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Sunday, 15 February 2026

February 15, 2026

"शंकराचार्य विवाद: अपमान या कानून का शासन? अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर साधा तीखा निशाना"

"शंकराचार्य विवाद: अपमान या कानून का शासन? अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर साधा तीखा निशाना" -Friday World 15th Feb 2026

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर धार्मिक भावनाओं और सत्ता की टकराहट ने जोर पकड़ा है। ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच चल रहा विवाद अब सियासी रंग ले चुका है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर बीजेपी सरकार को घेरते हुए सवाल उठाया है—क्या शंकराचार्य के अपमान के लिए भी नया कानून लाएंगे? 

 विवाद की जड़: माघ मेले में रोका गया शाही स्नान सब कुछ शुरू हुआ प्रयागराज के माघ मेले से। जनवरी 2026 में मौनी अमावस्या के अवसर पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती संगम में पारंपरिक स्नान के लिए पहुंचे थे। लेकिन उत्तर प्रदेश पुलिस ने उन्हें रोका, जिसके बाद वे धरने पर बैठ गए। उन्होंने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। विवाद इतना बढ़ा कि शंकराचार्य ने दुखी मन से बिना स्नान किए माघ मेला छोड़ दिया और काशी लौट आए। उन्होंने इसे सनातन परंपरा के अपमान के रूप में देखा। 

 योगी आदित्यनाथ का विधानसभा में बयान फरवरी 2026 में उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहली बार इस मुद्दे पर खुलकर बोले। उन्होंने कहा, "हर कोई शंकराचार्य नहीं बन सकता। कोई भी व्यक्ति किसी पीठ का आचार्य होने का दावा कर माहौल खराब नहीं कर सकता। कानून के शासन में सभी को मर्यादा में रहना पड़ता है।" योगी ने जोर दिया कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है और धार्मिक आयोजनों में नियमों का पालन अनिवार्य है। 

 शंकराचार्य का पलटवार: मुकदमों का जिक्र कर साधा निशाना शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने योगी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "नजीर है—आदित्यनाथ के ऊपर 40 से ज्यादा मुकदमे थे और जब वे मुख्यमंत्री बने तो सभी मुकदमे अपने ऊपर से हटवा लिए। ये कैसा कानून का पालन है? क्या कानून में लिखा है कि बड़े पद पर पहुंचने से मुकदमे गायब हो जाते हैं?" उन्होंने साफ कहा कि सनातन में शंकराचार्य की पहचान राजनीतिक प्रमाणपत्र से नहीं तय होती। 

 अखिलेश यादव का हमला: "ये शंकराचार्य का अपमान कर रहे हैं" 

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इस पूरे प्रकरण को 'शाब्दिक हिंसा' और 'पाप' करार दिया। लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया पर उन्होंने कहा: 

- "पहन ले कोई जैसे भी 'चोले', पर उसकी वाणी पोल खोले। परम पूज्य शंकराचार्य जी के बारे में घोर अपमानजनक अपशब्द बोलना शाब्दिक हिंसा है और पाप भी।" 

- "आप इन लोगों से क्या उम्मीद कर सकते हैं? ये लोग शंकराचार्य का अपमान कर रहे हैं। क्या अब इसके लिए भी नया कानून लाओगे?"

 - "किसे नहीं दिख रहा कि शंकराचार्य जी को खुलेआम अपमानित कर रहे हैं? बताइए आप, क्या हमारी या आपकी कोई हैसियत है कि पूजनीय शंकराचार्य जी के खिलाफ कुछ बोल दें?" 

अखिलेश ने बीजेपी पर सनातन धर्म का ज्ञान न होने का आरोप लगाया और कहा कि संत परंपरा का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने योगी के 'योगी' होने पर भी चुटकी ली, "कोई कान के छेद करवा लेने से योगी नहीं बन जाता।" 

 राजनीतिक मायने: ब्राह्मण अस्मिता और सनातन बहस यह विवाद सिर्फ धार्मिक नहीं रहा—यह ब्राह्मण वोट बैंक, सनातन संस्कृति और कानून-व्यवस्था की बहस बन गया। अखिलेश यादव इसे 'ब्राह्मण अस्मिता' से जोड़कर सपा की रणनीति चला रहे हैं, जबकि योगी सरकार 'कानून का राज' और मर्यादा पर अड़ी है। शंकराचार्य के बयानों ने इसे और गरमा दिया, जहां उन्होंने राजनीतिक हस्तक्षेप को चुनौती दी। 

यह मामला दिखाता है कि उत्तर प्रदेश में धार्मिक मुद्दे कितनी आसानी से सियासी हथियार बन जाते हैं। क्या यह विवाद शांत होगा या महाकुंभ 2025 की पूर्वपीठिका बनेगा? समय बताएगा, लेकिन फिलहाल यह बहस जारी है—अपमान की या कानून की? 
Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World 15th Feb 2026
February 15, 2026

"कांग्रेस का तीखा हमला: 'प्रधानमंत्री झुके भी हैं और थके भी हैं' – अमेरिका ट्रेड डील पर मोदी सरकार पर बरसे जयराम रमेश"

