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Saturday, 6 June 2026

June 06, 2026

ममता बनर्जी की बड़ी भूल सुधार! TMC में बगावत के बाद 'भतीजे' अभिषेक का कद घटाया — दो नए संयुक्त महासचिवों की नियुक्ति से संगठन में नया संतुलन

ममता बनर्जी की बड़ी भूल सुधार! TMC में बगावत के बाद 'भतीजे' अभिषेक का कद घटाया — दो नए संयुक्त महासचिवों की नियुक्ति से संगठन में नया संतुलन
- Friday World 6 Jun 2026
कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस (TMC) में पिछले कई हफ्तों से चल रहे अभूतपूर्व आंतरिक विद्रोह के बीच पार्टी सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने संगठन में व्यापक बदलाव करके शिस्त बहाल करने और असंतोष को शांत करने का प्रयास किया है। 2026 के विधानसभा चुनावों में भाजपा के हाथों मिली करारी हार के बाद पार्टी में फूट साफ दिख रही थी, जिसमें ज्यादातर गुस्सा ममता के भतीजे और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली पर केंद्रित था।

ममता बनर्जी ने अब 'भाईपो' के एकछत्र दबदबे को कम करते हुए दो अनुभवी नेताओं — डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन— को राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव (National Joint Secretaries) बनाकर अभिषेक के साथ काम करने को कहा है। यह फैसला पार्टी के राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक के बाद लिया गया, जिसमें ममता ने स्पष्ट संदेश दिया कि अब कोई भी एक व्यक्ति अकेले फैसले नहीं ले पाएगा।

 बगावत की पृष्ठभूमि: चुनावी हार और 'अभिषेक फोबिया'

2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में TMC को भारी हार का सामना करना पड़ा। भाजपा ने 208 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि TMC मात्र 80 सीटों तक सिमट गई। इस हार के बाद पार्टी के अंदर लंबे समय से दबा असंतोष फूट पड़ा। ज्यादातर नेता और कार्यकर्ता अभिषेक बनर्जी की 'कॉर्पोरेट स्टाइल' वाली कार्यपद्धति, उम्मीदवार चयन और युवा नेताओं को तरजीह देने को हार का प्रमुख कारण मानते थे।

विद्रोह इतना गहरा था कि 80 विधायकों में से 58 ने विद्रोह का झंडा उठाया। कई सांसदों और नेताओं ने खुलकर अभिषेक की आलोचना की। 'भाईपो चोर' जैसे नारे लगे और पार्टी में 'अभिषेक बनर्जी बनाम पुराने गार्ड' का टकराव साफ नजर आने लगा। ममता बनर्जी की कलकत्ता स्थित कालीघाट आवास पर हुई बैठक में भी बेहद कम उपस्थिति रही, जो पार्टी की स्थिति की गंभीरता दर्शाती थी।

 ममता का मास्टर स्ट्रोक: अभिषेक का कद घटाया, लेकिन हटाया नहीं

ममता बनर्जी ने समझदारी दिखाते हुए अभिषेक को पूरी तरह हटाने के बजाय उनका कद संतुलित करने का रास्ता चुना। 

- **अभिषेक बनर्जी राष्ट्रीय महासचिव बने रहेंगे।
- डेरेक ओ'ब्रायन (राज्यसभा सांसद और संसदीय दल के नेता) और **डोला सेन** (राज्यसभा सांसद) को राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव बनाया गया। दोनों ममता के करीबी और अनुभवी नेता माने जाते हैं।
- अब अभिषेक अकेले फैसले नहीं ले सकेंगे। तीनों नेताओं के बीच समन्वय से संगठनात्मक कामकाज चलेगा।

इसके अलावा, पश्चिम बंगाल TMC की अध्यक्षता में भी बदलाव किया गया। सबrata बख्शी के अस्वस्थ होने के कारण **चंद्रिमा भट्टाचार्य** को नई अध्यक्ष बनाया गया। पार्टी की सभी कमेटियों को भंग कर नई टीम गठित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

 क्यों जरूरी था यह बदलाव?

TMC के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली पर कई शिकायतें थीं:
- युवा नेताओं को अत्यधिक तरजीह और पुराने, अनुभवी नेताओं को किनारे करने का आरोप।
- उम्मीदवार चयन में परिवारवाद और निकटतम सहयोगियों को प्राथमिकता।
- पार्टी को 'कॉर्पोरेट हाउस' की तरह चलाने की कोशिश, जबकि बंगाल की राजनीति स्थानीय मुद्दों और जन-संपर्क पर आधारित है।
- कुछ नेताओं ने तो यह तक कहा कि अभिषेक की वजह से पार्टी 'धीरे-धीरे खत्म' हो रही थी।

ममता बनर्जी ने इन शिकायतों को गंभीरता से लिया। उन्होंने पुराने नेताओं को फिर से महत्व देने और संगठन को लोकतांत्रिक ढंग से चलाने का संकेत दिया है।

TMC के भविष्य पर असर

यह बदलाव पार्टी को एकजुट रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, विद्रोही विधायकों का एक गुट अभी भी अलग रुख अपनाए हुए है। ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया है कि पार्टी एक रहेगी और वे सभी को साथ लेकर चलेंगी।

डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन जैसे नेताओं की नियुक्ति से पार्टी के संसदीय अनुभव वाले नेताओं को महत्व मिला है, जो युवा-पुराने संतुलन को बहाल करने में मदद करेगा।

 ममता बनर्जी की राजनीतिक समझदारी

ममता बनर्जी लंबे समय से बंगाल की राजनीति की 'अजेय' नेता मानी जाती हैं। 2011 में वामपंथी शासन का 34 साल पुराना किला तोड़ने वाली ममता ने कई संकटों का सामना किया है। इस बार भी उन्होंने संकट को अवसर में बदलने की कोशिश की है।

उनके समर्थक कहते हैं कि यह फैसला 'भूल सुधार' है। उन्होंने परिवारवाद की आलोचना को ध्यान में रखते हुए संगठन को मजबूत करने का रास्ता चुना। विपक्षी भाजपा इसे TMC के टूटने का संकेत बता रही है, लेकिन ममता का कहना है कि पार्टी मजबूत होकर उभरेगी।


TMC अब विधानसभा में विपक्ष की भूमिका निभाएगी। पार्टी का फोकस 2029 के लोकसभा चुनाव और भविष्य की रणनीति पर होगा। संगठनात्मक बदलाव के साथ ममता बनर्जी जन-संपर्क बढ़ाने और कार्यकर्ताओं को फिर से जोड़ने की कोशिश करेंगी।

अभिषेक बनर्जी के लिए भी यह सबक है — अब उन्हें टीम वर्क के साथ काम करना होगा।


TMC में यह 360 डिग्री का बदलाव ममता बनर्जी की सूझबूझ को दर्शाता है। 'भतीजे' का कद घटाकर उन्होंने पार्टी के असंतुष्ट नेताओं को संदेश दिया कि कोई भी अपरिहार्य नहीं है। चाहे कितनी भी बगावत हो, ममता अभी भी TMC की धुरी हैं।

यह फैसला न केवल आंतरिक विद्रोह को नियंत्रित करने का प्रयास है, बल्कि TMC को नई ऊर्जा और नई दिशा देने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। बंगाल की राजनीति में अब देखना यह होगा कि यह नया संतुलन कितना टिकता है और पार्टी कितनी जल्दी खुद को फिर से खड़ा कर पाती है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 6 Jun 2026
June 06, 2026

चंद्रबाबू नायडू का फैसला: आंध्र प्रदेश की 4 राज्यसभा सीटों पर BJP को शून्य, TDP 3 और जनसेना को 1 — NDA में नई समीकरण की शुरुआत?

