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यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Wednesday, 16 September 2026

September 16, 2026

रियाज़ में काबा की तस्वीर पर डांस पर खामोशी, ताइफ एयरबेस पर हमले को काबा पर हमला बताकर फितना क्यों?

रियाज़ में काबा की तस्वीर पर डांस पर खामोशी, ताइफ एयरबेस पर हमले को काबा पर हमला बताकर फितना क्यों?
-Friday World September 17, 2026
सऊदी अरब और यमन के बीच जारी जंग में अंसारुल्लाह ने जब ताइफ में मौजूद किंग फहद एयरबेस को निशाना बनाया है, तो आले सऊद के समर्थकों द्वारा इसे "मक्का और काबा पर हमला" बताकर मुसलमानों में फितना फैलाने की कोशिश तेज हो गई है। सवाल यह है कि जब निशाना एक सैन्य एयरबेस है जहाँ से यमन पर बमबारी होती है और जहाँ अमरीकी और सऊदी लड़ाकू विमान तैनात हैं, तो उसे बैतुल्लाह पर हमला कैसे कहा जा सकता है?

साल 2023 का वो प्रोग्राम याद है?

आज जिन लोगों की गैरत काबा के नाम पर जाग रही है, उनसे एक सीधा सवाल है। साल 2023 में जब रियाज़ में एंटरटेनमेंट के नाम पर शकीरा समेत कई गायकों के नाच-गाने का इंतजाम आले सऊद ने किया था, तब स्टेज पर बैतुल्लाह शरीफ की शबीह बनाई गई थी और उसी पर चढ़कर डांस किया गया था। वीडियो और तस्वीरें पूरी दुनिया ने देखीं।

उस वक्त कितने रियाली भक्तों ने इसके खिलाफ आवाज उठाई थी? कितनों ने कहा था कि यह मुकद्दस मकाम की तौहीन है? तब सोशल मीडिया पर खामोशी क्यों थी? क्या उस वक्त मुसलमानों की गैरत सो गई थी? जब खुद रियाज़ में काबा की शबीह की बे-हुरमती हो रही थी तब फतवे कहाँ थे?

लेकिन आज जब अंसारुल्लाह उसी एयरबेस पर जवाबी हमला कर रही है जहाँ से यमन के मासूम बच्चों पर बम बरसाए जाते हैं, तो अचानक काबा का नाम लेकर जज्बात भड़काए जा रहे हैं।

असली निशाना क्या है - काबा या किंग फहद एयरबेस?

हकीकत यह है कि अंसारुल्लाह का हमला मक्का शहर पर नहीं, बल्कि ताइफ में स्थित किंग फहद एयरबेस पर है। यह एयरबेस यमन युद्ध का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा है। यहीं से F-15 और टाइफून लड़ाकू विमान उड़ान भरकर मारिब, सादा, हज्जाह और ताइज जैसे इलाकों पर 450 से ज्यादा हवाई हमले कर चुके हैं। इसी बेस पर अमरीकी और सऊदी फौज की मौजूदगी है।

अंसारुल्लाह का कहना साफ है कि उनका निशाना वो सैन्य ठिकाने हैं जहाँ से उनके मुल्क पर हमला होता है। इस्लामी तारीख में अंसारुल्लाह ने कभी भी मक्का और मदीना के मुकद्दस मकामात को निशाना नहीं बनाया। फिर इस हमले को काबा पर हमला बताना सरासर झूठ और फितना फैलाना नहीं तो क्या है?

उम्मत को फितने से होशियार रहने की जरूरत

आले सऊद की हुकूमत ईरान और यमन को बदनाम करने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। कई तजियाकार तो यह तक कहते हैं कि ये लोग सऊदी में किसी मुकद्दस जगह के करीब खुद कोई ड्रामा रचकर उसका इल्जाम ईरान और अंसारुल्लाह पर डाल सकते हैं ताकि पूरी उम्मत का ध्यान यमन के मजलूमों से हटाकर फिरकावाराना नफरत की तरफ मोड़ दिया जाए।

आज जरूरत इस बात की है कि उम्मत इस प्रोपेगेंडा को समझे। सवाल पूछे कि ताइफ एयरबेस पर मौजूद अमरीकी F-16 और सऊदी F-15 को क्या काबा कहा जाएगा? क्या एक फौजी अड्डे को बचाने के लिए बैतुल्लाह के नाम का इस्तेमाल करना खुद काबा की तौहीन नहीं है?

अल्लाह पूरी उम्मत को ऐसे फितनों से अपनी हिफ्जो अमान में रखे और हक को पहचानने की तौफीक दे।

Sajjadali Nayani ✍️
Friday World September 17, 2026


#SaudiArabia #Ansarullah #YemenWar #TaifAirbase #KingFahadAirbase #RiyadhSeason #Kaaba #MuslimUmmah #YemenConflict #MediaPropaganda


September 16, 2026

सऊदी-अंसारुल्लाह संघर्ष में नया मोड़: मारिब के आसमान में F-15 गिराने का सनसनीखेज दावा, खाड़ी में बढ़ा तनाव

सऊदी-अंसारुल्लाह संघर्ष में नया मोड़: मारिब के आसमान में F-15 गिराने का सनसनीखेज दावा, खाड़ी में बढ़ा तनाव
-Friday World September 17, 2026
यमन का गृहयुद्ध एक बार फिर वैश्विक सुर्खियों में है। ईरान समर्थित अंसारुल्लाह आंदोलन ने दावा किया है कि उन्होंने यमन के रणनीतिक रूप से सबसे अहम मारिब प्रांत के ऊपर सऊदी अरब के एक अत्याधुनिक F-15 लड़ाकू विमान को मार गिराया है। अंसारुल्लाह के सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी कर कहा कि यह कार्रवाई स्वदेशी तकनीक से बनी सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल से की गई।

