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यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Friday, 6 November 2026

November 06, 2026

'અમને આશા છે કે તમે દિલ્હીના હવામાનની મજા માણતા હશો...’ પ્રદૂષણ પર સુપ્રીમ કોર્ટનો જોરદાર કટાક્ષ, દિલ્હીમાં રહેવું એટલે રોજ 30 સિગારેટ પીવા બરાબર!

'અમને આશા છે કે તમે દિલ્હીના હવામાનની મજા માણતા હશો...’ પ્રદૂષણ પર સુપ્રીમ કોર્ટનો જોરદાર કટાક્ષ, દિલ્હીમાં રહેવું એટલે રોજ 30 સિગારેટ પીવા બરાબર!
-Friday World Nov 6,2026 
દિલ્હી-NCRમાં વાયુ પ્રદૂષણ ફરી એકવાર ખતરનાક સ્તરે પહોંચી ગયું છે. હવા એટલી ઝેરી બની ગઈ છે કે શ્વાસ લેવો પણ મુશ્કેલ થઈ ગયો છે. આ ગંભીર મુદ્દે સુપ્રીમ કોર્ટમાં સુનાવણી હાથ ધરાઈ હતી. દિલ્હીમાં કડક પ્રદૂષણ વિરોધી નિયમો લાગુ કરાયા હોવા છતાં સ્થિતિમાં કોઈ સુધારો નથી. આ મામલે ચીફ જસ્ટિસ સૂર્ય કાંત, જસ્ટિસ જોયમાલ્ય બાગચી અને જસ્ટિસ વી. મોહનાની બેન્ચે સુનાવણી કરી હતી.

‘દિલ્હીના હવામાનનો આનંદ લો છો ને?’ - CJI સૂર્ય કાંત

કોર્ટની કાર્યવાહી શરૂ થતાં જ ચીફ જસ્ટિસ સૂર્ય કાંતે દિલ્હીની ઝેરી હવા પર કટાક્ષ કરતા વકીલોને પૂછ્યું હતું કે, ‘હું આશા રાખું છું કે તમે બધા દિલ્હીના આ હવામાનની મજા માણી રહ્યા હશો.’

આ એક સીધો કટાક્ષ હતો. રાજધાનીની હવા દિવસે દિવસે બગડી રહી છે અને લોકો મજબૂરીમાં તે હવામાં શ્વાસ લઈ રહ્યા છે. આ વાત પર CJIએ વધુમાં સ્વીકાર્યું હતું કે, ‘સુપ્રીમ કોર્ટ જેટલા વધુ આદેશો આપે છે, તેટલું જ નિયમોનું ઉલ્લંઘન વધુ થાય છે. આ માનવ સ્વભાવ છે.’

એટલે કે કોર્ટ આદેશ આપે છે, સરકાર નિયમ બનાવે છે, પણ જમીન પર તેનું પાલન થતું નથી. લોકો નિયમો તોડે છે અને તંત્ર પણ આંખ આડા કાન કરે છે.

દિલ્હીમાં રહેવું એટલે રોજ 30 સિગારેટ પીવા બરાબર

આ કેસમાં સુપ્રીમ કોર્ટને મદદ કરી રહેલા વરિષ્ઠ એડવોકેટ અને એમિકસ ક્યુરી અપરાજિતા સિંહે દિલ્હીની ભયાનક સ્થિતિનું વર્ણન કર્યું હતું. તેમણે કહ્યું કે, ‘અહીં પ્રદૂષણનું સ્તર સતત ગંભીર શ્રેણીમાં રહે છે. તેના કારણે મારો અવાજ પણ બેસી ગયો છે. અહીંની ઝેરી હવામાં શ્વાસ લેવો એ દરરોજ એક વ્યક્તિ દ્વારા 30 સિગારેટ પીવા સમાન છે.’

વિચારો, જે વ્યક્તિ ક્યારેય સિગારેટ પીતી નથી, તે પણ દિલ્હીમાં રહીને રોજ 30 સિગારેટ જેટલું ઝેર પોતાના ફેફસાંમાં ઉતારી રહી છે. બાળકો, વૃદ્ધો અને અસ્થમાના દર્દીઓ માટે આ સ્થિતિ તો જીવલેણ બની રહી છે.

