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यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Tuesday, 30 June 2026

June 30, 2026

“माजिद का मायाजाल: ईरान का छोटा हथियार, बड़े खतरों का तोड़”

“माजिद का मायाजाल: ईरान का छोटा हथियार, बड़े खतरों का तोड़” -Friday World 1 Jul 2026
जब आसमान में मंडराए मौत
21वीं सदी की जंग अब सिर्फ टैंक और तोपों की नहीं रही। सबसे बड़ा सिरदर्द बन गए हैं सस्ते, छोटे ड्रोन और नीची उड़ान भरने वाली क्रूज़ मिसाइलें। रडार पर दिखते नहीं, आवाज़ करते नहीं, पर पलक झपकते ही काफिले को तबाह कर देते हैं। इसी चुनौती का जवाब देने के लिए ईरान ने मैदान में उतारा है — ‘माजिद’ शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम। नाम जितना सादा, काम उतना घातक। 

1. ‘माजिद’ है क्या? एक नज़र में पूरा सिस्टम
‘माजिद’ यानी AD-08, ईरान का खुद का विकसित मोबाइल शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम है। इसे खासतौर पर VSHORAD – Very Short Range Air Defense – कैटेगरी के लिए बनाया गया है। रेंज: 8 किमी तक, ऊंचाई: 5 किमी तक। 

खासियत क्या है? ये सिस्टम इतना छोटा और हल्का है कि पिकअप ट्रक, Humvee जैसी 4x4 गाड़ी या बख्तरबंद कार्मिक वाहक के ऊपर सीधे बोल्ट कर दो। काफिला चलता रहे, ‘माजिद’ साथ-साथ चले। जहां खतरा दिखा, 30 सेकंड में एक्टिव। 

2. सबसे बड़ा हथियार: खामोशी
पारंपरिक एयर डिफेंस सिस्टम की सबसे बड़ी कमजोरी उसका रडार होता है। रडार ऑन किया, तो दुश्मन के एंटी-रेडिएशन मिसाइल के लिए आप खुद टॉर्च बन गए। ‘माजिद’ इस खेल को पलट देता है। 

ये सिस्टम मुख्य रूप से इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल + इन्फ्रारेड यानी EO/IR थर्मल कैमरों पर चलता है। आसान भाषा में: आंख से देखो, गर्मी से पहचानो, फिर मार गिराओ। कोई रेडियो सिग्नल नहीं, कोई रडार बीम नहीं। दुश्मन के ड्रोन या सीकर को पता ही नहीं चलेगा कि उसे कोई ट्रैक कर रहा है। जब तक पता चलेगा, माजिद की मिसाइल उसके पास पहुंच चुकी होगी। 

इसे कहते हैं ‘पैसिव डिटेक्शन’। चुपचाप देखना, चुपचाप मारना। 

3. मारक क्षमता: छोटी मिसाइल, बड़ा धमाका
माजिद सिस्टम AD-08 मिसाइल फायर करता है। ये फायर-एंड-फॉरगेट मिसाइल है। मतलब एक बार लॉक कर दिया, फायर कर दिया, फिर भूल जाओ। मिसाइल खुद अपने इन्फ्रारेड सीकर से टारगेट के इंजन की गर्मी पकड़कर पीछा करती है। 

टारगेट लिस्ट:
- छोटे क्वाडकॉप्टर और कामिकेज़ ड्रोन – जो यूक्रेन-रूस युद्ध की सबसे बड़ी सिरदर्दी हैं। 
- लो-फ्लाइंग क्रूज़ मिसाइल – जो रडार से बचने के लिए जमीन से 50 मीटर ऊपर उड़ती हैं। 
- हेलीकॉप्टर और लो-स्लो एयरक्राफ्ट – जो अचानक पहाड़ी के पीछे से निकलते हैं। 
- प्रिसिशन गाइडेड म्यूनिशन – स्मार्ट बम जिन्हें हवा में ही इंटरसेप्ट करना जरूरी। 

एक लॉन्चर पर 4 मिसाइल रेडी-टू-फायर रहती हैं। रीलोड तेज़, और पूरा सिस्टम 2-3 लोगों से ऑपरेट हो जाता है। 

4. युद्ध के मैदान में ‘माजिद’ क्यों गेम-चेंजर?
क. काफिले का बॉडीगार्ड: आज की जंग में सबसे ज्यादा नुकसान सप्लाई काफिलों को होता है। एक 200 डॉलर का ड्रोन, 2 करोड़ के टैंक को उड़ा देता है। माजिद को हर 5वीं गाड़ी पर लगा दो, पूरा काफिला एक ‘चलता-फिरता नो-फ्लाई जोन’ बन जाएगा। 

ख. अचानक हमले का तोड़: ड्रोन और लो-फ्लाइंग मिसाइल का सबसे बड़ा फायदा ‘सरप्राइज़’ है। 30 सेकंड में आते हैं, तब तक बड़ा SAM सिस्टम स्लीप मोड से जाग भी नहीं पाता। माजिद का रिएक्शन टाइम 5-8 सेकंड है। कैमरा घूमा, लॉक किया, फायर। 

ग. लागत का गणित: एक बड़ा S-300 बैटरी ऑपरेट करने में करोड़ों लगते हैं। एक मिसाइल की कीमत 10-15 करोड़। माजिद की मिसाइल की अनुमानित कीमत कुछ लाख। यानी 500 डॉलर के ड्रोन को मारने के लिए 5 करोड़ की मिसाइल नहीं दागनी पड़ेगी। इसे ‘कॉस्ट-इफेक्टिव किल’ कहते हैं। 

घ. EW से इम्यून: दुश्मन जैमिंग करे, GPS स्पूफ करे, रडार जाम कर दे — माजिद को फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि वो रडार या GPS पर निर्भर ही नहीं। आंख और गर्मी से टारगेट देखता है। 

5. तकनीक के अंदर झांकें: माजिद कैसे काम करता है?

स्टेप 1: सर्विलांस – 360 डिग्री घूमने वाला EO/IR टर्रेट। दिन में HD कैमरा, रात में थर्मल। 15 किमी दूर से हीट-सिग्नेचर पकड़ लेता है। 

स्टेप 2: डिटेक्शन + ट्रैकिंग– AI-बेस्ड सॉफ्टवेयर पक्षी और ड्रोन में फर्क कर लेता है। एक बार टारगेट कन्फर्म, ऑटो-ट्रैक शुरू। 

स्टेप 3: आइडेंटिफिकेशन– लेज़र रेंजफाइंडर से दूरी नापी, IFF से अपना-पराया पूछा। 

स्टेप 4: एंगेजमेंट – कमांडर बटन दबाए, मिसाइल निकल गई। 

स्टेप 5: किल असेसमेंट– दूसरा कैमरा इम्पैक्ट रिकॉर्ड करता है। टारगेट गिरा या नहीं, 2 सेकंड में पता। 

पूरा किल-चेन 10 सेकंड से कम। 

6. तुलना: दुनिया के दूसरे सिस्टम से माजिद कहां खड़ा है? 
- रूस का Pantsir-S1: ताकतवर है पर बहुत बड़ा, महंगा, रडार ऑन करना पड़ता है। ड्रोन स्वार्म के सामने रीलोड धीमा। 
- अमेरिका का M-SHORAD: स्ट्राइकर गाड़ी पर हेलफायर + स्टिंगर। बेहतरीन, पर कीमत और लॉजिस्टिक हैवी। 
- इज़राइल का आयरन डोम: रॉकेट के लिए बेस्ट, पर बहुत छोटे ड्रोन के लिए ओवरकिल और महंगा। 
- तुर्की का Sungur: मोबाइल है, पर रेंज कम। 

माजिद का पिच है – ‘लो-कॉस्ट, लो-सिग्नेचर, हाई-मोबिलिटी’। गरीब देशों की सेना, मिलिशिया, या फ्रंटलाइन यूनिट के लिए आदर्श। 

7. भू-राजनीति: माजिद किसे डरा रहा है?
ईरान ने माजिद को 2021 में पहली बार दिखाया। 2022-2023 में सीरिया, इराक में ईरानी समर्थित ग्रुप्स को सप्लाई की खबरें आईं। 2024-2025 में रूस-यूक्रेन युद्ध में ड्रोन का कहर देखने के बाद मिडिल-ईस्ट से लेकर अफ्रीका तक हर देश ‘काउंटर-ड्रोन’ ढूंढ रहा है। 

अमेरिका और इज़राइल के लिए चिंता: उनके महंगे प्रीडेटर, रीपर ड्रोन अब पहले जितने ‘अजेय’ नहीं रहे। 10 लाख डॉलर का ड्रोन, 50 हजार डॉलर की माजिद मिसाइल से गिर जाए, तो कॉस्ट-बेनिफिट उल्टा पड़ जाता है। 

सऊदी अरब, UAE के तेल-ठिकाने पहले ही हूती ड्रोन से परेशान हैं। उनके लिए भी माजिद जैसा सस्ता विकल्प आकर्षक हो सकता है, अगर पॉलिटिक्स इजाज़त दे। 

8. कमजोरियां: माजिद भी भगवान नहीं
1. रेंज लिमिट: 8 किमी के बाहर कुछ नहीं कर सकता। हाई-एल्टीट्यूड ड्रोन, फाइटर जेट के लिए बेकार। 
2. मौसम: भारी बारिश, कोहरा, धूल-आंधी में थर्मल कैमरा की रेंज घट जाती है। 
3. सैचुरेशन अटैक: अगर 50 ड्रोन एक साथ आएं, तो 4 मिसाइल वाली यूनिट ओवरलोड हो जाएगी। रीलोड टाइम में गैप मिलेगा। 
4. थर्मल काउंटरमेजर: नए ड्रोन में इंजन-हीट छुपाने की टेक, फ्लेयर निकालने की क्षमता आ रही है। 

