May 31, 2026
उत्तर प्रदेश की बिगड़ती नौकरी व्यवस्था: प्रयागराज में छात्रों का आक्रोश फूट पड़ा, कैंडल मार्च ने उठाई पारदर्शिता की मांग
उत्तर प्रदेश की बिगड़ती नौकरी व्यवस्था: प्रयागराज में छात्रों का आक्रोश फूट पड़ा, कैंडल मार्च ने उठाई पारदर्शिता की मांग - Friday World 31 May2026
प्रयागराज, जो कभी ज्ञान और आस्था का प्रतीक रहा, आज युवाओं के आक्रोश का केंद्र बन गया है। गुरुवार को सैकड़ों प्रतियोगी छात्रों ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और बढ़ती बेरोजगारी के खिलाफ सड़कों पर उतरकर अपना गुस्सा जताया। “प्रतियोगी छात्र संघर्ष मंच” के बैनर तले निकाला गया कैंडल मार्च न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में युवा वर्ग की पीड़ा को प्रतिबिंबित करता है। लाखों युवाओं का भविष्य दांव पर लगे होने के बावजूद परीक्षा प्रक्रिया में बार-बार उभरती गड़बड़ियां उनके विश्वास को हिला रही हैं।
घटना का विस्तृत वर्णन
कटरा स्थित मनमोहन पार्क से कैंडल मार्च की शुरुआत होने वाली थी। छात्रों की योजना सुभाष चौराहा होते हुए आजाद पार्क तक मार्च निकालने की थी। हाथों में मोमबत्तियां, प्लेकार्ड और नारे लगाते हुए युवा सड़क पर उतरे। प्लेकार्ड पर लिखा था- “न्याय दो, परीक्षा दोहराओ”, “लेखपाल भर्ती में गड़बड़ी स्वीकारो”, “युवाओं का भविष्य बर्बाद मत करो”।
पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। भारी बल की तैनाती के बावजूद छात्र शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ रहे थे। लेकिन हिंदू छात्रावास के पास पहुंचते ही पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद छात्रों ने आजाद पार्क पहुंचकर सभा का आयोजन किया। वहां उन्होंने अपनी मांगों को जोरदार तरीके से रखा।
छात्र नेता आशुतोष पांडेय ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, “लेखपाल भर्ती, यूपी सब इंस्पेक्टर भर्ती और एसएससी कांस्टेबल जीडी भर्ती जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियां सामने आई हैं। इससे लाखों अभ्यर्थियों का विश्वास टूट गया है। हम सरकार से मांग करते हैं कि इन परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जरूरत पड़ने पर इन्हें दोबारा आयोजित किया जाए। यूपीएसआई भर्ती का स्कोर कार्ड भी तुरंत जारी किया जाए।”
समस्या की गहराई: बेरोजगारी और भर्ती घोटाले
उत्तर प्रदेश में युवा बेरोजगारी एक पुरानी समस्या है, लेकिन हाल के वर्षों में भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं ने इसे और विकराल बना दिया है। आंकड़ों के अनुसार, राज्य में करोड़ों युवा सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन सीमित पदों और पारदर्शिता की कमी के कारण निराशा बढ़ रही है।
लेखपाल भर्ती को लेकर पहले भी विवाद हुआ है। पेपर लीक, अनुचित साधनों से सफलता पाने वाले अभ्यर्थियों और प्रश्नों की त्रुटियों की शिकायतें लगातार आ रही हैं। यूपीएसआई और एसएससी जीडी जैसी परीक्षाएं लाखों युवाओं के सपनों का आधार होती हैं। इनमें एक भी गड़बड़ी पूरे बैच के भविष्य को प्रभावित कर देती है। छात्रों का कहना है कि वर्षों की मेहनत, रात-रात भर की पढ़ाई, कोचिंग संस्थानों पर खर्च किए गए लाखों रुपये सब बर्बाद हो जाते हैं जब परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं।
