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Wednesday, 2 September 2026

September 02, 2026

बम से शांति या टेबल पर समझौता? ओबामा की 2015 डील आज भी क्यों दे रही है दुनिया को सबसे बड़ा सबक

बम से शांति या टेबल पर समझौता? ओबामा की 2015 डील आज भी क्यों दे रही है दुनिया को सबसे बड़ा सबक
- Friday World 3 Sap 2026

जब दुनिया ईरान के परमाणु प्रोग्राम को लेकर जंग के मुहाने पर खड़ी थी, तब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एक अलग रास्ता चुना - बातचीत का। उनका मानना था कि डिप्लोमेसी से वह हासिल किया जा सकता है जिसकी गारंटी बम कभी नहीं दे सकते।

2015 में हुई ईरान न्यूक्लियर डील, जिसे JCPOA कहा जाता है, इसी सोच का नतीजा थी। इस डील के तहत ईरान ने अपने एनरिच्ड यूरेनियम स्टॉक का लगभग 97% हिस्सा छोड़ दिया। उसने अपने हजारों सेंट्रीफ्यूज बंद किए और सबसे बड़ी बात, इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) को अपने परमाणु ठिकानों की कड़ी निगरानी की इजाजत दी।

ओबामा ने तब कहा था कि यह नतीजा बिना एक भी मिसाइल दागे, बिना बड़े पैमाने पर लोगों की जान लिए और बिना होर्मुज स्ट्रेट जैसे दुनिया के सबसे अहम तेल रूट को बंद किए हासिल हुआ है। यह एक ऐसी जीत थी जो सिर्फ कागज पर नहीं, जमीन पर दिख रही थी।

डील ने क्या दिया?

इस समझौते के समर्थक आज भी तीन बातों को इसकी सबसे बड़ी सफलता मानते हैं। पहला, ईरान का परमाणु प्रोग्राम 1 साल से ज्यादा पीछे धकेल दिया गया। अगर ईरान बम बनाना भी चाहता, तो उसे कम से कम एक साल का ब्रेकआउट टाइम लगता। दूसरा, IAEA को 24 घंटे कैमरे और इंस्पेक्टर रखने की छूट मिली, जो इतिहास में सबसे सख्त निगरानी में से एक थी। तीसरा, मिडिल ईस्ट में एक बड़ी जंग टल गई।

बदले में ईरान को प्रतिबंधों में राहत दी गई, ताकि उसकी अर्थव्यवस्था सांस ले सके।

आलोचना क्यों हुई?

लेकिन इस डील के आलोचक भी कम नहीं थे। उनका तर्क था कि इस डील की कई पाबंदियां टेम्पररी थीं। इन्हें ‘सनसेट क्लॉज’ कहा गया। मतलब, 10 से 15 साल बाद ये पाबंदियां अपने आप खत्म हो जाएंगी। ईरान के पास नॉलेज और इंफ्रास्ट्रक्चर तो रहेगा ही, वह बाद में फिर से प्रोग्राम शुरू कर सकता है।

यह बहस 2018 में और तेज हो गई जब अमेरिका खुद इस डील से बाहर निकल गया। इसके बाद ईरान ने भी धीरे-धीरे अपने प्रोग्राम को फिर से बढ़ाना शुरू कर दिया। यूरेनियम एनरिचमेंट 3.67% से बढ़ाकर 60% तक कर दिया, जो बम बनाने के लेवल के बहुत करीब है।

कुछ लोग कहते हैं कि यही इस डील की सबसे बड़ी कमजोरी थी - यह पॉलिटिकल कंटिन्यूटी पर निर्भर थी। एक राष्ट्रपति ने बनाई, दूसरे ने तोड़ दी। वहीं दूसरे गुट का कहना है कि टाइम-लिमिटेड डील भी बिना डील से बेहतर होती है। कम से कम 10 साल का संकट तो टला, डी-एस्केलेशन का मौका तो मिला।

असली सवाल: रिस्क किससे कम होता है?

आर्म्स कंट्रोल का इतिहास यही कहता है कि परफेक्ट और परमानेंट सॉल्यूशन कभी नहीं मिलता। हमेशा एक ‘वेरिफाइड पॉज’ यानी जांचा-परखा ठहराव ही मिलता है।

आज जब अमेरिका और ईरान फिर से एक-दूसरे पर मिसाइलें दाग रहे हैं, होर्मुज स्ट्रेट में तेल के जहाजों पर हमले हो रहे हैं, और कुवैत से लेकर जॉर्डन तक अमेरिकी बेस निशाने पर हैं, तो ओबामा का वह सवाल फिर जिंदा हो गया है।

क्या बम गिराकर ईरान की परमाणु क्षमता को हमेशा के लिए खत्म किया जा सकता है? एक्सपर्ट्स कहते हैं नहीं। बमबारी से प्रोग्राम 2-3 साल पीछे जाएगा, लेकिन ईरान का वैज्ञानिक ज्ञान और बदले की भावना और बढ़ेगी। वहीं, एक लागू होने वाली डील, भले ही टाइम-लिमिटेड हो, रिस्क को कम करती है, इंस्पेक्शन का रास्ता खोलती है और तेल बाजार को स्थिर रखती है।

दूसरी तरफ, बिना डील के हर दिन युद्ध का खतरा बना रहता है, जिसमें हजारों जानें जा सकती हैं और दुनिया की इकॉनमी हिल सकती है।

तो आप कहाँ खड़े हैं? क्या एक अधूरी लेकिन लागू होने वाली डील, बिना किसी डील से बेहतर है? या यह सिर्फ एक बड़ी प्रॉब्लम को कुछ सालों के लिए टालना है?

