July 12, 2026
कतर के पिता अमीर शेख हमद बिन खलीफा आल थानी का 74 वर्ष की आयु में निधन: खाड़ी का आधुनिकीकरण करने वाले दूरदर्शी नेता का युगांत
कतर के पिता अमीर शेख हमद बिन खलीफा आल थानी का 74 वर्ष की आयु में निधन: खाड़ी का आधुनिकीकरण करने वाले दूरदर्शी नेता का युगांत
-Friday World Jul 12 2026
कतर के राजशाही दीवान ने रविवार, 12 जुलाई 2026 को एक दुखद घोषणा की। पूर्व अमीर और 'पिता अमीर' के रूप में प्रसिद्ध शेख हमद बिन खलीफा आल थानी का 74 वर्ष की आयु में निधन हो गया। डॉहा में उनका निधन कतर के इतिहास में एक युग का अंत माना जा रहा है। शेख हमद वह शख्सियत थे जिन्होंने एक छोटे-से रेगिस्तानी अमीरात को वैश्विक ऊर्जा शक्ति, मीडिया हब और कूटनीतिक मध्यस्थ में बदल दिया। उनके नेतृत्व में कतर ने आर्थिक समृद्धि, सांस्कृतिक जागृति और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी स्वतंत्र आवाज हासिल की।
शेख हमद का जन्म 1 जनवरी 1952 को डॉहा में हुआ था। वे कतर के तत्कालीन अमीर शेख खलीफा बिन हमद आल थानी के पुत्र थे। 1995 में उन्होंने एक शांतिपूर्ण सत्ता परिवर्तन के माध्यम से सत्ता संभाली और 2013 तक 18 वर्षों तक देश का नेतृत्व किया। इस दौरान उन्होंने कतर को आधुनिकता की राह पर ले जाकर इसे विश्व पटल पर एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बना दिया। 2013 में उन्होंने स्वेच्छा से सत्ता अपने बेटे शेख तमीम बिन हमद आल थानी को सौंपी, जो वर्तमान अमीर हैं। यह कदम खाड़ी क्षेत्र में विरले ही देखा गया है और इसे दूरदर्शिता का उदाहरण माना जाता है।
आर्थिक क्रांति और ऊर्जा साम्राज्य का निर्माण
शेख हमद के शासनकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि कतर को विश्व का अग्रणी LNG (Liquefied Natural Gas) निर्यातक बनाना था। उन्होंने देश की प्राकृतिक गैस संसाधनों का बुद्धिमत्तापूर्ण दोहन किया। कतर पेट्रोलियम (QP) को मजबूत किया गया और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ साझेदारियां स्थापित की गईं। आज कतर की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से LNG पर टिकी है, जो देश को उच्च प्रति व्यक्ति आय प्रदान करती है।
उन्होंने विविधीकरण की नीति अपनाई। शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और खेल क्षेत्र में भारी निवेश किया गया। कतर फाउंडेशन की स्थापना हुई, जिसने Education City जैसी परियोजनाओं को जन्म दिया, जहां विश्व के शीर्ष विश्वविद्यालयों के कैंपस बने। डॉहा को आधुनिक शहर के रूप में विकसित किया गया, जिसमें Pearl-Qatar, Lusail City जैसी लग्जरी परियोजनाएं शामिल हैं। 2022 फीफा विश्व कप की मेजबानी इन प्रयासों का चरमोत्कर्ष थी, जिसने कतर को वैश्विक पर्यटन गंतव्य बनाया।
अल जजीरा: स्वतंत्र मीडिया की आवाज
शेख हमद की सबसे चर्चित पहल अल जजीरा समाचार नेटवर्क की स्थापना थी। 1996 में शुरू हुआ यह चैनल जल्द ही अरब दुनिया की सबसे प्रभावशाली मीडिया संस्था बन गया। पश्चिमी मीडिया के एकाधिकार को चुनौती देते हुए अल जजीरा ने मध्य पूर्व की घटनाओं को स्थानीय नजरिए से कवर किया। यह कतर की 'सॉफ्ट पावर' का प्रमुख साधन साबित हुआ, हालांकि कभी-कभी विवादों में भी घिरा। शेख हमद का मानना था कि सूचना की स्वतंत्रता विकास की कुंजी है।
विदेश नीति: संतुलन और मध्यस्थता
शेख हमद की विदेश नीति बहुआयामी और व्यावहारिक थी। कतर ने अमेरिका के साथ मजबूत संबंध बनाए रखे (अल उदीद एयर बेस अमेरिकी सैन्य उपस्थिति का केंद्र है) लेकिन साथ ही ईरान, तुर्की और विभिन्न अरब समूहों से भी संतुलित संबंध रखे। उन्होंने कतर को क्षेत्रीय विवादों का मध्यस्थ बनाया।
