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यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Thursday, 22 October 2026

October 22, 2026

हिलेरी क्लिंटन का बड़ा धमाका - एप्स्टीन फाइलें खुलीं तो ट्रम्प का खेल खत्म! समर्थक भी रह जाएंगे सन्न, पुतिन के पास हैं वीडियो-प्रमाण!

हिलेरी क्लिंटन का बड़ा धमाका - एप्स्टीन फाइलें खुलीं तो ट्रम्प का खेल खत्म! समर्थक भी रह जाएंगे सन्न, पुतिन के पास हैं वीडियो-प्रमाण!
- Friday World Oct 22,2026 
वाशिंगटन: अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने डोनाल्ड ट्रम्प और ट्रम्प परिवार को लेकर ऐसे सनसनीखेज दावे किए हैं, जिसने अमेरिकी राजनीति में भूचाल ला दिया है। क्लिंटन के मुताबिक, एप्स्टीन स्कैंडल का पूरी तरह से सार्वजनिक होना ट्रम्प के लिए गंभीर परिणाम लेकर आएगा, और सच्चाई जानकर उनके कट्टर समर्थक भी चौंक जाएंगे।

एप्स्टीन स्कैंडल होगा निर्णायक?

हिलेरी क्लिंटन का कहना है कि एप्स्टीन से जुड़ी फाइलें अभी तक पूरी तरह से सामने नहीं आई हैं। उनके अनुसार, "जब यह स्कैंडल पूरी तरह सार्वजनिक होगा, तो इसका ट्रम्प पर गंभीर परिणाम होगा। यहां तक कि उनके समर्थक भी इस सच्चाई को जानकर चौंक जाएंगे।"

गौरतलब है कि जेफरी एप्स्टीन केस में कई बड़े नामों के जुड़ने की चर्चाएं पहले भी होती रही हैं, लेकिन क्लिंटन का यह सीधा हमला 2026 के राजनीतिक माहौल को और गर्मा रहा है।

ट्रम्प परिवार भ्रष्ट और धोखेबाज?

क्लिंटन ने अपने बयान में ट्रम्प परिवार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, "ट्रम्प परिवार भ्रष्ट और धोखेबाज है। उनकी राष्ट्रपति पद से हुई आय लगभग 15 लाख लोगों के एक साल के भोजन या 50 लाख से अधिक लोगों के तीन महीने के भोजन का खर्च पूरा कर सकती है।"

उनका इशारा ट्रम्प के कार्यकाल में हुए बिजनेस डील, होटल और ब्रांड से हुई कमाई की ओर है, जिसे विपक्ष हमेशा से Conflict of Interest बताता रहा है।

सबसे बड़ा दावा - पुतिन के पास हैं तस्वीरें और वीडियो!

हिलेरी क्लिंटन के बयान का सबसे विस्फोटक हिस्सा वह है जहां उन्होंने दावा किया कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के पास ट्रम्प के खिलाफ तस्वीरें और वीडियो जैसे पुख्ता सबूत हैं।

क्लिंटन के इस दावे ने उस पुरानी थ्योरी को फिर हवा दे दी है, जिसमें कहा जाता रहा है कि रूस के पास ट्रम्प को लेकर कुछ ऐसी कॉम्प्रोमाइजिंग जानकारी है, जिसके कारण ट्रम्प रूस पर नरम रुख रखते हैं। हालांकि, इस दावे का अभी तक कोई स्वतंत्र प्रमाण सार्वजनिक नहीं हुआ है, यह हिलेरी क्लिंटन के व्यक्तिगत आरोप के तौर पर सामने आया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि क्लिंटन का यह बयान आने वाले चुनावों से पहले डेमोक्रेट्स की रणनीति का हिस्सा है, ताकि ट्रम्प की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया जा सके। वहीं ट्रम्प समर्थक इसे पूरी तरह से फेक न्यूज और राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रहे हैं।

अब देखना यह है कि क्या एप्स्टीन की सील बंद फाइलें सच में खुलती हैं और क्या हिलेरी के दावे सच्चाई में बदलते हैं।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World Oct 22,2026 

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October 22, 2026

MI6 के पूर्व अधिकारी का सनसनीखेज दावा - MBS का जाना तय है! 20 जून 2017 की रात सफा पैलेस में हुआ था असली तख्तापलट, वेस्टर्न मीडिया क्यों है खामोश?

