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Monday, 31 August 2026

August 31, 2026

प्रचंड युद्ध की तैयारी में चीन! खतरनाक वॉर-प्लान रचा, पूरे देश को बनाया हथियार - भारत पर क्या होगा असर?

प्रचंड युद्ध की तैयारी में चीन! खतरनाक वॉर-प्लान रचा, पूरे देश को बनाया हथियार - भारत पर क्या होगा असर?
-Friday World 1 Sep 2026
नई दिल्ली: चीन अब सिर्फ एक छोटी लड़ाई नहीं, बल्कि लंबे और प्रचंड युद्ध की तैयारी कर रहा है। बीजिंग ने 28 अगस्त को अपना नया संशोधित राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी कानून (National Defence Mobilization Law) पास किया है, जो 1 अक्टूबर से लागू होगा। यह 2010 के बाद 16 साल में पहला बड़ा बदलाव है और इसके 14 चैप्टर और 82 आर्टिकल चीन को पूरी तरह युद्ध-कालीन देश में बदलने का ब्लू-प्रिंट हैं। 8e33

क्या है नया खतरनाक कानून?
यह कानून सिर्फ सेना तक सीमित नहीं है। अब चीन का हर नागरिक, हर फैक्ट्री और हर टेक कंपनी PLA की युद्ध मशीन का हिस्सा बन सकती है।

5 बड़े प्रावधान जो दुनिया को डरा रहे हैं:

 1. हर नागरिक सैनिक: 18 से 60 साल के पुरुष और 18 से 55 साल की महिलाओं को युद्ध के समय राष्ट्रीय रक्षा सहायता कर्तव्य निभाना अनिवार्य होगा। वे सीधे मोर्चे पर नहीं जाएंगे, बल्कि हथियार-सामान पहुंचाने, ट्रांसपोर्ट और आंतरिक सुरक्षा का काम करेंगे। 8e33

 2. निजी संपत्ति पर कब्जा: सरकार को अधिकार होगा कि वह किसी भी नागरिक की गाड़ी, उपकरण, बिल्डिंग और संसाधन को तुरंत युद्ध के लिए अधिग्रहित कर ले। मना करने पर कानूनी कार्रवाई और सजा होगी। 8e33

 3. टेक कंपनियों पर शिकंजा: कानून में साफ लिखा है कि एडवांस टेक्नोलॉजी, डेटा, साइबर सिक्योरिटी और AI को राष्ट्रीय रक्षा में लगाया जाएगा। मतलब Alibaba, Huawei जैसी कंपनियों का डेटा और नेटवर्क सीधे सेना के कंट्रोल में आ जाएगा।

 4. उद्योग और ट्रांसपोर्ट पर कंट्रोल: रेलवे स्टेशन, बस टर्मिनल, पोर्ट, एयरपोर्ट और सड़कों पर सेना को प्राथमिकता मिलेगी। जरूरत पड़ने पर सरकार प्रमुख उद्योगों की निगरानी और नियंत्रण भी अपने हाथ में ले सकती है।

 5. आर्थिक-सामाजिक क्षेत्र भी युद्ध का हिस्सा: नई परिभाषा के अनुसार रक्षा नीति अब सिर्फ सैनिकों तक सीमित नहीं, बल्कि संप्रभुता, आर्थिक, सामाजिक, औद्योगिक और डेटा क्षेत्र को भी कवर करती है।

ताइवान पर हमले की तैयारी?
विश्लेषकों का मानना है कि यह कानून ताइवान पर कब्जे के लिए लंबे युद्ध की पूर्व तैयारी है। रिपोर्ट के अनुसार बीजिंग सिर्फ युद्ध शुरू करने की नहीं, बल्कि उसे महीनों तक चलाने की क्षमता बनाना चाहता है। चीन की नेशनल पीपुल्स कांग्रेस ने भी कहा है कि यह कानून "देश की संप्रभुता और एकीकरण को खतरे में डालने वाले खतरों से लड़ने के लिए बहुत जरूरी है।"

