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यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Monday, 26 October 2026

October 26, 2026

समुद्र के सीने पर 30 KM लंबा बांध: गुजरात का काल्पसर प्रोजेक्ट, जहां खारा समंदर बनेगा दुनिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील

समुद्र के सीने पर 30 KM लंबा बांध: गुजरात का काल्पसर प्रोजेक्ट, जहां खारा समंदर बनेगा दुनिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील
- Friday World Oct 26,2026 
                   प्रतीकात्मक तस्वीर 

भारत गुजरात में समुद्र के सीने पर दुनिया का सबसे बड़ा अजूबा खड़ा करने की तैयारी में है। इसका नाम है - #काल्पसर प्रोजेक्ट। खंभात की खाड़ी में 30 किलोमीटर लंबा विशाल कंक्रीट का बांध, जो समुद्र के खारे पानी को रोककर मीठे पानी का समंदर बना देगा।

ये सिर्फ एक बांध नहीं, भारत के इंजीनियरिंग इतिहास का सबसे साहसी सपना है। 'काल्पसर' का मतलब ही है - जो कल्पना को साकार कर दे, इच्छाओं को पूरा करने वाली झील।

क्या है ये प्रोजेक्ट?

गुजरात सरकार की योजना के मुताबिक, भावनगर जिले के घोघा से भरूच जिले के हांसोट तक खंभात की खाड़ी पर लगभग 60.13 किलोमीटर का डाइक बनाया जाएगा, जिसमें से करीब 26.7 से 30 किलोमीटर हिस्सा सीधे समंदर के बीच में होगा।

ये बांध नर्मदा, साबरमती, माही, ढाढर सहित 12 नदियों के पानी को समंदर में बर्बाद होने से रोकेगा। इससे समंदर के बीच 7,807 मिलियन क्यूबिक मीटर क्षमता वाली दुनिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की तटीय झील बनेगी, जो लगभग 2,000 वर्ग किलोमीटर में फैली होगी।

तीन बड़े फायदे, जो गुजरात की #किस्मत बदल देंगे:

 1. #सौराष्ट्र का प्यासा हलक तर होगा: इस झील से सौराष्ट्र के 9 जिलों के 42 तालुका की करीब 10 लाख हेक्टेयर (9.99 लाख हेक्टेयर) बंजर जमीन पर सिंचाई होगी। पीने और इंडस्ट्री के लिए भी पानी मिलेगा और करीब 1 लाख हेक्टेयर खारी जमीन सुधर जाएगी।

 2. 8 #घंटे का सफर 3 घंटे में: बांध की छत पर एक 130 मीटर चौड़ा कॉरिडोर बनेगा, जिसमें 16 लेन की सड़क और 4 लेन की रेलवे लाइन होगी। अभी भावनगर से सूरत जाने के लिए 356 किलोमीटर घूमकर जाना पड़ता है, जो इस बांध से घटकर सिर्फ 177 किलोमीटर रह जाएगा, यानी 179 किलोमीटर की सीधी बचत। सफर 8 घंटे से घटकर 3-4 घंटे का हो जाएगा। सोशल मीडिया पर 20 मिनट का दावा वायरल है, लेकिन सरकारी DPR में दूरी घटने की बात है, समय की नहीं।

 3. #समंदर की लहरों से बिजली: खाड़ी की तेज ज्वारीय लहरों से लगभग 2,470 मेगावाट ग्रीन एनर्जी- 1500 MW विंड और 1000 MW सोलर - पैदा होगी। इसी बिजली से झील का पानी सौराष्ट्र तक पंप किया जाएगा।

#हकीकत क्या है? बन रहा है या सिर्फ कागजों पर?

यहां आपको सच्चाई जानना जरूरी है। वायरल वीडियो में इसे बनता हुआ दिखाया जा रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि अभी बांध का निर्माण शुरू नहीं हुआ है।

- #प्रोजेक्ट का आइडिया 1980 में आया था। 1998 में सरकार ने मंजूरी दी थी।
- #जुलाई 2026 में केंद्र सरकार ने राज्यसभा में बताया कि इसका #DPR (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) अभी फाइनल स्टेज में है।
- 21 मई 2026 को गुजरात के काल्पसर विभाग ने पर्यावरण मंत्रालय से EIA स्टडी के लिए आवेदन किया है।
- #मुख्य बांध का निर्माण अभी शुरू नहीं हुआ है।
- #मई 2026 में भारत और नीदरलैंड ने तकनीकी सहयोग के लिए करार किया है, क्योंकि नीदरलैंड समंदर में बांध बनाने में दुनिया का सबसे अनुभवी देश है।
- #अगर सब मंजूरियां समय पर मिलीं तो #निर्माण मई 2028 से शुरू होकर 2035-38 तक पूरा होने की उम्मीद है, और लागत लगभग 1.33 लाख करोड़ रुपये आएगी। गुजरात सरकार अब तक सिर्फ स्टडी पर 216 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है। 

