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यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Wednesday, 4 February 2026

February 04, 2026

ट्रंप-शी जिनपिंग की फोन बातचीत: "बेहद अच्छा रिश्ता" – ट्रंप ने शी के साथ बात को बताया "एक्सीलेंट", सोयाबीन खरीद और अप्रैल यात्रा पर जोर दिया

ट्रंप-शी जिनपिंग की फोन बातचीत: "बेहद अच्छा रिश्ता" – ट्रंप ने शी के साथ बात को बताया "एक्सीलेंट", सोयाबीन खरीद और अप्रैल यात्रा पर जोर दिया -
5 फरवरी 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ एक लंबी टेलीफोन बातचीत की। बातचीत के तुरंत बाद ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक विस्तृत पोस्ट डाला, जिसमें उन्होंने पूरी चर्चा को "बहुत अच्छी" और "लंबी-गहन" बताया। पोस्ट में उन्होंने कई बड़े मुद्दों का जिक्र किया और अमेरिका-चीन रिश्तों को "बेहद मजबूत" करार दिया। 

ट्रंप ने लिखा कि यह बातचीत कई महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित रही। उन्होंने इसे "एक्सीलेंट" (बहुत शानदार) कहा और बताया कि दोनों नेताओं ने व्यापार, सैन्य सहयोग, ताइवान, रूस-यूक्रेन युद्ध, ईरान की स्थिति, अप्रैल में उनकी प्रस्तावित चीन यात्रा और कई अन्य मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। 

ट्रंप के ट्रुथ सोशल पोस्ट का मुख्य हिस्सा 

 "मैंने अभी चीन के राष्ट्रपति शी के साथ एक बेहतरीन टेलीफोन बातचीत पूरी की है। यह लंबी और गहन बातचीत थी, जिसमें कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। इनमें शामिल थे: 

- व्यापार - सैन्य मामले

 - अप्रैल में मेरी चीन यात्रा (जिसका मुझे बहुत इंतजार है!) 

- ताइवान - रूस-यूक्रेन युद्ध 

- ईरान की मौजूदा स्थिति

 - चीन द्वारा अमेरिका से तेल और गैस की खरीद

 - अतिरिक्त कृषि उत्पादों की खरीद, जिसमें इस सीजन में सोयाबीन की खरीद को 20 मिलियन टन तक बढ़ाना और अगले सीजन के लिए 25 मिलियन टन की प्रतिबद्धता शामिल है

 - विमान इंजनों की आपूर्ति - और कई अन्य विषय

 सारी चर्चाएं बहुत सकारात्मक रहीं। 

चीन के साथ हमारा रिश्ता और राष्ट्रपति शी के साथ मेरा व्यक्तिगत रिश्ता बेहद अच्छा है। हम दोनों समझते हैं कि इसे ऐसे ही बनाए रखना कितना जरूरी है। मुझे पूरा विश्वास है कि मेरे राष्ट्रपति कार्यकाल के अगले तीन सालों में राष्ट्रपति शी और पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चीन के साथ मिलकर कई सकारात्मक नतीजे सामने आएंगे।" 

किन मुद्दों पर सबसे ज्यादा जोर?

 ट्रंप ने खास तौर पर आर्थिक लाभों को हाइलाइट किया:

 - सोयाबीन खरीद में बड़ी बढ़ोतरी: चीन ने इस साल 20 मिलियन टन और अगले साल 25 मिलियन टन सोयाबीन खरीदने का वादा किया। यह अमेरिकी किसानों के लिए बहुत बड़ा राहत पैकेज है, क्योंकि सोयाबीन अमेरिका का प्रमुख निर्यात उत्पाद है।

 - तेल-गैस और अन्य ऊर्जा उत्पाद: चीन अमेरिका से अधिक तेल और गैस खरीदने पर विचार कर रहा है। 

- विमान इंजन और तकनीकी सहयोग: बोइंग जैसे कंपनियों के लिए अच्छी खबर। 

- अप्रैल 2026 में बीजिंग यात्रा: ट्रंप ने इस यात्रा के लिए बहुत उत्साह जताया, जो दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने का संकेत है। 

ट्रंप का संदेश साफ था – व्यक्तिगत रिश्ते और भविष्य की उम्मीद

 ट्रंप ने दो बार जोर देकर कहा कि उनका शी जिनपिंग के साथ "व्यक्तिगत रिश्ता बेहद अच्छा" है और दोनों नेता इसे बनाए रखने के महत्व को समझते हैं। यह पोस्ट ट्रंप की पुरानी डिप्लोमैटिक शैली को दिखाता है – जहां वे व्यक्तिगत बॉन्ड को आगे रखकर व्यापारिक और राजनीतिक लाभ हासिल करने की कोशिश करते हैं। 

इस पोस्ट का असर क्या रहा?

