claims, all debunked by experts. Every seismic event in tense times gets linked to conspiracy theories. 

What Do Scientists Say? Seismologists and geophysicists explain that nuclear explosions and natural earthquakes produce distinctly different seismic wave patterns. Underground nuclear tests generate clear "compressional waves" (P-waves) and "shear waves" (S-waves) with unique signatures, often accompanied by detectable radiation, hydrogen gas leaks, or other anomalies.

 In this case, GFZ, USGS, and other monitoring bodies analyzed the data thoroughly. They confirmed it matches a classic tectonic quake caused by plate movement. No unusual signals, radiation spikes, or other indicators of man-made activity were detected. Iran's key nuclear facilities (Natanz, Fordow, Bushehr) are far from this location. Fars province is primarily an oil and gas hub, not a nuclear test site. 

Iran's Response and Global Implications Iranian officials swiftly mobilized relief efforts. While gas refineries and pipelines experienced minor disruptions, no widespread destruction occurred. Security agencies remain on high alert. Internationally, the IAEA (International Atomic Energy Agency) and other organizations are closely monitoring seismic and radiation data. 

This incident highlights how geopolitical tensions turn every minor event into a potential conspiracy. Social media accelerates rumors at lightning speed, but facts require careful verification. Iran already faces intense pressure over its nuclear activities, with satellite imagery showing repairs and fortifications at certain sites. Linking a routine earthquake to nuclear testing without evidence is unfounded. 

Conclusion: What Is the Truth? There is no official confirmation—or credible evidence—that this was a nuclear test. Scientific data overwhelmingly points to a natural earthquake. Iran is located in a high-risk seismic zone, experiencing dozens of tremors annually. Spreading rumors is easy; uncovering the truth takes time and expertise. 

The world needs peace and dialogue now more than ever—not speculation and escalation. Reducing U.S.-Iran tensions is essential for regional stability. For the moment, this 5.5 magnitude event was a natural phenomenon, not a nuclear detonation. 

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World – February 19, 2026
February 19, 2026

"ईरान में भूकंप या परमाणु विस्फोट? 5.5 तीव्रता के झटके ने दुनिया में मचा दी अफरा-तफरी, सोशल मीडिया पर उड़ी अफवाहें"

"ईरान में भूकंप या परमाणु विस्फोट? 5.5 तीव्रता के झटके ने दुनिया में मचा दी अफरा-तफरी, सोशल मीडिया पर उड़ी अफवाहें"
-Friday World 19th Feb 2026
                   प्रतिकात्मक तस्वीर 
दुनिया भर में तनाव का माहौल है। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जैसी स्थिति बन रही है। डोनाल्ड ट्रंप की ओर से सैन्य कार्रवाई की धमकियां, ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर लगातार बहस, और मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के बीच गुरुवार सुबह दक्षिणी ईरान में एक ५.५ तीव्रता का भूकंप आया। इस घटना ने न सिर्फ स्थानीय लोगों को डराया, बल्कि पूरी दुनिया में अफवाहों का बाजार गर्म कर दिया। सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं—क्या यह प्राकृतिक भूकंप था या ईरान ने गुप्त रूप से परमाणु परीक्षण कर दिया? 

भूकंप का केंद्र कहां? जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज (GFZ) के अनुसार, भूकंप का केंद्र २७.३६ डिग्री उत्तर अक्षांश और ५२.६० डिग्री पूर्व देशांतर पर था। यह स्थान फार्स प्रांत में मोहर शहर से लगभग ३५ किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में है। भूकंप की गहराई मात्र १० किलोमीटर थी, जो काफी उथली मानी जाती है। इसी वजह से सतह पर झटके बहुत तेज महसूस हुए। स्थानीय समयानुसार सुबह ७:१३ बजे (लगभग ३:४३ जीएमटी) यह झटका आया। आसपास के इलाकों में खेतों, तटीय कस्बों और गैस फील्ड्स (जैसे तबनक, होमा, शनोल और वरावी) तक हलचल महसूस हुई।