"कांग्रेस का तीखा हमला: 'प्रधानमंत्री झुके भी हैं और थके भी हैं' – अमेरिका ट्रेड डील पर मोदी सरकार पर बरसे जयराम रमेश"
 -Friday World 15th Feb 2026

नई दिल्ली, 15 फरवरी 2026: भारतीय राजनीति में एक बार फिर गरमागरम बहस छिड़ गई है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील को लेकर जमकर निशाना साधा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने पीएम मोदी के हालिया इंटरव्यू को 'स्क्रिप्टेड और हताशा भरी पीआर एक्सरसाइज' करार देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री 'झुके भी हैं और थके भी हैं'। यह बयान अमेरिका के साथ ट्रेड डील, किसानों के मुद्दों और केंद्रीय बजट की आलोचना से ध्यान भटकाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

क्या है विवाद का केंद्र? फरवरी 2026 की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम ट्रेड डील की घोषणा की। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर दावा किया कि भारत अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ और नॉन-टैरिफ बैरियर्स को जीरो करेगा। बदले में अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ को 25% से घटाकर 18% करेगा। ट्रंप ने इसे 'मोदी की रिक्वेस्ट' पर हुआ समझौता बताया, जिसमें भारत अमेरिका से ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, कृषि और अन्य उत्पादों की बड़ी खरीद पर सहमत हुआ है। 

हालांकि, डील की पूरी डिटेल्स अभी सार्वजनिक नहीं हुई हैं। अमेरिका ने अपनी फैक्टशीट में कुछ बदलाव भी किए – जैसे दालों (pulses) का जिक्र हटाना और 500 अरब डॉलर की खरीद को 'प्रतिबद्ध' से 'इरादा' में बदलना। भारत सरकार ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जोर दिया कि किसानों के हित सुरक्षित हैं – चावल, गेहूं, दूध, मोटे अनाज जैसे संवेदनशील उत्पाद डील से बाहर रखे गए हैं। 

कांग्रेस का हमला और जयराम रमेश का बयान 15 फरवरी 2026 को पीएम मोदी ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में बजट को 'तैयारी और प्रेरणा से उपजा' बताया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक स्थिरता से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और भारत 38 देशों के साथ FTA पर काम कर रहा है।

 इस इंटरव्यू के तुरंत बाद जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा: 

"प्रधानमंत्री जानते हैं कि इस साल का बजट एक फीका बजट रहा है और इसमें दिमागी थकान के सारे निशान दिख रहे हैं। मार्केट ने नकारात्मक प्रतिक्रिया दी है और निवेशक प्रभावित नहीं हुए हैं। इसलिए, उन्हें बजट पेश होने के 15 दिन बाद और संसद में विपक्ष की तरफ से इसकी बुराई किए जाने के कुछ दिनों बाद इंटरव्यू देने की जरूरत महसूस हुई।"

 रमेश ने आगे कहा, "ट्रेड डील पर अमेरिका के सामने सरेंडर करने की वजह से घेरे में आए और हमले झेल रहे प्रधानमंत्री अब हेडलाइन मैनेजमेंट के अपने पसंदीदा तरीके का सहारा ले रहे हैं। वह लाखों किसानों के साथ अपने धोखे और दूसरी हार से ध्यान हटाने की कोशिश कर रहे हैं…प्रधानमंत्री झुके भी हैं और थके भी हैं।" 

कांग्रेस का दावा है कि यह डील भारतीय किसानों, लघु उद्योगों और व्यापारियों के लिए 'काला दिन' साबित होगी। पार्टी ने इसे 'एकतरफा समर्पण' करार दिया और संसद में पूरी डिटेल्स साझा करने की मांग की। 

राहुल गांधी के सवाल और किसानों की नाराजगी इससे पहले राहुल गांधी ने लोकसभा में पीएम मोदी से 5 सवाल पूछे थे, जिसमें कृषि बाजार खोलने, उद्योगों पर असर, रूस से तेल खरीद बंद करने की शर्त और 'मेक इन इंडिया' की स्थिति शामिल थी। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने डील को 'भारतीय कृषि का अमेरिकी मल्टीनेशनल कंपनियों के सामने आत्मसमर्पण' बताया और देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन का ऐलान किया। किसान संगठनों का कहना है कि अमेरिकी कृषि उत्पादों की बाढ़ से स्थानीय किसान प्रभावित होंगे। 

 सरकार का बचाव सरकार का पक्ष है कि डील से एक्सपोर्ट बढ़ेगा, रोजगार आएगा और अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। पीएम मोदी ने कहा कि यह बजट 'मजबूरी का नहीं, तैयारियों का' है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि कोई भी ऐसा उत्पाद डील में शामिल नहीं है जो किसानों को नुकसान पहुंचाए। 

 राजनीतिक मायने यह विवाद 2026 के राजनीतिक माहौल को और गरमा रहा है। कांग्रेस इसे मोदी सरकार की 'दूसरी हार' बता रही है – पहली हार किसान कानूनों की वापसी को मानते हुए। विपक्ष एकजुट होकर किसानों और व्यापारियों के मुद्दे पर सरकार को घेर रहा है। वहीं, भाजपा इसे विदेश नीति और आर्थिक कूटनीति की सफलता के रूप में पेश कर रही है। 

