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यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Wednesday, 23 September 2026

September 23, 2026

होर्मुज पर ईरान का सबसे बड़ा ऑफर - 7 दिन में खोल देंगे जलडमरूमध्य, लेकिन अमेरिका को माननी होंगी 2 शर्तें

होर्मुज पर ईरान का सबसे बड़ा ऑफर - 7 दिन में खोल देंगे जलडमरूमध्य, लेकिन अमेरिका को माननी होंगी 2 शर्तें
- Friday World September 23,2026 
न्यूयॉर्क / तेहरान: फारस की खाड़ी में जारी तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका को अब तक का सबसे आसान और सीधा प्रस्ताव दिया है। ईरान ने कहा है कि अगर अमेरिका सैन्य दबाव कम करे और बंदरगाहों की नाकेबंदी हटा ले, तो वह सात दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोल सकता है।

यह प्रस्ताव ईरान के सीनियर अधिकारी ने रॉयटर्स और क्योडो न्यूज एजेंसी को दिया। यह प्रस्ताव 16 सितंबर को ही मध्यस्थों के जरिए अमेरिका तक पहुंचा दिया गया था।

 ईरान की दो शर्तें क्या हैं?
ईरानी अधिकारी ने कहा:

> "अमेरिका को यह घोषणा करनी होगी कि वह इस मुद्दे को कूटनीतिक तरीके से सुलझाना चाहता है, इसे आधिकारिक बनाना होगा और फिर इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए एक समय-सीमा पर सहमत होना होगा।"

यानी ईरान की शर्तें हैं:
1. अमेरिका सैन्य दबाव और युद्ध की तैयारी रोके
2. ईरानी बंदरगाहों पर लगी नेवल ब्लॉकेड और आर्थिक नाकेबंदी हटाए

इसके बाद ईरान 7 दिन में होर्मुज को खोल देगा और स्थायी युद्ध-विराम के लिए बातचीत पर लौट आएगा।

 UN में है ईरान का पूरा प्रतिनिधिमंडल
इस वक्त ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान UN महासभा में हिस्सा लेने न्यूयॉर्क पहुंचे हैं। विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी दोहा होते हुए न्यूयॉर्क पहुंचे हैं। ईरान ने कहा है कि उसके प्रतिनिधिमंडल को अमेरिका के साथ कूटनीति फिर से शुरू करने का पूरा अधिकार है।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि अमेरिका UN के साइडलाइन में ईरान से मिलने के लिए तैयार है, खासकर अगर इससे सकारात्मक नतीजा निकल सके। उनका लक्ष्य साफ है - "ईरान के पास कभी परमाणु हथियार नहीं होना चाहिए।"

 दूसरी तरफ मिलिट्री की चेतावनी भी
इसी बीच ईरान की मिलिट्री सेंट्रल कमांड ने रविवार को चेतावनी दी है कि उन्हें इंटेलिजेंस मिली है कि अमेरिका क्षेत्रीय देशों के समर्थन से मिलिट्री ऑपरेशन फिर से शुरू करने की तैयारी कर रहा है।

कमांड ने कहा - "ऐसा होने पर तेहरान बिना किसी सीमा या लिहाज के जवाबी कार्रवाई करेगा।"

गौरतलब है कि फरवरी 2026 से अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच जंग के बाद ईरान ने होर्मुज को ब्लॉक कर दिया था, जिससे दुनिया के 20% तेल का रास्ता रुक गया और तेल के दाम आसमान पर पहुंच गए। अमेरिका ने इसे "इकोनॉमिक D-Day" कहा था।

ईरानी अधिकारी ने कहा - "UN महासभा अमेरिका के लिए कूटनीति पर लौटने का सुनहरा मौका है।"

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World September 23,2026 

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September 23, 2026

अमेरिकी 'इकोनॉमिक D-Day' फेल? पाबंदी के दिन ही चीन पहुंची ईरान की Mahan Air फ्लाइट