 - अमेरिकी सोयाबीन फ्यूचर्स में तेजी देखी गई, क्योंकि किसानों को बड़ा बाजार मिलने की उम्मीद जगी।

 - चीनी मीडिया ने कॉल की पुष्टि की, लेकिन ज्यादा विस्तार से कुछ नहीं बताया। शी ने "परस्पर सम्मान" और ताइवान जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सावधानी बरतने की बात कही।

 - विश्लेषकों का कहना है कि यह ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में चीन के साथ पहली बड़ी बातचीत है। पिछले कार्यकाल की तरह ट्रंप व्यापारिक डील और व्यक्तिगत संबंधों को हथियार बनाकर आगे बढ़ रहे हैं।

 यह पोस्ट न सिर्फ डिप्लोमैसी का हिस्सा है, बल्कि अमेरिकी घरेलू दर्शकों – खासकर किसानों और व्यापारियों – को यह दिखाने का तरीका भी है कि ट्रंप चीन से अच्छे सौदे करवा सकते हैं। 

क्या यह दोनों देशों के बीच नई शुरुआत का संकेत है या सिर्फ सतही सकारात्मकता? अप्रैल की यात्रा और आने वाले महीनों के समझौते इसका जवाब देंगे। फिलहाल ट्रंप का यह लंबा पोस्ट वैश्विक स्तर पर सुर्खियां बटोर रहा है।

 Sajjadali Nayani ✍
Friday world 5/2/2026
February 04, 2026

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: छूटे हुए लाभों की कीमत क्या है? ट्रंप के साथ सौदा: भारत ने क्या दिया और क्या पाया?

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: छूटे हुए लाभों की कीमत क्या है? ट्रंप के साथ सौदा: भारत ने क्या दिया और क्या पाया? -Friday world 4/2/2026

फरवरी 2026 में भारत और अमेरिका के बीच घोषित व्यापार समझौते ने सुर्खियां बटोरीं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक्स पर दावा किया कि भारत ने रूसी तेल खरीद बंद करने, अमेरिकी वस्तुओं पर शुल्क और गैर-शुल्क बाधाएं शून्य करने, और 500 अरब डॉलर से अधिक अमेरिकी सामान खरीदने का वादा किया है। बदले में, अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया—जिसमें रूसी तेल खरीद पर लगी 25% अतिरिक्त पेनल्टी टैरिफ भी हटा दी गई। 

यह समझौता भारत के लिए राहत की तरह लगता है, क्योंकि 2025 से लगे उच्च टैरिफ ने निर्यातकों को परेशान किया था। लेकिन कई सवाल उठते हैं: क्या यह सौदा वाकई संतुलित है? भारत ने क्या-क्या छोड़ा और बदले में ठोस क्या मिला? भारत ने क्या-क्या छोड़ा?

 1. रूसी तेल खरीद पर ब्रेक: ट्रंप ने कहा कि पीएम मोदी ने रूसी तेल आयात रोकने का वादा किया। भारत ने पहले रूस से सस्ता तेल (प्रति बैरल 16 डॉलर तक छूट) खरीदकर ऊर्जा लागत कम की थी। अब अमेरिका और संभवतः वेनेजुएला से तेल लेना होगा। रूस के साथ पुराने संबंधों पर असर पड़ सकता है—एक मित्र देश से दूरी बढ़ सकती है। 

2. ईरान से तेल और संबंधों में कटौती: भारत पहले से ही ईरान से तेल नहीं खरीद रहा था (2019 से अमेरिकी दबाव में)। अब चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट पर भी संकट है। 2026 के बजट में चाबहार के लिए कोई आवंटन नहीं। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण 6 महीने की छूट (अप्रैल 2026 तक) मिली थी, लेकिन भारत ने गतिविधियां कम कर दीं। यह पोर्ट अफगानिस्तान, मध्य एशिया तक पहुंच का वैकल्पिक रास्ता था—पाकिस्तान को बायपास करने वाला। अब यह रणनीतिक संपत्ति खतरे में है। 