इसलिए माजिद अकेला नहीं, ‘लेयर्ड एयर डिफेंस’ का हिस्सा है। ऊपर लंबी दूरी का Bavar-373, बीच में Khordad-15, और सबसे नीचे माजिद। 

9. भविष्य: माजिद 2.0 कैसा होगा?
डिफेंस एक्सपर्ट मानते हैं कि अगला वर्जन आएगा: 
- 8 की जगह 12 मिसाइल प्रति लॉन्चर। 
- लेज़र-वॉर्निंग रिसीवर ताकि पता चले कोई आपको लेज़र से ट्रैक कर रहा है। 
- ड्रोन के साथ नेटवर्किंग: अपना सर्विलांस ड्रोन 2 किमी आगे उड़ाओ, वो देखे, माजिद मारे। 
- AI-स्वार्म डिफेंस: एक माजिद यूनिट खतरा देखे, तो बगल वाली 5 यूनिट को ऑटो-अलर्ट। 

10. निष्कर्ष: छोटे युद्ध, छोटा समाधान
पहले युद्ध का नियम था — जिसका डंडा बड़ा, उसकी भैंस। अब नियम है — जिसका सेंसर तेज़, जिसकी मिसाइल सस्ती, वही जीतेगा। 

‘माजिद’ इसी नई सोच का प्रतीक है। ये टैंक नहीं रोक सकता, पर टैंक को बचाने वाला सबसे सस्ता बीमा जरूर है। थल सेना के जवान के लिए फर्क सिर्फ इतना है — कल तक सिर पर ड्रोन का साया था, आज माजिद का साया है। 

ईरान ने साफ कर दिया है कि भविष्य का एयर डिफेंस ‘दिखावे’ का नहीं, ‘टिकावे’ का होगा। छोटा, खामोश, घातक। 

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 1 Jul 2026
June 30, 2026

“बिना युद्धविराम का मोर्चा: साइबर-संसार में ईरान-इज़राइल की बढ़ती तकरार और दुनिया के लिए सबक”

“बिना युद्धविराम का मोर्चा: साइबर-संसार में ईरान-इज़राइल की बढ़ती तकरार और दुनिया के लिए सबक”
-Friday World 30 Jun 2026

जब जंग स्क्रीन पर उतर आई
जून 2026 की गर्मी सिर्फ मौसम की नहीं थी। तेल अवीव के सर्वर-रूम से लेकर हाइफा के पावर-ग्रिड कंट्रोल सेंटर तक, एक अलग तरह की तपिश महसूस की जा रही थी। इज़राइल की राष्ट्रीय साइबर निदेशालय की महानिदेशक योसी कराडी ने जर्मन अखबार _डाई वेल्ट_ को बताया कि इस साल ईरानी साइबर हमलों की बाढ़ आ गई है। आंकड़े खुद बोलते हैं — जून 2025 में 1,600 शत्रुतापूर्ण साइबर घटनाएं दर्ज हुई थीं। ठीक एक साल बाद, जून 2026 में यह संख्या 4,800 को छू गई। यानी 300% की सीधी छलांग। 

कराडी का सबसे अहम वाक्य था: “भौतिक क्षेत्र के विपरीत, साइबरस्पेस में कोई युद्धविराम नहीं होता।” जमीन पर मिसाइलें खामोश हो सकती हैं, पर डिजिटल मोर्चे पर की-बोर्ड कभी थकते नहीं। 

1. आंकड़ों का पोस्टमॉर्टम: 1600 से 4800 तक का सफर
1,600 घटनाएं मतलब हर दिन 53 हमले, हर घंटे 2 से ज्यादा। 4,800 का मतलब हर दिन 160 हमले, हर 9 मिनट में एक। ये सिर्फ “कोशिश” का आंकड़ा है। इसमें पोर्ट-स्कैनिंग से लेकर फुल-ब्लोन रैनसमवेयर तक सब शामिल है। 

साइबर-सुरक्षा की भाषा में इसे ‘वॉल्यूम-बेस्ड एट्रिशन’ कहते हैं। दुश्मन जानता है कि 4,800 में से अगर 1% भी कामयाब हो गया, तो 48 बार सिस्टम हिल जाएगा। और अगर 0.1% भी क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुंच गया, तो 4-5 बार ब्लैकआउट, पानी-सप्लाई में गड़बड़ी, या अस्पताल ठप। 

2. टाइमलाइन: जंग कब कोड में बदली?
2025 की शुरुआत में अमेरिका-इज़राइल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई की। जवाब में ईरान ने ड्रोन और मिसाइल तो दागे ही, साथ-साथ ‘की-बोर्ड ब्रिगेड’ भी सक्रिय कर दी। 

जनवरी-मार्च 2025: छिटपुट फ़िशिंग, वेबसाइट डिफेसमेंट। 
अप्रैल-मई 2025: बैंकिंग ट्रोजन, छोटे शहरों के वॉटर-प्लांट पर प्रोबिंग। 
जून 2025: 1,600 घटनाएं — दुनिया ने नोटिस लिया। 
जनवरी-जून 2026: हमलों की फ्रीक्वेंसी, सोफिस्टिकेशन, दोनों बढ़ीं। 
जून 2026: 4,800 घटनाएं — अब यह ‘नया नॉर्मल’ है। 

3. “कुछ समूह बहुत कुशल हैं” — कौन हैं ये समूह? 
इज़राइल या अमेरिका कभी आधिकारिक तौर पर नाम नहीं लेते, पर साइबर-सुरक्षा इंडस्ट्री में ईरान से जुड़े कई APT ग्रुप ट्रैक किए जाते हैं: 

- APT33 – Refined Kitten: पेट्रोकेमिकल, एविएशन, एनर्जी सेक्टर में जासूसी। 
- APT34 – OilRig: मिडिल-ईस्ट की सरकारों, टेलीकॉम को टारगेट। 
- MuddyWater: तुर्की, पाकिस्तान, सऊदी अरब, इज़राइल में फैला नेटवर्क। स्पीयर-फ़िशिंग में माहिर। 
- Charming Kitten – APT35: पत्रकार, एक्टिविस्ट, थिंक-टैंक को निशाना। 
- Lyceum/Hexane: तेल-गैस, टेलीकॉम इंफ्रा में सेंध। 

ये ग्रुप सीधे सरकार से जुड़े हों या न हों, मगर टाइमिंग, टारगेट और टूल्स से ‘स्टेट-इंटरेस्ट’ साफ झलकता है। 

4. हमले के 5 तरीके: ईरानी प्लेबु
1. स्पीयर-फ़िशिंग 2.0: अब ईमेल नहीं, लिंक्डइन जॉब ऑफर, व्हाट्सएप पर PDF, या “सैलरी-स्लिप” के नाम पर मैलवेयर। भाषा हिब्रू, अंग्रेजी में बिल्कुल लोकल। 
2. सप्लाई-चेन अटैक: किसी छोटे इज़राइली सॉफ्टवेयर वेंडर को हैक करो, उसके अपडेट में बैकडोर डाल दो। फिर वो अपडेट सैकड़ों क्लाइंट तक पहुंचेगा। 
3. वाइपर मैलवेयर: डेटा चुराना नहीं, सीधे हार्ड-डिस्क वाइप कर देना। 2012 में ‘Shamoon’ ने सऊदी अरामको के 30,000 कंप्यूटर उड़ा दिए थे। नया वर्जन ज्यादा घातक। 
4. DDoS फॉर डिस्ट्रैक्शन: सरकारी वेबसाइट पर ट्रैफिक की बमबारी करो। IT टीम उधर उलझी रहे, इधर असली हमला बैक-डोर से घुस जाए। 
5. सोशल मीडिया इंफ्लुएंस: फेक न्यूज़, डीपफेक वीडियो, “इज़राइल में पानी में जहर” जैसी अफवाहें। मकसद दहशत और अविश्वास। 

5. इज़राइल का कवच: यूनिट 8200 से स्टार्टअप नेशन तक 
इज़राइल को ‘स्टार्टअप नेशन’ यूं ही नहीं कहते। मिलिट्री की यूनिट 8200 से निकले टैलेंट ने Checkpoint, CyberArk, Wiz, SentinelOne जैसी कंपनियां बनाईं। 

सरकारी स्तर पर तीन लेयर डिफेंस: 
1. नेशनल SOC: 24x7 मॉनिटरिंग, पूरे देश का ट्रैफिक एनालिसिस। 
2. आयरन-बीम साइबर: AI-बेस्ड अनोमली डिटेक्शन। नॉर्मल से हटते ही अलर्ट। 
3. ऑफेंसिव-कैपेबिलिटी: कराडी ने साफ कहा — “हम सामना कर सकते हैं।” यानी अगर जरूरत पड़ी तो जवाबी डिजिटल स्ट्राइक भी विकल्प है। 