कतर-इजरायल संबंधों का स्पष्ट विवरण: कतर और इजरायल के संबंध जटिल और उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। 1996 में कतर ने इजरायल के साथ अनौपचारिक व्यापार संबंध स्थापित किए, जो खाड़ी क्षेत्र में ओमान के बाद दूसरा ऐसा देश था। इजरायल ने डॉहा में ट्रेड ऑफिस खोला। हालांकि, 2009 के गाजा युद्ध के बाद कतर ने इन संबंधों को समाप्त कर दिया।
कतर इजरायल के साथ पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित नहीं करता, बल्कि फिलिस्तीनी मुद्दे पर दृढ़ रुख रखता है। कतर हमास के राजनीतिक कार्यालय की मेजबानी करता है और गाजा को आर्थिक सहायता प्रदान करता है (कई बार इजरायल और अंतरराष्ट्रीय समन्वय के साथ)। यह सहायता गाजा में मानवीय संकट को रोकने और स्थिरता बनाए रखने में मदद करती है। कतर ने हमास और इजरायल के बीच कई बार मध्यस्थता की है, जिसमें 2023 के गाजा युद्ध में युद्धविराम और बंधकों की अदला-बदली शामिल है।
कतर की नीति स्पष्ट है: वह फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना और दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन करता है। इजरायल के साथ कोई आर्थिक या राजनयिक सामान्यीकरण (नॉर्मलाइजेशन) तभी संभव है जब फिलिस्तीनी मुद्दे का न्यायपूर्ण समाधान हो। फिर भी, व्यावहारिक स्तर पर मध्यस्थता और सीमित सहयोग जारी रहता है। शेख हमद की विरासत में यह संतुलित दृष्टिकोण शामिल है, जो कतर को क्षेत्रीय कूटनीति में अनिवार्य बनाता है।
विरासत और चुनौतियां
शेख हमद ने कतर को 1990 के दशक के एक अपेक्षाकृत अज्ञात देश से वैश्विक मंच पर ले जाकर खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के भीतर एक स्वतंत्र आवाज दी। 2017-2021 का GCC नाकेबंदी संकट उनके बाद का था, जिसमें कतर ने आत्मनिर्भरता दिखाई।
उनकी विरासत में महिलाओं के अधिकारों में सुधार, शिक्षा पर जोर और सांस्कृतिक उद्घाटन शामिल हैं। हालांकि, मानवाधिकार, श्रम सुधार और पड़ोसी देशों के साथ संबंधों पर आलोचनाएं भी रहीं। फिर भी, उनका योगदान निर्विवाद है।
राष्ट्रीय शोक और अंतिम संस्कार
कतर सरकार ने चार दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है। सरकारी कामकाज निलंबित रहेगा, झंडे आधा झुके रहेंगे। नमाज-ए-जनाजा इमाम मुहम्मद बिन अब्दुल वहाब मस्जिद में मगरीब की नमाज के बाद अदा की जाएगी। इसके बाद उन्हें लुसैल कब्रिस्तान में दफनाया जाएगा।
वर्तमान अमीर शेख तमीम 13 से 15 जुलाई तक लुसैल पैलेस में राज्य प्रमुखों, शाही परिवार के सदस्यों, गणमान्य व्यक्तियों और नागरिकों से शोक संवेदनाएं प्राप्त करेंगे। विश्व नेता पहले ही संवेदनाएं व्यक्त कर चुके हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें 'दूरदर्शी नेता' और 'भारत के करीबी मित्र' बताया।
एक युग का अंत, नई शुरुआत
शेख हमद बिन खलीफा आल थानी का निधन कतर के लिए अपूरणीय क्षति है, लेकिन उनकी नीतियां देश को आगे बढ़ाती रहेंगी। उन्होंने साबित किया कि छोटे देश भी बड़ी सोच के साथ वैश्विक प्रभाव छोड़ सकते हैं। रेगिस्तान से उभरा यह आधुनिक राष्ट्र उनकी दूरदृष्टि का जीवंत प्रमाण है।
कतर अब शोक में डूबा है, लेकिन शेख हमद की विरासत — LNG साम्राज्य, अल जजीरा, विश्व कप, कूटनीतिक सक्रियता — सदैव जीवित रहेगी। उनके निधन पर पूरी दुनिया एकजुट होकर श्रद्धांजलि अर्पित कर रही है। अल्लाह उनकी रूह को मगफिरत अता फरमाए और कतर को उनके सपनों के मुताबिक आगे बढ़ने की तौफीक दे।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World Jul 12 2026