अंसारुल्लाह पक्ष के अनुसार, सऊदी F-15 मारिब के हवाई क्षेत्र में सऊदी समर्थित बलों को हवाई सहायता देने के मिशन पर था। इसी दौरान अंसारुल्लाह वायु रक्षा इकाई ने उसे ट्रैक कर मिसाइल दागी।

अंसारुल्लाह मीडिया विंग ने इस दावे के साथ एक वीडियो भी जारी किया है, जिसमें रेगिस्तानी इलाके में जले हुए विमान के मलबे का दृश्य दिखाया गया है। वीडियो में विमान के बड़े-बड़े हिस्से जमीन पर बिखरे हुए और कुछ जगहों पर आग की लपटें उठती दिखाई दे रही हैं। अंसारुल्लाह का दावा है कि मलबे में विमान की पूंछ का हिस्सा भी है जिस पर सऊदी अरब का झंडा और अरबी चिन्ह स्पष्ट दिख रहे हैं। हालांकि, सऊदी अरब और सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन की ओर से अब तक इस घटना की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, इसलिए इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि बाकी है।

स्वदेशी मिसाइल का दावा क्यों है अहम?

अंसारुल्लाह का यह कहना कि विमान को "स्थानीय स्तर पर निर्मित" मिसाइल से गिराया गया, सैन्य रूप से बहुत बड़ा संकेत है। अब तक अंसारुल्लाह मुख्यतः ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों से सऊदी ठिकानों पर हमले करते रहे हैं, लेकिन किसी चौथी पीढ़ी के फाइटर जेट जैसे F-15 को मार गिराना उनकी वायु रक्षा क्षमता में बड़ी छलांग माना जाएगा। F-15 दुनिया के सबसे सक्षम और महंगे लड़ाकू विमानों में से एक है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि यह दावा सही है, तो यह मिसाइल ईरानी तकनीक पर आधारित फत्तर या बर्क-3 जैसी प्रणाली का उन्नत रूप हो सकती है, जिसे अंसारुल्लाह ने स्थानीय नाम दिया है। यह सऊदी वायुसेना के लिए नई चुनौती पैदा कर सकता है।

दूसरे जेट्स को भी खदेड़ने का दावा

याह्या सरी ने अपने बयान में आगे कहा कि F-15 को गिराने के बाद सऊदी अरब के दो अन्य लड़ाकू विमानों - एक F-15 और एक यूरोफाइटर टाइफून - ने मारिब के ऊपर मलबे की तलाश के लिए उड़ान भरी। अंसारुल्लाह बलों ने दावा किया कि उन्होंने उन विमानों पर भी जवाबी मिसाइल हमला किया, जिसके बाद उन्हें मजबूरन क्षेत्र छोड़कर पीछे हटना पड़ा। इसके कुछ घंटे बाद ही अंसारुल्लाह ने मारिब में ही सऊदी अरब का एक Wing Loong-2 सशस्त्र ड्रोन मार गिराने का भी दावा किया।

450 से ज्यादा हवाई हमलों का आरोप

अंसारुल्लाह प्रवक्ता ने सऊदी गठबंधन पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि पिछले एक सप्ताह में सऊदी लड़ाकू विमानों ने यमन के विभिन्न प्रांतों पर 450 से अधिक हवाई हमले किए हैं। उनके अनुसार, ये हमले खमीस मुशैत और ताइफ एयरबेस से उड़ान भरने वाले F-15 और टाइफून जेट्स द्वारा किए गए।

अंसारुल्लाह का आरोप है कि इन हमलों में ताइज, लहज, अल-जौफ, हज्जाह, मारिब, सादा और अल-बायदा जैसे प्रांतों को निशाना बनाया गया, जिसमें कई आम नागरिक हताहत हुए हैं। इन आंकड़ों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

मारिब क्यों है जंग का केंद्र?

मारिब यमन के संघर्ष का दिल कहा जाता है। यह सिर्फ सैन्य मोर्चा नहीं, बल्कि यमन के तेल और गैस संसाधनों का सबसे बड़ा केंद्र है। जो भी पक्ष मारिब पर नियंत्रण रखता है, वह आर्थिक और रणनीतिक रूप से मजबूत हो जाता है। पिछले कुछ महीनों से यहां जमीन और हवा दोनों जगह लड़ाई तेज हुई है। लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य जैसे दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों के करीब होने से इस संघर्ष का असर वैश्विक तेल कीमतों और व्यापार पर भी पड़ता है।

इतिहास में ऐसे दावे पहले भी

यह पहली बार नहीं है जब अंसारुल्लाह ने सऊदी विमान गिराने का दावा किया है। 2018 और 2019 में भी ऐसे दावे किए गए थे, जिन्हें सऊदी गठबंधन के प्रवक्ता ने "आधारहीन और झूठा" बताते हुए खारिज कर दिया था। इसलिए इस बार भी सऊदी अरब के आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है।