फिर भी 4,800 हमले बताते हैं कि कोई भी किला अभेद्य नहीं। 

6. युद्धविराम क्यों नहीं? साइबर की अनोखी ग्रैमर
1. एट्रिब्यूशन प्रॉब्लम: मिसाइल पर देश का झंडा होता है, IP-एड्रेस किराए का हो सकता है। सबूत जुटाने में महीने लगते हैं। 
2. ग्रे-जोन वॉरफेयर: न पूरी जंग, न पूरी शांति। रोज ‘पिन-प्रिक’ हमले, पर इतने छोटे कि युद्ध की घोषणा न हो। 
3. असममित फायदा: हमला करने की लागत 10 हजार डॉलर, बचाव की लागत 10 मिलियन डॉलर। 
4. कोई रेड-लाइन नहीं: अस्पताल पर बम गिराना युद्ध-अपराध है। अस्पताल का सर्वर लॉक करना? अंतरराष्ट्रीय कानून अभी खामोश है। 

इसीलिए साइबरस्पेस ‘हमेशा-चालू युद्धक्षेत्र’ बन गया है। 

7. आम आदमी पर असर: जब जंग आपके फोन तक आए
सोचिए, सुबह उठे तो: 
- बिजली नहीं — ग्रिड पर लॉजिक-बॉम्ब। 
- ATM काम नहीं कर रहा — बैंक का कोर-सिस्टम एन्क्रिप्टेड। 
- अस्पताल में पर्चा नहीं बन रहा — रैनसमवेयर ने OPD लॉक कर दी। 
- व्हाट्सएप पर मैसेज: “शहर का पानी पीने लायक नहीं” — फेक न्यूज़ से भगदड़। 

ये सीनरी अब हॉलीवुड नहीं, हकीकत है। यूक्रेन में 2015, 2016 में पावर-ग्रिड गए। अमेरिका में 2021 में Colonial Pipeline हफ्तेभर बंद रहा। कोस्टा रिका में 2022 में पूरा सरकारी डिजिटल सिस्टम महीनों ठप। 

8. दुनिया का रिस्पॉन्स: साइबर-नेटो की जरूरत 
नेटो का आर्टिकल-5 कहता है — एक पर हमला सब पर हमला। साइबर में ऐसा कोई करार नहीं। इसलिए इज़राइल अब ‘साइबर-क्वाड’ बना रहा है — अमेरिका, भारत, UAE, जर्मनी के साथ रीयल-टाइम थ्रेट-इंटेल शेयरिंग। 

भारत के लिए सबक: 
- नेशनल क्रिटिकल इंफॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोटेक्शन सेंटर को और पावर। 
- डाटा-एम्बेसी: संवेदनशील डेटा की कॉपी मित्र देशों में, ताकि वाइपर अटैक से पूरा सिस्टम न उड़े। 
- बग-बाउंटी: इज़राइल की तरह व्हाइट-हैट हैकर्स को इनाम, ताकि कमजोरी पहले हम ढूंढ लें। 
- साइबर-लिटरेसी: UPI पिन जितना जरूरी, साइबर-हाइजीन भी उतनी जरूरी। 

9. भविष्य: AI vs AI की जंग
2026 की सबसे बड़ी सच्चाई — अब हैकर भी AI यूज़ कर रहा है, डिफेंडर भी। 
- ऑफेंसिव AI: हर टारगेट के लिए कस्टम फ़िशिंग ईमेल, डीपफेक वॉइस-कॉल “बॉस का ऑर्डर” बनकर। 
- डिफेंसिव AI: बिहेवियर-बेस्ड डिटेक्शन, ‘यह लॉगिन 2 बजे रात को यूक्रेन से क्यों?’ तुरंत ब्लॉक। 

कराडी मानती हैं कि आने वाले 2 साल में 4,800 से 10,000 तक जाना नामुमकिन नहीं। सवाल सिर्फ वॉल्यूम का नहीं, ‘वेलॉसिटी’ का है — हमला मिलीसेकंड में, जवाब भी ऑटोमेटेड चाहिए। 

10. निष्कर्ष: तैयारी ही युद्धविराम है
योसी कराडी का बयान निराशावादी नहीं, यथार्थवादी है। जब दुश्मन 24x7 जाग रहा हो, तो नींद का विकल्प नहीं बचता। 

देशों के लिए मंत्र: डिफेंड, डिटेक्ट, डीटर, डिप्लोमेसी। 
नागरिकों के लिए मंत्र: अपडेट, 2FA, बैकअप, शक। 

क्योंकि इस जंग में फ्रंटलाइन बॉर्डर पर नहीं, आपके ब्राउज़र के एड्रेस-बार में है। और यहां कोई सफेद झंडा नहीं लहराता। 

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World 30 Jun 2026
June 30, 2026

“मेडल-प्रेमी महानायक और विदेशी लॉलीपॉप की अंतरराष्ट्रीय यात्रा”

“मेडल-प्रेमी महानायक और विदेशी लॉलीपॉप की अंतरराष्ट्रीय यात्रा”
 - Friday World 30 Jun 2026
आजकल दुनिया का नक्शा खोलो तो पता चलता है कि हर कोने में एक फैक्ट्री खुल गई है — “सम्मान-निर्माण उद्योग”। काम सिर्फ एक है: जैसे ही कोई नेता विमान से उतरे, तुरंत एक चमचमाता मेडल, एक भारी-भरकम नाम वाला सर्टिफिकेट और पीछे से तालियों की गूंज तैयार। बदले में क्या चाहिए? बस थोड़ी-सी “मैत्री-सहायता”, कुछ अरब-खरब का पैकेज, और एक मुस्कुराती सेल्फी। 

कहानी शुरू होती है एक ऐसे नेता से जिसे तारीफ की भूख ऐसी लगी कि सुबह का नाश्ता भी तालियों से करता है। नींद में भी अगर कोई कह दे “आप महान हैं”, तो करवट बदलकर धन्यवाद दे देता है। दुनिया ने भी इस भूख को भांप लिया। अब हर छोटा-बड़ा देश सोचता है — “क्यों न एक नया अवार्ड बना लें? नाम रख देंगे ‘रक्षक ऑफ द सनराइज क्लाउड’ या ‘शेर-ए-सागर-तट-प्रहरी’। सुनने में इतना भारी कि खुद देने वाला भी दो बार अटक जाए।”

पहला दृश्य: अवार्ड का जन्म
 
किसी द्वीपीय देश के मंत्रालय में शाम 5 बजे मीटिंग चल रही है। विषय: “राजकोष खाली है, क्या करें?” एक बाबू सुझाव देता है, “साहब, एक नया मेडल बना देते हैं। नाम कल ही सोच लेंगे। बस उसे दे देंगे जो मंच पर सबसे पहले फूलमाला पहनता है।” चार दिन में डिजाइन, प्रिंटिंग, स्पेलिंग मिस्टेक सब हो जाता है। सर्टिफिकेट पर ‘रिपब्लिक’ की जगह ‘रिपब्लीक’ छप जाए तो भी चलेगा — भावना समझनी चाहिए। 

नेता जी आते हैं, गले में मेडल पड़ता है, कैमरे क्लिक-क्लिक करते हैं, और उसी शाम “मैत्री-पैकेज” की घोषणा हो जाती है। जनता पूछती है, “ये पैकेज किस लिए?” जवाब आता है, “सांस्कृतिक संबंध मजबूत करने के लिए।” संस्कृति का मतलब: मेडल के बदले मदद। 

दूसरा दृश्य: इतिहास बनाम इंस्टेंट-नूडल सम्मान

पहले के जमाने में सम्मान कमाने पड़ते थे। लोग सालों काम करते, दुनिया देखती, फिर कहीं जाकर कोई विश्वविद्यालय मानद डिग्री देता। अब जमाना इंस्टेंट का है — इंस्टेंट नूडल, इंस्टेंट पेमेंट, इंस्टेंट अवार्ड। आज सुबह अवार्ड का आइडिया, दोपहर तक रिबन, शाम तक समारोह। 

एक पुराने नेता थे, कहते हैं कि कई देशों ने उन्हें सर्वोच्च सम्मान ऑफर किया, पर उन्होंने कहा “रहने दो, देश का काम ज्यादा जरूरी है।” आज के नेता का फॉर्मूला अलग है: “पहले सम्मान लो, फिर देखेंगे काम क्या था।” 

तीसरा दृश्य: मेडल-इकॉनॉमिक्स का नया सिद्धांत

अर्थशास्त्र की किताबों में एक नया चैप्टर जुड़ना चाहिए — “मेडलॉमिक्स”। इसका पहला नियम: जितना भारी नाम, उतना हल्का खर्च। दूसरा नियम: स्पेलिंग गलत हो तो प्रामाणिकता बढ़ जाती है, क्योंकि ‘ऑरिजिनल हैंडमेड’ लगता है। तीसरा नियम: मेडल लेने वाला जितना खुश, देने वाले का बजट उतना टाइट। 

दुनिया हंसती है कि सम्मान अब ‘कैश-ऑन-डिलीवरी’ हो गया है। आप मेडल दीजिए, हम पैकेज देंगे। यूपीआई भी चलेगा। 

चौथा दृश्य: चांदनी चौक वर्सेज अंतरराष्ट्रीय बाजार

अगर मेडल ही पहनने का शौक है तो चांदनी चौक में 150 रुपये किलो के हिसाब से क्विंटल भर मिल जाएंगे। डिजाइन भी आप खुद चुन लो — ‘शेर-ए-हिंद’, ‘ब्रह्मांड-रक्षक’, ‘गैलेक्सी-गौरव’। पर नहीं, स्वदेशी मेडल में वो ‘फील’ कहां जो विदेशी टैग में है? विदेशी टैग पर अगर स्पेलिंग भी गलत हो तो उसे ‘लिमिटेड एडिशन’ कहकर और महंगा बेचा जा सकता है। 