चंद्रबाबू नायडू का फैसला: आंध्र प्रदेश की 4 राज्यसभा सीटों पर BJP को शून्य, TDP 3 और जनसेना को 1 — NDA में नई समीकरण की शुरुआत?
-Friday World 6 Jun 2026
आंध्र प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर चंद्रबाबू नायडू की रणनीतिक दूरदर्शिता और सख्ती छाई हुई है। एनडीए गठबंधन के प्रमुख घटक दलों के बीच राज्यसभा सीटों के बंटवारे पर लंबे समय से चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने साफ संदेश दे दिया है — इस बार BJP को एक भी सीट नहीं मिलेगी। चार खाली हो रही राज्यसभा सीटों में से तीन Telugu Desam Party (TDP) अपने खाते में रखेगी, जबकि एक Jana Sena Party (जनसेना) को दी जाएगी।

यह फैसला 5 जून 2026 को अमरावती के उंडवली स्थित चंद्रबाबू नायडू के कैंप ऑफिस में हुई उच्चस्तरीय एनडीए बैठक में लिया गया। बैठक में डिप्टी सीएम और जनसेना प्रमुख पवन कल्याण, TDP राज्य अध्यक्ष पल्ला श्रीनिवास राव, BJP राज्य अध्यक्ष पीवीएन माधव समेत अन्य प्रमुख नेता शामिल थे।

 फैसले की पृष्ठभूमि और राजनीतिक गणित

2024 के विधानसभा चुनावों में TDP, जनसेना और BJP के गठबंधन ने भारी बहुमत हासिल किया था। TDP ने 135 सीटें, जनसेना ने 21 और BJP ने 8 सीटें जीती थीं। राज्यसभा चुनावों में सीटों का बंटवारा विधायकों की संख्या और गठबंधन की ताकत के आधार पर तय होता है। 

पहले की चर्चाओं में BJP को एक सीट दिए जाने की संभावना थी, लेकिन हाल के घटनाक्रम — खासकर तमिलनाडु BJP के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई के पार्टी से इस्तीफे — और आंध्र प्रदेश में BJP की वर्तमान स्थिति को देखते हुए चंद्रबाबू ने फॉर्मूला बदला। अब TDP को 3 और जनसेना को 1 सीट मिलने का फैसला हो गया है।

TDP के लिए यह फैसला अपनी ताकत का प्रदर्शन है। पार्टी न केवल राज्य सरकार चला रही है, बल्कि गठबंधन के अंदर भी अपनी प्रधानता बनाए रखना चाहती है। जनसेना को एक सीट देकर पवन कल्याण को सम्मान दिया गया, जो गठबंधन की मजबूती के लिए जरूरी था।

 BJP के लिए क्या मतलब?

BJP के लिए यह झटका माना जा रहा है, हालांकि पार्टी ने इसे सहयोग का हिस्सा बताते हुए कोई सार्वजनिक नाराजगी नहीं जताई है। राज्य BJP अध्यक्ष पीवीएन माधव को चंद्रबाबू ने आश्वासन दिया है कि वे खुद अमित शाह और जेपी नड्डा से बात करेंगे। BJP को अगले चक्र में सीट मिलने की उम्मीद है।

विश्लेषकों का कहना है कि चंद्रबाबू नायडू आंध्र प्रदेश में TDP की प्रमुखता बनाए रखना चाहते हैं। 2029 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए वे अपनी पार्टी और जनसेना को मजबूत करना चाहते हैं, ताकि BJP की बढ़ती महत्वाकांक्षा को संतुलित किया जा सके।

 राज्यसभा चुनाव की तारीख और प्रक्रिया

ये चार सीटें 18 जून 2026 को होने वाले चुनाव के लिए खाली हो रही हैं। इनमें YSRCP के तीन और TDP के एक सदस्य की अवधि पूरी हो रही है। TDP की मजबूत बहुमत वाली विधानसभा में इन सीटों पर जीत लगभग तय मानी जा रही है।

TDP अब अपने तीन उम्मीदवारों के नामों पर विचार कर रही है। जनसेना अपने एक उम्मीदवार का फैसला पवन कल्याण करेंगे।

चंद्रबाबू की रणनीति: गठबंधन में संतुलन

चंद्रबाबू नायडू लंबे समय से गठबंधन राजनीति के मास्टर माने जाते हैं। 2024 के चुनाव से पहले उन्होंने TDP, जनसेना और BJP को एक मंच पर लाकर YSRCP को करारी हार दी थी। अब सत्ता में आने के दो साल बाद वे गठबंधन को नई दिशा दे रहे हैं।

- TDP की मजबूती: तीन सीटें लेकर पार्टी अपनी कैडर को संतुष्ट कर रही है।

- जनसेना को सम्मान: एक सीट देकर पवन कल्याण को गठबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका दी गई।

- BJP को संतुलित: बिना टकराव के सीट न देकर भविष्य के लिए दरवाजा खुला रखा।

यह फैसला आंध्र प्रदेश में क्षेत्रीय दलों की ताकत को राष्ट्रीय दलों के सामने मजबूत दिखाता है। कई राजनीतिक पर्यवेक्षक इसे “चंद्रबाबू मॉडल” का उदाहरण मान रहे हैं — जहां गठबंधन है, लेकिन नेतृत्व TDP का ही रहेगा।


NDA ने फैसला लिया है कि 9 जून से राज्य के तीनों क्षेत्रों में जनसभाएं आयोजित की जाएंगी, जिसमें पिछले दो साल के कार्यों का लेखा-जोखा जनता के सामने रखा जाएगा। राज्यसभा चुनाव के बाद विकास कार्यों, विशेष रूप से अमरावती, विशेष पैकेज और औद्योगिक निवेश पर फोकस बढ़ने की उम्मीद है।

यह घटनाक्रम 2029 के चुनावों की तैयारी का संकेत भी है। TDP और जनसेना मिलकर अपनी ताकत बढ़ाना चाहते हैं, जबकि BJP अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश में जुटी रहेगी।


चंद्रबाबू नायडू का यह फैसला साबित करता है कि आंध्र प्रदेश की राजनीति अभी भी क्षेत्रीय नेताओं के हाथ में है। BJP को शून्य सीट देकर उन्होंने यह संदेश दिया है कि गठबंधन में सब बराबर नहीं — कुछ नेता ज्यादा बराबर होते हैं। 

TDP की तीन और जनसेना की एक सीट के साथ NDA मजबूती से आगे बढ़ रहा है, लेकिन BJP के साथ भविष्य का रिश्ता कैसा रहेगा, यह आने वाले महीनों में साफ होगा। 

आंध्र प्रदेश की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो चुका है — जहां संख्याबल, रणनीति और दूरदर्शिता एक बार फिर चंद्रबाबू नायडू को केंद्र में ला खड़ा करती है।

