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यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Friday, 11 September 2026

September 11, 2026

यूपी की 403 सीटों पर बीजेपी का गुप्त सर्वे - 128 विधायकों पर लटकी तलवार, 61 हारी हुई सीटों पर नया प्लान

यूपी की 403 सीटों पर बीजेपी का गुप्त सर्वे - 128 विधायकों पर लटकी तलवार, 61 हारी हुई सीटों पर नया प्लान
-Friday World September 12,2026 
                       प्रतीकात्मक तस्वीर 

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट अभी से सुनाई देने लगी है। लखनऊ से दिल्ली तक बीजेपी के रणनीतिकारों ने मिशन 2027 के लिए होमवर्क शुरू कर दिया है। पार्टी के अंदरखाने हुए एक गुप्त और व्यापक सर्वे ने मौजूदा विधायकों की नींद उड़ा दी है।

125-128 विधायकों के खिलाफ एंटी-इनकम्बेंसी

सूत्रों के मुताबिक बीजेपी ने यूपी की सभी 403 विधानसभा सीटों पर एक स्वतंत्र एजेंसी के जरिए गोपनीय सर्वे कराया है। इस आंतरिक रिपोर्ट में जो आंकड़े सामने आए हैं, वो चौंकाने वाले हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि लगभग 125 से 128 मौजूदा बीजेपी विधायकों के खिलाफ उनके ही क्षेत्र में मजबूत एंटी-इनकम्बेंसी है।

इन विधायकों के खिलाफ शिकायतों की लिस्ट लंबी है। सबसे बड़ा आरोप है - निष्क्रियता। कई विधायक पिछले 3 साल में अपने क्षेत्र में सक्रिय नहीं दिखे। दूसरा आरोप मतदाताओं और कार्यकर्ताओं की अनदेखी का है। तीसरा और सबसे गंभीर आरोप स्थानीय स्तर पर खनन, ठेके और ट्रांसफर-पोस्टिंग में दखलअंदाजी का है, जिससे पार्टी की छवि खराब हो रही है।

पार्टी हाईकमान का मानना है कि इन 125-128 सीटों पर अगर मौजूदा चेहरे को दोहराया गया तो नुकसान हो सकता है। इसलिए इन सीटों पर टिकट काटे जाने की प्रबल संभावना है। 2022 के चुनाव में भी बीजेपी ने लगभग 100 से ज्यादा मौजूदा विधायकों के टिकट काट कर नया प्रयोग किया था और उसे फायदा भी मिला था। इस बार भी वही फॉर्मूला अपनाया जा सकता है।

61 हारी हुई सीटों पर विशेष फोकस

सर्वे का दूसरा हिस्सा उन 61 सीटों पर केंद्रित है, जहां बीजेपी लगातार हारती रही है। ये वो सीटें हैं जहां समाजवादी पार्टी, बसपा या कांग्रेस का दबदबा रहा है, या जहां मुस्लिम-यादव समीकरण बीजेपी के खिलाफ जाता है।

पार्टी इन 61 सीटों को 'मिशन 61' के तौर पर देख रही है। रणनीति साफ है - यहां बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करना, स्थानीय सामाजिक समीकरण के हिसाब से नया चेहरा लाना और सरकार की योजनाओं का सीधा लाभ उन वर्गों तक पहुंचाना जो अब तक दूर रहे।

2024 के झटके के बाद 2027 में नई शुरुआत

इस पूरी कवायद के पीछे 2024 के लोकसभा चुनाव का झटका है। यूपी में बीजेपी 2019 में 62 सीटें जीती थी, जो 2024 में घटकर 33 पर आ गई। यह गिरावट नेतृत्व के लिए खतरे की घंटी थी। समीक्षा में पाया गया कि विधायकों की निष्क्रियता और जनता से दूरी का खामियाजा लोकसभा में भुगतना पड़ा।

इसीलिए नेतृत्व अब 2027 के लिए किसी भी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहता। संदेश साफ है - परफॉर्मेंस नहीं तो टिकट नहीं। विधायक हों या मंत्री, सभी के काम का हिसाब बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं और जनता के फीडबैक से लिया जा रहा है।

बीजेपी में एक कहावत बहुत मशहूर है - "बीजेपी में टिकट कभी पक्का नहीं होता।" इस गुप्त सर्वे ने इस कहावत को फिर से सच साबित कर दिया है। यही वजह है कि लखनऊ से लेकर हर जिले में विधायकों में बेचैनी बढ़ गई है। कई विधायक अब अचानक अपने क्षेत्रों में सक्रिय हो गए हैं, जनसुनवाई कर रहे हैं और कार्यकर्ताओं से मिल रहे हैं। लेकिन क्या यह सक्रियता देर से आई है, इसका फैसला आने वाले महीनों में होने वाले अगले दो-तीन सर्वे करेंगे।