MI6 के पूर्व अधिकारी का सनसनीखेज दावा - MBS का जाना तय है! 20 जून 2017 की रात सफा पैलेस में हुआ था असली तख्तापलट, वेस्टर्न मीडिया क्यों है खामोश?
-Friday World Oct 22,2026 
रियाद: इंग्लैंड की खुफिया एजेंसी MI6 के एक उच्च पद पर रहे पूर्व अधिकारी के हवाले से एक ऐसा दावा सामने आया है, जिसने पूरी दुनिया की सऊदी पॉलिटिक्स को लेकर सोच बदल दी है। अधिकारी के मुताबिक, क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) को जाना ही पड़ेगा, क्योंकि सऊदी शाही परिवार के अंदर और कबीले के स्तर पर तनाव अब चरम पर है।

यह दावा ऐसे समय में आया है जब वेस्टर्न मीडिया MBS को एक रिफॉर्मर और विजनरी लीडर के तौर पर पेश कर रहा है।

असली क्राउन प्रिंस को कैसे हटाया गया? 20 जून 2017 की कहानी

MI6 के पूर्व अधिकारी के दावे के मुताबिक, जिसे वेस्टर्न मीडिया कभी जुंटा लीडर नहीं कहेगा, असली तख्तापलट 20 जून 2017 को दिनदहाड़े मक्का के सफा पैलेस में हुआ था।

उस रात की कहानी का जिक्र न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी अपनी रिपोर्ट में किया था। रिपोर्ट के अनुसार, मोहम्मद बिन नायेफ (MBN), जो अमेरिका के करीबी माने जाते थे और अल-कायदा के खिलाफ लड़ाई के हीरो थे, उन्हें एक मीटिंग के बहाने सफा पैलेस बुलाया गया, उनके फोन छीन लिए गए और घंटों तक दबाव बनाकर उनसे क्राउन प्रिंस के पद से इस्तीफा लिखवाया गया। यह रमजान के आखिरी दिनों में हुआ, जिसे एनालिस्ट ने "क्रिसमस की रात पर तख्तापलट" जैसा बताया।

पूर्व अधिकारी का आरोप है कि इस पूरे ऑपरेशन में एरिक प्रिंस नाम के सरदार और उसकी प्राइवेट मिलिट्री कंपनी के भाड़े के सैनिकों ने मदद की थी, ताकि पैलेस के अंदर सुरक्षा को अपने हाथ में रखा जा सके। सऊदी मीडिया ने अगले दिन 31-3 वोट से एलिजेंस काउंसिल की मंजूरी की खबर दिखाई, लेकिन अंदर की कहानी कहीं ज्यादा पेचीदा थी।

हूथी मिसाइलों से महल में दहशत, बंकर में सो रहे हैं MBS?

दावे के मुताबिक, आज सऊदी में हालात इसलिए और खराब हैं क्योंकि हूथी लगातार मिसाइलें दाग रहे हैं और सऊदी के तेल ठिकानों को निशाना बना रहे हैं। वेस्टर्न मीडिया यह कभी रिपोर्ट नहीं करेगा कि महल के अंदर कबीले आपस में लड़ रहे हैं और कई राजकुमार MBS के फैसलों से नाराज हैं।

इसी वजह से, पूर्व अधिकारी के अनुसार, MBS एक भगोड़े की तरह एक बंकर से दूसरे बंकर में जा रहे हैं, उनके चारों ओर उनके चुने हुए बॉडीगार्ड्स का घेरा है। कहा जा रहा है कि वे खासकर कतर और UAE की सीमा के पास बने सुरक्षित बंकरों में रात बिताते हैं, ताकि हालात बिगड़ने पर आसानी से देश से बाहर निकला जा सके।

यह वही समय है जब ब्रेंट क्रूड 112 डॉलर के पार चला गया है और सऊदी के ऑयल इंस्टॉलेशन पर हमले बढ़े हैं।

सवाल यही है कि क्या वेस्टर्न मीडिया MBS की अच्छी छवि दिखाकर असली महल की लड़ाई को छिपा रहा है? क्या MBN को हटाने का वह फैसला आज सऊदी को अस्थिरता की ओर ले जा रहा है? MI6 के पूर्व अधिकारी का दावा अगर सच है, तो सऊदी अरब में बहुत बड़ा बदलाव दरवाजे पर है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World Oct 22,2026 

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October 22, 2026

CEC ज्ञानेश कुमार पर महाभियोग का खतरा! स्पीकर ओम बिरला ने कहा - 'नया प्रस्ताव आया तो नियमों से होगी जांच', INDIA ब्लॉक की तैयारी तेज!

