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यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Monday, 19 October 2026

October 19, 2026

मोदी सरकार की समय-सीमा खत्म होने वाली है! गोवा में राहुल गांधी का भाजपा पर करारा हमला – वोट चोरी का खुला आरोप

मोदी सरकार की समय-सीमा खत्म होने वाली है! गोवा में राहुल गांधी का भाजपा पर करारा हमला – वोट चोरी का खुला आरोप
-Friday World Oct 19,2026 
कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गोवा के मडगांव में आयोजित एक जोरदार जनसभा को संबोधित करते हुए भाजपा सरकार और चुनाव आयोग पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने साफ-साफ कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार की “एक्सपायरी डेट” नजदीक आ चुकी है। इस रैली में राहुल गांधी ने वोट चोरी के आरोपों को केंद्र में रखते हुए विपक्ष की लड़ाई को और तेज कर दिया।

राहुल गांधी ने दावा किया कि उनके खिलाफ भाजपा नेताओं द्वारा 45 से अधिक मानहानि के मामले दायर किए जा चुके हैं, लेकिन वोट चोरी के गंभीर आरोपों पर एक भी केस दर्ज करने की हिम्मत किसी में नहीं हुई। उन्होंने कहा, “मैं हर राज्य में खुलकर कहता हूं कि नरेंद्र मोदी वोट चोरी करते हैं, फिर भी मेरे खिलाफ कोई केस नहीं होता। वजह साफ है – वे डरते हैं। अगर इस मुद्दे पर केस दर्ज हुआ तो पूरा मामला कानूनी जांच के दायरे में आ जाएगा और वे खुद फंस जाएंगे।”

उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग, गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मिलकर विपक्षी दलों के वोट घटाने और अपने वोट बढ़ाने का काम कर रहे हैं। राहुल गांधी के अनुसार यह व्यवस्था लोकतंत्र की जड़ों पर हमला है। उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे आगामी गोवा विधानसभा चुनाव में बेहद सतर्क रहें। “कांग्रेस कार्यकर्ता संविधान के रक्षक हैं। अगर कहीं भी मतों की चोरी का प्रयास होता है तो उसे पकड़ना आपकी जिम्मेदारी है,” उन्होंने जोर देते हुए कहा।

रैली में राहुल गांधी ने गोवा की भाजपा सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार स्थानीय लोगों के हितों की अनदेखी कर अपने उद्योगपति मित्रों को अमीर बना रही है। गोवा की जनता के मुद्दों को दरकिनार कर कुछ चुनिंदा लोगों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि यह सत्ता का दुरुपयोग है।

उधर दिल्ली में भी इस मुद्दे पर कांग्रेस का विरोध तेज होता दिख रहा है। नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया। छात्रों का मार्च पुलिस ने रोक दिया। युवा कांग्रेस भी रायसीना रोड स्थित कार्यालय से विरोध प्रदर्शन की तैयारी में है। ये प्रदर्शन वोट चोरी के आरोपों को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला रहे हैं।

राहुल गांधी की यह रैली सिर्फ गोवा तक सीमित नहीं लगती। यह विपक्ष की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा दिखती है जिसमें चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए हर स्तर पर सतर्कता जरूरी है। वहीं भाजपा इन आरोपों को बेबुनियाद बताती रही है, लेकिन राहुल गांधी का दावा है कि कानूनी चुनौती से बचने के लिए ही उनके खिलाफ कोई केस नहीं दर्ज हो रहा।

गोवा विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। ऐसे में राहुल गांधी का यह हमला कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश भरने और जनता को जागरूक करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने बार-बार दोहराया कि संविधान बचाना हर नागरिक का कर्तव्य है और वोट की पवित्रता लोकतंत्र की नींव है। अगर वोट ही सुरक्षित नहीं तो जनता की आवाज कैसे सुनी जाएगी – यही सवाल राहुल गांधी ने सभा में प्रमुखता से उठाया।

इस पूरे प्रकरण ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा छेड़ दी है। विपक्ष इसे लोकतंत्र की रक्षा का मुद्दा बता रहा है तो सत्ता पक्ष इसे चुनावी रणनीति करार दे रहा है। लेकिन राहुल गांधी के खुले आरोप और कार्यकर्ताओं को दिए गए निर्देश ने साफ कर दिया है कि कांग्रेस आने वाले चुनावों में वोट चोरी के मुद्दे को प्रमुखता से उठाने वाली है। गोवा की रैली इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World Oct 19,2026 

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Sunday, 18 October 2026

October 18, 2026

अंसारुल्लाह के खिलाफ यमन में सऊदी-यूएई का नया गठबंधन: फंडिंग और हवाई कवर का समझौता

अंसारुल्लाह के खिलाफ यमन में सऊदी-यूएई का नया गठबंधन: फंडिंग और हवाई कवर का समझौता
-Friday World Oct 19,2026
यमन के लंबे संघर्ष में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है। ईरान समर्थित अंसारुल्लाह बलों की हालिया बढ़त ने खाड़ी के दो प्रमुख देशों—सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई)—को फिर से एक मंच पर ला दिया है। यमन के सूत्रों के अनुसार दोनों देशों के बीच सहमति बन गई है। इसके तहत यूएई दक्षिणी यमन की मिलिशिया को फिर से आर्थिक सहायता (फंडिंग) देगा, जबकि सऊदी अरब इन अंसारुल्लाह-विरोधी बलों को हवाई कवर प्रदान करने के लिए तैयार हो गया है। द गॉर्डियन की रिपोर्ट में इस घटनाक्रम की पुष्टि की गई है।