#सरकार का ही एक हिस्सा - भादभूत बैराज - जो इसी योजना का छोटा रूप है, 2020 से बनना शुरू हुआ है।

सबसे बड़ी #चुनौतियाँ क्या हैं?

#खंभात की खाड़ी में 10 मीटर ऊंची ज्वारीय लहरें, समंदर के खारे और मीठे पानी को अलग रखना, मछुआरों और समुद्री जीवन पर असर, और सिल्ट यानी गाद का जमाव - ये सब बड़ी तकनीकी चुनौतियां हैं। पर्यावरण मंजूरी मिलना भी आसान नहीं होगा।

लेकिन अगर यह बन गया, तो यह सरदार सरोवर से भी बड़ा गेम-चेंजर होगा। यह भारत का अपना #अफ्सलुइजकडाइक (नीदरलैंड का 32 KM लंबा समंदर का बांध) होगा, जो #गुजरात को पानी, बिजली और रफ्तार - तीनों देगा।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World Oct 26,2026 

#KalpasarProject #Gujarat #GulfOfKhambhat #MegaDam #BhavnagarToSurat #Saurashtra #FreshwaterLake #IndianEngineering #GreenEnergy #IndiaNetherlands
#Friday #World
October 26, 2026

अमृत से जहर तक: पृथ्वी पर का सबसे पवित्र दूध अब पीने लायक भी नहीं रहा, आपकी थाली में रोज परोसा जा रहा है धीमा जहर!

अमृत से जहर तक: पृथ्वी पर का सबसे पवित्र दूध अब पीने लायक भी नहीं रहा, आपकी थाली में रोज परोसा जा रहा है धीमा जहर!
- Friday World Oct 26,2026 
बचपन से हम सुनते आए हैं - दूध मतलब संपूर्ण आहार, दूध मतलब अमृत, दूध मतलब सबकुछ। माँ कहती थी एक गिलास दूध पी लो तो दिन भर की ताकत मिल जाएगी। लेकिन आज उसी दूध की बात करें तो कहना पड़ेगा - भाई, तुम्हें पता भी है इस सफेद तरल में कितना काला सच घुला है?

देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट खुद कह चुकी है कि देश में बिक रहा मिलावटी दूध एक गंभीर राष्ट्रीय मुद्दा है और राज्यों को इस पर तुरंत लगाम लगानी चाहिए। सवाल सिर्फ मिलावट का नहीं, हमारी आने वाली पीढ़ी की जान का है।

मांग 5% बढ़ी, तो ईमानदारी 50% घटी

भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है। साल 2024-25 में हमारा कुल उत्पादन लगभग 24.7 करोड़ टन था, जो दुनिया के कुल दूध का 25% है। इसमें सबसे बड़ा योगदान उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र का है - ये 5 राज्य मिलकर 54% दूध देते हैं।

देश की आबादी के साथ दूध की मांग हर साल 5% बढ़ रही है। दूध से दही, मक्खन, घी, पनीर, मिठाई सब बनता है। बस इसी बढ़ती मांग को कुछ लालची व्यापारियों ने नोट छापने की मशीन बना लिया।

FSSAI की रिपोर्ट ने उड़ाए होश

कुछ समय पहले फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने देश के 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से दूध के सैंपल उठाए। नतीजा डराने वाला था - 70% सैंपल फेल हो गए। उनमें पानी ही नहीं, बल्कि डिटर्जेंट, यूरिया, फेट और कास्टिक सोडा जैसा अखाद्य जहर मिला। 50 सैंपल में तो घटिया स्किम्ड मिल्क पाउडर और ग्लूकोज मिलाकर दूध को गाढ़ा दिखाया गया था।

मुंबई का हाल देखिए। रोज की जरूरत 40 लाख लीटर है। भैंस के 300 तबेलों से सिर्फ 4 लाख लीटर मिलता है। बाकी 36 लाख लीटर सरकारी और प्राइवेट डेयरियों पर निर्भर है। पिछले साल जांच में पता चला कि 30 लाख लीटर पैकेट वाले दूध में से 8 लाख लीटर में मिलावट थी।