CEC ज्ञानेश कुमार पर महाभियोग का खतरा! स्पीकर ओम बिरला ने कहा - 'नया प्रस्ताव आया तो नियमों से होगी जांच', INDIA ब्लॉक की तैयारी तेज!
-Friday World Oct 22,2026 
नई दिल्ली: देश के लोकतांत्रिक ढांचे में एक बड़ा संवैधानिक टकराव देखने को मिल सकता है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने साफ कर दिया है कि अगर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष कोई नया महाभियोग प्रस्ताव लाता है, तो उसकी जांच पूरी तरह से नियमों और निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत की जाएगी।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब INDIA ब्लॉक ने CEC के खिलाफ महाभियोग लाने की संभावना जताई है।

विपक्ष क्यों मांग रहा है इस्तीफा? SIR बना वजह

पिछले दो हफ्तों से देश के अलग-अलग हिस्सों में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। विपक्ष का मुख्य आरोप है कि वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान भारी अनियमितताएं बरती गईं।

विपक्ष का दावा है कि SIR के नाम पर लाखों वोटरों के नाम काटे गए, कई जगहों पर फर्जी वोट जोड़े गए और चुनाव आयोग ने सत्तारूढ़ दल के इशारे पर काम किया। इसी को लेकर वे CEC के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

दो बार फेल हुआ हटाने का प्रयास, तीसरी तैयारी में विपक्ष

यह पहली बार नहीं है जब विपक्ष CEC को हटाने की कोशिश कर रहा है।

- पहली कोशिश - 12 मार्च: लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63 सांसदों के हस्ताक्षर के साथ महाभियोग का नोटिस दिया गया था, जिसे लोकसभा और राज्यसभा दोनों ने खारिज कर दिया था।
- दूसरी कोशिश: दूसरी बार दिया गया नोटिस अभी भी राज्यसभा में पेंडिंग है, यानी लंबित पड़ा है।

अब INDIA ब्लॉक तीसरी बार महाभियोग लाने की तैयारी में है। इसी सवाल पर स्पीकर ओम बिरला ने कहा, "अगर कोई नई नोटिस आएगी, तो हम नियमों और प्रक्रियाओं के तहत उसे देखेंगे और उसकी जांच करेंगे। प्रक्रिया एकदम स्पष्ट है।"

CEC को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया क्या है?

बहुत से लोगों को लगता है कि CEC को सरकार आसानी से हटा सकती है, लेकिन ऐसा नहीं है। संविधान के मुताबिक, CEC को हटाना उतना ही मुश्किल है जितना सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाना।

मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 के अनुसार:

1. CEC को सिर्फ संसद ही हटा सकती है।
2. इसके लिए संसद के दोनों सदनों में प्रस्ताव पास होना जरूरी है।
3. प्रस्ताव को सदन के कुल सदस्यों के बहुमत और उपस्थित होकर वोट करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से पास होना चाहिए।
4. आधार सिर्फ दो हो सकते हैं - 'साबित हुई कदाचार' (Proved Misbehaviour) या 'अक्षमता' (Incapacity)।

तीन सदस्यों की जांच समिति बनेगी

जज (जांच) अधिनियम, 1968 के मुताबिक, अगर संसद के किसी भी सदन में प्रस्ताव स्वीकार हो जाता है, तो लोकसभा स्पीकर या राज्यसभा के सभापति तीन सदस्यों की समिति बनाएंगे।

इस समिति में होंगे:
- भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) या सुप्रीम कोर्ट के कोई जज
- देश के 25 हाईकोर्ट में से किसी एक के मुख्य न्यायाधीश
- एक प्रख्यात कानूनविद्

