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Friday, 20 February 2026

February 20, 2026

राहुल गांधी के आवास पर बीजेपी युवा मोर्चा का हंगामा: प्रदर्शनकारियों ने जलाया पुतला, पुलिस ने की हिरासत में कार्रवाई !

राहुल गांधी के आवास पर बीजेपी युवा मोर्चा का हंगामा: प्रदर्शनकारियों ने जलाया पुतला, पुलिस ने की हिरासत में कार्रवाई !
-Friday World 20th Feb 2026

नई दिल्ली: राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर हलचल मच गई है। गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के युवा मोर्चा (भाजयुमो) के कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के आवास के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन उस घटना की प्रतिक्रिया में था, जिसमें यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने एआई इम्पैक्ट समिट में टी-शर्ट उतारकर विरोध जताया था। बीजेपी ने इसे 'भारत की छवि को दुनिया के सामने खराब करने वाला कृत्य' करार दिया है। प्रदर्शन के दौरान भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी का पुतला फूंका और नारे लगाए, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। यह घटना कांग्रेस और बीजेपी के बीच बढ़ती राजनीतिक दुश्मनी को और उजागर करती है, जहां दोनों पार्टियां एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का खेल खेल रही हैं। 

 प्रदर्शन की पृष्ठभूमि: एआई समिट में यूथ कांग्रेस का विरोध यह पूरा विवाद उस घटना से शुरू हुआ, जो कुछ दिन पहले एआई इम्पैक्ट समिट में घटी। समिट में यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने टी-शर्ट उतारकर विरोध प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि यह विरोध केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ था, खासकर एआई और तकनीकी क्षेत्र में युवाओं की बेरोजगारी और अन्य मुद्दों को लेकर। लेकिन बीजेपी ने इसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की बदनामी का प्रयास बताया। बीजेपी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा, "यह शर्मनाक है कि कांग्रेस के युवा कार्यकर्ता दुनिया के सामने भारत की छवि को धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं। राहुल गांधी के इशारे पर यह सब हो रहा है।" 

बीजेपी का आरोप है कि यूथ कांग्रेस का यह कदम राहुल गांधी के निर्देश पर उठाया गया था। पार्टी ने दावा किया कि राहुल गांधी लगातार केंद्र सरकार को बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं, और एआई समिट जैसा वैश्विक आयोजन इसका ताजा उदाहरण है। दूसरी ओर, कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक अधिकार बताया। यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने कहा, "हमारा विरोध शांतिपूर्ण था और यह युवाओं की आवाज को उठाने का माध्यम था। बीजेपी इसे राजनीतिक रंग देकर अपनी असफलताओं को छिपाने की कोशिश कर रही है।" 

 भाजयुमो का प्रदर्शन: नारे, पुतला दहन और पुलिस की कार्रवाई गुरुवार सुबह भाजयुमो के दर्जनों कार्यकर्ता राहुल गांधी के आवास के बाहर जमा हो गए। उन्होंने हाथों में प्लेकार्ड लिए हुए थे, जिन पर 'राहुल गांधी माफी मांगो' और 'भारत की छवि से खिलवाड़ बंद करो' जैसे नारे लिखे थे। प्रदर्शनकारियों ने राहुल गांधी का पुतला जलाया और जोरदार नारेबाजी की। एक कार्यकर्ता ने कहा, "राहुल गांधी ने देश को बदनाम करने की साजिश रची है। हम उनके खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।" 

दिल्ली पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए तुरंत कार्रवाई की। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दी, लेकिन जब वे नहीं माने तो कई को हिरासत में ले लिया गया। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन बिना अनुमति के किया गया था, और इससे कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हो सकती थी। हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं को बाद में चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। बीजेपी ने पुलिस की इस कार्रवाई को 'कांग्रेस की साजिश' बताया, जबकि कांग्रेस ने इसे 'बीजेपी की गुंडागर्दी' करार दिया। 

बीजेपी के बड़े नेताओं की प्रतिक्रियाएं बीजेपी ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया है। पार्टी के आधिकारिक एक्स हैंडल पर एक पोस्ट में लिखा गया, "कांग्रेस का यह विरोध शर्मनाक है। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस भारत को दुनिया के सामने बदनाम कर रही है।" बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा, "कांग्रेस की राजनीति अब देशद्रोह की हद तक पहुंच गई है। एआई समिट में युवा कांग्रेस का कृत्य अस्वीकार्य है।" केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी ट्वीट कर कहा, "राहुल गांधी को जवाब देना चाहिए कि क्यों उनकी पार्टी अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि खराब कर रही है?" 

बीजेपी का मानना है कि यह घटना 2024 लोकसभा चुनावों के बाद की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। पार्टी ने दावा किया कि राहुल गांधी विपक्ष के नेता बनने के बाद से सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, बीजेपी युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या ने कहा, "हम युवाओं की आवाज हैं। कांग्रेस की हर साजिश का जवाब देंगे।" 

 कांग्रेस का पलटवार: 'बीजेपी की साजिश' कांग्रेस ने इस प्रदर्शन को बीजेपी की 'सस्ती राजनीति' बताया। राहुल गांधी ने खुद कोई बयान नहीं दिया, लेकिन कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, "बीजेपी युवा मोर्चा का यह प्रदर्शन दर्शाता है कि वे कितने हताश हैं। यूथ कांग्रेस का विरोध लोकतांत्रिक था, लेकिन बीजेपी इसे मुद्दा बनाकर ध्यान भटका रही है।" यूथ कांग्रेस ने भी बयान जारी कर कहा, "हमारा विरोध बेरोजगारी और युवाओं की समस्याओं पर था। बीजेपी इसे राजनीतिक रंग देकर अपनी नाकामियां छिपा रही है।" 

कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी सरकार युवाओं की समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है। पार्टी ने कहा कि एआई समिट में विरोध इसलिए किया गया क्योंकि सरकार एआई तकनीक का फायदा आम लोगों तक नहीं पहुंचा रही है। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, "बीजेपी के कार्यकर्ता हमारे नेता के घर पर हमला बोल रहे हैं। यह लोकतंत्र की हत्या है।" 

 राजनीतिक निहितार्थ: बढ़ती दुश्मनी और भविष्य की चुनौतियां यह घटना कांग्रेस और बीजेपी के बीच बढ़ती दुश्मनी को दर्शाती है। 2024 लोकसभा चुनावों के बाद राहुल गांधी विपक्ष के नेता बने हैं, और उन्होंने सरकार पर लगातार हमले किए हैं। बीजेपी का मानना है कि राहुल गांधी की 'भारत जोड़ो न्याय यात्रा' और अन्य अभियान सरकार को बदनाम करने के लिए हैं। वहीं, कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे प्रदर्शन राजनीतिक माहौल को और गर्माएंगे। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. संजय कुमार कहते हैं, "यह युवा संगठनों के बीच टकराव है। दोनों पार्टियां युवाओं को लुभाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन ऐसे प्रदर्शन से समाज में नकारात्मक संदेश जाता है।" उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्रवाई सही थी, क्योंकि बिना अनुमति के प्रदर्शन कानून का उल्लंघन है।

सोशल मीडिया पर बहस: जनता की प्रतिक्रियाएं सोशल मीडिया पर यह मुद्दा ट्रेंड कर रहा है। #RahulGandhiProtest और #BJYMVsCongress जैसे हैशटैग के साथ यूजर्स अपनी राय जाहिर कर रहे हैं। कुछ यूजर्स बीजेपी के प्रदर्शन को सही ठहरा रहे हैं, जबकि अन्य कांग्रेस के विरोध को जायज बता रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, "बीजेपी युवा मोर्चा ने सही किया। राहुल गांधी देश को बदनाम कर रहे हैं।" वहीं, दूसरे ने कहा, "कांग्रेस का विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है। बीजेपी गुंडागर्दी कर रही है।" 


 राजनीति में बढ़ती कटुता यह घटना दर्शाती है कि भारतीय राजनीति में कटुता बढ़ रही है। जहां एक तरफ युवा संगठन अपनी-अपनी पार्टियों की रक्षा में उतर आए हैं, वहीं जनता को ऐसे प्रदर्शनों से कोई फायदा नहीं हो रहा। राजनीतिक दलों को चाहिए कि वे मुद्दों पर बहस करें, न कि व्यक्तिगत हमलों पर। राहुल गांधी के आवास पर हुआ यह प्रदर्शन आने वाले दिनों में और विवादों को जन्म दे सकता है। फिलहाल, दोनों पार्टियां एक-दूसरे पर आरोप लगा रही हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या इससे देश का भला होगा? 

इस पूरे प्रकरण में पुलिस की भूमिका सराहनीय रही, जिसने स्थिति को बिगड़ने से रोका। अब देखना होगा कि कांग्रेस और बीजेपी इस मुद्दे को कितना आगे बढ़ाते हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षक मानते हैं कि 2029 लोकसभा चुनावों से पहले ऐसे टकराव बढ़ेंगे, क्योंकि दोनों पार्टियां युवा वोटरों को साधने की कोशिश में हैं।

 Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 20th Feb 2026
February 20, 2026

મોના થિબાનું વિવાદિત નિવેદન: 'વેશ્યાવૃત્તિ પણ સમાજની સેવા' – ખોડલધામ ટ્રસ્ટીએ કહ્યુ માફી માંગો, ફિલ્મ 'શક્તિ'ના પ્રમોશનમાં ઉઠ્યો તોફાન!

મોના થિબાનું વિવાદિત નિવેદન: 'વેશ્યાવૃત્તિ પણ સમાજની સેવા' – ખોડલધામ ટ્રસ્ટીએ કહ્યુ માફી માંગો, ફિલ્મ 'શક્તિ'ના પ્રમોશનમાં ઉઠ્યો તોફાન!
-Friday World 20th Feb 2026
રાજકોટ: ગુજરાતી સિનેમાની જાણીતી અભિનેત્રી મોના થિબા કનોડિયાનું એક નિવેદન આખા રાજ્યમાં વિવાદનું કારણ બન્યું છે. પોતાની આગામી ફિલ્મ 'શક્તિ'ના પ્રમોશન માટે રાજકોટ પહોંચેલી મોના થિબાએ વેશ્યાવૃત્તિને 'સમાજની એક સેવા' ગણાવી દીધી, જેના કારણે સોશિયલ મીડિયાથી લઈને સામાજિક સંસ્થાઓ સુધી રોષ ફેલાયો છે. ખોડલધામ ટ્રસ્ટની મહિલા ટ્રસ્ટી જેની ઠુમરે આ નિવેદનને 'દુર્ભાગ્યપૂર્ણ' ગણાવીને મોના થિબાને માફી માગવાની માગ કરી છે.

શું કહ્યું મોના થિબાએ? રાજકોટમાં મીડિયા સાથે વાત કરતાં મોના થિબાએ જણાવ્યું હતું કે, "સમાજને એક મેસેજ છે કે, વેશ્યાવૃત્તિ પણ જે સ્ત્રીઓ કરે છે એ પણ સમાજની એક સેવા છે. એમની વેદના અને એવી શું મજબૂરી છે એ વાતને લઈને અમે આવ્યા છીએ. ફિલ્મ એક કાલ્પનિક કથા પર આધારિત છે." તેમણે વધુમાં કહ્યું કે, 'શક્તિ' એક અલગ પ્રકારની ફિલ્મ છે, જે વેશ્યાવૃત્તિ પર આધારિત છે પરંતુ પરિવાર સાથે બેસીને જોઈ શકાય તેવી સાફ-સુથરી છે. ફિલ્મ 27 ફેબ્રુઆરી 2026ના રોજ રિલીઝ થવા જઈ રહી છે. 

