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यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Monday, 12 October 2026

October 12, 2026

MBS का किला दरक रहा है - अमेरिका से पाकिस्तान तक सबने खींचे हाथ, यमन के अंसारुल्लाह ने सऊदी अरब को बनाया जंग का मैदान

MBS का किला दरक रहा है - अमेरिका से पाकिस्तान तक सबने खींचे हाथ, यमन के अंसारुल्लाह ने सऊदी अरब को बनाया जंग का मैदान
-Friday World Oct 12,2026 
सना पर हमले के बाद अंसारुल्लाह का बड़ा ऐलान - मक्का-मदीना को छोड़कर पूरा सऊदी अरब अब युद्ध क्षेत्र, क्या आले सऊद के अंत की शुरुआत हो गई?

11 साल से यमन पर बम बरसा रहे आले सऊद की हुकूमत आज खुद अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। सना इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सऊदी बमबारी के बाद अंसारुल्लाह ने वो ऐलान कर दिया जिसका डर रियाद को सालों से था। उन्होंने साफ कह दिया है कि मक्का और मदीना को छोड़कर पूरा सऊदी अरब अब जंग का मैदान है। दुनिया की सभी एयरलाइंस को चेतावनी दी गई है कि वे इन दो पवित्र शहरों के अलावा सऊदी के किसी भी एयरपोर्ट के लिए फ्लाइट बुक न करें।

यह लड़ाई शिया-सुन्नी की नहीं है, यह जालिम और मजलूम की लड़ाई है।

2015 से जारी है जुल्म की दास्तान

मार्च 2015 से सऊदी अरब ने खाड़ी देशों, अमेरिका और यूरोप के हथियारों और खुफिया मदद से दुनिया के सबसे गरीब अरब देश यमन पर बमबारी शुरू की। इस 11 साल की जंग में क्या-क्या नहीं किया गया।

यमन के सभी इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स को मलबे में बदल दिया गया। समंदर के पोर्ट्स पर कब्जा कर लिया गया ताकि दवा और खाने का एक दाना भी अंदर न जा सके। यमनी एयरवेज के जहाजों को रनवे पर ही बमबारी करके तबाह कर दिया गया। स्कूल, अस्पताल, मस्जिदें, बाजार और कब्रिस्तान तक सऊदी बमबारी से नहीं बचे।

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक इस ब्लॉकेड और बमबारी से अब तक लगभग 4 लाख यमनी शहीद हो चुके हैं, जिनमें ज्यादातर बच्चे और औरतें हैं। लेकिन तब दुनिया को सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर याद नहीं आया, तब किसी को बेगुनाहों की मौत पर अफसोस नहीं हुआ।

अब बाजी पलट गई है

यमन के अंसारुल्लाह ने इन 11 सालों में खुद को खामोशी से मजबूत किया। ईरान की मदद से नहीं, बल्कि अपने हौसले से। और सना पर ताजा हमले के बाद उन्होंने जवाबी कार्रवाई शुरू की।

पहले सऊदी अरामको के ऑयल रिफाइनरियों को ड्रोन और मिसाइलों से तबाह किया, जिससे सऊदी की आधी तेल सप्लाई रुक गई। अब निशाने पर सऊदी के एयरपोर्ट्स हैं - जेद्दा, रियाद, आभा, जाजान। जब सऊदी के एयरपोर्ट जल रहे हैं तो अब दुनिया को अचानक सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर की चिंता होने लगी है।

यह दोहरा मापदंड क्यों? जब यमन के बच्चे भूख से मर रहे थे तब दुनिया कहां थी?

MBS अकेले पड़ गए - कोई मदद को तैयार नहीं

सबसे बड़ी खबर रियाद के महल से आ रही है। मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने इस जंग से निकलने के लिए हर दरवाजा खटखटाया है।

सूत्रों के मुताबिक MBS ने अमेरिका से गुहार लगाई, इजराइल से मदद मांगी, तुर्की को मनाने की कोशिश की और पाकिस्तान से भी सैन्य मदद की भीख मांगी। लेकिन सबने साथ छोड़ दिया है।

अमेरिका अब यमन में नया फ्रंट नहीं खोलना चाहता। इजराइल खुद गाजा में फंसा हुआ है। तुर्की ने साफ कह दिया है कि वह अरबों की आपसी जंग में नहीं पड़ेगा। और पाकिस्तान ने भी अपनी सेना भेजने से इनकार कर दिया है। अरब का सबसे अमीर देश, जिसके पास दुनिया के सबसे महंगे अमेरिकी हथियार हैं, आज अरब के सबसे गरीब देश के सामने बेबस खड़ा है।

महल के अंदर खूनी रंजिश

बाहर की जंग तो एक तरफ, अंदर महल की दीवारें भी दरकने लगी हैं। रियाद से आ रही खबरों के मुताबिक शाही परिवार के अंदर MBS के खिलाफ गुस्सा बढ़ रहा है। कहा जा रहा है कि MBS ने अपनी जिद और यमन जंग की वजह से हुकूमत की नींव में ही नमक डाल दिया है।

देश का खजाना जंग में लुट रहा है, NEOM जैसा सपना धराशायी हो रहा है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सऊदी की साख गिर रही है। ऐसे में शाही परिवार में बदलाव की बातें तेज हो गई हैं। क्या जल्द ही सऊदी में बड़ी तख्तापलट होने वाली है? यह सवाल अब रियाद की गलियों में आम है।

साफ है, यह सिर्फ शुरुआत है। जब तक यमन पर जुल्म बंद नहीं होगा, तब तक सऊदी में तेल के कुएं और एयरपोर्ट सुलगते रहेंगे। एक मजलूम कौम ने एक जालिम सल्तनत को घुटनों पर ला दिया है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World Oct 12,2026 