अमेरिकी 'इकोनॉमिक D-Day' फेल? पाबंदी के दिन ही चीन पहुंची ईरान की Mahan Air फ्लाइट
- Friday World September 23,2026 
तेहरान / ग्वांगझू: अमेरिका ने 23 सितंबर 2026 से ईरानी एयरलाइंस को दुनिया भर में "शट डाउन" करने की धमकी दी थी। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा था कि जो भी देश ईरानी विमानों को लैंडिंग और ईंधन देगा, उसे डॉलर सिस्टम से बाहर कर दिया जाएगा।

लेकिन इसी दिन का सबसे बड़ा सरप्राइज चीन से आया।

FlightRadar24 के लाइव ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, ईरान की सबसे बड़ी प्राइवेट एयरलाइन Mahan Air की फ्लाइट IRM093 / W5812 तेहरान के इमाम खुमैनी एयरपोर्ट (IKA) से उड़कर चीन के ग्वांगझू बाययुन इंटरनेशनल एयरपोर्ट (CAN) पर शाम 4:39 बजे सुरक्षित लैंड हुई। यह फ्लाइट ग्वांगझू एयरपोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर लिस्ट नहीं थी, लेकिन ट्रैकिंग डेटा ने इसकी पुष्टि की। 

 चीन ने अमेरिका को दिया खुला जवाब
फ्लाइट के उतरते ही चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने बयान दिया - "चीन एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध करता है। ये प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय कानून पर आधारित नहीं हैं और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से अधिकृत नहीं हैं, इसलिए ये अवैध हैं।" 

चीन के अलावा भी कई उड़ानें जारी रहीं। FlightRadar24 ने दिखाया कि पाबंदी लागू होने के बाद भी ईरान से बैंकॉक, फुकेट, शंघाई और काबुल के लिए कम से कम 6 फ्लाइट्स उड़ीं। तेहरान से शंघाई के लिए भी फ्लाइट शेड्यूल रही।

 दुनिया बंटी हुई
दूसरी तरफ, कुछ देशों ने अमेरिकी दबाव में कदम उठाया। AFP के मुताबिक ईरानी ट्रैवल एजेंट ने बताया कि बगदाद, मस्कट, कतर, जॉर्जिया और अज़रबैजान के लिए उड़ानें सस्पेंड कर दी गईं। इराक ने बगदाद एयरपोर्ट पर ईरानी उड़ानें रोकने का आदेश दिया, हालांकि उन्हें नजफ डायवर्ट करने पर विचार चल रहा है। तुर्की की Turkish Airlines, AJet और Pegasus ने मार्च 2027 तक ईरान के लिए सभी बुकिंग बंद कर दी हैं। 

 अमेरिका की धमकी के बावजूद पहला दिन ही बताता है कि दुनिया दो हिस्सों में बंट गई है। एक तरफ इराक, अज़रबैजान जैसे देश झुके, तो दूसरी तरफ चीन जैसा बड़ा आर्थिक पार्टनर ईरान के साथ खड़ा रहा और Mahan Air को लैंडिंग दी। ईरान की एविएशन इंडस्ट्री सालों से प्रतिबंध झेल रही है, लेकिन चीन का यह कदम अमेरिकी रणनीति के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World September 23,2026 

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September 23, 2026

अमेरिका की बड़ी कार्रवाई - ईरानी एयरलाइंस पर ग्लोबल बैन, फिर भी झुकने को तैयार नहीं ईरान

अमेरिका की बड़ी कार्रवाई - ईरानी एयरलाइंस पर ग्लोबल बैन, फिर भी झुकने को तैयार नहीं ईरान
- Friday World September 23,2026 
वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब जमीन से आसमान तक पहुंच गया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने 23 सितंबर 2026 से ईरान की सभी एयरलाइंस पर दुनिया भर में लैंडिंग, फ्यूल और टिकट बिक्री पर रोक लगाने की चेतावनी दी है। 

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने CNBC को दिए इंटरव्यू में कहा, "23 सितंबर को दुनिया भर में सभी ईरानी एयरलाइंस बंद हो जाएंगी। अगर वे उतरती हैं, तो आप उन्हें ईंधन नहीं दे सकते, लैंडिंग सेवाएं नहीं दे सकते, टिकट नहीं बेच सकते, नहीं तो आपको डॉलर सिस्टम से बाहर कर दिया जाएगा।" 