3. स्वतंत्र विदेश नीति पर सवाल: अमेरिका जहां कहेगा, वहीं से तेल लेना—यह बहुपक्षीय नीति से एकतरफा निर्भरता की ओर इशारा करता है। रूस और ईरान जैसे देशों से दूरी बढ़ने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा और भू-राजनीतिक संतुलन प्रभावित हो सकता है।

 4. अमेरिकी वस्तुओं पर शुल्क शून्य: ट्रंप का दावा है कि भारत ने अमेरिकी सामानों पर टैरिफ और गैर-टैरिफ बैरियर शून्य कर दिए। हालांकि भारत ने स्पष्ट नहीं किया, लेकिन कुछ रिपोर्ट्स में औद्योगिक सामानों पर टैरिफ 13.5% से शून्य होने की बात है। संवेदनशील कृषि क्षेत्र को कुछ सुरक्षा मिली है, लेकिन अमेरिकी कृषि उत्पादों (जैसे बादाम, सेब, वाइन) के लिए बाजार खुल रहा है। 

5. किसानों को अमेरिकी बाजार में छोड़ना?: अमेरिकी कृषि मंत्री ने कहा कि भारत अमेरिकी फार्म उत्पादों के लिए बड़ा बाजार बनेगा। कुछ कृषि उत्पादों के लिए बाजार पहुंच दी गई है। भारतीय किसानों को सस्ते आयात से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है—खासकर दालें, नट्स, फल आदि में।

 6. 500 अरब डॉलर अमेरिकी सामान खरीदने का वादा: ऊर्जा, रक्षा, विमान, टेलीकॉम, फार्मा आदि में अमेरिकी खरीद बढ़ानी होगी। यह भारत के लिए महंगा सौदा हो सकता है, क्योंकि अमेरिकी सामान अक्सर महंगे होते हैं। 

बदले में भारत को क्या ठोस लाभ मिला?

- टैरिफ में बड़ी राहत: भारतीय निर्यात पर 50% से 18% टैरिफ—यह टेक्सटाइल, फार्मा, केमिकल, ज्वेलरी, समुद्री उत्पादों जैसे क्षेत्रों के लिए बड़ा बूस्ट है। FIEO जैसे संगठनों ने कहा कि इससे निर्यातकों को एशियाई प्रतिस्पर्धियों (वियतनाम, बांग्लादेश) के बराबर मौका मिलेगा। 

- निर्यात बढ़ोतरी की उम्मीद: उच्च टैरिफ हटने से अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान सस्ते होंगे। स्टॉक मार्केट और रुपये में तेजी आई। 

- रणनीतिक साझेदारी मजबूत: अमेरिका के साथ बेहतर संबंध—रक्षा, तकनीक, ऊर्जा में सहयोग बढ़ सकता है। 

लेकिन सवाल यह है: क्या ये लाभ स्थायी और संतुलित हैं? टैरिफ कटौती एकतरफा लगती है—अमेरिका ने पेनल्टी हटाई, लेकिन भारत ने कई रणनीतिक क्षेत्र छोड़े। रूसी तेल छूटने से ऊर्जा लागत बढ़ सकती है। चाबहार छूटने से क्षेत्रीय पहुंच कमजोर होगी। किसानों पर आयात का दबाव बढ़ेगा। 

 सौदा या समझौता? यह समझौता भारत की 'मित्र देशों के साथ संतुलन' नीति की परीक्षा है। ट्रंप के दावों में अतिशयोक्ति हो सकती है—भारत ने कई बिंदुओं की पुष्टि नहीं की। लेकिन सच्चाई यह है कि उच्च टैरिफ के दबाव में भारत को कुछ रियायतें देनी पड़ीं। ठोस लाभ निर्यात बढ़ोतरी में दिखेगा, लेकिन लंबे समय में स्वतंत्र विदेश नीति, ऊर्जा सुरक्षा और किसानों की रक्षा पर असर पड़ सकता है। 