यह समिति सभी आरोपों की जांच करेगी। अगर समिति कहती है कि कदाचार साबित नहीं हुआ, तो प्रस्ताव वहीं खत्म हो जाएगा। अगर कदाचार साबित होता है, तो संसद के दोनों सदन उसी सत्र में राष्ट्रपति को प्रस्ताव भेजेंगे और राष्ट्रपति के आदेश से CEC को हटाया जाएगा।

स्पीकर ने यह भी याद दिलाया कि संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया गया था, लेकिन अभी तक सत्रावसान (Prorogation) नहीं हुआ है। इसलिए पुराने नोटिस पर अभी भी चर्चा संभव है।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या विपक्ष जरूरी बहुमत जुटा पाता है या यह महाभियोग भी सिर्फ एक राजनीतिक दबाव बनकर रह जाएगा।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World Oct 22,2026 

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October 22, 2026

Rejected by Bangladesh, Accepted by Gujarat! 567 Tons of Toxic Powder from 'Korean Flag LNG' Ship Spreads in Alang, GPCB Negligence Puts Thousands at Risk!

Rejected by Bangladesh, Accepted by Gujarat! 567 Tons of Toxic Powder from 'Korean Flag LNG' Ship Spreads in Alang, GPCB Negligence Puts Thousands at Risk!
-Friday World Oct 22,2026 
Bhavnagar: A sensational case endangering environment and human health has come to light from Alang, the world's largest ship-breaking yard in Bhavnagar. The same 'Korean Flag LNG' vessel, which Bangladesh refused to allow into its shipyard calling it toxic, was brought to Alang in Bhavnagar and permitted to be dismantled.

The entire matter was exposed through an RTI filed by social worker Prafull Mehta from Bavla, in which serious negligence on the part of the Gujarat Pollution Control Board (GPCB) has been alleged.

Why did Bangladesh Reject It?

According to Prafull Mehta, the Bangladesh Shipping Authority had refused entry to this LNG ship in writing, suspecting the presence of toxic powder inside it. But the same ship was brought to Plot No. 88, M/s Atam Manohar Ship Breakers yard in Alang, India.

During the investigation, it was revealed that about 567 metric tons of highly toxic Perlite powder, along with glass wool and oily waste, had spread up to 3 kilometers along the seashore and into the water from this ship.

What is Perlite Powder? How Dangerous is It?

The social activist found in his research that Perlite is a white volcanic glass-like powder used for insulation in LNG ships.

- If it gets into the eyes, it causes severe burning, scratches, and redness.
- If inhaled into the lungs, it can cause fibrosis, asthma, and serious lung diseases.
- Workers who remain in contact for a long time are even at risk of cancer.

Hundreds of labourers working in Alang without any safety masks have been exposed to this poison.

GPCB Issued Notice, But Where Did The Waste Go? No Answer!

After the matter came to light, GPCB admitted that SOP was violated and issued a notice to the ship-breaker under Section 33(A) of the Water Pollution Prevention Act. But the biggest question remains unanswered - Where was the nearly 28 truckloads of toxic waste that was removed dumped?

In the RTI, GPCB gave vague answers. Only after an appeal was filed, in the last line, did they admit to 567 tons of Perlite, but no record of its disposal was shown.

Prafull Mehta says, "I had verbally told the GPCB officials to be careful when preparing the investigation report. But permission to break the ship was given without a complete investigation. This is a direct gamble with the environment and human life."

Now the question is arising whether Alang has become a dumping ground for the world's scrap ships, where ships rejected even by countries like Bangladesh are brought to India and environmental rules are flouted.

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World Oct 22,2026 

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October 22, 2026

बांग्लादेश ने ठुकराया, गुजरात ने अपना लिया! अलंग में 'कोरियन फ्लैग LNG' जहाज से 567 टन जहरीला पाउडर फैला, GPCB की लापरवाही से हजारों की सांसों पर खतरा!

बांग्लादेश ने ठुकराया, गुजरात ने अपना लिया! अलंग में 'कोरियन फ्लैग LNG' जहाज से 567 टन जहरीला पाउडर फैला, GPCB की लापरवाही से हजारों की सांसों पर खतरा!
- Friday World Oct 22,2026 
भावनगर: दुनिया के सबसे बड़े शिप ब्रेकिंग यार्ड अलंग से पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य को दांव पर लगाने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जिसे बांग्लादेश ने जहरीला कहकर अपने शिपयार्ड में घुसने तक नहीं दिया, उसी 'कोरियन फ्लैग LNG' जहाज को भावनगर के अलंग में लाकर तोड़ने की मंजूरी दे दी गई।

इस पूरे मामले का पर्दाफाश बावला के सामाजिक कार्यकर्ता प्रफुल्ल मेहता की RTI से हुआ है, जिसमें गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (GPCB) की गंभीर लापरवाही के आरोप लगे हैं।

बांग्लादेश ने क्यों भगाया था?