भारत पर क्या असर होगा?
भारत के लिए यह चिंता की बात है। अगर चीन ताइवान मोर्चे पर उलझता है तो वह LAC पर भी दबाव बढ़ा सकता है। चीन की पूरी सिविल-मिलिट्री फ्यूजन रणनीति का मतलब है कि उसकी फैक्ट्रियां रातों-रात ड्रोन और मिसाइल के पार्ट्स बनाने लगेंगी। भारत को भी अपनी सप्लाई चेन, सेमीकंडक्टर और लॉजिस्टिक्स को युद्ध स्तर पर तैयार रखना होगा।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World 1 Sep 2026

#China #WarPreparation #NationalDefenceLaw #Taiwan #IndiaChina #PLA #Geopolitics #Beijing #WorldWar #MilitaryMobilization
August 31, 2026

नेपाल में बाढ़ के बीच चमत्कार! डूबी बैंक के लॉकर से निकला 50 करोड़ का सोना और डेढ़ करोड़ कैश, 8 घंटे तक चला रेस्क्यू

नेपाल में बाढ़ के बीच चमत्कार! डूबी बैंक के लॉकर से निकला 50 करोड़ का सोना और डेढ़ करोड़ कैश, 8 घंटे तक चला रेस्क्यू
-Friday World 31 Aug 2026
नुवाकोट / त्रिशूली: नेपाल में तबाही मचा रही भोटेकोशी और त्रिशूली नदी की बाढ़ के बीच एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। नुवाकोट के त्रिशूली धुंगे में स्थित कृषि विकास बैंक की शाखा जो 26 अगस्त की बाढ़ में पूरी तरह डूब गई थी, उसी के तिजोरी से पुलिस ने 50 करोड़ रुपये का सोना और 1.5 करोड़ रुपये नकद बरामद किया है।

नेपाल पुलिस के मुताबिक रविवार को 8 घंटे के लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद यह खजाना सुरक्षित निकालकर दूसरी सुरक्षित जगह पर शिफ्ट किया गया है। साथ ही बैंक के कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी बचाए गए हैं। पुलिस ने इस ऑपरेशन का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर किया है।

कहां है ये बैंक?
ये शाखा नुवाकोट जिले के त्रिशूली में भोटेकोशी नदी के किनारे स्थित है। 26 अगस्त को आए जलप्रलय ने बैंक को पूरी तरह से मलबे और कीचड़ में दबा दिया था। पहले आशंका थी कि सोना-चांदी और कैश बाढ़ के तेज बहाव में बह गया होगा, लेकिन पानी उतरने के बाद जब तलाशी शुरू हुई तो लॉकर अंदर ही दबे मिले।

दूसरी घटना ने भी उड़ाए होश
इसी बाढ़ के दौरान एक और सनसनीखेज मामला धादिंग में सामने आया था। रसुवा से बाढ़ में बहकर आया एक बैंक लॉकर त्रिशूली नदी के किनारे बेलखूखोला में मिला था। स्थानीय लोगों ने उसे तोड़कर करीब 92 लाख नेपाली रुपये (लगभग 58 लाख भारतीय रुपये) लूट लिए थे। पुलिस ने इस मामले में 29 लोगों को गिरफ्तार किया है।

वहीं नारायणी नदी में एक और दिल दहलाने वाली घटना में बाढ़ में बही एक महिला के शव से सोने की झुमकी चुराने के आरोप में 2 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

नेपाल में हालात गंभीर
नेपाल के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार इस बाढ़ में अब तक 626 लोगों की मौत हो चुकी है और 2426 लोग लापता हैं, जिनमें 517 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। रसुवा और नुवाकोट सबसे ज्यादा प्रभावित जिले हैं। भारतीय तीर्थयात्रियों सहित कई लोग अभी भी फंसे हुए हैं।

पुलिस और आर्मी की टीमें लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। बाढ़ग्रस्त बैंक से इतनी बड़ी मात्रा में सोना और नकदी मिलने के बाद अब पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 31 Aug 2026

#NepalFlood #Nuwakot #Trishuli #BankLocker #GoldRecovered #NepalPolice #FloodRescue #BhotekoshiRiver #NepalNews #Disaster
August 31, 2026

लारक आइलैंड पर अमेरिकी बमबारी के बाद भड़का ईरान - जॉर्डन और UAE पर मिसाइल-ड्रोन से पलटवार, होर्मुज में जंग तेज