 ईरान एक भूकंप-प्रवण क्षेत्र है। यहां टेक्टोनिक प्लेट्स की हलचल लगातार चलती रहती है। ५.५ की तीव्रता और १० किमी की गहराई प्राकृतिक भूकंप के लिए पूरी तरह सामान्य है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां जैसे USGS और GFZ ने इसे प्राकृतिक घटना ही बताया है। अभी तक किसी बड़े नुकसान या जान-माल की हानि की कोई रिपोर्ट नहीं आई है। ईरानी अधिकारियों ने आपदा प्रबंधन टीमों को हाई अलर्ट पर रखा है और लोगों से शांत रहने की अपील की है। 

परमाणु परीक्षण की अफवाहें क्यों उड़ीं? ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर है। ट्रंप प्रशासन ने परमाणु समझौते को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अगर बातचीत विफल हुई तो सैन्य हमले की धमकी दी जा रही है। ऐसे में यह भूकंप आया तो सोशल मीडिया पर अफवाहें उड़ने लगीं—

 - क्या ईरान ने गुप्त परमाणु परीक्षण किया? 

- क्या यह झटका परमाणु विस्फोट का नतीजा था?

 - क्या ईरान अब परमाणु हथियार बनाने की कगार पर पहुंच गया? 

यूट्यूब, ट्विटर (एक्स) और फेसबुक पर वीडियो और पोस्ट वायरल हो गए। कुछ यूजर्स ने दावा किया कि फार्स प्रांत में परमाणु साइट्स के पास यह घटना हुई। कुछ ने इसे "खामेनेई का नया टेस्ट" तक कह दिया। यहां तक कि कुछ चैनलों ने "अमेरिकी बेस पर हमले की तैयारी" जैसी सनसनीखेज हेडलाइंस चला दीं। 

पिछले कुछ महीनों में भी ऐसा हुआ है। फरवरी की शुरुआत में बूशहर प्रांत में ५.२-५.३ का भूकंप आया था, तब भी यही अफवाहें फैलीं कि यह परमाणु परीक्षण था। अक्टूबर २०२४ में भी ४.५ का भूकंप आया था, जिसे लोग परमाणु टेस्ट बताने लगे थे। लेकिन हर बार वैज्ञानिकों ने इन अफवाहों को खारिज किया। 

वैज्ञानिक क्या कहते हैं? भूवैज्ञानिकों और सिस्मोलॉजिस्ट्स का कहना है कि परमाणु विस्फोट और प्राकृतिक भूकंप की सिस्मिक वेव्स में फर्क होता है। परमाणु टेस्ट में विस्फोट की वजह से स्पष्ट "कंप्रेशनल वेव्स" (P-वेव्स) और "शियर वेव्स" (S-वेव्स) का पैटर्न अलग होता है। साथ ही, रेडिएशन, हाइड्रोजन गैस या अन्य संकेत मिलते हैं।

 इस बार GFZ, USGS और अन्य एजेंसियों ने डेटा का विश्लेषण किया। उन्होंने पुष्टि की कि यह पूरी तरह टेक्टोनिक प्लेट्स की हलचल से हुआ प्राकृतिक भूकंप था। कोई असामान्य सिग्नल या रेडियोएक्टिविटी नहीं पाई गई। ईरान के परमाणु स्थल (जैसे नतांज, फोर्डो या बूशहर) से इसकी दूरी काफी है। फार्स प्रांत मुख्य रूप से गैस और तेल क्षेत्र है, न कि परमाणु टेस्ट साइट। 

ईरान की स्थिति और वैश्विक प्रभाव ईरान सरकार ने तुरंत राहत कार्य शुरू किए। कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन इलाके में गैस रिफाइनरी और पाइपलाइंस पर हल्का असर पड़ा। सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर IAEA (अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी) और अन्य संगठन डेटा मॉनिटर कर रहे हैं। 

यह घटना दर्शाती है कि कैसे भू-राजनीतिक तनाव में हर छोटी घटना को साजिश से जोड़ दिया जाता है। सोशल मीडिया पर अफवाहें तेजी से फैलती हैं, लेकिन तथ्य जांचने में समय लगता है। ईरान पर परमाणु कार्यक्रम को लेकर पहले से दबाव है। सैटेलाइट इमेजरी से पता चला है कि ईरान कुछ साइट्स पर मरम्मत और छिपाने का काम कर रहा है। लेकिन भूकंप को परमाणु टेस्ट से जोड़ना बिना सबूत के गलत है। 