क्षेत्रीय तनाव पर असर

यदि यह दावा सही साबित होता है, तो यह सऊदी-अंसारुल्लाह संघर्ष में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट होगा। यह साबित करेगा कि अंसारुल्लाह अब केवल जमीन पर नहीं, बल्कि हवा में भी सऊदी श्रेष्ठता को चुनौती दे सकते हैं। इससे यमन में चल रही शांति वार्ताओं पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है और मानवीय संकट और गहरा सकता है, जहां पहले ही लाखों लोग विस्थापित हैं।

फिलहाल, पूरी दुनिया की नजर रियाद की प्रतिक्रिया और मलबे के वीडियो की फॉरेंसिक जांच पर टिकी है।

Sajjadali Nayani ✍️
Friday World September 17, 2026

#Ansarullah #SaudiArabia #YemenConflict #Marib #F15FighterJet #MiddleEastTensions #YahyaSaree #BreakingNews #Geopolitics #RedSeaCrisis
September 16, 2026

फूफा का टैरिफ बम: ट्रंप को मिला 100% टैरिफ का ब्रह्मास्त्र, निशाने पर भारत-चीन-रूस का तेल त्रिकोण!

फूफा का टैरिफ बम: ट्रंप को मिला 100% टैरिफ का ब्रह्मास्त्र, निशाने पर भारत-चीन-रूस का तेल त्रिकोण!
-Friday World September 17,2026 
वाशिंगटन से आई इस खबर ने पूरी दुनिया की व्यापारिक राजधानी में हलचल मचा दी है। अमेरिका के पूर्व और वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जिन्हें उनके समर्थक अपना सबसे बड़ा मित्र कहते हैं और विरोधी तंज में 'भक्तों के फूफा' कहते हैं, अब एक ऐसे कानून के दम पर वैश्विक तेल व्यापार की दिशा बदलने जा रहे हैं, जिसकी गूंज नई दिल्ली से लेकर बीजिंग और मॉस्को तक सुनाई दे रही है।

अमेरिकी कांग्रेस ने रूस पर अब तक का सबसे कड़ा प्रतिबंध बिल पास कर दिया है। इसका नाम है लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026। इस बिल का मकसद सिर्फ रूस को सजा देना नहीं है, बल्कि उन देशों पर भी आर्थिक शिकंजा कसना है जो रूस से सस्ता तेल खरीदकर उसकी युद्ध की मशीन को ईंधन दे रहे हैं। अमेरिका का आरोप है कि रूस की कच्चे तेल की बिक्री से ही यूक्रेन के खिलाफ युद्ध का खर्च निकल रहा है।

बिल में है क्या?
इस बिल के दो मुख्य हिस्से हैं। पहला, रूस के शैडो फ्लीट पर नकेल। रूस प्रतिबंधों से बचने के लिए पुराने जहाजों के एक गुप्त बेड़े से तेल बेचता है। दूसरा और सबसे विस्फोटक हिस्सा है सेक्शन 113, जो अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है कि वह रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक आयात शुल्क लगा दे।

हाउस में लाए गए एक संशोधन में 10 देशों के नाम साफ-साफ लिखे गए हैं: चीन, भारत, तुर्की, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाकिया, यूएई, सिंगापुर, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान। इनमें भारत और चीन टॉप पर हैं। 5234

भारत पर क्यों खतरा ज्यादा?
आंकड़े चौंकाने वाले हैं। भारत वित्त वर्ष 2026 में अपना 30.3% कच्चा तेल रूस से खरीद रहा है, जिसकी कीमत 40.8 अरब डॉलर है। यह भारत के लिए सबसे सस्ता और सबसे बड़ा स्रोत बन गया है। इसी सस्ते तेल ने भारत में महंगाई को काबू में रखने में मदद की है। अमेरिका का तर्क है कि भारत रूस से तेल लेकर उसे रिफाइन करके यूरोप को बेच रहा है।

ट्रंप का गेम प्लान क्या है?
ट्रंप इस कानून को एक डील मेकिंग टूल की तरह देख रहे हैं। वह सीधे 100% टैरिफ नहीं लगाएंगे, बल्कि इस धमकी के जरिए भारत और चीन को मजबूर करेंगे कि वे रूसी तेल खरीदना कम करें और अमेरिकी तेल और गैस ज्यादा खरीदें। बिल में यूरोपीय देशों के लिए छूट भी है अगर उन्होंने रूसी गैस खरीदना कम किया है।

भारत के पास विकल्प क्या हैं?
भारत की विदेश नीति हमेशा से रणनीतिक स्वायत्तता पर टिकी रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को हर अमेरिकी दबाव में झुकना नहीं चाहिए। भारत का तेल फैसला आर्थिक हित, ऊर्जा सुरक्षा और जनता के हित से तय होना चाहिए। बातचीत से रास्ता निकलेगा, घुटने टेकने से नहीं। अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमिसन ग्रीर ही तय करेंगे कि टैरिफ कितना लगेगा, लेकिन अंतिम फैसला व्हाइट हाउस का होगा।

कुल मिलाकर, यह टैरिफ अभी लगा नहीं है, लेकिन तलवार लटक गई है। अगर ट्रंप ने हस्ताक्षर कर दिए और इसे लागू किया, तो भारत के टेक्सटाइल, फार्मा और आईटी हार्डवेयर जैसे अमेरिका को निर्यात होने वाले सामानों पर भारी असर पड़ सकता है। आने वाले 15 दिन भारतीय कूटनीति के लिए सबसे अहम होंगे।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World September 17,2026 

#USTariff #TrumpTariff #IndiaUSTrade #RussiaOil #ChinaTariff #Geopolitics #TradeWar #BreakingNews #SanctionsBill #GlobalEconomy
September 16, 2026