लारक आइलैंड पर अमेरिकी बमबारी के बाद भड़का ईरान - जॉर्डन और UAE पर मिसाइल-ड्रोन से पलटवार, होर्मुज में जंग तेज
- Friday World 31 Aug 2026

नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच 6 महीने से चल रहा युद्ध एक बार फिर भड़क गया है। अमेरिका ने 30 अगस्त 2026 को होर्मुज स्ट्रेट में ईरान के लारक आइलैंड पर एयरस्ट्राइक की, जिसके जवाब में ईरान ने जॉर्डन और UAE में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर दिए। df00

लारक आइलैंड पर क्या हुआ?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स के अनुसार IRGC के लड़ाके लारक आइलैंड पर रॉकेट लॉन्चर से समुद्री माइन बिछाने की तैयारी कर रहे थे। अमेरिका ने इसे शिपिंग के लिए बड़ा खतरा बताया और "लिमिटेड, प्रिसाइज एक्शन" में दो लॉन्चरों को तबाह कर दिया। यह एक महीने में ईरान पर पहला अमेरिकी हमला था। 

ईरानी मीडिया के मुताबिक हमले में कई सैनिक और नागरिक शहीद और घायल हुए हैं। IRGC ने इसे खुला आक्रमण बताया और बदले की कसम खाई।

ईरान का पलटवार - ऑपरेशन "Punishment of the Aggressor"
हमले के कुछ ही घंटों बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू की।

 1. जॉर्डन पर हमला: IRGC ने कहा कि उसने जॉर्डन में किंग हुसैन और अल-अजरक एयरबेस पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जहां अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। जॉर्डन की सेना ने कहा कि उसने 8 मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर दिया जो उसकी हवाई सीमा में घुसी थीं। 

 2. UAE पर ड्रोन हमला: ईरान की सेना ने कहा कि उसने दुबई के अल-मिनहाद एयरबेस पर दर्जनों विस्फोटक ड्रोन दागे। UAE के रक्षा मंत्रालय ने एक ड्रोन को अपनी समुद्री सीमा पर इंटरसेप्ट करने की पुष्टि की, लेकिन एयरबेस पर हमले के दावे को खारिज कर दिया। UAE ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया। 

ईरान ने यह भी दावा किया कि उसने होर्मुज में एक अमेरिकी MQ-9 Reaper ड्रोन मार गिराया और एक सुपरटैंकर माइन से टकराकर आग में फंस गया, हालांकि अमेरिका ने इन दावों को गलत बताया।

तेल के दाम में आग
इस टकराव का असर तुरंत तेल बाजार पर पड़ा। सोमवार को ब्रेंट क्रूड 2.67% बढ़कर $90.45 प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो 25 अगस्त के बाद का सबसे बड़ा उछाल है। 

ट्रंप बोले - "हिट देम हार्ड"
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को कहा, "We're going to hit them hard, there will be a response"। अमेरिका ने ईरान पर Operation Economic Outcast के तहत नए सेकेंडरी सेंक्शन लगाने का ऐलान भी किया है। 

विशेषज्ञों का कहना है कि यह हमला दिखाता है कि ईरान आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद सैन्य रूप से जवाब देने की क्षमता रखता है। 6 महीने से बंद होर्मुज स्ट्रेट अब इस युद्ध का सबसे बड़ा सेंटर बन गया है, जहां से दुनिया का 20% तेल गुजरता है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 31 Aug 2026

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August 31, 2026

जूते की नोक पर अमेरिका की इज्जत! ईरान ने दिन में दिखाए तारे, 6 महीने से जारी है ईरान-अमेरिका महायुद्ध का विजेता ईरान।

जूते की नोक पर अमेरिका की इज्जत! ईरान ने दिन में दिखाए तारे, 6 महीने से जारी है ईरान-अमेरिका महायुद्ध का विजेता ईरान।
-Friday World 31 Aug 2026

तेहरान / वाशिंगटन: अमेरिका जैसी महाशक्ति को ईरान ने घुटनों पर ला दिया है। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल द्वारा शुरू किया गया युद्ध आज 6 महीने पूरे कर चुका है, लेकिन ईरान न झुका है और न ही टूटा है। उल्टा ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट बंद करके पूरी दुनिया की तेल सप्लाई और अमेरिकी इकोनॉमी को हिला कर रख दिया है। 