यह सहयोग दोनों देशों के बीच पिछले कई महीनों से चली आ रही गहरी दूरियों को कम करने की कोशिश है। इसकी सबसे बड़ी वजह अंसारुल्लाह बलों की तेज अग्रगति है, जिसने रियाद और अबू धाबी दोनों को गंभीर चिंता में डाल दिया है।

#अंसारुल्लाह की बढ़त से बढ़ी खाड़ी की चिंता

हाल के समय में अंसारुल्लाह बलों ने यमन के पश्चिमी तट समेत कई क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। उन्होंने बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य के आसपास के इलाकों में भी आगे बढ़ने की कोशिश की, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार और शिपिंग के लिए बेहद संवेदनशील है। सऊदी अरब को रोजाना अंसारुल्लाह के ड्रोन और मिसाइल हमलों का सामना करना पड़ रहा है। इन हमलों ने सऊदी के हवाई अड्डों और ऊर्जा संबंधी बुनियादी ढांचे को प्रभावित किया है, जिससे देश में सामान्य स्थिति बनाए रखना मुश्किल हो गया है।

सऊदी अरब पहले से ही यमन में हवाई अभियान चला रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रभावी और संगठित बलों की कमी महसूस की जा रही थी। दक्षिणी यमन की मिलिशिया, खासकर जायंट्स ब्रिगेड (Giants Brigades), को अंसारुल्लाह के खिलाफ सबसे प्रभावी बल माना जाता है। ये बल पहले यूएई द्वारा प्रशिक्षित और वित्त पोषित थे।

#यूएई की वापसी और पुरानी दरार की कहानी

यूएई ने जनवरी 2026 में यमन से अपने सैन्य अभियान रोक दिए थे और दक्षिणी बलों के लिए फंडिंग भी बंद कर दी थी। इसकी पृष्ठभूमि दिसंबर 2025 की घटनाओं में छिपी है। तब दक्षिणी मिलिशिया ने अदन और दक्षिणी इलाकों पर नियंत्रण स्थापित करने का अभियान शुरू किया था। सऊदी अरब ने इसे अपने राष्ट्रीय हितों के खिलाफ माना और भारी हवाई हमले किए। सऊदी ने यूएई पर इन मिलिशिया को हथियार देने का आरोप लगाया। तनाव बढ़ने के बाद यूएई ने यमन से खुद को बाहर निकाल लिया।

अब अंसारुल्लाह की बढ़त ने दोनों देशों को फिर से सहयोग के लिए मजबूर कर दिया है। समझौते के तहत यूएई जायंट्स ब्रिगेड जैसे दक्षिणी बलों को फिर से आर्थिक सहायता देगा। बदले में सऊदी अरब इन बलों को हवाई सुरक्षा और समर्थन मुहैया कराएगा। हालांकि यह समझौता काफी कमजोर माना जा रहा है, क्योंकि अंसारुल्लाह-विरोधी खेमे के अंदर पुरानी दरारें अभी भी मौजूद हैं। दक्षिणी बल अक्सर स्वतंत्र दक्षिण यमन की मांग करते रहे हैं, जबकि सऊदी अरब यमन की एकता बनाए रखना चाहता है।

#समझौते के संभावित प्रभाव

यह नया सहयोग खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अंसारुल्लाह की गतिविधियां न केवल यमन बल्कि सऊदी अरब और पूरे रेड सी क्षेत्र को प्रभावित कर रही हैं। बाब अल-मंदब जैसे रणनीतिक जलमार्ग पर नियंत्रण की लड़ाई वैश्विक व्यापार को भी प्रभावित कर सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता मुख्य रूप से सैन्य जरूरत से प्रेरित है। राजनीतिक मतभेद अभी भी बने हुए हैं। दक्षिणी अलगाववादियों ने हाल ही में स्वतंत्रता के लिए जनमत संग्रह की मांग की है, लेकिन न सऊदी और न यूएई ने इस पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है।

यमन का संघर्ष 2014-15 से चल रहा है, जब अंसारुल्लाह बलों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन ने 2015 में हस्तक्षेप किया था। वर्षों के युद्ध, मानवीय संकट और क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विता के बाद अब सऊदी और यूएई फिर से एक साथ आने की कोशिश कर रहे हैं। यह समझौता अंसारुल्लाह की बढ़त को रोकने में कितना सफल होता है, यह आने वाले समय में ही पता चलेगा। फिलहाल दोनों देश अपनी सुरक्षा और क्षेत्रीय प्रभाव को प्राथमिकता दे रहे हैं।

यह घटनाक्रम मध्य पूर्व की जटिल भू-राजनीति को फिर से रेखांकित करता है, जहां पुराने सहयोगी जरूरत पड़ने पर फिर से एक-दूसरे के करीब आ जाते हैं।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World Oct 19,2026