तय है कि यूपी बीजेपी 2027 में एक नए चेहरे और नए जोश के साथ मैदान में उतरने वाली है, जहां पुराने नामों की जगह नए और जिताऊ चेहरों को मौका मिलेगा।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World September 12,2026 

#UttarPradesh #BJP #UPPolitics #Mission2027 #BJPSurvey #AntiIncumbency #YogiAdityanath #UPElections #BJPTicket #Lucknow


September 11, 2026

मोखा पर हूती कब्जा, सऊदी अकेला और अमेरिकी MRAP पर जीत का पोज - लाल सागर में बदल गया युद्ध का नक्शा

मोखा पर हूती कब्जा, सऊदी अकेला और अमेरिकी MRAP पर जीत का पोज - लाल सागर में बदल गया युद्ध का नक्शा
- Friday World September 12,2026 
लाल सागर के किनारे बसा यमन का ऐतिहासिक बंदरगाह मोखा एक बार फिर वैश्विक सुर्खियों में है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक सैन्य सूत्रों और चश्मदीदों ने पुष्टि की है कि ईरान समर्थित अंसार अल्लाह आंदोलन, जिसे हूती विद्रोही भी कहा जाता है, ने सऊदी समर्थित सरकारी बलों से इस अहम बंदरगाह शहर पर कब्जा कर लिया है। यह कब्जा सिर्फ एक शहर की लड़ाई नहीं, बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट के शक्ति संतुलन में बहुत बड़ा मोड़ है।

बाब अल-मंदेब से सिर्फ 75 KM दूर

मोखा की भौगोलिक स्थिति ही इसे इतना महत्वपूर्ण बनाती है। इस बंदरगाह पर कब्जे के बाद हूती लड़ाके दुनिया के सबसे व्यस्ततम व्यापारिक मार्गों में से एक, बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से मात्र 75 किलोमीटर की दूरी पर आ गए हैं। यह जलडमरूमध्य लाल सागर का दक्षिणी गेट है, जो एशिया को यूरोप से स्वेज नहर के जरिए जोड़ता है। दुनिया का लगभग 12 प्रतिशत वैश्विक व्यापार इसी रास्ते से गुजरता है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि मोखा हाथ में आने से हूतियों को न सिर्फ लाल सागर में आवाजाही पर नजर रखने की क्षमता मिलेगी, बल्कि सऊदी अरब के पश्चिमी तट पर दबाव बनाने का एक नया मोर्चा भी खुल गया है।

सऊदी अरब अकेला, पाकिस्तान ने भी खींचे हाथ

इस घटनाक्रम के बाद सबसे ज्यादा असहज स्थिति सऊदी अरब की नजर आ रही है। कभी यमन युद्ध में सऊदी गठबंधन को कई देशों का खुला समर्थन प्राप्त था, लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है।

सबसे बड़ा झटका इस्लामाबाद से आया है। सूत्रों के अनुसार सऊदी अरब ने हाल ही में पाकिस्तान के साथ हुए डिफेंस पैक्ट के तहत मदद की उम्मीद की थी, लेकिन पाकिस्तान ने यमन के इस नए मोर्चे पर सऊदी सेना की सीधे तौर पर मदद करने से इनकार कर दिया है। पाकिस्तान पहले से ही अपनी आंतरिक और सीमा की चुनौतियों में उलझा है और वह यमन के दलदल में फिर से नहीं फंसना चाहता। इस इनकार के बाद सऊदी अरब कूटनीतिक तौर पर खुद को अकेला महसूस कर रहा है।

MRAP पर पोज और वायरल वीडियो ने मचाया तहलका

मोखा पर कब्जे के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ जिसने इंटरनेट पर बहस को और तेज कर दिया। इस वीडियो में एक हूती लड़ाका सऊदी सेना से छीने गए अमेरिकी निर्मित MRAP बख्तरबंद वाहन पर जीत के अंदाज में पोज देता नजर आ रहा है।

MRAP यानी Mine-Resistant Ambush Protected वाहन, जिसे अमेरिका ने सऊदी सेना को करोड़ों डॉलर की सैन्य सहायता के तहत दिया था। अब वही वाहन हूतियों के कब्जे में है।