क्या यह 'विकसित भारत' की राह पर मजबूत कदम है या रणनीतिक समझौता? समय बताएगा, लेकिन फिलहाल बहस जारी है—भारत ने क्या खोया और क्या पाया? 
Sajjadali Nayani ✍ 
Friday world 4/2/2026
February 04, 2026

युमनाम खेमचंद सिंह: मणिपुर के नए मुख्यमंत्री, जो शांति और समावेशिता की उम्मीद जगाते हैं मणिपुर में एक नया अध्याय:

युमनाम खेमचंद सिंह: मणिपुर के नए मुख्यमंत्री, जो शांति और समावेशिता की उम्मीद जगाते हैं मणिपुर में एक नया अध्याय:
-Friday world 4/2/2026
राष्ट्रपति शासन के बाद बनाए गए नए मुख्यमंत्री की शपथ।
 4 फरवरी 2026 को मणिपुर के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया। बीजेपी के वरिष्ठ नेता युमनाम खेमचंद सिंह ने इंफाल के लोक भवन में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। यह शपथ ग्रहण कुछ घंटे पहले गृह मंत्रालय द्वारा जारी नोटिफिकेशन के बाद हुआ, जिसमें मणिपुर से राष्ट्रपति शासन तत्काल हटाने की घोषणा की गई थी। राज्य फरवरी 2025 से राष्ट्रपति शासन के अधीन था, जब जातीय हिंसा ने स्थिति को बेकाबू कर दिया था। 

खेमचंद सिंह की शपथ के साथ ही मणिपुर में बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार बहाल हो गई। उनके साथ दो उपमुख्यमंत्री भी शपथबद्ध हुए—बीजेपी की नेमचा किपगेन (कुकी-ज़ो समुदाय से पहली महिला उपमुख्यमंत्री, दिल्ली से वर्चुअल शपथ) और नागा पीपुल्स फ्रंट के लोसी दिखो। इसके अलावा, कोंथौजम गोविंदास सिंह (गृह मंत्री) और खुरैजम लोकेन सिंह ने भी मंत्री पद की शपथ ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर बधाई देते हुए कहा कि नई टीम मणिपुर के विकास और समृद्धि के लिए समर्पित रहेगी। 

युमनाम खेमचंद सिंह कौन हैं?

 61-62 वर्षीय युमनाम खेमचंद सिंह मणिपुर के मैतेई समुदाय से हैं और सिंहजामेई विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक चुने जा चुके हैं। वे पूर्व विधानसभा स्पीकर रह चुके हैं, साथ ही कैबिनेट मंत्री का अनुभव भी रखते हैं। एक मार्शल आर्ट्स विशेषज्ञ के रूप में जाने जाते हैं, जो उन्हें युवाओं और समुदायों के बीच लोकप्रिय बनाता है। 

बीजेपी में वे एक गैर-ध्रुवीकरणकारी (non-polarising) नेता माने जाते हैं। पार्टी के अंदरूनी गुटों में स्वीकार्यता रखते हैं और जातीय संतुलन बनाने में कुशल समझे जाते हैं। मंगलवार को नई दिल्ली में बीजेपी विधायक दल की बैठक में उन्हें निर्विरोध विधायक दल नेता चुना गया। बैठक में कुकी-ज़ो और नागा विधायकों की मौजूदगी भी थी, जो समावेशी दृष्टिकोण का संकेत देती है। 

केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें इसलिए चुना क्योंकि वे कुकी-ज़ो और नागा समुदायों के साथ मैतेई समीकरण में बेहतर फिट बैठते हैं। आरएसएस से भी निकट माने जाने वाले खेमचंद सिंह को 'लिबरल' मैतेई नेता कहा जाता है, हालांकि हिंसा के दौरान उनकी भूमिका पर कुकी-ज़ो समुदाय से सवाल उठते रहे हैं। कुकी इनपी के प्रवक्ता लुन किपगेन ने कहा कि भले ही खेमचंद लिबरल हैं, लेकिन जब पूर्व सीएम एन. बीरेन सिंह सत्ता का दुरुपयोग कर रहे थे, तब ऐसे नेता कहां थे? उनके अनुसार, कुकी-ज़ो समुदाय को लगता है कि कोई भी मैतेई नेता सीएम बने, फर्क नहीं पड़ता क्योंकि वे एक ही समुदाय से हैं। 