આ નિવેદનના વીડિયો અને ક્લિપ્સ સોશિયલ મીડિયા પર વાયરલ થતાં જ વિવાદ વધ્યો. કેટલાક લોકોએ તેને મહિલા સશક્તિકરણના નામે ભ્રમ ફેલાવવાનો પ્રયાસ ગણાવ્યો, જ્યારે અન્યોએ ફિલ્મ પ્રમોશન માટે સંવેદનશીલ વિષયનો દુરુપયોગ કરવાનો આરોપ લગાવ્યો. 

ખોડલધામ ટ્રસ્ટી જેની ઠુમરાની કડક પ્રતિક્રિયા ખોડલધામ ટ્રસ્ટની મહિલા ટ્રસ્ટી જેની ઠુમરે આ નિવેદન પર તીવ્ર વિરોધ નોંધાવ્યો. તેમણે કહ્યું, "મોના થિબાનું આ નિવેદન દુર્ભાગ્યપૂર્ણ છે. તમે જાહેર જીવનની વ્યક્તિ છો. તમારા પતિ અને સસરા ધારાસભ્ય રહી ચૂક્યા છે, આખો પરિવાર જાહેર જીવન સાથે સંકળાયેલો છે. ત્યારે આવા નિવેદન કરવા એ યોગ્ય નથી. એક મહિલા તરીકે આ નિવેદન આપ્યા પછી તમારે શરમાવું જોઈએ."

 તેમણે વધુમાં કહ્યું કે, "લાંબા સમય પછી ગુજરાતી ફિલ્મમાં તમારું પુનરાવર્તન થયું છે એના માટે અભિનંદન, પરંતુ ફિલ્મ પ્રમોશન માટે મહિલાઓનું અપમાન ન કરવું જોઈએ. કેટલીક સામાજિક સંસ્થાઓ અને NGO મહેનત કરીને આ મહિલાઓને સમાજમાં પુનઃસ્થાપિત કરવા મુહિમ ચલાવી રહ્યા છે. આવા સમયે આ નિવેદન બદલ માફી માગવી જોઈએ. આવી ટિપ્પણી યોગ્ય નથી, માફી માંગશો એવી મને આશા છે અને ભવિષ્યમાં આવી ગેરવ્યાજબી ટિપ્પણી ન કરો." 

 ફિલ્મ 'શક્તિ' અને તેનો વિવાદાસ્પદ પ્રમોશન 'શક્તિ' ફિલ્મ ફિયરલેસ ફિલ્મ્સના બેનર હેઠળ બનેલી છે અને તેનું નિર્દેશન ભાવિન ત્રિવેદીએ કર્યું છે. ફિલ્મ મહિલા સશક્તિકરણ અને સામાજિક જાગૃતિ પર આધારિત છે, જેમાં વેશ્યાવૃત્તિ જેવા સંવેદનશીલ વિષયને હેન્ડલ કરવામાં આવ્યો છે. ટ્રેલર રિલીઝ થયા બાદ તેને જયપુર ઇન્ટરનેશનલ ફિલ્મ ફેસ્ટિવલમાં નોમિનેશન પણ મળ્યું છે. 

વિરોધ વચ્ચે ડિરેક્ટર ભાવિન ત્રિવેદીએ જણાવ્યું કે, વિરોધ બાદ ટ્રેલર અને ફિલ્મમાંથી ગુજરાતના એ ગામનું નામ હટાવી દેવામાં આવ્યું છે, જેથી કોઈ વિવાદ ન થાય. 

 સમાજમાં મિશ્ર પ્રતિક્રિયા આ નિવેદન પર સોશિયલ મીડિયા પર મિશ્ર પ્રતિસાદ જોવા મળ્યા છે. કેટલાકે મોના થિબાને સમર્થન આપ્યું કે તેઓ ફિલ્મની વાર્તાના સંદર્ભમાં વાત કરી રહ્યા છે અને તે મહિલાઓની મજબૂરીઓને હાઈલાઈટ કરવા માંગે છે. બીજી તરફ, મોટા ભાગના લોકો અને સામાજિક કાર્યકર્તાઓએ તેને અયોગ્ય અને મહિલાઓનું અપમાન કરનારું ગણાવ્યું. કોંગ્રેસ આગેવાન નયનાબા જાડેજાએ પણ આ નિવેદનને દુર્ભાગ્યપૂર્ણ ગણાવ્યું. 

આ વિવાદ ગુજરાતી સિનેમામાં સામાજિક વિષયોને કેવી રીતે રજૂ કરવા તે અંગે નવી ચર્ચા શરૂ કરી રહ્યો છે. મોના થિબા હજુ સુધી આ અંગે વધુ સ્પષ્ટીકરણ આપ્યું નથી, પરંતુ તેમણે કહ્યું છે કે તેમની વાત ફિલ્મના સંદર્ભમાં છે. 

આ ઘટના બતાવે છે કે સામાજિક મુદ્દાઓ પર ફિલ્મો બનાવવી અને તેનું પ્રમોશન કરવું એ સંવેદનશીલ કામ છે, જેમાં શબ્દોની પસંદગી અત્યંત મહત્વની બને છે. 

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 20th Feb 2026
February 20, 2026

સુરતમાં ACBનો મોટો બ્લો! ક્લાસ-1 ઇજનેર અને 'પત્રકાર'ની લાંચિયા જોડીનો પર્દાફાશ: 15 લાખના તોડમાં 4 લાખ લઈ ફરાર, ભાજપના પૂર્વ કોર્પોરેટરે પણ બતાવી પોતાની પીડા