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 3 Sap 2026

#IranNuclearDeal #JCPOA #Obama #DiplomacyVsWar #IranUS #NuclearRisk #HormuzStrait #MiddleEast #ArmsControl #GlobalSecurity
September 02, 2026

एक महीने की शांति के बाद फिर दहला मिडिल ईस्ट: अमेरिका के IRGC पर हमले के बाद ईरान ने कुवैत, बहरीन और जॉर्डन तक बरसाए मिसाइल-ड्रोन!

एक महीने की शांति के बाद फिर दहला मिडिल ईस्ट: अमेरिका के IRGC पर हमले के बाद ईरान ने कुवैत, बहरीन और जॉर्डन तक बरसाए मिसाइल-ड्रोन!
-Friday World 3 Sep 2026
मिडिल ईस्ट में एक महीने की खामोशी के बाद एक बार फिर जंग के बादल गहरा गए हैं। अमेरिका ने लगातार दूसरे दिन ईरान के अंदर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ठिकानों पर बड़ा हमला किया, और जवाब में ईरान ने पूरे खाड़ी क्षेत्र को निशाने पर ले लिया है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, यह कार्रवाई मंगलवार शाम भारतीय समयानुसार होर्मुज़ स्ट्रेट के पास शुरू हुई। CENTCOM का कहना है कि ईरान इस इलाके में कमर्शियल जहाजों और अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहा था, इसलिए यह प्रहार जरूरी था।

ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, अमेरिकी हमलों में क़ेश्म आइलैंड, बंदर अब्बास, चाबहार, जास्क, सिरिक, असलूयेह, कोनारक और लावन जैसे 8 से ज्यादा इलाकों में धमाके सुने गए। जिरोफ्त के एक सिविलियन एयरपोर्ट पर भी हमला हुआ। सबसे दर्दनाक खबर सिरिक से आई, जहाँ एक शादी समारोह वाले घर पर हमला हुआ। ईरानी रेड क्रिसेंट के मुताबिक, इसमें एक बच्चे सहित 4 लोगों की मौत हो गई और 50 से ज्यादा लोग घायल हो गए।

इस प्रचंड अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने पलटवार करने में देर नहीं लगाई।

तीन देशों पर एक साथ हमला

ईरान ने कुवैत, बहरीन और जॉर्डन तक मिसाइल और ड्रोन की बारिश कर दी। ईरान ने दावा किया है कि उसने जॉर्डन में मौजूद प्रिंस हसन एयरबेस और वहाँ स्थित अमेरिकी मरीन बेस को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया। बहरीन में शेख इसा एयरबेस पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमला हुआ, जहाँ अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। कुवैत ने भी अपने ऊपर ड्रोन हमलों की पुष्टि की है।

जॉर्डन की सेना ने बताया कि उसकी एयर डिफेंस सिस्टम ने उसके हवाई क्षेत्र में घुसी 13 में से 10 बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया। बाकी 3 मिसाइलें वीरान इलाके में गिरीं, जिससे कोई जानहानि नहीं हुई। मफरक शहर में सायरन बजे और रात भर आसमान में रॉकेट रोकने की चमक देखी गई।

IRGC ने एक बयान में कहा कि उसने “हमलावरों को दुखद जवाब दिया है” और दावा किया कि हमले में बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं। हालांकि, अमेरिका ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि CENTCOM के बयान में किसी भी अमेरिकी सैनिक की मौत का जिक्र नहीं है और IRGC का दावा पूरी तरह झूठा है।

जंग का नया पैटर्न

यह पूरा घटनाक्रम बताता है कि अब जंग का पैटर्न बदल गया है। अमेरिका अब सीधे ईरान के अंदर उसके सबसे ताकतवर संगठन IRGC को निशाना बना रहा है, जबकि ईरान सीधे अमेरिका से लड़ने के बजाय उन देशों में मौजूद अमेरिकी बेस को निशाना बना रहा है जहाँ अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं। यह रणनीति पूरे खाड़ी क्षेत्र को युद्ध में खींच सकती है।

ईरानी मीडिया का कहना है कि बहरीन एयरबेस पर हमले में रडार सिस्टम और उन जगहों को टारगेट किया गया जहाँ अमेरिकी सैनिक रहते हैं।

सवाल अब यह है कि क्या यह हमला एक और बड़े युद्ध की शुरुआत है? होर्मुज़ स्ट्रेट से दुनिया का 20% तेल गुजरता है। अगर ईरान और अमेरिका के बीच यह मिसाइल-ड्रोन युद्ध लंबा चला, तो इसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट पर नहीं, बल्कि भारत समेत पूरी दुनिया की तेल कीमतों और सुरक्षा पर पड़ेगा।

फिलहाल तीनों देश - कुवैत, बहरीन और जॉर्डन हाई अलर्ट पर हैं और अमेरिका ने अपने सभी बेसों पर एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव कर दिया है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World 3 Sep 2026

#Iran #USA #MiddleEastCrisis #IRGC #MissileAttack #DroneStrike #Kuwait #Bahrain #Jordan #HormuzStrait
September 02, 2026

ट्रंप का दावा: ईरान की सेना “खत्म”, लेकिन जमीनी हकीकत कह रही है कुछ और ही कहानी!