ट्रेड डील पर पारदर्शिता की मांग बढ़ रही है। यदि सरकार डिटेल्स नहीं साझा करती, तो संसद में हंगामा और बढ़ सकता है। यह घटना दिखाती है कि अंतरराष्ट्रीय समझौते कितनी तेजी से घरेलू राजनीति का मुद्दा बन जाते हैं। क्या यह डील भारत के लिए वरदान साबित होगी या अभिशाप? आने वाला समय बताएगा।
Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 15th Feb 2026
February 15, 2026

"बराक ओबामा ने ट्रंप के शेयर किए नस्लभेदी वीडियो पर दी तीखी प्रतिक्रिया: "शर्म और तमीज़ अब गायब हो गई है"

"बराक ओबामा ने ट्रंप के शेयर किए नस्लभेदी वीडियो पर दी तीखी प्रतिक्रिया: "शर्म और तमीज़ अब गायब हो गई है" -Friday World 15th Feb 2026 

अमेरिकी राजनीति में नस्लवाद और शालीनता की बहस फिर से गरम हो गई है। पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सोशल मीडिया पर शेयर किए गए उस विवादास्पद वीडियो पर अपनी पहली सार्वजनिक टिप्पणी की, जिसमें उन्हें और उनकी पत्नी मिशेल ओबामा को वानर (एप) के रूप में दिखाया गया था। यह घटना फरवरी 2026 की शुरुआत में हुई, जब ट्रंप के ट्रुथ सोशल अकाउंट पर यह वीडियो पोस्ट किया गया और बाद में हटा दिया गया। 

घटना का पूरा विवरण 5 फरवरी 2026 को ट्रंप के ट्रुथ सोशल अकाउंट पर एक लगभग 60 सेकंड का वीडियो शेयर किया गया। इस वीडियो का मुख्य हिस्सा 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में कथित वोटर फ्रॉड के बेबुनियाद दावों पर आधारित था। वीडियो के अंत में एक सेकंड के लिए बराक और मिशेल ओबामा के चेहरे को हंसते हुए वानरों के शरीर पर सुपरइंपोज किया गया था। यह क्लिप 'द लायन स्लीप्स टुनाइट' गीत पर सेट थी और इसे कंजर्वेटिव मीम क्रिएटर ज़ेरियास के एक पुराने एक्स पोस्ट से लिया गया माना जा रहा है। 

वीडियो पोस्ट होने के तुरंत बाद दोनों पार्टियों से तीखी आलोचना हुई। रिपब्लिकन सीनेटर टिम स्कॉट सहित कई प्रमुख रिपब्लिकन नेताओं ने इसे "सबसे नस्लभेदी" करार दिया। व्हाइट हाउस ने पहले इसे "नकली गुस्सा" (fake outrage) बताया, लेकिन बाद में एक स्टाफ सदस्य की "गलती" बताकर वीडियो डिलीट कर दिया गया। ट्रंप ने रिपोर्टर्स से कहा कि उन्होंने वीडियो का वह हिस्सा "नहीं देखा" जिसमें ओबामा दिख रहे थे और उन्होंने माफी मांगने से इनकार करते हुए कहा, "मैंने कोई गलती नहीं की है।" 

 ओबामा की पॉडकास्ट में प्रतिक्रिया 15 फरवरी 2026 को लिबरल पॉडकास्टर **ब्रायन टायलर कोहेन** के पॉडकास्ट "नो लाई" में ओबामा ने इस मुद्दे पर बात की। कोहेन ने सीधे वीडियो का जिक्र करते हुए राजनीतिक विमर्श की गिरावट पर सवाल किया। ओबामा ने ट्रंप का नाम लिए बिना, लेकिन स्पष्ट रूप से संदर्भित करते हुए कहा: 

"सार्वजनिक विमर्श इतनी क्रूरता के स्तर पर पहुंच गया है, जो पहले कभी नहीं देखा गया... सोशल मीडिया और टेलीविजन पर एक तरह का 'क्लाउन शो' चल रहा है। पहले सरकारी अधिकारियों में शर्म (shame), तमीज़ (decorum), शालीनता, सम्मान और दया की भावना होती थी, लेकिन अब वह खो गई है।" 

ओबामा ने जोर दिया कि अमेरिका में घूमते हुए वे ऐसे लाखों लोगों से मिलते हैं जो अभी भी "शालीनता, तहजीब, दया और सम्मान" में विश्वास रखते हैं। उन्होंने कहा कि अधिकांश अमेरिकी इस तरह के व्यवहार को "गहराई से परेशान करने वाला" मानते हैं। उन्होंने इस घटना को राजनीतिक बहस से ध्यान भटकाने वाली चाल के रूप में भी देखा, लेकिन मुख्य फोकस राजनीतिक नेतृत्व में नैतिक पतन पर रहा। 