સુરતમાં ACBનો મોટો બ્લો! ક્લાસ-1 ઇજનેર અને 'પત્રકાર'ની લાંચિયા જોડીનો પર્દાફાશ: 15 લાખના તોડમાં 4 લાખ લઈ ફરાર, ભાજપના પૂર્વ કોર્પોરેટરે પણ બતાવી પોતાની પીડા
-Friday World 20th Feb 2026
સુરત: ગુજરાતમાં ભ્રષ્ટાચાર વિરુદ્ધ એન્ટી કરપ્શન બ્યુરો (ACB)ની કાર્યવાહી ધમધમી રહી છે. તાજેતરમાં સુરત મહાનગરપાલિકા (SMC)ના લિંબાયત ઝોનમાં ફરજ બજાવતા ક્લાસ-1 અધિકારી અને એક કથિત પત્રકારની મિલીભગતથી ચાલતા 15 લાખના મોટા લાંચ કાંડનો ACBએ પર્દાફાશ કર્યો છે. બાંધકામ તોડવાની કાર્યવાહી અટકાવવાના નામે આ જોડીએ ફરિયાદી પાસેથી 15 લાખની માંગણી કરી હતી, જેમાં પ્રથમ હપ્તા તરીકે 4 લાખ રૂપિયા લઈને પત્રકાર ફિલ્મી સ્ટાઈલમાં નાસી છૂટ્યો હતો. આ કેસમાં બંને વિરુદ્ધ ગુનો નોંધાયો છે અને ACBની અલગ-અલગ ટીમો ફરાર આરોપીઓને ઝડપવા માટે તપાસ તેજ કરી રહી છે. 

કેવી રીતે ખુલ્યો આ ભ્રષ્ટાચારનો રાજ? ઘટના લિંબાયત ઝોનના સંતોષ સબ ઇન્ડસ્ટ્રીયલ પ્લોટ નં. 134-135 સાથે જોડાયેલી છે. ગત નવેમ્બરમાં SMCએ આ પ્લોટ પર મનાઈ હુકમની નોટિસ આપી હતી. ફેબ્રુઆરીમાં ડિમોલિશનની કામગીરી શરૂ થઈ અને 1.70 લાખ રૂપિયાનો ચાર્જ પણ વસૂલાયો. પરંતુ બાકીનું બાંધકામ તોડવા નહીં દેવા માટે કાર્યપાલક ઇજનેર વિપુલ શશીકાંતભાઈ ગણેશવાલા અને તેમના 'ખાસ માણસ' તરીકે ઓળખાતા પત્રકાર મહંમદ ઇસ્માઇલ ઉર્ફે પરવાના જમીલખાન પઠાણે મિલીભગત કરી હતી. 

આરોપીઓએ શરૂઆતમાં 21 લાખની માંગણી કરી હતી, જે ટેલિફોનિક વાતચીત અને રકઝક પછી 15 લાખમાં નક્કી થઈ. પ્રથમ હપ્તો 4 લાખનો 19 ફેબ્રુઆરીએ 'નિષ્પક્ષ ગુજરાત પત્રિકા' અખબારની ઓફિસ (રૂમ નં. 104, આંજણા ઇન્ડસ્ટ્રીઝ, રઘુકુળ માર્કેટ પાસે, સાલાબતપુરા)માં આપવાનું નક્કી થયું. ફરિયાદીએ ACBનો સંપર્ક કરતાં તપાસ એજન્સીએ અહીં છટકું ગોઠવ્યું. 

ફરિયાદી જ્યારે 4 લાખ રોકડ લઈને પહોંચ્યા ત્યારે પરવાના પઠાણે હેતુલક્ષી વાતચીત કરી રકમ સ્વીકારી. પરંતુ તેને શંકા જતાં તે રકમ લઈને ફરાર થઈ ગયો. ઇજનેર વિપુલ ગણેશવાલા પણ સ્થળ પર હાજર ન હતા. ACBએ બંને વિરુદ્ધ ભ્રષ્ટાચાર નિવારણ અધિનિયમ હેઠળ ગુનો નોંધ્યો છે અને બાકીના 11 લાખની તપાસ સાથે અન્ય સંડોવણીની શક્યતા તપાસી રહી છે. 

 ઇજનેર વિપુલ ગણેશવાલાનો વિવાદાસ્પદ ઇતિહાસ લિંબાયત ઝોનમાં અઢી વર્ષથી ફરજ બજાવતા વિપુલ ગણેશવાલા પર અગાઉ પણ અનેક ફરિયાદો થઈ ચૂકી છે. કતારગામ ઝોનમાં તેમના કાર્યકાળ દરમિયાન પણ ભ્રષ્ટાચારના આરોપો ઉઠ્યા હતા. સ્થાનિક રહેવાસીઓ અને નાના બાંધકામકર્તાઓ તેમના ત્રાસથી ત્રાહિમામ પોકારી રહ્યા છે. ઓક્ટોબર 2025માં બિલ્ડરો અને વ્યવસાયીઓએ મ્યુનિસિપલ કમિશનર શાલિની અગ્રવાલને પણ લેખિત ફરિયાદ કરી હતી, જેમાં દલાલો (પરવાના અને સમીર) મારફતે લાંચની માંગણીનો આક્ષેપ હતો. પરંતુ પાલિકા તંત્ર દ્વારા કોઈ કડક કાર્યવાહી ન થતાં જનતામાં રોષ વધ્યો છે. 

પત્રકાર પરવાના પઠાણની 'ફોર્ચ્યુનર' અને 'સમાજસેવા'નો દંભ પરવાના જમીલખાન પઠાણ 'નિષ્પક્ષ ગુજરાત પત્રિકા'ના કથિત પત્રકાર તરીકે ઓળખાય છે, પરંતુ તેની પાસે સફેદ ફોર્ચ્યુનર કાર છે અને લોકો પાસેથી લાખો ઉઘરાવીને ઇન્સ્ટાગ્રામ પર રીલ્સ મૂકી 'સમાજસેવક'ની ઇમેજ બનાવે છે. સામાજિક કાર્યક્રમોમાં ફોર્ચ્યુનરમાં જતો તે લોકોને પ્રભાવિત કરવાનો પ્રયાસ કરતો હતો. આ કેસમાં અખબારની ઓફિસ જ લાંચનો અડ્ડો બની ગઈ હતી.