 अज़रबैजान, इराक, तुर्की ने क्या किया?
अमेरिका की सेकेंडरी सेंक्शन की धमकी के बाद असर दिखने लगा है। रिपोर्ट के अनुसार इराक ने मंगलवार सुबह से सभी ईरानी उड़ानों को सस्पेंड करने का फैसला किया है, क्योंकि आदेश न मानने वाले देशों और एयरपोर्ट्स को भी डॉलर सिस्टम से बाहर करने की चेतावनी दी गई है। तुर्की ने भी ईरानी एयरलाइंस को स्वीकार न करने का संकेत दिया है। 

अमेरिका ने इस महीने की शुरुआत में ही 27 ईरानी एयरलाइंस सहित 36 संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाया था। 

 फिर भी ईरान की तरक्की जारी?
पाबंदियों के बावजूद ईरान लगातार आत्मनिर्भरता का संदेश दे रहा है।

 1. आधुनिक तकनीक: ईरान रेलवे स्टेशनों पर CPR जैसी आधुनिक स्वदेशी मशीनें लगा रहा है, ताकि मेडिकल इमरजेंसी में तुरंत मदद मिल सके। यह ईरान की मेडिकल टेक्नोलॉजी में प्रगति का संकेत है।

 2. सीरिया और गोलान हाइट्स: सीरिया के सुर अब बदले हुए हैं और ईरान ने एक बार फिर गोलान हाइट्स पर इज़राइल के कब्जे को अवैध बताया है। ईरान का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार गोलान सीरिया का हिस्सा है।

 3. जर्मनी का रुख: यूरोप में भी अब ईरान की तकनीकी और वैज्ञानिक तरक्की पर चर्चा हो रही है। प्रतिबंधों के बावजूद ईरान का स्पेस, ड्रोन और मेडिकल सेक्टर में आगे बढ़ना जर्मनी जैसे देशों को भी दिख रहा है।

ईरान का साफ संदेश
ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व ने साफ कहा है - "चाहे कुछ भी हो जाए, ईरान अमेरिका के सामने कभी घुटने नहीं टेकेगा।" तेहरान का मानना है कि अमेरिका की 'इकोनॉमिक फ्यूरी' और 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' जैसी नीतियां फेल होंगी और इंशाल्लाह अमेरिका को जल्द ही ईरान पर लगी पाबंदियां हटाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World September 23,2026 

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September 23, 2026

चुनाव आयोग बना 'निजी गढ़'? EC-SIR विवाद पर प्रशांत भूषण का बड़ा हमला, कहा - ज्ञानेश कुमार पर चले मुकदमा

चुनाव आयोग बना 'निजी गढ़'? EC-SIR विवाद पर प्रशांत भूषण का बड़ा हमला, कहा - ज्ञानेश कुमार पर चले मुकदमा
- Friday World September 23,2026 
नई दिल्ली: देश में चल रहे EC-SIR यानी Special Intensive Revision (विशेष गहन पुनरीक्षण) विवाद ने अब संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता और सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।

प्रशांत भूषण ने कहा है कि, "ज्ञानेश कुमार को केवल पद से हटाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उनके खिलाफ मुकदमा भी चलाया जाना चाहिए।"

 क्या है पूरा मामला? प्रशांत भूषण के 3 बड़े आरोप

 1. चुनाव आयोग में आंतरिक फूट और मनमाने फैसले:
प्रशांत भूषण का दावा है कि चुनाव आयोग में 3 चुनाव आयुक्त होते हैं, लेकिन मौजूदा समय में आयोग एक व्यक्ति का निजी गढ़ बन गया है। उनके अनुसार बाकी दोनों चुनाव आयुक्तों - सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में लगभग 14 बार आयोग के फैसलों पर आपत्ति जताई है। आरोप है कि जानकारी के बिना और बिना सहमति के फैसले लिए जा रहे हैं, और दोनों आयुक्तों की आपत्तियों को नजरअंदाज किया जा रहा है।