पांचवा दृश्य: जनता की डायरी

उधर जनता अपने घर में हिसाब लगाती है। दूध महंगा, दाल महंगी, स्कूल फीस महंगी। टीवी पर ब्रेकिंग न्यूज: “एक और ऐतिहासिक सम्मान मिला, बदले में मैत्री-पैकेज की घोषणा।” दादाजी रिमोट फेंकते हुए कहते हैं, “बेटा, सम्मान पेट नहीं भरते।” पोता पूछता है, “तो फिर इतने सम्मान क्यों बटोरे जा रहे हैं दादाजी?” दादाजी खांसकर कहते हैं, “ताकि इतिहास में लिखा जा सके कि हमारे समय में मेडल की पैदावार सबसे ज्यादा हुई थी।”

छठा दृश्य: कूटनीति का नया वर्जन 2.0

पहले कूटनीति होती थी — तेल के बदले गेहूं, हथियार के बदले समर्थन। अब कूटनीति 2.0 है — सेल्फी के बदले सब्सिडी, मेडल के बदले मेमोरेंडम। विदेश मंत्रालय की फाइलों में अब दो फोल्डर हैं: 1. ‘दिए गए मेडल’, 2. ‘लिए गए पैकेज’। अधिकारी कन्फ्यूज हैं कि किसे ‘उपलब्धि’ में लिखें। 

सातवां दृश्य: भविष्य की प्लानिंग

खबर है कि मंगल ग्रह पर भी एक ‘इंटरप्लेनेटरी पीस मेडल’ तैयार हो रहा है। शर्त बस इतनी है कि रॉकेट का खर्चा उठाना पड़ेगा। धरती के कुछ देश पहले ही लाइन में लग गए हैं। बोर्ड लगा है: “पहले आओ, पहले पाओ। स्पेशल डिस्काउंट ऑन बल्क सम्मान।”

 इज्जत का शेयर बाजार
किसी ने सच कहा था — इज्जत कमानी पड़ती है, खरीदी नहीं जाती। पर शेयर बाजार में जब सेंटीमेंट से भाव चढ़ते हैं, तो इज्जत भी लिस्टेड हो जाती है। रोज नया आईपीओ — ‘नेशनल प्राइड लिमिटेड’ का। प्रमोटर वही जो मंच पर सबसे ऊंची कूद लगाए। 

तो अगली बार जब आप सुनें कि “ऐतिहासिक सम्मान मिला”, तो समझ जाना कि इतिहास की किताब में एक और स्टीकर चिपक गया है। और स्टीकर के पीछे लिखा है — ‘बैटरी अलग से खरीदें’। बैटरी मतलब? आपका, हमारा, सबका टैक्स। 

इसलिए सम्मान लेना बुरी बात नहीं, पर सम्मान के नाम पर अगर हर चौखट पर कटोरा लेकर खड़े हो जाओ, तो दुनिया ‘मामू’ नहीं, पूरा सर्कस बना देती है। और सर्कस में ताली तो बजती है, पर जोकर की इज्जत नहीं होती। 

सीख: नेता चुनो तो ऐसा चुनो जिसे मेडल की नहीं, मेहनत की भूख हो। वरना दुनिया की फैक्ट्रियां चलती रहेंगी, और हम बिल भरते रहेंगे — ‘सम्मान-सेस’ के नाम पर। 

_नोट: यह व्यंग्य किसी व्यक्ति-विशेष पर नहीं, ‘मेडल-प्रेम’ नामक वैश्विक बीमारी पर है। लक्षण दिखें तो तुरंत अपने विवेक से संपर्क करें। साइड-इफेक्ट्स में देश की जेब हल्की होना शामिल है।_

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 30 Jun 2026
June 30, 2026

ગુજરાતની EV પોલિસી: સબસિડીના વાયદા વચ્ચે અધૂરી સુવિધાનો અવરોધ, વેચાણમાં મંદીનો માહોલ

ગુજરાતની EV પોલિસી: સબસિડીના વાયદા વચ્ચે અધૂરી સુવિધાનો અવરોધ, વેચાણમાં મંદીનો માહોલ
-Friday World 30 Jun 2026
ગુજરાત સરકારે પર્યાવરણ બચાવવા અને ગ્રીન મોબિલિટીને પ્રોત્સાહન આપવા માટે જે ઉત્સાહથી ઈલેક્ટ્રિક વ્હીકલ પોલિસી જાહેર કરી હતી, તેનો અમલ જમીની સ્તરે ખાડે ગયો છે. મોટા વાયદાઓ, સબસિડીના આકર્ષક આંકડા અને ગ્રીન ગુજરાતના સપના વચ્ચે વાસ્તવિકતા કંઈક અલગ જ ચિત્ર રજૂ કરે છે. 2024 પછી ટુ-વ્હીલર પરની સીધી રોકડ સહાય બંધ થતાં અને ચાર્જિંગ ઈન્ફ્રાસ્ટ્રક્ચરની ગંભીર અછતને કારણે રાજ્યમાં EV વેચાણનો ગ્રાફ સતત નીચે જઈ રહ્યો છે. 

પોલિસીની જાહેરાત અને શરૂઆતનો જોશ

2021માં ગુજરાત સરકારે મહત્વાકાંક્ષી EV પોલિસી લોન્ચ કરી. તેનો મુખ્ય ઉદ્દેશ 2025 સુધીમાં રાજ્યના રસ્તાઓ પર 2 લાખ ઇલેક્ટ્રિક વાહનો લાવવાનો હતો. આ માટે સરકારે ગ્રાહકોને સીધી સબસિડી આપવાની જાહેરાત કરી. ટુ-વ્હીલર પર પ્રતિ કિલોવોટ કલાકે 10,000 રૂપિયા લેખે વધુમાં વધુ 20,000 રૂપિયા અને ફોર-વ્હીલર પર 1.5 લાખ રૂપિયા સુધીની સહાયની વાત થઈ. આ ઉપરાંત રોડ ટેક્સ અને રજિસ્ટ્રેશન ફીમાં સંપૂર્ણ માફીની પણ જોગવાઈ કરાઈ. 

શરૂઆતના બે વર્ષમાં આ પોલિસીની અસર પણ દેખાઈ. પેટ્રોલ-ડીઝલના વધતા ભાવ અને સબસિડીના લાભને કારણે લોકોએ EV તરફ વળવાનું શરૂ કર્યું. ખાસ કરીને અમદાવાદ, સુરત, વડોદરા અને રાજકોટ જેવા શહેરોમાં ટુ-વ્હીલર EVનું વેચાણ નોંધપાત્ર રીતે વધ્યું. કોલેજ જતા વિદ્યાર્થીઓથી લઈને ડિલિવરી બોય સુધી, સૌ કોઈને EV સસ્તો અને સારો વિકલ્પ લાગ્યો.

2024નું વળાંકબિંદુ: સબસિડી બંધ, વેચાણ ઠપ્પ

પણ આ તેજી લાંબો સમય ટકી ન શકી. 2024ની શરૂઆતમાં જ રાજ્ય સરકારે ટુ-વ્હીલર EV પર આપવામાં આવતી સીધી રોકડ સબસિડી બંધ કરવાનો નિર્ણય લીધો. સરકારની દલીલ હતી કે હવે બજાર સ્થિર થઈ ગયું છે અને EV કંપનીઓએ પોતાના દમ પર સ્પર્ધા કરવી જોઈએ. 

આ નિર્ણયની સીધી અસર વેચાણ પર પડી. ડીલરોના કહેવા મુજબ, સબસિડી બંધ થયા બાદ ટુ-વ્હીલર EVના ભાવમાં 15,000 થી 20,000 રૂપિયાનો સીધો વધારો થયો. જે ગ્રાહક 1 લાખમાં મળતું સ્કૂટર 80,000 માં લેતો હતો, તેને હવે પૂરી કિંમત ચૂકવવી પડે છે. પરિણામે મધ્યમવર્ગીય પરિવારો ફરી પેટ્રોલ સ્કૂટર તરફ વળ્યા. 

FADA એટલે કે ફેડરેશન ઓફ ઓટોમોબાઈલ ડીલર્સ એસોસિએશનના ગુજરાત ચેપ્ટરના આંકડા પણ આ વાતની સાક્ષી પૂરે છે. 2023ની સરખામણીમાં 2024 અને 2025ના પહેલા છ મહિનામાં ટુ-વ્હીલર EVના વેચાણમાં લગભગ 40 ટકાનો ઘટાડો નોંધાયો છે. ફોર-વ્હીલર સેગમેન્ટમાં પણ વૃદ્ધિનો દર ખૂબ ધીમો પડી ગયો છે.

સૌથી મોટો પડકાર: ચાર્જિંગ સ્ટેશનની અછત

સબસિડી ઉપરાંત બીજો સૌથી મોટો અવરોધ છે ચાર્જિંગ ઈન્ફ્રાસ્ટ્રક્ચર. સરકારે પોલિસીમાં દર 25 કિલોમીટરે એક ચાર્જિંગ સ્ટેશન ઊભું કરવાનો વાયદો કર્યો હતો. હકીકતમાં સ્થિતિ તદ્દન જુદી છે. 

હાલમાં ગુજરાતના મોટાભાગના નેશનલ અને સ્ટેટ હાઈવે પર ચાર્જિંગ સ્ટેશનની ભારે અછત છે. અમદાવાદથી રાજકોટ, વડોદરાથી સુરત કે ભુજથી દ્વારકા જેવા રૂટ પર ગણ્યા ગાંઠ્યા સ્ટેશન છે. જે છે તેમાંથી પણ ઘણા બંધ હાલતમાં અથવા ટેકનિકલ ખામી સાથે જોવા મળે છે. 