सच्चाई क्या है? अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है कि यह परमाणु परीक्षण था। वैज्ञानिक डेटा स्पष्ट रूप से प्राकृतिक भूकंप की ओर इशारा कर रहा है। ईरान एक भूकंप-झोन में है—यहां हर साल दर्जनों झटके आते हैं। अफवाहें फैलाना आसान है, लेकिन सच्चाई जांच से ही सामने आती है। 

दुनिया को अब शांति और संवाद की जरूरत है, न कि अफवाहों और युद्ध की। ईरान-अमेरिका तनाव कम हो, तभी क्षेत्र स्थिर रहेगा। फिलहाल, यह ५.५ का भूकंप एक प्राकृतिक घटना है—परमाणु विस्फोट नहीं। 

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 19th Feb 2026

February 19, 2026

Prince Andrew Mountbatten-Windsor Arrested: Misconduct in Public Office Allegations Surface on 66th Birthday Amid Epstein Files Revelations

Prince Andrew Mountbatten-Windsor Arrested: Misconduct in Public Office Allegations Surface on 66th Birthday Amid Epstein Files Revelations
-Friday World – February 19, 2026 
The British royal family faces yet another profound crisis as Andrew Mountbatten-Windsor—formerly known as Prince Andrew, Duke of York—has been arrested on suspicion of misconduct in public office. The dramatic development unfolded early this morning, Thursday, February 19, 2026, coinciding with his 66th birthday. Unmarked police vehicles and plainclothes officers were photographed arriving at Wood Farm, his current residence on King Charles III's Sandringham Estate in Norfolk, eastern England. 

Thames Valley Police issued a statement confirming the arrest: “As part of the investigation, we have today (19/2) arrested a man in his sixties from Norfolk on suspicion of misconduct in public office and are carrying out searches at addresses in Berkshire and Norfolk. The man remains in police custody at this time.” Although the force did not name the individual, the details align precisely with Andrew Mountbatten-Windsor's circumstances—he is 66, resides in Norfolk, and the probe centers on his past role as UK trade envoy. 

This arrest stems from fresh revelations in the Jeffrey Epstein files recently released by the U.S. Department of Justice. The documents, including emails and correspondence, allegedly show that while serving as Britain's international trade envoy (a position he held until 2011), Andrew shared sensitive government and commercial information with the late convicted sex offender Jeffrey Epstein. Specific examples cited in reports include:

 - Confidential visit reports from trade missions to Southeast Asia (Vietnam, Singapore, Hong Kong, and Shenzhen). 

- Classified briefings on reconstruction efforts in Afghanistan's Helmand province.

 - Details on investment opportunities and commercial intelligence. 

These materials formed the basis of a formal complaint lodged by Graham Smith, chief executive of the anti-monarchy group Republic. The complaint accused Andrew of breaching the Official Secrets Act and committing misconduct in public office by passing restricted information to Epstein for potential personal or private gain. Thames Valley Police launched an assessment of the allegations, which has now escalated to an arrest and property searches, including sites linked to his former home at Royal Lodge in Windsor, Berkshire. 

Andrew has consistently and strenuously denied any wrongdoing. He has maintained that he never witnessed, participated in, or suspected any illegal activity during his association with Epstein. However, the Epstein connection has haunted him for years. His long-standing friendship with the disgraced financier—convicted of sex trafficking minors—led to explosive allegations of sexual misconduct, culminating in a 2022 civil settlement with accuser Virginia Giuffre. In 2019, he was forced to step back from public royal duties; by late 2025, King Charles III stripped him of his remaining royal titles, including "Prince" and "Duke of York," leading to his current designation as Andrew Mountbatten-Windsor.

 The timing of the arrest—on his birthday and at a royal estate—has intensified public shock and media frenzy. Images of police activity at Sandringham have gone viral, reigniting debates about accountability within the monarchy. The offense of misconduct in public office is serious under UK law, carrying a maximum sentence of life imprisonment in the most egregious cases, as it involves the abuse of entrusted power for improper purposes.

 Reactions from the royal family and government remain measured. Buckingham Palace has not issued an official comment yet, though prior statements emphasized full cooperation with any police inquiry. Prime Minister sources have reiterated the principle that "nobody is above the law," underscoring that even those with royal connections must face justice if evidence warrants it. 

Key questions now dominating headlines include:

 - Did Andrew genuinely share classified documents with Epstein, and if so, what was the motive—personal financial benefit, business dealings, or something more sinister tied to Epstein's criminal network?