तरीका क्या था? नामी डेयरी की आधी या एक लीटर वाली थैली को ऊपर से हल्का फाड़ो, एक तिहाई शुद्ध दूध निकाल लो, उसकी जगह 90% गंदा पानी, 10% दूध और सफेदी के लिए साबुन बनाने वाला कास्टिक सोडा और डिटर्जेंट डाल दो। फिर थैली को फिर से इस तरह पैक कर दो कि ग्राहक को शक भी न हो। कहीं-कहीं तो गटर और नाले का पानी और बिना खुशबू वाला शैम्पू भी मिलाया गया।

सिर्फ मुंबई नहीं, पूरा भारत इसकी चपेट में

यह धंधा सिर्फ मुंबई तक सीमित नहीं। गुजरात, दिल्ली, बुलंदशहर, गाजियाबाद, राजस्थान और उत्तर भारत के ज्यादातर इलाकों में लाखों लीटर सिंथेटिक दूध रोज बेचा जा रहा है। यह हमारी बदनसीबी है कि सबसे ज्यादा मिलावट उसी चीज में हो रही है जो सबसे ज्यादा जरूरी है।

ये माफिया क्या करते हैं? बाजार से खाली दूध की थैलियाँ खरीदते हैं, उन्हें एक कोने से काटकर एक तिहाई असली दूध निकाल लेते हैं और नकली दूध भर देते हैं। कई बार तो एक बार इस्तेमाल हुई थैलियों को धोए बिना ही गंदा दूध भरकर बेच दिया जाता है।

गाय-भैंस पर भी जुल्म, इंसान पर भी

यह काला धंधा जानवरों से शुरू होता है। पुणे के एक पशु कल्याण संगठन ने दो साल तक पूरे देश में स्टडी की। पता चला कि ज्यादा दूध के लिए गाय, भैंस, बकरी को ऑक्सी-टॉक्सिन के इंजेक्शन लगाए जाते हैं। इससे हार्मोन तेजी से एक्टिव होते हैं और थन में जल्दी दूध उतर आता है, लेकिन साथ में खून और हड्डी के तत्व भी दूध में आ जाते हैं।

बछड़े को जबरदस्ती माँ से अलग कर दिया जाता है, दूध न देने वाले जानवरों को लाठी और लोहे की जंजीर से पीटा जाता है और सूख जाने पर सीधे कत्लखाने भेज दिया जाता है।

शरीर पर क्या असर होता है?

कास्टिक सोडा और यूरिया से पेट और आंतों में घाव हो जाते हैं, चमड़ी के रोग, हाथ-पैरों में सूजन, दिल, फेफड़े और आंखों की रोशनी पर असर। सबसे ज्यादा नुकसान बच्चों को होता है। बाल रोग विशेषज्ञ कहते हैं कि केमिकल वाला दूध पीने से बच्चों के आंत, लिवर, किडनी खराब होते हैं, दिमाग का विकास रुक जाता है और कोमल हृदय को गंभीर नुकसान पहुंचता है।

सबसे बड़ी समस्या - असली और नकली दूध में फर्क करना बहुत मुश्किल है। फैट नापने वाला लैक्टोमीटर भी कास्टिक सोडा, यूरिया और डिटर्जेंट वाले सिंथेटिक दूध को नहीं पकड़ पाता। NDRI करनाल के वैज्ञानिकों ने एक विशेष उपकरण बनाने का दावा किया है, लेकिन उसे अभी सरकारी मान्यता और देशव्यापी इस्तेमाल की जरूरत है।

एक तरफ सरकार श्वेत क्रांति से दूध की नदियाँ बहाने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी तरफ कुछ स्वार्थी तत्व सफेद जहर की नदियाँ बहा रहे हैं। सौराष्ट्र में तो हालात ऐसे हैं कि दूध में मिलावट का धंधा शराब के धंधे से भी ज्यादा खतरनाक बन गया है।

सवाल ये है कि क्या हम आज भी उसी भरोसे से एक गिलास दूध अपने बच्चे को पिला सकते हैं?

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World Oct 26,2026 

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October 26, 2026

बगदाद में धमाकों के पीछे इजरायल का साया? चीन से आए कंधे वाले एयर डिफेंस सिस्टम के गोदाम तबाह, क्या ईरान के खिलाफ जंग इराक से शुरू हो गई?