પરાળીનો 14% ફાળો

અપરાજિતા સિંહે વધુમાં જણાવ્યું હતું કે, ખેડૂતો જે પરાળી સળગાવે છે, તેનો દિલ્હીના પ્રદૂષણમાં 14 ટકા ફાળો છે, જે આ સ્થિતિને વધુ વણસાવે છે. પરાળી ઉપરાંત વાહનોનો ધુમાડો, બાંધકામની ધૂળ, ફેક્ટરીઓનું પ્રદૂષણ અને ફટાકડા પણ દિલ્હીની હવાને ઝેરી બનાવી રહ્યા છે.

હવે શું થશે?

દર વર્ષે શિયાળામાં દિલ્હીની આ જ હાલત થાય છે. દર વર્ષે કોર્ટમાં સુનાવણી થાય છે, આદેશો આવે છે, પણ હવા સુધરતી નથી. સવાલ એ છે કે આ વખતે શું કોઈ કાયમી ઉકેલ આવશે? કે પછી ફરી એકવાર આ મુદ્દો ફક્ત કટાક્ષ અને ચર્ચા સુધી જ સીમિત રહી જશે?

દિલ્હીવાસીઓને હવે ફક્ત આદેશ નહીં, પણ સ્વચ્છ હવા જોઈએ છે.

Sajjadali Nayani ✍️
 Friday World Nov 6,2026 

#DelhiPollution #SupremeCourt #AirPollution #DelhiAQI #CleanAir
November 06, 2026

इजरायल में बड़ा उलटफेर! आइसेनकोट को 67 सांसदों का समर्थन, नेतन्याहू सिर्फ 46 पर सिमटे - क्या अब बदलेगी सत्ता?

इजरायल में बड़ा उलटफेर! आइसेनकोट को 67 सांसदों का समर्थन, नेतन्याहू सिर्फ 46 पर सिमटे - क्या अब बदलेगी सत्ता?
-Friday World Nov 6,2026
इजरायल की राजनीति में इस वक्त जबरदस्त हलचल मची हुई है। सरकार बनाने को लेकर पल-पल समीकरण बदल रहे हैं। विपक्षी नेता और याशर पार्टी के प्रमुख गादी आइसेनकोट को सरकार बनाने के लिए 67 सांसदों का समर्थन मिलने का दावा किया गया है। अगर यह दावा सच साबित होता है तो यह इजरायल की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत होगा।

दूसरी तरफ, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाले लिकुड गठबंधन को अब तक सिर्फ 46 सांसदों का समर्थन मिला है। यानी आइसेनकोट, नेतन्याहू से 21 सांसद आगे चल रहे हैं। अब सबकी नजरें राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग पर टिकी हैं। आइसेनकोट राष्ट्रपति के सरकार बनाने के निमंत्रण का इंतजार कर रहे हैं।

जॉइंट लिस्ट का बड़ा ऐलान

जेरुशलम पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, 'जॉइंट लिस्ट' ने गुरुवार को घोषणा की कि वह राष्ट्रपति के सामने गादी आइसेनकोट के नाम की सिफारिश करेगी। पार्टी ने कहा कि यह फैसला नेतन्याहू की सत्ता में वापसी रोकने की दिशा में एक अहम कदम है।

पार्टी के बयान के अनुसार, सभी घटकों के बीच लंबी चर्चा के बाद यह फैसला सर्वसम्मति से लिया गया। इस समर्थन में अरब पार्टियां भी शामिल हैं। इजरायल की राजनीति में अरब पार्टियों का समर्थन हमेशा से बहुत अहम रहा है, और इस बार भी वही खेल पलटता दिख रहा है।

नेतन्याहू का पलटवार - अब्बास पर निशाना

इधर, नेतन्याहू ने भी चुप बैठने के बजाय पलटवार किया है। उन्होंने राअम पार्टी के अध्यक्ष मंसूर अब्बास की आलोचना की है। नेतन्याहू का कहना है कि राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग के साथ बातचीत के दौरान अब्बास ने हमास को आतंकवादी संगठन मानने के सवाल पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया।