 2. IT व्यवस्था का केंद्रीकरण:
सबसे गंभीर आरोप चुनाव आयोग की IT प्रणाली को लेकर है। भूषण के अनुसार ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयोग की पूरी आईटी व्यवस्था को इस हद तक केंद्रीकृत कर दिया है कि दिल्ली स्थित केंद्रीय कार्यालय से ही तय हो रहा है कि किसका नाम मतदाता सूची में जोड़ा जाए, किसका नहीं जोड़ा जाए और किसका नाम हटाया जाए। पहले यह काम राज्य स्तर पर विकेंद्रीकृत तरीके से होता था।

 3. मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटना:
SIR विवाद की शुरुआत बिहार से हुई थी, जहां ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से करीब 60-65 लाख नाम हटाने की बात सामने आई थी। बाद में देशभर में यह आंकड़ा 1 करोड़ से ज्यादा बताया गया। विपक्ष इसे 'वोट चोरी' बता रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में चुनाव आयोग को पारदर्शिता और सहमति सुनिश्चित करने की चेतावनी दी है और अगली सुनवाई 7 अक्टूबर तय की है।

चुनाव आयोग ने हालांकि इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

संवैधानिक सवाल
भारत में चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है। उसका भरोसा उसकी सामूहिक निर्णय प्रक्रिया और पारदर्शिता पर टिका है। अगर तीन आयुक्तों में मतभेद और IT केंद्रीकरण के आरोप सही हैं तो यह लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है। इसलिए प्रशांत भूषण ने मांग की है कि केवल इस्तीफा नहीं, बल्कि पूरी जांच और मुकदमा चलना चाहिए।

*डिस्क्लेमर:* यह लेख वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के सार्वजनिक बयानों पर आधारित है। इसमें लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है। चुनाव आयोग ने आरोपों को खारिज किया है। मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World September 23,2026 

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September 23, 2026

जंग के साए में UNGA: न्यूयॉर्क में आमने-सामने अमेरिका-ईरान, क्या टलेगा महायुद्ध?

जंग के साए में UNGA: न्यूयॉर्क में आमने-सामने अमेरिका-ईरान, क्या टलेगा महायुद्ध?
- Friday World September 23,2026 
जंग के साए में UNGA: न्यूयॉर्क में आमने-सामने अमेरिका-ईरान, क्या टलेगा महायुद्ध?

न्यूयॉर्क। पश्चिम एशिया में बीते सात महीनों से जारी भीषण सैन्य टकराव के बीच संयुक्त राष्ट्र की सबसे बड़ी कूटनीतिक पंचायत शुरू हो गई है। 81वें संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के उच्चस्तरीय सत्र में पूरी दुनिया की नजर इस बार ईरान और अमेरिका पर टिकी है।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान मंगलवार को न्यूयॉर्क के लिए रवाना हुए और आज बुधवार 23 सितंबर को वह महासभा को संबोधित करेंगे। यह दौरा इसलिए ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि ऐसा पहली बार हो रहा है जब अमेरिका के साथ सीधे युद्ध में उलझा कोई राष्ट्राध्यक्ष अमेरिकी धरती पर आकर UN में अपना पक्ष रख रहा है। 

ट्रंप का ऑफर, पेजेश्कियान का संदेश

ईरानी समाचार एजेंसी इरना के मुताबिक, पेजेश्कियान का यह दौरा केवल भाषण तक सीमित नहीं है। वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर थोपी गई जंग को लेकर तेहरान का पक्ष मजबूती से रखेंगे।

इससे पहले फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह ईरानी राष्ट्रपति से मिलने के लिए तैयार हैं। हालांकि व्हाइट हाउस ने साफ किया है कि दोनों नेताओं की औपचारिक बैठक अभी तय नहीं हुई है। ट्रंप मंगलवार को UNGA को संबोधित कर चुके हैं, जबकि पेजेश्कियान का संबोधन बुधवार सुबह के सत्र में होगा।