नस्लवाद का ऐतिहासिक संदर्भ यह वीडियो अमेरिकी इतिहास में काले लोगों को वानरों से तुलना करने वाली पुरानी नस्लभेदी कार्टून और प्रचार की याद दिलाता है। ओबामा अमेरिका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति होने के नाते ऐसे हमलों का सामना पहले भी कर चुके हैं, लेकिन ट्रंप के पद पर रहते हुए यह घटना विशेष रूप से विवादास्पद बनी क्योंकि यह राष्ट्रपति के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से जुड़ी थी। 

 राजनीतिक प्रभाव और प्रतिक्रियाएं यह घटना ट्रंप प्रशासन की शुरुआत में ही विवादों का केंद्र बनी। डेमोक्रेट्स ने इसे नस्लवाद का सबूत बताया, जबकि कुछ रिपब्लिकन्स ने स्टाफ की गलती मानकर बचाव किया। ओबामा की टिप्पणी ने फिर से शालीनता और नैतिकता की बहस को जन्म दिया है, खासकर जब अमेरिका में राजनीतिक ध्रुवीकरण चरम पर है। 

ओबामा ने स्पष्ट रूप से ट्रंप पर व्यक्तिगत हमला नहीं किया, बल्कि व्यापक सिस्टमिक समस्या पर प्रकाश डाला। उनकी यह प्रतिक्रिया शांत लेकिन प्रभावशाली रही, जो उनकी पुरानी स्टाइल से मेल खाती है – क्रोध के बजाय तर्क और नैतिकता पर जोर।
Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 15th Feb 2026 
February 15, 2026

सऊदी की उड़ान से केरल की धरती तक: एक बेटे का वो प्यार जो माँ की गोद से कभी नहीं टूटा

सऊदी की उड़ान से केरल की धरती तक: एक बेटे का वो प्यार जो माँ की गोद से कभी नहीं टूटा
-Friday World 15th Feb 2026
कई बार जिंदगी हमें ऐसे रिश्ते देती है जो खून से नहीं, बल्कि दिल की गहराइयों से जुड़े होते हैं। ऐसे ही एक रिश्ते की कहानी है, जो धर्म, देश, भाषा और दूरी की सारी दीवारों को तोड़कर सिर्फ प्यार की जीत दिखाती है।

 कई साल पहले की बात है। केरल की एक साधारण हिंदू महिला, जिन्हें हम यहां 'माँ' कहकर पुकारेंगे, सऊदी अरब में नौकरी करने गईं। वहां उनका काम था छोटे-छोटे बच्चों की देखभाल करना। घरेलू नौकरानी के रूप में काम करते हुए उन्होंने कई बच्चों को अपनी गोद में लिया, लेकिन एक बच्चा ऐसा था जिसे उन्होंने अपनी कोख से भी ज्यादा प्यार दिया। वो छोटा सा बच्चा, जिसकी मासूम आंखों में शरारत और मुस्कान थी, धीरे-धीरे उनकी जिंदगी का हिस्सा बन गया। 

वह बच्चा मुस्लिम परिवार का था। माँ उसे रोज नहलाती, खाना खिलाती, लोरी सुनाती, स्कूल के लिए तैयार करती। जब वह बीमार पड़ता, तो रात भर जागकर उसकी देखभाल करती। उसकी हर छोटी-बड़ी खुशी में शामिल होती। बच्चे के लिए वो सिर्फ 'आंटी' नहीं, बल्कि 'अम्मी' बन गई थीं। बच्चा उन्हें 'उम्मा' कहकर पुकारता, और हर बार गले लगकर कहता, "तुम मेरी असली माँ हो।" 

समय बीतता गया। बच्चा बड़ा हुआ। माँ की नौकरी खत्म हुई और वे वापस केरल लौट आईं। विदाई के दिन बच्चे की आंखों में आंसू थे। उसने माँ के हाथ पकड़कर कहा था, "मैं कभी तुम्हें नहीं भूलूंगा। मैं बड़ा होकर तुमसे मिलने आऊंगा।" माँ ने मुस्कुराकर उसके माथे पर चूम लिया और कहा, "बेटा, माँ का प्यार कभी नहीं भूलता।" 

साल बीतते गए। बच्चा अब जवान हो चुका था। सऊदी अरब में अपनी जिंदगी बसा चुका था, लेकिन दिल में वो पुरानी यादें जिंदा थीं। हर ईद पर, हर त्योहार पर, हर खुशी के मौके पर उसे वो केरल की महिला याद आती। वो सोचता, "क्या वो अभी भी मुझे याद करती होंगी? क्या वो मुझे पहचानेंगी?"

 उसने फैसला किया। महीनों तक उसने पता लगाया। पुराने नंबर, पुराने पते, सोशल मीडिया, रिश्तेदारों से बातें—सब कुछ करके आखिरकार उस माँ का पता लगा लिया। फिर बिना किसी को बताए उसने फ्लाइट बुक की। सऊदी से भारत की उड़ान। दिल में एक अजीब सी घबराहट थी। क्या माँ अब भी वही होंगी? क्या वो पुराना प्यार अब भी जिंदा होगा? या समय ने सब कुछ बदल दिया होगा? 