Sajjadali Nayani ✍
Friday World 6 Jun 2026
June 06, 2026

: गुजरात की मिट्टी का वो सपूत जिसने बर्मा में खड़ा किया पेट्रोलियम और चावल का साम्राज्य — सर अब्दुल करीम अब्दुल शकूर जमाल, 'राइस किंग' और 'ऑयल किंग'

: गुजरात की मिट्टी का वो सपूत जिसने बर्मा में खड़ा किया पेट्रोलियम और चावल का साम्राज्य — सर अब्दुल करीम अब्दुल शकूर जमाल, 'राइस किंग' और 'ऑयल किंग'
-Friday World 6 Jun 2026
भारतीय व्यापार इतिहास में कई नाम चमकते हैं, लेकिन कुछ कहानियां इतनी प्रेरक और अनकही होती हैं कि उन्हें दोहराने की जरूरत पड़ती है। जब हम धीरूभाई अंबानी या अन्य आधुनिक उद्योगपतियों की बात करते हैं, तो अक्सर भूल जाते हैं कि 19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी की शुरुआत में गुजरात की धरती ने एक ऐसे दूरदर्शी को जन्म दिया, जिसने विदेशी प्रभुत्व वाले युग में न केवल व्यापार साम्राज्य खड़ा किया, बल्कि राष्ट्रवाद की ज्वाला भी जलाए रखी। उनका नाम था — सर अब्दुल करीम अब्दुल शकूर जमाल, जिन्हें दुनिया 'किंग ऑफ राइस' और 'ऑयल किंग' के नाम से जानती थी।

जड़ें गुजरात में, उड़ान बर्मा में

1862 में काठियावाड़ (आधुनिक जामनगर, गुजरात) में जन्मे अब्दुल करीम जमाल मात्र छह वर्ष की उम्र में अपने पिता के साथ बर्मा (वर्तमान म्यांमार) के रंगून (यांगोन) चले गए। उस समय बर्मा ब्रिटिश साम्राज्य का हिस्सा था और व्यापारिक अवसरों से भरा पड़ा था। पारंपरिक इस्लामी शिक्षा के साथ-साथ रंगून कॉलेज में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले युवा जमाल ने पिता की छोटी सी फर्म जमाल ब्रदर्स एंड कंपनी में काम शुरू किया।

जल्द ही उनकी व्यावसायिक कुशलता, मेहनत और दूरदर्शिता ने कंपनी को एक विशाल समूह में बदल दिया। चावल, कपास, रबर, चाय, चीनी, लकड़ी, खनन — लगभग हर क्षेत्र में उनकी उपस्थिति दर्ज हो गई। लेकिन चावल का कारोबार ही उनका सबसे बड़ा साम्राज्य साबित हुआ। बर्मा के उपजाऊ खेतों से चावल निर्यात करते हुए उन्होंने बाजार पर ऐसी पकड़ बनाई कि उन्हें "किंग ऑफ राइस' का खिताब मिल गया। उस दौर में एक भारतीय व्यापारी का इतना बड़ा वर्चस्व हासिल करना कोई साधारण उपलब्धि नहीं थी।

 पेट्रोलियम क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम

चावल के बाद उनका सबसे महत्वपूर्ण योगदान पेट्रोलियम क्षेत्र में आया। उन्होंने **जमाल ऑयल कंपनी लिमिटेड** की स्थापना की, जो 1909 में **इंडो-बर्मा पेट्रोलियम कंपनी लिमिटेड (IBP)** के रूप में विकसित हुई। उस समय जब तेल व्यापार पर ब्रिटिश और अन्य विदेशी कंपनियों का पूरा दबदबा था, तब IBP ने भारतीय पूंजी और उद्यमिता की मजबूत पहचान स्थापित की। यह कंपनी बाद में भारतीय तेल उद्योग की नींव बनी और 2007 में **इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL)** में विलय हो गई — इस प्रकार एक शताब्दी से अधिक पुरानी विरासत आधुनिक भारत की सबसे बड़ी तेल कंपनी का हिस्सा बन गई।

सर जमाल केवल व्यापारी नहीं, बल्कि दूरदर्शी उद्यमी थे। उन्होंने कई क्षेत्रों में विविधीकरण किया, हजारों लोगों को रोजगार दिया और बर्मा के विभिन्न हिस्सों में अपने कारोबार फैलाए। उनकी कंपनियां न केवल मुनाफा कमाती थीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करती थीं।

 जमाल विला: शक्ति और राष्ट्रवाद का केंद्र

रंगून में उनका भव्य निवास जमाल विला सिर्फ एक महल नहीं था — यह सामाजिक, राजनीतिक और बौद्धिक चर्चाओं का प्रमुख केंद्र था। यहां महात्मा गांधी, मौलाना मुहम्मद अली, मौलाना शौकत अली, आगा खान, रोमानिया के किंग कैरोल समेत अनेक भारतीय और विदेशी दिग्गज आते-जाते थे। ब्रिटिश अधिकारी, राजकुमार और स्वतंत्रता सेनानी — सभी यहां एक मंच पर मिलते थे।

जमाल विला राष्ट्रवाद की भावना से ओत-प्रोत था। सर जमाल ने स्वदेशी जहाजरानी को बढ़ावा दिया। 1921 में जब स्किंदिया स्टीमशिप कंपनी ने बर्मा के पानी में प्रवेश किया, तो सर जमाल ने ब्रिटिश शिपिंग कंपनियों को छोड़कर भारतीय कंपनी को समर्थन दिया। एक बार तो उन्होंने मात्र तीन दिनों में 6400 टन चावल भारतीय जहाजों से निर्यात किया। पूरे वर्ष में उन्होंने एक लाख टन चावल भारतीय जहाजों पर भेजा। ब्रिटिश सरकार ने धमकियां दीं, लेकिन सर जमाल अडिग रहे। अंततः ब्रिटिशों ने चावल निर्यात पर प्रतिबंध लगाकर उन्हें आर्थिक नुकसान पहुंचाया, लेकिन उनकी राष्ट्रभक्ति अटूट रही।

 मानवता और राष्ट्र के प्रति समर्पण

व्यापारिक सफलता के साथ सर जमाल की उदारता भी अद्भुत थी। शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कार्यों में उन्होंने लाखों रुपये दान किए — उस जमाने में सालाना दान एक मिलियन रुपये से अधिक पहुंचता था। जामनगर में जमाल हॉस्पिटल उनकी देन है। उन्होंने कई स्कूल, औद्योगिक केंद्र और चिकित्सा संस्थान स्थापित किए या सहायता दी।

1920 में ब्रिटिश सरकार ने उन्हें नाइटहुड (सर) की उपाधि दी। इससे पहले 1915 में उन्हें CIE (Companion of the Indian Empire) मिल चुका था। लेकिन सम्मान के बावजूद वे सादगी भरा जीवन जीते रहे — साधारण कुर्ता-पजामा, अचकन और पगड़ी उनका परिधान था। वे धार्मिक, विनम्र और सिद्धांतवादी थे।

