September 28, 2026
ईरानी उड़ानों पर बैन से बसरा में भड़का जन-आक्रोश - ट्राइबल लीडर शेख अबू हसम अल-हरबी का इराक सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम!
ईरानी उड़ानों पर बैन से बसरा में भड़का जन-आक्रोश - ट्राइबल लीडर शेख अबू हसम अल-हरबी का इराक सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम!
- Friday World September 28,2026
ईरान की उड़ानों पर इराक सरकार की पाबंदी ने अब इराक के सबसे अहम शहर बसरा में बवाल खड़ा कर दिया है। बसरा की सड़कों पर अवाम का गुस्सा खुलकर सामने आ गया है और ट्राइबल लीडर शेख अबू हसम अल-हरबी ने इराकी सरकार को सीधा 48 घंटे का अल्टीमेटम दे दिया है।
क्या है शेख अल-हरबी का अल्टीमेटम?
शेख अबू हसम अल-हरबी ने एक जनसभा में कहा है कि इराक सरकार तुरंत ईरानी उड़ानों पर लगाई गई पाबंदी को वापस ले। उनका कहना है कि बसरा का ईरान के साथ सदियों पुराना रिश्ता है - जमीनी, कारोबारी और सामाजिक। हर साल लाखों जायरीन ईरान से इराक और इराक से ईरान जाते हैं। इस पाबंदी से आम लोगों का रोजगार, तीर्थयात्रा और व्यापार सब ठप हो गया है।
शेख ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर सरकार ने 48 घंटे के अंदर अपना फैसला वापस नहीं लिया, तो वो अपने कबीले के लोगों के साथ बसरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट में दाखिल हो जाएंगे और किसी भी फ्लाइट को उड़ने नहीं देंगे। उनके इस बयान के बाद एयरपोर्ट के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।
बसरा क्यों है इतना अहम?
बसरा इराक का आर्थिक दिल है। इराक का 80% तेल यहीं से निर्यात होता है और यह शहर ईरान की सीमा से सटा हुआ है। यहां के लोगों के ईरान के अबादान और खोर्रमशहर शहरों में रिश्तेदारियां हैं। हजारों बसरा वासी ईरान में काम करते हैं और ईरानी सामान बसरा के बाजारों में बिकता है। ऐसे में फ्लाइट बैन ने सीधे आम आदमी की जेब पर चोट की है।
दो नावों पर सवार इराकी सरकार
इराकी सरकार पर इस समय दोहरा दबाव है। एक तरफ अमेरिका का दबाव है कि ईरान की एयरलाइंस, खासकर Mahan Air और Iran Air पर पाबंदी लगाई जाए क्योंकि अमेरिका का आरोप है कि ये उड़ानें हथियारों की ढुलाई के लिए इस्तेमाल होती हैं। वहीं दूसरी तरफ, बसरा में शिया कबीलों और ईरान समर्थक गुटों का जबरदस्त विरोध है।
इराकी सरकार ने पिछले हफ्ते सुरक्षा कारणों का हवाला देकर ईरानी उड़ानों को अस्थायी रूप से निलंबित किया था, लेकिन अब यही फैसला उसके लिए गले की हड्डी बन गया है।
बड़े बुजुर्ग सही कहते हैं - दो नावों पर सवारी नहीं करनी चाहिए। इराकी सरकार को अब तय करना होगा कि वह अमेरिकी दबाव में रहेगी या अपने ही बसरा के लोगों की सुनेगी।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World September 28,2026
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