હોસ્પિટલ બિલનો સૌથી મોટો છેતરપિંડીનો પર્દાફાશ! 11 રૂપિયાના IV સેટના 325 રૂપિયા, દબંગ અધિકારી સર્જિકલ સ્ટ્રાઇક

હોસ્પિટલ બિલનો સૌથી મોટો છેતરપિંડીનો પર્દાફાશ! 11 રૂપિયાના IV સેટના 325 રૂપિયા, દબંગ અધિકારી સર્જિકલ સ્ટ્રાઇક
- Friday World September 17,2026 
હોસ્પિટલમાં દાખલ થવું એટલે આજે મધ્યમ વર્ગના પરિવાર માટે દેવાળું નીકળવા જેવું છે. ડોક્ટરની ફી અને દવાઓ તો ઠીક, પણ બિલમાં જે નાના-નાના સામાન જેવા કે IV સેટ, સિરીંજ, નેબ્યુલાઇઝર માસ્ક અને કેથેટરના જે આંકડા લખીને આવે છે, તે જોઈને પરિવારના હોશ ઉડી જાય છે. આ લૂંટ પર હવે મહારાષ્ટ્રના સૌથી દબંગ IAS અધિકારી અને ફૂડ એન્ડ ડ્રગ એડમિનિસ્ટ્રેશન (FDA) ના કમિશનર તુકારામ મુંઢેએ બ્રેક લગાવી છે.

મુંઢેના નેતૃત્વમાં મહારાષ્ટ્ર FDA ની પ્રાઇસ મોનિટરિંગ ટીમે મુંબઈ, પુણે અને સંભાજીનગરની 20 થી વધુ ખાનગી હોસ્પિટલોમાં સરપ્રાઇઝ સર્વે કર્યો હતો. જે આંકડા બહાર આવ્યા તે ચોંકાવનારા છે અને હોસ્પિટલ માફિયાના કારનામાનો પર્દાફાશ કરે છે. 

11 રૂપિયાની વસ્તુના 325 રૂપિયા કેવી રીતે?

સર્વેમાં સૌથી મોટો ખુલાસો IV ઇન્ફ્યુઝન સેટને લઈને થયો. આ સેટ જેનાથી દર્દીને બોટલ ચડાવવામાં આવે છે, તેની હોસ્પિટલની ખરીદ કિંમત માત્ર *રૂ. 11.05* છે, જ્યારે તેના પેકેટ પર છાપેલી MRP *રૂ. 325* છે. એટલે સીધો 2841% નો નફો! 

આ એક જ ઉદાહરણ નથી:

- 10 ML સિરીંજ: ખરીદ કિંમત રૂ. 6.75, MRP રૂ. 57.20 - લગભગ 747% માર્જિન
- કેથેટર: ખરીદ કિંમત રૂ. 29.41, MRP રૂ. 310 - 1000% થી વધુ માર્જિન
- નેબ્યુલાઇઝર માસ્ક કિટ: ખરીદ કિંમત રૂ. 40, દર્દી પાસેથી વસૂલાત રૂ. 715 - 1687% માર્જિન
- ઓક્સિજન માસ્ક કિટ: ખરીદ કિંમત રૂ. 62.50, MRP રૂ. 662 

એક Medifusion કંપનીના IV સેટમાં 2800% અને Lyvofusion કંપનીના સેટમાં 2091% માર્જિન મળ્યું હતું.

મુંઢેએ શું કહ્યું? આ દર્દીની મજબૂરીનો ફાયદો છે

તુકારામ મુંઢેએ X (ટ્વિટર) પર લખ્યું - “હોસ્પિટલના બિલનો સૌથી મોંઘો ભાગ કદાચ હોસ્પિટલને સ્પર્શતો પણ નથી. દાખલ થયેલો દર્દી ક્યારેય જાણી શકતો નથી કે મેડિકલ સામાનની કિંમત તેની મૂળ કિંમત છે કે પછી વોર્ડમાં પહોંચતા પહેલા જ નક્કી કરાયેલું માર્જિન છે. માહિતીનો આ અભાવ એ જાહેર આરોગ્યનો મુદ્દો છે.” 

તેમણે સ્પષ્ટ કહ્યું કે આ કોઈ પસંદગીની ખરીદી નથી. દર્દી બેડ પર પડ્યો છે ત્યારે તે IV સેટનો ભાવ તપાસી શકતો નથી, મોલભાવ કરી શકતો નથી કે બીજી દુકાને જઈ શકતો નથી. આ તેની સૌથી નબળી ક્ષણનો ફાયદો ઉઠાવવા જેવું છે. 4efc

MRP ની રમત શું છે?

મહત્વની વાત એ છે કે હોસ્પિટલ MRP કરતા વધુ વસૂલી શકતી નથી, તેથી કાયદેસર રીતે તેઓ ગુનેગાર નથી. પરંતુ રમત MRP છાપવામાં જ થાય છે. ઉત્પાદક કંપની 11 રૂપિયામાં હોસ્પિટલને વસ્તુ વેચે છે, પણ તેના પર પહેલેથી જ 325 રૂપિયા MRP છાપી દે છે, જેથી હોસ્પિટલને દર્દી પાસેથી કાયદેસર રીતે 325 રૂપિયા વસૂલવાનું લાયસન્સ મળી જાય. આ પૂરો માર્જિન ઉત્પાદક, ડિસ્ટ્રિબ્યુટર અને હોસ્પિટલ વચ્ચે વહેંચાઈ જાય છે.