प्रफुल्ल मेहता के मुताबिक, इस LNG जहाज के अंदर जहरीले पाउडर होने की आशंका के चलते बांग्लादेश की शिपिंग अथॉरिटी ने लिखित में इस जहाज को अपनी सीमा में प्रवेश देने से मना कर दिया था। लेकिन उसी जहाज को भारत में अलंग के प्लॉट नंबर 88, मैसर्स आत्म मनोहर शिप ब्रेकर्स यार्ड में लाया गया।

जांच के दौरान खुलासा हुआ कि इस जहाज से लगभग 567 मेट्रिक टन अत्यंत जहरीला पर्लाइट (Perlite) पाउडर, ग्लास वूल और ऑयली वेस्ट करीब 3 किलोमीटर तक समुद्र किनारे और पानी में फैल गया।

क्या है पर्लाइट पाउडर? कितना खतरनाक है?

सामाजिक कार्यकर्ता ने रिसर्च कर बताया कि पर्लाइट एक सफेद ज्वालामुखी कांच जैसा पाउडर होता है, जो LNG जहाजों में इंसुलेशन के लिए इस्तेमाल होता है।

- अगर यह आंख में चला जाए तो तेज जलन, खरोंच और लाली आती है।
- सांस के जरिए फेफड़ों में जाने पर फाइब्रोसिस, अस्थमा और फेफड़ों की गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
- लंबे समय तक संपर्क में रहने वाले मजदूरों को कैंसर तक का खतरा बताया जाता है।

अलंग में बिना किसी सेफ्टी मास्क के काम करने वाले सैकड़ों मजदूर इस जहर की चपेट में आए हैं।

GPCB ने नोटिस दिया, पर कचरा कहां गया? पता नहीं!

मामला सामने आने के बाद GPCB ने माना कि SOP का उल्लंघन हुआ है और जल प्रदूषण निवारण अधिनियम की धारा 33(A) के तहत शिप ब्रेकर को नोटिस भी दिया। लेकिन सबसे बड़ा सवाल आज भी बिना जवाब के है - लगभग 28 ट्रक भरकर जो जहरीला कचरा हटाया गया, वो आखिर कहां डंप किया गया?

RTI में GPCB ने गोल-मोल जवाब दिए। अपील करने पर ही अंतिम लाइन में 567 टन पर्लाइट होने की बात स्वीकारी गई, लेकिन उसके निपटान का कोई रिकॉर्ड नहीं दिखाया गया।

प्रफुल्ल मेहता का कहना है, "मैंने GPCB अधिकारियों को मौखिक रूप से कहा था कि जब जांच रिपोर्ट बनाओ तो ध्यान रखना। लेकिन पूरी जांच के बिना ही जहाज को तोड़ने की मंजूरी दे दी गई। यह सीधे-सीधे पर्यावरण और मानव जीवन के साथ खिलवाड़ है।"

अब सवाल उठ रहा है कि क्या अलंग दुनिया के कबाड़ जहाजों का डंपिंग ग्राउंड बन गया है, जहां बांग्लादेश जैसे देश भी मना कर देते हैं, उसे भारत में लाकर पर्यावरण नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं?

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World Oct 22,2026 

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October 22, 2026

फ़्रांस में सड़कों पर उतरा सैलाब, मीडिया कह रहा है 'अप्रवासी दंगा', पर सच कुछ और है! फ्रांसीसी नागरिक बोले - हमें जंग नहीं, सादी जिंदगी चाहिए श्रीमान राष्ट्रपति!