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October 12, 2026

आम आदमी को बड़ा झटका! नायरा के बाद Jio-bp ने भी बढ़ाए दाम, पेट्रोल ₹5 और डीजल ₹3 महंगा

आम आदमी को बड़ा झटका! नायरा के बाद Jio-bp ने भी बढ़ाए दाम, पेट्रोल ₹5 और डीजल ₹3 महंगा
-Friday World Oct 12,2026 
रोज बाइक और कार से ऑफिस जाने वालों के लिए बुरी खबर है। जेब पर एक और बोझ बढ़ गया है। नायरा एनर्जी के बाद अब देश की दूसरी बड़ी प्राइवेट फ्यूल कंपनी Jio-bp ने भी पेट्रोल-डीजल के दामों में भारी बढ़ोतरी कर दी है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज समर्थित Jio-bp ने पेट्रोल में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 3 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया है। कंपनी ने बताया कि नए रेट रविवार, 12 अक्टूबर सुबह 6 बजे से लागू हो गए हैं। इससे पहले 3 अक्टूबर को नायरा एनर्जी ने भी इतना ही दाम बढ़ाया था।

क्यों बढ़ रहे हैं दाम?
इस बढ़ोतरी के पीछे पश्चिम एशिया में चल रहा तनाव बड़ी वजह है। इजरायल-ईरान और हूती विद्रोहियों के हमलों के कारण हॉर्मुज की खाड़ी से तेल की सप्लाई पर असर पड़ा है। हॉर्मुज से ही दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल गुजरता है। इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल 85 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया है।

ग्लोबल मार्केट में कच्चा तेल महंगा होने से प्राइवेट कंपनियों का मार्केटिंग मार्जिन बुरी तरह घट गया है। प्राइवेट कंपनियां सरकारी कंपनियों की तरह सब्सिडी नहीं लेतीं, इसलिए उन्हें मजबूरन दाम बढ़ाने पड़े हैं।

सरकारी पंपों पर राहत बरकरार
एक तरफ प्राइवेट कंपनियां दाम बढ़ा रही हैं, तो दूसरी तरफ सरकारी तेल कंपनियां - Indian Oil, BPCL और HPCL ने अपने दामों में कोई बदलाव नहीं किया है।

लेकिन प्राइवेट Jio-bp और नायरा के पंपों पर अब पेट्रोल सरकारी पंपों से 5 रुपये और डीजल 3 रुपये महंगा मिल रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर क्रूड महंगा रहा तो जल्द ही सरकारी कंपनियां भी दाम बढ़ाने पर मजबूर हो सकती हैं।

आम लोगों को सलाह है कि फिलहाल सरकारी पंपों से ही तेल भरवाएं, प्राइवेट पंपों पर जाने से बचें।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World Oct 12,2026 

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October 12, 2026

यमन में जमीर की जीत! बिना लड़े अंसारुल्लाह के सामने हथियार डाल रहे सऊदी समर्थित लड़ाके, गले लगाकर कर रहे हैं इस्तकबाल

यमन में जमीर की जीत! बिना लड़े अंसारुल्लाह के सामने हथियार डाल रहे सऊदी समर्थित लड़ाके, गले लगाकर कर रहे हैं इस्तकबाल
-Friday World Oct 12,2026 
यमन के रेगिस्तान से आज ऐसी तस्वीरें आ रही हैं जो जंग के इतिहास में बहुत कम देखने को मिलती हैं। बड़े पैमाने पर सऊदी समर्थित यमन के लड़ाके बिना एक गोली चलाए अंसारुल्लाह (हूती) के सामने आत्मसमर्पण कर रहे हैं। यह समर्पण डर से नहीं, बल्कि जमीर जागने से हो रहा है।

ताजा तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि अंसारुल्लाह के लड़ाके ISIS के आतंकियों की तरह आत्मसमर्पण करने वालों पर गाड़ी नहीं चढ़ा रहे, उन्हें जलील नहीं कर रहे, बल्कि उन्हें सम्मान दे रहे हैं, गले लगा रहे हैं। हथियार जमीन पर पड़े हैं और भाई भाई को गले लगा रहा है।

हक़्क़ानियत है बड़ी वजह
अंसारुल्लाह को इतनी आसानी से मिल रही इस बड़ी कामयाबी के पीछे सिर्फ उनके हौसले और जज्बे से कहीं ज्यादा उनकी हक़्क़ानियत है। यमन में सऊदी के फरेब में अपने ही भाइयों से लड़ रहे लड़ाकों का दिल अब अंसारुल्लाह का पैगाम झिंझोड़ रहा है।

अंसारुल्लाह जिस भी शहर की घेराबंदी करते हैं, उससे पहले शहर के अंदर एक पैगाम भेज देते हैं। पैगाम बहुत साफ होता है -

"तुम लोग सऊदी मक्कारों के धोखे में हो। तुम इस वक्त अपने लिए नहीं, बल्कि अमरीका और इस्राइल की मदद के लिए लड़ रहे हो। ये सऊदी शैतान अमरीका इस्राइल के कहने पर तुमको मोहरा बनाकर हम पर हमले करवा रहे हैं, ताकि हम फिलिस्तीनियों की मदद न कर सकें। ये मुसलमानों को मुसलमानों से लड़वा रहे हैं, जिसका सीधा फायदा अमरीका और इस्राइल को पहुंचेगा और नुकसान फिलिस्तीन के मजलूमों को होगा।"