इस वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर मीम्स और तीखी टिप्पणियों की बाढ़ आ गई। यूजर्स सऊदी अरब की सैन्य तैयारियों की चुटकी ले रहे हैं और सबसे ज्यादा निशाना अमेरिकी टैक्सपेयर्स पर है। लोगों ने तंज कसते हुए लिखा - "अमेरिकी टैक्सपेयर्स का शुक्रिया, जिन्होंने हूतियों के बढ़ते खिलौनों के कलेक्शन के लिए पैसे दिए।" यह वीडियो इस बात का प्रतीक बन गया है कि कैसे अरबों डॉलर के हथियार युद्ध के मैदान में पाला बदल लेते हैं।

युद्ध का नया अध्याय

मोखा पोर्ट का हाथ से निकलना सऊदी समर्थित सरकार के लिए सामरिक और मनोवैज्ञानिक दोनों रूप से बड़ा झटका है। यह बंदरगाह हथियारों, रसद और मानवीय सहायता के लिए एक लाइफलाइन माना जाता था। अब इसके हूती नियंत्रण में जाने से लाल सागर में शिपिंग कंपनियों की चिंता और बढ़ गई है और क्षेत्र में तेल की कीमतों पर भी दबाव बन सकता है।

फिलहाल सऊदी गठबंधन की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन जमीनी हकीकत साफ इशारा कर रही है कि लाल सागर की जंग अब एक नए और ज्यादा खतरनाक दौर में प्रवेश कर चुकी है, जहाँ एक तरफ हूती अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं और दूसरी तरफ उनके पुराने विरोधी धीरे-धीरे अकेले पड़ते जा रहे हैं।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World September 12,2026 

#MokhaPort #RedSea #Houthis #AnsarAllah #YemenConflict #SaudiArabia #Pakistan #MRAP #BabAlMandeb #MiddleEastWar


September 11, 2026

लाल सागर की लहरों में डूबता अमेरिकी इकबाल: मोखा के पतन से खाड़ी तक बदला शक्ति संतुलन

लाल सागर की लहरों में डूबता अमेरिकी इकबाल: मोखा के पतन से खाड़ी तक बदला शक्ति संतुलन
-Friday World September 12,2026 
पश्चिम एशिया की तपती रेत और लाल सागर की बेचैन लहरें आज एक नए युग की गवाह बन रही हैं। दशकों तक जिस अमेरिका ने अपनी गनबोट डिप्लोमेसी, सैन्य अड्डों और आर्थिक प्रतिबंधों के दम पर पूरी दुनिया को अपनी मुट्ठी में रखा, आज उसी महाशक्ति के पैरों तले से जमीन खिसकती नजर आ रही है। यह कहानी सिर्फ एक बंदरगाह शहर की नहीं, बल्कि एक पूरी व्यवस्था के पतन की है।

 1. मोखा पर नियंत्रण: अमेरिकी अर्थव्यवस्था की नब्ज पर चोट

यमन के अंसार अल्लाह आंदोलन द्वारा ऐतिहासिक बंदरगाह शहर मोखा पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करना केवल एक सामरिक बढ़त नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार के मानचित्र को बदलने वाली घटना है।

विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक, बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया का लगभग 10 से 12 प्रतिशत वैश्विक व्यापार और 30 प्रतिशत कंटेनर ट्रैफिक गुजरता है, आज प्रतिरोध की निगरानी में है। इस मार्ग पर शिकंजा कसने का अर्थ है पश्चिमी दुनिया की आर्थिक धमनियों पर सीधा दबाव।

विशेषज्ञों के अनुसार पेरीम द्वीप और यमनी तट पर पकड़ मजबूत होने के बाद सऊदी अरब के पश्चिमी तट - जेद्दा और यानबू जैसे बंदरगाहों से होने वाला तेल निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कभी इसी समुद्री मार्ग से पश्चिमी कंपनियां पश्चिम एशिया के संसाधनों को औने-पौने दाम पर लूट कर ले जाती थीं, आज वही मार्ग उनकी सबसे बड़ी कमजोरी बन गया है। यह उपनिवेशवादी लूट के रास्तों पर ताला लगने जैसा है।

 2. 'टैंकर वार' में टूटा अमेरिकी सैन्य अहंकार

दूसरे विश्व युद्ध के बाद से अमेरिका का सबसे बड़ा दावा यही रहा है कि उसके विमानवाहक पोत और लड़ाकू बेड़े दुनिया के किसी भी समुद्र में निर्विरोध राज कर सकते हैं। लाल सागर और फारस की खाड़ी में यह मिथक टूट कर बिखर गया है।