હવે શું થશે? કેન્દ્ર સરકારને પત્ર

મુંઢેએ આ મામલો માત્ર ટ્વિટ પૂરતો સીમિત નથી રાખ્યો. તેમણે 10 ઓગસ્ટના રોજ કેન્દ્રીય ડિપાર્ટમેન્ટ ઓફ ફાર્માસ્યુટિકલ્સ અને નેશનલ ફાર્માસ્યુટિકલ પ્રાઇસિંગ ઓથોરિટી (NPPA) ને સત્તાવાર પત્ર લખીને માંગ કરી છે કે દવાઓની જેમ જ મેડિકલ ડિવાઇસ અને સર્જિકલ કન્ઝ્યુમેબલ્સ પર પણ ટ્રેડ માર્જિન કેપ લગાવવામાં આવે.

તેમની માંગ છે કે ખરીદ કિંમત અને MRP વચ્ચેનું અંતર 50% થી 100% થી વધુ ન હોવું જોઈએ, જેમ કે કોરોના સમયે કેટલીક દવાઓ પર લગાવવામાં આવ્યું હતું. જો આ નિયમ આવશે તો 11 રૂપિયાના IV સેટની MRP 325 ને બદલે વધુમાં વધુ 22 રૂપિયા જ હોઈ શકે.

મહારાષ્ટ્ર FDA ની આ કાર્યવાહી બાદ સમગ્ર દેશના દર્દીઓની નજર હવે NPPA ના નિર્ણય પર છે. જો કેન્દ્ર સરકાર મુંઢેની આ સર્જિકલ સ્ટ્રાઇકને સમર્થન આપે છે, તો કરોડો ભારતીયોના હોસ્પિટલ બિલ અડધા થઈ જશે. દવા કરતા વધુ મોંઘા સાબિત થતા આ નાના-નાના પ્લાસ્ટિકના સામાનની લૂંટ બંધ થશે તે નક્કી છે.

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World September 17,2026 

#HospitalBillingScam #TukaramMundhe #MaharashtraFDA #MedicalDevicePricing #PatientRights #NPPA #IVSetScam #HealthcareTransparency #DrugPriceControl #MedicalLoot
September 16, 2026

महायुद्ध से पहले का महामंथन! जर्मनी के बर्फीले रिजॉर्ट में अमेरिका-इज़राइल और 8 अरब देशों के सैन्य प्रमुखों की सीक्रेट मीटिंग, ईरान के खिलाफ बना नया वॉर प्लान?

महायुद्ध से पहले का महामंथन! जर्मनी के बर्फीले रिजॉर्ट में अमेरिका-इज़राइल और 8 अरब देशों के सैन्य प्रमुखों की सीक्रेट मीटिंग, ईरान के खिलाफ बना नया वॉर प्लान?
-Friday World September 17,2026
नई दिल्ली: मध्य पूर्व में तीसरे विश्व युद्ध जैसे हालात बन रहे हैं। एक तरफ ईरान के साथ अमेरिका और इज़राइल का सीधा युद्ध छह महीने से ज्यादा से चल रहा है, दूसरी तरफ यमन के हूथी विद्रोहियों के हमलों ने पूरे खाड़ी क्षेत्र को दहला रखा है। इसी भीषण तनाव के बीच जर्मनी से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया की खुफिया एजेंसियों को चौंका दिया है।

अमेरिकी मीडिया Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले हफ्ते जर्मनी के एक सुनसान और गुप्त स्की रिजॉर्ट में अमेरिका, इज़राइल और 7-8 अरब देशों के टॉप सैन्य कमांडरों की एक बेहद गुप्त बैठक हुई। इस बैठक का आयोजन किसी और ने नहीं, बल्कि मध्य पूर्व में अमेरिकी सेना के सबसे बड़े कमांडर, CENTCOM के चीफ एडमिरल ब्रैड कूपर ने किया था।

कौन-कौन हुआ शामिल? एक टेबल पर दुश्मन से दोस्त तक

यह बैठक सामान्य नहीं थी। इस एक टेबल पर वो देश बैठे थे जो एक दशक पहले तक एक-दूसरे से बात तक नहीं करते थे।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने खुद इसकी पुष्टि करते हुए कहा है कि, "पिछले हफ्ते CENTCOM ने जर्मनी में एक निर्धारित सम्मेलन के दौरान आठ देशों के वरिष्ठ सैन्य नेताओं की मेजबानी की। नेताओं ने मध्य पूर्व में सुरक्षा सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की।"

रिपोर्ट के अनुसार इस गुप्त मीटिंग में शामिल थे:

1. अमेरिका: CENTCOM कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर

2. इज़राइल: IDF चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल इयाल जमीर

3. सऊदी अरब, UAE, बहरीन, कुवैत, कतर, जॉर्डन और मिस्र के सेना प्रमुख

इस मीटिंग की सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें सऊदी अरब, कतर और कुवैत जैसे वो अरब देश भी शामिल थे जिनके इज़राइल के साथ आज तक औपचारिक राजनयिक संबंध भी नहीं हैं। एक ही कमरे में इज़राइली और सऊदी जनरल का बैठना अपने आप में इतिहास है।

एजेंडे में क्या था? ईरान, हूथी और होर्मुज

दो इज़राइली अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि यह फरवरी 2026 में ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू होने के बाद से इस तरह की पहली बैठक थी। हालांकि पहले भी ऐसी बैठकें होती रही हैं, लेकिन युद्ध शुरू होने के बाद यह सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण थी।