ट्रंप ने अपने संबोधन में ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा था कि तेहरान को समझौते का रास्ता चुनना होगा, नहीं तो अंजाम भुगतना होगा। वहीं पेजेश्कियान ने रवाना होने से पहले कहा था, "हम अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ईरान की मजलूमियत को पूरी ताकत से उठाएंगे। हमने कई बार बातचीत की मेज पर जाकर समझौते किए, लेकिन दुनिया ने देखा कि कैसे वादों को पैरों तले रौंद दिया गया और अविश्वास पैदा किया गया।" 256b

प्रतिनिधिमंडल पर अमेरिका की सख्ती

अमेरिका ने इस बार ईरानी प्रतिनिधिमंडल को लेकर बेहद सख्त रवैया अपनाया है। विदेश विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि मेजबान देश के दायित्वों के तहत केवल मुख्य प्रतिनिधिमंडल को ही UNGA में आने की अनुमति दी गई है। राष्ट्रपति पेजेश्कियान और विदेश मंत्री अब्बास अराघची को वीजा दिया गया है, लेकिन राष्ट्रपति की मीडिया और जनसंपर्क टीम के कई सदस्यों के वीजा रोक दिए गए हैं। ईरान ने इसे वाशिंगटन की शत्रुतापूर्ण कार्रवाई बताया है।

पेजेश्कियान के साथ विदेश मंत्री अब्बास अराघची समेत उच्चस्तरीय टीम है। अपने कार्यक्रम के दौरान वह कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों से द्विपक्षीय बैठकें करेंगे, साथ ही अमेरिका में रह रहे ईरानी मूल के शिक्षाविदों और थिंक-टैंक के विशेषज्ञों से भी मिलेंगे।

IRGC ने कहा - जंग खत्म नहीं हुई

कूटनीति के बीच जमीनी हालात और तनावपूर्ण बने हुए हैं। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने सोमवार को बयान दिया कि अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ युद्ध खत्म नहीं हुआ है। ब्रिगेडियर जनरल होसैन मोहब्बी ने कहा कि ईरानी सेना लंबे संघर्ष के लिए पूरी तरह तैयार है, युद्ध के चरण बदल सकते हैं लेकिन टकराव जारी रहेगा।

उधर अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए ईरान को लेकर लेवल-4 की यात्रा चेतावनी फिर से जारी की है और अपने नागरिकों से तुरंत ईरान छोड़ने को कहा है।

इसी बीच होर्मुज स्ट्रेट में सोमवार को दो तेल टैंकरों पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमले की खबर ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल बढ़ा दी है। इस हमले में दो नाविक घायल हुए हैं और अभी तक किसी ने जिम्मेदारी नहीं ली है। क्षेत्र में जहाजों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

दुनिया की नजर न्यूयॉर्क पर

इस बार UNGA की थीम है - "विश्वास बहाली और परिवर्तन का प्रबंधन: सभी के लिए काम करने वाला संयुक्त राष्ट्र"। विश्लेषकों का मानना है कि अगर न्यूयॉर्क में ट्रंप और पेजेश्कियान के बीच औपचारिक या अनौपचारिक मुलाकात भी होती है, तो यह सात महीने से चल रहे युद्ध को विराम देने की दिशा में सबसे बड़ा ब्रेकथ्रू हो सकता है। पूरी दुनिया की निगाहें अब 23 सितंबर के भाषण पर हैं।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World September 23,2026 

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September 23, 2026

સુપ્રીમની આકરી ટકોર - "ચૂંટણી પંચ વિચાર્યા વિના નોટિસો મોકલે છે": દિલ્હીમાં SIR ને લઈને 33 લાખ મતદારોના ભવિષ્ય પર સવાલ!