रिपोर्टों के अनुसार जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरानी तेल टैंकरों को रोकने और जब्त करने की कोशिश की, तो ईरान ने उसे सीधी चुनौती के रूप में लिया। जवाबी कार्रवाई में खाड़ी में अमेरिकी नौसैनिक संपत्तियों को सटीक हमलों का सामना करना पड़ा।

सबसे बड़ा झटका जोर्डन में मौजूद अमेरिकी ठिकानों - मुवफ्फक साल्टी एयरबेस और अल-अज़रक बेस पर लगे। इन बेसों को अमेरिका अपने क्षेत्रीय सुरक्षा नेटवर्क का सबसे मजबूत स्तंभ मानता था। लेकिन कम लागत वाले, स्वदेशी तकनीक से बने सटीक बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन के सामने अरबों डॉलर के अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम नाकाम साबित हुए। A-10 थंडरबोल्ट II और F-15E स्ट्राइक ईगल जैसे विमानों को हुए नुकसान ने एक बात साफ कर दी है कि अब युद्ध का चेहरा बदल चुका है। महंगी पश्चिमी तकनीक अब सस्ते और प्रभावी प्रतिरोधी हथियारों के आगे लाचार है।

 3. तेल अवीव के बोझ तले बिखरता यूरोप

अमेरिका के पतन की तीसरी और सबसे अहम वजह उसका इजराइल को दिया जा रहा अंधा समर्थन है। गाजा में जारी हिंसा पर वाशिंगटन के एकतरफा रुख ने खुद पश्चिमी खेमे में गहरी दरार पैदा कर दी है।

कभी अमेरिका के हर फैसले पर सिर हिलाने वाला यूरोप अब बगावत पर है। स्पेन, आयरलैंड, बेल्जियम, स्लोवेनिया और नॉर्वे जैसे देशों ने खुलकर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) के आदेशों का सम्मान करने, फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता देने और UNRWA को फंडिंग जारी रखने का ऐलान किया है। यह वाशिंगटन के कूटनीतिक एकाधिकार के अंत का संकेत है।

यूरोप की सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब भी इस बदलाव का बड़ा कारण है। लंदन, पेरिस, बर्लिन और मैड्रिड में लाखों लोग फिलिस्तीन के समर्थन में उतर रहे हैं। इस जनदबाव के कारण कई यूरोपीय सरकारों को इजराइल को हथियारों की आपूर्ति रोकनी पड़ी है। नतीजा यह है कि अमेरिका और इजराइल आज अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहले से कहीं ज्यादा अलग-थलग पड़ गए हैं।

 4. सप्लाई चेन का संकट और एकध्रुवीय दुनिया का अंत

अमेरिकी वर्चस्व के पतन की सबसे स्पष्ट तस्वीर वैश्विक अर्थव्यवस्था में दिख रही है। लाल सागर में असुरक्षा के कारण दुनिया की बड़ी शिपिंग कंपनियों को अपना रास्ता बदलना पड़ा है। जहाजों को अब स्वेज नहर की बजाय अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप से होकर 14 दिन का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है।

इसका सीधा असर बाजार पर पड़ा है। कच्चे तेल की कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं, शिपिंग लागत में 300 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है और यूरोप-अमेरिका में महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है।

लेकिन सबसे बड़ा भू-राजनीतिक बदलाव खाड़ी देशों के शाही महलों में हो रहा है। जो खाड़ी के शासक कभी अपनी सुरक्षा के लिए पूरी तरह वाशिंगटन पर निर्भर थे, वे अब खुलेआम कह रहे हैं कि अमेरिकी नौसेना उन्हें सुरक्षित नहीं रख सकती। सऊदी अरब और यूएई अब अपनी सुरक्षा गारंटी के लिए सीधे ईरान और यमन के साथ बातचीत कर रहे हैं। यह उस दौर का अंत है जब अमेरिका खाड़ी को अपनी जागीर समझता था।

निष्कर्ष साफ है। मोखा का पतन कोई छोटी घटना नहीं, बल्कि इतिहास का एक टर्निंग पॉइंट है। यह इस बात का ऐलान है कि पश्चिम की गनबोट डिप्लोमेसी का समय खत्म हो चुका है। पश्चिम एशिया के प्रतिरोध ने यह दिखा दिया है कि दुनिया अब एकध्रुवीय नहीं रही। वाशिंगटन के आदेश पर चलने वाली दुनिया अब अतीत की बात है, और नए बहुध्रुवीय विश्व का उदय लाल सागर के पानी से ही हो रहा है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World September 12,2026 