शपथ ग्रहण के पीछे की राजनीति और चुनौतियां मणिपुर में बीते करीब एक साल से जातीय हिंसा (मैतेई बनाम कुकी-ज़ो) ने सैकड़ों जानें लीं, हजारों विस्थापित हुए और सामाजिक भरोसा टूट गया। राष्ट्रपति शासन के दौरान केंद्र ने स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन स्थानीय सरकार की कमी से विकास रुका रहा। 

नई सरकार का गठन समावेशिता का प्रयास दिखाता है—कुकी-ज़ो से पहली महिला उपमुख्यमंत्री और नागा से एक उपमुख्यमंत्री। कुछ सूत्रों के अनुसार, कुकी और नागा प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए दो डिप्टी सीएम बनाने पर विचार हुआ था। यह बीजेपी की छवि बचाने और राज्य में स्थिरता लाने की कोशिश है। 

लेकिन चुनौतियां बड़ी हैं। कुकी-ज़ो समुदाय का कहना है कि भरोसा बहाली के बिना सरकार बहाल करना जल्दबाजी है। वे अलगाव महसूस करते हैं और महत्वपूर्ण पोर्टफोलियो की मांग कर रहे हैं। खेमचंद सिंह को अब शांति बहाली, विस्थापितों की वापसी, विकास कार्य और जातीय सद्भावना बनाने की जिम्मेदारी मिली है। 

आगे की राह: उम्मीदों का बोझ शपथ के बाद खेमचंद सिंह ने पहली कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता की और एकता व शांति की अपील की। प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में वे 'विकसित मणिपुर' की दिशा में काम करने का वादा कर चुके हैं।

 यह सरकार मणिपुर के लिए एक नई शुरुआत है—जहां हिंसा की छाया से निकलकर विकास, भरोसा और समृद्धि की उम्मीद जगी है। लेकिन सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या यह नेतृत्व जातीय घावों को भर पाएगा और सभी समुदायों को साथ लेकर चल पाएगा। 

Sajjadali Nayani ✍
 Friday world 4/2/2026
February 04, 2026

બોટાદમાં માસૂમની ચીસો: કરિયાણાની દુકાને ગઈ 12 વર્ષની બાળકી પર નરાધમનો અત્યાચાર, પોલીસે માત્ર કલાકોમાં જ દબોચ્યો

બોટાદમાં માસૂમની ચીસો: કરિયાણાની દુકાને ગઈ 12 વર્ષની બાળકી પર નરાધમનો અત્યાચાર, પોલીસે માત્ર કલાકોમાં જ દબોચ્યો
-Friday world 4/2/2026
આરોપી ગુજરાતના બોટાદ જિલ્લાના શાંત ગામડામાં એક એવી ઘટના બની છે જેણે આખા સમાજના હ્રદયને દ્રવી નાખ્યું છે. માત્ર 12 વર્ષની નિર્દોષ બાળકી, જે નિર્દોષતાનું પ્રતીક હતી, તેની સાથે એવો અમાનવીય અત્યાચાર થયો કે માનવતા શરમાઈ ગઈ. આ ઘટના બોટાદ જિલ્લાના પાળીયાદ વિસ્તારમાં બની, જ્યાં એક કરિયાણાની દુકાન ચલાવતા વ્યક્તિએ પોતાની હવસના શિકાર તરીકે આ માસૂમને બનાવી દીધી. 

ઘટનાનું ક્રમબદ્ધ વર્ણન સામાન્ય દિવસની જેમ, આ 12 વર્ષીય બાળકી પોતાના ઘરની નજીકની કરિયાણાની દુકાને કેટલીક નાની-મોટી વસ્તુઓ લેવા માટે ગઈ હતી. તેના માટે આ માત્ર એક સામાન્ય કામ હતું – દુકાનદારને ઓળખતી હોવાથી તેને કોઈ શંકા નહોતી. પરંતુ આરોપી જેરામ ઈશ્વર ભાલાળા, જે દુકાન ચલાવતો હતો, તેના મનમાં અન્ય જ વિચારો ચાલી રહ્યા હતા. 