 ભાજપના એક પૂર્વ કોર્પોરેટરે પણ જણાવ્યું કે, "મને પણ આ લોકોએ છોડ્યો નથી. આવા તત્વોને તાત્કાલિક સજા મળવી જોઈએ." 

 આગળ શું? ACBએ ફરાર આરોપીઓને ઝડપવા માટે ટીમો રચી છે. લાંચના નાણાં રિકવરી અને આ કૌભાંડમાં વધુ મોટા માથાઓની સંડોવણી છે કે કેમ તે તપાસ ચાલુ છે. આ ઘટના સુરત મહાનગરપાલિકામાં ભ્રષ્ટાચારના ઊંડા મૂળને ઉજાગર કરી રહી છે. જનતા માંગ કરી રહી છે કે આવા અધિકારીઓ અને વચેટીયાઓને કડક સજા મળે અને તંત્રમાં પારદર્શિતા લાવવામાં આવે. 

આ કેસ બતાવે છે કે ભ્રષ્ટાચાર માત્ર અધિકારીઓ સુધી મર્યાદિત નથી, પરંતુ તેમાં મીડિયા અને દલાલો પણ સામેલ થઈ રહ્યા છે. ACBની આ કાર્યવાહીને જનતા તરફથી સમર્થન મળી રહ્યું છે.

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World 20th Feb 2026
February 20, 2026

महाराष्ट्र की राजनीति में ठाकरे बनाम ठाकरे का नया दौर! शिंदे-राज की मुलाकात के बाद उद्धव का बड़ा फैसला, मनसे को लगा जोरदार झटका

महाराष्ट्र की राजनीति में ठाकरे बनाम ठाकरे का नया दौर! शिंदे-राज की मुलाकात के बाद उद्धव का बड़ा फैसला, मनसे को लगा जोरदार झटका
-Friday World 20th Feb 2026
मुंबई: महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर ठाकरे परिवार के बीच तनाव की लहरें उठ रही हैं। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने राज ठाकरे और एकनाथ शिंदे की मुलाकात के ठीक बाद एक बड़ा और तेज फैसला लिया है, जिससे महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) को करारा झटका लगा है। यह फैसला बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के नामित (नॉमिनेटेड) नगरसेवकों से जुड़ा है, जहां उद्धव ठाकरे ने अपने कोटे की तीनों सीटों पर अपने ही पार्टी के नेताओं के नाम फाइनल कर दिए हैं। 

सूत्रों के मुताबिक, उद्धव ठाकरे ने साईनाथ दुर्गे, माधुरी मांजरेकर और कैलाश पाठक के नामों पर मुहर लगा दी है। इन नामों की आधिकारिक घोषणा 28 फरवरी को होने की संभावना है। यह कदम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि राज ठाकरे ने उद्धव से मनसे को एक नामित सीट देने की मांग की थी, लेकिन उद्धव ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। 

शिंदे-राज मुलाकात ने बदले सियासी समीकरण सब कुछ बुधवार को शुरू हुआ, जब मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के आधिकारिक निवास 'नंदनवन' में उनसे मुलाकात की। यह मुलाकात बीएमसी चुनावों के बाद दोनों नेताओं की पहली आमने-सामने की बातचीत थी। मुलाकात के दौरान विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह साफ संकेत माना जा रहा है कि राज ठाकरे शिंदे गुट के साथ नजदीकियां बढ़ा रहे हैं। 

राज ठाकरे ने हाल ही में बीएमसी चुनाव में उद्धव गुट के साथ गठबंधन किया था, लेकिन परिणाम निराशाजनक रहे। मनसे को महज 6 सीटें मिलीं। अब शिंदे से मुलाकात के बाद राज ठाकरे की मांग को उद्धव ने ठुकरा दिया, जिससे ठाकरे बंधुओं के बीच पुरानी रंजिश फिर उभर आई है। उद्धव गुट का मानना है कि राज ठाकरे को शिंदे या भाजपा से दूरी बनाए रखनी चाहिए थी, लेकिन यह मुलाकात सब कुछ बदल गई। 

 बीएमसी चुनावों ने उलट दिया पुराना वर्चस्व बीएमसी चुनाव जनवरी 2026 में हुए थे, जिनके नतीजों ने मुंबई की राजनीति में 44 साल पुराना इतिहास बदल दिया। 227 सदस्यीय बीएमसी में भाजपा ने 89 सीटें जीतीं, जबकि शिंदे गुट की शिवसेना को 29 सीटें मिलीं। इस तरह महायुति गठबंधन (भाजपा + शिंदे सेना) के पास 118 सीटें आईं, जो बहुमत के आंकड़े 114 से ज्यादा हैं। 

दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को 65 सीटें मिलीं और उनके सहयोगी मनसे को सिर्फ 6 सीटें। इससे उद्धव गुट विपक्ष में सिमट गया। चुनाव के बाद भाजपा की रितु तावड़े मुंबई की पहली महिला मेयर बनीं, जिससे शिवसेना का तीन दशक पुराना वर्चस्व खत्म हो गया। 

बीएमसी में नामित सदस्यों की व्यवस्था विशेषज्ञों, महिलाओं, अल्पसंख्यकों आदि के लिए होती है। पिछली बार 5 नामित थे, लेकिन अब 10 हो गए हैं। भाजपा को 4, उद्धव सेना को 3, कांग्रेस, एआईएमआईएम और शिंदे सेना को 1-1 नामित सीट मिलती है। उद्धव ने अपनी तीनों सीटों पर अपने विश्वसनीय लोगों को चुना, ताकि विपक्ष में रहते हुए भी बीएमसी में मजबूत पकड़ बनी रहे। 

उद्धव का यह फैसला क्यों लिया गया इतनी जल्दी? राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि उद्धव ठाकरे ने यह फैसला इसलिए तेजी से लिया क्योंकि वे राज ठाकरे के शिंदे से बढ़ते रिश्ते से सतर्क हैं। मनसे को एक सीट देने से उद्धव गुट की ताकत कम हो सकती थी। यह कदम उद्धव सेना को मजबूत करने और अपने संगठन में एकजुटता दिखाने का संकेत है। 