#RedSeaCrisis #USDecline #MiddleEast #BabAlMandab #Geopolitics #MultipolarWorld #Yemen #Iran #OilPrices #EndOfUnipolarity


September 11, 2026

અમદાવાદમાં બુલડોઝરનો કહેર: 70 વર્ષ જૂના ઘરો જમીનદોસ્ત, રસ્તા પર આવી ગયા સેંકડો પરિવારો - મહિલાઓના આંસુએ હૃદય હચમચાવ્યું

અમદાવાદમાં બુલડોઝરનો કહેર: 70 વર્ષ જૂના ઘરો જમીનદોસ્ત, રસ્તા પર આવી ગયા સેંકડો પરિવારો - મહિલાઓના આંસુએ હૃદય હચમચાવ્યું
-Friday World September 11,2026 
અમદાવાદ શહેર સ્માર્ટ સિટી તરફ ઝડપથી આગળ વધી રહ્યું છે, પણ આ વિકાસની કિંમત કોણ ચૂકવી રહ્યું છે? આજનો દિવસ અમદાવાદના ઉત્તર વિસ્તાર માટે કાળો દિવસ બની ગયો. અમદાવાદ મ્યુનિસિપલ કોર્પોરેશનના ઉત્તર ઝોન એસ્ટેટ વિભાગે આજે સવારે સરસપુર, રખિયાલ અને પોટલીયા વિસ્તારમાં મોટા પાયે ડિમોલિશન ડ્રાઈવ હાથ ધરી હતી.

ત્રિકમલાલ ચાર રસ્તાથી એવરેસ્ટ ચાર રસ્તા સુધીના 700 મીટરના પટ્ટામાં રોડને 30.50 મીટર પહોળો કરવાની કામગીરી માટે કુલ 83 જેટલા બાંધકામો પર બુલડોઝર ફેરવી દેવામાં આવ્યું. સ્થાનિક પોલીસ બંદોબસ્ત સાથે વહેલી સવારે જ ટીમ પહોંચી ગઈ અને જોતજોતામાં વર્ષો જૂના ઘરો કાટમાળમાં ફેરવાઈ ગયા.

70 વર્ષથી રહીએ છીએ, હવે ક્યાં જઈએ?

આ કાર્યવાહીમાં સૌથી વધુ માર ગરીબ અને મધ્યમવર્ગીય પરિવારો પર પડ્યો છે. અસરગ્રસ્ત કિશનભાઈ ઠાકોરે રડતા અવાજે કહ્યું, "સવારથી અમે કંઈ ખાધું નથી. સવારે જ બુલડોઝર લઈને આવી ગયા. અમારો બધો સામાન અંદર જ રહી ગયો, કાઢવાનો સમય પણ ન મળ્યો. નાના છોકરાઓની સ્કૂલ ચાલુ છે, હવે તેઓ ક્યાં જશે? અમારી પાસે ઘર જ નથી રહ્યું."

હિતેશભાઈનું દર્દ પણ એવું જ છે. તેમણે કહ્યું, "મારો જન્મ અહીં જ થયો છે. મારો પરિવાર છેલ્લા 70 વર્ષથી અહીં રહે છે. અમારી પાસે લાઈટ બિલ, પાણીનું બિલ, તમામ ડોક્યુમેન્ટ છે, છતાં અમારું ઘર તોડી નાખ્યું."

બાબુભાઈ ઠાકોરે જણાવ્યું કે તેમનું ઘર પણ 70 વર્ષ જૂનું હતું. "કોઈ વૈકલ્પિક વ્યવસ્થા કરી આપી નથી. સામાન કાઢવાનો સમય ન મળ્યો. જે થોડો સામાન બચ્યો તેને અમે એક કારખાનામાં મૂક્યો છે, ત્યાં 8-10 પરિવારનો સામાન પડ્યો છે."

માતાઓના આંસુ અને બાળકોનું ભવિષ્ય અંધકારમાં

આ દ્રશ્ય સૌથી વધુ હૃદયદ્રાવક હતું. હંસાબેન ધ્રુસકે ધ્રુસકે રડતા બોલ્યા, "80 વર્ષથી અમારું ફેમિલી અહીં રહે છે. આજે અમારા સપનાનું ઘર તોડી નાખ્યું. નાના બાળકો બેઘર થઈ ગયા. અમે છૂટક મજૂરી કરીને ઘર ચલાવતા હતા, હવે સડક પર આવી ગયા છીએ."

નિમિષાબેને કહ્યું, "અમે બેઘર થઈ ગયા, ફૂટપાથ પર આવી ગયા છીએ. રાત્રે શું થશે? ખાવા માટે પણ કશું નથી. નોટિસ આપી હતી પણ આજે જ તોડી પાડશે એવી ખબર નહોતી."