બાળકી દુકાને પહોંચતાં જ આરોપીએ તેને પકડી લીધી અને બળજબરીપૂર્વક દુકાનની બાજુમાં આવેલા પોતાના ઘરમાં લઈ ગયો. ત્યાં તેણે માસૂમ સાથે અત્યંત નિંદનીય દુષ્કર્મ આચર્યું. બાળકીની ચીસો, તેનો પ્રતિકાર – બધું જ વ્યર્થ ગયું. આ ઘટના બાદ બાળકી કોઈ રીતે ઘરે પહોંચી અને પરિવારને આખી વાત જણાવી. પરિવારના સભ્યોના રોષ અને દુઃખની કલ્પના કરવી પણ મુશ્કેલ છે. 

પોલીસની ત્વરિત અને પ્રશંસનીય કાર્યવાહી ફરિયાદ મળતાં જ પાળીયાદ પોલીસ સ્ટેશન હરકતમાં આવ્યું. આ કેસની ગંભીરતાને ધ્યાનમાં રાખીને બોટાદના DYSP મનીષા દેસાઈએ તાત્કાલિક અલગ-અલગ ટીમોની રચના કરી અને સઘન સર્ચ ઓપરેશન શરૂ કર્યું. પોલીસની સમયસર અને સક્ષમ કાર્યવાહીને કારણે ગણતરીના કલાકોમાં જ આરોપી જેરામ ઈશ્વર ભાલાળાને ધરપકડ કરી લેવામાં આવી. 

પોલીસે આરોપી વિરુદ્ધ POCSO એક્ટ તેમજ ભારતીય ન્યાય સંહિતાની સંબંધિત કલમો હેઠળ કાર્યવાહી હાથ ધરી છે. તપાસ હજુ ચાલુ છે અને વધુ પુરાવા એકત્ર કરવામાં આવી રહ્યા છે. આ ઝડપી કાર્યવાહીએ સમાજમાં એક સંદેશ આપ્યો છે કે બાળકો સામેના અપરાધો પ્રત્યે પોલીસ વિભાગ શૂન્ય સહનશીલતાની નીતિ અપનાવે છે. 

સમાજ માટે ચેતવણી અને વિચારણા આ ઘટના ફરી એક વખત યાદ અપાવે છે કે આપણા સમાજમાં બાળકોની સુરક્ષા કેટલી મહત્વની છે. નજીકના લોકો, પરિચિતો કે પડોશીઓ પણ ક્યારેક ખતરો બની શકે છે. માતા-પિતાએ બાળકોને અજાણ્યા કે અર્ધ-જાણીતા લોકો સાથે વાતચીત કરવા કે એકલા જવા બાબતે સતર્ક રહેવું જોઈએ. બાળકોને 'ગુડ ટચ-બેડ ટચ' વિશે શિક્ષણ આપવું અને કોઈ પણ અસામાન્ય વર્તન જણાય તો તરત જ રિપોર્ટ કરવાનું શીખવવું આજના સમયની મુખ્ય જરૂરિયાત છે. 

આવા અપરાધોને રોકવા માટે સમાજ, પોલીસ અને કાયદા વ્યવસ્થાના સંયુક્ત પ્રયાસો જરૂરી છે. આરોપીને કડક સજા મળે અને ભવિષ્યમાં આવી ઘટનાઓ ન બને તે માટે સખ્ત કાર્યવાહી થાય એ જ આ માસૂમના દુઃખને થોડુંક ન્યાય આપી શકે. 

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday world 4/2/2026
February 04, 2026

दक्षिण कोरिया के 'ब्लैक ईगल्स' फाइटर जेट्स ने जामनगर में लिया ठहराव: भारतीय वायुसेना ने दिया पूरा सहयोग, मजबूत होते भारत-कोरिया रक्षा संबंधों का संकेत!

दक्षिण कोरिया के 'ब्लैक ईगल्स' फाइटर जेट्स ने जामनगर में लिया ठहराव: भारतीय वायुसेना ने दिया पूरा सहयोग, मजबूत होते भारत-कोरिया रक्षा संबंधों का संकेत! -Friday world 4/2/2026
आकाश में काले बाज़ की उड़ान: दक्षिण कोरियाई 'ब्लैक ईगल्स' ने जामनगर एयरबेस पर भरा ईंधन, भारतीय वायुसेना ने दिखाया दोस्ताना रुख – सऊदी वर्ल्ड डिफेंस शो 2026 की तैयारी!