उद्धव गुट शिंदे सेना को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानता है। अब जब राज ठाकरे शिंदे से मिल रहे हैं, तो उद्धव नामित सदस्यों के जरिए बीएमसी में अपनी आवाज बुलंद रखना चाहते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ठाकरे बंधुओं के बीच यह खाई और गहरी होती है या कोई नया मोड़ आता है।

 यह घटनाक्रम महाराष्ट्र की सियासत को नई दिशा दे सकता है, जहां परिवारवाद और गुटबाजी फिर से सुर्खियों में है। मुंबई जैसे महानगर में बीएमसी का नियंत्रण किसके हाथ में रहेगा, यह सवाल अब और गहरा हो गया है। 
Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World 20th Feb 2026
February 20, 2026

डोनाल्ड ट्रंप को सबसे बड़ा झटका: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ग्लोबल टैरिफ को गैरकानूनी घोषित किया,

डोनाल्ड ट्रंप को सबसे बड़ा झटका: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ग्लोबल टैरिफ को गैरकानूनी घोषित किया,
-Friday World 20th Feb 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की आर्थिक नीति को आज सबसे बड़ा झटका लगा है। अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी 2026 को एक ऐतिहासिक फैसले में ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक ग्लोबल टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया। कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया कि राष्ट्रपति ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का दुरुपयोग कर टैरिफ लगाए, जो उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। 

यह फैसला ट्रंप की "लिबरेशन डे" टैरिफ नीति पर सीधा हमला है, जिसके तहत उन्होंने दुनिया के लगभग हर देश पर 10% से ज्यादा टैरिफ लगाए थे। चीन, मैक्सिको, कनाडा, यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया और भारत जैसे प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर विशेष रूप से उच्च टैरिफ लगाए गए थे। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि संविधान के अनुसार टैरिफ (आयात कर) लगाने की शक्ति कांग्रेस के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास। 

चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत की ओर से लिखा, "राष्ट्रपति ने खुद को असीमित टैरिफ लगाने की शक्ति का दावा किया है—किसी भी देश पर, किसी भी उत्पाद पर, किसी भी दर से और अनिश्चित समय के लिए। लेकिन IEEPA कानून ऐसा कोई स्पष्ट अधिकार नहीं देता। बिना कांग्रेस की स्पष्ट मंजूरी के ऐसा नहीं किया जा सकता।" 

फैसले की मुख्य बातें

 - 6-3 बहुमत: चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स के नेतृत्व में तीन उदारवादी जजों और कुछ कंजर्वेटिव जजों (एमी कोनी बैरेट, नील गोरसच) ने बहुमत में शामिल होकर ट्रंप के खिलाफ फैसला दिया। 

- IEEPA का दुरुपयोग: यह 1977 का कानून राष्ट्रीय आपातकाल में विदेशी खतरों से निपटने के लिए बनाया गया था। इसमें "रगुलेट इम्पोर्टेशन" शब्द है, लेकिन टैरिफ लगाने का स्पष्ट उल्लेख नहीं। कोर्ट ने कहा कि आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल कर सामान्य व्यापार नीति नहीं बनाई जा सकती। 

- ट्रंप की प्रतिक्रिया: ट्रंप ने फैसले को "डिसग्रेस" (शर्मनाक) बताया। उन्होंने कहा कि यह उनके आर्थिक एजेंडे पर हमला है और वे अन्य कानूनों के तहत टैरिफ दोबारा लगाने की कोशिश करेंगे।

 - असहमति: जस्टिस क्लेरेंस थॉमस, सैमुअल अलिटो और ब्रेट कवानॉ ने असहमति जताई। कवानॉ ने लिखा कि टैरिफ नीति सही हो या गलत, लेकिन यह कानूनी है। 

आर्थिक प्रभाव और रिफंड की संभावना अमेरिकी सरकार ने 2025 से अब तक IEEPA के तहत लगभग 135-175 अरब डॉलर (कुछ अनुमानों में 200 अरब तक) टैरिफ इकट्ठा किए हैं। कोर्ट के फैसले के बाद आयातकों को रिफंड मिलने की उम्मीद है। हालांकि फैसले में रिफंड की प्रक्रिया पर स्पष्ट निर्देश नहीं दिए गए हैं।

 - कंपनियां अब यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में केस दाखिल कर रिफंड मांग सकती हैं। 

- अनुमान है कि रिफंड प्रक्रिया जटिल होगी और खजाने पर भारी बोझ पड़ेगा।

 - अमेरिकी उपभोक्ताओं पर टैरिफ के कारण बढ़ी कीमतें अब कम हो सकती हैं, लेकिन वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता बढ़ गई है। 

 वैश्विक प्रभाव: भारत और अन्य देशों पर क्या असर? ट्रंप ने टैरिफ को विदेश नीति का हथियार बनाया था। भारत, चीन, मैक्सिको जैसे देशों पर लगे टैरिफ से अमेरिकी आयात महंगा हुआ था। इस फैसले से:

 - भारत जैसे देशों के निर्यातकों को राहत मिल सकती है। 

- वैश्विक व्यापार युद्ध की आशंका कम हुई है। 

- ट्रंप की "अमेरिका फर्स्ट" नीति को बड़ा झटका लगा, क्योंकि टैरिफ उनकी मुख्य हथियार थे। 

 ट्रंप के एजेंडे पर क्या असर? यह ट्रंप के दूसरे कार्यकाल का पहला बड़ा सुप्रीम कोर्ट झटका है। कोर्ट ने पहले कई मुद्दों पर ट्रंप का साथ दिया था, लेकिन यहां संविधान की मूल भावना—कांग्रेस की टैक्सेशन शक्ति—को प्राथमिकता दी गई। व्हाइट हाउस ने कहा है कि वे अन्य कानूनों (जैसे सेक्शन 232 या 301) के तहत टैरिफ दोबारा लगाने की कोशिश करेंगे, लेकिन वे ज्यादा सीमित और प्रक्रिया-आधारित होंगे। 

यह फैसला अमेरिकी लोकतंत्र की शक्ति पृथक्करण की जीत है। ट्रंप की आक्रामक व्यापार नीति अब कानूनी जांच के दायरे में आएगी। दुनिया भर के व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है, क्योंकि अनियंत्रित टैरिफ से मुद्रास्फीति और व्यापार युद्ध बढ़ सकते थे।

 क्या ट्रंप कांग्रेस से मंजूरी लेकर टैरिफ दोबारा लगाएंगे? या यह उनके एजेंडे का अंत होगा? आने वाले दिनों में जवाब मिलेगा। लेकिन आज का फैसला इतिहास में दर्ज हो चुका है—राष्ट्रपति टैरिफ  का राजा नहीं हैं!