આ કારણે લોકોમાં 'રેન્જ એન્ઝાયટી' એટલે કે ચાર્જ પૂરો થઈ જવાનો ડર ઘર કરી ગયો છે. શહેરમાં રોજ 40 થી 50 કિલોમીટર ચલાવનારા માટે EV ચાલે, પણ લાંબી મુસાફરી કરનારા લોકો હજુ પણ પેટ્રોલ કે ડીઝલ વાહનને જ પ્રાધાન્ય આપે છે. વેપારીઓ, ટેક્સી ચાલકો અને વારંવાર પ્રવાસ કરતા લોકો માટે EV હજુ વિશ્વાસપાત્ર વિકલ્પ બન્યું નથી.

ડીલરો અને ગ્રાહકોની વ્યથા

અમદાવાદના એક EV ડીલર રમેશભાઈ કહે છે કે અમે ગ્રાહકને ગાડી તો વેચી દઈએ, પણ પછી તે રોજ ફોન કરે કે સાહેબ, મારી સોસાયટીમાં ચાર્જિંગ પોઈન્ટ નથી. હાઈવે પર સ્ટેશન નથી. રાત્રે લાઈટ જાય તો શું કરવું. અમારી પાસે તેના કોઈ જવાબ નથી.

બીજી તરફ રાજકોટના રહેવાસી મીત શાહે 2023માં EV કાર લીધી હતી. તે કહે છે કે મેં પર્યાવરણ બચાવવા અને પેટ્રોલના ખર્ચથી બચવા ગાડી લીધી. સબસિડી પણ મળી. પણ હવે સોમનાથ જવું હોય તો 10 વાર વિચારવું પડે છે. રસ્તામાં ચાર્જિંગ મળશે કે નહીં તેની ગેરંટી નથી. હોટલવાળા પણ રાત્રે ચાર્જ કરવા દેતા નથી.

સરકારનો પક્ષ અને ભવિષ્યની દિશા

ઊર્જા વિભાગના એક અધિકારીના જણાવ્યા મુજબ, સરકાર ચાર્જિંગ ઈન્ફ્રાસ્ટ્રક્ચર પર કામ કરી રહી છે. GUVNL અને ખાનગી કંપનીઓ સાથે મળીને નવા સ્ટેશનો ઊભા કરવાની યોજના છે. ટુ-વ્હીલર સબસિડી બંધ કરવાનો નિર્ણય કેન્દ્રની FAME-2 પોલિસી સાથે સુસંગત છે. અમે હવે બેટરી સ્વેપિંગ અને ફાસ્ટ ચાર્જિંગ નેટવર્ક પર ફોકસ કરી રહ્યા છીએ.

જો કે નિષ્ણાતો માને છે કે માત્ર જાહેરાતોથી કામ નહીં ચાલે. જ્યાં સુધી હાઈવે પર વિશ્વસનીય અને ઝડપી ચાર્જિંગ નેટવર્ક નહીં બને ત્યાં સુધી લોકોનો ભરોસો જીતી શકાશે નહીં. સાથે સાથે સોસાયટીઓ અને કોમર્શિયલ બિલ્ડિંગમાં ચાર્જિંગ પોઈન્ટ ફરજિયાત કરવાની નીતિ પણ સખત રીતે લાગુ કરવી પડશે.

રસ્તો હજુ કપરો છે

ગુજરાત હંમેશા નવી ટેકનોલોજી અપનાવવામાં અગ્રેસર રહ્યું છે. સોલાર રૂફટોપમાં રાજ્ય દેશમાં નંબર વન છે. EV ક્ષેત્રે પણ ગુજરાત લીડ લઈ શકે તેમ હતું. પણ નીતિ અને અમલીકરણ વચ્ચેના ગેપને કારણે આ તક સરકી રહી છે. 

જો સરકાર ખરેખર ગ્રીન ગુજરાત બનાવવા માંગતી હોય તો માત્ર ભાષણોથી કામ નહીં ચાલે. સબસિડીનો લાભ સીધો ગ્રાહક સુધી પહોંચાડવો પડશે, ચાર્જિંગ નેટવર્ક મજબૂત કરવું પડશે અને લોકોમાં વિશ્વાસ પેદા કરવો પડશે. નહીં તો 'ઇવી પોલિસી' માત્ર કાગળ પર રહી જશે અને પ્રદૂષણની સમસ્યા એમ જ વધતી રહેશે. 

ગ્રાહક આજે સવાલ પૂછી રહ્યો છે કે અમે EV ખરીદીને પર્યાવરણ બચાવવા તૈયાર છીએ, પણ સરકાર અમને રસ્તામાં અટવાઈ ન જવાની ગેરંટી આપવા તૈયાર છે ખરી. આ સવાલનો જવાબ જ ગુજરાતની EV પોલિસીનું ભવિષ્ય નક્કી કરશે.

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World 30 Jun 2026
June 30, 2026

ભાવનગરમાં ઉકળતો ચરૂ: ડોન ચોક-ગીતા ચોકના રહીશોની રેલી, કલેક્ટરને આવેદન - 'વિધવાઓના ઉત્પીડનથી માંડીને ઘર વેચાણ સુધીના ગંભીર આક્ષેપો'

ભાવનગરમાં ઉકળતો ચરૂ: ડોન ચોક-ગીતા ચોકના રહીશોની રેલી, કલેક્ટરને આવેદન - 'વિધવાઓના ઉત્પીડનથી માંડીને ઘર વેચાણ સુધીના ગંભીર આક્ષેપો'
-Friday World 30 Jun 2026
ભાવનગર શહેરના હાર્દસમા ગીતા ચોક, ડોન ચોક અને ક્રિસેન્ટ સર્કલ વિસ્તારમાં છેલ્લા કેટલાક સમયથી ચાલી રહેલા સામાજિક તણાવે મંગળવારે જાહેર સ્વરૂપ ધારણ કર્યું. સ્થાનિક રહીશોએ એકત્ર થઈને વિશાળ રેલી કાઢી અને જિલ્લા કલેક્ટર કચેરીએ પહોંચી આવેદનપત્ર સુપરત કર્યું. રહીશોનો આક્ષેપ છે કે વિસ્તારમાં કેટલીક વિધવા મહિલાઓ દ્વારા સતત માનસિક ઉત્પીડન કરવામાં આવી રહ્યું છે, તેમજ અશાંતિ ફેલાવવાના ઈરાદે અન્ય સમુદાયના લોકોને મકાનો વેચવામાં આવી રહ્યા છે. વારંવાર માંસ અને નોન-વેજ વેસ્ટ ફેંકવાની ઘટનાઓથી લોકોની ધાર્મિક લાગણી દુભાઈ રહી હોવાનો પણ દાવો કરવામાં આવ્યો છે.

રેલી કેમ કાઢવી પડી? રહીશોની વ્યથા

મંગળવારે સવારે 11 વાગ્યે ગીતા ચોકથી નીકળેલી રેલીમાં મોટી સંખ્યામાં મહિલાઓ, વૃદ્ધો અને યુવાનો જોડાયા હતા. 'અમને ન્યાય આપો', 'અમારી સંસ્કૃતિ બચાવો' જેવા સૂત્રોચ્ચાર સાથે આ રેલી કલેક્ટર કચેરીએ પહોંચી હતી. આવેદનપત્ર આપનાર આગેવાન રમેશભાઈ મકવાણાએ જણાવ્યું કે, "છેલ્લા 8 મહિનાથી અમે તંત્રને રજૂઆત કરીએ છીએ, પણ કોઈ નક્કર કાર્યવાહી થતી નથી. અમારા વિસ્તારની શાંતિ ડહોળવાનો વ્યવસ્થિત પ્રયાસ થઈ રહ્યો છે."

રહીશોના મુખ્ય આક્ષેપો આ મુજબ છે:

1. વિધવાઓ દ્વારા ઉત્પીડન: સ્થાનિકોનો આરોપ છે કે વિસ્તારમાં રહેતી કેટલીક વિધવા મહિલાઓ દ્વારા જાણીજોઈને ઝઘડા ઉભા કરવામાં આવે છે. નાની-નાની બાબતોમાં પોલીસ ફરિયાદ કરવાની ધમકી આપીને માનસિક ત્રાસ આપવામાં આવે છે. ઘરની બહાર કચરો ફેંકવો, બાળકોને ધમકાવવા જેવી ઘટનાઓ રોજની થઈ ગઈ છે.

2. મકાન વેચાણનું કાવતરું: આવેદનપત્રમાં ગંભીર આક્ષેપ કરાયો છે કે વિસ્તારની સામાજિક રચના બદલવાના ઈરાદે કેટલાક લોકો અન્ય સમુદાયના વ્યક્તિઓને મકાનો વેચી રહ્યા છે. રહીશોનું કહેવું છે કે 'અશાંત ધારા' હેઠળ આવતા આ વિસ્તારમાં નિયમોનું ઉલ્લંઘન કરીને સોદા થઈ રહ્યા છે, જેથી હાલના રહીશોને ડરાવીને વિસ્તાર ખાલી કરાવી શકાય.

3. ધાર્મિક લાગણી દુભાવવાનો પ્રયાસ: છેલ્લા ત્રણ મહિનામાં 5 થી વધુ વખત ગીતા મંદિરની આસપાસ અને સોસાયટીઓના ગેટ પાસે માંસના ટુકડા અને નોન-વેજ વેસ્ટ ફેંકાયેલું મળી આવ્યું છે. શ્રાવણ મહિના દરમિયાન બનેલી આવી ઘટનાઓથી લોકોમાં ભારે આક્રોશ છે. રહીશો માને છે કે આ કૃત્ય જાણીજોઈને ધાર્મિક વાતાવરણ બગાડવા માટે કરવામાં આવી રહ્યું છે.