 विरासत जो आज भी प्रेरित करती है

1924 में उनका निधन हुआ, लेकिन उनकी विरासत आज भी जीवित है। IBP का IOCL में विलय 2007 में हुआ, जो उनकी दूरदर्शिता का प्रमाण है। रंगून में जमाल एवेन्यू नाम से एक सड़क उनके नाम पर थी (जो बाद में बदली गई)। उनकी कहानी बताती है कि विदेशी शासन में भी भारतीय उद्यमी कैसे विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकते थे।

सर अब्दुल करीम जमाल की जीवन गाथा कई सबक देती है:

- दूरदर्शिता: विविधीकरण और नए क्षेत्रों में प्रवेश।

- राष्ट्रभक्ति: विदेशी हितों के खिलाफ स्वदेशी का समर्थन।

- उदारता: सफलता को समाज की भलाई में लगाना।

- सादगी: धन के बावजूद मूल्यों से जुड़े रहना।

आज जब हम 'आत्मनिर्भर भारत' और 'वोकल फॉर लोकल' की बात करते हैं, तब सर जमाल जैसी शख्सियतें हमें याद दिलाती हैं कि यह यात्रा नई नहीं है। गुजरात की मिट्टी ने सदियों से ऐसे योद्धा पैदा किए हैं जो न केवल व्यापार करते हैं, बल्कि इतिहास रचते हैं।

धीरूभाई अंबानी से पहले का यह नाम भारतीय उद्यमिता के स्वर्णिम अध्याय का हिस्सा है। सर अब्दुल करीम अब्दुल शकूर जमाल — एक व्यापारी, राष्ट्रवादी, филан्थ्रोपिस्ट और सच्चे मेमन गौरव। उनकी कहानी हर युवा उद्यमी को प्रेरित करेगी कि मेहनत, ईमानदारी और दूरदृष्टि से कोई भी असंभव को संभव बना सकता है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 6 Jun 2026
June 06, 2026

વડાપ્રધાન શ્રી નરેન્દ્રભાઈ મોદીના સફળ નેતૃત્વના ૧૨ વર્ષ વિશ્વાસ, વિકાસ અને જનકલ્યાણના;

વડાપ્રધાન શ્રી નરેન્દ્રભાઈ મોદીના સફળ નેતૃત્વના ૧૨ વર્ષ વિશ્વાસ, વિકાસ અને જનકલ્યાણના;
- Friday World 6 Jun 2026
ભાવનગર જિલ્લામાં ૮ થી ૨૧ જૂન દરમિયાન વિવિધ જનહિતલક્ષી કાર્યક્રમોની ઉજવણી

વડાપ્રધાનશ્રીના ૧૨ વર્ષના આ ગૌરવશાળી કાર્યકાળની ઉજવણી વિકાસ, જનકલ્યાણના કાર્યક્રમો અને જનભાગીદારી સાથે આગામી ૮ મી જૂનથી ૨૧મી જૂન દરમિયાન યોજાશે

‘પ્રગતિ પથ યાત્રા’, ‘જન કલ્યાણ શિબિર’ અને ‘વિકસિત ભારત સંકલ્પ સંમેલન’ના આયોજન અંગે કેબિનેટ કૃષિ મંત્રીશ્રી જીતુભાઈ વાઘાણીના અધ્યક્ષસ્થાને સમીક્ષા બેઠક અને પત્રકાર પરિષદ યોજાઈ

વૃક્ષારોપણ, સ્વચ્છતા અભિયાન, પ્રાકૃતિક ખેતી કાર્યશાળા અને સેવાસેતુની સેવાઓનો નાગરિકોને સ્થળ પર જ લાભ મળશે


દેશના વડાપ્રધાનશ્રી નરેન્દ્રભાઇ મોદીના ૧૨ વર્ષના સફળ અને ગૌરવશાળી કાર્યકાળ પૂર્ણ થવાના અવસરે તા. ૮ જૂનથી ૧૪ જૂન, ૨૦૨૬ દરમિયાન ભાવનગર જિલ્લામાં વિવિધ જનહિતલક્ષી કાર્યક્રમોનું આયોજન કરવામાં આવ્યું છે. આ કાર્યક્રમોની સમીક્ષા માટે ભાવનગર ખાતે કેબિનેટ કૃષિમંત્રી શ્રી જીતુભાઈ વાઘાણીના અધ્યક્ષ સ્થાને બેઠક અને પત્રકાર પરિષદ યોજાઇ હતી.   

ભાવનગર જિલ્લામાં યોજાનારા કાર્યક્રમોના સફળ અને સુચારુ આયોજન માટે કેબિનેટ કૃષિ મંત્રીશ્રી જીતુભાઈ વાઘાણીના અધ્યક્ષસ્થાને કલેક્ટર કચેરી ખાતે પદાધિકારીશ્રીઓ અને અધિકારીશ્રીઓની સમીક્ષા બેઠક યોજાઈ હતી.

આ બેઠકમાં કૃષિ મંત્રીશ્રી જીતુભાઈ વાઘાણીએ વિવિધ વિભાગોની કામગીરીની વિસ્તૃત સમીક્ષા કરી આયોજનને અસરકારક બનાવવા માટે જરૂરી માર્ગદર્શન અને સૂચનાઓ આપી હતી. તેમણે તમામ વિભાગોને પરસ્પર સંકલન અને જવાબદારીપૂર્વક કામગીરી કરીને કાર્યક્રમોને લોકભાગીદારીથી સફળ બનાવવા અનુરોધ કર્યો હતો.

આ ઉજવણી અંતર્ગત જિલ્લામાં ત્રણ મુખ્ય કાર્યક્રમો યોજાનાર છે. જેમાં ‘પ્રગતિ પથ યાત્રા’ દ્વારા સરકારશ્રીના વિકાસકાર્યો અને સિદ્ધિઓને જન-જન સુધી પહોંચાડવામાં આવશે. ‘જન કલ્યાણ શિબિર’ મારફતે છેવાડાના અને જરૂરિયાતમંદ પરિવારોને વિવિધ સરકારી યોજનાઓનો સીધો લાભ આપવામાં આવશે, જ્યારે ‘વિકસિત ભારત સંકલ્પ સંમેલન (પ્રબુદ્ધ સંમેલન)’ દ્વારા સમાજના પ્રબુદ્ધ નાગરિકો સાથે રાષ્ટ્રના સર્વાંગી વિકાસ અંગે સંવાદ અને વિચારવિમર્શ યોજાશે.

આ કાર્યક્રમોના ભાગરૂપે સમગ્ર જિલ્લામાં વૃક્ષારોપણ અભિયાન, સ્વચ્છતા ઝુંબેશ તેમજ ખેડૂતોને પ્રાકૃતિક ખેતી તરફ પ્રેરિત કરતી વિશેષ પ્રાકૃતિક ખેતી કાર્યશાળાઓનું આયોજન કરવામાં આવશે.

આ ઉપરાંત, ‘જન કલ્યાણ શિબિર’માં કેન્દ્ર અને રાજ્ય સરકારની વિવિધ કલ્યાણકારી યોજનાઓ અંગે માર્ગદર્શન અને લાભો એક જ સ્થળે ઉપલબ્ધ કરાવવામાં આવશે. નાગરિકોની સુવિધા માટે ‘સેવાસેતુ’ કાર્યક્રમ હેઠળ મળવાપાત્ર સરકારી સેવાઓ, પ્રમાણપત્રો અને દાખલાઓનો લાભ પણ સ્થળ પર જ પ્રદાન કરવામાં આવશે.