ताजा खबर के मुताबिक 30 अगस्त को अमेरिका ने लारक आइलैंड पर ईरान के रॉकेट लॉन्चरों पर हमला किया, जो एक महीने में पहला अमेरिकी हमला था। इसके जवाब में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागीं। 

होर्मुज बना ईरान का हथियार
युद्ध का सबसे बड़ा मोर्चा अब मिसाइलों का नहीं, तेल का बन गया है। ईरान ने दुनिया के 20% तेल ले जाने वाला होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह बंद कर दिया है। पहले जहां रोज 20 मिलियन बैरल तेल गुजरता था, अब सिर्फ 5 मिलियन बैरल ही निकल पा रहा है। ईरान की चेतावनी है - अगर आर्थिक युद्ध जारी रहा तो खाड़ी से एक बूंद तेल भी नहीं निकलने देगा। 3880

दूसरी तरफ अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की नाकाबंदी और "सबसे कड़ी आर्थिक कार्रवाई" का ऐलान किया है। अमेरिकी वित्त मंत्री ने कहा है "You are either with us or against us"। लेकिन चीन और भारत जैसे देश अब भी ईरान से तेल खरीद रहे हैं, जिससे अमेरिका का दबाव फेल होता दिख रहा है।

क्यों नहीं जीत पा रहा अमेरिका?
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ने युद्ध की शुरुआत में ईरान के परमाणु प्रोग्राम को खत्म करने और सत्ता पलटने का लक्ष्य रखा था, लेकिन 6 महीने बाद युद्ध एक महंगे गतिरोध में फंस गया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा है कि "ईरान इस युद्ध का विजेता है" और दबाव की नीति काम नहीं करेगी। 

IRGC का दावा है कि अमेरिका के 30-40 युद्धपोत जो पहले खाड़ी में थे, अब एक भी नहीं बचा है, और अमेरिकी हथियारों का भंडार खाली हो रहा है।

ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपनी नाकाबंदी नहीं हटाता, तब तक कोई समझौता नहीं होगा। जूते की नोक पर अमेरिका की धमकियों को रखकर ईरान ने साबित कर दिया कि वह झुकने वाला नहीं है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World 31 Aug 2026

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August 31, 2026

NSA अजीत डोभाल का 2014 वाला बयान फिर वायरल - बोले थे, ISI के लिए जासूसी में मुसलमानों से ज्यादा हिंदू पकड़े गए, 4000 में से 20% भी मुस्लिम नहीं

NSA अजीत डोभाल का 2014 वाला बयान फिर वायरल - बोले थे, ISI के लिए जासूसी में मुसलमानों से ज्यादा हिंदू पकड़े गए, 4000 में से 20% भी मुस्लिम नहीं
-Friday World 31 Aug 2026
                    प्रतीकात्मक तस्वीर 
नई दिल्ली: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल का एक पुराना वीडियो एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। इस 35 सेकंड के क्लिप में उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता है कि 1947 से अब तक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के साथ मिलीभगत और जासूसी के 4,000 से अधिक मामले सामने आए हैं, और इनमें पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वालों में 20% से भी कम मुसलमान थे। ISI ने मुसलमानों की तुलना में अधिक हिंदुओं को भर्ती किया है।

कब और कहां दिया था यह बयान?

फैक्ट-चेक संस्थाओं Alt News, BOOM और The Quint की जांच के अनुसार यह वीडियो डीपफेक नहीं है। यह वीडियो 20 मार्च 2014 को Australia India Institute के यूट्यूब चैनल पर अपलोड किए गए एक 1 घंटे 17 मिनट के लेक्चर से लिया गया है। डोभाल ने यह व्याख्यान 11 मार्च 2014 को "The Challenge of Global Terrorism" विषय पर दिया था, यानी NSA बनने से पहले।

वीडियो में 1:04:00 मिनट पर डोभाल कहते हैं, "आपको एक छोटी सी बात बताता हूं... भारत में इंटेलिजेंस के काम के लिए ISI ने जितने लोगों को भर्ती किया है, उनमें मुसलमानों से ज्यादा हिंदू हैं। 1947 से अब तक 4,000 से ज्यादा मामले हुए हैं, शायद 20 प्रतिशत भी मुसलमान नहीं होंगे।"

क्यों वायरल हुआ दोबारा?