ट्रंप का दावा: ईरान की सेना “खत्म”, लेकिन जमीनी हकीकत कह रही है कुछ और ही कहानी!
-Friday World 3 Sep 2026
वाशिंगटन से एक बड़ा बयान आया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान की मिलिट्री लगभग पूरी तरह खत्म हो चुकी है। उन्होंने कहा, “ईरान की नेवी चली गई, एयरफोर्स चली गई, एयर डिफेंस खत्म हो गया और उसके लीडर भी मारे गए।”

ट्रंप का यह बयान उस छह महीने लंबे टकराव के बीच आया है जिसे अमेरिका में ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ कहा जा रहा है। इस ऑपरेशन में अमेरिका और इजराइल ने ईरान के हजारों मिलिट्री ठिकानों, हथियार फैक्ट्रियों और कमांड सेंटर्स पर हमले किए। ट्रंप ने इसे जीत के तौर पर पेश किया।

लेकिन क्या सच में ईरान की सेना खत्म हो गई है? अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट खुद ट्रंप के दावे से अलग कहानी बता रही है।

अमेरिकी मीडिया CBS News और अन्य रिपोर्ट्स के मुताबिक, जो जानकारी अमेरिकी अधिकारियों ने दी है वो चौंकाने वाली है:

 1. मिसाइल पावर अभी भी जिंदा है: ईरान के पास मौजूद बैलिस्टिक मिसाइलों और उनके लॉन्चर्स का लगभग 80% हिस्सा अभी भी सुरक्षित है। यानी आधी ताकत अभी भी हमला करने लायक है। पेंटागन की डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी ने खुद माना है कि ईरान के पास अभी भी हजारों मिसाइलें और वन-वे अटैक ड्रोन हैं जो पूरे मिडिल ईस्ट में अमेरिकी और सहयोगी ठिकानों के लिए खतरा हैं।

 2. नेवी खत्म नहीं, सिर्फ घायल है: ट्रंप ने कहा था कि 42 से 154 ईरानी जहाज डुबो दिए गए हैं। लेकिन रिपोर्ट कहती है कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नेवी का लगभग 65% हिस्सा अभी भी ऑपरेशनल है। इसमें उनके खतरनाक फास्ट-अटैक बोट्स भी शामिल हैं। इसका सबूत हाल में तब मिला जब सीजफायर के ऐलान के कुछ घंटों बाद ही ईरानी गनबोट्स ने होर्मुज़ स्ट्रेट में कमर्शियल जहाजों पर हमला किया।

 3. एयरफोर्स का बड़ा हिस्सा बचा हुआ: ट्रंप का दावा है कि एयरफोर्स पूरी तरह तबाह हो गई है। लेकिन अधिकारियों के मुताबिक, ईरान की एयरफोर्स का लगभग दो-तिहाई हिस्सा अभी भी काम कर रहा है। हां, उसे काफी नुकसान हुआ है, रडार और डिटेक्शन सिस्टम कमजोर हुए हैं, लेकिन “खत्म” शब्द बहुत बड़ा है।

तो फिर सवाल उठता है कि ईरान जवाबी हमला कैसे कर पा रहा है?

इसका जवाब मिलिट्री रणनीति में छिपा है। किसी देश के बड़े-बड़े बेस और बिल्डिंग उड़ा देना एक बात है, लेकिन उसकी लड़ने की इच्छाशक्ति और छिपी हुई ताकत को खत्म करना दूसरी बात। ईरान ने पिछले 40 सालों में अपनी ताकत को ‘डिस्पर्स्ड’ यानी बिखरा कर रखा है। मिसाइलें पहाड़ों के नीचे बंकरों में, ड्रोन छोटे-छोटे ट्रकों पर, और स्पीडबोट्स पूरे खाड़ी तट पर फैली हुई हैं।

दूसरा बड़ा हथियार है होर्मुज़ स्ट्रेट। दुनिया का लगभग 20% तेल इसी 33 किलोमीटर चौड़े रास्ते से गुजरता है। ईरान जानता है कि उसे अमेरिका जैसी सुपरपावर से सीधी जंग में नहीं जीतना, बल्कि दुनिया की एनर्जी सप्लाई को धमकाकर दबाव बनाना है।

ट्रंप खुद भी इस बात को मानते हैं। उन्होंने कहा था, “वे सख्त लोग हैं। वे स्मार्ट लोग हैं। लेकिन वे बहुत बुरे हैं।” उन्होंने यह भी माना कि सबसे बुरा सीनारियो यह हो सकता है कि एक बुरे लीडर को हटाकर उससे भी बुरा लीडर आ जाए।

इसलिए ट्रंप की भाषा एक पॉलिटिकल मैसेज ज्यादा लगती है, मिलिट्री हकीकत कम। अमेरिका ने ईरान को बुरी तरह घायल जरूर किया है, उसकी हवा में ताकत कम हुई है, लेकिन उसे “खत्म” कहना जल्दबाजी है। ईरान आज भी एक ‘घायल लेकिन खतरनाक’ दुश्मन है, जिसके पास जवाबी हमले की क्षमता मौजूद है।

युद्ध में बिल्डिंग गिराना आसान है, लेकिन जंग जीतने के लिए दुश्मन की क्षमता और इरादे दोनों को खत्म करना पड़ता है — और ईरान के मामले में दूसरा हिस्सा अभी भी बाकी है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World 3 Sep 2026

#Trump #Iran #USIranTensions #OperationEpicFury #MiddleEast #Geopolitics #IranMilitary #StraitOfHormuz #WorldNews #FactCheck