જનવિશ્વાસથી જનકલ્યાણ સુધીની ૧૨ વર્ષની આ સફળ યાત્રાની ઉજવણીને લોકભાગીદારીનો ઉત્સવ બનાવવા માટે જિલ્લાના પદાધિકારીશ્રીઓ, વિવિધ ક્ષેત્રોના અગ્રણી નાગરિકો, પૂજ્ય સંતો-મહંતો, સામાજિક આગેવાનો, યુવાનો તથા વિશાળ સંખ્યામાં નાગરિકોને જોડવામાં આવશે.

આ બેઠકમાં મેયર શ્રી ઉષાબેન તલરેજા, જિલ્લા પંચાયત પ્રમુખ શ્રી અશોક ભાઈ લાધવા, ધારાસભ્ય શ્રીમતી સેજલબેન પંડયા, મ્યુનિસિપલ કમિશનરશ્રી ડૉ. નરેન્દ્રકુમાર મીના, જિલ્લા કલેકટરશ્રી ડૉ. મનીષ કુમાર બંસલ, જિલ્લા વિકાસ અધિકારી શ્રી હનુલ ચૌધરી, પોલીસ અધિક્ષકશ્રી નીતિશ કુમાર પાંડે, પ્રાદેશિક કમિશનર નગરપાલિકા શ્રી સુનિલ, જિલ્લા પંચાયત ઉપપ્રમુખ શ્રી સુજાનસિંહ ગોહિલ, સ્ટેન્ડિંગ કમિટીના ચેરમેનશ્રી કિશનભાઈ મહેતા, ડેપ્યુટી મેયરશ્રી અશોક બારૈયા, આગેવાન શ્રી દિગ્વિજય સિંહ ગોહિલ જીલ્લા વહીવટી તંત્રના અધિકારીઓ, કાર્યક્રમ માટે બનાવેલ વિવિધ સમિતિઓના નોડલ અધિકારીઓ અને પત્રકારશ્રીઓ ઉપસ્થિત રહ્યા હતા.

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 6 Jun 2026

Friday, 5 June 2026

June 05, 2026

દૂષિત ખોરાક: વિશ્વમાં વર્ષે ૮૬.૬ કરોડ લોકો બીમાર, ૧૫ લાખ મોત! બાળકો પર સૌથી મોટો ખતરો, WHOનો આંખ ઉઘાડનારો અહેવાલ

દૂષિત ખોરાક: વિશ્વમાં વર્ષે ૮૬.૬ કરોડ લોકો બીમાર, ૧૫ લાખ મોત! બાળકો પર સૌથી મોટો ખતરો, WHOનો આંખ ઉઘાડનારો અહેવાલ
- Friday World 5 Jun 2026
વિશ્વ આરોગ્ય સંસ્થા (WHO) દ્વારા જૂન ૨૦૨૬માં પ્રકાશિત નવા અહેવાલે વૈશ્વિક સ્તરે ખોરાકની સલામતીના મુદ્દાને ફરી એક વાર વેગવાન બનાવ્યો છે. આ અહેવાલ અનુસાર, દર વર્ષે અસુરક્ષિત અને દૂષિત ખોરાકના કારણે વિશ્વભરમાં આશરે ૮૬.૬ કરોડ (૮૬૬ મિલિયન) લોકો બીમાર પડે છે અને ૧.૫૨ મિલિયન (લગભગ ૧૫ લાખ) લોકોના જીવ જાય છે. આ આંકડા માત્ર આંકડા નથી, પરંતુ એક વિનાશક વાસ્તવિકતા છે જે આપણા રસોડાથી લઈને વૈશ્વિક આરોગ્ય વ્યવસ્થા સુધીના તમામ સ્તરોને પ્રભાવિત કરે છે.

ખાસ કરીને ૫ વર્ષથી નાની ઉંમરના બાળકો આનો સૌથી વધુ ભોગ બને છે. તેઓ વૈશ્વિક કુલ કેસના લગભગ એક તૃતીયાંશ ભાગનો ભાર વેઠે છે અને તેમના મોતની સંખ્યા અત્યંત ચિંતાજનક છે. આ અહેવાલ વિશ્વ ખાદ્ય સલામતી દિવસ (૭ જૂન) પહેલાં જાહેર કરવામાં આવ્યો છે, જે સમગ્ર વિશ્વને જાગૃત કરવાનો પ્રયાસ છે.

ડરામણા આંકડા: વાસ્તવિકતા સામે આંખ મીંચવી અશક્ય

WHOના અંદાજ મુજબ:
- ૮૬.૬ કરોડ લોકો દર વર્ષે દૂષિત ખોરાકથી બીમાર પડે છે — એટલે કે વિશ્વના લગભગ એકમાંથી નવ વ્યક્તિ.

- ૧.૫૨ મિલિયન મૃત્યુ, જેમાંથી મોટા ભાગના નિવારણયોગ્ય છે.

- ૫૭.૧ મિલિયન વર્ષનું સ્વસ્થ જીવન (DALYs) ગુમાવવું પડે છે.

- નીચલી અને મધ્યમ આવકવાળા દેશોમાં આ બોજ સૌથી વધુ છે, ખાસ કરીને આફ્રિકા અને દક્ષિણ-પૂર્વ એશિયામાં, જ્યાં વૈશ્વિક કુલ કેસના લગભગ ૭૫% નોંધાય છે.

રસાયણિક દૂષણ (કેમિકલ હેઝાર્ડ્સ) મૃત્યુના ૭૩% કેસ માટે જવાબદાર છે, જ્યારે બેક્ટેરિયા, વાયરસ અને પરોપજીવીઓ ડાયરિયા અને અન્ય તીવ્ર બીમારીઓનું મુખ્ય કારણ છે.

 કયા ખોરાક અને કારણો સૌથી વધુ જોખમી?

WHO અહેવાલમાં જણાવાયું છે કે દૂષિત ખોરાકના મુખ્ય સ્ત્રોતોમાં સામેલ છે:
- માંસ, માછલી અને અન્ય સીફૂડ
- ડેરી પ્રોડક્ટ્સ (દૂધ, પનીર, દહીં)
- તાજા શાકભાજી અને ફળો
- અનાજ અને અન્ય ખાદ્યપદાર્થો
- પાણી (પીવાનું અને ખોરાક તૈયાર કરવામાં વપરાતું)

મુખ્ય કારણો:
- અયોગ્ય સંગ્રહ અને પરિવહન
- અપૂરતી રસોઈ અને સ્વચ્છતા
- કૃષિમાં અતિશય જંતુનાશકો અને રસાયણોનો ઉપયોગ
- પ્રદૂષિત પાણી અને અનુચિત પ્રક્રિયા
- અકુદરતી રીતે ઉગાડેલા ખોરાકમાં હેવી મેટલ્સ (લીડ, આર્સેનિક)નું પ્રદૂષણ

 બાળકો પર વિનાશક અસર

૫ વર્ષથી નાના બાળકોમાં રોગપ્રતિકારક શક્તિ ઓછી હોવાથી તેઓ વધુ સંવેદનશીલ હોય છે. અહેવાલ અનુસાર, આ વય જૂથમાં ૨૦૨૧માં જ **૧.૪૩ લાખ** મોત નોંધાયા છે. આ મોત માત્ર આંકડા નથી — તે ભવિષ્યની પેઢીઓના સ્વાસ્થ્ય, વિકાસ અને દેશની પ્રગતિને અસર કરે છે. અપોજનિક અને માનસિક વિકાસ પર પણ લાંબા ગાળાની અસર પડે છે.