पैगाम में आगे कहा जाता है - "ये बिके हुए लोग हैं, इनके गुलाम हैं। इन्होंने फिलिस्तीन के लिए एक भी एयर स्ट्राइक नहीं किया, लेकिन हमारे भाइयों पर बम बरसा रहे हैं, हमारे सरमाए तबाह कर रहे हैं।"

बिना शर्त माफी का ऐलान
इस पैगाम का सबसे असरदार हिस्सा आखिर में आता है - "तुम मेरे भाई हो, हम खून खराबा नहीं चाहते। अगर तुम हथियार डाल दो तो हम तुम्हें बिना शर्त माफी दे देंगे।"

यही पैगाम यमन के लोगों का जमीर जगा रहा है। सऊदी के फरेब में आए यमन के जिन मुसलमानों का जमीर जाग जाता है और उन्हें सच्चाई का एहसास होता है, वो फौरन अपने हथियार डाल देते हैं। और अंसारुल्लाह फौरन उनको अपने गले लगा लेते हैं, उनका इस्तकबाल करते हैं।

यही वजह है कि आज यमन में जंग हथियारों से ज्यादा हक और बातिल की पहचान की जंग बन गई है, जहां गोलियों से ज्यादा पैगाम असर कर रहा है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World Oct 12,2026 

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October 12, 2026

बाराखंभा रोड पर जन-सैलाब! 5 लाख लोगों की सुनामी, बाराखंभा से सुप्रीम कोर्ट तक लोकतंत्र बचाओ मार्च - नेल्सन मंडेला का मंत्र गूंजा

बाराखंभा रोड पर जन-सैलाब! 5 लाख लोगों की सुनामी, बाराखंभा से सुप्रीम कोर्ट तक लोकतंत्र बचाओ मार्च - नेल्सन मंडेला का मंत्र गूंजा
-Friday World 12,20,2026 
दिल्ली की सड़कों पर आज इतिहास लिख दिया गया। बाराखंभा रोड पर करीब 4 से 5 लाख लोगों की ऐसी सुनामी उमड़ी कि पूरा लुटियंस दिल्ली जाम हो गया। आलम ये है कि पैर रखने की जगह नहीं बची। इसी भीड़ में अकेले समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव अपने साथ 80 हजार समर्थकों को लेकर पहुंचे हैं।

यह सिर्फ भीड़ नहीं, एक संदेश है। नेल्सन मंडेला ने कहा था - "हर बार कोई काम तब तक नामुमकिन लगता है, जब तक आप उसे पूरा न कर लें।" आज उसी नामुमकिन को मुमकिन करने के लिए लोग सड़कों पर हैं।

बाराखंभा से सुप्रीम कोर्ट तक पैदल मार्च
प्रशासन ने पहले ही 6 मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए थे - बाराखंभा रोड, मंडी हाउस, सुप्रीम कोर्ट, ITO सहित कई स्टेशन। सड़कों पर मल्टी-लेयर बैरिकेडिंग, हजारों CRPF और दिल्ली पुलिस के जवान तैनात हैं। फिर भी लोग रुक नहीं रहे। अब बाराखंभा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक पैदल मार्च शुरू हो गया है। हाथों में तख्तियां हैं - "March For Democracy", "Stop Vote Chori - CEC Resign", "Save Democracy"।

इस मार्च का नेतृत्व विपक्ष का INDIA गठबंधन कर रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने खुद मोर्चा संभाल रखा है। खबर है कि राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका भी दायर करने वाले हैं। SIR में अनियमितताओं और वोट चोरी के आरोपों को लेकर यह पूरा प्रदर्शन हो रहा है।

नेहा बोरा और राहुल गांधी एक साथ
इस जनसैलाब में एक तस्वीर सबसे ज्यादा चर्चा में है - CJP की नेता नेहा बोरा और राहुल गांधी एक साथ एक मंच पर, एक साथ मार्च में। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके की गिरफ्तारी के बाद से ही इस आंदोलन को विपक्ष का खुला समर्थन मिल गया है। अब यह लड़ाई सिर्फ CJP की नहीं, पूरे विपक्ष की लड़ाई बन गई है।

दिल्ली पुलिस ने सुबह ही कहा था कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की इजाजत नहीं है, लेकिन जनतंत्र में जनता को कौन रोक सकता है? बाराखंभा रोड आज जनतंत्र की नई जंतर-मंतर बन गया है।

सवाल एक ही है - क्या यह भीड़ सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच पाएगी? क्या चुनाव आयोग पर सवालों का जवाब मिलेगा? फिलहाल दिल्ली की हर नजर इसी मार्च पर टिकी है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World 12,20,2026 

#BarakhambaRoad #DelhiProtest #SupremeCourtMarch #INDIAbloc #RahulGandhi #AkhileshYadav #DemocracyMarch #CECResign #VoteChori #DelhiNews

Sunday, 11 October 2026

October 11, 2026

મફતનો મોહ છૂટતો નથી! 2 કરોડના આલીશાન ફ્લેટ મળ્યા છતાં 4 મંત્રી સહિત 40 ધારાસભ્યો જૂના ક્વાર્ટર્સ પર કબજો જમાવીને બેઠા

મફતનો મોહ છૂટતો નથી! 2 કરોડના આલીશાન ફ્લેટ મળ્યા છતાં 4 મંત્રી સહિત 40 ધારાસભ્યો જૂના ક્વાર્ટર્સ પર કબજો જમાવીને બેઠા
-Friday World Oct 12,2026
ગાંધીનગરમાં જનતાના પરસેવાના ટેક્સના કરોડો રૂપિયા ખર્ચીને ધારાસભ્યો માટે સ્વર્ગ જેવા લક્ઝુરિયસ ફ્લેટ બનાવી દેવાયા છે. 220 કરોડના ખર્ચે સેક્ટર-17 માં 216 જેટલા ફ્લેટ તૈયાર છે. દરેક ફ્લેટ 2500 સ્ક્વેર ફૂટથી મોટો, બે માસ્ટર બેડરૂમ, ડ્રોઈંગ-ડાઈનીંગ, વેઈટીંગ રૂમ, ઓફિસ, એસી, ટીવી સહિતની ફાઈવ સ્ટાર સુવિધાઓથી સજ્જ છે. બજાર કિંમત ગણો તો એક ફ્લેટની કિંમત અઢી કરોડથી ઓછી નથી.