केरल पहुंचते ही वो सीधा उस गांव की ओर निकल पड़ा। छोटा सा घर, वही पुरानी दीवारें, वही आंगन जहां कभी वो खेलता था। दरवाजे पर खड़ा होकर उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। हाथ कांप रहे थे। उसने धीरे से दरवाजा खटखटाया।

 दरवाजा खुला। सामने वही चेहरा—बूढ़ा हो चुका, लेकिन वही मुस्कान, वही आंखें। माँ ने उसे देखा। एक पल को सन्न रह गईं। फिर उनकी आंखें भर आईं। "बेटा...?" उनकी आवाज कांप रही थी। वो दौड़कर आगे बढ़ा। माँ ने हाथ फैलाए। वो गले लग गया। जैसे बचपन में लगता था, वैसे ही। माँ रो पड़ीं। उसके सिर पर हाथ फेरते हुए बोलीं, "मेरा बेटा... मेरा राजा बेटा आ गया!"

 बेटा भी रो पड़ा। उसने माँ के पैर छुए, माथा टेक दिया। "माँ, मैं वादा करके आया था। मैं तुम्हें कभी नहीं भूला।" 

उस पल में न कोई हिंदू था, न मुस्लिम। न सऊदी था, न भारतीय। सिर्फ एक माँ थी और उसका बेटा। धर्म की दीवारें गायब हो गईं। देश की सीमाएं मिट गईं। सिर्फ प्यार बाकी था—वो प्यार जो सालों तक दबा रहा, लेकिन कभी मरा नहीं।

 माँ ने उसे घर के अंदर बिठाया। पुरानी यादें ताजा हो गईं। वो पुरानी तस्वीरें निकालीं, जिसमें छोटा सा बच्चा उनकी गोद में मुस्कुरा रहा था। दोनों ने घंटों बातें कीं। हंसे, रोए, एक-दूसरे को गले लगाया। पड़ोसी आए, सबकी आंखें नम हो गईं। 

यह कहानी सिर्फ एक मुलाकात की नहीं है। यह उस एहसान की है जो कभी भुलाया नहीं जा सकता। यह उस प्यार की है जो सीमाओं से परे है। यह बताती है कि इंसानियत जिंदा है। जब दिल से दिल जुड़ता है, तो न कोई मजहब रोक सकता है, न कोई दूरी।

 क्या आपने भी कभी किसी की इतनी बड़ी मेहरबानी को याद रखा है? क्या आपके जीवन में भी ऐसा कोई रिश्ता है जो खून का नहीं, लेकिन दिल का है? क्या आपने कभी किसी के लिए इतनी दूरियां तय की हैं?

 यह कहानी हमें याद दिलाती है—प्यार कभी पुराना नहीं होता। वह बस इंतजार करता है। और जब वो पल आता है, तो सारी दुनिया रुक जाती है। सिर्फ दो दिल धड़कते रहते हैं—एक माँ का और एक बेटे का।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World 15th Feb 2026
February 15, 2026

Heavy Impact of the US-India Interim Trade Deal: American Pressure ? Reshapes India’s Energy Policy and Triggers Major Shift Away from Russian Oil

Heavy Impact of the US-India Interim Trade Deal: American Pressure ? Reshapes India’s Energy Policy and Triggers Major Shift Away from Russian Oil!
-Friday World 🌎 Feb 15, 2026 
India Will Now Buy More Oil from the US: Is the Era of Russian Crude Finally Ending?

February 15, 2026: The interim trade agreement announced between India and the United States on February 2, 2026 has sent shockwaves through the global energy market. US President Donald Trump, while announcing the deal, claimed that India has committed to completely halting direct or indirect imports of Russian crude oil. In return, the United States has removed the 25% penalty tariffs on Indian goods and reduced the main reciprocal tariff to 18%. These changes came into effect from February 7, 2026.

 → Following the agreement, Indian refiners have stayed away from new purchases of Russian oil, especially for March–April 2026 deliveries. According to reports from Bloomberg, Reuters, and other sources, Russian crude imports have seen a significant decline, with a clear shift toward American crude and Venezuelan oil.

 → Government-owned and private refiners have been instructed to prioritize US crude in spot market tenders, while negotiations with private traders (such as Vitol and Trafigura) continue for Venezuelan crude. 

Sharp Decline in Russian Oil Imports: Result of US Pressure, Sanctions, and the Trade Deal

→ After the Ukraine war, discounted Russian oil led India to sharply increase imports — in 2025, Russia held 30–35% market share and at times supplied up to 2 million barrels per day (mb/d). However, US pressure, the 25% penalty tariff, and fresh sanctions have reversed this trend. 

→ In January 2026, Russian oil imports fell to 1.1 mb/d — the lowest level in three years (post-2022 low). 

→ December 2025 saw imports hit a two-year low with a 22% drop. 

→ From April to December 2025, Russian crude imports declined 17% to $33.1 billion. 

→ Experts (Kpler, J.P. Morgan, Vortexa) estimate that by March 2026, Russia’s share could drop to 15–17%, with volumes falling to 0.8–1.0 mb/d and potentially reaching 500,000–600,000 bpd in the longer term. 