હાલ તાપમાં સેંકડો લોકો રસ્તા પર પોતાના વાસણો અને કપડાં સાથે બેઠા છે. બાળકોના ભણતર પર સીધી અસર પડી છે.

બીજી તરફ AMC ના અધિકારીઓનું કહેવું છે કે આ તમામ 83 બાંધકામો રોડ લાઈનમાં આવતા બિન-રહેણાંક પ્રકારના હતા અને નિયમ મુજબ કાર્યવાહી કરવામાં આવી છે.

પણ સવાલ એ છે કે વિકાસની સાથે માનવતા ક્યાં ગઈ? શું રોડ પહોળા કરતા પહેલા આ પરિવારોને પુનર્વસન કે સમય આપવો જરૂરી નહોતો?

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World September 11,2026 

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Thursday, 10 September 2026

September 10, 2026

ईरानी शाहेद की नकल पर पाकिस्तान का नया कामिकेज़ ड्रोन: POF में तैयार हो रहा है 3000 KM तक मार करने वाला आत्मघाती हथियार

ईरानी शाहेद की नकल पर पाकिस्तान का नया कामिकेज़ ड्रोन: POF में तैयार हो रहा है 3000 KM तक मार करने वाला आत्मघाती हथियार
-Friday World September 11,2026
पाकिस्तान की सेना अब पारंपरिक हथियारों से आगे बढ़कर सस्ते, घातक और लंबी दूरी तक मार करने वाले आत्मघाती ड्रोन की रेस में शामिल हो गई है। 29 अगस्त को पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्ट्री (POF) वाह कैंट में हुए एक हाई-प्रोफाइल दौरे ने इस गुप्त प्रोजेक्ट से पर्दा उठा दिया। इस दौरे में पाकिस्तान के आर्मी चीफ और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) जनरल असीम मुनीर मौजूद थे, जिन्हें ईरान के कुख्यात शाहेद-135 और शाहेद-136 ड्रोन की डिजाइन पर आधारित नए लॉइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम के बारे में ब्रीफिंग दी गई।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह पाकिस्तान में विकसित हो रहा इस तरह का कम से कम दूसरा सिस्टम है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि इस्लामाबाद अपनी स्ट्रैटेजिक स्ट्राइक क्षमता को पूरी तरह से बदलने की तैयारी में है।

क्या है नया हथियार?

जानकारी के मुताबिक, POF में प्रदर्शित किया गया ड्रोन एक वन-वे-अटैक (OWA) लोइटरिंग म्यूनिशन है। यानी यह एक बार उड़ान भरने के बाद वापस नहीं आता, बल्कि अपने लक्ष्य पर जाकर विस्फोटक के साथ फट जाता है। इसी कारण इसे आत्मघाती या कामिकेज ड्रोन भी कहा जाता है।

इसका डिजाइन ईरानी शाहेद-136 से हूबहू मिलता-जुलता है - डेल्टा-विंग बॉडी, पीछे लगा पिस्टन इंजन और तेज आवाज करने वाला प्रोपेलर। शाहेद-136 को दुनिया ने पहली बार 2021 में देखा था, लेकिन असली खौफ तब पैदा हुआ जब रूस ने इसे यूक्रेन युद्ध में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करना शुरू किया। रूस इसे गेरान-2 (Geran-2) नाम से इस्तेमाल करता है। अमेरिकी मैगजीन न्यूजवीक की एक रिपोर्ट में तो यह भी दावा किया गया था कि यमन के हूती विद्रोही 2020 से ही इसके पुराने वर्जन का इस्तेमाल कर रहे थे।

रेंज और ताकत - असली खेल यहीं है

हालांकि पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर इस नए ड्रोन की रेंज का खुलासा नहीं किया है, लेकिन सैन्य सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान आर्मी की मांग बहुत बड़ी है। सेना को 2000 से 3000 किलोमीटर तक मार करने वाले हथियारों की जरूरत है। ईरानी शाहेद-136 की रेंज ही 1000 से 2500 किलोमीटर तक मानी जाती है, इसलिए पाकिस्तान का नया वर्जन भी इसी क्लास का होगा।

इसका सबसे बड़ा फायदा है - कम लागत। एक बैलिस्टिक मिसाइल या लड़ाकू जेट के मुकाबले इस तरह के पिस्टन-पावर्ड ड्रोन को बनाना 50 से 100 गुना सस्ता है। इन्हें बड़ी संख्या में बनाकर एक साथ दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा दिया जा सकता है। इसे ही मिलिट्री भाषा में 'स्वार्म अटैक' कहा जाता है।

भारत के लिए क्यों है चिंता की बात?