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October 18, 2026

कनाडा के सैन्य बेस पर भयावह आग: 4 जवान शहीद, दर्जनों घायल, देश में शोक की लहर

कनाडा के सैन्य बेस पर भयावह आग: 4 जवान शहीद, दर्जनों घायल, देश में शोक की लहर
-Friday World Oct 19,2026
कनाडा के अल्बर्टा प्रांत में स्थित कनाडियन फोर्सेस बेस (CFB) वेनराइट पर शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को एक भयावह और तेजी से फैलने वाली घास की आग ने पूरे देश को झकझोर दिया। इस दुर्घटना में चार कनाडियन सशस्त्र बल के जवानों की जान चली गई, जबकि 39 अन्य जवान घायल हुए, जिनमें से कम से कम 19 की हालत गंभीर बनी हुई है। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इसे कनाडा की धरती पर शांतिकाल में सशस्त्र बलों के लिए सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक बताया है।

यह घटना दोपहर करीब 4 बजे (स्थानीय समय) प्रशिक्षण क्षेत्र में घटी। तीसरी बटालियन, प्रिंसेस पैट्रिशियाज कनाडियन लाइट इन्फैंट्री की चार्ली कंपनी के जवान लाइव म्यूनिशन के साथ उच्च तीव्रता वाले कॉम्बैट ट्रेनिंग में व्यस्त थे। इसमें हैंड ग्रेनेड रेंज और सेक्शन अटैक एक्सरसाइज शामिल थी। एक घास की आग पहले से ही कुछ दूरी पर सुलग रही थी, लेकिन अचानक तेज हवाओं के कारण यह आग एक किलोमीटर की दूरी एक मिनट से भी कम समय में पार कर गई और जवानों के प्रशासनिक क्षेत्र पर टूट पड़ी। मेजर जनरल वेड रटलैंड ने बताया कि हवा की दिशा अचानक बदल गई और आग की दीवार जैसी स्थिति पैदा हो गई। उन्होंने कहा, “मैंने अपनी याददाश्त में ऐसा कुछ कभी नहीं देखा।”

आग इतनी तेजी से फैली कि जवानों के पास भागने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाया। कई जवान गंभीर रूप से झुलस गए। बचाव दल रात भर सबसे कठिन परिस्थितियों में काम करता रहा। 22 एंबुलेंस और आठ हवाई एंबुलेंस (एडमोंटन और सास्काटून से) ने घायलों को अस्पतालों तक पहुंचाया। अल्बर्टा प्रीमियर डेनिएल स्मिथ ने पुष्टि की कि 39 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें 19 क्रिटिकल कंडीशन में हैं। कई मरीजों को सांस की नली लगाई गई और उन्हें यूनिवर्सिटी ऑफ अल्बर्टा तथा रॉयल एलेक्जेंड्रा अस्पताल में स्थानांतरित किया गया।

शहीद होने वाले जवानों के नाम जारी किए गए हैं: सार्जेंट मॉर्गन वोंग (एडमोंटन), प्राइवेट शॉन फैरेल (प्रिंस अल्बर्ट, सास्काचेवान), प्राइवेट ऐडन गॉल्डिंग (नॉर्थ वैंकूवर, ब्रिटिश कोलंबिया) और प्राइवेट हेडन लाइकेमार्क (लैंगली, ब्रिटिश कोलंबिया)। ये सभी एडमोंटन में तैनात थे और प्रिंसेस पैट्रिशियाज कनाडियन लाइट इन्फैंट्री से जुड़े थे। उनके परिवारों को सूचित कर दिया गया है।

प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने ओटावा से देश को संबोधित करते हुए कहा, “राष्ट्र शोक में है उन बहादुर जवानों के लिए जिन्हें हमने खोया है। मैंने सभी संघीय भवनों पर झंडे आधे झुकाए जाने का आदेश दिया है।” उन्होंने बचाव कर्मियों की सराहना की जिन्होंने रात भर जान की बाजी लगाकर काम किया। रक्षा मंत्री डेविड मैकगिन्टी ने घटनास्थल की स्थिति की समीक्षा के बाद इसे बेहद दर्दनाक बताया। अल्बर्टा प्रीमियर डेनिएल स्मिथ ने भी गहरी संवेदना व्यक्त की और कहा कि फ्रंटलाइन हीरोज ने एक पल भी संकोच नहीं किया।

जांच अभी जारी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि आतंकवादी गतिविधि या बाहरी हस्तक्षेप का कोई संकेत नहीं मिला है। न ही तेल-गैस इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ा कोई विस्फोट माना जा रहा है। प्रारंभिक रिपोर्ट्स के अनुसार आग घास में लगी और तेज हवाओं (60 मील प्रति घंटे तक) ने इसे विकराल बना दिया। पर्यावरण कनाडा ने पहले से उच्च हवा की चेतावनी जारी की थी, लेकिन आग का जोखिम उस समय कम आंका गया था। मेजर जनरल रटलैंड ने कहा कि आग एक किलोमीटर दूर थी और उसे नियंत्रण में माना जा रहा था, इसलिए प्रशिक्षण जारी रखा गया। अचानक हवा बदलने से स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई।

