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Friday, 6 February 2026

February 06, 2026

पंडित मोतीलाल नेहरू: स्वतंत्रता संग्राम के 'राजकुमार' और संवैधानिक क्रांति के पुरोधा

पंडित मोतीलाल नेहरू: स्वतंत्रता संग्राम के 'राजकुमार' और संवैधानिक क्रांति के पुरोधा
-Friday world 6/2/2026
लखनऊ, 6 फरवरी – आज का दिन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक महान योद्धा, पंडित मोतीलाल नेहरू की पुण्यतिथि है। 6 फरवरी 1931 को लखनऊ में उन्होंने अंतिम सांस ली, लेकिन उनकी विरासत आज भी जीवित है – एक ऐसे नेता की, जिन्होंने ब्रिटिश साम्राज्यवाद के सामने संवैधानिक हथियार उठाया, स्वराज पार्टी की नींव रखी और नेहरू-गांधी परिवार की राजनीतिक परंपरा की शुरुआत की। 

 जन्म और प्रारंभिक जीवन: कश्मीरी पंडितों की शानदार विरासत पंडित मोतीलाल नेहरू का जन्म 6 मई 1861 को आगरा (तत्कालीन उत्तर-पश्चिमी प्रांत, अब उत्तर प्रदेश) में हुआ था। उनके पिता गंगाधर नेहरू का निधन उनके जन्म से पहले ही हो गया था। कश्मीरी पंडित परिवार से ताल्लुक रखने वाले मोतीलाल ने कानून की पढ़ाई की और इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में एक सफल वकील बन गए। वे ब्रिटिश भारत के सबसे अमीर और प्रभावशाली बैरिस्टरों में से एक थे – आनंद भवन जैसा शानदार घर, लग्जरी जीवनशैली और यूरोपीय अंदाज। लेकिन 1919 में जलियांवाला बाग हत्याकांड ने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया। 

वे महात्मा गांधी के प्रभाव में आए और घरेलू विलासिता छोड़कर खादी अपनाई। आनंद भवन को स्वतंत्रता संग्राम का केंद्र बना दिया। मोतीलाल ने कहा था, "मैंने अपनी संपत्ति और आराम छोड़ दिया है, क्योंकि अब देश की आजादी से बड़ा कुछ नहीं।"

स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान: स्वराज पार्टी से नेहरू रिपोर्ट तक मोतीलाल नेहरू भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के दो बार अध्यक्ष चुने गए – 1919 (अमृतसर अधिवेशन) और 1928 (कलकत्ता अधिवेशन)। उन्होंने 1923 में चित्तरंजन दास के साथ मिलकर स्वराज पार्टी की स्थापना की, जिसका उद्देश्य विधानसभाओं में प्रवेश कर ब्रिटिश शासन को अंदर से चुनौती देना था।

 सबसे महत्वपूर्ण योगदान था 1928 का नेहरू रिपोर्ट। साइमन कमीशन के विरोध में ऑल पार्टीज कॉन्फ्रेंस ने मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में एक कमिटी बनाई, जिसमें जवाहरलाल नेहरू (सचिव), तेज बहादुर सप्रू, सुभाष चंद्र बोस जैसे दिग्गज शामिल थे। इस रिपोर्ट ने भारत के लिए डोमिनियन स्टेटस की मांग की, जिसमें शामिल थे: 

- संसदीय शासन प्रणाली

 - द्विसदनीय विधायिका (सेंट्रल लेजिस्लेचर में सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) 

- जॉइंट इलेक्टोरेट (सांप्रदायिक निर्वाचन क्षेत्रों का विरोध) 

- मौलिक अधिकारों की गारंटी 

- राज्य धर्म का विरोध और समान नागरिक अधिकार 

यह रिपोर्ट भारतीय इतिहास में पहली बार स्वदेशी संविधान का ड्राफ्ट था – जो बाद में 1935 के गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट और 1950 के भारतीय संविधान की नींव बनी। हालांकि मुस्लिम लीग ने कुछ मांगों पर असहमति जताई, लेकिन यह रिपोर्ट भारतीय एकता और संवैधानिक लड़ाई का प्रतीक बनी। 

गांधीजी के साथ संघर्ष और बलिदान 1930 में नमक सत्याग्रह के दौरान मोतीलाल नेहरू गिरफ्तार हुए। जेल में उनकी तबीयत बिगड़ी, लेकिन रिहाई के बाद भी वे सक्रिय रहे। उनके अंतिम दिनों में बेटे **जवाहरलाल नेहरू** और महात्मा गांधी उनके साथ थे। लंबी बीमारी के बाद 6 फरवरी 1931 को 69 वर्ष की आयु में लखनऊ में उनका निधन हो गया। 

परिवार और विरासत: एक राजनीतिक वंश की शुरुआत मोतीलाल नेहरू के तीन ओलाद थी – जवाहरलाल नेहरू (भारत के प्रथम प्रधानमंत्री), विजयलक्ष्मी पंडित (संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली महिला अध्यक्ष) और कृष्णा हठीसिंग। उनकी पोती इंदिरा गांधी, परपोते राजीव गांधी और आज के दौर में राहुल गांधी तक यह विरासत जारी है। 

श्रद्धांजलि आज, जब उनकी पुण्यतिथि हैं, हमें याद आता है एक ऐसे नेता का जो वकील थे, क्रांतिकारी थे, पिता थे और सबसे बढ़कर – राष्ट्रभक्त थे। पंडित मोतीलाल नेहरू ने दिखाया कि संवैधानिक संघर्ष भी स्वतंत्रता का हथियार हो सकता है। उनकी रिपोर्ट ने भारत को एक संविधानिक ढांचा दिया, जिसकी बदौलत आज हम लोकतंत्र का गौरव महसूस करते हैं। "उनकी स्मृति में – एक ऐसे पुरुष को जो राजकुमारों जैसा जीवन जीया, लेकिन देश के लिए साधारण से साधारण बन गया।"

भारत माता के इस महान सपूत को कोटि-कोटि नमन। उनकी आत्मा को शांति और हमें उनकी राह पर चलने की प्रेरणा मिले। जय हिंद! जय भारत!