पाकिस्तान का यह कदम भारत के लिए दो मोर्चों पर चुनौती पैदा करता है। पहला, 2000-3000 किमी की रेंज का मतलब है कि यह ड्रोन पाकिस्तान के अंदर से ही भारत के लगभग किसी भी बड़े शहर, मिलिट्री बेस या रणनीतिक ठिकाने को निशाना बना सकता है। दूसरा, यह ड्रोन रडार पर बहुत छोटा दिखाई देता है और कम ऊंचाई पर उड़ता है, जिससे इसे रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है। यूक्रेन युद्ध ने साबित कर दिया है कि महंगे एयर डिफेंस सिस्टम भी इन सस्ते ड्रोन के झुंड के सामने कई बार फेल हो जाते हैं।

POF में क्या हो रहा है?

पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्ट्री अब सिर्फ गोलियां और तोप के गोले बनाने वाली फैक्ट्री नहीं रही। पिछले दो सालों में इसे ड्रोन और स्मार्ट म्यूनिशन के विकास केंद्र के रूप में बदला जा रहा है। जनरल मुनीर का यह दौरा इसी बदलाव का हिस्सा था। उन्हें ब्रीफिंग के दौरान बताया गया कि कैसे यह नया सिस्टम GNSS/INS गाइडेंस से लैस होगा, यानी जीपीएस जैम होने पर भी यह अपने रास्ते से नहीं भटकेगा।

यह पाकिस्तान का दूसरा लॉइटरिंग म्यूनिशन प्रोजेक्ट है। इससे पहले पाकिस्तान के प्राइवेट डिफेंस सेक्टर ने भी एक छोटे रेंज का कामिकेज ड्रोन विकसित किया था, लेकिन POF वाला प्रोजेक्ट कहीं बड़ा और लंबी दूरी वाला है।

कुल मिलाकर, पाकिस्तान ईरान-रूस मॉडल को कॉपी करके एक ऐसी ताकत बनना चाहता है जो कम पैसे में ज्यादा दूर तक चोट पहुंचा सके। यह युद्ध का भविष्य है - सस्ता, साइलेंट और सुसाइडल।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World September 11,2026

#PakistanArmy #Shahed136Drone #LoiteringMunition #KamikazeDrone #POFPakistan #DefenseNews #IranDrone #MilitaryTechnology #AsimMunir #SuicideDrone
September 10, 2026

ONE NIGHT, ONE BASE, HUGE BLOW: Iran Cripples US Air Power in Jordan - 8 F-15s Hit, A-10 Warthog Loses Wing, 30 Patriots Fired in Vain!

ONE NIGHT, ONE BASE, HUGE BLOW: Iran Cripples US Air Power in Jordan - 8 F-15s Hit, A-10 Warthog Loses Wing, 30 Patriots Fired in Vain!
- Friday World September 10,2026 
The US-Iran war has crossed a new red line.

What was limited to the Persian Gulf until yesterday has now reached Jordan. The war-like situation between America and Iran is escalating day by day. As America is striking, Iran is retaliating in a more lethal way.

The latest flashpoint is the most critical US airbase in Jordan.

Missile Storm on Muwaffaq Salti Air Base

According to reports, Iran targeted the Muwaffaq Salti Air Base (MSAB) near Al Azraq, Jordan. This is the main forward operating base for the US Air Force's 332nd Air Expeditionary Wing, hosting F-15s, F-16s, F-35s, and A-10s.

In an overnight barrage, Iran unleashed drones and ballistic missiles. As per CBS News reporter Jennifer Jacobs, multiple American military aircraft suffered damage in the strikes.

Videos circulating online showed damaged US Seahawk helicopters and fighter jets being moved to secondary locations.

How Much Damage?

As per US media reports:

- Roughly eight F-15 fighter jets sustained light damage but were later returned to service after repairs.
- One A-10 Thunderbolt II , known as the Warthog, was directly struck and left with a missing wing.

The Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) claimed responsibility for the attack. The IRGC said it targeted hangars and maintenance areas of F-35s, F-16s and F-15s.

30 Patriot Missiles Fired - Still Failed

To stop the attack, US forces had to fire more than 30 Patriot missiles, which is proving extremely costly. The Jordanian Army said 18 out of 20 ballistic missiles were intercepted, two fell in open areas.

Despite this massive air defence, aircraft were damaged, raising serious questions over US air defence.