September 02, 2026

ગુજરાતના ખેડૂત વરસાદની અછતથી પાયમાલ : ખેડૂત-ખેતી-ગામડું બચાવવા તાત્કાલિક દુષ્કાળ જાહેર કરો : અમિત ચાવડા

ગુજરાતના ખેડૂત વરસાદની અછતથી પાયમાલ : ખેડૂત-ખેતી-ગામડું બચાવવા તાત્કાલિક દુષ્કાળ જાહેર કરો : અમિત ચાવડા
-Friday World 2 Sep 2026
• ખેડુતોનું ચાલુ વર્ષનું વીજબીલ અને પાક ધિરાણ સંપૂર્ણ પણે માફ કરવામાં આવે : અમિત ચાવડા
• દુષ્કાળગ્રસ્ત જીલ્લાઓમાં ૭ કિ.મી. ની ત્રીજ્યામાં ઘાસચારા વિતરણ કેન્દ્ર તથા પાંજરાપોળ ખોલવામાં આવે : અમિત ચાવડા 
• ખેડુતો, ખેત મજુરો અને નાના રોજમદારોની રોજીરોટી માટે રાહત કામો ચાલુ કરવામાં આવે : અમિત ચાવડા
• મુખ્યમંત્રી દિલ્હી-વિદેશના પ્રવાસમાં અને નાયબ મુખ્યમંત્રી રીલ્સ બનાવવામાં વ્યસ્ત, પરંતુ ખેડૂતના ખેતરે જવાનો સમય નથી : અમિત ચાવડા

ગુજરાતમાં નબળા ચોમાસા અને અનેક વિસ્તારોમાં લાંબા સમયથી વરસાદ ખેંચાઈ જવાના કારણે ખેડૂતો અને પશુપાલકોની સ્થિતિ અત્યંત ગંભીર બની છે. ગુજરાત પ્રદેશ કોંગ્રેસ સમિતિના પ્રમુખશ્રી અમિત ચાવડાએ આજે પત્રકાર પરિષદને સંબોધતા જણાવ્યું હતું કે, “મુખ્યમંત્રી અને નાયબ મુખ્યમંત્રી આકાશમાં ઉડી રહ્યા છે, પરંતુ ગુજરાતના ખેડૂતોની જમીન પરની વ્યથા અને પીડા જોવા માટે ક્યારે ખેતરે ઉતરશે?”
ગુજરાતનો જગતનો તાત આજે ચારે બાજુથી મુશ્કેલીમાં છે. એક તરફ મોંઘું ખાતર, મોંઘું બિયારણ, મોંઘા જંતુનાશક અને ખેતીના વધતા ખર્ચનો બોજ છે, બીજી તરફ પાકને પૂરતો અને પોષણક્ષમ બજારભાવ મળતો નથી. ક્યારેક અતિવૃષ્ટિ, ક્યારેક કમોસમી વરસાદ અને હવે અનેક વિસ્તારોમાં લાંબો કોરો સમય આ બધાના કારણે ખેડૂતની આર્થિક કમર તૂટી રહી છે.
આજે ગુજરાતના ખેડૂતોને કુદરતી સંકટ સામે સરકારની મજબૂત સહાયની જરૂર છે. પરંતુ “ડબલ એન્જિન” સરકાર જાહેરાતો અને પ્રચારમાં વ્યસ્ત છે, જ્યારે ખેડૂત દેવા, વધતા ખર્ચ અને પાકના જોખમ વચ્ચે ફસાયો છે.
NCRBના ૨૦૨૩ના આંકડા મુજબ દેશમાં ખેતી સાથે સંકળાયેલા ૧૦,૭૮૬ લોકો ૪,૬૯૦ ખેડૂતો, ખેડૂત અને ૬,૦૯૬ કૃષિ મજૂરો, આત્મહત્યા કરી હતી. આ આંકડો દેશના કૃષિ સંકટની ગંભીરતા દર્શાવે છે. 
ગુજરાતમાં આજે વરસાદની અછત આ સંકટને વધુ ગંભીર બનાવી રહી છે. IMDના ૨ સપ્ટેમ્બર ૨૦૨૬ના આંકડા મુજબ રાજ્યમાં ચોમાસા દરમિયાન સામાન્ય કરતાં આશરે ૧૫ ટકા ઓછો વરસાદ નોંધાયો છે અને ૧૫ જિલ્લાઓ વરસાદની અછતની સ્થિતિમાં છે. દેવભૂમિ દ્વારકામાં આશરે ૮૮ ટકા, પોરબંદરમાં ૭૩ ટકા તથા જામનગર અને કચ્છમાં આશરે ૬૦ ટકા વરસાદની ઘટ નોંધાઈ છે. 
આ સ્થિતિને માત્ર આંકડાઓથી નહીં પરંતુ ગામડે-ગામડે પાકની વાસ્તવિક સ્થિતિના સર્વેક્ષણથી જોવાની જરૂર છે.
ગુજરાત પ્રદેશ કોંગ્રેસ સમિતિ સરકાર સમક્ષ નીચેની તાત્કાલિક માંગણીઓ છે કે:

1. ગુજરાત સરકારે જ બનાવેલા કાયદા મુજબ જે જે જિલ્લા, તાલુકા અછતગ્રસ્ત જાહેર થવાને પાત્ર છે તે તમામ જિલ્લા તાલુકાઓને તાત્કાલિક દુષ્કાળગ્રસ્ત જાહેર કરવામાં આવે
2. સૌરાષ્ટ્રના ૧૧૫ ડેમો સૌની યોજનાથી ભરવાની જોગવાઈ છે તે તમામ ડેમો તાત્કાલિક ભરવામાં આવે,
3. ખેડૂતોનું ચાલુ વર્ષનું પાક ધિરાણ સંપૂર્ણપણે માફ કરવામાં આવે,
4. લાગુ પડતા તમામ તાલુકાઓમાં નિયમોનુસાર ૭ કિલોમીટરની ત્રિજ્યમાં ઘાસચારા વિતરણ કેન્દ્રો ખોલવામાં આવે,
5. દુષ્કાળગ્રસ્ત તાલુકાઓમાં નિયમોનુસાર પાંજરાપોળ ખોલવામાં આવે,
6. ખેડૂતોનું ચાલુ વર્ષનું વિજબીલ (ફિક્સ) સંપૂર્ણપણે માફ કરવામાં આવે.
7. ખેડૂતો, ખેત મજૂરોને રોજીરોટી માટે રાહતકામો ચાલુ કરવામાં આવે.
8. ગામડાઓ, નગરપાલિકાઓમાં નિયમિત શુદ્ધ પીવાનું પાણી આપવામાં આવે.

શ્રી અમિત ચાવડાએ વધુમાં જણાવ્યું હતું કે, “એક બાજુ ગુજરાતનો ખેડૂત વરસાદ માટે આકાશ સામે જોઈ રહ્યો છે, બીજી બાજુ સરકારના મુખ્યમંત્રી ક્યારેક દિલ્હી તો ક્યારેક વિદેશના પ્રવાસે જોવા મળે છે અને નાયબ મુખ્યમંત્રી રીલ્સ બનાવવામાં વ્યસ્ત જોવા મળે છે. સરકારને કહેવા માંગીએ છીએ કે પ્રવાસ કરો, પ્રચાર કરો, રીલ્સ બનાવો. પરંતુ પહેલા ગુજરાતના ખેડૂતના ખેતરે જાઓ. તેની આંખોમાં રહેલી ચિંતા જુઓ, તેની જમીનની સ્થિતિ જુઓ અને તેની પીડા અનુભવો.”
ખેડૂત બચશે તો ખેતી બચશે, ખેતી બચશે તો ગામડું બચશે અને ગામડું બચશે તો ગુજરાત બચશે. તેથી સરકાર તાત્કાલિક ખેડૂત રાહત પેકેજ જાહેર કરે અને અસરગ્રસ્ત વિસ્તારોમાં યુદ્ધના ધોરણે રાહત કામગીરી શરૂ કરે.
ગુજરાત કિસાન કોંગ્રેસના અધ્યક્ષશ્રી જયેશ પટેલે જણાવ્યું હતું કે ઓછા વરસાદના કારણે ખેડૂતો આર્થિક પાયમાલીમાં ધકેલાઈ રહ્યા છે. સરકાર તાત્કાલિક ખેડૂત અને ખેતી બચાવવા રાહત પગલાં ભરે. કિસાન કોંગ્રેસ દ્વારા ઓછા વરસાદવાળા જિલ્લાઓ અને તાલુકાઓમાં ખેડૂતોને ન્યાય અને રાહત મળે તે માટે તા. ૭ સપ્ટેમ્બર ૨૦૨૬ના રોજ આંદોલનાત્મક કાર્યક્રમો યોજવામાં આવશે.
કિસાન કોંગ્રેસના અગ્રણીશ્રી પાલભાઈ આંબલિયાએ જણાવ્યું હતું કે સરકારે સૌની યોજના દ્વારા ૧૦૭ ડેમ ભરવાની વાતો કરી હતી. આજે ઓછા વરસાદની વિકટ પરિસ્થિતિમાં આ યોજનાનો ખેડૂતોને વાસ્તવિક લાભ ક્યાં મળ્યો તે અંગે સરકાર જવાબ આપે. ખેડૂતોને પાણી, સિંચાઈ અને રાહતના મુદ્દે સરકાર તાત્કાલિક સ્પષ્ટતા કરે.
આ પત્રકાર પરિષદમાં ગુજરાત પ્રદેશ કોંગ્રેસ સમિતિના મીડિયા કન્વીનર અને પ્રવક્તા ડૉ. મનિષ એમ. દોશી, કચ્છ જિલ્લા કોંગ્રેસ સમિતિના પ્રમુખશ્રી વી.કે. હુંબલ, પોરબંદર જિલ્લા કોંગ્રેસ પ્રમુખશ્રી રામભાઈ મારુ તથા પ્રદેશ કોંગ્રેસ સમિતિના મીડિયા પેનલિસ્ટ શ્રી મુકેશ પંચાલ ઉપસ્થિત રહ્યા હતા.