बगदाद में धमाकों के पीछे इजरायल का साया? चीन से आए कंधे वाले एयर डिफेंस सिस्टम के गोदाम तबाह, क्या ईरान के खिलाफ जंग इराक से शुरू हो गई?
-Friday World Oct 26,2026 
बगदाद में धमाकों के पीछे इजरायल का साया? चीन से आए कंधे वाले एयर डिफेंस सिस्टम के गोदाम तबाह, क्या ईरान के खिलाफ जंग इराक से शुरू हो गई?



इराक की राजधानी बगदाद में पिछले हफ्ते हुए रहस्यमयी हवाई हमलों ने पूरे मिडिल ईस्ट में नई टेंशन पैदा कर दी है। इराक सरकार को शक है कि ये हमले उन दो सीक्रेट जगहों पर किए गए, जहां चीन में बने मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम (MANPADS) यानी कंधे पर रखकर चलाए जाने वाले एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम की बड़ी खेप रखी गई थी।

सऊदी अरब के प्रतिष्ठित अखबार अशर्क अल-अवसत की रिपोर्ट के मुताबिक, ये खेप हाल ही में ईरान से इराक लाई गई थी। ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों ने इसे ऐसी जगह छुपाया था, जहाँ तक पहुँचना या उसे डिटेक्ट करना लगभग नामुमकिन माना जा रहा था। सूत्रों ने अखबार को बताया - "जिस सशस्त्र गुट ने एयर डिफेंस सिस्टम रखने के लिए यह जगह चुनी थी, उसे लगा था कि यहां तक पहुंचना बहुत मुश्किल होगा। यह संदिग्ध हमला तब हुआ, जब ये खेपें उन दो जगहों पर पहुंची ही थीं।"

धमाके कैसे हुए?

17 अक्टूबर को बगदाद के ईस्ट कैनाल इलाके में पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (PMF) यानी अल-हशद अल-शाबी के एक बेस में जोरदार धमाका हुआ। PMF ईरान समर्थित शिया मिलिशिया का अम्ब्रेला संगठन है, जो इराकी सरकार की पैरामिलिट्री फोर्स के तौर पर भी काम करता है। पहले PMF ने इसे खराब गोला-बारूद में लगी आग बताया और कहा 5 लोग मामूली घायल हुए हैं, लेकिन एक हफ्ते बाद भी जांच रिपोर्ट नहीं आई।

इराकी खुफिया सूत्रों के मुताबिक, 1 अक्टूबर से ही बगदाद के आसपास मिलिशिया के गोदामों में लगातार धमाके हो रहे हैं, जिनमें सुसाइड ड्रोन और जासूसी ड्रोन रखे थे। ताजा दो हमलों में चीनी सिस्टम वाली बड़ी खेप पूरी तरह तबाह हो गई।

चीनी सिस्टम क्या है और क्यों है खतरनाक?

रिपोर्ट्स के मुताबिक ये सिस्टम चीन के बने QW-12 और FN-16 जैसे हीट-सीकिंग MANPADS हैं, जिनकी रेंज लगभग 4000 मीटर तक है। Ynet की एनालिसिस कहती है कि इजरायल के फाइटर जेट 30,000 फीट ऊपर उड़ते हैं, इसलिए ये सिस्टम उन्हें नहीं गिरा सकते। लेकिन इनका असली खतरा है - अगर कोई इजरायली पायलट इजेक्ट करके इराक में गिरे, तो उसे बचाने आने वाले रेस्क्यू हेलिकॉप्टर और नीचे उड़ने वाले जासूसी ड्रोन को ये आसानी से मार सकते हैं।

रॉयटर्स ने जुलाई में ही रिपोर्ट किया था कि ईरान चीन से बड़ी मात्रा में ऐसे सिस्टम खरीदने की कोशिश कर रहा है।

क्या जंग पहले ही शुरू हो गई?

