August 23, 2026
रसोई से टंकी तक: जब चीनी एथेनॉल बन गई, तो महंगाई ने रसोई का स्वाद बिगाड़ दिया
रसोई से टंकी तक: जब चीनी एथेनॉल बन गई, तो महंगाई ने रसोई का स्वाद बिगाड़ दिया
-Friday World 23 Aug 2026
पिछले तीन महीनों में आपकी रसोई में क्या बदला है? अगर आप बाजार गए हैं तो जवाब आपके बिल में है। वही चीनी जो कुछ महीने पहले 45-50 रुपये किलो मिल रही थी, अब 70-75 रुपये किलो तक पहुंच गई है। यानी 3 महीने में करीब 40% या 19 रुपये प्रति किलो की सीधी बढ़ोतरी। गुड़ 24%, चावल 16% और मक्के का आटा 11% तक महंगा हो चुका है। सालों तक स्थिर रहने वाले ये दाम अचानक क्यों आग की तरह बढ़ रहे हैं?
जवाब है - एथेनॉल।
25 लाख टन चीनी, जो कड़ाही में नहीं, टंकी में चली गई
ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। पिछले साल देश में 720 करोड़ लीटर एथेनॉल का उत्पादन हुआ। इसके लिए 1.33 करोड़ टन अनाज और 25 लाख टन चीनी बनाने लायक गन्ना और शीरा इस्तेमाल हुआ।
सरकार के एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के तहत पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य है। इसके लिए मानक तय है - 67% मक्का, टूटा चावल और खराब अनाज, और 33% गन्ना और उसके उत्पाद।
नतीजा? जो गन्ना आपकी चाय मीठी करता था, वो अब गाड़ी चलाएगा। जो टूटा चावल और खराब अनाज पशु आहार और पोल्ट्री फीड बनता था, वो अब शराब भट्टियों में चला गया।
इसका सीधा असर दिख रहा है:
- पशु आहार 8-10% महंगा
- दूध और अंडे 5-10% महंगे
- पूरी रसोई का बजट गड़बड़ाया
स्टॉक खत्म, निर्यात जीरो, आयात शुरू
कहानी यहीं खत्म नहीं होती। 1 अक्टूबर से शुरू हो रहे 2026-27 शुगर सीजन का ओपनिंग स्टॉक घरेलू खपत के लिए जरूरी 50 लाख टन से भी कम रहने का अनुमान है। यानी देश के पास खाने के लिए ही चीनी कम पड़ने वाली है।
इसीलिए सरकार को गुरुवार को दो बड़े फैसले लेने पड़े:
1. 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन कच्ची चीनी (Raw Sugar) का शुल्क-मुक्त आयात टैरिफ रेट कोटा के तहत।
2. हर महीने 10 टन से ज्यादा चीनी इस्तेमाल करने वाले हलवाई, बिस्किट, कोल्ड ड्रिंक कंपनियों जैसे थोक उपभोक्ताओं पर स्टॉक लिमिट। अब वे 15 दिन की खपत से ज्यादा स्टॉक नहीं रख सकेंगे।
यह कितनी बड़ी पलट है, इसे निर्यात के आंकड़ों से समझिए। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार:
- 2022-23: 1.33 करोड़ टन चीनी-शीरा और उत्पादों का निर्यात
-
- 2023-24: 51.35 लाख टन
-
- 2024-25: 38.43 लाख टन
-
- 2026-27: निर्यात शून्य, उल्टा आयात की नौबत
चार साल में दुनिया के सबसे बड़े चीनी निर्यातकों में से एक भारत, अब आयातक बनने की कगार पर है।
आपकी थाली पर क्या असर?
ये सिर्फ चीनी की कहानी नहीं है, ये फूड चेन की कहानी है। जब 1.33 करोड़ टन अनाज एथेनॉल में जाएगा, तो:
1. गरीब की थाली: टूटा चावल जो राशन की दुकानों और मिड-डे मील में जाता था, महंगा हो रहा है।
2. किसान की जेब: पशुपालक को महंगा चारा खरीदना पड़ रहा है, तो दूध महंगा करना मजबूरी है।
3. आम आदमी का त्योहार: आने वाले नवरात्रि, दिवाली में मिठाई, गुड़, चीनी की मांग और बढ़ेगी। अगर स्टॉक नहीं संभला तो दाम और 10-15% बढ़ सकते हैं।
समाधान क्या है?
सरकार संतुलन साधने की कोशिश कर रही है। ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए एथेनॉल जरूरी है, इससे करोड़ों डॉलर का कच्चा तेल आयात बचता है और किसानों को गन्ने का बेहतर दाम मिलता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या इसकी कीमत रसोई से वसूली जानी चाहिए?
विशेषज्ञों का मानना है कि तीन कदम तुरंत जरूरी हैं:
- एथेनॉल के लिए गन्ने की जगह वैकल्पिक फीडस्टॉक जैसे बांस, पराली को बढ़ावा देना।
- मक्का और धान का उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को MSP से ज्यादा प्रोत्साहन देना।
- चीनी और अनाज के स्टॉक की रियल टाइम मॉनिटरिंग, ताकि एथेनॉल डायवर्जन का फैसला बाजार देखकर लिया जाए।
फिलहाल एक बात तय है - जब तक टंकी और थाली के बीच का संतुलन नहीं बनेगा, तब तक आपकी चाय की मिठास आपके बजट पर भारी पड़ती रहेगी।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 23 Aug 2026
#SugarPriceHike #EthanolVsFood #InflationInIndia #FoodSecurity #SugarImport #KitchenBudget #CommodityPrices #IndianEconomy #JaggeryPrice #MaizeFlour