 Sajjadali Nayani ✍ 
Friday world 6/2/2026
February 06, 2026

मनोज बाजपेयी ने 'घूसखोर पंडत' विवाद पर तोड़ी चुप्पी: "लोगों की भावनाओं का सम्मान करता हूं, प्रमोशनल मटीरियल हटाने का फैसला सही!"

मनोज बाजपेयी ने 'घूसखोर पंडत' विवाद पर तोड़ी चुप्पी: "लोगों की भावनाओं का सम्मान करता हूं, प्रमोशनल मटीरियल हटाने का फैसला सही!"
-Friday world 6/2/2026
नई दिल्ली: नेटफ्लिक्स की बहुप्रतीक्षित फिल्म घूसखोर पंडत' रिलीज से पहले ही बड़े विवाद में घिर गई है। फिल्म के टाइटल को लेकर ब्राह्मण समाज और विभिन्न संगठनों से तीखी आपत्तियां उठीं, सोशल मीडिया पर बहिष्कार की मांगें हुईं, लीगल नोटिस भेजे गए और उत्तर प्रदेश में एफआईआर भी दर्ज की गई। इस बीच फिल्म के मुख्य अभिनेता मनोज बाजपेयी ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए स्पष्ट बयान जारी किया है। उन्होंने लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए प्रमोशनल मटीरियल हटाने के फैसले का समर्थन किया है। 

मनोज बाजपेयी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, "एक एक्टर के तौर पर, मैं किसी फिल्म में अपने किरदार और कहानी के जरिए आता हूं। मेरे लिए, यह ('घूसखोर पंडत' का किरदार) एक कमजोर इंसान और उसकी आत्म-पहचान की यात्रा को दिखाने के बारे में था। इसका मकसद किसी भी समुदाय के बारे में कोई बयान देना नहीं था।" 

उन्होंने आगे कहा, "नीरज पांडे के साथ काम करने के मेरे अनुभव में, उन्होंने जिस तरह से अपनी फिल्मों पर काम किया है, उसमें लगातार गंभीरता और सावधानी रही है। लोगों की भावनाओं को देखते हुए, फिल्म बनाने वालों ने प्रमोशनल मटीरियल हटाने का फैसला किया है। यह दिखाता है कि चिंताओं को कितनी गंभीरता से लिया जा रहा है।"

विवाद की शुरुआत और बढ़ता बवाल फिल्म का टीजर हाल ही में मुंबई में नेटफ्लिक्स के 'नेक्स्ट ऑन नेटफ्लिक्स' इवेंट में रिलीज हुआ था। इसमें मनोज बाजपेयी एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी अजय दीक्षित (उपनाम 'पंडत') की भूमिका में नजर आए, जो घूसखोरी और अनैतिकता में लिप्त है। टाइटल 'घूसखोर पंडत' को लेकर ब्राह्मण समाज ने इसे अपमानजनक बताया। कई लोगों का कहना था कि 'पंडित' शब्द को भ्रष्टाचार से जोड़ना पूरे समुदाय की गरिमा पर हमला है। विरोध तेज होने पर: 

- सोशल मीडिया पर #BoycottNetflix और #ChangeTheTitle जैसे ट्रेंड चले। - लीगल नोटिस और दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल हुई, जिसमें रिलीज पर रोक की मांग की गई। 

- उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर लखनऊ में एफआईआर दर्ज हुई, जिसमें फिल्म को सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का आरोप लगाया गया। 

- केंद्र सरकार ने भी नेटफ्लिक्स को प्रमोशनल कंटेंट हटाने का निर्देश दिया।

 फिल्म के प्रोड्यूसर और लेखक नीरज पांडे ने पहले ही बयान जारी कर सफाई दी थी कि फिल्म पूरी तरह फिक्शनल है, 'पंडत' सिर्फ एक काल्पनिक किरदार का उपनाम है और इसका किसी समुदाय से कोई लेना-देना नहीं। उन्होंने कहा, "हम जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए सभी प्रमोशनल मटीरियल फिलहाल हटा रहे हैं, ताकि फिल्म को पूरी कहानी के संदर्भ में देखा और समझा जा सके, न कि अधूरे हिस्सों के आधार पर जज किया जाए।"

 मनोज बाजपेयी का रुख: संवेदनशीलता और जिम्मेदारी मनोज बाजपेयी का बयान फिल्ममेकर्स की जिम्मेदारी को दर्शाता है। उन्होंने साफ किया कि उनका किरदार एक व्यक्ति की कमजोरियों और आत्म-सुधार की कहानी है, न कि किसी समुदाय पर टिप्पणी। उनका यह बयान विवाद के बीच संतुलित और संवेदनशील लगता है, जहां वे लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए मेकर्स के फैसले का समर्थन कर रहे हैं। 