The Backstory

This was not a random strike. A day earlier, the US had attacked five Iranian tankers in the Strait of Hormuz. In retaliation, Iran claimed attacks on eight tankers and two warships and the US base in Jordan.

The war has now expanded from oil tankers to airbases. US reports are now warning about rapidly shrinking stocks of Patriot missiles.

The Jordan attack proves Iran is no longer just defending - it is now aiming to destroy US air power on the ground itself.

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World September 10,2026 
September 10, 2026

जॉर्डन में एक रात में तबाही - ईरान ने उड़ाए अमेरिका के होश, 8 F-15 और 1 A-10 वॉरथॉग डैमेज, 30 पैट्रियट मिसाइलें भी नाकाम!

जॉर्डन में एक रात में तबाही - ईरान ने उड़ाए अमेरिका के होश, 8 F-15 और 1 A-10 वॉरथॉग डैमेज, 30 पैट्रियट मिसाइलें भी नाकाम!
-Friday World September 10,2026 
      अमेरिका-ईरान जंग अब नई हद पर।

जो कल तक खाड़ी तक सीमित थी, वो अब जॉर्डन तक पहुंच गई है। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की स्थिति दिन-ब-दिन वकरती जा रही है। अमेरिका जैसे हमला कर रहा है, उससे ज्यादा घातक तरीके से ईरान भी बदला ले रहा है।

ताजा घटना जॉर्डन के सबसे अहम अमेरिकी अड्डे की है।

मुवफ्फक साल्टी एयरबेस पर मिसाइलों का तूफान

रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने जॉर्डन में अल-अज़रक के पास स्थित मुवफ्फक साल्टी एयरबेस (Muwaffaq Salti Air Base) को निशाना बनाया। ये अमेरिकी एयर फोर्स का 332nd Air Expeditionary Wing का सबसे बड़ा फॉरवर्ड बेस है। यहां से ही F-15, F-16, F-35 और A-10 मिशन उड़ते हैं। 

रात के अंधेरे में ईरान ने ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों की बारिश कर दी। CBS रिपोर्टर जेनिफर जैकब्स के मुताबिक कई अमेरिकी मिलिट्री एयरक्राफ्ट डैमेज हुए हैं। 
इस हमले के बाद कई वीडियो सामने आए हैं जिनमें डैमेज हुए अमेरिकी सी हॉक हेलिकॉप्टर और फाइटर जेट को दूसरी लोकेशन पर खिसकाते हुए दिखाया जा रहा है।

कितना नुकसान?

अमेरिकन मीडिया के मुताबिक:
 - लगभग 8 F-15 फाइटर जेट को हल्का नुकसान पहुंचा, जिन्हें बाद में रिपेयर कर वापस सर्विस में लाया गया।
 - एक A-10 Thunderbolt II जिसे वॉरथॉग कहा जाता है, सीधे हिट हुआ और उसकी एक पंख ही गायब हो गई। 

ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। IRGC का कहना है कि उन्होंने F-35, F-16 और F-15 के हैंगर और मेंटेनेंस एरिया को निशाना बनाया। 

30 पैट्रियट मिसाइलें - और फिर भी चूक

इस हमले को रोकने के लिए अमेरिका को 30 से ज्यादा पैट्रियट मिसाइलें दागनी पड़ीं, जो बेहद महंगी साबित हुईं। जॉर्डन की सेना ने कहा कि 20 में से 18 बैलिस्टिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया गया, दो खाली इलाके में गिरीं। 

इसके बावजूद एयरक्राफ्ट डैमेज हो गए, जो अमेरिकी एयर डिफेंस पर बड़ा सवाल है।

हमले के पीछे की कहानी

ये हमला अचानक नहीं हुआ। इससे एक दिन पहले अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान के 5 तेल टैंकरों पर हमला किया था। जवाब में ईरान ने 8 टैंकर, 2 जंगी जहाज और जॉर्डन में अमेरिकी बेस को टारगेट करने का दावा किया। 

अब जंग का दायरा तेल के जहाजों से निकलकर एयरबेस तक पहुंच गया है।

अमेरिकी रिपोर्ट्स में चिंता जताई जा रही है कि पैट्रियट मिसाइलों का स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है। हर ईरानी मिसाइल को रोकने के लिए लाखों डॉलर की मिसाइलें खर्च हो रही हैं। 

जॉर्डन में हुआ ये हमला बताता है कि ईरान अब सिर्फ डिफेंस नहीं कर रहा, बल्कि अमेरिकी हवाई ताकत को जमीन पर ही तोड़ने की रणनीति पर है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World September 10,2026 

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