ગત દિવાળીથી બધા જ ધારાસભ્યોને આ ફ્લેટ ફાળવી પણ દેવાયા છે. આ વાતને આજે એક વર્ષ થવા આવ્યું છે, છતાં પ્રજાના કહેવાતા સેવકોનો મફતનો મોહ છૂટતો નથી. વિધાનસભાના ઉપાધ્યક્ષથી લઈને 4 મંત્રી સહિત 40થી વધુ ધારાસભ્યોએ હજી સુધી જૂના એમ.એલ.એ. ક્વાર્ટર્સ ખાલી કર્યા નથી.

શાસક-વિપક્ષ ભાઈ-ભાઈ

આ કિસ્સામાં ભાજપ, કોંગ્રેસ અને આમ આદમી પાર્ટી - બધા એક સમાન છે. મફત ભાડું અને સરકારી સુવિધા ભોગવવાની વાત આવે ત્યારે શાસક અને વિપક્ષ 'ભાઈ-ભાઈ' બની જાય છે.

ક્વાર્ટર્સ ખાલી ન કરનારાઓમાં શિક્ષણમંત્રી રિવાબા જાડેજા, વનમંત્રી પ્રવીણ માળી, શ્રમ-રોજગાર મંત્રી કાંતિ અમૃતિયા અને મંત્રી સ્વરૂપજી ઠાકોર જેવા નામો છે. આ સિવાય ભાજપના સી.જે.ચાવડા, હીરા સોલંકી, સી.કે.રાઉલજી, પભુભા માણેક સહિત અનેક ધારાસભ્યો જૂના આવાસ પર કબજો જમાવીને બેઠા છે. કોંગ્રેસ પ્રદેશ પ્રમુખ અમિત ચાવડા, જિગ્નેશ મેવાણી, શૈલેષ પરમાર અને આપના ચૈતર વસાવા, હેમંત ખવા પણ આ યાદીમાં છે.

રોજનું સવા રૂપિયું ભાડું!

આ જૂના ક્વાર્ટર્સનું ભાડું સાંભળીને તમે ચોંકી જશો - દાયકાઓ જૂના નિયમ મુજબ ભાડું માત્ર રોજનું સવા રૂપિયો એટલે કે મહિને 37.50 રૂપિયા જ છે. આટલી સસ્તી સુવિધા ગાંધીનગરમાં બીજે ક્યાંય ન મળે. એટલે જ આ મફતખોરીનો લાભ લેવાય છે.

ક્વાર્ટર્સ બન્યા હોસ્ટેલ-ગેસ્ટ હાઉસ

સૌથી ચોંકાવનારી વાત એ છે કે આ ધારાસભ્યોએ સરકારી આવાસને જાણે વારસાની મિલકત સમજી લીધી છે. તપાસમાં બહાર આવ્યું છે કે ઘણા ધારાસભ્યોએ આ ક્વાર્ટર્સ પોતાના સગા-સંબંધીઓ, સ્પર્ધાત્મક પરીક્ષાની તૈયારી કરતા વિદ્યાર્થીઓ અને પોતાના સુરક્ષા કર્મીઓને બારોબાર રહેવા આપી દીધા છે. સરકારી આવાસ આજે ખાનગી ગેસ્ટ હાઉસ અને હોસ્ટેલમાં ફેરવાઈ ગયા છે. ચર્ચા તો એવી પણ છે કે કેટલાક ધારાસભ્યો બારોબાર આ ક્વાર્ટર્સનું ભાડું પણ ઉઘરાવે છે.

એક તરફ સેંકડો સરકારી કર્મચારીઓ સરકારી આવાસ માટે વર્ષોથી વેઇટિંગ લિસ્ટમાં છે. જો આ 40 ક્વાર્ટર્સ ખાલી થાય તો તેમને મોટી રાહત મળે. તંત્રએ નોટિસો પણ આપી છે, પણ રાજકીય દબાણ હેઠળ વહીવટી તંત્ર કાર્યવાહી કરી શકતું નથી. એટલે જ ધારાસભ્યો એક હાથે 2 કરોડના લક્ઝુરિયસ ફ્લેટ અને બીજા હાથે સવા રૂપિયાવાળા જૂના ક્વાર્ટર્સ - બંને સુવિધા એકસાથે ભોગવી રહ્યા છે.

જનતા સવાલ પૂછી રહી છે કે જ્યારે કરોડોના ફ્લેટ આપી દીધા છે તો પછી આ મફતનો મોહ કેમ?