'અશાંત ધારા' શું છે અને વિવાદ કેમ?

ભાવનગરના ડોન ચોક, ગીતા ચોક, ક્રિસેન્ટ સર્કલ સહિતના ઘણા વિસ્તારો 'ગુજરાત પ્રોહિબિશન ઓફ ટ્રાન્સફર ઓફ ઈમોવેબલ પ્રોપર્ટી એન્ડ પ્રોવિઝન ફોર પ્રોટેક્શન ઓફ ટેનન્ટ્સ ફ્રોમ એવિક્શન ફ્રોમ પ્રિમાઈસીસ ઈન ડિસ્ટર્બ્ડ એરિયાઝ એક્ટ, 1991' એટલે કે 'અશાંત ધારા' હેઠળ આવે છે.

આ કાયદા મુજબ, અશાંત જાહેર થયેલા વિસ્તારમાં એક સમુદાયની વ્યક્તિ બીજા સમુદાયની વ્યક્તિને મિલકત વેચે તો તેના માટે કલેક્ટરની પૂર્વ મંજૂરી લેવી ફરજિયાત છે. કલેક્ટરે એ ખાતરી કરવાની હોય છે કે વેચાણ સ્વૈચ્છિક છે અને કોઈ દબાણ કે ડરના કારણે નથી થયું.

રહીશોનો આક્ષેપ છે કે આ કાયદાના છીંડા શોધીને 'પાવર ઓફ એટર્ની' કે અન્ય રીતે મિલકતોના સોદા પાડવામાં આવી રહ્યા છે. એક રહીશ કમુબેન પરમારે કહ્યું, "અમને ડર છે કે થોડા વર્ષોમાં અમારે અમારા પૂર્વજોના ઘર છોડીને જવું પડશે. રાત્રે અજાણ્યા લોકોની અવરજવર વધી ગઈ છે."

વહીવટી તંત્રનું વલણ શું છે?

રેલી બાદ કલેક્ટર આર.કે. મહેતાએ આવેદનપત્ર સ્વીકાર્યું અને તાત્કાલિક તપાસના આદેશ આપ્યા. કલેક્ટરે મીડિયા સાથેની વાતચીતમાં જણાવ્યું કે, "રહીશોની ફરિયાદ ગંભીર છે. મેં સીટી પ્રાંત અધિકારી અને પોલીસને સંયુક્ત તપાસ સોંપી છે. અશાંત ધારાના ભંગ બદલ થયેલા દરેક સોદાની તપાસ થશે. જો કોઈ દોષિત જણાશે તો કડક કાર્યવાહી કરાશે."

ભાવનગર શહેર પીઆઈ એચ.એમ. ગોહિલે કહ્યું કે, "માંસ ફેંકવાની ઘટનાઓ સંદર્ભે અમે CCTV ફૂટેજ મેળવી રહ્યા છીએ. વિસ્તારમાં પેટ્રોલિંગ પણ વધારી દેવાયું છે. વિધવાઓના ઉત્પીડનના આક્ષેપ અંગે બંને પક્ષોને બોલાવીને સમાધાન માટે પ્રયાસ કરીશું."

સામાજિક આગેવાનો શું કહે છે?

આ મામલે શહેરના સામાજિક આગેવાનો પણ મેદાને આવ્યા છે. ભાવનગર નાગરિક સમિતિના પ્રમુખ ડો. કિરીટ ભટ્ટ કહે છે, "કોઈપણ વિસ્તારની ડેમોગ્રાફી બળજબરીથી બદલવી જોઈએ નહીં. તંત્રએ 'અશાંત ધારા'નો કડક અમલ કરાવવો જોઈએ. સાથે-સાથે બંને પક્ષોએ પણ સમાજમાં સમરસતા જળવાય તે માટે પ્રયાસ કરવા જોઈએ."

બીજી તરફ, માનવ અધિકાર સાથે સંકળાયેલા એડવોકેટ શબનમ બાનુનું કહેવું છે કે, "ફક્ત વિધવા હોવાના કારણે કોઈ મહિલા પર આક્ષેપ કરવો યોગ્ય નથી. જો કોઈ ગુનો કરતું હોય તો કાયદેસર કાર્યવાહી થવી જોઈએ, પણ આખા સમુદાયને નિશાન ન બનાવી શકાય. મિલકત વેચાણનો અધિકાર બંધારણે દરેક નાગરિકને આપ્યો છે, બસ તે કાયદેસર હોવો જોઈએ."

શહેરનો ઈતિહાસ અને વર્તમાન

ભાવનગર હંમેશા સંસ્કારનગરી અને શાંત શહેર તરીકે ઓળખાયું છે. ડોન ચોક અને ગીતા ચોક જેવા વિસ્તારો દાયકાઓથી મિશ્ર વસ્તી ધરાવતા આવ્યા છે. દિવાળીની ઉજવણી સાથે ઈદની સેવૈયાં પણ અહીં એકસાથે વહેંચાતી રહી છે. 

પરંતુ છેલ્લા કેટલાક વર્ષોમાં પ્રોપર્ટીના ભાવ આસમાને પહોંચતા અને રાજકીય ધ્રુવીકરણ વધતા આવી ફરિયાદો સામે આવી રહી છે. 2019 માં પણ કુંભારવાડા વિસ્તારમાં આવા જ મુદ્દે વિવાદ થયો હતો. 

હવે આગળ શું?
કલેક્ટરે 15 દિવસમાં તપાસ રિપોર્ટ માંગ્યો છે. જો તપાસમાં 'અશાંત ધારા'નો ભંગ સાબિત થશે તો થયેલા સોદા રદ પણ થઈ શકે છે અને વેચનાર-ખરીદનાર બંને સામે ફોજદારી કાર્યવાહી થઈ શકે છે. 

રહીશોએ ચીમકી આપી છે કે જો 15 દિવસમાં નક્કર પગલાં નહીં લેવાય તો ગાંધી ચિંધ્યા માર્ગે આંદોલનને વધુ ઉગ્ર બનાવવામાં આવશે. હાલ તો ડોન ચોક અને ગીતા ચોક વિસ્તારમાં પોલીસ બંદોબસ્ત ગોઠવી દેવાયો છે અને પરિસ્થિતિ તંગ પરંતુ કાબૂમાં છે.

સૌની નજર હવે તંત્રની તપાસ અને તેના પરિણામ પર છે. કારણ કે આ માત્ર ભાવનગરનો નહીં, પરંતુ ગુજરાતના ઘણા શહેરોમાં ઉભા થઈ રહેલા એક મોટા સામાજિક પ્રશ્નનો કિસ્સો છે. કાયદાનું શાસન અને સામાજિક સમરસતા વચ્ચે સમતુલન કેવી રીતે જળવાય છે તે આ કેસ પરથી નક્કી થશે.


_નોંધ: આ આર્ટિકલ રહીશોના આવેદનપત્ર અને જાહેરમાં ઉપલબ્ધ માહિતીના આધારે તૈયાર કરાયો છે. આમાં કરવામાં આવેલા આક્ષેપોની પુષ્ટિ થઈ નથી અને મામલો તપાસ હેઠળ છે. અમારો ઉદ્દેશ્ય કોઈ સમુદાયની લાગણી દુભાવવાનો નથી, ફક્ત ઘટનાની જાણકારી આપવાનો છે._

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World 30 Jun 2026
June 30, 2026

बेलफास्ट में, डेब्यू पर हारा कप्तान: श्रेयस अय्यर के नाम जुड़ा अनचाहा रिकॉर्ड, आयरलैंड ने पहली बार भारत को क्लिन स्विप

बेलफास्ट में, डेब्यू पर हारा कप्तान: श्रेयस अय्यर के नाम जुड़ा अनचाहा रिकॉर्ड, आयरलैंड ने पहली बार भारत को क्लिन स्विप
-Friday World 30 Jun 2026
क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है. 26 जून 2026 की शाम बेलफास्ट के स्टोरमोंट क्रिकेट ग्राउंड ने इस कहावत को फिर सच कर दिखाया. टी20 वर्ल्ड चैंपियन भारत को आयरलैंड ने 34 रन से हराकर सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि 16 साल पुराना इतिहास पलट दिया. इस हार के सबसे बड़े किरदार बने भारत के नए टी20 कप्तान श्रेयस अय्यर. कप्तानी की पहली ही सीढ़ी पर लड़खड़ाते हुए अय्यर उन चुनिंदा भारतीय कप्तानों की लिस्ट में शामिल हो गए, जिन्हें डेब्यू मैच में ही हार का स्वाद चखना पड़ा.

1. वो काली शाम: जब बेलफास्ट में बिखर गया भारत
26 जून 2026. भारत-आयरलैंड दो मैच की टी20 सीरीज का पहला मुकाबला. बीसीसीआई ने इस दौरे से ठीक पहले श्रेयस अय्यर को टी20 का नया कप्तान बनाया था. हार्दिक पंड्या को आराम दिया गया था और सूर्यकुमार यादव चोटिल थे. अय्यर के पास सुनहरा मौका था कि वे अपनी कप्तानी का आगाज जीत से करें.

आयरलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 178/6 का मजबूत स्कोर खड़ा किया. कप्तान लोरकन टकर ने 65 रन की कप्तानी पारी खेली. जवाब में भारतीय बैटिंग पूरी तरह फ्लॉप रही. तिलक वर्मा के 74 रन को छोड़ दें तो कोई भी बल्लेबाज 20 का आंकड़ा नहीं छू पाया. पूरी टीम 19.2 ओवर में 144 रन पर सिमट गई. आयरलैंड ने 34 रन से मैच जीतकर तहलका मचा दिया.

2 दिन बाद दूसरे टी20 में भी कहानी नहीं बदली. आयरलैंड ने वो मैच भी 5 विकेट से जीतकर सीरीज 2-0 से अपने नाम कर ली. ये 2023 के बाद भारत की पहली टी20 सीरीज हार थी.

2. अनचाहा क्लब: डेब्यू पर हारने वाले 5वें भारतीय कप्तान बने अय्यर
श्रेयस अय्यर के लिए ये हार दोहरे झटके जैसी थी. पहला, वे आयरलैंड से कोई भी फॉर्मेट हारने वाले भारत के पहले कप्तान बने. दूसरा, वे टी20 इंटरनेशनल में कप्तानी डेब्यू पर हारने वाले भारत के 5वें कप्तान बन गए.

भारत के लिए टी20 में अब तक 15 खिलाड़ियों ने कप्तानी की है. इनमें से 10 ने अपना पहला मैच जीता था. लेकिन 5 कप्तान ऐसे हैं जिनका डेब्यू हार के साथ शुरू हुआ:
क्र. कप्तान डेब्यू मैच साल नतीजा
1 वीरेंद्र सहवाग vs दक्षिण अफ्रीका, जोहान्सबर्ग 2006 6 विकेट से हार
2 विराट कोहली vs इंग्लैंड, कानपुर 2017 7 विकेट से हार
3 ऋषभ पंत vs दक्षिण अफ्रीका, दिल्ली 2022 7 विकेट से हार
4 शुभमन गिल vs ज़िम्बाब्वे, हरारे 2024 13 रन से हार
5 श्रेयस अय्यर vs आयरलैंड, बेलफास्ट 2026 34 रन से हार
यानी अय्यर चौथे नहीं, पांचवें नंबर पर हैं. वीरेंद्र सहवाग इस लिस्ट में सबसे पहले थे, जिनका नाम अक्सर लोग भूल जाते हैं.

3. क्यों खास है आयरलैंड की ये जीत?
आयरलैंड के लिए ये जीत ऐतिहासिक से भी बड़ी है. 2009 में दोनों देशों के बीच पहला टी20 खेला गया था. तब से जून 2026 तक भारत और आयरलैंड 8 बार टी20 में भिड़े और हर बार भारत जीता. वनडे और टेस्ट में भी आयरलैंड कभी भारत को नहीं हरा पाया था.

इस सीरीज से पहले भारत का टी20 में आयरलैंड के खिलाफ रिकॉर्ड 8-0 था. लेकिन बेलफास्ट में 48 घंटे के अंदर आयरलैंड ने न सिर्फ खाता खोला, बल्कि सीरीज भी 2-0 से जीत ली. ये आयरलैंड की भारत पर किसी भी फॉर्मेट में पहली जीत थी.

लोरकन टकर की कप्तानी, मैट होलार्ड की घातक गेंदबाजी - 2 मैच में 6 विकेट - और जाई मूंद्रा को मिले प्लेयर ऑफ द सीरीज अवॉर्ड ने इस जीत को और यादगार बना दिया.

4. कप्तान अय्यर के लिए आगे की राह मुश्किल
श्रेयस अय्यर को कप्तान बनाने का फैसला चौंकाने वाला था. 2024-25 में केकेआर को IPL जिताने के बाद उनकी दावेदारी मजबूत हुई थी. बीसीसीआई ने 2026 टी20 वर्ल्ड कप को ध्यान में रखकर उन्हें आजमाया.

लेकिन बेलफास्ट की हार ने उनकी राह मुश्किल कर दी है. टीम सिलेक्शन से लेकर मैदान पर फैसलों तक, हर चीज पर सवाल उठ रहे हैं. वरुण चक्रवर्ती और नीतीश कुमार रेड्डी चोट के कारण सीरीज से बाहर हो गए थे. पर अय्यर की कप्तानी में जोश की कमी साफ दिखी.

पूर्व क्रिकेटर आकाश चोपड़ा ने कहा, "डेब्यू पर हार कोई अपराध नहीं. धोनी भी 2007 में स्कॉटलैंड के खिलाफ पहला टी20 बारिश में धुलने के बाद दूसरा मैच पाकिस्तान से बॉल आउट में हारे थे. अय्यर को वक्त देना होगा."

5. क्या कहता है इतिहास: डेब्यू पर हार के बाद चमके सितारे
डेब्यू पर हार का मतलब करियर खत्म नहीं होता. विराट कोहली 2017 में पहला टी20 हारने के बाद भारत के सबसे सफल टी20 कप्तान बने. 50 मैच में 30 जीत. सहवाग ने सिर्फ 1 टी20 में कप्तानी की. पंत ने 5 में से 2 जीते. गिल ने ज़िम्बाब्वे में 4-1 से सीरीज जीती.

अय्यर के पास भी वापसी का मौका है. जुलाई 2026 में भारत को इंग्लैंड में 5 टी20 खेलने हैं. वहां अच्छा प्रदर्शन करके वे इस "अनचाहे रिकॉर्ड" को पीछे छोड़ सकते हैं.

6. बेलफास्ट: भारत के लिए नया ‘पेन’ पॉइंट?
भारत 2007 के बाद पहली बार बेलफास्ट में खेला. 2018, 2022, 2023 में सारे मैच मलाहाइड, डबलिन में हुए थे और भारत सब जीता. लेकिन स्टोरमोंट ग्राउंड भारत के लिए अनलकी साबित हुआ.

आयरिश बोर्ड ने मार्च 2026 में ही ऐलान कर दिया था कि दोनों टी20 बेलफास्ट में होंगे. ठंडी हवाएं, स्लो पिच और ड्यूक बॉल - भारतीय टीम हालात को पढ़ ही नहीं पाई.

: हार से सबक लेगा भारत?
क्रिकेट में एक हार से कुछ तय नहीं होता. 2007 वर्ल्ड कप में बांग्लादेश से हारकर बाहर होने वाली टीम इंडिया उसी साल टी20 वर्ल्ड कप जीत गई थी. अय्यर के पास टैलेंट है. आईपीएल में उन्होंने खुद को साबित किया है.

लेकिन ये हार याद दिलाती है कि इंटरनेशनल क्रिकेट में कोई भी टीम कमजोर नहीं. आयरलैंड ने बता दिया कि 2026 टी20 वर्ल्ड कप में उलटफेर के लिए तैयार रहना होगा.

श्रेयस अय्यर के लिए ये "अनचाहा रिकॉर्ड" एक सबक है. अब देखना होगा कि वे इस सबक से सीखकर ‘वांटेड’ लिस्ट में आते हैं या नहीं. फिलहाल तो बेलफास्ट की वो शाम भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे बड़े उलटफेरों में दर्ज हो चुकी है.

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World 30 Jun 2026
June 30, 2026

ગાંધીનગરમાં સરકારી પદની લાલચે રચાયું લોહિયાળ કાવતરું: રૂ. 1.27 કરોડના વિવાદમાં જીમ બહાર તલવારો ઉછળી, બે યુવક ICU માં

ગાંધીનગરમાં સરકારી પદની લાલચે રચાયું લોહિયાળ કાવતરું: રૂ. 1.27 કરોડના વિવાદમાં જીમ બહાર તલવારો ઉછળી, બે યુવક ICU માં
-Friday World 30 Jun 2026
ગાંધીનગરના પોશ ગણાતા કુડાસણ વિસ્તારમાં સોમવારે મોડી રાત્રે બનેલી ગેંગવોરની ઘટનાએ સમગ્ર ગુજરાતને હચમચાવી દીધું છે. 'આરહા ફિટનેસ જીમ' બહાર થયેલો આ હુમલો કોઈ સામાન્ય ઝઘડો નહીં, પરંતુ સરકારી પદ અપાવવાના નામે આચરાયેલા કરોડોના કૌભાંડનો ખૂની અંજામ હતો. રાજસ્થાન ટુરિઝમ ડેવલપમેન્ટ કોર્પોરેશનમાં ચેરમેન પદ અપાવવાની લાલચ આપીને 1.27 કરોડ રૂપિયા પડાવી લીધા બાદ, પૈસા પાછા ન આપવા પડે તે માટે પૂર્વ આયોજિત કાવતરું રચીને તીક્ષ્ણ હથિયારોથી હુમલો કરવામાં આવ્યો.

જીમ બહાર ખેલાયો ખૂની ખેલ

સોમવારે રાત્રે લગભગ 11:30 વાગ્યાનો સમય. કુડાસણ લેન્ડમાર્ક મોલ પાસે આવેલા 'આરહા ફિટનેસ જીમ'માં રોજની જેમ અવર-જવર ચાલુ હતી. ત્યારે અચાનક 10 થી 12 શખ્સોનું ટોળું તલવાર, છરી અને ધારિયા જેવા ઘાતક હથિયારો સાથે ધસી આવ્યું. "આજે જ હિસાબ પૂરો કરી દઈએ"ની બૂમો પાડીને ટોળાએ જીમ બહાર ઉભેલા ભરતસિંહ ચંદાવત અને ઉત્સવ પટેલ પર તૂટી પડ્યું.