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 20th Feb 2026
February 20, 2026

T20 विश्व कप 2026: झिम्बाब्वे का कमाल! सुपर-8 में 'ग्रुप ऑफ डेथ' सेमीफाइनल की दावेदार टीमें, दिग्गजों की भविष्यवाणियां

T20 विश्व कप 2026: झिम्बाब्वे का कमाल! सुपर-8 में 'ग्रुप ऑफ डेथ' सेमीफाइनल की दावेदार टीमें, दिग्गजों की भविष्यवाणियां -Friday World 20th Feb 2026

T20 विश्व कप 2026 अब अपने सबसे रोमांचक चरण में प्रवेश कर चुका है। भारत और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में चल रहे इस टूर्नामेंट का ग्रुप स्टेज खत्म हो गया है, और सुपर-8 का दौर शुरू हो चुका है। ग्रुप स्टेज में चार टीमें अजेय रहकर टॉप पर रहीं—भारत, झिम्बाब्वे, वेस्ट इंडीज और दक्षिण अफ्रीका। इनके अलावा न्यूजीलैंड, इंग्लैंड, श्रीलंका और पाकिस्तान ने भी क्वालीफाई किया। लेकिन सबसे बड़ा सरप्राइज झिम्बाब्वे का रहा, जिसने ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका जैसी बड़ी टीमों को हराकर ग्रुप टॉप किया। 

सुपर-8 के ग्रुप इस प्रकार बने हैं: 

- ग्रुप 1 (ग्रुप ऑफ डेथ): भारत, दक्षिण अफ्रीका, वेस्ट इंडीज, झिम्बाब्वे 

- ग्रुप 2: इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, पाकिस्तान, श्रीलंका


 ICC की प्री-सीडिंग के कारण सभी चार ग्रुप विजेता एक ही ग्रुप में आ गए, जिसकी फैंस और एक्सपर्ट्स ने जमकर आलोचना की। अब हर मैच जीत-हार का फैसला करेगा, और टॉप-2 टीमें सेमीफाइनल में पहुंचेंगी। 
संजय मांजरेकर की भविष्यवाणी: भारत-साउथ अफ्रीका फाइनल की संभावना

पूर्व भारतीय क्रिकेटर और कमेंटेटर संजय मांजरेकर ने सेमीफाइनलिस्ट टीमों पर अपनी राय रखी है। उनके अनुसार टॉप-4 में जगह बनाने वाली टीमें हो सकती हैं: 

- भारत

 - दक्षिण अफ्रीका 

- न्यूजीलैंड 

- श्रीलंका 

मांजरेकर का कहना है कि भारत घरेलू मैदानों पर खेल रहा है, उसका बैलेंस्ड स्क्वॉड, मजबूत स्पिन अटैक और अनुभवी खिलाड़ी उसे चैंपियन बनने का सबसे बड़ा दावेदार बनाते हैं। दक्षिण अफ्रीका की तेज गेंदबाजी और ऑलराउंडर उन्हें फाइनल तक ले जा सकते हैं। उन्होंने फाइनल में भारत vs दक्षिण अफ्रीका की संभावना जताई है। न्यूजीलैंड और श्रीलंका को भी मजबूत बताया, क्योंकि दोनों के पास अच्छा फॉर्म और अनुभव है। 

मोंटी पनेसर की चौंकाने वाली भविष्यवाणी: झिम्बाब्वे सेमीफाइनल में पहुंचेगा!

पूर्व इंग्लिश स्पिनर मोंटी पनेसर ने सबसे ज्यादा हैरान करने वाली भविष्यवाणी की है। उन्होंने झिम्बाब्वे को 'एक्स-फैक्टर' बताया और कहा कि यह टीम सेमीफाइनल तक जरूर पहुंचेगी। पनेसर की टॉप-4 टीमों की सूची: 

- भारत

 - इंग्लैंड 

- श्रीलंका

 - **झिम्बाब्वे** 

पनेसर ने झिम्बाब्वे की तारीफ में कहा, "झिम्बाब्वे के ऊंचे कद के तेज गेंदबाजों को पिच से शानदार बाउंस मिल रहा है। ऑस्ट्रेलिया को हराने के बाद उनका कॉन्फिडेंस बहुत ऊंचा है। यह टीम सरप्राइज पैकेज है और सेमीफाइनल की मजबूत दावेदार है।" 

भारत के बारे में उन्होंने कहा कि टीम मजबूत है, लेकिन एक बड़ी चिंता है—भारतीय बल्लेबाज स्पिनरों के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। अगर यह कमजोरी न सुधरी, तो आगे मुश्किलें आ सकती हैं।

 इंग्लैंड को 'पावर हाउस' बल्लेबाजी वाली टीम बताया, जो बड़े स्कोर बना सकती है और बड़े मैच जीत सकती है। श्रीलंका को घरेलू मैदान का फायदा और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शानदार रन चेज के कारण मजबूत माना। 