पिछले साल 10 नवंबर को दिल्ली के लाल किले के पास हुए आतंकी धमाके के बाद जब सांप्रदायिक नैरेटिव तेज हुआ, तो यह क्लिप उन नैरेटिव को काउंटर करने के लिए शेयर की जाने लगी।

इसके वायरल होने के बाद डोभाल ने CNN-News18 को बताया था कि यह वीडियो डीपफेक है और उन्होंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया। लेकिन बाद में रिवर्स इमेज सर्च में मूल वीडियो मिल गया, जो डीपफेक टेक्नोलॉजी के आम होने से कई साल पहले का है।

बयान का पूरा संदर्भ क्या था?

डोभाल इस लेक्चर में भारत की आंतरिक सुरक्षा रणनीति पर बात कर रहे थे। उन्होंने कहा था कि इस्लामिक आतंकवाद के पीड़ितों में 90% मुसलमान हैं और 10% गैर-मुस्लिम। उन्होंने उलेमाओं से बात करने, उन्हें साथ लेकर संयुक्त रणनीति बनाने और मुस्लिम समुदाय को साथ लेकर चलने की बात कही थी। उन्होंने कहा था, "We will carry the Muslims with us and we will make it a great country."

इस बयान से यह संदेश देने की कोशिश थी कि जासूसी या आतंकवाद को किसी एक धर्म से जोड़ना गलत अवधारणा है।


तथ्यों के अनुसार यह बयान अजीत डोभाल ने ही 2014 में दिया था और यह डीपफेक नहीं है। यह आंकड़ा उनके अनुभव और इंटेलिजेंस ब्यूरो में लंबे कार्यकाल पर आधारित था।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World 31 Aug 2026

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August 31, 2026

झारखंड कांग्रेस में बड़ा एक्शन: मुस्लिम समुदाय पर अभद्र टिप्पणी करने वाले 2 नेताओं पर गिरी गाज, पार्टी से निकाला

झारखंड कांग्रेस में बड़ा एक्शन: मुस्लिम समुदाय पर अभद्र टिप्पणी करने वाले 2 नेताओं पर गिरी गाज, पार्टी से निकाला
-Friday World 31 Aug 2026
रांची: झारखंड में कांग्रेस पार्टी ने अनुशासनहीनता और सांप्रदायिक बयानबाजी पर जीरो टॉलरेंस का सख्त संदेश दिया है। मुस्लिम समुदाय पर विवादित और अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप में पार्टी के दो पदाधिकारियों को प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।

निष्कासित नेताओं में झारखंड प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष अभिलाष साहू और प्रदेश को-ऑर्डिनेटर अमरेंद्र सिंह शामिल हैं। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने एक लाइव वीडियो के दौरान मुस्लिम समुदाय का उपहास उड़ाया, गाली-गलौज की और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हवाला देते हुए भड़काऊ बातें कहीं।

यह वीडियो ईरबा में हुए सड़क जाम के दौरान का बताया जा रहा है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया था। वीडियो वायरल होने के बाद पार्टी के अंदर और बाहर तीखी प्रतिक्रिया हुई थी।

अनुशासन समिति ने लिया संज्ञान

मामले को गंभीरता से लेते हुए झारखंड प्रदेश कांग्रेस अनुशासन समिति ने दोनों नेताओं को तलब किया था। सुनवाई के बाद समिति ने माना कि दोनों नेताओं का यह कृत्य कांग्रेस की विचारधारा, धर्मनिरपेक्ष मूल्यों और संविधान के सिद्धांतों के पूरी तरह खिलाफ है।

निष्कासन पत्र में स्पष्ट लिखा है, "ईरबा सड़क जाम के दौरान वीडियो वायरल मामले में सुनवाई के बाद झारखंड प्रदेश अनुशासन समिति के निर्णयानुसार आप दोनों को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से तुरंत प्रभाव से सस्पेंड किया जाता है।"

पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि कांग्रेस हमेशा से सभी धर्मों और समुदायों के सम्मान की बात करती है। किसी भी नेता को नफरत फैलाने वाली भाषा का इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी जा सकती, चाहे वह कितना भी बड़ा पद क्यों न रखता हो।