CFB वेनराइट अल्बर्टा के ग्रामीण क्षेत्र में एडमोंटन से करीब 200 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित है। यह कनाडा की सबसे व्यस्त सैन्य प्रशिक्षण बेसों में से एक है, जहां लाइव-फायर एक्सरसाइज नियमित रूप से होती रहती हैं। इस बेस पर कनाडियन आर्मी और सहयोगी देशों के जवान प्रशिक्षण लेते हैं। घटना के समय जवान लातविया में तैनाती की तैयारी कर रहे थे।

स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे घटनास्थल और आसपास के रास्तों से दूर रहें ताकि आपातकालीन वाहन आसानी से आ-जा सकें। वेनराइट हेल्थ सेंटर की ओर अनावश्यक यात्रा न करने की सलाह दी गई है। रॉयल कनाडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) और संबंधित एजेंसियां कारण की गहन जांच कर रही हैं।

इस त्रासदी ने पूरे कनाडा को एकजुट कर दिया है। सोशल मीडिया और विभिन्न समुदायों से शोक संदेश आ रहे हैं। जवानों के परिवारों के साथ पूरा देश खड़ा है। प्रधानमंत्री कार्नी ने कहा, “जिन लोगों को हमने खोया, वे कनाडा की सेवा करने के लिए प्रशिक्षण ले रहे थे। अब कनाडा उनकी सेवा करेगा।”

घटना की पृष्ठभूमि में यह याद रखना जरूरी है कि सैन्य प्रशिक्षण में जोखिम हमेशा रहता है, लेकिन ऐसी प्राकृतिक और अचानक परिस्थितियों का सामना करना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। मजबूत हवाएं, सूखी घास और लाइव ट्रेनिंग का संयोजन घातक साबित हुआ। आगे की जांच से यह स्पष्ट होगा कि सुरक्षा प्रोटोकॉल में कोई कमी तो नहीं थी या मौसम संबंधी आकलन में सुधार की जरूरत है।

अभी फोकस घायल जवानों के इलाज और शहीदों के परिवारों को सहयोग देने पर है। अल्बर्टा सरकार ने कहा है कि मरीजों को सर्वोच्च स्तर की चिकित्सा सुविधाएं दी जाएंगी, जिसमें हफ्तों और महीनों तक विशेष देखभाल शामिल हो सकती है। कई अस्पतालों में कोड ऑरेंज घोषित किया गया था, जिसे बाद में हटा लिया गया।

यह घटना हमें याद दिलाती है कि सशस्त्र बलों के जवान न केवल युद्ध के मैदान में बल्कि प्रशिक्षण के दौरान भी अपनी जान की बाजी लगाते हैं। उनका बलिदान देश की सुरक्षा और स्वतंत्रता के लिए है। कनाडा के लोग इस समय शोक व्यक्त करते हुए एकजुट हैं। झंडे आधे झुके हुए हैं, और राष्ट्र उन बहादुर आत्माओं को सलाम करता है जिन्होंने अंतिम सांस तक ड्यूटी निभाई।

जांच रिपोर्ट आने तक आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें। अफवाहों से बचें और घायलों तथा परिवारों के लिए प्रार्थना करें। कनाडा की सेना और नागरिक प्रशासन मिलकर इस संकट से निपट रहे हैं। यह त्रासदी शांतिकाल में भी सतर्कता और तैयारियों की अहमियत को रेखांकित करती है।

Sajjadali Nayani ✍
Friday World Oct 19,2026

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October 18, 2026

सऊदी अरब में संकट की आहट: अंसारुल्लाह संघर्ष के बीच सुपरमार्केट में खाने-पीने की चीज़ों का होर्डिंग शुरू

सऊदी अरब में संकट की आहट: अंसारुल्लाह संघर्ष के बीच सुपरमार्केट में खाने-पीने की चीज़ों का होर्डिंग शुरू
-Friday World Oct 18,2026 

सऊदी बाजारों में दहशत: यमन अंसारुल्लाह संघर्ष के साये में नागरिकों ने खाने-पीने का स्टॉक जमा करना शुरू किया

सऊदी अरब के प्रमुख शहरों में पिछले कुछ दिनों से सुपरमार्केट और किराना दुकानों के बाहर लंबी कतारें दिखने लगी हैं। यमन में अंसारुल्लाह के साथ जारी तनाव और क्षेत्रीय संघर्ष की खबरों के बीच लोग आवश्यक वस्तुओं की कमी और महंगाई की आशंका से डरे हुए हैं। परिवार वाले चावल, आटा, तेल, चीनी, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ और पानी की बोतलें बड़ी मात्रा में खरीदकर घर ले जा रहे हैं।

रियाद, जेद्दाह और दम्माम जैसे शहरों के बड़े मॉल और सुपरमार्केट में भीड़ का आलम यह है कि कुछ जगहों पर सुरक्षाकर्मियों को भीड़ नियंत्रित करने के लिए तैनात किया गया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वे पिछले अनुभवों और क्षेत्रीय अस्थिरता को देखते हुए सावधानी बरत रहे हैं। एक गृहिणी ने बताया कि “हम नहीं चाहते कि अचानक आपूर्ति प्रभावित हो। परिवार के लिए कुछ हफ्तों का स्टॉक रखना समझदारी है।”