फिल्म में नुशरत भरुचा, दिव्या दत्ता, साकिब सलीम, अक्षय ओबेरॉय, श्रद्धा दास और किकू शारदा जैसे कलाकार भी हैं। निर्देशन ऋतेश शाह ने किया है। यह नीरज पांडे और मनोज बाजपेयी की जोड़ी की नई फिल्म है, जो पहले 'स्पेशल 26' जैसी हिट्स दे चुकी है। 

क्या होगा आगे? प्रमोशनल मटीरियल हटने से विवाद थम सकता है, लेकिन कई संगठन टाइटल बदलने या फिल्म पर रोक की मांग पर अड़े हैं। यह मामला सिनेमा की अभिव्यक्ति की आजादी और सामाजिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन का एक और उदाहरण बन गया है। मनोज बाजपेयी का बयान दर्शाता है कि क्रिएटर्स अब जनभावनाओं को गंभीरता से ले रहे हैं।

 फिल्म की रिलीज डेट अभी घोषित नहीं हुई है, लेकिन विवाद के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या टीम टाइटल में बदलाव करती है या कानूनी लड़ाई जारी रहती है। 
Sajjadali Nayani ✍ 
Friday world 6/2/2026
February 06, 2026

ईरान ने दिया साफ संदेश: "युद्ध नहीं चाहते, लेकिन अगर हुआ तो पूरी तरह तैयार!"

ईरान ने दिया साफ संदेश: "युद्ध नहीं चाहते, लेकिन अगर हुआ तो पूरी तरह तैयार!"
-Friday world 6/2/2026
नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने एक बार फिर अपनी मजबूत स्थिति दोहराई है। भारत में तैनात ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली ने अमेरिका के साथ चल रहे तनाव पर स्पष्ट रुख जाहिर करते हुए कहा है कि तेहरान युद्ध बिल्कुल नहीं चाहता, लेकिन अगर स्थिति युद्ध तक पहुंची तो ईरान हर विकल्प के लिए पूरी तरह तैयार है।

 समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, राजदूत फतहाली दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उनसे सीधा सवाल किया गया कि अगर अमेरिका ईरान पर हमला करता है या मौजूदा तनाव पूर्ण युद्ध में बदल जाता है, तो ईरान कितना तैयार है? इस पर राजदूत ने जवाब दिया, ईरान बिल्कुल भी युद्ध नहीं चाहता। लेकिन हम सभी विकल्पों के लिए तैयार हैं। युद्ध के नतीजों को भी देखना चाहिए।"

उन्होंने आगे कहा, "हम बातचीत के लिए तैयार हैं, और हम इस बातचीत के नतीजे का इंतजार कर रहे हैं। हमारा मानना है कि बातचीत अच्छी होनी चाहिए। हम बातचीत का कोई मौका नहीं छोड़ते, लेकिन बदकिस्मती से दूसरी तरफ वाले छोड़ देते हैं और हमला करते हैं। अब वे हमारे साथ अच्छी बातचीत करना चाहते हैं..."

 ओमान में चल रही अप्रत्यक्ष वार्ता यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच ओमान में अप्रत्यक्ष वार्ता चल रही है। अमेरिकी दल की अगुवाई विशेष दूत स्टीव विटकॉफ कर रहे हैं, जबकि ईरानी टीम का नेतृत्व विदेश मंत्री अब्बास अरागची कर रहे हैं। इन वार्ताओं को लेकर ईरानी विदेश मंत्री ने इसे "एक अच्छी शुरुआत" बताया है, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि बातचीत केवल परमाणु मुद्दे तक सीमित है और कोई व्यापक एजेंडा नहीं है। 

राजदूत फतहाली का बयान ईरान की दोहरी नीति को दर्शाता है—शांति की इच्छा के साथ-साथ मजबूत रक्षा की तैयारी। ईरान बार-बार कहता रहा है कि वह क्षेत्रीय स्थिरता चाहता है, लेकिन अमेरिकी दबाव या सैन्य कार्रवाई का जवाब देने में पीछे नहीं हटेगा। 

 भारत-ईरान संबंधों का संदर्भ भारत में ईरान के राजदूत का यह बयान खासा महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंध हैं। चाबहार बंदरगाह, ऊर्जा सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं। हाल के महीनों में ईरान ने भारत के साथ आतंकवाद विरोधी सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई है। राजदूत फतहाली ने कई बार भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की सराहना की है, खासकर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में ईरान के पक्ष में वोट करने के लिए। 

 युद्ध की आशंका और वैश्विक प्रभाव अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का वैश्विक असर हो सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर खतरा मंडरा रहा है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल आयात करता है। ईरान ने पहले भी चेतावनी दी है कि अगर हमला हुआ तो वह इस मार्ग को प्रभावित कर सकता है। 

राजदूत फतहाली का संदेश साफ है—ईरान बातचीत चाहता है, लेकिन अपनी संप्रभुता और सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं करेगा। "युद्ध के नतीजे" का जिक्र करते हुए उन्होंने आगाह किया कि कोई भी सैन्य कार्रवाई क्षेत्रीय अस्थिरता को और बढ़ा सकती है।