 આર્થિક અને સામાજિક અસર

આ અહેવાલ મુજબ, નીચલી અને મધ્યમ આવકવાળા દેશોમાં દૂષિત ખોરાકના કારણે વાર્ષિક ૧૧૦ અબજ ડોલર થી વધુનું આર્થિક નુકસાન થાય છે. આમાં તબીબી ખર્ચ, ઉત્પાદકતા ગુમાવવી અને અન્ય અસરો સામેલ છે. વ્યક્તિગત સ્તરે પરિવારો આર્થિક અને માનસિક રીતે તૂટી જાય છે.

ભારત અને વિકાસશીલ દેશોની સ્થિતિ

ભારત સહિત ઘણા વિકાસશીલ દેશોમાં આ સમસ્યા વધુ તીવ્ર છે. અનિયમિત બજારો, ખુલ્લા વેચાણ, પાણીનું પ્રદૂષણ અને જાગૃતિની કમી આ મુદ્દાને વધારે છે. ભારતમાં પણ FSSAI જેવી સંસ્થાઓ પ્રયાસ કરી રહી છે, પરંતુ અમલ અને જાગૃતિ હજુ અપૂરતી છે.

નિવારણ માટે શું કરી શકાય?

WHOના સૂચનો અનુસાર:

1. વ્યક્તિગત સ્તરે: ખોરાકને સારી રીતે રાંધવો, સ્વચ્છ પાણી વાપરવું, હાથ ધોવા, કાચા અને પકાવેલા ખોરાકને અલગ રાખવા.

2. કૃષિ સ્તરે: સુરક્ષિત ખેતી પદ્ધતિઓ, જંતુનાશકોનો યોગ્ય ઉપયોગ.

3. સરકારી સ્તરે: કડક નિયમો, નિયમિત તપાસ, જાગૃતિ અભિયાન અને આંતરરાષ્ટ્રીય સહયોગ.

4. ઉદ્યોગ સ્તરે: ફૂડ પ્રોસેસિંગમાં ગુણવત્તા નિયંત્રણ.

 સુરક્ષિત ખોરાક = સ્વસ્થ ભવિષ્ય

દૂષિત ખોરાકની સમસ્યા એક વ્યક્તિગત આરોગ્ય મુદ્દો નથી, પરંતુ વૈશ્વિક જાહેર આરોગ્ય, આર્થિક વિકાસ અને સુસ્થિર વિકાસનો મુદ્દો છે. WHOનો આ અહેવાલ આપણને ચેતવણી આપે છે કે જો આપણે હવે પગલાં ન લીધાં તો આવતી પેઢીઓને અપાર નુકસાન થશે.

સુરક્ષિત ખોરાક એક અધિકાર છે. દરેક નાગરિક, સરકાર, ખેડૂત અને ઉદ્યોગપતિને આ જવાબદારી નિભાવવી જોઈએ. ચાલો, આજથી જ અમારા રસોડા, બજાર અને ખેતરોને સુરક્ષિત બનાવીએ — કારણ કે સ્વાસ્થ્ય જ સાચી સંપત્તિ છે.

સુરક્ષિત ખોરાક, સ્વસ્થ વિશ્વ — આપણી જવાબદારી, આપણું અભિયાન.

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 5 Jun 2026
June 05, 2026

ट्रंप का बड़ा बयान: “भारत ने सालों तक अमेरिका का फायदा उठाया, अब उल्टा होगा!” मोदी को कहा ‘अच्छे दोस्त’, व्यापार डील का ऐलान

ट्रंप का बड़ा बयान: “भारत ने सालों तक अमेरिका का फायदा उठाया, अब उल्टा होगा!” मोदी को कहा ‘अच्छे दोस्त’, व्यापार डील का ऐलान
- Friday World 5 Jun 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत पर निशाना साधते हुए पुरानी शिकायतों को दोहराया, लेकिन साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर तारीफ की। ट्रंप ने कहा कि सालों तक भारत ने अमेरिका का बहुत फायदा उठाया, खासकर हार्ले डेविडसन मोटरसाइकिल पर 200% टैरिफ लगाकर। लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल गई है और अमेरिका भारत से बहुत पैसा कमाएगा। इसके बावजूद ट्रंप ने मोदी को अपना अच्छा दोस्त बताया और दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते (ट्रेड डील) की उम्मीद जताई।

यह बयान वैश्विक व्यापार युद्ध के बीच आया है, जहां ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत कई देशों पर टैरिफ लगाए जा रहे हैं। भारत-अमेरिका संबंधों में यह मिश्रित संदेश सकारात्मक और चुनौतीपूर्ण दोनों पहलुओं को दर्शाता है।

 ट्रंप का पूरा बयान और उसका मतलब

ट्रंप ने कहा:  
“सालों तक, भारत ने अमेरिका का बहुत फायदा उठाया। उन्होंने हमसे बहुत ज्यादा टैरिफ लगाए और हमें कुछ नहीं दिया। हार्ले डेविडसन पर 200% टैरिफ लगाया… लेकिन ये मुझसे पहले की बात थी। अब इसका उल्टा होगा। अब हम भारत से बहुत पैसा कमाएंगे।”

इसके तुरंत बाद ट्रंप ने स्वर बदला और कहा:  
“हम एक व्यापार समझौता डील करेंगे क्योंकि मुझे आपके PM बहुत पसंद हैं। वह मेरे अच्छे दोस्त हैं, और हमारी अच्छी बनती है। हमारे बीच अच्छे रिश्ते हैं।”

यह बयान ट्रंप की पुरानी शैली को दिखाता है — पहले सख्त आलोचना, फिर व्यक्तिगत दोस्ती का जिक्र और अंत में डील की बात। हार्ले डेविडसन का उदाहरण ट्रंप के पहले कार्यकाल से चला आ रहा है, जब उन्होंने भारत के उच्च टैरिफ को बार-बार उठाया था।

हार्ले डेविडसन विवाद: ट्रंप की पुरानी शिकायत

ट्रंप ने कई बार हार्ले डेविडसन को उदाहरण बनाया है। पहले भारत में बड़े इंजन वाली अमेरिकी मोटरसाइकिलों पर 100-200% तक का आयात शुल्क था। इससे अमेरिकी कंपनी को भारत में सीधे बेचने में दिक्कत होती थी, जिसके कारण हार्ले ने भारत में अपना प्लांट लगाया। ट्रंप इसे ‘अनफेयर ट्रेड’ कहते थे।

2026 के अंतरिम व्यापार समझौते में भारत ने हार्ले डेविडसन जैसी 800-1600cc बाइक्स पर ड्यूटी लगभग खत्म करने या बहुत कम करने का फैसला किया है। हाई-एंड अमेरिकी कारों पर टैरिफ भी 110% से घटाकर 30% करने की तैयारी है। यह ट्रंप की दबाव की रणनीति का नतीजा माना जा रहा है।