 - Was this purely trade-related misconduct, or does it intersect with the broader Epstein sex-trafficking scandal that previously implicated him?

 - How will King Charles III and the wider monarchy respond to this unprecedented blow to institutional credibility?

 Public sentiment toward Andrew has long been strained, with widespread calls for further accountability following the Epstein saga. The ongoing release of Epstein-related documents continues to fuel speculation, with each batch potentially revealing more damaging details.

 This arrest marks a rare and historic moment in modern British history: a former senior royal, once second in line to the throne, now in custody facing grave criminal allegations. Whether it leads to charges, a trial, or acquittal remains uncertain, but the fallout is already shaking the foundations of the monarchy's reputation. As the investigation proceeds, the world watches closely to see if justice will be served without favor or fear.

 Sajjadali Nayani ✍
 Friday World – February 19, 2026 


February 19, 2026

एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर की गिरफ्तारी: एपस्टीन फाइल्स के बाद 'सार्वजनिक पद के दुरुपयोग' का आरोप, 66वें जन्मदिन पर सैंड्रिंघम में पुलिस रेड

एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर की गिरफ्तारी: एपस्टीन फाइल्स के बाद 'सार्वजनिक पद के दुरुपयोग' का आरोप, 66वें जन्मदिन पर सैंड्रिंघम में पुलिस रेड
-Friday World 19th Feb 2026
ब्रिटिश शाही परिवार पर एक बार फिर गहरा संकट मंडराया है। एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर, जिन्हें पहले प्रिंस एंड्रयू के नाम से जाना जाता था, को आज सुबह (१९ फरवरी २०२६) सार्वजनिक पद के दुरुपयोग (misconduct in public office) के संदेह में गिरफ्तार कर लिया गया है। यह घटना उनके ६६वें जन्मदिन पर हुई, जब नॉरफ़ॉक के सैंड्रिंघम एस्टेट स्थित वुड फार्म पर पुलिस की कई गाड़ियां पहुंचीं। अनमार्क्ड पुलिस वाहन और सादे कपड़ों में अधिकारी तस्वीरों में कैद हो गए, जिसने मीडिया और सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया। 

थेम्स वैली पुलिस ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए पुष्टि की कि "एक ६० वर्षीय व्यक्ति को नॉरफ़ॉक से गिरफ्तार किया गया है, जो सार्वजनिक पद के दुरुपयोग के संदेह में है।" पुलिस ने बर्कशायर और नॉरफ़ॉक में कई ठिकानों पर तलाशी अभियान भी शुरू कर दिया है। आरोपी अभी पुलिस हिरासत में है। 

एपस्टीन फाइल्स से शुरू हुआ नया तूफान यह गिरफ्तारी अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा हाल ही में जारी की गई जेफ़री एपस्टीन फाइल्स से जुड़ी है। इन फाइलों में लाखों दस्तावेज हैं, जिनमें से कुछ में एंड्रयू के ईमेल और दस्तावेज़ी सबूत मिले हैं। आरोप है कि २०१० में, जब एंड्रयू ब्रिटेन के अंतरराष्ट्रीय व्यापार दूत (UK trade envoy) थे, उन्होंने गोपनीय सरकारी रिपोर्ट्स और वाणिज्यिक जानकारी एपस्टीन के साथ साझा की थी। 

उदाहरण के लिए: 

- दक्षिण-पूर्व एशिया (वियतनाम, सिंगापुर, हांगकांग, शेन्ज़ेन) की यात्रा से संबंधित विजिट रिपोर्ट्स।

 - अफगानिस्तान के हेलमंद प्रांत में पुनर्निर्माण से जुड़े गोपनीय ब्रिफ।

 - निवेश अवसरों की गोपनीय जानकारी। 

एंटी-मोनार्की ग्रुप 'रिपब्लिक' के चीफ एक्जीक्यूटिव ग्राहम स्मिथ ने इन दस्तावेजों के आधार पर शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें एंड्रयू पर **सार्वजनिक पद के दुरुपयोग** और **ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट** का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया। पुलिस ने शिकायत की जांच शुरू की और अब गिरफ्तारी तक पहुंच गई। 