સુપ્રીમની આકરી ટકોર - "ચૂંટણી પંચ વિચાર્યા વિના નોટિસો મોકલે છે": દિલ્હીમાં SIR ને લઈને 33 લાખ મતદારોના ભવિષ્ય પર સવાલ!
-Friday World September 23,2026 
નવી દિલ્હી :

દિલ્હીમાં ચાલી રહેલી મતદાર યાદીની સ્પેશિયલ ઇન્ટેન્સિવ રિવિઝન (SIR) પ્રક્રિયા હવે સુપ્રીમ કોર્ટની નજરમાં આવી ગઈ છે. મંગળવારે સુનાવણી દરમિયાન સુપ્રીમ કોર્ટે ચૂંટણી પંચને આકરા શબ્દોમાં કહ્યું કે, "લોકોને સમજ્યા વિચાર્યા વગર નોટિસો મોકલવામાં આવી રહી છે. આ પ્રક્રિયામાં વધુ સુરક્ષાત્મક પગલાંની જરૂર છે."

આ કેસની સુનાવણી મુખ્ય ન્યાયમૂર્તિ સૂર્યકાંત, ન્યાયમૂર્તિ જોયમાલ્ય બાગચી અને ન્યાયમૂર્તિ વી. મોહનાની બનેલી ત્રણ જજોની બેન્ચ કરી રહી હતી.

શું છે સમગ્ર મામલો?

સામાજિક કાર્યકર્તા અંજલિ ભારદ્વાજ અને અમૃતા જોહરી દ્વારા એક જનહિત અરજી (PIL) દાખલ કરવામાં આવી છે. અરજીમાં આક્ષેપ છે કે ચૂંટણી પંચ અને દિલ્હીના મુખ્ય ચૂંટણી અધિકારી (CEO) એ SIR પ્રક્રિયા હેઠળ જે નોટિસો મોકલી છે, તેમાં નોટિસ મોકલવા પાછળનું ચોક્કસ અને સ્પષ્ટ કારણ જણાવવામાં આવ્યું નથી.

અરજદારોના વકીલ પ્રશાંત ભૂષણે કોર્ટમાં દલીલ કરી હતી કે આ પ્રક્રિયા ખૂબ જ ચોંકાવનારી રીતે ચાલી રહી છે. તેમના મતે દિલ્હીમાં 33 લાખથી વધુ મતદારોને અત્યંત નજીવા અને ટેકનિકલ કારણોસર નોટિસ ફટકારી દેવામાં આવી છે. ઘણા લોકોને તો ખબર પણ નથી કે તેમની ભૂલ શું છે.

"તાર્કિક વિસંગતતા" એટલે શું? સુપ્રીમ કોર્ટે શું કહ્યું?

ચૂંટણી પંચે કહ્યું હતું કે આ નોટિસો "લોજિકલ ડિસ્ક્રેપન્સી" એટલે કે તાર્કિક વિસંગતતા મળી આવતા મોકલવામાં આવી છે. પરંતુ સુપ્રીમ કોર્ટે આ શબ્દ પર જ સવાલ ઉઠાવ્યો.

બેન્ચે ચૂંટણી પંચના વરિષ્ઠ વકીલને સ્પષ્ટ કહ્યું - "તાર્કિક વિસંગતતા ઓળખવા માટે તમે કયા આધાર અને કયા અલ્ગોરિધમનો ઉપયોગ કરો છો તેની સ્પષ્ટતા જરૂરી છે. કોઈ વ્યક્તિનું નામ, ઉંમર કે સરનામામાં નાની ભૂલ હોય તો શું તેનો મતાધિકાર છીનવી શકાય?"

કોર્ટે એમ પણ કહ્યું કે, લોકોને નોટિસ સમજ્યા વગર આપવામાં આવી રહી છે. પંચે તપાસ કરવી જોઈએ કે આ પ્રક્રિયામાં કોઈ વધારાની સુરક્ષાત્મક વ્યવસ્થા (Safeguards) ની જરૂર છે કે નહીં, જેથી કોઈ સાચો મતદાર મતદાર યાદીમાંથી બહાર ન થઈ જાય.

અરજદારોની મુખ્ય માંગણીઓ:

આ PIL માં માત્ર નોટિસ રદ કરવાની જ નહીં, પણ પારદર્શિતાની માંગ કરવામાં આવી છે:

1. તાર્કિક વિસંગતતા નક્કી કરવાના માપદંડો શું છે?
2. મતદારોનું વર્ગીકરણ કયા આધારે થયું?
3. આ માટે કયું સોફ્ટવેર અને અલ્ગોરિધમ વપરાયું?
4. તેની કામગીરીની માર્ગદર્શિકા જાહેર કરો.