नेतन्याहू के मुताबिक, राष्ट्रपति हर्जोग ने अब्बास से सीधे पूछा था कि क्या हमास एक आतंकवादी संगठन है? इस पर अब्बास ने कथित तौर पर कहा कि उन्हें इस तरह की परीक्षा में नहीं डाला जा सकता।

नेतन्याहू ने आरोप लगाया कि आइसेनकोट अरब पार्टियों के समर्थन के बिना सरकार नहीं बना सकते। और इसी वजह से अब्बास ने उनके नाम की सिफारिश की है। नेतन्याहू इस मुद्दे को सुरक्षा और राष्ट्रवाद से जोड़कर आइसेनकोट के गठबंधन को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।

आगे क्या होगा?

इजरायल में सरकार बनाने के लिए 120 सीटों वाली नेसेट में 61 का बहुमत चाहिए। आइसेनकोट के पास 67 का दावा है, यानी बहुमत से 6 ज्यादा। लेकिन राजनीति में दावा और हकीकत में फर्क होता है।

अब राष्ट्रपति हर्जोग सभी पार्टियों से बात करके यह तय करेंगे कि किसे सरकार बनाने का पहला मौका दिया जाए। अगर आइसेनकोट को निमंत्रण मिलता है तो उन्हें तय समय में गठबंधन को एकजुट रखकर सरकार बनानी होगी।

अगर आइसेनकोट चूकते हैं, तो नेतन्याहू को भी मौका मिल सकता है। नेतन्याहू इजरायल के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे हैं और उन्हें संकट से निकलने का माहिर माना जाता है।

फिलहाल इजरायल में एक तरफ बदलाव की लहर है तो दूसरी तरफ नेतन्याहू का अनुभव। आने वाले कुछ दिन इजरायल के भविष्य के लिए बेहद अहम होने वाले हैं।

Sajjadali Nayani ✍️ 
Friday World Nov 6,2026

#IsraelPolitics #Netanyahu #GadiEisenkot #IsraelGovernment #MiddleEast
November 06, 2026

पेट्रोल में 20% नहीं, 31.2% इथेनॉल! कर्नाटक सरकार की जांच में बड़ा खुलासा, 63 सैंपल फेल - आपकी गाड़ी का इंजन खतरे में?

पेट्रोल में 20% नहीं, 31.2% इथेनॉल! कर्नाटक सरकार की जांच में बड़ा खुलासा, 63 सैंपल फेल - आपकी गाड़ी का इंजन खतरे में?
-Friday World Nov 6,2020
कर्नाटक से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने देशभर के वाहन मालिकों को चौंका दिया है। सरकार की ही जांच में दावा किया गया है कि पेट्रोल में तय सीमा से कहीं ज्यादा इथेनॉल मिलाया जा रहा है। नियम के मुताबिक पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिलना चाहिए, जिसे E20 कहा जाता है। लेकिन जांच में कई जगहों पर यह मात्रा 20% से ज्यादा मिली है।

7 जिलों से लिए गए 63 सैंपल

कर्नाटक सरकार ने करीब 7 जिलों से पेट्रोल के कुल 63 सैंपल इकट्ठा किए। इनमें बेंगलुरु भी शामिल था। इन सैंपलों को प्राइवेट लैब में जांच के लिए भेजा गया। जांच रिपोर्ट आने के बाद हड़कंप मच गया। दावा है कि ज्यादातर सैंपलों में इथेनॉल की मात्रा 20% से ज्यादा पाई गई।

इनमें IOCL, HPCL, BPCL, Shell और Nayara जैसी बड़ी ऑयल कंपनियों के पेट्रोल पंपों के सैंपल शामिल थे।

IOCL के सैंपल में तो हद ही हो गई!

