September 29, 2026
यूएन महासभा में नेतन्याहू के ‘कायर’ बयान पर आइसलैंड की विदेश मंत्री का करारा जवाब
यूएन महासभा में नेतन्याहू के ‘कायर’ बयान पर आइसलैंड की विदेश मंत्री का करारा जवाब
-Friday World September 29,2026
संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच पर एक बार फिर तीखी नोक-झोंक देखने को मिली। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के भाषण के दौरान कई देशों के प्रतिनिधियों के हॉल छोड़कर बाहर चले जाने पर उन्होंने उन्हें “नैतिक कायर” करार दिया। इसके जवाब में आइसलैंड की विदेश मंत्री थोर्गेर्दुर कैट्रीन गुन्नार्सदोत्तिर ने उसी मंच से नेतन्याहू के शब्दों को पलटकर वापस कर दिया।
सितंबर 2026 में यूएन महासभा के सत्र में जब नेतन्याहू भाषण देने पहुंचे तो कई राजनयिकों ने विरोध जताते हुए हॉल छोड़ दिया। इनमें आइसलैंड समेत कई देश शामिल थे। इस पर नेतन्याहू ने कहा कि अगर कोई कायर अभी भी बैठा है तो वह उठकर जा सकता है। उन्होंने वॉकआउट करने वालों को “मॉरल कावर्ड्स” यानी नैतिक कायर कहा।
कुछ समय बाद जब आइसलैंड की विदेश मंत्री थोर्गेर्दुर कैट्रीन गुन्नार्सदोत्तिर ने महासभा को संबोधित किया तो उन्होंने नेतन्याहू के इसी वाक्य को केंद्र में रखकर अपना रुख साफ किया। उन्होंने कहा, “हमने इस मंच से ‘नैतिक कायर’ शब्द सुने हैं। मेरे लिए नैतिक कायर वे लोग हैं जो न्यायपूर्ण और स्थायी शांति के लिए बातचीत करने से इनकार करते हैं। नैतिक कायर वे हैं जो ग़ज़ा में बेहद जरूरतमंद लोगों तक मानवीय सहायता पहुंचने से रोकते हैं। और नैतिक कायर वे विश्व नेता हैं जो बार-बार अंतरराष्ट्रीय कानून की अवहेलना और अनादर करते हैं।”
उन्होंने ग़ज़ा की स्थिति पर भी जोर देते हुए कहा कि फिलिस्तीनी नागरिकों की पीड़ा को पृष्ठभूमि में चलने वाली आवाज नहीं बनने दिया जा सकता। बच्चे अभी भी मारे जा रहे हैं, परिवार अपने घर खो रहे हैं और माता-पिता बार-बार अपने बच्चों को जिंदा रखने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने साफ कहा, “हमें यह मंजूर नहीं कि ग़ज़ा को बार-बार तबाह किया जाए और फिर दोबारा बनाया जाए, जबकि मूल वजह का समाधान अब भी नहीं हुआ है।”
आइसलैंड जैसी छोटी लेकिन मजबूत लोकतांत्रिक परंपरा वाली देश की विदेश मंत्री का यह बयान अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया। कई पर्यवेक्षकों ने इसे छोटे देशों की उस आवाज के रूप में देखा जो अंतरराष्ट्रीय कानून, मानवीय सहायता और शांति वार्ता की जरूरत पर जोर देती है। मंत्री ने अपने भाषण में केवल ग़ज़ा ही नहीं बल्कि अन्य संघर्षों में भी बातचीत से भागने वाले नेताओं की आलोचना की।
यह घटना यूएन महासभा में नेतन्याहू के भाषण के दौरान हुए वॉकआउट और उसके बाद की प्रतिक्रियाओं का हिस्सा है। कई देशों ने भाषण के दौरान विरोध जताया था, जबकि कुछ ने अपनी सीट पर बैठे रहकर भी अपना मत अलग तरीके से व्यक्त किया। आइसलैंड की प्रतिनिधि ने बैठे रहने के बावजूद बाद में स्पष्ट और तीखा रुख अपनाया।
यह पूरा प्रकरण याद दिलाता है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शब्द कितने शक्तिशाली हो सकते हैं। एक तरफ नेतन्याहू ने विरोध करने वालों को कायर बताया, तो दूसरी तरफ आइसलैंड की मंत्री ने उसी भाषा में जवाब देते हुए स्थायी शांति, मानवीय सहायता और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान की वकालत की। ग़ज़ा में जारी संकट और मानवीय स्थिति पर ध्यान केंद्रित करते हुए उन्होंने कहा कि मूल समस्याओं का समाधान किए बिना केवल पुनर्निर्माण का चक्र जारी रखना स्वीकार्य नहीं है।
छोटे देशों की आवाज अक्सर बड़े शक्तिशाली देशों की छाया में दब जाती है, लेकिन यूएन जैसे मंच पर कभी-कभी ये आवाजें स्पष्ट और प्रभावशाली साबित होती हैं। आइसलैंड की विदेश मंत्री का यह जवाब न केवल नेतन्याहू के बयान का प्रत्युत्तर था, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को याद दिलाने वाला भी था कि शांति, न्याय और मानवीय मूल्यों की रक्षा हर देश की जिम्मेदारी है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World September 29,2026
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