फ़्रांस में सड़कों पर उतरा सैलाब, मीडिया कह रहा है 'अप्रवासी दंगा', पर सच कुछ और है! फ्रांसीसी नागरिक बोले - हमें जंग नहीं, सादी जिंदगी चाहिए श्रीमान राष्ट्रपति!
-Friday World Oct 22,2026 
पेरिस: फ़्रांस इस वक्त इतिहास के सबसे बड़े नागरिक आंदोलनों में से एक से गुजर रहा है। पिछले हफ्ते पेरिस से शुरू हुए प्रदर्शन अब लिमोज, मार्सिले, बोर्डो, ल्योन से लेकर 600 से ज्यादा शहरों तक फैल चुके हैं। सरकार कह रही है कि यह छात्रों का विरोध है, मुख्यधारा का मीडिया इसे 'अप्रवासी समस्या' और 'लूटपाट' के रूप में दिखाने में लगा है, लेकिन जमीन पर खड़े लाखों फ्रांसीसी नागरिकों की आवाज कुछ और ही है।

उनकी एक ही मांग है - "हमें सिर्फ एक सादी जिंदगी चाहिए, हमारी सरकार जंगों की फंडिंग बंद करे!"

मीडिया का नैरेटिव vs जमीन की हकीकत

पिछले कुछ दिनों में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से लेकर कई पश्चिमी चैनलों ने इन प्रदर्शनों को "इमिग्रेशन पॉलिसी की विफलता" बताया है। कहा जा रहा है कि विविधता और अप्रवासियों के कारण फ्रांस जल रहा है।

लेकिन फ्रांस के CGT यूनियन की प्रमुख सोफी बिनेट का बयान इस झूठ को उजागर करता है। उन्होंने कहा, "हमारी मांगों पर बिल्कुल भी विचार नहीं किया गया है।" प्रदर्शनकारी छात्र हों, शिक्षक हों या आम मजदूर, सभी की मांगें एक ही हैं:

1. महंगाई पर लगाम: मिडल ईस्ट में जारी जंग के कारण फ्रांस में फ्यूल की कीमतें 3% से ज्यादा बढ़ गई हैं, एनर्जी कॉस्ट ने घर का बजट तोड़ दिया है।
2. पब्लिक सर्विस में सुधार: स्कूलों की बिल्डिंग जर्जर हैं, क्लास में वेंटिलेशन तक नहीं, टीचरों की कमी है।
3. युद्ध में पैसा नहीं: फ्रांस की जनता नहीं चाहती कि उनके टैक्स का पैसा पर्शियन गल्फ या किसी और जंग में हथियारों पर खर्च हो। राष्ट्रपति मैक्रों खुद मानते हैं कि महंगाई का कारण "पर्शियन गल्फ में हो रहा युद्ध है जिसमें फ्रांस शामिल नहीं था", फिर भी सरकार का बजट 63.4 बिलियन यूरो डिफेंस के लिए रखा गया है।

प्रदर्शनकारी हाथों में तख्तियां लिए हैं जिन पर लिखा है - "PAIX", "NON À LA GUERRE", "peace no war simple life"- यानी शांति चाहिए, जंग नहीं, सादी जिंदगी चाहिए।

सरकार सुनने को तैयार नहीं

17 अक्टूबर को हुए राष्ट्रीय प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने यूनियन नेताओं से मुलाकात की, लेकिन कोई ठोस जवाब नहीं दिया। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने टीवी पर आकर "शांति और व्यवस्था" की अपील की, लूटपाट करने वालों को सजा देने की बात कही, लेकिन जनता की मुख्य मांग - जंग की फंडिंग बंद करो और जीवन यापन की लागत कम करो - पर एक शब्द नहीं बोला।

नतीजा यह है कि फ्रांस सरकार की उधारी लागत बढ़कर 5% पर पहुंच गई है, जो जुलाई 2002 के बाद सबसे ज्यादा है। 2500 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है, लेकिन आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा।

श्रीमान राष्ट्रपति, अपने लोगों को सुनिए

फ्रांस के लोग आज यह पूछ रहे हैं कि जब उनके स्कूलों में 3000 सब्स्टीट्यूट टीचरों की कमी है, जब अस्पतालों में स्टाफ नहीं है, तो सरकार अरबों यूरो बाहर की जंगों में क्यों झोंक रही है?