सबसे चौंकाने वाला दावा IOCL के सैंपल को लेकर है। रिपोर्ट के मुताबिक एक सैंपल में 31.2% तक इथेनॉल मिला। यानी तय सीमा से 11.2% ज्यादा। अगर यह सच है तो यह सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि लाखों वाहन मालिकों के साथ धोखा भी है।

कर्नाटक सरकार ने केंद्र को घेरा

इस रिपोर्ट के बाद कर्नाटक सरकार ने केंद्र सरकार से इस मामले में कार्रवाई की मांग की है। सरकार की 3 बड़ी मांगें हैं:

1. ओवर-ब्लेंडिंग पर कार्रवाई हो: जो कंपनियां ज्यादा इथेनॉल मिला रही हैं, उन पर सख्त कार्रवाई की जाए।
2. नुकसान की भरपाई हो: अगर किसी की गाड़ी को नुकसान हुआ है तो उसकी भरपाई की जाए।
3. हर पंप पर डिस्प्ले लगे: हर पेट्रोल पंप पर साफ-साफ लिखा हो कि यहां के पेट्रोल में कितने प्रतिशत इथेनॉल है। ग्राहक को पता तो चले कि वो क्या डलवा रहा है।

कर्नाटक सरकार ने कहा है कि ऑयल कंपनियों की तरफ से इथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर कोई साफ जानकारी नहीं दी जा रही है, जिससे लोगों में चिंता बढ़ रही है। सरकार अब अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपने का फैसला कर चुकी है।

आम आदमी को क्या नुकसान?

सवाल यह है कि ज्यादा इथेनॉल से आपकी गाड़ी को क्या नुकसान हो सकता है?

पुरानी गाड़ियां, जो E20 के हिसाब से नहीं बनी हैं, उनमें ज्यादा इथेनॉल से कई दिक्कतें आ सकती हैं। जैसे माइलेज कम होना, इंजन में जंग लगना, रबर पाइप और फ्यूल पंप खराब होना, स्टार्टिंग में दिक्कत और इंजन की लाइफ कम होना। बाइक मालिकों को तो यह समस्या और ज्यादा महसूस हो रही है।

लोगों का कहना है कि E20 आने के बाद से उनकी गाड़ी का माइलेज गिर गया है और मेंटेनेंस का खर्च बढ़ गया है। अब 31.2% का दावा सुनकर तो लोगों की चिंता और बढ़ गई है।

इथेनॉल है क्या?

इथेनॉल गन्ने, मक्का जैसे फसलों से बनने वाला एक तरह का अल्कोहल है। सरकार इसे पेट्रोल में मिलाकर विदेश से आने वाले महंगे कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना चाहती है। इससे किसानों को भी फायदा होता है और प्रदूषण भी कम होता है। यह सोच अच्छी है, लेकिन अगर ब्लेंडिंग तय सीमा से ज्यादा हो जाए तो यह फायदा नुकसान में बदल जाता है।

अब आगे क्या?

अब सबकी नजर केंद्र सरकार और ऑयल कंपनियों के जवाब पर है। क्या कंपनियां इस रिपोर्ट को मानेंगी? क्या जांच दोबारा होगी? क्या हर पंप पर इथेनॉल की मात्रा वाला बोर्ड लगेगा?

एक बात तो साफ है, ग्राहक को पारदर्शिता चाहिए। पैसा ग्राहक का है, गाड़ी ग्राहक की है, तो उसे यह जानने का पूरा हक है कि टंकी में क्या डाला जा रहा है।

जब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक इस रिपोर्ट को एक गंभीर दावा मानकर जांच की मांग करना ही सही तरीका है।

Sajjadali Nayani ✍️
 Friday World Nov 6,2020

#EthanolBlending #PetrolNews #Karnataka #E20Petrol #VehicleSafety
November 06, 2026

कर्मभूमि एक्सप्रेस में लगी भीषण आग, 4 डिब्बे धू-धू कर जले - यात्रियों की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा, कोई हताहत नहीं!