अंसारुल्लाह और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष ने हाल के महीनों में नई तीव्रता हासिल की है। शिपिंग मार्गों पर दबाव, आयात लागत में वृद्धि और बुनियादी ढांचे पर असर की खबरें बाजार में अनिश्चितता पैदा कर रही हैं। सऊदी अरब अपनी खाद्य आपूर्ति का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर है। जब कंटेनर लागत बढ़ती है या आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान आता है, तो आम नागरिकों में भविष्य की चिंता स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है।

अधिकारियों ने बार-बार आश्वासन दिया है कि देश में पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और सरकार सब्सिडी के जरिए कीमतों को नियंत्रित रखने का प्रयास कर रही है। फिर भी, सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों और क्षेत्रीय घटनाओं की तस्वीरों ने कई लोगों को स्टॉक जमा करने के लिए प्रेरित किया है। कुछ दुकानदारों ने बताया कि चावल और खाना पकाने के तेल की बिक्री सामान्य से दो से तीन गुना बढ़ गई है। कई परिवार एक साथ कई कार्ट भरकर सामान ले जा रहे हैं।

इस स्थिति का असर सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। छोटे कस्बों में भी स्थानीय बाजारों में गतिविधि बढ़ी है। कुछ लोगों ने कहा कि वे लंबे समय से चल रहे तनाव को देखते हुए तैयार रहना चाहते हैं। वहीं, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगर आपूर्ति श्रृंखला सामान्य रहती है और सरकारी हस्तक्षेप जारी रहता है तो बड़े पैमाने पर कमी की संभावना कम है। फिर भी, मनोवैज्ञानिक प्रभाव साफ दिख रहा है—लोग “आज खरीद लो, कल महंगा या उपलब्ध न हो” वाली मानसिकता में आ गए हैं।

अंसारुल्लाह की ओर से की गई कार्रवाइयों और सऊदी प्रतिक्रिया के चक्र ने पूरे क्षेत्र में आर्थिक दबाव बढ़ाया है। आयात पर निर्भरता, ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव और सुरक्षा संबंधी चिंताएं मिलकर आम नागरिकों के दैनिक जीवन को प्रभावित कर रही हैं। सुपरमार्केट की भीड़ सिर्फ खाने-पीने की चीज़ों तक सीमित नहीं। कई जगहों पर घरेलू उपयोग की अन्य आवश्यक वस्तुएं भी तेजी से बिक रही हैं।

सरकार की तरफ से बार-बार अपील की जा रही है कि नागरिक अफवाहों पर ध्यान न दें और जरूरत के अनुसार ही खरीद करें। अधिकारियों का दावा है कि रणनीतिक भंडार पर्याप्त हैं और आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उपाय किए जा रहे हैं। इसके बावजूद, बाजार में दिख रही भीड़ इस बात का संकेत है कि अनिश्चितता का माहौल अभी भी कायम है।

यह दृश्य क्षेत्र की नाजुक स्थिति को रेखांकित करता है। जब संघर्ष लंबे समय तक चलता है तो सिर्फ सैन्य मोर्चे पर नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में भी इसका असर दिखाई देता है। सऊदी अरब जैसे संसाधन संपन्न देश में भी आम लोग सुरक्षा और स्थिरता की तलाश में बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं।

आने वाले दिनों में स्थिति कैसे विकसित होती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। अगर तनाव कम होता है और आपूर्ति सामान्य रहती है तो शायद यह होर्डिंग का सिलसिला थम जाए। लेकिन फिलहाल सुपरमार्केट की भीड़ और भरी हुई गाड़ियां उस चिंता की तस्वीर पेश कर रही हैं जो क्षेत्रीय संघर्ष के साये में पैदा हुई है।

नागरिकों की यह प्रतिक्रिया समझ में आने वाली है। जब खबरें लगातार तनाव की बात करती हैं तो परिवार अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहते हैं। साथ ही, जिम्मेदार व्यवहार और आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा रखना भी जरूरी है ताकि अनावश्यक अफरा-तफरी न फैले।

सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा प्रणाली मजबूत मानी जाती है, फिर भी मौजूदा हालात ने एक बार फिर याद दिला दिया है कि क्षेत्रीय स्थिरता कितनी महत्वपूर्ण है। अंसारुल्लाह के साथ जारी संघर्ष सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रह गया है—उसका असर सऊदी नागरिकों के रसोईघर तक पहुंचने लगा है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World Oct 18,2026 

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October 18, 2026

शाही परिवार की चमक और सड़क की सच्चाई: अबू धाबी की सदस्य पर बच्चे की उपेक्षा का लंदन कोर्ट में दोष सिद्ध

शाही परिवार की चमक और सड़क की सच्चाई: अबू धाबी की सदस्य पर बच्चे की उपेक्षा का लंदन कोर्ट में दोष सिद्ध
-Friday World Oct 18,2026 
लंदन की सड़कों पर चमकते राजसी जीवन और नशीले पदार्थों की काली छाया का एक ऐसा किस्सा सामने आया है, जिसने दुनिया भर में चर्चा छेड़ दी है। अबू धाबी के शासक अल नहयान परिवार से विवाह संबंध रखने वाली ३२ वर्षीय महराह अल नहयान को साउथवार्क क्राउन कोर्ट ने बच्चे की देखभाल में गंभीर लापरवाही का दोषी ठहराया है। उन्होंने खुद भी अपना दोष स्वीकार कर लिया। यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की गलती नहीं, बल्कि धन-संपत्ति और जिम्मेदारी के बीच के गहरे अंतर को उजागर करता है।