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World 2 Sep 2026

(ડૉ. મનિષ એમ. દોશી)
મીડીયા કન્વીનર અને પ્રવક્તા
September 02, 2026

"हमने यह संकट पैदा नहीं किया, पर कीमत हम चुका रहे हैं" - नेपाल ने अमेरिका, चीन और भारत को ठहराया जिम्मेदार, 5 बिलियन डॉलर के क्लाइमेट हर्जाने की मांग

"हमने यह संकट पैदा नहीं किया, पर कीमत हम चुका रहे हैं" - नेपाल ने अमेरिका, चीन और भारत को ठहराया जिम्मेदार, 5 बिलियन डॉलर के क्लाइमेट हर्जाने की मांग
- Friday World 2 Sep 2026
हमें दान नहीं, वळतर चाहिए - 1000 मौतों के बाद नेपाल का दुनिया के बड़े प्रदूषकों को अल्टीमेटम

"हमने यह संकट पैदा नहीं किया, पर कीमत हम चुका रहे हैं" - नेपाल ने अमेरिका, चीन और भारत को ठहराया जिम्मेदार, 5 बिलियन डॉलर के क्लाइमेट हर्जाने की मांग

नेपाल ने अब भीख मांगना बंद कर दिया है। उसने इंसाफ मांगना शुरू कर दिया है।

26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा पर ग्लेशियर और चट्टान का एक बड़ा हिस्सा टूटकर गिरा। वैज्ञानिकों ने इसे 'हिमालयन सुनामी' नाम दिया। 20-30 मीटर ऊंची और 180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से पानी की दीवार भोटेकोशी नदी में घुसी। रास्ते में जो आया बह गया - घर, पुल, सड़कें, गाड़ियां और 5 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट।

एक हफ्ते बाद आंकड़ा दिल दहला रहा है - नेपाल में 1000 से ज्यादा मौतें, 1050 की पुष्टि हो चुकी है। 4000 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं, जिनमें 583 विदेशी नागरिक भी हैं। तिब्बत में 16 की मौत और 550 लापता। 12,000 लोगों को अब तक रेस्क्यू किया गया है, 639 लोग अभी भी टूटे हुए पावर स्टेशन में फंसे हैं। नुवाकोट जिले के बिदुर नगरपालिका में एक ही घर के मलबे से 24 शव निकले - 13 महिलाएं, 11 पुरुष और एक बच्चा।

काठमांडू में लावारिस शवों का सामूहिक अंतिम संस्कार शुरू हो चुका है। UNDP के मुताबिक 22 लाख टन मलबा जमा है। नुकसान का अंदाजा 4 से 5 बिलियन डॉलर, जो नेपाल की GDP का 10% है।

और इसी मलबे के बीच से नेपाल ने एक नई विदेश नीति का ऐलान किया है।

दान से न्याय की ओर

विदेश मंत्री शिसिर खनल ने कांतिपुर TV को दिए इंटरव्यू में कहा - "नेपाल का ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन न के बराबर है। फिर भी हम एक ऐसे वैश्विक संकट की सबसे बड़ी कीमत चुका रहे हैं जिसे हमने बनाया ही नहीं। ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना और ये पहाड़ी सुनामी सीधे ग्लोबल वॉर्मिंग का नतीजा हैं।"

उन्होंने साफ कहा - "हम अपनी डिप्लोमेसी को 'सहायता' से हटाकर 'न्याय और मुआवजे' की तरफ ले जा रहे हैं। यह चैरिटी का मामला नहीं है, यह कानूनी और नैतिक देनदारी का मामला है।"

नेपाल के वित्त मंत्रालय ने अमेरिका, चीन, भारत और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों को औपचारिक क्लाइमेट कंपनसेशन क्लेम लेटर भेज दिया है। साथ ही UN के Loss and Damage Fund में भी 5 बिलियन डॉलर की मांग दायर की है।

खनल ने तीन सबसे बड़े उत्सर्जकों का नाम लिया - चीन, अमेरिका और भारत। उन्होंने कहा इन देशों की ऐतिहासिक जिम्मेदारी है कि वे नेपाल जैसे कमजोर देशों को मुआवजा दें।

सिर्फ नेपाल नहीं, 2 अरब लोगों का सवाल

नेपाल ने इस मुद्दे को सिर्फ अपने तक सीमित नहीं रखा। खनल ने चेतावनी दी - "यह सभ्यता के अस्तित्व का सवाल है। अगर हिमालय के ग्लेशियर खत्म हुए तो गंगा, त्रिशूली समेत तमाम नदियों में पानी का संकट पैदा होगा। 2 अरब से ज्यादा दक्षिण एशियाई लोगों की जल सुरक्षा हमेशा के लिए खतरे में पड़ जाएगी। हम सिर्फ नेपाल के लिए नहीं, पूरे दक्षिण एशिया की सभ्यता के लिए आवाज उठा रहे हैं।"

यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्लाइमेट चेंज पर दुनिया का ध्यान फिर बंट रहा है। 2022 में COP27 में Loss and Damage Fund बनाने का वादा हुआ था, लेकिन पैसा अभी भी कागजों पर है।

बेफाम औद्योगीकरण ने कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन जैसी गैसों की चादर बना दी है। ग्लेशियर पिघल रहे हैं, पहाड़ खोखले हो रहे हैं। नेपाल जैसा देश जिसने धुएं के कारखाने नहीं लगाए, वह आज सबसे पहले डूब रहा है।

नेपाल का संदेश साफ है - हमें आपकी दया नहीं, आपका कर्ज चुकाना है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 2 Sep 2026

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September 02, 2026

अमेरिकन युद्ध पोत अब्राहम लिंकन के पांच हजार सैनिक थाईलैंड मे!!!!पटाया में हड़कंप, सेक्स टूरिज्म पर बड़ा एक्शन

अमेरिकन युद्ध पोत अब्राहम लिंकन के पांच हजार सैनिक थाईलैंड मे!!!!पटाया में हड़कंप, सेक्स टूरिज्म पर बड़ा एक्शन
-Friday World 2 Sep 2026
थाईलैंड में अमेरिकी जंगी जहाज की एंट्री से पहले पटाया में हड़कंप, सेक्स टूरिज्म पर बड़ा एक्शन