→ The Indian government and External Affairs Minister S. Jaishankar have made it clear that energy security, diversification, and strategic autonomy remain top priorities. Decisions will be based on cost, risk, and availability — not political pressure. India has not directly accepted US claims but continues to insist on preserving strategic autonomy. 

US and Venezuelan Oil: Advantages, Challenges, and Rising Purchases

→ American crude is mostly “light and sweet” (low sulfur), while most Indian refineries are optimized for medium-to-heavy crude. The longer shipping distance also increases freight costs. Despite these challenges: 

→ Imports from the US surged more than 65% (April–December 2025: $8.2 billion). 

→ US crude now accounts for roughly 10% of India’s total imports. 

→ Indian refiners have the capacity to take around 20 million tonnes annually (400,000 bpd) of American oil — double last year’s volume. 

→ Venezuela holds the world’s largest oil reserves. With renewed US licenses, imports have restarted. IOC, HPCL, and BPCL have already purchased over 40 lakh barrels. Reliance has also resumed buying recently. The US has actively encouraged Venezuela as an alternative source for India. 

ndia’s Energy Security: Diversification, Autonomy, and New Alternatives

→ India imports 85–90% of its oil needs. While discounted Russian crude offered major savings, geopolitical pressure and the trade deal have forced a pivot toward the US, Venezuela, Saudi Arabia, Iraq, and the UAE. 

→ Saudi Arabia emerged as the top supplier in the first ten days of February 2026. 

→ This shift is likely to increase costs (1–2% higher import bill due to absence of Russian discounts), require refinery adjustments, and potentially impact overall energy security. 

→ India’s energy policy is no longer purely economic — it has become deeply intertwined with political and global balancing acts. Whether the era of Russian oil is truly over remains to be seen, but the turn toward America now appears inevitable. 

→ How much this will affect India’s strategic autonomy is a question that still hangs in the air. 

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World 🌎 February 15, 2026 


February 15, 2026

अमेरिका-भारत अंतरिम व्यापार समझौते का भारी असर: ऊर्जा नीति में अमेरिकी दबाव और रूसी तेल से बड़ा मोड़

अमेरिका-भारत अंतरिम व्यापार समझौते का भारी असर: ऊर्जा नीति में अमेरिकी दबाव और रूसी तेल से बड़ा मोड़ -Friday World 🌎 15 Feb 2026 
भारत अब अमेरिका से ज्यादा तेल खरीदेगा: रूसी क्रूड का युग अंतिम चरण में? 

 15 फरवरी 2026: भारत और अमेरिका के बीच 2 फरवरी 2026 को घोषित अंतरिम व्यापार समझौते ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी हलचल मचा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते की घोषणा करते हुए दावा किया कि भारत ने रूसी क्रूड ऑयल की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष आयात पूरी तरह बंद करने का वादा किया है। बदले में अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर लगे 25% पेनल्टी टैरिफ हटा दिए हैं और मुख्य रेसिप्रोकल टैरिफ को 18% तक घटा दिया है। यह बदलाव 7 फरवरी 2026 से लागू हो गया है।

 इस समझौते के बाद भारतीय रिफाइनर्स रूसी तेल की नई खरीद से दूर रह रहे हैं, खासकर मार्च-अप्रैल 2026 की डिलीवरी के लिए। ब्लूमबर्ग, रॉयटर्स और अन्य रिपोर्ट्स के अनुसार, रूसी तेल की आयात में उल्लेखनीय कमी आई है और अमेरिकी क्रूड तथा वेनेजुएला की ओर रुख किया जा रहा है। सरकारी और निजी रिफाइनर्स को स्पॉट मार्केट में अमेरिकी तेल को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है, जबकि वेनेजुएला के तेल के लिए प्राइवेट ट्रेडर्स (विटोल, ट्रेफिगुरा) के साथ बातचीत जारी है। 

रूसी तेल आयात में तेज गिरावट: अमेरिकी दबाव, प्रतिबंध और व्यापार समझौते का परिणाम** यूक्रेन युद्ध के बाद रूसी तेल डिस्काउंट पर मिलने से भारत ने इसकी आयात में भारी वृद्धि की थी – 2025 में रूस 30-35% हिस्सेदारी रखता था और कभी-कभी 2 मिलियन बैरल प्रतिदिन (mb/d) तक पहुंच गया था। लेकिन अमेरिकी दबाव, 25% पेनल्टी टैरिफ और नए प्रतिबंधों के कारण रुझान बदल रहा है:

 - जनवरी 2026 में रूसी तेल आयात 1.1 mb/d रहा, जो तीन साल में सबसे कम है (2022 के बाद का निचला स्तर)। 

- दिसंबर 2025 में आयात दो साल के निचले स्तर पर पहुंचा, 22% की गिरावट। 

- अप्रैल-दिसंबर 2025 में रूसी तेल आयात 17% घटकर $33.1 बिलियन रहा। 

- विशेषज्ञों (Kpler, J.P. Morgan, Vortexa) के अनुमान के अनुसार मार्च 2026 तक हिस्सेदारी 15-17% रह सकती है, वॉल्यूम 0.8-1.0 mb/d तक गिर सकता है और लंबे समय में 500,000-600,000 bpd तक पहुंच सकता है। 