जून २०२६ की १३ तारीख को पश्चिमी लंदन की एक व्यस्त सड़क पर अजीब दृश्य देखने को मिला। महराह अल नहयान रेलिंग के सहारे बेहोश पड़ी मिलीं। उनके पास एक युवक भी बेहोश अवस्था में था। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि उनके देखभाल में मौजूद तीन साल का बच्चा नंगे पैर सड़क के किनारे खेल रहा था। बच्चा स्कूटर के साथ ट्रैफिक के करीब था। राहगीरों ने जब स्थिति देखी तो तुरंत हस्तक्षेप किया और पुलिस को सूचना दी। बच्चा सड़क की ओर दौड़ भी पड़ा था, जिसे एक व्यक्ति ने रोक लिया। पुलिस पहुंचने के बाद भी महराह करीब आधे घंटे तक बेहोश रहीं। जब होश आया तो उन्होंने सवाल किया कि लोग इतनी चिंता क्यों कर रहे हैं।

कोर्ट में पेश हुए तथ्यों के अनुसार, घटना से कुछ दिन पहले महराह ने कोकीन का सेवन किया था। पुलिस को उनके बैग में ड्रग्स से जुड़ी कुछ वस्तुएं मिलीं, हालांकि उस दिन उनके शरीर पर कोई नशीला पदार्थ नहीं पाया गया। बचाव पक्ष ने कहा कि वे थकान के कारण बेहोश हुई थीं, न कि उसी दिन ड्रग्स लेने से। इसके बावजूद जज ने स्पष्ट कहा कि नशे की हालत में बच्चे को बिना सुरक्षा के सड़क पर छोड़ना लापरवाही और उपेक्षा का स्पष्ट प्रमाण है। अगर राहगीरों ने हस्तक्षेप न किया होता तो बच्चे को गंभीर चोट लग सकती थी, वह खो सकता था या किसी अजनबी के हाथ लग सकता था।

महराह अल नहयान अबू धाबी के शासक परिवार से विवाह के माध्यम से जुड़ी हैं। अल नहयान परिवार यूएई के सबसे बड़े अमीरात अबू धाबी पर शासन करता है। इस परिवार की कुल संपत्ति लगभग २५० से ३०० अरब डॉलर बताई जाती है, जो दुनिया के सबसे धनी परिवारों में शामिल है। अबू धाबी अपनी चमक-दमक, आधुनिक इमारतों और विलासिता के लिए जाना जाता है। ऐसे में इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि इतनी संपन्न पृष्ठभूमि होने के बावजूद व्यक्तिगत संघर्ष कैसे इतने खतरनाक रूप ले सकते हैं।

कोर्ट में यह भी सामने आया कि महराह को मासिक करीब आठ हजार पाउंड का भत्ता मिलता है। घटना के बाद उन्हें ड्रग्स की लत से छुटकारा पाने के लिए प्रायरी क्लिनिक (वॉकिंग, सरी) में भर्ती कराया गया। वे जुलाई से इलाज करवा रही हैं और नार्कोटिक्स एनॉनिमस जैसी बैठकों में शामिल होने की योजना बना रही हैं। बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि उन्होंने अपनी गलती स्वीकार की है और सुधार का संकल्प लिया है। “उन्होंने उस दिन एक गंभीर गलती की और वे इसे जानती हैं,” वकील ने कोर्ट को बताया।

जज जेरेमी जॉनसन केसी ने दो साल का कम्युनिटी ऑर्डर सुनाया, जिसमें पुनर्वास की शर्त शामिल है। साथ ही पांच हजार पाउंड का जुर्माना और एक हजार पाउंड अभियोजन खर्च का आदेश दिया गया। कुल मिलाकर करीब साढ़े छह हजार पाउंड (लगभग सात लाख से अधिक भारतीय रुपये) का आर्थिक दंड। यह फैसला मंगलवार (अक्टूबर २०२६ के मध्य) को सुनाया गया।

यह मामला कई स्तरों पर सोचने पर मजबूर करता है। एक तरफ शाही परिवार की अपार संपत्ति और विलासिता, दूसरी तरफ एक छोटे बच्चे की सुरक्षा का सवाल। लंदन जैसे शहर में जहां कानून सबके लिए समान है, वहां पद और पैसा किसी को जिम्मेदारी से मुक्त नहीं कर सकता। राहगीरों की सतर्कता ने बच्चे की जान बचाई। यह घटना नशीले पदार्थों के खतरे और अभिभावकीय कर्तव्य की याद दिलाती है।

महराह अल नहयान अब पुनर्वास प्रक्रिया में हैं। कोर्ट ने उन्हें सुधार का मौका दिया है। लेकिन इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि धन और पद कितने भी बड़े हों, व्यक्तिगत कमजोरियां किसी को भी सड़क पर ला सकती हैं। बच्चे की सुरक्षा हर परिस्थिति में प्राथमिकता होनी चाहिए। लंदन की इस अदालत ने साफ संदेश दिया है कि कानून के सामने सब बराबर हैं।

यह कहानी सिर्फ एक अदालती फैसले की नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, संघर्ष और सुधार की संभावना की भी है। अबू धाबी की चमक-दमक से दूर लंदन की सड़क पर जो कुछ हुआ, वह कई परिवारों और समाज के लिए सबक बन सकता है

Sajjadali Nayani ✍
Friday World Oct 18,2026 


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October 18, 2026

चीन की सोने की खरीद: क्या अमेरिका से टकराव की तैयारी चल रही है?