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World Oct 12,2026

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October 11, 2026

ગઢડામાં કાયદાનો દબદબો! પાટીદાર યુવક પર હુમલો કરનાર ત્રણ શખ્સોનું ઘટનાસ્થળે રિકન્સ્ટ્રક્શન, ફરિયાદીના ઘરે જ માફી મંગાવી

ગઢડામાં કાયદાનો દબદબો! પાટીદાર યુવક પર હુમલો કરનાર ત્રણ શખ્સોનું ઘટનાસ્થળે રિકન્સ્ટ્રક્શન, ફરિયાદીના ઘરે જ માફી મંગાવી
-Friday World Oct 11,2026 
                    પ્રતીકાત્મક તસવીર 
બોટાદ જિલ્લાના ગઢડા તાલુકાના જીનનાકા વિસ્તારમાં થયેલા એક ચકચારી મારામારીના કેસમાં ગઢડા પોલીસે કડક અને ઉદાહરણરૂપ કાર્યવાહી કરી છે. પાટીદાર યુવક પર હુમલો કરનાર ત્રણેય આરોપીઓને પોલીસે ઝડપી પાડીને માત્ર જેલમાં જ નથી પુર્યા, પરંતુ તેમને ઘટના સ્થળે લઈ જઈને આખી ઘટનાનું રિકન્સ્ટ્રક્શન કરાવ્યું છે અને ફરિયાદીના ઘર સામે જ ઉઠક-બેઠક કરાવી માફી મંગાવી છે.

શું હતી ઘટના?
ગત તારીખ 8 ઓક્ટોબરના રોજ ગઢડાના જીનનાકા વિસ્તારમાં સામાન્ય બોલાચાલી જેવી નજીવી બાબતે ઝઘડો થયો હતો. આ ઝઘડામાં પાટીદાર યુવક દિપકભાઈ ઠાકરશીભાઈ લખાણી પર ત્રણ શખ્સોએ હુમલો કરી ગંભીર રીતે માર માર્યો હતો. હુમલામાં દિપકભાઈને માથા અને શરીરના ભાગે ગંભીર ઇજાઓ પહોંચી હતી, જેના કારણે તેમને તાત્કાલિક સારવાર માટે બોટાદની હોસ્પિટલમાં ખસેડવા પડ્યા હતા. આ મામલે ગઢડા પોલીસ સ્ટેશનમાં ત્રણેય શખ્સો વિરુદ્ધ હત્યાની કોશિશ (Attempt to Murder) ની કલમ હેઠળ ફરિયાદ નોંધાઈ હતી.

પોલીસની ત્વરિત કાર્યવાહી
ફરિયાદ નોંધાતાની સાથે જ ગઢડા પોલીસ એક્શનમાં આવી ગઈ. પોલીસે ગણતરીના કલાકોમાં જ ફૈઝલ, રમજાન અને ખાલિદ નામના ત્રણેય આરોપીઓને ઝડપી પાડ્યા હતા. ત્યારબાદ પોલીસે કાયદાકીય પ્રક્રિયા મુજબ આગળની કાર્યવાહી શરૂ કરી.

ઘટનાસ્થળે રિકન્સ્ટ્રક્શન અને હથિયાર જપ્ત
આ કેસમાં સૌથી મહત્વની કાર્યવાહી બીજા દિવસે કરવામાં આવી. પોલીસ ત્રણેય આરોપીઓને લઈને જીનનાકા વિસ્તારમાં ઘટના સ્થળે પહોંચી. ત્યાં પંચનામાનું રોજકામ અને ક્રાઈમ સીન રિકન્સ્ટ્રક્શન કરવામાં આવ્યું. પોલીસે આરોપીઓની ઊલટતપાસ કરી કે પાટીદાર યુવકને કઈ રીતે માર્યો, કયા હથિયારથી માર્યો અને ત્યારબાદ હથિયાર ક્યાં છુપાવ્યું. આરોપીઓની નિશાનદેહી પરથી પોલીસે હુમલામાં વપરાયેલ હથિયાર પણ કબજે કર્યું છે, જે કોર્ટમાં મહત્વનો પુરાવો બનશે.

ફરિયાદીના ઘર સામે ઉઠક-બેઠક
પોલીસની આ કાર્યવાહી માત્ર કાગળ પર પૂરી નથી થઈ. પોલીસે ત્રણેય શખ્સોને સીધા ફરિયાદી દિપકભાઈના ઘર સામે લઈ જઈને જાહેરમાં ઉઠક-બેઠક કરાવી અને પીડિત પરિવારની માફી મંગાવી. પોલીસનો આ કડક સંદેશ હતો કે કાયદો હાથમાં લેનારને કોઈપણ સંજોગોમાં છોડવામાં નહીં આવે.

આ રિકન્સ્ટ્રક્શન દરમિયાન જીનનાકા વિસ્તારમાં મોટી સંખ્યામાં લોકોના ટોળા એકઠા થઈ ગયા હતા. લોકોએ ગઢડા પોલીસની આ કામગીરીને બિરદાવી હતી. સ્થાનિક લોકોનું કહેવું છે કે આવી કાર્યવાહીથી અસામાજિક તત્વોમાં ડર પેદા થશે.

હાલ ત્રણેય આરોપીઓ પોલીસ કસ્ટડીમાં છે અને આગળની કાયદેસરની કાર્યવાહી ચાલુ છે. ગઢડા પોલીસે સ્પષ્ટ કર્યું છે કે ગઢડા વિસ્તારમાં કોઈપણ પ્રકારની ગુંડાગીરી ચલાવી લેવામાં આવશે નહીં.

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World Oct 11,2026 


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October 11, 2026

फॉर्म 7 के पीछे मक़सद वोट चोरी ; आरएसएस-भाजपा मास्टरमाइंड !!