અરજદારોનું કહેવું છે કે જો આ બધું જાહેર નહીં થાય તો આખી પ્રક્રિયા અપારદર્શક બની જશે અને લોકશાહીના સૌથી મોટા અધિકાર - મતાધિકાર પર જોખમ ઉભું થશે.

આગળ શું થશે?

સુપ્રીમ કોર્ટે ચૂંટણી પંચને આ મામલે વિગતવાર જવાબ દાખલ કરવા કહ્યું છે. કોર્ટે સંકેત આપ્યો છે કે મતદાર યાદી શુદ્ધ હોવી જરૂરી છે, પરંતુ શુદ્ધિકરણના નામે ઉતાવળે કે કોઈ ગરીબ, સામાન્ય માણસ કે ભાડે રહેતા લોકોને હેરાન કરવા યોગ્ય નથી.

આ ચુકાદા પર હવે આખા દેશની નજર છે, કારણ કે SIR પ્રક્રિયા ભવિષ્યમાં અન્ય રાજ્યોમાં પણ લાગુ થઈ શકે છે. જો 33 લાખ લોકો દિલ્હીમાં જ પ્રભાવિત થતા હોય તો રાષ્ટ્રીય સ્તરે આ આંકડો કરોડોમાં પહોંચી શકે છે.

આમ, આ લડાઈ હવે માત્ર નોટિસની નથી, પણ દરેક નાગરિકના મતના અધિકારને બચાવવાની લડાઈ બની ગઈ છે.

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World September 23,2026 

#SupremeCourt #ElectionCommission #DelhiNews #SIRProcess #VoterList #IndianDemocracy #RightToVote #SupremeCourtOfIndia #DelhiVoters #BreakingNews
September 23, 2026

નોહરમાં લોકશાહીનો અજબ ખેલ: 20 બેઠક જીતીને પણ કોંગ્રેસ સત્તાથી દૂર, ચિઠ્ઠીએ ભાજપને બનાવ્યો બાદશાહ!

નોહરમાં લોકશાહીનો અજબ ખેલ: 20 બેઠક જીતીને પણ કોંગ્રેસ સત્તાથી દૂર, ચિઠ્ઠીએ ભાજપને બનાવ્યો બાદશાહ!
- Friday World September 23,2026
રાજસ્થાનના હનુમાનગઢ જિલ્લાના નોહરમાં જે થયું છે, તે રાજકીય શાસ્ત્રના તમામ પુસ્તકોને ફેલ કરી દે તેવું છે. 14 સપ્ટેમ્બરના રોજ આવેલા નગરપાલિકા ચૂંટણીના પરિણામમાં કોંગ્રેસે 40 માંથી 20 વોર્ડ જીતીને અડધું મેદાન કબજે કરી લીધું હતું. ભાજપના ખાતામાં તો માંડ 2 બેઠકો આવી હતી, જ્યારે 18 બેઠકો પર અપક્ષો જીત્યા હતા. ગણિત સ્પષ્ટ કહેતું હતું - અધ્યક્ષ કોંગ્રેસનો જ બનશે. પણ રાજકારણ ગણિતથી નહીં, ગણતરીથી ચાલે છે, અને નોહરમાં આ વાત સાબિત થઈ ગઈ.

7 દિવસની પડદા પાછળની રમત અને 20-20 ની ટાઈ

ચૂંટણી પરિણામ પછી 7 દિવસ સુધી નોહરમાં જે થયું તે સામાન્ય નહોતું. ભાજપે હાર માનવાને બદલે અપક્ષો પર નજર નાખી. ભાજપની નજર 62 વર્ષીય હાજન ખાતુન તક પર પડી, જેઓ અપક્ષ તરીકે ચૂંટણી જીત્યા હતા. ભાજપે તરત જ તેમને સમર્થન જાહેર કરીને અધ્યક્ષ પદના ઉમેદવાર બનાવી દીધા.