 भारत-अमेरिका व्यापार: आंकड़े और वास्तविकता

भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार लगभग 190-200 बिलियन डॉलर का है। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। लेकिन ट्रंप के अनुसार यह रिश्ता ‘वन-साइडेड’ रहा है — भारत ज्यादा बेचता है, अमेरिका कम।

- भारत अमेरिका को फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, आईटी सर्विसेज, ज्वेलरी और इंजीनियरिंग गुड्स निर्यात करता है।
- अमेरिका भारत को एयरक्राफ्ट, एनर्जी, हाई-टेक प्रोडक्ट्स, एग्रीकल्चरल गुड्स आदि निर्यात करता है।

ट्रंप प्रशासन ने 2025-26 में भारत पर 25% + 25% (रूसी तेल खरीद को लेकर) कुल 50% टैरिफ लगाए थे, जिसे बाद में घटाकर 18% किया गया। बदले में भारत ने कुछ अमेरिकी प्रोडक्ट्स पर टैरिफ कम करने और रूसी तेल आयात घटाने के संकेत दिए।

यह डील दोनों देशों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है, लेकिन भारतीय किसानों, छोटे उद्योगों और ‘मेक इन इंडिया’ पर इसका असर चिंता का विषय है।

मोदी-ट्रंप दोस्ती: व्यक्तिगत रसायन

ट्रंप ने मोदी को ‘बहुत पसंद’ और ‘अच्छे दोस्त’ कहा है। दोनों नेताओं के बीच ‘हाउडी मोदी’ और ‘नमस्ते ट्रंप’ जैसे कार्यक्रम याद हैं। व्यक्तिगत संबंधों ने कई बार व्यापारिक तनाव को कम किया है।

ट्रंप ने कहा, “हमारी अच्छी बनती है।” यह वाक्य दोनों देशों के रणनीतिक साझेदारी — क्वाड, इंडो-पैसिफिक, डिफेंस और टेक्नोलॉजी सहयोग — को रेखांकित करता है। व्यापार के अलावा आतंकवाद, चीन की चुनौती और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सहयोग जारी है।

 संभावित व्यापार डील के फायदे और चुनौतियां

फायदे:
- अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत का विशाल बाजार खुलना।
- हार्ले, टेस्ला (हालांकि EV पर छूट नहीं), बोइंग, एप्पल आदि को फायदा।
- भारतीय निर्यातकों को अमेरिका में स्थिरता और कम टैरिफ।
- टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, जॉब क्रिएशन और निवेश बढ़ना।

चुनौतियां:
- भारतीय किसानों को अमेरिकी डेयरी और एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स से प्रतिस्पर्धा।
- ‘आत्मनिर्भर भारत’ और लोकल मैन्युफैक्चरिंग पर दबाव।
- डेटा लोकलाइजेशन, IPR और नॉन-टैरिफ बैरियर जैसे मुद्दे।
- चीन से अलगाव में भारत की भूमिका।

विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्ण फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की बजाय अंतरिम डील ज्यादा संभावित है, जो दोनों पक्षों को लचीलापन दे।

वैश्विक संदर्भ: ट्रंप की टैरिफ डिप्लोमेसी

ट्रंप की नीति साफ है — रिसिप्रोकल ट्रेड (म्यूचुअल फायदा)। उन्होंने चीन, यूरोप, कनाडा, मेक्सिको समेत कई देशों पर टैरिफ लगाए। भारत के मामले में व्यक्तिगत दोस्ती ने नरमी दिखाई, लेकिन ‘अमेरिका को फायदा’ का सिद्धांत बरकरार है।

भारत ने भी स्मार्ट तरीके से जवाब दिया — ‘वोकल फॉर लोकल’ को मजबूत किया, रूसी तेल खरीद जारी रखी (लेकिन घटाई) और अमेरिका के साथ बैकचैनल बातचीत बढ़ाई।

 भारतीय प्रतिक्रिया और राजनीतिक विश्लेषण

भारत में सरकार ने ट्रंप के सकारात्मक बयान का स्वागत किया। विपक्ष ने इसे ‘झुकना’ बताया, जबकि अर्थशास्त्री कहते हैं कि दोनों देशों को जीत-जीत की स्थिति चाहिए।

पीएम मोदी ने पहले भी कहा था कि भारत किसी भी समझौते में किसानों और राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा। ट्रंप के बयान के बाद बाजारों में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखी गई — रुपया मजबूत, शेयर बाजार में उछाल (समाचार तिथि के अनुसार)।

दोस्ती और फायदे का नया अध्याय

ट्रंप का यह बयान दिखाता है कि व्यक्तिगत संबंध कितने महत्वपूर्ण हैं। आलोचना के बावजूद डील की उम्मीद दोनों देशों के बीच गहरे रिश्ते को रेखांकित करती है। भविष्य में भारत-अमेरिका व्यापार 500 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है, अगर दोनों पक्ष संतुलित समझौता करते हैं।

ट्रंप ने कहा — “अब उल्टा होगा।” लेकिन वास्तविकता यह है कि सच्चा फायदा तब होगा जब दोनों देश एक-दूसरे के विकास में साझेदार बनें, न कि प्रतिद्वंद्वी।

मोदी-ट्रंप की जोड़ी एक बार फिर साबित कर सकती है कि कठिन बातचीत के बावजूद दोस्ती और राष्ट्रीय हित दोनों को साथ ले जाया जा सकता है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 5 Jun 2026
June 05, 2026

ભાવનગરમાં પોલીસનું સફળ ‘ઓપરેશન ડેલ્ટા હન્ટ’: ST ડેપો અને હાઈવે પર લોખંડી નાકાબંધી, ૨૫ શંકાસ્પદોની તપાસ પછી રાહતનો શ્વાસ!

ભાવનગરમાં પોલીસનું સફળ ‘ઓપરેશન ડેલ્ટા હન્ટ’: ST ડેપો અને હાઈવે પર લોખંડી નાકાબંધી, ૨૫ શંકાસ્પદોની તપાસ પછી રાહતનો શ્વાસ!
- Friday World 5 Jun 2026

ગુજરાતના ઔદ્યોગિક અને વ્યાપારી હબ તરીકે જાણીતા ભાવનગરમાં કાયદો-વ્યવસ્થાને મજબૂત બનાવવા અને ગેરકાયદેસર ઘૂસણખોરીને રોકવા માટે પોલીસે મોટા પાયે અભિયાન હાથ ધર્યું છે. ‘ઓપરેશન ડેલ્ટા હન્ટ’ નામના આ વિશેષ અભિયાન અંતર્ગત શહેર અને જિલ્લાના વ્યસ્ત વિસ્તારોમાં આકસ્મિક અને સઘન ચેકિંગ શરૂ કરવામાં આવ્યું છે. આ અભિયાને સ્થાનિક લોકોમાં સુરક્ષાની ભાવના વધારી દીધી છે તો બીજી તરફ ગુનેગાર તત્વોમાં ફફડાટ પણ વ્યાપી ગયો છે.