286 दिन समंदर में, 5000 थके हुए सैनिक और एक शहर जो 51 साल पहले इन्हीं सैनिकों से बना था - पटाया में फिर लौटा इतिहास

अमेरिका का दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन आखिरकार 2 सितंबर को थाईलैंड के लैम चाबांग बंदरगाह पर लंगर डाल चुका है। पिछले साल 21 नवंबर को सैन डिएगो से निकला यह 1 लाख टन का परमाणु ऊर्जा से चलने वाला युद्धपोत 286 दिन लगातार समंदर में रहा है। यह अमेरिकी नौसेना के इतिहास में सबसे लंबी तैनातियों में से एक है।

यह जहाज मूल रूप से साउथ चाइना सी के लिए रवाना हुआ था, लेकिन 28 फरवरी को ईरान के साथ शुरू हुए युद्ध के बाद इसे मिडिल ईस्ट डायवर्ट कर दिया गया था। महीनों की लड़ाई, ब्लॉकेड ड्यूटी, सप्लाई की कमी और मानसिक तनाव की खबरों के बीच इस पर सवार लगभग 5000 सेलर और मरीन अब 2 से 6 सितंबर तक थाईलैंड में आराम करेंगे।

और उनके आराम की जगह है - पटाया।

पटाया में क्यों हाई अलर्ट?

पटाया बैंकॉक से 150 किमी दक्षिण-पूर्व में बसा समंदर किनारे का शहर है। वॉकिंग स्ट्रीट, नाइटलाइफ, बीच और क्लब के लिए दुनिया भर में मशहूर। अमेरिकी एजेंसी FBI ने कभी इसे दुनिया के टॉप सेक्स टूरिज्म डेस्टिनेशन में गिना था।

जैसे ही 5000 अमेरिकी सैनिकों के आने की खबर पक्की हुई, थाई पुलिस ने पूरे शहर में छापेमारी शुरू कर दी। 29 अगस्त से अब तक 40 से 50 लोगों को वेश्यावृत्ति के शक में हिरासत में लिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक इसमें 18 थाई, 5 लाओस और 2 युगांडा की महिलाएं शामिल हैं। पटाया बीच, सेकंड रोड और वॉकिंग स्ट्रीट पर 600 से ज्यादा पुलिस अफसर तैनात किए गए हैं।

थाईलैंड में वेश्यावृत्ति कानूनन प्रतिबंधित है। ग्राहक को बुलाना, वेश्यालय चलाना और इससे कमाई करना अपराध है। लेकिन हकीकत यह है कि यह सब कागजों पर है। टूरिज्म से जुड़ी अर्थव्यवस्था में इसका बड़ा हिस्सा है, इसलिए सरकार आंख मूंद लेती है। इस बार मामला इंटरनेशनल प्रोटोकॉल का है, इसलिए दिखावे की कार्रवाई जरूरी हो गई है।

पटाया के मेयर पोरामासे न्गामपिचेस ने कहा है कि सैनिकों के लिए लैम चाबांग से पटाया तक 40 बसें लगाई गई हैं। उन्हें वॉकिंग स्ट्रीट जाने की इजाजत है, लेकिन रात 2 बजे के बाद बीयर बार में रुकने से मना किया गया है। जेट स्की, बंजी जंपिंग, बॉक्सिंग और कैनबिस के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक है।

इकोनॉमी को लगेगा बूस्टर डोज़

फरवरी में ईरान युद्ध शुरू होने के बाद थाईलैंड की टूरिज्म इकोनॉमी सुस्त पड़ गई थी। पटाया के होटल, बार, रेस्टोरेंट और दुकानदारों को अब उम्मीद है कि अमेरिकी सैनिकों से जान आएगी।

मेयर के मुताबिक हर सैनिक अगर रोज 100 डॉलर भी खर्च करे, तो 5 दिन में 10 करोड़ बाहट (लगभग 25 करोड़ रुपये) तक का कारोबार हो सकता है। कुछ अनुमान 1.5 करोड़ बाहट तक भी बता रहे हैं। इसीलिए दुकानदारों से कहा गया है कि दाम न बढ़ाएं और लूटपाट न करें। बाहर एक बार के बाहर बोर्ड भी लगा है - "Welcome all US military personnel. Thank you for your service"

51 साल पुराना कनेक्शन

सबसे दिलचस्प बात यह है कि पटाया का जन्म ही अमेरिकी सैनिकों से हुआ था। 51 साल पहले वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिकी सैनिक आराम करने के लिए इस छोटे से मछुआरे गांव में रुकते थे। वहीं से यह गांव धीरे-धीरे आज का इंटरनेशनल सिन सिटी और फैमिली टूरिस्ट हब बन गया। इतिहास खुद को दोहरा रहा है।

आज USS लिंकन के डेक पर खड़े जंग लगे लड़ाकू विमान और थके हुए चेहरे इस बात की गवाही दे रहे हैं कि युद्ध कितना लंबा खिंचा है। अमेरिकी कांग्रेस में भी इस तैनाती को लेकर सवाल उठे हैं। सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने जहाज पर पानी में गंदगी, सप्लाई की कमी और मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने की रिपोर्ट पर चिंता जताई है।

अब सवाल यह है कि क्या पटाया इन सैनिकों को वह सुकून दे पाएगा जिसके लिए वे 286 दिन से इंतजार कर रहे हैं, और क्या यह कार्रवाई सेक्स टूरिज्म की असली तस्वीर बदल पाएगी या सिर्फ 6 सितंबर तक का पर्दा है?