સોમવારે જ્યારે અધ્યક્ષની ચૂંટણી માટે મતદાન થયું, ત્યારે આખું ગણિત ઉલટું પડી ગયું. ભાજપના 2 કોર્પોરેટર + 18 અપક્ષો = 20 મત, હાજન ખાતુન તકને મળ્યા. સામે કોંગ્રેસના ઉમેદવાર સુમિત ચાચનને પણ તેના 20 કોર્પોરેટરોના 20 મત મળ્યા. સદનમાં 20-20 ની બરાબરી સર્જાઈ.

ચિઠ્ઠી ઉપાડી બાળકીએ અને નસીબ ખુલ્યું ભાજપનું

નગરપાલિકા અધિનિયમ મુજબ બરાબરીની સ્થિતિમાં ફરી મતદાન થતું નથી, વિજેતાનો ફેંસલો લોટરી એટલે કે ચિઠ્ઠી ઉપાડીને થાય છે. અધિકારીઓએ બે ચિઠ્ઠીઓ બનાવી એક બોક્સમાં નાખી. એક નાની બાળકીને બોલાવવામાં આવી. બાળકીએ એક ચિઠ્ઠી ઉપાડી અને ખોલતા જ નામ નીકળ્યું - હાજન ખાતુન તક.

આ સાથે જ માત્ર 2 બેઠક ધરાવતી ભાજપનો ઝંડો નોહર નગરપાલિકા પર લહેરાઈ ગયો, અને 20 બેઠક જીતનારી કોંગ્રેસ જોતી રહી ગઈ. આને કહેવાય ખરો રાજકીય ખેલ.

કોણ છે હાજન ખાતુન તક?

હાજન ખાતુન તક કોઈ નવું નામ નથી. તેમનો પરિવાર નોહરના રાજકારણમાં વર્ષોથી સક્રિય છે. તેમના દિવંગત પતિ મંજૂર અલી તક પણ નોહર નગરપાલિકાના અધ્યક્ષ રહી ચૂક્યા છે. વધુ રસપ્રદ વાત એ છે કે તેઓ રાજસ્થાન સરકારના પૂર્વ રાજ્ય મંત્રી મેહરુનિસ્સા તકના સાસુ છે. એટલે કે અનુભવ અને વારસો બંને તેમની સાથે છે.

ભાજપે એક મુસ્લિમ મહિલાને અધ્યક્ષ બનાવીને માત્ર નોહરમાં જ નહીં, પણ સમગ્ર રાજસ્થાનમાં એક મોટો સંદેશ આપવાનો પ્રયત્ન કર્યો છે કે પાર્ટી સર્વ સમાજને સાથે લઈને ચાલે છે.

ચૂંટણી પહેલા પોલીસની નોટિસથી ગરમાયું હતું રાજકારણ

આ આખા ઘટનાક્રમમાં એક વધુ ટ્વિસ્ટ છે. અધ્યક્ષની ચૂંટણીના બરાબર એક દિવસ પહેલા કોંગ્રેસના ધારાસભ્ય અમિત ચાચનના નજીકના લોકોના ઘરો પર પોલીસે જમીન કૌભાંડ મામલે નોટિસો ચોંટાડી હતી. કોંગ્રેસે આને ભાજપનું દબાણનું રાજકારણ ગણાવ્યું હતું, જ્યારે ભાજપે તેને કાયદાકીય પ્રક્રિયા ગણાવી હતી. આ કાર્યવાહી પછી અપક્ષોનું વલણ બદલાયું હોવાની ચર્ચા પણ શહેરમાં જોરશોરથી ચાલી રહી છે.

આ જીત બતાવે છે કે ભારતીય લોકશાહીમાં આંકડા મહત્વના છે, પણ આખરી જીત તો જોડતોડ, વ્યૂહરચના અને ક્યારેક નસીબની ચિઠ્ઠીથી જ નક્કી થાય છે. નોહરની જનતાએ કોંગ્રેસને સૌથી મોટો પક્ષ બનાવ્યો, પણ ખુરશી ભાજપ લઈ ગયું.

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World September 23,2026

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