यह अप्रवासी समस्या नहीं है, यह फ्रांसीसी जनता के भविष्य की समस्या है। लिमोज का 142 साल पुराना टाउन हॉल जल रहा है, यह गुस्सा अप्रवासियों का नहीं, बल्कि वर्षों से अनदेखी झेल रहे आम फ्रांसीसी का है।

अगर सरकार ने अभी भी अपने नागरिकों को अनदेखा किया और मीडिया के बनाए "अप्रवासी दंगे" के नैरेटिव में छिपने की कोशिश की, तो यह आंदोलन 2018 के Yellow Vest आंदोलन से भी बड़ा बन जाएगा। फ्रांस की सड़कें कह रही हैं - क्रांति या मौत नहीं, सिर्फ सम्मान के साथ जीने का हक चाहिए।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World Oct 22,2026 

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October 22, 2026

कच्चे तेल में भूचाल! ब्रेंट क्रूड 112 डॉलर के पार, 4 साल का रिकॉर्ड टूटा - पेट्रोल-डीजल फिर होगा महंगा?

कच्चे तेल में भूचाल! ब्रेंट क्रूड 112 डॉलर के पार, 4 साल का रिकॉर्ड टूटा - पेट्रोल-डीजल फिर होगा महंगा?
-Friday World Oct 22,2026 
नई दिल्ली: ग्लोबल मार्केट से बुरी खबर आई है। इंटरनेशनल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत ने हाल के कुछ महीनों का नया रिकॉर्ड तोड़ दिया है। गुरुवार दोपहर तक ब्रेंट क्रूड 3.23% की तेज उछाल के साथ 112.27 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी 99 डॉलर के करीब पहुंच गया है। 

यह उछाल ऐसे समय में आया है जब मिडल ईस्ट में तनाव अपने चरम पर है।

कीमत क्यों बढ़ी? सऊदी पर हमला बना ट्रिगर

तेल की कीमतों में इस तेज उछाल की सबसे बड़ी वजह सऊदी अरब पर हुए लगातार हमले हैं। बुधवार रात सऊदी के पूर्वी शहर दम्माम के किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट और अरामको के शायबा ऑयल फील्ड पर हूथी विद्रोहियों ने ड्रोन हमले किए, जिसमें 3 लोगों की मौत हो गई।

इस हमले के बाद अमेरिका ने भी सऊदी अरब में अपने राजनयिकों और उनके परिवारों को तुरंत निकलने का आदेश दे दिया है, जिससे ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को लेकर डर और बढ़ गया है। 

बाजार को डर है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य और सऊदी के तेल ठिकाने निशाने पर आते रहे, तो दुनिया की आधी तेल सप्लाई रुक सकती है।

साल भर में 80% महंगा हुआ तेल

यह सिर्फ एक दिन की तेजी नहीं है। ब्रेंट क्रूड इस साल अब तक 80% से ज्यादा महंगा हो चुका है। 2022 के जुलाई के बाद यह सबसे ऊंचा स्तर है, जब कीमतें 112.19 डॉलर पर बंद हुई थीं। 

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी एनर्जी इनफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) की रिपोर्ट में भी कच्चे तेल का भंडार 30.6 लाख बैरल घटकर 412.5 मिलियन बैरल रह गया है, जिससे सप्लाई टाइट हो गई है।

भारत पर क्या असर पड़ेगा?

भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल बाहर से मंगाता है। ब्रेंट 112 डॉलर के पार जाने का मतलब है:

 1. पेट्रोल-डीजल महंगा: अगर यही कीमत रही, तो आने वाले 10-15 दिनों में तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा सकती हैं।
 2. महंगाई बढ़ेगी: डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट, सब्जी, सामान सब महंगा होगा।
 3. रुपया कमजोर: ज्यादा डॉलर में तेल खरीदने से रुपया डॉलर के मुकाबले और कमजोर हो सकता है।

टेक्निकल एनालिस्ट आमिर मकड़ा के मुताबिक, ब्रेंट अभी 107 से 113 डॉलर के बीच झूल रहा है, लेकिन 110 डॉलर के ऊपर टिका हुआ है। अगर यह 112.42 डॉलर के ऊपर बंद होता है, तो अगला टारगेट 115 डॉलर हो सकता है।

फिलहाल दुनियाभर के सेंट्रल बैंक इस पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि महंगा तेल पूरी दुनिया की इकोनॉमी के लिए खतरे की घंटी है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World Oct 22,2026 

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