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 2 Sep 2026

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Tuesday, 1 September 2026

September 01, 2026

'होर्मुज पर हमारा कब्जा है' - ट्रंप के एक पोस्ट से दुनिया में हड़कंप, कच्चा तेल $96 पार, शेयर बाजार धड़ाम

'होर्मुज पर हमारा कब्जा है' - ट्रंप के एक पोस्ट से दुनिया में हड़कंप, कच्चा तेल $96 पार, शेयर बाजार धड़ाम
-Friday World 2 Sep 2026
वॉशिंगटन से आई एक सोशल मीडिया पोस्ट ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला कर रख दिया है।

पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल (Truth Social) पर एक ऐसा दावा किया, जिसके बाद इंटरनेशनल ऑयल मार्केट में आग लग गई और एशिया से लेकर अमेरिका तक शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखी गई।

 ट्रंप ने क्या कहा?

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि व्यापारिक और सामरिक रूप से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) पर अब अमेरिका का लगभग पूर्ण नियंत्रण हो चुका है। 

इतना ही नहीं, उन्होंने ईरान की अर्थव्यवस्था को लेकर भी बड़ा बयान दिया। ट्रंप ने लिखा कि ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से तबाह हो चुकी है और वह अब घुटनों पर है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया कि वह ईरान के साथ किसी भी तरह की डील या बातचीत के मूड में नहीं हैं। उन्होंने लिखा - 

> "ईरान कोई समझौते पर साइन करता है या नहीं, मुझे इसकी जरा भी परवाह नहीं है। मौजूदा स्थिति अमेरिका के लिए बेहद मजबूत और अनुकूल है, क्योंकि होर्मुज पर हमारा नियंत्रण है और ईरान की आर्थिक स्थिति कंगाल हो चुकी है।"

उनके इस एक बयान के बाद दुनिया भर में भूचाल आ गया।

 क्यों इतना महत्वपूर्ण है होर्मुज स्ट्रेट?

आप सोच रहे होंगे कि एक समुद्री रास्ते पर इतना हंगामा क्यों? तो समझिए, होर्मुज स्ट्रेट कोई आम रास्ता नहीं है। यह फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला एक संकरा जलमार्ग है, जो ईरान और ओमान के बीच में है।

दुनिया का एनर्जी हाइवे: दुनिया के कुल कच्चे तेल की खपत का लगभग 20% से 21% तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। रोजाना करीब 2 करोड़ बैरल तेल के टैंकर इसी संकरे रास्ते से निकलते हैं। सऊदी अरब, ईरान, इराक, कुवैत, यूएई और कतर जैसे बड़े तेल उत्पादक देश अपना तेल दुनिया तक इसी रास्ते से पहुंचाते हैं।

अगर यह रास्ता बंद हो गया या यहां किसी भी तरह का सैन्य टकराव हुआ, तो पूरी दुनिया में तेल की सप्लाई रुक जाएगी। इसी डर ने बाजार को दहला दिया है।

 कच्चे तेल के दामों में लगी आग

ट्रंप के बयान के आते ही इंटरनेशनल मार्केट में तेल खरीदने की होड़ मच गई और दाम रॉकेट की तरह ऊपर चले गए।

- ब्रेंट क्रूड (Brent Crude): $96 प्रति बैरल के पार निकल गया, जो पिछले कई महीनों का उच्चतम स्तर है।
- WTI क्रूड (WTI Crude): अमेरिकी कच्चा तेल $92 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया।
- मर्बन क्रूड (Murban Crude): एशिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला मर्बन क्रूड तो $104 प्रति बैरल से भी ऊपर ट्रेड करता देखा गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव और बढ़ा तो तेल $110 से $120 तक भी जा सकता है।

 शेयर बाजारों में हाहाकार, भारत पर क्या असर होगा?

तेल के दाम बढ़ने का सीधा मतलब है महंगाई बढ़ना। इसी डर से निवेशकों ने बाजार से पैसा निकालना शुरू कर दिया।

जापान का निक्केई, साउथ कोरिया का कोस्पी, हांगकांग का हैंगसेंग समेत सभी प्रमुख एशियाई बाजार लाल निशान में बंद हुए। अमेरिकी फ्यूचर्स मार्केट में भी भारी गिरावट देखी गई।

भारत के लिए खतरे की घंटी: भारत अपनी 85% से ज्यादा तेल की जरूरत आयात से पूरी करता है। तेल महंगा होने से भारत का इम्पोर्ट बिल बढ़ेगा, रुपया कमजोर होगा और पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से आम आदमी पर महंगाई की मार पड़ेगी। रिजर्व बैंक के लिए ब्याज दरों को काबू में रखना और भी मुश्किल हो जाएगा।

 आगे क्या होगा?

फिलहाल दुनिया की नजरें वॉशिंगटन और तेहरान पर टिकी हैं। ईरान ने अभी तक ट्रंप के इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर अमेरिका ने होर्मुज पर कब्जे की कोशिश की तो वह पूरे क्षेत्र को युद्ध में झोंक देगा।

अमेरिका ने इस इलाके में अपने युद्धपोतों की तैनाती पहले ही बढ़ा दी है। ऐसे में एक छोटी सी चिंगारी भी बड़े युद्ध का रूप ले सकती है। आने वाले कुछ दिन वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम होने वाले हैं।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World 2 Sep 2026

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