फॉर्म 7 के पीछे मक़सद वोट चोरी ; आरएसएस-भाजपा मास्टरमाइंड !!
-Friday Worday Oct 11,2026
के. नीला कलबुर्गी, ✍ अनुवाद : संजय पराते

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के एक प्रतिनिधिमंडल ने 1 अक्टूबर, 2026 को बीदर ज़िले के भालकी तहसील के एनकूर गांव का दौरा किया और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत फॉर्म 7 पर आपत्तियां जमा करने से जुड़े घटनाक्रमों का गहराई से अध्ययन किया। प्रतिनिधिमंडल में सीपीआई(एम) की राज्य सचिवमंडल की सदस्य के. नीला और पार्टी की बीदर जिला संगठन समिति के सदस्य शशिकांत डांगे, प्रभु संतोषकर और गौसोद्दीन शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल के दौरे से कई बातें सामने आईं हैं।

एनकूर : सांप्रदायिक सद्भाव के लिए मशहूर गांव

एनकूर गांव में करीब 2,300 मतदाता हैं, जिनमें से करीब 725 मुस्लिम मतदाता हैं। यह गांव ऐतिहासिक रूप से सांप्रदायिक सद्भाव के लिए जाना जाता है। चाहे मुहर्रम हो या दूसरे समुदायों के त्योहार, लोग पारंपरिक रूप से आपसी सद्भाव के माहौल में उन्हें मनाते आए हैं। गांव के सभी मुस्लिम लोग अच्छी कन्नड़ बोलते हैं। एनकूर के लोग गर्व से कहते हैं कि रजाकार आंदोलन के समय भी गांव में एक भी बुरी घटना नहीं हुई।

सीपीआई(एम) प्रतिनिधिमंडल ने फॉर्म 7 पर आपत्तियां जमा करने के पीछे के कारणों का अध्ययन करने के लिए इस गांव का दौरा किया। दौरे के दौरान, लगभग सभी समुदायों के लोगों ने प्रतिनिधिमंडल से बातचीत की और अपने विचार साझा किए।

प्रतिनिधिमंडल को मिली जानकारी के अनुसार, खास तौर पर मुस्लिम समुदाय के मतदाताओं के खिलाफ नाम हटाने के लिए फॉर्म 7 में कुल 266 आवेदन जमा किए गए थे। इन सभी आवेदनों को तीन लोगों ने ही जमा किया था। 

एनकूर में दो पोलिंग बूथ -- बूथ नंबर 251 और 252 -- हैं।दोनों बूथों के बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) को फॉर्म 7 पर आपत्तियां दी गईं, और मांग की गई कि उन्हें 22 सितंबर, 2026 को अपलोड किया जाए। कथित तौर पर दबाव के कारण, बूथ नंबर 252 से 65 आवदेन और बूथ नंबर 251 से दो आवेदन अपलोड किए गए। प्रतिनिधिमंडल को पता चला कि बाकी 198 आवेदनों को भी अपलोड करने के लिए भाजपा नेताओं का दबाव था। बूथ नंबर 251 के मामले में, सिर्फ़ दो आवेदन ही अपलोड किए जा सके, क्योंकि बीएलओ के परिवार का एक सदस्य बीमार पड़ गया था।

आवेदन वापस करने की मांग

जैसे ही फार्म 7 के कथित गलत इस्तेमाल की खबर सामने आई, तीनों शिकायत करने वालों -- नागनाथ, गुरैया और गौसुद्दीन -- ने 24 सितंबर को तहसील चुनाव अधिकारी को एक पत्र दिया, जिसमें कहा गया था कि वे अपनी शिकायतें वापस लेना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वे फॉर्म 7 को ठीक तरीके से नहीं समझ पाए थे, प्रक्रिया को लेकर भ्रमित थे और अपने आवेदन के समर्थन में उनके पास कोई दस्तावेज नहीं थे।

सीपीआई(एम) प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, इस मुद्दे पर गांव वालों ने शिकायतकर्ताओं के साथ बहस की। उन्होंने आरोप लगाया है कि जब यह पूरा मामला उजागर हुआ, तब तहसील चुनाव अधिकारी ने दोनों पक्षों के बीच अंदरूनी समझौता करवा दिया और मामले को खत्म कर दिया।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री द्वारा 1 अक्टूबर को चुनाव आयोग कार्यालय पर पांच घंटे तक विरोध प्रदर्शन करने के बाद ही भालकी तहसील के कुल 32 शिकायतकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई हैं।

सीपीआई(एम) प्रतिनिधिमंडल ने पाया कि फॉर्म 7 घोषणा भरकर भाजपा कार्यालय से शिकायतकर्ताओं को दिए गए थे, और फिर उन्हें इन फॉर्मों को बीएलओ के पास जमा करने के लिए कहा गया था। शिकायतकर्ताओं ने फॉर्म 7 में दिए गए स्व-घोषणा पर ध्यान नहीं दिया।

फॉर्म 7 के गलत इस्तेमाल के साथ-साथ, ज़रूरी समर्थित दस्तावेज़ दिए बिना मुस्लिम समुदाय के लोगों को निशाना बनाकर आपत्तियां जमा करना एक बड़ा मुद्दा बन गया है। झूठे शिकायतकर्ताओं के खिलाफ जैसे-जैसे कार्यवाही की मांग तेज हुई, शिकायतकर्ताओं ने लिखित रूप से, अपने आवेदन वापस लेने की मांग की, क्योंकि उन्हें कानूनी नतीजों का सामना करने में डर लग रहा था।

सीपीआई(एम) ने कहा है कि इस घटना क्रम से यह गंभीर सवाल खड़ा होता है कि क्या ज़मीनी स्तर पर पहले से ही कोई योजना बनाई गई थी कि किसके वोट हटाए जाएं और किनके जरिए आपत्ति दर्ज कराई जानी चाहिए।

