February 12, 2026
रूस ने अमेरिकी दादागिरी को दी करारा जवाब: व्हाट्सएप पर पूरा बैन, अब 'मैक्स' ऐप बनेगा नया चेहरा!
रूस ने अमेरिकी दादागिरी को दी करारा जवाब: व्हाट्सएप पर पूरा बैन, अब 'मैक्स' ऐप बनेगा नया चेहरा! -Friday world 12th feb 2026
रूस ने एक बार फिर दुनिया को दिखा दिया कि वह अपनी डिजिटल संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर कितना सख्त है। फरवरी 2026 में रूस ने मेटा के मालिकाना हक वाले मैसेजिंग ऐप **व्हाट्सएप** पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। यह कदम अमेरिकी टेक दिग्गजों की मनमानी के खिलाफ एक मजबूत संदेश है, जो चीन की तरह अपनी डिजिटल दुनिया को स्वतंत्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
क्या है पूरा मामला? रूस के इंटरनेट रेगुलेटर **Roskomnadzor** ने व्हाट्सएप को देश के नेशनल डोमेन नेम सिस्टम से हटा दिया, जिससे ऐप के सर्वर से कनेक्शन लगभग असंभव हो गया। क्रेमलिन के प्रवक्ता **दिमित्री पेस्कोव** ने स्पष्ट कहा, "मेटा ने रूसी कानूनों का पालन नहीं किया, इसलिए यह फैसला लिया गया और लागू भी कर दिया गया।" रूस का आरोप है कि व्हाट्सएप आतंकवाद, धोखाधड़ी और अन्य अपराधों के लिए इस्तेमाल हो रहा था, लेकिन कंपनी ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों को जरूरी जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया।
व्हाट्सएप की तरफ से बयान आया कि रूसी सरकार ने ऐप को "पूर्ण रूप से ब्लॉक" करने की कोशिश की है, ताकि यूजर्स को सरकारी "सर्विलांस ऐप" की ओर धकेला जा सके। कंपनी ने कहा, "हम यूजर्स को जुड़े रहने के लिए हर संभव प्रयास जारी रखेंगे।" लेकिन हकीकत यह है कि रूस में अब बिना VPN के व्हाट्सएप इस्तेमाल करना मुश्किल हो गया है।
चीन का रास्ता अपनाता रूस: 'मैक्स' बनेगा नया वीचैट! यह कदम चीन की डिजिटल नीति से प्रेरित लगता है, जहां बीजिंग ने वर्षों पहले फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम जैसी सभी विदेशी ऐप्स पर बैन लगा दिया और अपनी स्वदेशी ऐप्स जैसे **WeChat** को बढ़ावा दिया। WeChat आज सिर्फ मैसेजिंग नहीं, बल्कि पेमेंट, ई-कॉमर्स, टैक्सी बुकिंग, न्यूज सब कुछ एक जगह ऑफर करता है।
रूस भी इसी मॉडल पर चल पड़ा है। सरकार ने MAx नाम का अपना "नेशनल मैसेंजर" लॉन्च किया है, जिसे VK कंपनी ने विकसित किया है। यह ऐप 2025 में रिलीज हुआ और अब टीवी, बिलबोर्ड्स, सरकारी प्रचार के जरिए जोर-शोर से प्रमोट किया जा रहा है। MAX में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन नहीं है, जिसके कारण मानवाधिकार संगठन इसे "सर्विलांस टूल" कह रहे हैं। लेकिन रूसी अधिकारी इसे "राष्ट्रीय सुरक्षा और डिजिटल संप्रभुता" का हिस्सा बता रहे हैं।
पेस्कोव ने कहा, "MAX एक उपलब्ध विकल्प है, एक विकसित मैसेंजर, राष्ट्रीय मैसेंजर। यह बाजार में उपलब्ध है।" रूस का मकसद साफ है - पश्चिमी टेक कंपनियों पर निर्भरता खत्म करना और डेटा कंट्रोल अपने हाथ में रखना।
यूक्रेन युद्ध के बाद बढ़ा तनाव यह सब 2022 में यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद शुरू हुआ। उस समय से मेटा, गूगल, एप्पल जैसी कंपनियां रूस में मुश्किलों में हैं। मेटा को "एक्सट्रीमिस्ट" घोषित किया गया, इंस्टाग्राम और फेसबुक पहले ही ब्लॉक हैं। 2025 से शुरू हुए फेज्ड रेस्ट्रिक्शंस में अगस्त में व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर वॉइस-वीडियो कॉल्स बंद कर दिए गए, अक्टूबर में नए यूजर्स रजिस्ट्रेशन रोके गए, दिसंबर में फेसटाइम और स्नैपचैट पर भी पाबंदी आई। फरवरी 2026 में आखिरी झटका - व्हाट्सएप और यूट्यूब पूरी तरह ब्लॉक!
रूस में व्हाट्सएप के करीब 10 करोड़ यूजर्स थे, जो इसे सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप बनाता था। अब लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। उनकी रोजमर्रा की कम्युनिकेशन, बिजनेस, फैमिली चैट्स सब पर असर पड़ेगा।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स? डिजिटल राइट्स ग्रुप्स और मानवाधिकार संगठन इसे इंटरनेट फ्रीडम पर हमला मान रहे हैं। उनका कहना है कि यह कदम न सिर्फ प्राइवेसी छीन रहा है, बल्कि असहमति दबाने का तरीका भी है। युद्ध के बीच सरकार विरोधी आवाजों को दबाना आसान हो जाएगा। दूसरी तरफ, रूसी मीडिया इसे "अमेरिकी दादागिरी" के खिलाफ जीत बता रहा है।
वैश्विक असर क्या होगा? यह घटना ग्लोबल इंटरनेट को "स्प्लिंटर" कर रही है - एक तरफ पश्चिमी ओपन इंटरनेट, दूसरी तरफ चीन-रूस जैसे देशों का "सॉवरेन इंटरनेट"। अगर और देश ऐसे कदम उठाएंगे, तो वैश्विक डिजिटल इकोसिस्टम टूट सकता है। मेटा को भारी नुकसान हो रहा है, क्योंकि रूस एक बड़ा मार्केट था।
रूस का यह फैसला सिर्फ एक ऐप का बैन नहीं, बल्कि एक बड़ी जंग का हिस्सा है - डिजिटल संप्रभुता, डेटा कंट्रोल और अमेरिकी टेक मोनोपॉली के खिलाफ। आने वाले समय में यह टकराव और तेज हो सकता है। क्या भारत जैसे देश भी ऐसी नीति अपनाएंगे? समय बताएगा।
Sajjadali Nayani ✍
Friday world 12th feb 2026