कर्मभूमि एक्सप्रेस में लगी भीषण आग, 4 डिब्बे धू-धू कर जले - यात्रियों की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा, कोई हताहत नहीं!
- Friday World Nov 6,2016
पंजाब से एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। दिल्ली से अमृतसर जा रही कर्मभूमि एक्सप्रेस में अचानक भीषण आग लग गई। हादसा पंजाब के पटियाला जिले में राजपुरा के पास हुआ। ट्रेन जैसे ही राजपुरा रेलवे स्टेशन पहुंची, उसके 3 से 4 डिब्बों से धुआं उठने लगा और देखते ही देखते आग की लपटें फैल गईं।

सराय वंजारा गांव के पास मचा हड़कंप

यह घटना सराय वंजारा गांव के पास हुई। डिब्बों से काला धुआं दूर-दूर तक दिखाई दे रहा था। ट्रेन के अंदर मौजूद यात्रियों में चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। लेकिन यात्रियों ने हिम्मत नहीं हारी। लोग तुरंत अपनी जान बचाने के लिए ट्रेन से नीचे उतरकर सुरक्षित जगह पर खड़े हो गए।

यही यात्रियों की सूझबूझ थी जिसकी वजह से एक बड़ा हादसा टल गया। शुरुआती जानकारी के अनुसार इस हादसे में किसी के भी हताहत होने की खबर नहीं है। यह सबसे बड़ी राहत की बात है।

आग लगने की वजह अभी साफ नहीं

फिलहाल आग लगने की असली वजह सामने नहीं आई है। रेलवे प्रशासन और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाने में जुटी है। रेलवे की तरफ से मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं।

अक्सर ट्रेनों में आग शॉर्ट सर्किट, पंखे या बिजली के तारों में खराबी, या फिर किसी यात्री द्वारा ज्वलनशील सामान ले जाने से लगती है। जांच के बाद ही पता चलेगा कि कर्मभूमि एक्सप्रेस में आग का असली कारण क्या था।

यात्रियों के लिए सीख

यह हादसा हमें एक बड़ी सीख देता है। ट्रेन में सफर के दौरान:
1. धुआं या आग दिखते ही घबराएं नहीं, तुरंत चेन खींचें या स्टाफ को बताएं
2. चलती ट्रेन से कभी न कूदें
3. अपना सामान छोड़कर पहले अपनी जान बचाएं
4. बच्चों और बुजुर्गों की मदद करें

रेलवे प्रशासन से भी उम्मीद है कि ट्रेनों में फायर सेफ्टी की जांच और कड़ी की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

फिलहाल सभी यात्री सुरक्षित हैं, यही सबसे बड़ी खबर है।

Sajjadali Nayani ✍️
 Friday World Nov 6,2016

#KarmabhoomiExpress #TrainFire #PunjabNews #BreakingNews #PassengerSafety

Thursday, 5 November 2026

November 05, 2026

अमेरिका-इज़रायल में नफरत को नकारा, जनता का मूड बदला - अब सियासत में नफरत नहीं, एकजुटता और विकास की बारी है!

अमेरिका-इज़रायल में नफरत को नकारा, जनता का मूड बदला - अब सियासत में नफरत नहीं, एकजुटता और विकास की बारी है!
- Friday World Nov 5,2026 
दुनिया की राजनीति में एक बड़ा बदलाव साफ़ दिखाई दे रहा है। अमेरिका हो या इज़रायल, जनता अब नफरत की राजनीति से थक चुकी है। जनता का मूड बदल रहा है। लोग अब ऐसे नेताओं को नहीं चाहते जो धर्म, जाति और समुदाय के नाम पर दीवारें खड़ी करें। लोग ऐसे नेताओं को चाहते हैं जो सबको साथ लेकर चलें।

आज की राजनीति को यह एक बड़ी सीख देता है। नफरत से कुछ दिन के लिए भीड़ तो मिल सकती है, वोट भी मिल सकते हैं, लेकिन लंबे समय तक सत्ता नहीं टिक सकती। क्योंकि जनता को आखिर में रोटी, नौकरी, महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा चाहिए। नफरत से पेट नहीं भरता।

नफरत से सत्ता तक, और सत्ता से पतन तक

इतिहास गवाह है कि जो नेता नफरत को हथियार बनाते हैं, वो पहले सत्ता से हाथ धोते हैं। सबसे बेहतरीन उदाहरण नेतन्याहू और ट्रंप की राजनीति है। दोनों ने अपने दौर में आक्रामक और विभाजनकारी बयानबाज़ी को बढ़ावा दिया। शुरू में उन्हें इसका फायदा मिला, लेकिन जैसे-जैसे जनता की असली समस्याएं बढ़ीं - महंगाई, बेरोज़गारी, युद्ध का डर, समाज में टूटन - वैसे-वैसे जनता ने उनसे सवाल पूछना शुरू कर दिया।