चीन की सोने की खरीद: क्या अमेरिका से टकराव की तैयारी चल रही है?
-Friday World Oct 18,2026 
चीन लंबे समय से दूरदर्शिता के साथ योजना बनाता आया है। वह धीरे-धीरे ऐसे कदम उठाता है जिससे उसे किसी पर निर्भर न रहना पड़े। हाल के वर्षों में उसने सोने की भारी खरीद शुरू कर दी है। यह महज आर्थिक फैसला नहीं, बल्कि एक रणनीतिक कदम लगता है।

२०२२ में रूस द्वारा यूक्रेन पर हमला करने के बाद पश्चिमी देशों ने रूसी सेंट्रल बैंक की विदेश में जमा लगभग ३०० अरब डॉलर की संपत्ति जब्त कर ली थी। इस घटना ने पूरी दुनिया को एक सबक सिखाया—विदेश में रखी संपत्ति कितनी जल्दी हाथ से निकल सकती है। चीन ने इस घटना से सीख ली और सोने की खरीद तेज कर दी। सोना ऐसा परिसंपत्ति है जिसका आसानी से नाश नहीं होता, वह कहीं भी और कभी भी काम आ सकता है। यह जोखिम प्रबंधन का सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है। फ्रैंकफर्ट (जर्मनी) स्थित कॉमर्ज बैंक के कमोडिटी रिसर्च प्रमुख थू-बैन-गुयेन का कहना है कि यूक्रेन युद्ध के बाद रूस की संपत्ति जब्त होने से चीन सतर्क हो गया है। वह जो कर रहा है, उसे वे जोखिम प्रबंधन के रूप में देखते हैं।

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने सितंबर में लगातार २३वें महीने भी सोने की खरीद जारी रखी। उस महीने उसने २३ टन सोना खरीदा, जो एक माह में उसकी सबसे बड़ी खरीद में से एक रही। इस खरीद के बाद चीन का सोने का भंडार लगभग २,४१० टन हो गया। अक्टूबर २०२३ के बाद यह उसकी सबसे बड़ी मासिक खरीद थी।

विश्लेषक इस प्रवृत्ति को देखकर अनुमान लगा रहे हैं कि चीन अमेरिका के साथ संभावित टकराव के लिए पहले से तैयारी कर रहा है। यदि टकराव होता है तो अमेरिका और अन्य पश्चिमी देश उसकी अन्य संपत्तियों पर कार्रवाई कर सकते हैं, लेकिन सोना उसके अपने भंडारों में सुरक्षित रहेगा। इससे अतिरिक्त मुश्किलें कम होंगी।

बात सीधी है—चीन को यकीन हो चला है कि अमेरिका के साथ टकराव की संभावना बनी हुई है, इसलिए वह पहले से मजबूत नींव तैयार कर रहा है। सोना सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि आर्थिक स्वतंत्रता और रणनीतिक सुरक्षा का प्रतीक बन गया है। चीन की यह चाल विश्व अर्थव्यवस्था और भू-राजनीति दोनों पर गहरा असर डाल सकती है। आने वाले समय में सोने की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा व्यवस्था पर भी इसके प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।

चीन की यह रणनीति बताती है कि वह भविष्य की अनिश्चितताओं के लिए तैयार रहना चाहता है। सोने का बढ़ता भंडार उसकी आर्थिक ताकत और आत्मनिर्भरता को और मजबूत बना रहा है।

Sajjadali Nayani ✍
Friday World Oct 18,2026 


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Saturday, 17 October 2026

October 17, 2026

भारत मे काल-चक्र िन: दुर्गा पूजा के उत्सव में भगदड़ और ट्रक हादसे ने छीन ली दर्जनों जानें

भारत मे काल-चक्र िन: दुर्गा पूजा के उत्सव में भगदड़ और ट्रक हादसे ने छीन ली दर्जनों जानें
-Friday World Oct 18,2026 
17-18 अक्टूबर 2026 को भारत ने एक बार फिर त्योहारों के मौसम में दर्दनाक हादसों का सामना किया। पश्चिम बंगाल के कोलकाता में दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ और मध्य प्रदेश के ग्वालियर में बेकाबू ट्रक ने श्रद्धालुओं को कुचल दिया। इन दोनों घटनाओं में कुल मिलाकर 30 से अधिक लोगों की जान चली गई और दर्जनों घायल हुए। उत्सव का आनंद शोक में बदल गया।

कोलकाता के उत्तर भाग में स्थित चोरबागान सर्वोजनिन दुर्गा पूजा पंडाल (सारादा पार्क) में महा सप्तमी की शाम करीब 7:40 बजे यह हादसा हुआ। भारी बारिश और विशाल भीड़ के बीच एग्जिट गेट के पास भगदड़ मच गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, बारिश शुरू होने पर बाहर खड़े लोग अंदर की ओर दौड़े, जबकि अंदर के लोग बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे। भीड़ के दबाव से पंडाल का एक हिस्सा प्रभावित हुआ और कई लोग कुचल गए या दम घुटने से मारे गए।