बगदाद के अधिकारी अब एक खुफिया रिपोर्ट की जांच कर रहे हैं, जिसमें कहा गया है कि ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल की जंग शायद पहले ही शुरू हो चुकी है, लेकिन आधिकारिक ऐलान से पहले यह जंग इराकी धरती पर लड़ी जा रही है। इराक का कहना है कि उसके पास पुख्ता सबूत नहीं है कि हमला किसने किया - फाइटर जेट से या ड्रोन से - लेकिन शक सीधे इजरायल पर है।

इस बीच ईरान समर्थित इस्लामिक रेजिस्टेंस इन इराक ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि 30 सितंबर से 23 अक्टूबर के बीच अमेरिकी फाइटर और निगरानी विमानों ने 171 बार इराकी एयरस्पेस का उल्लंघन किया है।

अमेरिका ने पहले इजरायल को इराक के ऊपर उड़ान की कुछ पाबंदियों में ढील दी थी, इसलिए बगदाद में शक और गहरा गया है। अगर यह साबित हो गया कि चीन के हथियार ईरान के जरिए इराक में लाए गए और इजरायल ने उन्हें उड़ाया, तो यह लड़ाई अब सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहेगी - इराक, सीरिया, लेबनान और यमन तक फैल सकती है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World Oct 26,2026 

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October 26, 2026

तेहरान में मिडिल ईस्ट का नया सिक्योरिटी गेम: ईरान के मोहसिन रजाई के साथ मक्का डिफेंस अलायंस की टेबल पर सऊदी, पाकिस्तान और तुर्की

तेहरान में मिडिल ईस्ट का नया सिक्योरिटी गेम: ईरान के मोहसिन रजाई के साथ मक्का डिफेंस अलायंस की टेबल पर सऊदी, पाकिस्तान और तुर्की
-Friday World Oct 26,2026 
तेहरान आज दुनिया की निगाहों का केंद्र बन गया है। ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी मेजर जनरल मोहसिन रजाई आज राजधानी तेहरान में तीन बड़े इस्लामी देशों - सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के टॉप डिफेंस अधिकारियों के साथ बेहद अहम सुरक्षा वार्ता कर रहे हैं।

यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब पिछले 8 महीनों से अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़ा युद्ध पूरे मिडिल ईस्ट को अस्थिर कर रहा है और होर्मुज स्ट्रेट में तेल सप्लाई को लेकर दुनिया में हड़कंप मचा हुआ है।

कौन-कौन है इस हाई लेवल बैठक में?

ईरानी अधिकारियों के मुताबिक इस चार-पक्षीय बैठक में शामिल हैं:
1. ईरान से - सिक्योरिटी चीफ मेजर जनरल मोहसिन रजाई और उनके डिप्टी अली बागेरी कानी
2. सऊदी अरब से - डिफेंस मिनिस्टर प्रिंस खालिद बिन सलमान
3. पाकिस्तान से -आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और इंटीरियर मिनिस्टर मोहसिन नकवी
4. तुर्की से - इंटेलिजेंस चीफ इब्राहिम कालिन

शुरुआत में इन नेताओं की ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से भी मुलाकात हुई। बताया गया कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी इस बैठक में मौजूद हैं।

मक्का डिफेंस अलायंस क्या है और क्यों है ये बैठक खास?

सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने इसी साल अगस्त 2026 में मक्का में एक ऐतिहासिक समझौते पर दस्तखत किए थे, जिसे मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट या मक्का डिफेंस अलायंस कहा जाता है। इस समझौते का पहला आर्टिकल कहता है - "एक सदस्य पर हमला, सभी सदस्यों पर हमला माना जाएगा" और सभी देश एक-दूसरे की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएंगे।

ये बैठक पहली बार है जब मक्का अलायंस के सभी सदस्य एक साथ ईरान के साथ टेबल पर बैठे हैं, जबकि सऊदी अरब पर ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के मिसाइल और ड्रोन हमले तेज हो गए हैं।

सऊदी डिप्लोमैट ने क्या कहा?

सऊदी अरबके पब्लिक डिप्लोमेसी के डिप्टी मिनिस्टर रायेद करीमली ने X पर इस दौरे की पुष्टि करते हुए लिखा:

"ये दौरा मक्का मुश्तरका डिफाई मुआहिदे के ममालिक की जानिब से जारी बोहरान में शामिल फरीकैन के दरमियान कशीदगी को कम करने और रियासत क़तर और इस्लामी जम्हूरिया पाकिस्तान की तरफ़ से सुलह की कोशिशों की हिमायत में मुज़ाकरात और सफ़ारती हल को फ़रोग़ देने के लिए जारी कोशिशों के एक हिस्से के तौर पर किया गया है। ये दौरा इलाकाई सलामती और इस्तिहकाम को तक़वियत देने और इस मक़सद के हुसूल के लिए ख़ित्ते के तमाम ममालिक के साथ मिलकर काम करने में मक्का मुश्तरका डिफाई मुआहिदे के ममालिक के अहम किरदार की निशानदेही करता है।"

सीधे शब्दों में कहें तो सऊदी अरब का कहना है कि यह दौरा तनाव कम करने, बातचीत को बढ़ावा देने और कतर व पाकिस्तान की मध्यस्थता कोशिशों को समर्थन देने के लिए है।

इस बैठक के पीछे पाकिस्तान का हाथ?