जनता ने कहा - हमें दुश्मन नहीं, समाधान चाहिए। हमें लड़ाई नहीं, शांति चाहिए। हमें नफरत नहीं, विकास चाहिए।

अमेरिका में युवा, महिलाएं और आम कामकाजी लोग अब साफ़ कह रहे हैं कि उन्हें ऐसी राजनीति नहीं चाहिए जो हर दिन किसी को दुश्मन बताए। इज़रायल में भी यही आवाज़ उठ रही है। वहां के लोग भी अब युद्ध, डर और विभाजन से थक चुके हैं। वो अपने बच्चों के लिए सुरक्षित और शांत भविष्य चाहते हैं।

अच्छे नेता की पहचान क्या है?

सिर्फ बड़े-बड़े वादे करना नेतृत्व नहीं है। अच्छे नेता की पहचान यह है कि वो जनता की असली समस्याओं का ठोस समाधान दे।

अच्छा नेता वो है जो:
1. सबको साथ लेकर चले, किसी को दुश्मन न बनाए
2. महंगाई, नौकरी और शिक्षा पर काम करे
3. झूठे वादों की जगह ज़मीनी काम करे
4. हार-जीत से ऊपर उठकर देश को एक रखे

सवाल यह है कि क्या आज की राजनीति में ऐसे ही नेतृत्व की सबसे ज़्यादा ज़रूरत नहीं है?

बिल्कुल है। क्योंकि दुनिया अब नफरत से नहीं, एकजुटता से आगे बढ़ेगी। जो नेता यह समझेगा, वही आने वाले समय में जनता के दिल में राज करेगा। बाकी सब इतिहास बन जाएंगे।

आपकी राय में एक अच्छे नेता की सबसे बड़ी पहचान क्या होनी चाहिए? कमेंट में बताइए।

Sajjadali Nayani ✍️
 Friday World Nov 5,2026 

#UnityNotHate #PeoplePower #Leadership #PeaceAndDevelopment #VoteForUnity
November 05, 2026

ભાવનગરમાં સમાજની જનરલ સભામાં મોટો નિર્ણય - બિનહરીફ ચૂંટાયેલી પેનલના સામૂહિક રાજીનામા, હવે એડ-હોક કમિટી સંભાળશે સંચાલન!

ભાવનગરમાં સમાજની જનરલ સભામાં મોટો નિર્ણય - બિનહરીફ ચૂંટાયેલી પેનલના સામૂહિક રાજીનામા, હવે એડ-હોક કમિટી સંભાળશે સંચાલન!
-Friday World Nov 5,2026 
ભાવનગરમાં સમાજની જનરલ સભામાં એક મહત્વનો અને ઐતિહાસિક નિર્ણય લેવામાં આવ્યો છે. નવ મહિના પહેલા બિનહરીફ ચૂંટાઈ આવેલી આખી પેનલે સામૂહિક રીતે રાજીનામું આપી દીધું છે. સભામાં ઉપસ્થિત સભ્યોએ આ નિર્ણયને સર્વાનુમતે સ્વીકાર્યો હતો.

હાઉસિંગ પ્રોજેક્ટમાં ભૂલનો સ્વીકાર

જનરલ સભામાં સૌથી ચર્ચાનો મુદ્દો હાઉસિંગ પ્રોજેક્ટ રહ્યો. પેનલ દ્વારા હાઉસિંગ પ્રોજેક્ટમાં થયેલી ભૂલનો ખુલ્લેઆમ સ્વીકાર કરવામાં આવ્યો હતો. સભ્યોએ કહ્યું કે, ભૂલ માણસથી જ થાય છે, પણ તેને સ્વીકારવી એ જ સાચી નેતાગીરી છે. આ ભૂલને કારણે સમાજમાં જે ગેરસમજ અને અસંતોષ ઊભો થયો હતો, તેને દૂર કરવા માટે જ પેનલે રાજીનામું આપવાનો નિર્ણય લીધો.