 यह बयान न केवल अमेरिका के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक चेतावनी है कि मध्य पूर्व में शांति बनाए रखने के लिए जिम्मेदाराना रवैया अपनाना जरूरी है। ईरान तैयार है—शांति के लिए और जरूरत पड़ी तो रक्षा के लिए भी।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday world 6/2/2026
February 06, 2026

ओमान में ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता समाप्त: "बहुत अच्छी शुरुआत" हुई, बातचीत जारी रहेगी – कोई बड़ा फैसला नहीं,

ओमान में ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता समाप्त: "बहुत अच्छी शुरुआत" हुई, बातचीत जारी रहेगी – कोई बड़ा फैसला नहीं, -Friday world 6/2/2026
मस्कट/तेहरान/वाशिंगटन, 6 फरवरी 2026: ओमान की राजधानी मस्कट में आज ईरान और अमेरिका के बीच अप्रत्यक्ष (इंडायरेक्ट) उच्च-स्तरीय वार्ता संपन्न हो गई। दोनों पक्षों ने इसे "बहुत अच्छी शुरुआत" और "सकारात्मक माहौल" में हुई बैठक बताया, लेकिन कोई ठोस समझौता या बड़ा फैसला सामने नहीं आया। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने ईरानी राज्य टीवी पर कहा कि वार्ता "बहुत सकारात्मक और अच्छी शुरुआत" थी। उन्होंने जोर दिया कि अब दोनों प्रतिनिधिमंडल अपनी-अपनी राजधानियों (तेहरान और वाशिंगटन) लौटकर नेतृत्व से सलाह-मशविरा करेंगे। अगले दौर की बातचीत का समय, स्थान और प्रारूप बाद में तय होगा। 

यह वार्ता ओमान के विदेश मंत्री सय्यद बद्र अल्बुसैदी की मध्यस्थता में हुई, जहां दोनों पक्ष अलग-अलग मिले – कोई प्रत्यक्ष मुलाकात नहीं हुई। अमेरिकी पक्ष की ओर से मिडिल ईस्ट स्पेशल एंवॉय स्टिव विटकॉफ, जेरेड कुश्नर (ट्रंप के दामाद) और अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर शामिल थे। ईरानी टीम अब्बास अरागची के नेतृत्व में थी। बैठक कई दौर में चली और मुख्य रूप से आगे की वार्ता के फ्रेमवर्क पर केंद्रित रही। 

 ईरान का स्पष्ट रुख: केवल परमाणु मुद्दा अरागची ने बार-बार दोहराया कि वार्ता केवल ईरान के परमाणु कार्यक्रम तक सीमित रही। उन्होंने कहा, "हमने शांत माहौल में मुख्य मुद्दों पर चर्चा की, बिना किसी धमकी या दबाव के।" ईरान ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) बंद नहीं किया जाएगा और उच्च संवर्धित यूरेनियम का स्टॉक खत्म करने की मांग नहीं मानी जाएगी। अरागची ने कहा, "किसी भी संवाद की पूर्व शर्त है धमकियां और दबाव से परहेज। हमने आज भी यह बात स्पष्ट की और उम्मीद करते हैं कि इसे मान्यता मिलेगी ताकि वार्ता जारी रह सके।" 

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट किया: "दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी रखने के समझौते के साथ यह बैठक समाप्त हुई। दोनों ने अपने नजरिए और मांगें रखीं, नेताओं से सलाह के बाद अगले दौर पर फैसला होगा।" 

ईरान ने यह भी दोहराया कि वह युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर स्थिति बिगड़ी तो "हम तैयार हैं"। अरागची ने कहा, "हम डिप्लोमेसी में खुले मन से लेकिन पिछले एक साल की यादों के साथ प्रवेश कर रहे हैं।" 

अमेरिका की मांगें: परमाणु के साथ मिसाइल और प्रॉक्सी ग्रुप्स अमेरिका ने ईरान से परमाणु कार्यक्रम रोकने, उच्च संवर्धित यूरेनियम का स्टॉक खत्म करने की मांग की। साथ ही बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय सशस्त्र समूहों (हिजबुल्लाह, हूती, इराकी मिलिशिया आदि) को समर्थन पर भी दबाव डाला। ट्रंप प्रशासन ने वार्ता से पहले कहा था कि बातचीत में ये सभी मुद्दे शामिल होने चाहिए। हालांकि, आज की बैठक में ईरान ने इन अतिरिक्त मुद्दों को शामिल नहीं होने दिया, और अमेरिका ने सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया। 
 
पृष्ठभूमि: तनाव का दौर और युद्ध की आशंका यह वार्ता पिछले साल अमेरिकी हमलों (ईरान की यूरेनियम संवर्धन साइट्स पर) और ईरान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के बाद हुई। क्षेत्र में युद्ध की आशंका बढ़ गई थी, लेकिन ओमान की मध्यस्थता से डिप्लोमेटिक रास्ता खुला। ओमान ने दोनों पक्षों से अलग-अलग मुलाकात की और वार्ता को "सकारात्मक" बताया। ओमान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि बैठक का उद्देश्य "डिप्लोमेटिक और तकनीकी वार्ता की फिर से शुरुआत के लिए उपयुक्त आधार तैयार करना" था।  

- सकारात्मक संकेत: दोनों पक्षों ने "जारी रखने" पर सहमति जताई। अरागची ने कहा, "अगर यह सकारात्मक रास्ता जारी रहा तो हम एक मजबूत फ्रेमवर्क तक पहुंच सकते हैं।" 
- चुनौतियां: गहरा अविश्वास, ईरान का संवर्धन न छोड़ने का रुख, और अमेरिका की व्यापक मांगें (मिसाइल, प्रॉक्सी)। अगला दौर कुछ दिनों या हफ्तों में मस्कट में संभव। 

- प्रभाव: यह बैठक मध्य पूर्व में तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन रास्ता अभी लंबा है। दुनिया की नजरें अब राजधानियों की सलाह और अगले दौर पर टिकी हैं। 

यह वार्ता डिप्लोमेसी की जीत है, लेकिन असली परीक्षा आगे है – क्या "अच्छी शुरुआत" वाकई डील तक पहुंचेगी या फिर पुराने तनाव वापस लौट आएंगे? 