दुनिया भर में अपनी एरोबेटिक उड़ानों के लिए मशहूर दक्षिण कोरिया की वायुसेना की प्रतिष्ठित टीम **'ब्लैक ईगल्स' (Black Eagles)** ने हाल ही में भारत के जामनगर एयर फोर्स स्टेशन पर एक महत्वपूर्ण ठहराव लिया। यह घटना न केवल तकनीकी सहयोग का प्रतीक है, बल्कि भारत और दक्षिण कोरिया के बीच बढ़ते रक्षा और सैन्य संबंधों को भी रेखांकित करती है। 

क्या हुआ था?

31 जनवरी से 1 फरवरी 2026 तक, दक्षिण कोरियाई वायुसेना (Republic of Korea Air Force - ROKAF) के ब्लैक ईगल्स एरोबेटिक टीम के नौ T-50B गोल्डन ईगल फाइटर जेट्स और एक **C-130** ट्रांसपोर्ट विमान ने जामनगर एयरबेस पर ट्रांजिट हॉल्ट (वचगाळा का विराम) लिया। ये विमान सऊदी अरब के रियाद में होने वाले वर्ल्ड डिफेंस शो 2026 (World Defense Show 2026) में भाग लेने के लिए जा रहे थे, जहां वे 8 से 12 फरवरी तक शानदार एरियल डिस्प्ले प्रस्तुत करेंगे। 

यह लंबी यात्रा (करीब 11,300 किलोमीटर) कई पड़ावों से होकर गुजरी – जापान के नाहा एयर बेस से शुरू होकर फिलीपींस, वियतनाम, थाईलैंड, भारत (कोलकाता, नागपुर, जामनगर), और ओमान तक। जामनगर में भारतीय वायुसेना (IAF) ने पूरी टीम को उतारने, ईंधन भरने, तकनीकी सहायता, कस्टम्स और इमिग्रेशन** में पूर्ण सहयोग दिया। दक्षिण पश्चिमी वायु कमान (SWAC) ने आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि की और टीम को सुरक्षित उड़ान की शुभकामनाएं दीं। 

ब्लैक ईगल्स कौन हैं?

ब्लैक ईगल्स दक्षिण कोरिया की आधिकारिक एरोबेटिक टीम है, जो ROKAF के 53rd स्पेशल एयर स्क्वाड्रन से जुड़ी हुई है। ये **T-50B** सुपरसोनिक ट्रेनर जेट्स पर उड़ान भरते हैं, जो दक्षिण कोरिया में ही विकसित हुए हैं। टीम अपनी सटीकता, टीमवर्क और उच्च-स्तरीय मैन्यूवर्स (जैसे मुगुंघवा फॉर्मेशन) के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यह उनकी मिडिल ईस्ट में पहली भागीदारी है, जहां वे 24 से अधिक शानदार एरियल मूवमेंट्स दिखाएंगे। 

भारत का योगदान क्यों महत्वपूर्ण? T-50 जैसे हल्के फाइटर जेट्स लंबी दूरी की लगातार उड़ान नहीं भर सकते, इसलिए रास्ते में कई जगह ईंधन भरना जरूरी होता है। जामनगर में भारतीय वायुसेना ने न केवल ईंधन और तकनीकी मदद दी, बल्कि आराम और लॉजिस्टिक्स भी सुनिश्चित किए। इससे पहले नागपुर एयरपोर्ट पर भी टीम ने ठहराव लिया था।

 यह घटना भारत-दक्षिण कोरिया के बढ़ते रक्षा सहयोग का मजबूत संकेत है। दोनों देश पहले से ही संयुक्त सैन्य अभ्यास और तकनीकी आदान-प्रदान कर रहे हैं। साथ ही, जापान के साथ भी सुधार हुए – जहां पहली बार ब्लैक ईगल्स को जापान में रिफ्यूलिंग सपोर्ट मिला (पिछले साल दुबई एयर शो में जापान की मना करने से टीम नहीं जा पाई थी)। 