ईरान के डिप्टी सिक्योरिटी चीफ अली बागेरी कानी ने बताया कि इस बैठक का आइडिया पिछले हफ्ते पाकिस्तानी आर्मी चीफ जनरल मुनीर के तेहरान दौरे के दौरान आया था। मुनीर ने ही प्रस्ताव रखा था कि सऊदी, तुर्की और पाकिस्तान के सीनियर अधिकारी तेहरान में मिलकर क्षेत्रीय सुरक्षा पर बात करें।

ईरान इसे "एंडोजेनस सिक्योरिटी" यानी बाहरी ताकतों - अमेरिका और इजरायल - के बिना, क्षेत्र के देशों द्वारा खुद अपनी सुरक्षा का ढांचा बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मान रहा है।

अब आगे क्या?

ईरान का कहना है कि इस बैठक में "ज़ायोनिस्ट विस्तारवाद, फिलिस्तीन, लेबनान और अमेरिका-इजरायल के हमलों के परिणामों" पर चर्चा होगी। सऊदी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि लक्ष्य बातचीत के चैनल खोलना और इलाके में दोबारा सैन्य टकराव को रोकना है।

होर्मुज स्ट्रेट के जरिए दुनिया का 20% तेल जाता है, और वहीं तनाव चरम पर है। ऐसे में तेहरान की यह चार-पक्षीय बैठक सिर्फ एक मुलाकात नहीं, बल्कि एक नए रीजनल सिक्योरिटी ऑर्डर की शुरुआत हो सकती है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World Oct 26,2026 

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October 26, 2026

वालिया से आदिकवि तक: वाल्मीकि जयंती पर सियासत के दो रंग, गुजरात में भाजपा का महोत्सव और कांग्रेस की मौन श्रद्धांजलि

वालिया से आदिकवि तक: वाल्मीकि जयंती पर सियासत के दो रंग, गुजरात में भाजपा का महोत्सव और कांग्रेस की मौन श्रद्धांजलि
- Friday World Oct 26,2026 
आज 26 अक्टूबर 2026 को पूरे भारत में महर्षि वाल्मीकि जयंती बड़े श्रद्धा भाव से मनाई जा रही है। हर साल आश्विन मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पर्व केवल एक जयंती नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण का प्रतीक है। महर्षि वाल्मीकि को संस्कृत साहित्य का पहला कवि यानी आदिकवि कहा जाता है। कहा जाता है कि एक क्रौंच पक्षी के वध को देखकर उनके मुख से करुणा में पहला श्लोक निकला था, और उसी श्लोक से रामायण जैसे महाकाव्य की रचना हुई। 24,000 श्लोकों वाली रामायण आज भी हमें सत्य, त्याग, कर्तव्य और मर्यादा का पाठ पढ़ाती है।

भाजपा ने कैसे याद किया - कर्म से सम्मान तक

भारतीय जनता पार्टी ने इस दिन को सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक समरसता के रूप में मनाया।

दिल्ली से लेकर जिला स्तर तक भाजपा के SC मोर्चा ने कार्यक्रम आयोजित किए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि वाल्मीकि जी तप, ज्ञान और करुणा के प्रतीक हैं, मानवता रामायण के लिए उनकी सदा ऋणी रहेगी। नितिन गडकरी सहित कई बड़े नेताओं ने आदिकवि को नमन किया।

झारखंड के रांची स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में कार्यकर्ताओं ने वाल्मीकि जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। मैसूर में भाजपा ने वाल्मीकि प्रतिमा पर माल्यार्पण कर शोभायात्रा निकाली। भाजपा का संदेश स्पष्ट था - वाल्मीकि जी का जीवन परिवर्तन का सबसे बड़ा उदाहरण है, जो बताता है कि मनुष्य का मूल्य जन्म से नहीं कर्म से तय होता है।

कांग्रेस ने कैसे याद किया - न्याय और समानता की बात

कांग्रेस ने इस अवसर को सामाजिक न्याय के नजरिए से याद किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दी।