भारत सरकार और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया है कि ऊर्जा सुरक्षा, विविधता और रणनीतिक स्वायत्तता प्राथमिकता है। फैसले लागत, जोखिम और उपलब्धता के आधार पर लिए जाएंगे, राजनीतिक दबाव से नहीं। अमेरिकी दावों को सीधे स्वीकार नहीं किया गया है, लेकिन रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने पर जोर दिया गया है। 

अमेरिकी और वेनेजुएला तेल: फायदे, चुनौतियां और बढ़ती खरीद** अमेरिकी क्रूड 'लाइट एंड स्वीट' (कम सल्फर वाला) है, जबकि भारतीय रिफाइनरियां मीडियम-हैवी क्रूड के लिए अनुकूल हैं। दूरी ज्यादा होने से फ्रेट खर्च बढ़ता है। फिर भी: 

- अमेरिका से आयात में 65% से अधिक वृद्धि (अप्रैल-दिसंबर 2025 में $8.2 बिलियन)। 

- यूएस क्रूड अब भारत की कुल आयात का लगभग 10% है। 

- भारतीय रिफाइनर्स सालाना 20 मिलियन टन (400,000 bpd) अमेरिकी तेल ले सकते हैं, जो पिछले साल से दोगुना है। 

वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है। अमेरिकी लाइसेंस मिलने से आयात फिर शुरू हुआ है। IOC, HPCL, BPCL ने 40 लाख बैरल से ज्यादा खरीदा है। रिलायंस ने भी हाल ही में खरीद शुरू की है। अमेरिका ने वेनेजुएला तेल को भारत के लिए विकल्प के रूप में प्रोत्साहन दिया है। 

भारत की ऊर्जा सुरक्षा: विविधता, स्वायत्तता और नए विकल्प** भारत 85-90% तेल आयात करता है। रूसी डिस्काउंट का फायदा मिलता था, लेकिन अब भू-राजनीतिक दबाव और व्यापार समझौते के कारण अमेरिका, वेनेजुएला, सऊदी अरब, इराक और UAE की ओर रुख किया जा रहा है। सऊदी अरब फरवरी 2026 के पहले 10 दिनों में शीर्ष सप्लायर बन गया है। 

इस बदलाव से खर्च बढ़ सकता है (रूसी तेल की कमी से 1-2% ज्यादा आयात बिल), रिफाइनरियों को अनुकूलन करना पड़ेगा और ऊर्जा सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। भारत की ऊर्जा नीति अब केवल आर्थिक नहीं रही, बल्कि राजनीतिक और वैश्विक संतुलन का हिस्सा बन गई है। रूसी तेल का युग खत्म हो रहा है या नहीं, समय ही बताएगा, लेकिन अमेरिका की ओर मुड़ना अब अपरिहार्य हो गया है। भारत की रणनीतिक स्वायत्तता पर इसका कितना असर पड़ेगा? यह सवाल अभी लंबित है। 

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World 🌎 15 Feb 2026 
February 15, 2026

ભારત હવે અમેરિકા પાસેથી વધુ તેલ ખરીદશે: રશિયન ક્રૂડનો યુગ સમાપ્ત થઈ રહ્યો છે? અમેરિકા સાથેના ટ્રેડ ડીલની અસર: ભારતની ઉર્જા નીતિમાં અમેરિકા હાવી!!

ભારત હવે અમેરિકા પાસેથી વધુ તેલ ખરીદશે: રશિયન ક્રૂડનો યુગ સમાપ્ત થઈ રહ્યો છે? અમેરિકા સાથેના ટ્રેડ ડીલની અસર: ભારતની ઉર્જા નીતિમાં અમેરિકા હાવી!!
-Friday World 15th Feb 2026
તાજેતરમાં ભારત અને અમેરિકા વચ્ચે થયેલા વેપાર કરારે વૈશ્વિક ઊર્જા બજારમાં હલચલ મચાવી દીધી છે. અમેરિકી રાષ્ટ્રપતિ ડોનાલ્ડ ટ્રમ્પે આ કરારની જાહેરાત કરતાં કહ્યું હતું કે ભારતે રશિયન ક્રૂડ ઓઇલની આયાત સંપૂર્ણપણે બંધ કરવાનું વચન આપ્યું છે. આના બદલામાં અમેરિકાએ ભારતીય વસ્તુઓ પર લાગુ 25% પેનલ્ટી ટેરિફ હટાવી દીધી છે અને મુખ્ય ટેરિફને 18% સુધી ઘટાડી છે. 

આ કરાર પછી ભારત સરકારે દેશની સરકારી તેલ રિફાઇનરી કંપનીઓને સ્પષ્ટ સંદેશ આપ્યો છે – અમેરિકા અને વેનેઝુએલા પાસેથી વધુ ક્રૂડ ઓઇલ ખરીદવા પર ધ્યાન કેન્દ્રિત કરો. બ્લૂમબર્ગના રિપોર્ટ અનુસાર, સરકારે રિફાઇનર્સને સ્પોટ માર્કેટમાં ટેન્ડર દ્વારા તેલ ખરીદતી વખતે અમેરિકી ક્રૂડને પ્રાથમિકતા આપવા જણાવ્યું છે. વેનેઝુએલાના તેલ માટે ખાનગી વેપારીઓ સાથે વાતચીત દ્વારા સોદા કરવાની સલાહ આપવામાં આવી છે. 