Sajjadali Nayani ✍
 Friday world 6/2/2026
February 06, 2026

भारत-अमेरिका ट्रेड डील: अमेरिकी कृषि उत्पादों पर 'शून्य' टैरिफ का दावा, लेकिन भारतीय किसानों के हित सुरक्षित? क्या यह डबल इनकम का सपना या खतरे की घंटी?

भारत-अमेरिका ट्रेड डील: अमेरिकी कृषि उत्पादों पर 'शून्य' टैरिफ का दावा, लेकिन भारतीय किसानों के हित सुरक्षित? क्या यह डबल इनकम का सपना या खतरे की घंटी? -Friday world 5/2/2026

नई दिल्ली/वाशिंगटन:  फरवरी 2026 में भारत और अमेरिका के बीच घोषित व्यापार समझौते (ट्रेड डील) ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में हलचल मचा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे "ऐतिहासिक" बताते हुए दावा किया कि भारत ने अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर टैरिफ को शून्य करने पर सहमति जताई है। यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमीसन ग्रीर ने स्पष्ट किया कि भारत औसत औद्योगिक टैरिफ 13.5% से घटाकर लगभग सभी वस्तुओं पर शून्य करेगा, जिसमें फल, सब्जियां, मेवे (ट्री नट्स), वाइन, स्पिरिट्स आदि शामिल हैं।

 ट्रंप ने कहा, "भारत अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ और नॉन-टैरिफ बैरियर्स को जीरो करेगा।" वहीं, व्हाइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने बताया कि भारत रूसी तेल की खरीद बंद करेगा और अमेरिका में 500 अरब डॉलर का निवेश करेगा, जिसमें ऊर्जा, तकनीक, कृषि और कोल शामिल हैं।

 लेकिन भारतीय पक्ष की ओर से वाणिज्य मंत्री पियूष गोयल ने संसद में स्पष्ट किया कि समझौते में कृषि और डेयरी क्षेत्र के संवेदनशील हितों का पूर्ण संरक्षण किया गया है। गोयल ने कहा, "हमने संवेदनशील क्षेत्रों जैसे कृषि और डेयरी को पूरी तरह सुरक्षित रखा है।" उन्होंने जोर दिया कि यह डील भारतीय एमएसएमई, उद्यमियों और मेक इन इंडिया को नई तकनीक और अवसर देगी। 

 डील के प्रमुख बिंदु: क्या वाकई शून्य टैरिफ कृषि पर? 

- अमेरिकी दावे: भारत ने "विशाल श्रेणी" (vast array) के कृषि उत्पादों पर टैरिफ जीरो करने पर सहमति जताई, जैसे बादाम, पिस्ता, सेब, फल-सब्जियां, वाइन आदि। ग्रीर ने कहा कि 98-99% औद्योगिक वस्तुओं पर टैरिफ जीरो होगा।

 - भारतीय स्पष्टीकरण: कुछ संवेदनशील कृषि क्षेत्रों में सुरक्षा बरकरार रहेगी। जीएम फसलें (जैसे अमेरिकी मक्का, सोयाबीन), डेयरी, पोल्ट्री, अनाज आदि पर कोई बड़ा बदलाव नहीं। भारत ने रूसी तेल पर पूर्ण बंद का दावा खारिज नहीं किया, लेकिन विविधीकरण की बात की। 

- टैरिफ में बदलाव: अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% किया (पिछले punitive duties हटाए)। भारत अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ कम करेगा, लेकिन पूर्ण जीरो का विवादास्पद दावा। 

भारतीय किसानों पर क्या असर? भारत में कृषि और पशुपालन 70 करोड़ से अधिक लोगों का आधार है। विकसित देशों में खेती मशीनीकृत और सब्सिडी वाली है, जबकि भारत में छोटे किसान मजदूरी पर निर्भर हैं।

 - चिंताएं: अगर अमेरिकी सस्ते, सब्सिडी वाले उत्पाद (अनाज, डेयरी) बिना टैरिफ के आएं, तो स्थानीय कीमतें गिर सकती हैं। विश्व का 90% फूड ट्रेड 5 बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हाथ में है, जो कीमतें नियंत्रित करती हैं। इससे किसानों की आजीविका खतरे में पड़ सकती है। 

- अमेरिकी कृषि निर्यात: 2024 में अमेरिका ने भारत को 1.6 अरब डॉलर का कृषि निर्यात किया (मुख्यतः बादाम, पिस्ता, सेब, इथेनॉल)। भारत की कुल कृषि निर्यात 51 अरब डॉलर है, जिसे 100 अरब तक ले जाने का लक्ष्य। 

- फायदे: कुछ क्षेत्रों में भारतीय निर्यात बढ़ सकता है (श्रिंप, टेक्सटाइल आदि)। अमेरिकी तकनीक से उत्पादकता बढ़ सकती है। 