एंड्रयू ने हमेशा से इन आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना रहा है कि उन्होंने किसी भी गलत काम को न देखा, न गवाही दी और न ही कभी संदेह हुआ। लेकिन एपस्टीन फाइल्स ने पुराने घावों को फिर से हरा कर दिया है। एपस्टीन, जो यौन अपराधी और बाल तस्करी के आरोपी थे, के साथ एंड्रयू के करीबी संबंध पहले से ही विवादास्पद थे। २०१९ में एंड्रयू को शाही कर्तव्यों से अलग कर दिया गया था, शाही खिताब छीन लिए गए और वे विंडसर के रॉयल लॉज से निकाल दिए गए। अब वे सैंड्रिंघम के वुड फार्म में रह रहे हैं। 

शाही परिवार और सरकार की प्रतिक्रिया किंग चार्ल्स III के भाई की इस गिरफ्तारी पर शाही परिवार ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं जारी किया है, लेकिन पहले के बयानों में कहा गया था कि वे पुलिस जांच में पूरा सहयोग करेंगे। प्रधानमंत्री की ओर से भी कहा गया है कि "कानून के सामने कोई भी ऊपर नहीं है" (nobody is above the law)।

 यह मामला ब्रिटिश इतिहास में दुर्लभ है, जहां एक पूर्व शाही सदस्य पर इतने गंभीर आरोप में गिरफ्तारी हुई हो। misconduct in public office एक गंभीर अपराध है, जिसमें सरकारी पद का निजी फायदे के लिए दुरुपयोग शामिल होता है। अगर दोषी पाए गए तो लंबी जेल की सजा हो सकती है। 

सवाल जो उठ रहे हैं

- क्या एंड्रयू ने वाकई गोपनीय दस्तावेज एपस्टीन को सौंपे थे, और अगर हां तो क्यों?

 - क्या यह एपस्टीन के यौन अपराधों से जुड़ा था या सिर्फ व्यापारिक संबंध?

 - शाही परिवार अब क्या कदम उठाएगा?

 यह घटना ब्रिटिश शाही परिवार की छवि पर गहरा असर डाल सकती है। जनता में पहले से ही एंड्रयू के प्रति नाराजगी थी, और अब गिरफ्तारी ने विवाद को नई ऊंचाई दी है। एपस्टीन फाइल्स अभी भी जारी हो रही हैं, और हर नई खेप के साथ नए राज खुल रहे हैं।

 एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर की यह गिरफ्तारी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि संस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती है। क्या शाही पदाधिकारी भी कानून के दायरे में हैं? समय बताएगा। फिलहाल, जांच जारी है और दुनिया नजरें टिकाए हुए है। 

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 19th Feb 2026
February 19, 2026

ખેડા મા નરાધમ શિક્ષકનું કાળું કૃત્ય: ધોરણ ૯ની વિદ્યાર્થિની પર દુષ્કર્મ, શાળા બદલી છતાં પીછો ન છોડ્યો

ખેડા મા નરાધમ શિક્ષકનું કાળું કૃત્ય: ધોરણ ૯ની વિદ્યાર્થિની પર દુષ્કર્મ, શાળા બદલી છતાં પીછો ન છોડ્યો -Friday World 19th Feb 2026

ગુજરાતમાં શિક્ષકને 'ગુરુ બ્રહ્મા, ગુરુ વિષ્ણુ, ગુરુ દેવો મહેશ્વર:' કહીને ભગવાનનું સ્થાન આપવામાં આવે છે. શિક્ષણને પવિત્ર વ્યવસાય માનવામાં આવે છે, જ્યાં શિક્ષક વિદ્યાર્થીઓના ભવિષ્યનો નિર્માતા હોય છે. પરંતુ ખેડા જિલ્લાના ઠાસરા તાલુકાના ચિતલાવ ગામમાંથી સામે આવેલી એક ઘટનાએ આ પવિત્રતાના મુખ પર કાળું ડાઘ લગાવી દીધો છે. એક નરાધમ શિક્ષકે પોતાની જ પૂર્વ વિદ્યાર્થિની પર દુષ્કર્મ આચરીને શિક્ષણ જગતને શર્મસાર કરી દીધું છે. 

