April 23, 2026
ट्रंप प्रशासन में अमेरिकी सेना के नेतृत्व में बड़े बदलाव: रक्षा सचिव पीट हेगसेथ एक साल से पेंटागन को नया रूप दे रहे हैं
ट्रंप प्रशासन में अमेरिकी सेना के नेतृत्व में बड़े बदलाव: रक्षा सचिव पीट हेगसेथ एक साल से पेंटागन को नया रूप दे रहे हैं-Friday World-April 23,2026
वाशिंगटन — राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के शुरू होते ही अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) में नेतृत्व स्तर पर अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिल रहे हैं। रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने जनवरी 2025 में पद संभालते ही सैन्य पदानुक्रम को पूरी तरह बदलने की मुहिम छेड़ दी है। पिछले एक साल में उन्होंने दर्जनों उच्च पदस्थ अधिकारियों को हटाया, जबरन रिटायरमेंट पर भेजा, प्रमोशन्स रोके और कमांड स्ट्रक्चर में बड़े सुधार किए। इसका मकसद है — “कम जनरल, ज्यादा जवान” (Less Generals, More G.I.s) की नीति के तहत सेना को अधिक घातक, कुशल और युद्ध-केंद्रित बनाना।
हेगसेथ ने स्पष्ट कहा है कि “अमेरिकी सेना अब ‘वेक’ संस्कृति, राजनीतिक सही होने की मजबूरी और अनावश्यक प्रशासनिक बोझ से मुक्त होगी।” उन्होंने डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस को अनौपचारिक रूप से “डिपार्टमेंट ऑफ वॉर” कहकर युद्ध-लड़ने की क्षमता को प्राथमिकता दी है।
बड़े पैमाने पर फायरिंग और नेतृत्व परिवर्तन
हेगसेथ के कार्यकाल में 20 से अधिक उच्च पदस्थ जनरल और एडमिरल्स को हटाया या साइडलाइन किया गया है। प्रमुख उदाहरण:
- जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल चार्ल्स “सीक्यू” ब्राउन को हटाया गया।
- नेवी के टॉप एडमिरल लिसा फ्रांचेटी को पद से हटाया गया।
- आर्मी चीफ ऑफ स्टाफ जनरल रैंडी जॉर्ज को अप्रैल 2026 में जबरन रिटायरमेंट पर भेजा गया — यह ईरान संघर्ष के दौरान हुआ, जिससे कमांड स्थिरता पर सवाल उठे।
- साइबर कमांडर, डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी डायरेक्टर और कई कॉम्बेटेंट कमांडर्स सहित दर्जनों अन्य अधिकारियों को प्रभावित किया गया।
हेगसेथ ने क्वांटिको में सीनियर लीडर्स को संबोधित करते हुए कहा, “मैंने कई सीनियर अधिकारियों को निकाला है — पिछले चेयरमैन, जॉइंट चीफ्स के सदस्य, कॉम्बेटेंट कमांडर्स। और आगे भी बदलाव होंगे, क्योंकि हमें जरूरत है।” उन्होंने “फैट जनरल्स और एडमिरल्स” की आलोचना की और युद्ध-योद्धा मानसिकता (warrior ethos) पर जोर दिया।
प्रमोशन्स में हस्तक्षेप और DEI का अंत
हेगसेथ ने प्रमोशन लिस्ट में भी सीधा हस्तक्षेप किया। मार्च 2026 में उन्होंने चार आर्मी अधिकारियों (दो ब्लैक पुरुष और दो महिला) को ब्रिगेडियर जनरल बनने से रोका। कुछ रिपोर्ट्स में आरोप लगे कि यह DEI (Diversity, Equity, Inclusion) नीतियों के खिलाफ है, हालांकि हेगसेथ ने इसे मेरिट-आधारित फैसला बताया। उन्होंने दावा किया कि पिछली सरकार में रंग, लिंग या राजनीतिक जुड़ाव के आधार पर प्रमोशन्स दिए गए थे।
उन्होंने 20% चार-स्टार जनरल/एडमिरल पदों में कटौती का आदेश दिया और कुल जनरल/फ्लैग ऑफिसरों में 10% की कमी का लक्ष्य रखा। मेमो में लिखा — “अधिक जनरल ज्यादा सफलता नहीं देते। द्वितीय विश्व युद्ध में 17 चार और पांच-स्टार जनरलों ने 1.2 करोड़ सैनिकों का नेतृत्व किया, जबकि आज 44 चार-स्टार अधिकारी मात्र 21 लाख सैनिकों पर हैं।”