સભામાં વાતાવરણ શાંત અને સહકારભર્યું રહ્યું. કોઈએ આક્ષેપ-પ્રતિઆક્ષેપ કરવાને બદલે સમાજના ભવિષ્ય પર ધ્યાન કેન્દ્રિત કર્યું.

હવે શું થશે? એડ-હોક કમિટી અને નવી ચૂંટણી

બંધારણના નિયમ મુજબ હવે સમાજના સંચાલક તરીકે એડ-હોક કમિટીની નિમણૂક કરવામાં આવી. આ એડ-હોક કમિટી રોજિંદા વહીવટ, હિસાબ-કિતાબ નું કામ સંભાળશે.

સાથે જ નવા ચૂંટણી કમિશનરની નિમણૂક કરવામાં આવશે અને નવેસરથી ચૂંટણીની પ્રક્રિયા અમલમાં આવશે. ટૂંક સમયમાં જ નવી ચૂંટણીની પ્રક્રિયા શરૂ થશે, જેથી સમાજને નવું, મજબૂત અને સર્વસંમત નેતૃત્વ મળી શકે.

સમાજના વડીલોએ આ નિર્ણયને આવકાર્યો છે અને કહ્યું છે કે, આનાથી સમાજમાં પારદર્શિતા વધશે અને દરેક સભ્યને પોતાના મતનો અધિકાર મળશે.

Sajjadali Nayani ✍️
 Friday World Nov 5,2026 

#Bhavnagar #SamajMeeting #AdHocCommittee #NewElection #HousingProject

Wednesday, 4 November 2026

November 04, 2026

Two Schools, Two Worlds! World Cries Over Attack on Ukraine School, Why Silence Over Iran's Minab School?

Two Schools, Two Worlds! World Cries Over Attack on Ukraine School, Why Silence Over Iran's Minab School?
-Friday World Nov 5,2026
Is the scale of humanity now decided by looking at the country? This is the question every aware person is asking today.

On one side, 33 people were killed in the Russian attack on a school building in Zaporizhzhia, Ukraine, and the whole world cried out in outrage. From America to Europe, from the UN to big media houses, everyone condemned it. President Zelensky's statement became world headlines within minutes.

On the other side, the world's silence over the attack / incident at the school in Minab, Iran is deafening. There were also children there, there were also books there, there were also mothers' beloved sons there. Then why is the blood of the children there so cheap? Why did their tears not come on camera?

 1. Blood Colour Is Same, But Why Different Price?
If a Ukrainian child dies, it is an "attack on humanity", and if a Minab child dies, it is an "internal matter"? Is this the justice of the world? A school is a school, whether it is in Ukraine or Iran. The scream of a child dying from a bomb has only one language.

 2. Double Character of Media
For Ukraine, CNN, BBC, Reuters are all LIVE. Every hour update, every hour pictures. But not even a small news for Minab. Is it because Iran is an enemy country of America? Is it because Iran's story does not get TRP? When media looks at the same incident with two eyes, understand that it is not news, it is an agenda.

 3. Silence of UN and Human Rights Organisations
Emergency UN meeting immediately on the attack on Ukraine, immediate threat of sanctions. But on Minab... no meeting, no proposal, no condemnation. Are human rights only for the people of Europe? Are children of Asia and Middle East not considered human?

 4. Children Victims of Politics
The truth is that the world does not care about children, it cares about politics. Ukraine is against Russia, so it is a friend of America, so its pain is the world's pain. Iran stands against America, so its pain is not visible to the world. Children died here too, children died there too, but the world chose whom to cry for and whom to remain silent for.

Conclusion:
This article does not justify the Russian attack. What happened in Ukraine is wrong, very wrong. But the question is, how did what happened in Minab become right? If we truly believe in humanity, we will have to cry equally for every child.

Today there is a need to ask the world - Two schools, two attacks, then why two rules?

Until the world comes out of this double standard, no child is safe, whether he is from Ukraine or from Minab in Iran.

Sajjadali Nayani ✍️ 
Friday World Nov 5,2026

#DoubleStandards #UkraineSchool #MinabSchool #WorldSilence #ChildrenAreChildren