झिम्बाब्वे का कमाल क्यों? झिम्बाब्वे ने ग्रुप स्टेज में ओमान, ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका को हराकर सबको चौंका दिया। उनके तेज गेंदबाजों का बाउंस और आत्मविश्वास उन्हें ग्रुप 1 में भी खतरा बना रहा है। सुपर-8 में भारत, दक्षिण अफ्रीका और वेस्ट इंडीज से मुकाबला आसान नहीं होगा, लेकिन अगर वे फॉर्म बरकरार रखे, तो सेमीफाइनल तक का सफर संभव है। 

टूर्नामेंट क्यों इतना रोमांचक? यह विश्व कप सरप्राइज से भरा हुआ है। झिम्बाब्वे जैसी अंडरडॉग टीम का ग्रुप टॉप करना क्रिकेट की अनिश्चितता दिखाता है। भारत घरेलू मैदान पर है, लेकिन स्पिन के खिलाफ कमजोरी चिंता का विषय बनी हुई है। ग्रुप 1 में चार मजबूत टीमें होने से हर मैच 'फाइनल' जैसा लग रहा है। ग्रुप 2 में इंग्लैंड, पाकिस्तान और श्रीलंका की टक्कर भी कम नहीं होगी। 

संभावित फाइनल जोड़ियां

 - मांजरेकर: भारत vs दक्षिण अफ्रीका 

- पनेसर: भारत vs इंग्लैंड (या झिम्बाब्वे का सरप्राइज एंट्री) 

क्रिकेट में कुछ भी हो सकता है। क्या झिम्बाब्वे सच में सेमीफाइनल में पहुंचेगा? क्या भारत फाइनल में दक्षिण अफ्रीका से भिड़ेगा? या इंग्लैंड-श्रीलंका कोई बड़ा उलटफेर करेंगे? सुपर-8 के मैच जारी हैं, और हर गेंद पर रोमांच है। फैंस के लिए यह टूर्नामेंट अब और भी दिलचस्प हो गया है। ट्रॉफी किसके हाथ लगेगी? आने वाले दिनों में जवाब मिलेगा।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World 20th Feb 2026
February 20, 2026

भावनगर में शिया समुदाय की आध्यात्मिक रौनक: माहे रमज़ान में मौलाना शेख अबुल हसन कश्मीरी साहब की कुरान ख्वानी और दर्स से दिलों को मिली सुकून की बारिश

भावनगर में शिया समुदाय की आध्यात्मिक रौनक: माहे रमज़ान में मौलाना शेख अबुल हसन कश्मीरी साहब की कुरान ख्वानी और दर्स से दिलों को मिली सुकून की बारिश -Friday World 20th Feb 2026
गुजरात के भावनगर शहर में माहे मुबारक रमज़ान का आगमन हर साल की तरह इस बार भी शिया मुस्लिम समुदाय के लिए आध्यात्मिक उमंग और इबादत का महीना लेकर आया है। यहां की प्रमुख शिया मस्जिदों में रमज़ान की पहली तारीख से ही कुरान ख्वानी, दर्स-ए-हिकमत और नसीहत के मजलिसों का सिलसिला जारी है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होकर रूहानी ताज़गी हासिल कर रहे हैं। 

खास तौर पर मौलाना शेख अबुल हसन कश्मीरी साहब की मौजूदगी ने इस रमज़ान को और भी खास बना दिया है। मौलाना साहब, जो नजफ ए अशरफ मे इल्म हासिल हैं,
 अपनी मधुर तिलावत और गहन इल्म के लिए जाने जाते हैं। भावनगर की शिया मस्जिद में उन्होंने रमज़ान की शुरुआत में तिलावत-ए-कुरआन की खूबसूरत महफिल सजाई, जहां उनकी आवाज़ में कुरआन की आयतें सुनकर श्रद्धालुओं के दिल सुकून और आंसुओं से भर उठे। यूट्यूब पर उपलब्ध उनके तिलावत वीडियो (जैसे 01st Ramzan Tilawat E Quran) ने दूर-दूर तक लोगों को आकर्षित किया है, और भावनगर में यह सिलसिला जमकर चल रहा है। 

मौलाना शेख अबुल हसन कश्मीरी साहब ने अपने दर्स में खास तौर पर "आमाले हिकमत और नसीहत" पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "कुरआन ख्वानी और दर्स को इत्मीनान से अंजाम दें। जल्दबाजी न करें, क्योंकि कुरआन का हर लफ्ज़ दिल में उतरकर अमल की ताकत देता है। रमज़ान सिर्फ रोज़ा और इबादत का महीना नहीं, बल्कि खुद को बेहतर बनाने, हिकमत अपनाने और दूसरों को नसीहत देने का मौका है।" मौलाना साहब ने समझाया कि कुरआन की तिलावत में गहराई और यकीन के साथ जुड़ना चाहिए, ताकि यह सिर्फ जुबानी न रहे, बल्कि दिल-ओ-दिमाग पर असर करे।

मौलाना साहब की नसीहतों में एक खास बात यह थी कि रमज़ान में इबादत को जल्दबाजी में न करें। उन्होंने फरमाया, "रोज़े की तैयारी से लेकर नमाज और दर्स तक, सब कुछ इत्मीनान और खुलूस से करें। जल्दबाजी शैतान की तरफ ले जाती है, जबकि सुकून अल्लाह की रहमत है।" यह संदेश आज के तेज़-रफ्तार दौर में बहुत मायने रखता है, जहां लोग अक्सर इबादत को भी रूटीन बना देते हैं।

 भावनगर की इस शिया मस्जिद में रमज़ान की महफिलें न सिर्फ स्थानीय लोगों के लिए, बल्कि आसपास के इलाकों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। यहां की माहौल में कुरआन की आवाज़, दुआओं की गूंज और भाईचारे की मिसाल हर किसी को छू जाती है। मौलाना शेख अबुल हसन कश्मीरी साहब की मौजूदगी से यह रमज़ान समुदाय के लिए यादगार बन रहा है।

 अल्लाह तआला इस मुबारक महीने की बरकतों से सबको नवाज़े, और हमें कुरआन पर अमल करने की तौफीक दे। आमीन! 

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World 20th Feb 2026