पूर्व योजना को अमल में लाने का आरोप

प्रतिनिधिमंडल ने पाया है कि फॉर्म 7 में दिए गए स्व-घोषणा की गंभीरता के बारे में या तो शिकायतकर्ताओं को बताया नहीं गया या जानबूझकर उसे नज़रअंदाज़ किया गया, और इस योजना में शामिल लोगों को यह यकीन था कि वे कानूनी नतीजों से बच सकते हैं। एनकूर में फार्म 7 के आवदेन में जिन मुस्लिम मतदाताओं के नामों पर आपत्तियां की गई थीं, उनके पास अपनी पात्रता साबित करने वाले सभी ज़रूरी दस्तावेज़ थे। इसके बावजूद, उनके नामों पर आपत्तियां दर्ज की गई थीं। इन नामों को हटाने के लिए प्रशासनिक मशीनरी के अंदर के लोगों का इस्तेमाल करने की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता। कुल मिलाकर, यह घटनाक्रम मुस्लिम मतदाताओं को निशाना बनाने और उनके नाम मतदाता सूचियों से हटाने के साफ इरादे को दिखाता है।

दूसरे गांवों में भी फॉर्म 7 के आवेदन

एनकूर अकेला ऐसा गांव नहीं है, जहां कथित तौर पर ऐसी घटना हुई है। उसी भालकी तहसील के नित्तूर बी गांव में चार पोलिंग बूथ हैं, और कथित तौर पर 400 से ज़्यादा मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फॉर्म 7 भरकर आपत्तियां दर्ज की गई हैं। खटक चिंचोली, उचा, हुपला, लखन गांव, मेटिमेलकुंडा, नवदगी, डावरगांव और भालकी शहर के पांच पोलिंग बूथों पर भी फॉर्म 7 पर आपत्तियां जमा की गई हैं। पार्टी को मिली जानकारी के अनुसार, भालकी विधानसभा क्षेत्र में फॉर्म 7 के कुल 3,079 आवेदन जमा किए गए हैं।

पूरे कर्नाटक में फॉर्म 7 का खेल

आंकड़ों के अनुसार, कर्नाटक के बीदर जिले के भालकी तहसील में फॉर्म 7 के जरिए सबसे ज़्यादा 3,079 आवेदन दाखिल किए गए हैं। बबलेश्वर में लगभग 1,647 आवेदन फॉर्म 7 के साथ दाखिल किए गए हैं और यह दूसरे स्थान पर है। इस तरह, 224 विधानसभा सीटों में से, भालकी और बबलेश्वर में दर्ज की गई आपत्तियां, पूरे राज्य में दर्ज आपत्तियों का लगभग छठा हिस्सा है। दोनों सीटों पर कुल मिलाकर 4,726 आपत्तियां दर्ज की गई हैं, जो कर्नाटक में दर्ज कुल आपत्तियों का 16.1 प्रतिशत है। पूरे कर्नाटक में भालकी और बबलेश्वर ही दो ऐसी सीटें हैं, जहां नाम हटाने के लिए आए आवेदन, नए मतदाताओं के पंजीयन के लिए आए आवेदनों से ज़्यादा हैं।

जिन दूसरी सीटों पर फॉर्म 7 आवेदनों की संख्या ज़्यादा है, उनमें मेलुकोटे में 648, शिकारीपुरा में 617, हनूर में 545, रामनगर में 503, शिवमोग्गा में 485, बल्लारी सिटी में 423, हदगली में 417 और मदिकेरी में 406 आवेदन शामिल हैं।

अंतिम समय में आपत्तियों की बाढ़

सीपीआई(एम) ने पाया है कि अगस्त और सितंबर के ज़्यादातर समय में आपत्तियां जमा करने की रफ़्तार बहुत धीमी थी। भालकी में, 21 सितंबर तक फ़ॉर्म 7 पर सिर्फ 7 आपत्तियां दर्ज की गई थीं। लेकिन, 22 और 23 सितंबर को आपत्तियों की संख्या में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई। 23 सितंबर को सबसे ज़्यादा 4,781 आवेदन जमा किए गए। जिस तरह से अंतिम समय में इतनी बड़ी संख्या में आवेदन जमा किए गए, उससे गंभीर शक और चिंता पैदा होती है। यह कोई सामान्य या आकस्मिक प्रक्रिया नहीं लगती और इसलिए इसकी गंभीर जांच की ज़रूरत है।

आखिरी दिन आपत्तियों को जमा करने के अलावा, आवेदन अपलोड करने के लिए बहुत ज़्यादा दबाव था, और यह दबाव कथित तौर पर भाजपा नेताओं की ओर से था। पूरे राज्य में दाख़िल किए गए कुल आपत्तियों का लगभग दसवां हिस्सा सिर्फ़ 14 लोगों ने जमा किया था। इससे यह शक होता है कि यह काम पूर्व योजना के तहत किया गया था। ये आपत्तियां स्वाभाविक नहीं थी। अंतिम दिन कुछ लोगों द्वारा बिना किसी समर्थित दस्तावेज़ के जमा की गई आपत्तियों की बाढ़, विस्तृत जांच और सही कार्यवाही की मांग करती है।

फॉर्म 7 बांटने में भाजपा का हाथ

एक फोन पर हुई बातचीत से पता चलता है कि मडिकेरी में भाजपा कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर माना है कि फॉर्म 7 के आवेदन भाजपा कार्यालय से दिए गए थे। इस बातचीत को एक मीडिया संगठन ने पहले ही सोशल मीडिया पर जारी कर दिया था। यह बातचीत इस आरोप का समर्थन करने वाला सबूत देती है कि यह काम पूर्व योजना के तहत किया गया था।

कर्नाटक के अलग-अलग हिस्सों में बिना किसी समर्थित दस्तावेज़ के मुस्लिम समुदाय के लोगों को निशाना बनाने वाली आपत्तियां दर्ज करने के पीछे के मकसद की पहचान करना ज़रूरी है। फॉर्म 7 जमा करने के पीछे का मकसद सिर्फ मतदाताओं को उनके वोट देने के अधिकार से वंचित करना भर नहीं है। मतदाता सूची से मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की मांग करके, उन लोगों के बीच सांप्रदायिक भावनाओं को और मज़बूत करने की कोशिश की जा रही है, जो पहले से ही धार्मिक आधार पर एकजुट हो चुके हैं, जिससे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और तेज़ हो जाएगा।

भालकी को क्यों निशाना बनाया गया है?