मृतकों की संख्या 19 पहुंच गई। इनमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे शामिल थे। करीब 25 से 35 लोग घायल हुए, जिन्हें कोलकाता मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल ले जाया गया। कई की हालत गंभीर बताई गई। पुलिस, फायर ब्रिगेड और डिजास्टर मैनेजमेंट टीमों ने राहत कार्य किया। पंडाल को तुरंत बंद कर दिया गया।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि 17 लोगों की मौके पर मौत हो गई और दो अस्पताल में। उन्होंने मृतकों के परिवारों को 25 लाख रुपये मुआवजा और सरकारी नौकरी देने की घोषणा की। घायलों को 5 लाख रुपये और मुफ्त इलाज का आश्वासन दिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संवेदना व्यक्त की और पीएम रिलीफ फंड से 2 लाख रुपये मृतकों के परिजनों तथा 50 हजार रुपये घायलों को देने की घोषणा की। पुलिस ने आयोजकों सहित 12 लोगों को हिरासत में लिया। विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की गई है, जिसकी अध्यक्षता हाईकोर्ट के न्यायाधीश करेंगे। कई अन्य पंडालों में सुरक्षा ऑडिट शुरू किया गया है।

इसी बीच मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास एक और दिल दहला देने वाली घटना घटी। 18 अक्टूबर की सुबह करीब 1:30 बजे धान से लदा एक ट्रक छिनोर दिशा से आ रहा था। भारी वाहनों के लिए प्रतिबंधित ढलान वाली सड़क पर ट्रक पुलिस बैरिकेड तोड़कर बेकाबू हो गया। वह श्रद्धालुओं पर चढ़ गया, कई को कुचल दिया और मंदिर की बाहरी दीवार व गेट से टकरा गया।

इस हादसे में कम से कम 13-14 लोगों की मौत हो गई (कुछ रिपोर्ट्स में 14-15 तक)। करीब 39 लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया, जिनमें कई गंभीर रूप से घायल हैं। दो पुलिसकर्मी भी घायल हुए। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिवारों को 4 लाख रुपये, गंभीर घायलों को 2 लाख और अन्य घायलों को 50 हजार रुपये मुआवजे की घोषणा की।

ये दोनों घटनाएं त्योहारों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। दुर्गा पूजा और नवरात्रि जैसे अवसरों पर लाखों श्रद्धालु निकलते हैं। भीड़ प्रबंधन, पंडालों की संरचनात्मक मजबूती, एंट्री-एग्जिट रूट की स्पष्टता, बारिश जैसे अप्रत्याशित मौसम के लिए तैयारी और भारी वाहनों पर नियंत्रण—इनमें से किसी एक की कमी भी जानलेवा साबित हो सकती है।

चोरबागान पंडाल इस साल ‘बेस्ट ऑफ द बेस्ट’ श्रेणी में चुना गया था। फिर भी भीड़ और बारिश ने त्रासदी को जन्म दिया। ग्वालियर में प्रतिबंधित सड़क पर ट्रक कैसे पहुंच गया, इसकी जांच चल रही है। परिवारों का आरोप है कि राहत कार्यों में देरी हुई।

भारत में हर साल त्योहारों के दौरान ऐसी घटनाएं दोहराई जाती हैं। चाहे भगदड़ हो, पंडाल गिरना हो या सड़क हादसे—मानवीय लापरवाही और अपर्याप्त व्यवस्था बार-बार जिम्मेदार ठहराई जाती है। सरकारें मुआवजा घोषित करती हैं, जांच टीम बनाती हैं, लेकिन स्थायी समाधान की जरूरत है।

पंडाल समितियों को सख्त सुरक्षा मानदंडों का पालन करना चाहिए। भीड़ की क्षमता से अधिक लोगों को प्रवेश नहीं देना चाहिए। एग्जिट रूट चौड़े और साफ होने चाहिए। मौसम की चेतावनी पर तुरंत कार्रवाई हो। मंदिरों और पूजा स्थलों के आसपास भारी वाहनों पर सख्ती हो। पुलिस और प्रशासन को बेहतर समन्वय रखना चाहिए।

ये हादसे सिर्फ आंकड़े नहीं हैं। हर मौत के पीछे एक परिवार है, जिसके सपने टूट गए। बच्चे, माता-पिता, भाई-बहन—जो उत्सव मनाने निकले थे, वापस नहीं लौटे। कोलकाता में बिखरे जूते, ग्वालियर में क्षतिग्रस्त दीवार—ये दृश्य दिल को छलनी कर देते हैं।

देश को इस काले दिन से सबक लेना होगा। त्योहार खुशी के अवसर हैं, शोक के नहीं। सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए तो ऐसी त्रासदियों से बचा जा सकता है। मृतकों की आत्मा को शांति मिले और घायल जल्द स्वस्थ हों। परिवारों के साथ पूरा देश खड़ा है।

Sajjadali Nayani ✍
Friday World Oct 18,2026 

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