 ST ડેપો પર ઓચિંતો દરોડો

ભાવનગર સેન્ટ્રલ બસ ડેપો એ શહેરનું મુખ્ય પરિવહન કેન્દ્ર છે. અહીં દરરોજ હજારો મુસાફરો આવ-જા કરે છે. આવા વ્યસ્ત વિસ્તારમાં પોલીસની લોકલ ક્રાઈમ બ્રાન્ચ (એલસીબી) અને અન્ય ટીમોએ અચાનક દરોડો પાડીને તપાસ શરૂ કરી. બસ સ્ટેશનના પરિસરમાં આંટા મારતા શંકાસ્પદ વ્યક્તિઓને રોકીને તેમની વિગતવાર પૂછપરછ કરવામાં આવી.

પોલીસે આ દરમિયાન આધારકાર્ડ, વોટર કાર્ડ, ચૂંટણી કાર્ડ અને અન્ય આઈડી પ્રૂફની બારીકાઈથી તપાસ કરી. જિલ્લાભરમાંથી અત્યાર સુધીમાં કુલ **૨૫ શંકાસ્પદ વ્યક્તિઓ**ને અટકાયતમાં લેવામાં આવી હતી. તમામની ઓળખ અને પૃષ્ઠભૂમિની તપાસ કરવામાં આવી. જોકે, પ્રાથમિક તપાસ બાદ કોઈપણ વ્યક્તિ બાંગ્લાદેશી ઘૂસણખોર હોવાનું સામે આવ્યું નથી. આ સમાચારથી પોલીસ વહીવટી તંત્રે રાહતનો શ્વાસ લીધો છે.

 હાઈવે પર લોખંડી નાકાબંધી

શહેરમાં પ્રવેશતા મુખ્ય માર્ગો પર પણ પોલીસે સખત વ્યવસ્થા ગોઠવી છે. આખલોલ જકાતનાકા જેવા મહત્વના એન્ટ્રી પોઈન્ટ પર વહેલી સવારથી જ લોખંડી નાકાબંધી ગોઠવવામાં આવી છે. હાઈવે પરથી આવતા તમામ વાહનોને રોકીને તપાસ કરવામાં આવી રહી છે. ખાસ કરીને ફોર વ્હીલર વાહનો પર વધુ ધ્યાન આપવામાં આવી રહ્યું છે.

પોલીસ ટીમ ડ્રાઈવરોના લાયસન્સ, વાહનના RC બુક, ઈન્સ્યોરન્સ પેપર્સ તપાસે છે. તેમજ વાહનોની ડિકી ખોલાવીને સઘન તલાશી લેવામાં આવી રહી છે. આ અભિયાનને કારણે ગુનેગાર તત્વો અને ગેરકાયદેસર પ્રવૃત્તિઓમાં સામેલ લોકોમાં ભારે અસર જોવા મળી રહી છે.

કેમ જરૂરી છે આ અભિયાન?

રાજ્ય સરકાર અને પોલીસ વિભાગ દ્વારા રાજ્યવ્યાપી સ્તરે કાયદો-વ્યવસ્થા મજબૂત કરવા માટે વિવિધ અભિયાનો ચલાવવામાં આવી રહ્યાં છે. ‘ઓપરેશન ડેલ્ટા હન્ટ’ આમાંનું એક મહત્વનું પગલું છે. સરહદી વિસ્તારોમાંથી ગેરકાયદેસર રીતે આવતા તત્વોને રોકવા, માફિયા અને અન્ય અપરાધીઓને નાકામ બનાવવા માટે આવા આકસ્મિક ચેકિંગ અત્યંત અસરકારક સાબિત થઈ રહ્યાં છે.

ભાવનગર જેવા શહેરમાં ઔદ્યોગિક એકમો, બંદર અને વેપારી પ્રવૃત્તિઓને કારણે વસ્તીનું ઘનત્વ વધુ છે. આવી સ્થિતિમાં સુરક્ષા વ્યવસ્થા કડક રાખવી જરૂરી છે. પોલીસના આ પગલાથી સામાન્ય નાગરિકોને પણ સુરક્ષિત વાતાવરણનો અનુભવ થઈ રહ્યો છે.

 પોલીસની તૈયારી અને વ્યૂહરચના

ભાવનગરના પોલીસ અધિકારીઓએ જણાવ્યું છે કે આ અભિયાન ફક્ત એક દિવસ અથવા બે દિવસનું નથી, પરંતુ સતત અને વ્યવસ્થિત રીતે ચાલુ રહેશે. વિવિધ ટીમોને ફરજ પર મૂકવામાં આવી છે. ટેક્નોલોજીનો ઉપયોગ કરીને CCTV કેમેરા, ડ્રોન અને અન્ય સાધનો દ્વારા પણ નજર રાખવામાં આવી રહી છે.

એક વરિષ્ઠ પોલીસ અધિકારીએ કહ્યું, “અમારો ઉદ્દેશ્ય નિર્દોષ લોકોને હેરાન ન કરવાનો છે, પરંતુ શંકાસ્પદ તત્વોને તપાસીને શહેરને સુરક્ષિત બનાવવાનો છે. આ અભિયાનથી સમાજના દરેક વર્ગને લાભ થશે.”

 સ્થાનિકોની પ્રતિક્રિયા

ભાવનગરના વેપારીઓ, વિદ્યાર્થીઓ અને સામાન્ય નાગરિકો આ અભિયાનને સકારાત્મક દૃષ્ટિકોણથી જોઈ રહ્યા છે. એક સ્થાનિક વેપારીએ કહ્યું, “રાત્રે બહાર નીકળતી વખતે હવે ડર લાગતો નથી. પોલીસની હિલચાલ જોતાં સારું લાગે છે.”

બસ ડેપો પર કામ કરતા એક કર્મચારીએ જણાવ્યું કે, “આવા ચેકિંગથી અસામાજિક તત્વો દૂર રહેશે અને મુસાફરોને પણ સુરક્ષા અનુભવાશે.”

આગળની યોજના

પોલીસ સૂત્રો અનુસાર આ અભિયાન આગામી દિવસોમાં વધુ તીવ્ર બનાવવામાં આવશે. રેલ્વે સ્ટેશન, બંદર વિસ્તાર અને અન્ય સંવેદનશીલ સ્થળોએ પણ તપાસ વધારવાની તૈયારી છે. સાથે જ જાગૃતિ અભિયાન પણ ચલાવવામાં આવશે જેથી લોકો પોતાની આસપાસની શંકાસ્પદ પ્રવૃત્તિઓની માહિતી પોલીસને આપી શકે.


‘ઓપરેશન ડેલ્ટા હન્ટ’ એ માત્ર એક પોલીસ અભિયાન નથી, પરંતુ સમાજને સુરક્ષિત અને સુવ્યવસ્થિત બનાવવાની પ્રતિબદ્ધતાનું પ્રતીક છે. ભાવનગર પોલીસના આ સક્રિય પગલાએ એક વારંવાર સાબિત કર્યું છે કે કાયદાનું શાસન જ સાચા અર્થમાં વિકાસ અને પ્રગતિનો આધાર છે.

આ અભિયાન સફળ રહે અને ભાવનગરને વધુ સુરક્ષિત શહેર બનાવવામાં મદદરૂપ થાય એવી દરેક નાગરિકની અપેક્ષા છે. પોલીસના આ પ્રયાસોને લોકોનો સહયોગ મળે તો અપરાધમુક્ત સમાજનું સપનું સાકાર થવામાં વાર નહીં લાગે.

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 5 Jun 2026