खड़गे ने अपने संदेश में कहा कि महर्षि वाल्मीकि की अमर रचना रामायण ने मानवता को सत्य, प्रेम और कर्तव्य का मार्ग दिखाया। उनका जीवन हमें सिखाता है कि हमें हर पीड़ित के साथ खड़ा होना चाहिए और अन्याय के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। कांग्रेस ने वाल्मीकि जी को वंचित समाज की आवाज और समानता के प्रतीक के रूप में याद किया।

गुजरात में कांग्रेस का भव्य आयोजन - भाजपा रही 

गुजरात में इस जयंती का मुख्य केंद्र अहमदाबाद रहा। कांकरिया ट्रांसस्टेडिया में गुजरात सरकार द्वारा महर्षि वाल्मीकि जयंती महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया।

इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और राज्य मंत्री दर्शना बेन वाघेला ने विशेष रूप से भाग लिया। कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि यहाँ केवल पूजा-पाठ नहीं हुआ, बल्कि वाल्मीकि समाज के तेजस्वी विद्यार्थियों और उच्च डिग्री हासिल करने वाले युवाओं का सार्वजनिक सम्मान किया गया।

अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने समाज को तीन मंत्र दिए - परिवार में संस्कार, बच्चों को शिक्षा और जीवन को व्यसन मुक्त बनाना। उन्होंने कहा कि मनुष्य का मूल्य उसके जन्म से नहीं, उसके कर्मों से तय होता है। संतों के जीवन से हमें परिवर्तन की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा समानता का भाव रखा है, पिछले दस वर्षों में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं, और वाल्मीकि समाज को भी सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर आगे आना चाहिए।

इसके विपरीत गुजरात में कांग्रेस की ओर से आज कोई बड़ा सार्वजनिक कार्यक्रम, शोभायात्रा या महोत्सव की खबर सामने नहीं आई। गुजरात प्रदेश कांग्रेस का कार्यक्रम श्रद्धांजलि तक ही सीमित रहा। इस तरह गुजरात में जयंती का मंच पूरी तरह से भाजपा के नाम रहा।

निष्कर्ष यही है कि वाल्मीकि जयंती अब केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि राजनीतिक चेतना का भी पर्व बन गई है। एक तरफ भाजपा इसे सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और कर्म से सम्मान जोड़कर मना रही है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस इसे सामाजिक न्याय और समानता के प्रतीक के रूप में देख रही है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World Oct 26,2026 

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October 26, 2026

चुनाव से 72 घंटे पहले नेतन्याहू के खिलाफ तेल अवीव में जन-सैलाब! एक लाख लोग बोले - 7 अक्टूबर की नाकामी की जांच कराओ

चुनाव से 72 घंटे पहले नेतन्याहू के खिलाफ तेल अवीव में जन-सैलाब! एक लाख लोग बोले - 7 अक्टूबर की नाकामी की जांच कराओ
-Friday World Oct 26,2026 
तेल अवीव: इजरायल में आम चुनाव की घड़ी जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, सियासी पारा आसमान पर पहुंच गया है। इतिहास के सबसे अहम और कड़े मुकाबले वाले चुनाव से ठीक 72 घंटे पहले, तेल अवीव की सड़कों पर जनाक्रोश का ऐसा सैलाब उमड़ा जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया।

शनिवार की रात प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ एक लाख से ज्यादा लोग सड़कों पर उतर आए। तेल अवीव का मशहूर 'होस्टेजेस स्क्वायर' लोगों से खचाखच भर गया और कई किलोमीटर तक ट्रैफिक जाम हो गया।

एक ही नारा - जांच आयोग बनाओ!

प्रदर्शनकारियों के हाथों में इजरायली झंडे और सरकार विरोधी बैनर थे। उनका सिर्फ एक ही नारा था - "तीन दिन बाद वोट दो और 7 अक्टूबर के सुरक्षा फेलियर की सरकारी जांच बैठाओ!"

लोगों का सीधा आरोप है कि नेतन्याहू सरकार 7 अक्टूबर 2023 को हमास के उस खूनी हमले की सबसे बड़ी सुरक्षा चूक को छिपाने की कोशिश कर रही है। प्रदर्शनकारी लगातार मांग कर रहे हैं कि इस मामले में एक आधिकारिक 'स्टेट कमीशन ऑफ इंक्वायरी' बनाया जाए, ताकि पता चल सके कि आखिर इतनी बड़ी इंटेलिजेंस और मिलिट्री नाकामी कैसे हुई।

सरकार पर आरोप है कि वो पिछले दो साल से इस जांच आयोग को बनाने से बच रही है, क्योंकि इसकी रिपोर्ट में खुद प्रधानमंत्री और बड़े नेताओं की जिम्मेदारी तय हो सकती है।

चुनाव पर क्या असर पड़ेगा?