રશિયન તેલની આયાતમાં ઘટાડો: અમેરિકી દબાણની અસર છેલ્લા કેટલાક વર્ષોમાં રશિયા ભારતનો સૌથી મોટો તેલ સપ્લાયર બની ગયો હતો. યુક્રેન યુદ્ધ પછી રશિયન તેલ ડિસ્કાઉન્ટ પર મળતું હોવાથી ભારતે તેની આયાતમાં ભારે વધારો કર્યો હતો. પરંતુ અમેરિકી દબાણ અને ટેરિફના કારણે આ વલણ બદલાઈ રહ્યું છે. બ્લૂમબર્ગના અહેવાલ મુજબ, રશિયન તેલની આયાત અડધી થઈ શકે છે. ભારત સરકારે આ વાતને સીધી રીતે સ્વીકારી નથી, પરંતુ વિદેશ મંત્રાલય અને વિદેશ મંત્રી એસ. જયશંકરે સ્પષ્ટ કર્યું છે કે ભારતની ઊર્જા સુરક્ષા અને વિવિધતા પ્રાથમિકતા છે. નિર્ણયો ખર્ચ, જોખમ અને ઉપલબ્ધતાના આધારે લેવાશે, રાજકીય દબાણથી નહીં. 

અમેરિકી અને વેનેઝુએલા તેલના ફાયદા અને પડકારો અમેરિકી ક્રૂડ મોટેભાગે 'લાઇટ અને સ્વીટ' (ઓછો સલ્ફરવાળું) હોય છે, જે ભારતીય રિફાઇનરીઓ માટે પ્રોસેસ કરવું સરળ નથી કારણ કે મોટાભાગની યુનિટ્સ મીડિયમ ક્રૂડ માટે બનેલી છે. વધુમાં, અમેરિકાથી ભારત સુધીનું અંતર વધુ હોવાથી ફ્રેટ રેટ્સ (નૂર) વધારે પડે છે. કઝાકિસ્તાન અને પશ્ચિમ આફ્રિકાથી તેલ મંગાવવું સસ્તું અને નજીક પડે છે. 

તેમ છતાં, નિષ્ણાતોનું માનવું છે કે ભારતીય રિફાઇનર્સ વાર્ષિક 20 મિલિયન ટન (લગભગ 4 લાખ બેરલ પ્રતિદિન) અમેરિકી તેલ લઈ શકે છે, જે ગયા વર્ષના 2.25 લાખ બેરલ પ્રતિદિન કરતાં બમણું છે. 

વેનેઝુએલા પાસે વિશ્વનો સૌથી મોટો તેલ ભંડાર છે, પરંતુ અમેરિકી પ્રતિબંધોને કારણે 2019 પછી ભારતે તેની આયાત બંધ કરી દીધી હતી. 2023-2024માં પ્રતિબંધો આંશિક હળવા થતાં ફરી શરૂ થઈ. તાજેતરમાં IOC, BPCL, HPCL જેવી સરકારી કંપનીઓએ 40 લાખ બેરલ વેનેઝુએલનું તેલ ખરીદ્યું છે. રિલાયન્સે પણ 2025ના મધ્ય પછી પ્રથમ વખત આ તેલ લીધું છે. અમેરિકાએ વિટોલ અને ટ્રેફિગુરા જેવી કંપનીઓને વેનેઝુએલાના તેલનું માર્કેટિંગ સોંપ્યું છે. 

ભારતની ઊર્જા સુરક્ષા: વિવિધતા અને સ્વાયત્તતા ભારત સરકારનું સ્પષ્ટ કહેવું છે કે દેશની ઊર્જા સુરક્ષા સૌથી ઉપર છે. રશિયન તેલના ડિસ્કાઉન્ટનો લાભ મળતો હતો, પરંતુ હવે ભૂ-રાજકીય દબાણ અને વેપાર કરારને કારણે વિકલ્પો તરફ વળવું પડી રહ્યું છે. આ ફેરફારથી ભારતીય રિફાઇનરીઓને તેમની ક્ષમતા અનુસાર અનુકૂલન કરવું પડશે અને ખર્ચ વધુ થઈ શકે છે.

 આ બધું દર્શાવે છે કે ભારતની ઊર્જા નીતિ હવે માત્ર આર્થિક નથી, પરંતુ રાજકીય અને વૈશ્વિક સંતુલનનો પણ ભાગ બની ગઈ છે. શું આ ફેરફાર ભારતની વ્યૂહાત્મક સ્વાયત્તતાને અસર કરશે? સમય જ કહેશે, પરંતુ હાલ તો અમેરિકા તરફનું વળાંક અનિવાર્ય લાગી રહ્યું છે.

 Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World 15th Feb 2026