बैठक में तीन मुख्य मुद्दों पर फोकस था:

 1. अमेरिका पीछे नहीं हटेगा: एडमिरल कूपर ने सभी अरब सहयोगियों को साफ आश्वासन दिया कि ईरान द्वारा अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर लगातार हमलों के बावजूद अमेरिका मध्य पूर्व से अपनी सेना नहीं हटाएगा। खाड़ी देशों को डर था कि अमेरिका उन्हें छोड़कर चला जाएगा, इस आश्वासन ने उन्हें राहत दी है।

 2. होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखना: ईरान ने धमकी दी है कि वह दुनिया के 20% तेल की सप्लाई वाले होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर देगा। कूपर ने बैठक में बताया कि अमेरिका किस तरह से इस महत्वपूर्ण जलमार्ग में वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही बढ़ाने और ईरानी नाकेबंदी को तोड़ने की योजना बना रहा है।

 3. इज़राइल का नया रोल: इज़राइल के सेना प्रमुख इयाल जमीर ने सभी मोर्चों पर चल रहे IDF ऑपरेशन्स की ब्रीफिंग दी। सबसे चौंकाने वाली जानकारी यह है कि इज़राइल अब अरब देशों की सीधे मदद कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार इज़राइल ने युद्ध के दौरान UAE को अपना आयरन डोम डिफेंस सिस्टम, उसे चलाने के लिए स्टाफ और रियल-टाइम इंटेलिजेंस (ISR) सपोर्ट दिया है। अब इसी तरह की मदद सऊदी अरब को हूथियों के खिलाफ देने पर चर्चा चल रही है।

अब्राहम समझौता अब युद्ध के मैदान में

2020 में हुए अब्राहम समझौते के बाद इज़राइल का अमेरिका के यूरोपीय कमांड से निकालकर CENTCOM में शामिल करना एक गेम-चेंजर साबित हुआ। अब इज़राइल और अरब देश एक ही सैन्य कमांड के तहत आ गए हैं। खुफिया जानकारी साझा करना, एयर डिफेंस सिस्टम का समन्वय और अब हूथियों के खिलाफ जॉइंट ऑपरेशन की योजना, यह सब उसी का नतीजा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक एक नए नाटो जैसे अरब-इज़राइली सैन्य गठबंधन की नींव है, जिसका एकमात्र लक्ष्य ईरान और उसके प्रॉक्सी हूथियों को रोकना है।

क्या महायुद्ध की आहट है?

यह गुप्त बैठक ऐसे समय में हुई है जब पूरा मध्य पूर्व बारूद के ढेर पर बैठा है। ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले, लाल सागर में हूथियों के जहाजों पर हमले और तेल की कीमतों में उछाल ने दुनिया को हिला दिया है। जर्मनी की यह सीक्रेट मीटिंग इस बात का संकेत है कि अमेरिका और उसके सहयोगी एक लंबे और बड़े युद्ध के लिए तैयार हो रहे हैं। वे किसी भी कीमत पर ईरान को होर्मुज स्ट्रेट बंद नहीं करने देंगे।

आने वाले हफ्तों में सऊदी अरब में इज़राइली इंटेलिजेंस की मौजूदगी या लाल सागर में कोई बड़ा जॉइंट ऑपरेशन दिखे, तो चौंकिएगा मत। मध्य पूर्व का नक्शा बदलने की तैयारी जर्मनी के बर्फीले पहाड़ों में ही हो चुकी है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World September 17,2026

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September 16, 2026

तेल के बदले मिसाइलें: ईरान-चीन की सीक्रेट डील ने कैसे तोड़ा अमेरिकी प्रतिबंधों का जाल?

तेल के बदले मिसाइलें: ईरान-चीन की सीक्रेट डील ने कैसे तोड़ा अमेरिकी प्रतिबंधों का जाल?
-Friday World September 16,2026 
तेहरान से बीजिंग तक अरबों डॉलर का शैडो नेटवर्क, जो बदल सकता है मिडिल ईस्ट का पावर बैलेंस

रॉयटर्स की एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भूचाल ला दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने पिछले एक साल में चीन से लाखों डॉलर की एयर डिफेंस सिस्टम एक सीक्रेट बार्टर सिस्टम के जरिए हासिल की है। ये कोई सामान्य व्यापार नहीं, बल्कि अमेरिकी प्रतिबंधों को चकमा देने वाला एक हाई-टेक जुगाड़ है।

दरअसल कहानी सीधी है - ईरान तेल भेजता है, चीन क्रेडिट देता है। न डॉलर, न SWIFT, न अमेरिकी बैंक। सब कुछ डॉलर सिस्टम के बाहर।

कैसे काम करता है ये तेल-के-बदले-सामान वाला फॉर्मूला?