डील के अन्य पहलू 

- रूसी तेल: ट्रंप का दावा कि भारत रूसी तेल बंद करेगा और अमेरिका/वेनेजुएला से खरीदेगा, लेकिन भारत ने इसे पूरी तरह स्वीकार नहीं किया। रूस से सस्ता तेल भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण।

 - 500 अरब डॉलर निवेश/खरीद: ट्रंप का दावा, लेकिन भारत की ओर से पुष्टि नहीं। वर्तमान अमेरिकी आयात 

~50 अरब डॉलर सालाना है, इतनी बड़ी राशि असंभव लगती है। 

- राजनीतिक प्रभाव: यह डील ट्रंप-मोदी की दोस्ती का नतीजा है, लेकिन विपक्ष और किसान संगठन इसे "किसानों पर हमला" बता रहे हैं। 

अवसर या खतरा? यह डील भारतीय निर्यातकों (टेक्सटाइल, जेम्स, लेदर) के लिए राहत है, लेकिन कृषि पर असर पर बहस जारी है। गोयल का दावा है कि संवेदनशील क्षेत्र सुरक्षित हैं, जबकि अमेरिकी पक्ष "विशाल" बाजार खुलने का जश्न मना रहा है। असल विवरण (फाइनल टेक्स्ट) आने पर ही साफ होगा कि क्या भारतीय किसान "डबल इनकम" पाएंगे या उनकी आजीविका पर "डबल खतरा" मंडराएगा। 

यह समझौता भारत-अमेरिका रिश्तों में नया अध्याय है, लेकिन किसानों के हितों की रक्षा सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। 

Sajjadali Nayani ✍
 Friday world 5/2/2026
February 06, 2026

વડોદરામાં BJP નેતાનો મોટો ખેલ: 3 કરોડની રોકાણ લાલચમાં ઠગાઈ, "હવે પૈસા મળવાના નથી... થાય એ કરી લો!" એવી ધમકી સુધ્ધાં આપી!

વડોદરામાં BJP નેતાનો મોટો ખેલ: 3 કરોડની રોકાણ લાલચમાં ઠગાઈ, "હવે પૈસા મળવાના નથી... થાય એ કરી લો!" એવી ધમકી સુધ્ધાં આપી!
-Friday world 6/2/2026
વડોદરા: રાજકીય વર્તુળમાં હલચલ મચાવી દેનારી એક સંવેદનશીલ ઘટના સામે આવી છે. અમરેલી જિલ્લા ભાજપના ઉપપ્રમુખ સુરેશભાઈ ભાદાભાઈ પાનસુરીયા તેમના ત્રણ સગા ભાઈઓ અને પુત્ર સહિત પાંચ જણ સામે વડોદરાના હરણી પોલીસ સ્ટેશનમાં 3 કરોડ રૂપિયાની છેતરપિંડીની ફરિયાદ નોંધાઈ છે. આ કેસમાં આરોપીઓએ રિયલ એસ્ટેટ પ્રોજેક્ટમાં ઊંચા વળતરની લાલચ આપીને વેપારી પરિવારને લાખોની રકમ ચૂંટી લીધી હોવાનો આક્ષેપ છે. પોલીસે આરોપીઓની શોધખોળ શરૂ કરી દીધી છે અને ભાજપ વર્તુળમાં પણ આ મામલો ચર્ચાનો વિષય બન્યો છે.

 ફરિયાદી દર્શિતભાઈ કમલેશભાઈ શાહ (ઉંમર 42 વર્ષ), જે અમિત નગર સર્કલ પાસે મંગલ પાર્ક સોસાયટીમાં રહે છે, તેમણે પોલીસને જણાવ્યું કે ડિસેમ્બર 2023માં સુરેશભાઈ પાનસુરીયાએ હરણી સમા લિંક રોડ પર આવેલા 'શ્રી સિદ્ધેશ્વર પેરેડાઇઝ' અને 'શ્રી સિદ્ધેશ્વર પ્રાઇમ પ્લસ' નામના રિયલ એસ્ટેટ પ્રોજેક્ટમાં રોકાણ કરવાની લાલચ આપી હતી. તેમણે શરૂઆતમાં 1.5 ટકા માસિક વળતર અને પછી 2 ટકા સુધીનું વળતર આપવાની ખાતરી આપી હતી. આ ઉપરાંત પ્રોપર્ટીને સિક્યોરિટી તરીકે આપવાનું પણ કહ્યું હતું. 

આ વિશ્વાસ પર દર્શિતભાઈ અને તેમના પિતા કમલેશભાઈ શાહે કુલ 3 કરોડ રૂપિયાનું રોકાણ કર્યું. બદલામાં તેમના નામે 6 મિલ્કતો (ફ્લેટ અને દુકાનો)ના રજિસ્ટર્ડ બાનાખત કરાવવામાં આવ્યા. શરૂઆતના સમયગાળા દરમિયાન ફેબ્રુઆરી 2024થી ડિસેમ્બર 2024 સુધી માસિક 1.5થી 2 ટકા વળતર રોકડ કે બેંક ટ્રાન્સફર દ્વારા ચૂકવવામાં આવ્યું હતું. પરંતુ જાન્યુઆરી 2025થી વળતર સંપૂર્ણપણે બંધ થઈ ગયું. 