यह सिर्फ प्रयागराज की समस्या नहीं है। पूरे उत्तर प्रदेश में रोहतास, प्रयागराज, लखनऊ समेत कई जगहों पर ऐसे प्रदर्शन हो चुके हैं। इससे पहले भी पेपर लीक के मामलों में छात्र सड़कों पर उतरे थे। विशेषज्ञों का मानना है कि भर्ती एजेंसियों में सुधार, डिजिटल निगरानी बढ़ाने और तीसरे पक्ष की निगरानी की जरूरत है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न दोहराई जाएं।
छात्रों की प्रमुख मांगें
1. **लेखपाल और यूपीएसआई भर्ती की दोबारा परीक्षा** - जहां गड़बड़ी साबित हो।
2. **पारदर्शी जांच प्रक्रिया** - स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच।
3. **स्कोर कार्ड का तुरंत जारी होना** - ताकि अभ्यर्थी अपनी स्थिति जान सकें।
4. **अन्य भर्तियों में सख्ती** - एसएससी जीडी सहित सभी आगामी परीक्षाओं में सख्त सुरक्षा।
5. **बेरोजगारी कम करने के ठोस कदम** - सिर्फ वादे नहीं, रोजगार के नए अवसर।
छात्रों ने यह भी कहा कि परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियां अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा रही हैं। एक छोटी सी लापरवाही हजारों युवाओं के सपनों को चूर-चूर कर देती है।
सामाजिक और आर्थिक प्रभाव
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में युवा आबादी सबसे अधिक है। यदि इन युवाओं को सही अवसर नहीं मिले तो न केवल व्यक्तिगत स्तर पर हताशा बढ़ेगी, बल्कि सामाजिक अस्थिरता भी पैदा हो सकती है। बेरोजगार युवा अक्सर गलत राह पर चले जाते हैं या मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं का शिकार होते हैं।
सरकार के लिए यह चुनौती है। एक ओर विकास के दावे किए जा रहे हैं, दूसरी ओर युवा सड़कों पर हैं। पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया न केवल छात्रों का विश्वास बहाल करेगी बल्कि प्रशासनिक दक्षता भी बढ़ाएगी। डिजिटल भारत के युग में बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, सीसीटीवी निगरानी, एआई आधारित प्रश्न पत्र निर्माण और रैंडमाइज्ड परीक्षा केंद्र जैसी तकनीकों को अपनाने की जरूरत है।
ऐतिहासिक संदर्भ और समाधान
भारत में पेपर लीक की समस्या नई नहीं है। बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में बड़े पैमाने पर घोटाले सामने आ चुके हैं। प्रयागराज का यह प्रदर्शन उसी श्रृंखला की कड़ी है। समाधान के रूप में विशेषज्ञ सुझाव देते हैं:
- भर्ती आयोगों को स्वायत्त और जवाबदेह बनाना।
- पेपर सेटिंग और मुद्रण में बहु-स्तरीय सुरक्षा।
- अभ्यर्थियों के लिए शिकायत निवारण तंत्र का मजबूत होना।
- कोचिंग संस्थानों पर भी नियंत्रण ताकि अनुचित साधन न अपनाए जाएं।
छात्र संघर्ष मंच के कार्यकर्ता भविष्य में बड़े आंदोलन की चेतावनी भी दे रहे हैं यदि मांगें नहीं मानी गईं।
: युवाओं का भरोसा बहाल करना जरूरी
प्रयागराज का यह कैंडल मार्च अंधेरे में जलती उम्मीद की किरण भी है। युवा चुपचाप सहने को तैयार नहीं हैं। वे न्याय चाहते हैं, पारदर्शिता चाहते हैं और अपना हक चाहते हैं।
सरकार को इस आक्रोश को गंभीरता से लेना चाहिए। त्वरित जांच, दोषियों पर कार्रवाई और परीक्षाओं में सुधार युवाओं को राहत देगा। अन्यथा बेरोजगारी और गड़बड़ियों का यह सिलसिला न केवल युवा ऊर्जा को बर्बाद करेगा बल्कि राज्य के विकास को भी पीछे धकेल देगा।
प्रयागराज के इन छात्रों का संदेश साफ है- **“सपनों पर आघात बर्दाश्त नहीं होगा।”** अब देखना यह है कि सत्ता इस आवाज को कितनी गंभीरता से सुनती है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 31 May2026