પ્રત્યક્ષદર્શીઓના જણાવ્યા મુજબ, હુમલો એટલો ભયાનક હતો કે આસપાસના લોકો પણ મદદ માટે આગળ આવવાની હિંમત ન કરી શક્યા. મુખ્ય આરોપી મહેન્દ્રસિંહ રાઠોડે છરી વડે ભરતસિંહના બંને હાથના કાંડા પર વાર કર્યા, જ્યારે તેના પુત્ર અભિમન્યુસિંહે પીઠમાં છરી હુલાવી દીધી. ભરતસિંહ લોહીલુહાણ થઈને ઢળી પડ્યા. મિત્રને બચાવવા વચ્ચે પડેલા ઉત્સવ પટેલને પણ પેટ અને હાથ-પગ પર અનેક ઘા ઝીંકી દેવાયા. 

હુમલાખોરોની ક્રૂરતા અહીં જ ન અટકી. ટોળામાં સામેલ અન્ય શખ્સોએ લાકડીઓ અને ધોકા વડે ઉત્સવની વોક્સવેગન કારના કાચ તોડી નાખ્યા અને ગાડીને ભારે નુકસાન પહોંચાડ્યું. સમગ્ર વિસ્તારમાં દહેશતનો માહોલ ફેલાઈ ગયો હતો. સ્થાનિકોએ તાત્કાલિક 100 નંબર પર કોલ કરીને પોલીસ અને 108 એમ્બ્યુલન્સને જાણ કરી. પોલીસના સાયરનનો અવાજ સાંભળીને હુમલાખોરો "જાનથી મારી નાખીશું"ની ધમકી આપીને ફરાર થઈ ગયા.

કૌભાંડની શરૂઆત: GACL થી RTDC સુધીની સફર

આ સમગ્ર ઘટનાના મૂળ એપ્રિલ 2025 માં નંખાયા હતા. ઇન્ફોસિટી પોલીસમાં નોંધાયેલી ફરિયાદ મુજબ, મુખ્ય આરોપી મહેન્દ્રસિંહ ખેમચંદ રાઠોડે સૌપ્રથમ ફરિયાદી ઉત્સવ રોહિતકુમાર પટેલના પિતાને વિશ્વાસમાં લીધા હતા. મહેન્દ્રસિંહે પોતે ગુજરાત આલ્કલીઝ એન્ડ કેમિકલ્સ લિમિટેડ GACL માં ઉચ્ચ સંપર્કો ધરાવતો હોવાનો દાવો કરીને ડીલરશીપ અપાવવાના નામે 15 લાખ રૂપિયા પડાવ્યા હતા.

ડીલરશીપનું કામ ન થતાં મહેન્દ્રસિંહે નવો દાવ રમ્યો. તેણે રાજસ્થાન સરકારમાં પોતાની "ઉપર સુધી ઓળખાણ" હોવાનું કહીને ઉત્સવના પિતાના મિત્ર શિવુજીલાલ ચૌધરીને રાજસ્થાન ટુરિઝમ ડેવલપમેન્ટ કોર્પોરેશન RTDC માં ચેરમેન પદ અપાવવાની લાલચ આપી. આ મોટા પદ માટે એડવાન્સ પેટે 50 લાખની માંગણી કરવામાં આવી. જાન્યુઆરી 2026 માં આ રકમ ચૂકવી દેવામાં આવી. આ રીતે અલગ-અલગ બહાને કટકે-કટકે કુલ 1 કરોડ 10 લાખ રૂપિયા પડાવી લેવામાં આવ્યા. 

મહિનાઓ વીતવા છતાં ન તો ચેરમેન પદ મળ્યું કે ન તો GACL ની ડીલરશીપ. ઉલટાનું મહેન્દ્રસિંહ ફોન ઉપાડવાનું બંધ કરી દીધું. પૈસા પાછા માંગવા પર ધમકીઓ આપવાનું શરૂ કર્યું. બંને પક્ષો વચ્ચે અગાઉ કોબા સર્કલ પાસે પણ ઉગ્ર બોલાચાલી થઈ ચૂકી હતી.

સમાધાનની મીટિંગ બની જીવલેણ

આ નાણાકીય વિવાદનો કાયમી નિકાલ લાવવા માટે ઉત્સવ પટેલના મિત્ર ભરતસિંહ ચંદાવતે મધ્યસ્થી કરવાનો પ્રયાસ કર્યો. ભરતસિંહે મહેન્દ્રસિંહને કુડાસણ લેન્ડમાર્ક કોમ્પ્લેક્સ સ્થિત પોતાના 'આરહા ફિટનેસ જીમ' પર સમાધાન માટે બોલાવ્યો. સોમવારે રાત્રે વાતચીત માટે ઉત્સવ, ભરતસિંહ અને તેમના અન્ય મિત્રો જીમ પર હાજર હતા.

પરંતુ મહેન્દ્રસિંહ અને તેનો પુત્ર અભિમન્યુસિંહ સમાધાનના ઈરાદે નહીં, પરંતુ હત્યાના ઈરાદે આવ્યા હતા. પોલીસ તપાસમાં બહાર આવ્યું કે આ એક પૂર્વ આયોજિત કાવતરું હતું. બંને પિતા-પુત્ર અગાઉથી જ 10 જેટલા સશસ્ત્ર સાગરીતોને ટુ-વ્હીલર પર તૈયાર રાખીને આવ્યા હતા. જીમ પર પહોંચતા જ "વારંવાર પૈસા માંગો છો, આજે જ પતાવી દઈએ" કહીને હુમલો શરૂ કરી દીધો.

પોલીસ કાર્યવાહી: 11 આરોપીઓ ઝડપાયા

ઘટનાની જાણ થતાં જ ઇન્ફોસિટી પોલીસનો કાફલો ઘટનાસ્થળે દોડી ગયો. ગંભીર રીતે ઘાયલ ભરતસિંહ ચંદાવતને તાત્કાલિક અમદાવાદની કે.ડી. હોસ્પિટલના ICU માં ખસેડવામાં આવ્યા, જ્યાં તેમની હાલત હજુ પણ નાજુક છે. ઉત્સવ પટેલને પણ સારવાર માટે હોસ્પિટલમાં દાખલ કરવામાં આવ્યો છે.

ઇન્ફોસિટી પોલીસે ઉત્સવ પટેલની ફરિયાદના આધારે મહેન્દ્રસિંહ રાઠોડ, અભિમન્યુસિંહ રાઠોડ સહિત 11 શખ્સો સામે IPC કલમ 307 હત્યાનો પ્રયાસ, 323, 324, 427, 506(2), 143, 147, 148, 149 અને જી.પી. એક્ટ મુજબ ગુનો નોંધ્યો છે. ગાંધીનગર રેન્જ આઈજી વિરેન્દ્રસિંહ યાદવ અને એસપી રવિ તેજા વાસમસેટ્ટીએ તાત્કાલિક અલગ-અલગ ટીમો બનાવીને આરોપીઓને ઝડપી પાડવા સૂચના આપી.

ગણતરીના કલાકોમાં જ પોલીસે મુખ્ય સૂત્રધાર મહેન્દ્રસિંહ સહિત 11 આરોપીઓને રાઉન્ડ અપ કરી લીધા છે. પોલીસે ઘટનાસ્થળેથી છરી, ધારિયા અને લાકડીઓ જેવા હથિયારો પણ કબજે કર્યા છે. CCTV ફૂટેજના આધારે વધુ તપાસ ચાલી રહી છે. પોલીસ એ દિશામાં પણ તપાસ કરી રહી છે કે આ ટોળકીએ બીજા કોઈ લોકો સાથે પણ આવી છેતરપિંડી કરી છે કે કેમ.

પાટનગરમાં વધતી ગુંડાગીરી સામે સવાલ

આ ઘટનાએ ગુજરાતના પાટનગર ગાંધીનગરની કાયદો અને વ્યવસ્થા સામે અનેક સવાલો ઉભા કર્યા છે. દિવસેને દિવસે પોશ વિસ્તારોમાં આવી ગેંગવોરની ઘટનાઓ વધી રહી છે. સરકારી પદ અને કોન્ટ્રાક્ટ અપાવવાના નામે કરોડોની છેતરપિંડી કરતી ટોળકીઓ બેફામ બની છે. 

સામાન્ય રીતે આવી ટોળકીઓ રાજકીય વગ ધરાવતા હોવાનો દાવો કરીને લોકોને ફસાવે છે. RTDC જેવા મોટા પદ માટે 50 લાખ એડવાન્સ માંગવા એ બતાવે છે કે આરોપીઓ કેટલા બેખૌફ હતા. પોલીસ માટે હવે સૌથી મોટો પડકાર એ છે કે આ કૌભાંડના નેટવર્કને ઉઘાડું પાડવું અને પીડિતોને ન્યાય અપાવવો.

હાલ તો સમગ્ર કુડાસણ વિસ્તારમાં ભયનો માહોલ છે. જીમના સંચાલકો અને સ્થાનિક વેપારીઓ પોલીસ પેટ્રોલિંગ વધારવાની માંગ કરી રહ્યા છે. ભરતસિંહ ચંદાવત જલ્દી સ્વસ્થ થાય તેવી પ્રાર્થના સાથે સૌની નજર હવે પોલીસની આગળની કાર્યવાહી પર છે. આ કેસમાં કોર્ટ શું વલણ અપનાવે છે અને આવા કૌભાંડિયાઓને કેવી સજા મળે છે તેના પર સમગ્ર ગુજરાતની મીટ મંડાયેલી છે.

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World 30 Jun 2026