April 23, 2026
ट्रंप का तीखा हमला: भारत-चीन को ‘नर्क’ करार, क्या भारतीयों की अमेरिकी नौकरियां अब खतरे में?
ट्रंप का तीखा हमला: भारत-चीन को ‘नर्क’ करार, क्या भारतीयों की अमेरिकी नौकरियां अब खतरे में?
-Friday World-April 23,2026
नई दिल्ली, 23 अप्रैल 2026 — अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर विवादास्पद बयान देकर सुर्खियां बटोर ली हैं। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर रेडियो होस्ट माइकल सैवेज के एक लंबे वीडियो/पत्र को दोबारा पोस्ट किया, जिसमें भारत और चीन जैसे देशों को ‘पृथ्वी पर के नर्क (hellhole on the planet)’ कहा गया है। यह पोस्ट मुख्य रूप से बर्थराइट सिटिजनशिप (जन्म के आधार पर स्वतः अमेरिकी नागरिकता) की नीति पर हमला है और इसमें इमिग्रेशन के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है।
ट्रंप ने इस पोस्ट को शेयर करते हुए कहा कि वे भारतीयों के समर्थक थे, लेकिन अब अमेरिका में जो कुछ हो रहा है, उसे देखकर उनकी आंखें खुल गई हैं। सैवेज के पत्र में दावा किया गया है कि अमेरिका में जन्म लेने वाला एक बच्चा तुरंत नागरिक बन जाता है और फिर वह अपने पूरे परिवार को **चीन, भारत या दुनिया के किसी अन्य नर्क** से बुला लेता है। आरोप है कि लोग गर्भावस्था के नौवें महीने में अमेरिका आकर बच्चे को जन्म देते हैं ताकि पूरा परिवार बस सके।
टेक सेक्टर पर भी निशाना
पत्र में कैलिफोर्निया के टेक सेक्टर पर खास तौर पर हमला किया गया है। दावा किया गया कि वहां हायरिंग का पूरा सिस्टम भारतीयों और चीनी लोगों के नियंत्रण में है। इसमें कहा गया, “आपको भारत या चीन से होना चाहिए, क्योंकि आंतरिक तंत्र भारतीयों और चीनी लोगों द्वारा चलाया जा रहा है। श्वेत पुरुषों के लिए नौकरियां लगभग खत्म हो गई हैं।” ट्रंप ने खुद इसमें जोड़ा कि वे भारतीयों के समर्थक थे, लेकिन वास्तविकता देखकर उनका रुख बदल गया। हालांकि, इन दावों के समर्थन में कोई ठोस आंकड़े या सबूत पेश नहीं किए गए।
बर्थराइट सिटिजनशिप पर क्या कहना है ट्रंप का?
ट्रंप लंबे समय से 14वें संशोधन के तहत मिलने वाली जन्म-आधारित नागरिकता को सीमित करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने जनवरी 2025 में कार्यकारी आदेश जारी किया था, जिसमें गैर-नागरिक या अस्थायी वीजा (जैसे H-1B) वाले माता-पिता के बच्चों को नागरिकता देने से इनकार करने की बात कही गई थी। यह आदेश अदालतों द्वारा रोका गया है और फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में इस पर सुनवाई चल रही है।
सैवेज और ट्रंप का तर्क है कि यह नीति दुरुपयोग हो रहा है। वे चाहते हैं कि इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर जनमत संग्रह हो, न कि अदालतें फैसला करें। उन्होंने ACLU (अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन) पर भी हमला किया और उसे “अपराधी संगठन” करार दिया। आरोप है कि ACLU गैरकानूनी इमिग्रंट्स के पक्ष में खड़ा होता है और अमेरिकी टैक्सपेयर्स के पैसे से सरकारी सुविधाओं का दुरुपयोग होता है।
भारतीयों के लिए क्या मायने रखता है?
भारत और अमेरिका के बीच मजबूत रणनीतिक साझेदारी है, लेकिन ऐसे बयान भारतीय समुदाय को चिंतित कर रहे हैं। अमेरिका में लाखों भारतीय प्रोफेशनल्स H-1B वीजा पर काम कर रहे हैं। Google, Microsoft, Adobe जैसी कंपनियों में भारतीय मूल के कई टॉप एक्जीक्यूटिव्स हैं। अगर इमिग्रेशन नीतियां सख्त हुईं तो:
- H-1B वीजा और ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर और पाबंदियां लग सकती हैं।
- टेक सेक्टर में भारतीयों की हायरिंग पर अतिरिक्त जांच हो सकती है।
- बर्थराइट सिटिजनशिप प्रभावित होने से H-1B, F-1 या अन्य अस्थायी वीजा वाले परिवारों के बच्चों का भविष्य अनिश्चित हो सकता है।
- भारतीय आईटी कंपनियां और युवा अमेरिका के अलावा यूरोप, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया जैसे वैकल्पिक बाजारों की ओर रुख कर सकते हैं।
भारतीय-अमेरिकी समुदाय ने इस बयान पर नाराजगी जताई है। कई लोग इसे नस्लवाद से प्रेरित मान रहे हैं। हालांकि, ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति उनके घरेलू वोट बैंक को लक्ष्य करती है, जहां इमिग्रेशन एक बड़ा मुद्दा रहा है।
वास्तविकता और कानूनी पहलू
अमेरिकी संविधान का 14वां संशोधन 1868 से जन्म के आधार पर नागरिकता देता है (कुछ अपवादों के साथ, जैसे राजनयिक बच्चों को)। 1898 के यूएस बनाम वोंग किम आर्क मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इसे पुष्ट किया था। ट्रंप का कार्यकारी आदेश कई अदालतों द्वारा असंवैधानिक करार दिया जा चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सुप्रीम कोर्ट ट्रंप के पक्ष में फैसला देता है तो लाखों एशियाई परिवार (खासकर भारतीय और चीनी) प्रभावित होंगे।
ट्रंप का यह अंदाज नया नहीं है। उन्होंने पहले भी कुछ देशों को “shithole countries” कहा था। आलोचक कहते हैं कि ऐसे बयान अमेरिका की विविधता और आर्थिक ताकत (जिसमें इमिग्रंट्स का बड़ा योगदान है) को नुकसान पहुंचाते हैं।
भारत को क्या करना चाहिए?
भारत सरकार ने अब तक औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि कूटनीतिक स्तर पर संतुलित रुख अपनाया जाए। साथ ही, भारतीय युवाओं को स्किल डेवलपमेंट पर जोर देकर घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना चाहिए ताकि विदेशी अवसरों पर अत्यधिक निर्भरता कम हो।
ट्रंप का यह पोस्ट मुख्य रूप से घरेलू राजनीति से प्रेरित लगता है। उनकी मंजूरी रेटिंग गिरने के बीच वे इमिग्रेशन को फिर से बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन वैश्विक स्तर पर ऐसे बयान भारत-अमेरिका संबंधों में हल्का तनाव जरूर पैदा कर सकते हैं।
भारतीय युवा जो अमेरिका जाना चाहते हैं, उन्हें सलाह है कि अपनी स्किल्स को और मजबूत करें, कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करें और वैश्विक स्तर पर विकल्प तलाशें। अमेरिका की ताकत उसकी विविधता में है – और भारतीय समुदाय ने इसमें हमेशा योगदान दिया है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 23,2026