यह महाराष्ट्र की सीमा से कर्नाटक के कल्याण इलाके में सांप्रदायिक-राजनीतिक आधार को बढ़ाने की एक कथित रणनीति है। पार्टी का कहना है कि सांप्रदायिक सद्भाव के लिए मशहूर गांवों में फूट डालने से भाजपा के पक्ष में अच्छा चुनावी माहौल बन सकता है। मुस्लिम मतदाताओं को हटाना उनकी इसी कोशिश का हिस्सा है।

बीदर जिले में सूफी और संतों की एक मजबूत परंपरा है, और दस्तरख्वान से जुड़ी संस्कृति और इलाके की मिली-जुली परंपराएं इसके सामाजिक ताने-बाने में गहराई से जुड़ी हुई हैं। आरएसएस इस परंपरा को ध्वस्त करना चाहता है और इसीलिए उसने बीदर जिले को निशाना बनाया है।

आरएसएस ने बासववादी आवास स्थलों के आस-पास हिंदू सम्मेलनों के ज़रिए बासवकल्याण की ओर अपनी पैठ बनानी शुरू कर दी है, और अब मतदाताओं के चुनाव-अधिकारों मे दखलंदाजी करके भालकी में सांप्रदायिक तनाव भड़काने की कोशिश की जा रही है। आरएसएस अलग-अलग तरीकों से सांप्रदायिक विचारों को फैलाने और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करने की कोशिश कर रहा है। उसके अनुयायियों का एक समूह पहले ही इसी तरह से लामबंद हो चुका है और अब उन्हें और ज़्यादा उन्मादी बनाने की कोशिश की जा रही है। इसके लिए, उनके अपने गांवों में मतदाता सूची से मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने या हटाने में मदद करने की कोशिश की जा रही है।

जनता दल (एस) ने भाजपा की कथित रणनीति पर सवाल उठाने के बजाय, चुप रहकर यह दिखा दिया है कि वह भी इस प्रक्रिया में भागीदार है।

लोगों की प्रतिक्रिया : “हम साथ रहते हैं”

लेकिन एनकूर और दूसरे गांवों के आम लोगों की प्रतिक्रिया आरएसएस की उम्मीद के बहुत विपरित है। गांव वालों ने पार्टी प्रतिनिधिमंडल से कहा, “हम साथ रहते हैं। हम सब एक ही गांव के लोग हैं। हम अलग कैसे हो सकते हैं?” इसके बाद उन्होंने एक-दूसरे का हाथ पकड़कर एक साथ ऊपर उठाया।प्रतिनिधिमंडल के सामने ही गैर-मुस्लिम ग्रामीणों ने खुद उन लोगों की कड़ी आलोचना की, जिन्होंने मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की शिकायत की थी। कुछ गांव वालों ने इन शब्दों में चुनौती दी, “देखते हैं, वे उन्हें कैसे हटाते हैं।”

प्रतिनिधिमंडल ने उस जगह का भी दौरा किया, जहाँ लोग ग्रामीण रोज़गार गारंटी प्रोग्राम के तहत काम कर रहे थे। अलग-अलग समुदायों के लोग एक नहर से गाद निकालने के काम में एक साथ लगे हुए थे। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को अपनी आर्थिक मुश्किलों के बारे में बताया और 200 दिनों के रोज़गार, अधिक मजदूरी और गुजारे के लिए ज्यादा मदद की मांग की।

सीपीआई(एम) की मांगें

सीपीआई(एम) की निम्न मांगों को आम जनता का व्यापक समर्थन मिला है :

1. जिन लोगों ने बिना किसी समर्थित दस्तावेजों के फार्म 7 पर आपत्तियां जमा की हैं, उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जानी चाहिए। उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए। चुनाव आयोग को उन लोगों की भी पहचान करनी चाहिए, जिन्होंने कथित तौर पर इस कवायद की योजना बनाई, फॉर्म 7 के आवेदन बांटे और लोगों को आपत्तियां दाखिल करने के लिए कहा। ऐसे लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करके उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए।

2. एसआईआर की प्रक्रिया को तुरंत खत्म किया जाना चाहिए।

3. ज्ञानेश कुमार को कथित तौर पर दी जा रही कानूनी सुरक्षा वापस ली जानी चाहिए, और उन्हें उनके पद से हटाया जाना चाहिए। उनके खिलाफ देशद्रोह का केस दर्ज किया जाए और उन्हें जेल भेजा जाए।

4. जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं, उन्हें मतदाता सूची में वापस जोड़ा जाना चाहिए।

Friday Worday Oct 11,2026

(लेखिका सीपीआई(एम) की कर्नाटक राज्य सचिवमंडल की सदस्य हैं। अनुवादक अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध छत्तीसगढ़ किसान सभा के उपाध्यक्ष हैं। संपर्क : 94242-31650)