रॉयटर्स ने 2 सीनियर ईरानी सूत्रों और 3 अन्य जानकार लोगों के हवाले से खुलासा किया है कि पूरा सिस्टम एक छाया बैंक 'ChuXin' के जरिए चलता है।

मैकेनिज्म ऐसा है:
चीनी सरकारी तेल कंपनी Zhuhai Zhenrong का एक एजेंट हर महीने करोड़ों डॉलर ChuXin नाम की एक चीनी वित्तीय संस्था में जमा करता है। ये पैसा ईरान की नेशनल ऑयल कंपनी से लिंक्ड हांगकांग रजिस्टर्ड कंपनी के तेल के बदले होता है।

फिर ChuXin से पैसा सीधे चीनी एक्सपोर्टर्स को चला जाता है। इस पूरी चेन में एक भी अमेरिकी करेस्पॉन्डेंट बैंक नहीं आता, इसलिए US ट्रेजरी इसे ट्रैक नहीं कर पाती।

पिछले एक साल में इस चैनल से करीब 2 से 2.5 अरब डॉलर का लेन-देन हुआ है। 

इसका 70% पैसा ईरान के अंदर सड़क, इंडस्ट्रियल फैसिलिटी और कंस्ट्रक्शन मशीनरी जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में लगा, और बाकी 30% से एक स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) के जरिए चीनी सामान खरीदा गया। 

सिर्फ दवाइयां नहीं, अब एयर डिफेंस भी

शुरुआत में ईरान ने इस क्रेडिट से दवाइयां, गाड़ियां और कम्युनिकेशन उपकरण खरीदे। लेकिन रिपोर्ट कहती है कि पिछले एक साल में कम से कम एक बार इसी सिस्टम से लाखों डॉलर के एयर डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट भी हुए हैं। 

दूसरी रिपोर्ट और भी चौंकाने वाली है। जुलाई 2026 में रॉयटर्स ने बताया कि ईरान को कुछ हफ्तों में चीन से 300 से 400 कंधे पर रखकर चलने वाली मिसाइलें (MANPADS) की पहली खेप मिलने वाली है। इनमें QW-12 और FN-16 जैसी एडवांस्ड मिसाइलें शामिल हैं। इस डील की कीमत 60 से 70 मिलियन डॉलर यानी करीब 500-600 करोड़ रुपये है। ये डील हांगकांग की कंपनी Zhongqing Baoshang International Investment के जरिए हुई।

ये ईरान के लिए गेम-चेंजर है। पिछले महीनों में अमेरिका और इजरायल के साथ युद्ध में ईरान के एयर डिफेंस की पोल खुल गई थी। उसके कई सैन्य ठिकाने और स्ट्रैटेजिक इंफ्रास्ट्रक्चर असुरक्षित हो गए थे।

80% तेल चीन खरीद रहा है

दशकों के प्रतिबंधों के बाद ईरान के पास ग्राहक बचे ही कितने हैं। डेटा बताता है कि 2025 में ईरान के कुल शिप किए गए तेल का 80% से ज्यादा चीन ने खरीदा, औसतन करीब 14 लाख बैरल रोजाना। चीन को सस्ता तेल मिल रहा है, ईरान को जिंदा रहने के लिए सामान। दोनों की मजबूरी ने इस जुगलबंदी को जन्म दिया है। 63f2

तो क्या अमेरिका फेल हो रहा है?

सवाल वही है जो आपने पूछा - क्या ये नेटवर्क ईरान की सैन्य क्षमताओं को मजबूत करते हुए अमेरिकी दबाव को चुनौती दे सकता है?

जवाब है - हाँ, और यही वॉशिंगटन की सबसे बड़ी चिंता है।

 1. प्रतिबंधों की धार कुंद: अमेरिका का पूरा हथियार डॉलर सिस्टम है। अगर तेल का पैसा डॉलर में नहीं आएगा, तो प्रतिबंध कैसे लगेगा? ये मॉडल बाकी प्रतिबंधित देशों के लिए भी एक खाका बन सकता है।
 
 2. ईरान की री-आर्मिंग: MANPADS जैसी सिस्टम भले ही हाई-लेवल S-400 न हो, लेकिन ये ड्रोन, हेलीकॉप्टर और लो-फ्लाइंग जेट्स के खिलाफ ईरान को नई ढाल देती है।
 
 3. चीन का दोहरा खेल: चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि उसे "इस स्थिति की जानकारी नहीं है" और वह एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध करता है। लेकिन बीजिंग जानता है कि सीधे हथियार बेचने पर सेकेंडरी सैंक्शन लग सकता है, इसलिए वो SPV और बिचौलियों वाला रास्ता अपना रहा है। 0cf1

हालांकि रॉयटर्स खुद कहता है कि वो इन मिलिट्री लेन-देन को स्वतंत्र रूप से वेरीफाई नहीं कर सका है और चीनी मैन्युफैक्चरर्स सीधे ईरान से डील नहीं कर रहे हैं। चीन भी आधिकारिक तौर पर कहता है कि वो हथियार निर्यात पर सख्त नियंत्रण रखता है।

फिर भी सितंबर 2025 में ईरान पर लगे UN हथियार एम्बार्गो के स्नैपबैक के बाद भी अगर ऐसे सिस्टम पहुंच रहे हैं, तो ये साफ संकेत है कि तेहरान अब घुटने टेकने वाला नहीं।

अमेरिका अब यूरोप के साथ मिलकर ईरान को उसकी परमाणु महत्वाकांक्षाओं के लिए जरूरी सामग्री से वंचित करने की बात कर रहा है, लेकिन जमीन पर तेल टैंकर अभी भी होर्मुज से शंघाई जा रहे हैं।

ये सिर्फ एक डील नहीं, ये एक नए वर्ल्ड ऑर्डर की झलक है जहां तेल, हथियार और करेंसी - तीनों अमेरिका के बिना भी चल सकते हैं।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World September 16,2026 