कड़ा संदेश

इस कार्रवाई को झारखंड की राजनीति में कांग्रेस की छवि को साफ-सुथरा रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी आलाकमान ने भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी इस तरह की बयानबाजी करने वाले किसी भी नेता को बख्शा नहीं जाएगा।

वहीं इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। सत्तारूढ़ गठबंधन में कांग्रेस की इस सख्ती को सराहा भी जा रहा है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 31 Aug 2026

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August 31, 2026

हिमाचल पर मंडरा रहा है नेपाल जैसा खतरा: 67 खतरनाक झीलें चिन्हित, 4 झीलें कभी भी मचा सकती हैं तबाही

हिमाचल पर मंडरा रहा है नेपाल जैसा खतरा: 67 खतरनाक झीलें चिन्हित, 4 झीलें कभी भी मचा सकती हैं तबाही
- Friday World 31 Aug 2026
नेपाल में हाल ही में भोटेकोशी नदी में ग्लेशियर टूटने से आई अचानक बाढ़ ने जो तबाही मचाई, उससे पूरी दुनिया सहम गई है। वैज्ञानिकों की चेतावनी है कि ऐसी ही हिमालयी त्रासदी भारत में भी हो सकती है। इसी कड़ी में हिमाचल प्रदेश में बड़ी कार्रवाई शुरू हुई है।

67 झीलें खतरनाक घोषित

हिमाचल प्रदेश के डिजास्टर मैनेजमेंट विभाग के स्पेशल सेक्रेटरी पुष्पेंद्र राणा ने जानकारी दी है कि राज्य में 67 ग्लेशियल झीलों को खतरनाक के तौर पर चिन्हित किया गया है। ये सभी झीलें 10 हेक्टेयर से बड़ी हैं और अधिकतर अति दुर्गम और ऊंचाई वाले इलाकों में स्थित हैं। इन झीलों की पहचान सैटेलाइट इमेजरी और वैज्ञानिक डेटा के आधार पर की गई है।

4 झीलें सबसे ज्यादा खतरनाक, अर्ली वार्निंग सिस्टम लगना शुरू

इन 67 में से 4 झीलें ऐसी हैं जो नेपाल जैसी तबाही ला सकती हैं। ये चारों झीलें किन्नौर और लाहौल-स्पीति जिलों में स्थित हैं। इनमें पानी का स्तर लगातार बढ़ रहा है और ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे झील की दीवार कभी भी टूट सकती है।

इसी खतरे को देखते हुए सरकार ने इन चार झीलों पर अर्ली वार्निंग सिस्टम (EWS) लगाने का काम शुरू कर दिया है। इसमें वाटर लेवल सेंसर, ऑटोमेटिक सायरन और सैटेलाइट मॉनिटरिंग शामिल है, ताकि बाढ़ आने से पहले ही नीचे बसे गांवों को खाली कराया जा सके।

क्या होता है GLOF?

इसे वैज्ञानिक भाषा में GLOF - ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड कहा जाता है। जब पहाड़ों पर बनी प्राकृतिक झील में बर्फ पिघलने से बहुत ज्यादा पानी भर जाता है और उसकी कच्ची दीवार टूट जाती है, तो सारा पानी एक साथ नीचे की तरफ तबाही बनकर आता है। इसमें भारी बारिश, भूकंप या लैंडस्लाइड ट्रिगर का काम करते हैं।

सोलन में लैंडस्लाइड से टॉय ट्रेन ठप

इसी बीच जलवायु परिवर्तन का असर अभी से दिख रहा है। रविवार को हिमाचल के सोलन जिले में भारी बारिश के कारण कोटी और गुम्मान स्टेशनों के बीच रेलवे ट्रैक धंस गया। इसके कारण यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल 96 किमी लंबी शिमला-कालका नैरो गेज लाइन पर 10 टॉय ट्रेनें रद्द करनी पड़ीं। यह ट्रैक दुनिया भर के पर्यटकों में बेहद लोकप्रिय है।

यह घटना एक छोटी चेतावनी है कि पहाड़ों पर मौसम अब पहले जैसा नहीं रहा। 67 झीलों की पहचान समय रहते कर ली गई है, लेकिन असली चुनौती अब उन पर लगातार नजर रखने और नीचे रहने वाले लोगों को सुरक्षित करने की है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 31 Aug 2026

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