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले हुआ ये विशाल प्रदर्शन नेतन्याहू के लिए बड़ा झटका है। तेल अवीव को हमेशा से इजरायल की लिबरल और सरकार-विरोधी आवाजों का केंद्र माना जाता है, और यहाँ से उठा ये जन-सैलाब पूरे चुनाव का रुख बदल सकता है। अब सवाल ये है कि क्या ये गुस्सा वोट में बदलेगा? क्या इजरायली जनता इस बार 7 अक्टूबर की नाकामी का हिसाब मांगेगी?

72 घंटे बाद होने वाला मतदान न सिर्फ इजरायल का भविष्य तय करेगा, बल्कि ये भी तय करेगा कि क्या 7 अक्टूबर की सच्चाई कभी सामने आ पाएगी।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World Oct 26,2026 

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Sunday, 25 October 2026

October 25, 2026

तुर्किये का सऊदी को झटका - अंसारुल्लाह के खिलाफ जंग में नहीं देंगे साथ, मक्का रक्षा समझौते पर भी सवाल!

तुर्किये का सऊदी को झटका - अंसारुल्लाह के खिलाफ जंग में नहीं देंगे साथ, मक्का रक्षा समझौते पर भी सवाल!
-Friday World Oct 26,2026 
मध्य पूर्व की सियासत में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। तुर्किये ने साफ कर दिया है कि वह यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन के खिलाफ सऊदी अरब की कोई सैन्य मदद नहीं करेगा।

#तुर्किये का कहना है कि ये युद्ध अंसारुल्लाह ने नहीं, बल्कि सऊदी अरब ने 2015 में यमन पर शुरू किया था। यमन पर 9 साल से बमबारी और नाकेबंदी सऊदी गठबंधन ने की है, इसलिए अब उसे अंसारुल्लाह को जिम्मेदार ठहराना गलत है।

#अगस्त में हुआ था मक्का रक्षा समझौता

आपको याद होगा, इसी साल अगस्त में सऊदी अरब ने तुर्किये, पाकिस्तान समेत कई देशों के साथ "मक्का संरक्षण समझौते" पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते का मकसद था कि अगर मक्का-मदीना को कोई खतरा हो तो सभी देश मिलकर उसकी रक्षा करेंगे।

लेकिन अब जब सऊदी इस समझौते की आड़ में अंसारुल्लाह के खिलाफ समर्थन मांग रहा है, तो तुर्किये ने इससे दूरी बना ली है। अंकारा का स्टैंड है कि मक्का-मदीना पूरी तरह सुरक्षित हैं और अंसारुल्लाह ने कभी भी हरमैन शरीफैन को निशाना नहीं बनाया। इसलिए इस समझौते को यमन युद्ध के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

#पाकिस्तान और अमेरिका ने भी बनाई दूरी

सिर्फ तुर्किये ही नहीं, पाकिस्तान और अमेरिका ने भी इस मामले में सऊदी से दूरी बना ली है। पाकिस्तान की संसद पहले ही 2015 में यमन युद्ध में शामिल होने से इनकार कर चुकी है। पाकिस्तान का कहना है कि वह मध्यस्थता कर सकता है, लेकिन किसी मुस्लिम देश के खिलाफ जंग में हिस्सा नहीं लेगा।

वहीं #अमेरिका भी अब सीधे तौर पर इस युद्ध से खुद को अलग रखना चाहता है, क्योंकि उसे पता है कि यमन में सऊदी गठबंधन को कोई बड़ी जीत नहीं मिली है और अंसारुल्लाह आज पहले से ज्यादा मजबूत होकर उभरा है।

असली सवाल क्या है?

#असली सवाल ये है कि जब सऊदी अरब खुद यमन पर हजारों हवाई हमले कर चुका है, तो क्या उसे दूसरों से मदद मांगने का हक है? तुर्किये के इस फैसले ने यह साफ कर दिया है कि मुस्लिम दुनिया अब आंख बंद करके किसी एक देश की जंग में शामिल नहीं होगी। मक्का की सुरक्षा के नाम पर यमन पर युद्ध को जायज ठहराना अब मुश्किल होता जा रहा है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World Oct 26,2026 

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