#IranChinaDeal #AirDefenseSystem #OilForWeapons #USSanctions #Geopolitics #MiddleEastTension #ChinaIranTrade #BarterSystem #MilitaryDeal #ReutersReport
September 16, 2026

પોતાના જ વોર્ડમાં પ્રમુખ નિષ્ફળ: સિહોરના વોર્ડ નં. 2માં દેવીપૂજક સમાજનો રોષ, રોડ-પાણી-ગટર વગર જીવવા મજબૂર

પોતાના જ વોર્ડમાં પ્રમુખ નિષ્ફળ: સિહોરના વોર્ડ નં. 2માં દેવીપૂજક સમાજનો રોષ, રોડ-પાણી-ગટર વગર જીવવા મજબૂર
-Friday World September 16,2026 
સિહોર -ભાવનગર જિલ્લાના સિહોર નગરપાલિકામાં વિકાસના મોટા મોટા દાવાઓ કરવામાં આવે છે, પરંતુ વાસ્તવિકતા કંઈક અલગ જ છે. નગરપાલિકા પ્રમુખના પોતાના જ વોર્ડ નંબર 2 ના પ્લોટિંગ વિસ્તારમાં રહેતા દેવીપૂજક સમાજના લોકો આજે પણ પાયાની સુવિધાઓથી વંચિત છે. રોડ, પીવાનું પાણી અને ગટર જેવી પ્રાથમિક સુવિધાના અભાવે સ્થાનિકોમાં ભારે રોષ જોવા મળી રહ્યો છે.

સ્થાનિક રહીશોના જણાવ્યા અનુસાર, આ વિસ્તારમાં છેલ્લા ઘણા વર્ષોથી કોઈ વિકાસનું કામ થયું નથી. ચોમાસાની ઋતુમાં તો પરિસ્થિતિ વધુ ખરાબ થઈ જાય છે. આખા વિસ્તારમાં કાદવ-કીચડનું સામ્રાજ્ય છવાઈ જાય છે. બાળકોને શાળાએ જવામાં, મહિલાઓને અને વૃદ્ધોને ઘરની બહાર નીકળવામાં ભારે હાલાકી પડે છે. વાહન તો દૂર, પગપાળા ચાલવું પણ મુશ્કેલ બની જાય છે.

ઉનાળામાં પાણીની સમસ્યા વિકરાળ બને છે. નળમાં પાણી આવતું નથી અને મહિલાઓને દૂર દૂર સુધી પાણી ભરવા જવું પડે છે. ગટર વ્યવસ્થા ન હોવાને કારણે ગંદુ પાણી રસ્તા પર ફરી વળે છે, જેના કારણે રોગચાળો ફેલાવાનો ભય પણ રહે છે. અનેક વાર નગરપાલિકામાં લેખિત અને મૌખિક રજૂઆતો કરવા છતાં આજદિન સુધી કોઈ નક્કર કાર્યવાહી થઈ નથી.

આજે આ વિસ્તારના રહીશોએ આખરે કોંગ્રેસના જિલ્લા મહિલા નેતા મનીષાબેન રાઠોડ સમક્ષ પોતાની વ્યથા ઠાલવી. મનીષાબેન રાઠોડ તાત્કાલિક સ્થળ પર દોડી આવ્યા હતા અને લોકોની સમસ્યાઓ સાંભળી હતી.

આ તકે મનીષાબેન રાઠોડે તંત્ર પર આકરા પ્રહારો કર્યા હતા. તેમણે કહ્યું હતું કે, "આ વોર્ડ નંબર 2 નગરપાલિકા પ્રમુખનો પોતાનો વોર્ડ છે. જ્યારે પ્રમુખના પોતાના વોર્ડની આ હાલત હોય તો આખા સિહોર શહેરના વિકાસની વાતો કેટલી પોકળ છે તે સમજી શકાય છે. આ દેવીપૂજક સમાજના લોકો સાથે અન્યાય થઈ રહ્યો છે. તેમને માત્ર મત લેવા માટે જ યાદ કરવામાં આવે છે, વિકાસના કામમાં તેમની અવગણના કરવામાં આવે છે."

મનીષાબેન રાઠોડે વધુમાં જણાવ્યું હતું કે તેઓ આ મામલે સિહોર નગરપાલિકાના ચીફ ઓફિસર અને ભાવનગર જિલ્લા કલેક્ટરને લેખિતમાં રજૂઆત કરશે. જો 7 દિવસમાં કામગીરી શરૂ કરવામાં નહીં આવે તો ગાંધી ચીંધ્યા માર્ગે ઉપવાસ આંદોલન અને ધરણા પ્રદર્શન કરવામાં આવશે.

તેમણે સ્થાનિક રહીશોને ખાતરી આપી હતી કે આ લડતમાં તેઓ એકલા નથી, કોંગ્રેસ પક્ષ તેમની પડખે ઉભો છે અને જ્યાં સુધી રોડ, પાણી અને ગટરની સમસ્યાનો કાયમી ઉકેલ નહીં આવે ત્યાં સુધી લડત ચાલુ રહેશે.

સવાલ એ છે કે જ્યારે નગરપાલિકા પ્રમુખ પોતાના જ વોર્ડના લોકોની સમસ્યા ન ઉકેલી શકતા હોય તો શહેરના અન્ય વોર્ડની હાલત કેવી હશે? તંત્રના વિકાસના દાવાઓ અને જમીની હકીકત વચ્ચેનું અંતર સિહોરમાં સ્પષ્ટપણે દેખાઈ રહ્યું છે.

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World September 16,2026 

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