આઠમા ધોરણથી શરૂ થયેલી હેરાનગતિ મળતી વિગતો અનુસાર, આરોપી શિક્ષક શૈલેષ રાઠવા ચિતલાવ પ્રાથમિક શાળામાં ફરજ બજાવતા હતા. ધોરણ ૮માં અભ્યાસ કરતી એક સગીર વિદ્યાર્થિની પર તેની ખરાબ નજર પડી ગઈ. અવારનવાર હેરાનગતિ, અશ્લીલ ટિપ્પણીઓ અને માનસિક પીડા આપવાનું સિલસિલું શરૂ થયું. પરિવારને આ બધાની ખબર ન હતી, પરંતુ વિદ્યાર્થિનીના મન પર ગાઢ અસર પડી રહી હતી. 

જ્યારે ધોરણ ૮ પૂર્ણ થયું, ત્યારે પરિવારે વિદ્યાર્થિનીને વધુ સારા ભવિષ્ય માટે સાવલી ખાતેની શાળામાં દાખલ કરી દીધી. ત્યાં રહેવાનું થયું, જેથી તે સુરક્ષિત રીતે અભ્યાસ કરી શકે. પરિવારને આશા હતી કે હવે બધું બરાબર થઈ જશે. પરંતુ શૈલેષ રાઠવાની વાસના અટકી નહીં. તેણે સાવલી સુધી પીછો કર્યો. દૂરથી પણ હેરાનગતિ ચાલુ રાખી અને અંતે તેનું કુકર્મ ધોરણ ૯માં અભ્યાસ કરતી વિદ્યાર્થિની પર ગુજારી દીધું. 

પરિવારની હિંમત અને પોલીસની ત્વરિત કાર્યવાહી જ્યારે વિદ્યાર્થિનીએ પોતાના પરિવારને આ ભયાનક અનુભવ જણાવ્યો, ત્યારે પરિવારની દુનિયા ઉજાડ થઈ ગઈ. પરંતુ તેઓએ હાર ન માની. તાત્કાલિક ડાકોર પોલીસ સ્ટેશનમાં ફરિયાદ નોંધાવી. પોલીસે આ મામલાની ગંભીરતા સમજીને ત્વરિત કાર્યવાહી કરી. આરોપી શૈલેષ રાઠવા વિરુદ્ધ POCSO એક્ટ (Protection of Children from Sexual Offences) તેમજ IPCની કડક કલમો હેઠળ ગુનો નોંધવામાં આવ્યો. પોલીસે તેની ધરપકડ કરવાની તજવીજ હાથ ધરી છે અને તપાસ ચાલુ છે. 

આ ઘટનાએ સમગ્ર ખેડા જિલ્લામાં ભારે રોષ ફેલાવ્યો છે. સ્થાનિક લોકોમાં આક્રોશ છે કે જે વ્યક્તિને બાળકોના ભવિષ્યની જવાબદારી સોંપવામાં આવે, તે જ વ્યક્તિ તેમની આબરૂ લૂંટે તો શું કહેવું? ઘણા લોકો સખત સજાની માંગ કરી રહ્યા છે, જેથી આવા નરાધમોને સખત શિક્ષા મળે અને અન્યો માટે ઉદાહરણ બને. 

શિક્ષણ જગત માટે ચેતવણી આ ઘટના માત્ર એક વ્યક્તિગત અપરાધ નથી, પરંતુ શિક્ષણ વ્યવસ્થામાં વિશ્વાસના ધરાશાયી થવાનું કારણ છે. શિક્ષકોની પૃષ્ઠભૂમિ તપાસ, બાળકોની સુરક્ષા માટે સખત નિયમો અને જાગૃતિની જરૂર છે. પરિવારોએ પણ બાળકો સાથે ખુલ્લું સંવાદ રાખવું જોઈએ, જેથી આવી ઘટનાઓ વહેલી પકડાઈ જાય. 

આ કિસ્સો દર્શાવે છે કે સમાજમાં કેટલાક લોકો પાછળથી પણ લંપટ વૃત્તિ રાખે છે. પરંતુ સારા સમાજની તાકાત એ છે કે જ્યારે પીડિત હિંમત દેખાવે અને કાયદો ત્વરિત કાર્યવાહી કરે. વિદ્યાર્થિની અને તેના પરિવારની હિંમત સલામને પાત્ર છે. 

આવા નરાધમોને કડક સજા મળે અને શિક્ષણનું પવિત્ર સ્થાન ફરીથી સુરક્ષિત બને એ જ આ ઘટનાથી શીખવાનું છે. બાળકોનું ભવિષ્ય સુરક્ષિત રાખવું એ આપણા સૌની જવાબદારી છે.

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 19th Feb 2026