कमांड स्ट्रक्चर और यूनिफाइड कमांड प्लान में बड़े सुधार
दिसंबर 2025 में पेंटागन ने यूनिफाइड कमांड प्लान (Unified Command Plan) में बदलाव का प्रस्ताव तैयार किया। इसमें:
- यूरोप, अफ्रीका और मिडिल ईस्ट के कुछ रीजनल हेडक्वार्टर को डाउनग्रेड या मर्ज करने का प्लान।
- कॉम्बेटेंट कमांड्स की संख्या 11 से घटाकर 8 करने का सुझाव।
- नया “अमेरिकास कमांड” बनाने का विचार, जिसमें साउथर्न और नॉर्दर्न कमांड को शामिल किया जाए।
- संसाधनों को मिडिल ईस्ट और यूरोप से हटाकर इंडो-पैसिफिक (चीन को रोकने) और होमलैंड डिफेंस पर फोकस।
ये बदलाव हेगसेथ के वादे को पूरा करते हैं — स्टेटस को चुनौती देना और टॉप लीडरशिप को कम करना।
अन्य सुधार: एक्विजिशन, फिटनेस और कल्चर
हेगसेथ ने एक्विजिशन सिस्टम को भी बदला। प्रोग्राम एक्जीक्यूटिव ऑफिसेस की जगह “पोर्टफोलियो एक्विजिशन एक्जीक्यूटिव्स” (PAEs) लाए, जो सीधे आर्मी सेक्रेटरी और चीफ ऑफ स्टाफ को रिपोर्ट करेंगे। लक्ष्य — हथियारों की खरीद तेज करना, वाणिज्यिक तकनीक को प्राथमिकता देना और ठेकेदारों पर दबाव बनाना।
उन्होंने फिजिकल फिटनेस स्टैंडर्ड्स में बदलाव किया — कॉम्बैट भूमिकाओं में “हाईएस्ट मेल स्टैंडर्ड” लागू किया और “जेंडर न्यूट्रल” मानकों को समाप्त किया। DEI प्रोग्राम्स को खत्म कर “वार फाइटिंग” को एकमात्र मिशन बताया।
सिविलियन कर्मचारियों में भी बड़े बदलाव हुए — 60,000 से ज्यादा ने वॉलंटरी रिटायरमेंट या रिजिग्नेशन प्रोग्राम के तहत विभाग छोड़ा।
विवाद और आलोचना
ये बदलाव विवादास्पद रहे हैं। डेमोक्रेटिक लीडर्स और कुछ पूर्व सैन्य अधिकारियों (जैसे जिम मैटिस) ने चिंता जताई कि युद्ध के दौरान (ईरान संघर्ष के बीच) इतने बड़े बदलाव कमांड स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं। कुछ ने इसे “यस मेन” नियुक्त करने की कोशिश बताया। प्रमोशन्स रोकने पर रेस और जेंडर बायस के आरोप लगे, जिन्हें हेगसेथ ने खारिज किया।
ट्रंप समर्थक इसे “लंबे समय से जरूरी सुधार” मानते हैं, जो सेना को फिर से मजबूत और मेरिट-आधारित बनाएगा।
भारत और वैश्विक प्रभाव
भारत की दृष्टि से ये बदलाव महत्वपूर्ण हैं। अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता में इंडो-पैसिफिक पर फोकस बढ़ने से क्वाड और अन्य साझेदारियों को बल मिल सकता है। लेकिन मिडिल ईस्ट में अनिश्चितता (हॉर्मुज, ईरान) से ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। भारत को अपनी रक्षा नीति में इन बदलावों को ध्यान में रखते हुए संतुलित रणनीति अपनानी होगी।
आगे क्या?
हेगसेथ अभी भी और बदलावों की तैयारी में हैं। उनका कहना है कि ये कदम “अनावश्यक नहीं, बल्कि जरूरी” हैं ताकि अमेरिकी सेना दुश्मनों (खासकर चीन) को रोक सके। ट्रंप प्रशासन “पीस थ्रू स्ट्रेंथ” की नीति पर अडिग है।
पेंटागन में यह “शेकअप” अमेरिकी सैन्य इतिहास में याद रखा जाएगा। सफलता तब मानी जाएगी जब ये बदलाव सेना की लड़ाकू क्षमता बढ़ाएं, न कि आंतरिक अस्थिरता पैदा करें। फिलहाल, पूरी दुनिया इन बदलावों पर नजर रखे हुए है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 23,2026