દર્શિતભાઈએ વારંવાર પૂછપરછ કરી તો આરોપીઓએ રિયલ એસ્ટેટમાં તકલીફનું બહાનું કાઢ્યું અને પૈસા પરત ચૂકવવાનો ભરોસો આપ્યો, પરંતુ કોઈ રકમ મળી નહીં. આ દરમિયાન દર્શિતભાઈના પિતાને લીવર કેન્સરની ગંભીર બીમારી થઈ અને સારવાર માટે રકમની તાત્કાલિક જરૂર પડી, તો પણ આરોપીઓએ પૈસા પરત ન કર્યા. આ ઉપરાંત આપેલા ચેકો બેંકમાં બાઉન્સ થયા. 

સપ્ટેમ્બર 2025માં આરોપીઓએ ઓફિસમાં બોલાવીને અસભ્ય વર્તન કર્યું અને ધમકીઓ આપી: "તમને અને તમારા પરિવારને જોઈ લઈશું... તમે પોલીસ ફરિયાદ કરી છે, હવે રૂપિયા મળવાના નથી... થાય એ કરી લો!" આ ધમકીઓએ ફરિયાદી પરિવારને વધુ ભયભીત કરી દીધો. 

તપાસમાં બહાર આવ્યું કે પ્રોજેક્ટમાં બાંધકામ અધૂરું છે અને બાનાખતવાળી મિલ્કતો પર પહેલેથી જ બેંક લોન લેવામાં આવી હોવાનું જાણવા મળ્યું છે. આમ, રોકાણકારોને ન તો વળતર મળ્યું અને ન તો મિલ્કતોનો કબજો.

 આ કેસમાં વધુ એક રસપ્રદ વળાંક એ છે કે આરોપી સુરેશ પાનસુરીયાના પુત્ર રવિ પાનસુરીયા 31 ડિસેમ્બર 2025ના રોજ સ્યુસાઈડ નોટ લખીને ગુમ થયો હતો, જેનાથી આખી ઘટના વધુ ગંભીર બની છે. પોલીસ તેની તપાસ પણ કરી રહી છે. 

હરણી પોલીસે IPCની કલમો હેઠળ ગુનો નોંધીને તપાસ શરૂ કરી છે. આ મામલો રાજકીય અને આર્થિક બંને સ્તરે ચર્ચામાં છે, કારણ કે તેમાં એક ભાજપ નેતાના પરિવારનો સંડોવાયો છે. રોકાણકારો માટે આ ઘટના એક મોટી ચેતવણી છે કે ઊંચા વળતરની લાલચમાં રોકાણ કરતા પહેલાં બધી તપાસ કરવી જરૂરી છે.

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday world 6/2/2026
February 06, 2026

ગુજરાત યુનિવર્સિટી કેમ્પસમાં હૃદયસ્પર્શી ઘટના: NSS કેમ્પમાં ભાગ લેનાર 21 વર્ષીય વિદ્યાર્થિની મહેશ્વરી ખાચરનો ગેસ્ટ હાઉસમાં આપઘાત, પોલીસે તપાસ શરૂ કરી

ગુજરાત યુનિવર્સિટી કેમ્પસમાં હૃદયસ્પર્શી ઘટના: NSS કેમ્પમાં ભાગ લેનાર 21 વર્ષીય વિદ્યાર્થિની મહેશ્વરી ખાચરનો ગેસ્ટ હાઉસમાં આપઘાત, પોલીસે તપાસ શરૂ કરી -Friday world 6/2/2026
               પ્રરતિકાત્કમક ફોટોગ્રાફ 
અમદાવાદ: ગુજરાત યુનિવર્સિટીના કેમ્પસમાં આજે (6 ફેબ્રુઆરી 2026) એક દુઃખદ અને હૃદયદ્રાવક ઘટના બની છે, જેણે સમગ્ર શૈક્ષણિક વાતાવરણને હચમચાવી દીધું છે. બોટાદ જિલ્લાની 21 વર્ષીય વિદ્યાર્થિની મહેશ્વરી ખાચરે યુનિવર્સિટીના ગેસ્ટ હાઉસમાં ગળે ફાંસો ખાઈને આત્મહત્યા કરી લીધી છે. આ ઘટના NSS (નેશનલ સર્વિસ સ્કીમ) કેમ્પના ભાગરૂપે યુનિવર્સિટીમાં રોકાયેલી વિદ્યાર્થિની સાથે જોડાયેલી છે, જેણે યુવા શક્તિના માનસિક આરોગ્ય અને તણાવ વિશે ગંભીર પ્રશ્નો ઉભા કર્યા છે. 

મહેશ્વરી ખાચર LD આર્ટ્સ કોલેજમાં ત્રીજા વર્ષની વિદ્યાર્થિની હતી અને મૂળ બોટાદની રહેવાસી હતી. હાલમાં તે અમદાવાદના રાણીપ વિસ્તારમાં રહેતી હતી. તે એક સક્રિય NSS સ્વયંસેવિકા હતી અને તાજેતરમાં જ તેના ઉત્તમ પ્રદર્શનને કારણે વરિષ્ઠ સ્વયંસેવક તરીકે નિયુક્ત કરવામાં આવી હતી. NSS કેમ્પમાં ભાગ લેવા માટે તે ગુજરાત યુનિવર્સિટીના ગેસ્ટ હાઉસ (ટ્રાન્ઝિટ હાઉસ)માં રોકાઈ હતી, જે એનઆરઆઈ હોસ્ટેલની સામે આવેલું છે. 

 ઘટનાનું ક્રમવાર વર્ણન આજે સવારથી સાંજ સુધી મહેશ્વરી શ્યામ પ્રસાદ મુખર્જી હોલમાં યુનિવર્સિટીના વિવિધ કાર્યક્રમોમાં સક્રિય રહી હતી. NSS સંબંધિત કાર્યક્રમ માટે કોલકાતાથી આવનારા મહેમાનોને આવકારવા માટે તેને સાંજે આશરે 5 વાગ્યે એરપોર્ટ જવાનું હતું. પરંતુ બપોરે આશરે 3:30 વાગ્યે તે યુનિવર્સિટી પરિસરમાંથી નીકળી ગઈ અને પાછી ફરી નહીં.

 જ્યારે તે NSS ડ્યુટી માટે રિપોર્ટ કરવામાં નિષ્ફળ રહી, ત્યારે એક પ્રોફેસરે ગેસ્ટ હાઉસમાં બીજી વિદ્યાર્થિનીને તેની શોધ કરવા કહ્યું. તે વિદ્યાર્થિનીએ રૂમમાં પ્રવેશ કરતાં જ મહેશ્વરીને બારી પાસે લટકતી જોઈ અને તરત જ અન્ય વિદ્યાર્થીઓ તથા અધિકારીઓને જાણ કરી. યુનિવર્સિટી પ્રશાસને તાત્કાલિક પોલીસ અને ઇમરજન્સી સેવાઓને જાણ કરી. ગુજરાત યુનિવર્સિટી પોલીસ સ્ટેશનની ટીમ, 108 એમ્બ્યુલન્સ અને કર્મચારીઓ ઘટનાસ્થળે પહોંચ્યા, પરંતુ ડોક્ટરોએ મહેશ્વરીને મૃત જાહેર કરી. 

મૃતદેહને પોસ્ટમોર્ટમ માટે ખસેડવામાં આવ્યો છે. અમદાવાદ પોલીસે આ મામલે તપાસ શરૂ કરી દીધી છે. સુસાઇડ નોટ મળી કે નહીં, તેમજ આત્મહત્યા પાછળના કારણો શું હતા તે અંગે હજુ સ્પષ્ટતા નથી. પોલીસે ગેસ્ટ હાઉસના CCTV ફૂટેજ, સાથી વિદ્યાર્થીઓ અને NSS કેમ્પના સંયોજકોના નિવેદનો લેવાનું શરૂ કર્યું છે. 

 યુનિવર્સિટી અને NSS કેમ્પનું વાતાવરણ આ ઘટનાએ ગુજરાત યુનિવર્સિટી કેમ્પસમાં શોકનું મોજું ફેલાવી દીધું છે. NSS કેમ્પમાં ભાગ લેનાર વિદ્યાર્થીઓ અને અધિકારીઓમાં ભારે ઉદાસી છવાઈ ગઈ છે. મહેશ્વરીને સૌ કોઈ સક્રિય, ઉત્સાહી અને સમાજસેવાની ભાવના ધરાવતી વિદ્યાર્થિની તરીકે ઓળખતા હતા. તેના અચાનક આવા પગલાને કારણે માનસિક તણાવ, એકલતા કે અન્ય કોઈ અજ્ઞાત કારણ હોવાની શંકા વ્યક્ત થઈ રહી છે. 

રાજ્ય સરકારે તાજેતરમાં જ વિદ્યાર્થીઓમાં વધતા આપઘાતના કિસ્સાઓને ધ્યાનમાં રાખીને તમામ યુનિવર્સિટીઓ અને કોલેજોમાં મેન્ટલ હેલ્થ પોલિસી લાગુ કરવાની સૂચના આપી છે, જેમાં કાઉન્સેલિંગ, હેલ્પલાઇન અને જાગૃતિ કાર્યક્રમોનો સમાવેશ થાય છે. આ ઘટના એવા સમયે બની છે જ્યારે યુવાનોમાં માનસિક આરોગ્યના મુદ્દાઓ વધુ ગંભીર બની રહ્યા છે. 

 પરિવાર અને સમાજ પર અસર મહેશ્વરીના પરિવારને આ દુઃખદ સમાચાર મળતાં જ ભારે આઘાત લાગ્યો છે. બોટાદમાં તેના પરિવારજનો અને મિત્રોમાં શોકનું વાતાવરણ છે. યુનિવર્સિટી પ્રશાસને પરિવારને સહાનુભૂતિ વ્યક્ત કરી છે અને તપાસમાં સહયોગ આપવાની ખાતરી આપી છે. 

આ ઘટના યુવા પેઢી માટે એક મોટી ચેતવણી છે. વિદ્યાર્થીઓના માનસિક તણાવને સમજવું, તેમને સમયસર મદદ પહોંચાડવી અને એકલતા સામે લડવા માટે સમાજ અને સંસ્થાઓએ વધુ સક્રિય બનવું જરૂરી છે. પોલીસની તપાસ પૂર્ણ થયા બાદ જ આપઘાતના વાસ્તવિક કારણો સામે આવશે, પરંતુ આ દુઃખદ ઘટના દરેકને વિચારવા મજબૂર કરી રહી છે કે યુવાનોના મનમાં ચાલી રહેલી લડાઈને કેવી રીતે સમજી શકાય અને તેને રોકી શકાય. 

Sajjadali Nayani ✍
 Friday world 6/2/2026