वर्ल्ड डिफेंस शो 2026 क्या है? सऊदी अरब का यह प्रमुख अंतरराष्ट्रीय डिफेंस एक्जिबिशन 8 से 12 फरवरी 2026 तक रियाद कन्वेंशन सेंटर में होगा। यहां दुनिया भर के डिफेंस कंपनियां, हथियार सिस्टम, एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी और एयर शो प्रदर्शित होंगे। ब्लैक ईगल्स का प्रदर्शन सऊदी अरब और दक्षिण कोरिया के बीच भी नए रक्षा सौदों का रास्ता खोल सकता है। 

 यह छोटा-सा ठहराव सिर्फ ईंधन भरने का मामला नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय दोस्ती, विश्वास और रक्षा सहयोग की मिसाल है। जब 'काले बाज़' भारतीय आसमान में उतरे, तो उन्होंने न सिर्फ अपनी उड़ान दिखाई, बल्कि भारत की उदारता और मजबूत सैन्य साझेदारी को भी उजागर किया। आकाश में ये बाज़ अब सऊदी रेगिस्तान में अपनी चमक बिखेरेंगे – और भारत गर्व से कह सकता है कि हमने उनकी इस यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई! 

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday world 4/2/2026
February 04, 2026

सुपरपावर की बेबसी: अमेरिका-इजराइल की 'गिड़गिड़ाहट' और ईरान का बेबाक जवाब!

सुपरपावर की बेबसी: अमेरिका-इजराइल की 'गिड़गिड़ाहट' और ईरान का बेबाक जवाब!
-फ्राइडे वर्ल्ड | 4 फरवरी 2026
दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य ताकत कहलाने वाला अमेरिका-इजराइल आज मध्य पूर्व मे अपनी नाक बचाने के लिए तरस रहा है।

 पिछले कुछ हफ्तों में वाशिंगटन और तेल अवीव ने तेहरान के पास तीन-तीन तरह के समझौते और प्रस्ताव भेजे, लेकिन ईरान ने हर बार उनके घमंड को धूल चटा दी। ट्रंप प्रशासन की धमकियां, इजराइल की चिंताएं और क्षेत्रीय मध्यस्थों की कोशिशें – सब कुछ बेकार साबित हो रहा है। ईरान ने साफ कह दिया है: "हमला हुआ तो भरपूर और आखिरी जवाब मिलेगा – कोई 'लिमिटेड' खेल नहीं चलेगा!"

 पहले प्रस्ताव: पुरानी शर्तों का झुनझुना
ट्रंप प्रशासन ने सबसे पहले वही पुरानी शर्तें दोहराईं – ईरान अपना यूरेनियम स्टॉक बाहर ट्रांसफर करे, यूरेनियम संवर्धन शून्य करे, बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम सीमित करे और अपने प्रॉक्सी ग्रुप्स (हिज्बुल्लाह, हूती, हमास आदि) का साथ छोड़े। यह सब जून 2025 के 12-दिन के युद्ध के बाद की 'बेहतर डील' का हिस्सा था। लेकिन ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने इस्तांबुल में साफ कहा: "हमारी मिसाइल और डिफेंस क्षमता कभी बातचीत का विषय नहीं बन सकती।" सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के सलाहकार अली शमखानी ने और सख्त लहजे में कहा कि कोई भी यूरेनियम ट्रांसफर नहीं होगा। प्रस्ताव को कूड़ेदान में फेंक दिया गया!

 दूसरा प्रस्ताव: इजराइल की 'रूस के जरिए' अपील
फिर इजराइल ने रूस के पैर पकड़े।
 रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेल अवीव ने मॉस्को के जरिए तेहरान को मैसेज भेजा: "हम हमला नहीं करेंगे, तुम भी मत करना।" यह डी-एस्केलेशन का प्रयास था, क्योंकि इजराइल को डर था कि अमेरिका कोई डील कर लेगा जिसमें ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलें शामिल नहीं होंगी। लेकिन ईरान का जवाब करारा था: "हमला हुआ तो इजराइल नक्शे से साफ हो जाएगा!" IRGC के अधिकारी ने चेतावनी दी कि कोई भी सीमित हमला 'भ्रम' है – यह युद्ध की शुरुआत मानी जाएगी और तेल अवीव सहित अमेरिका के सभी सहयोगी निशाने पर होंगे।

सबसे मजेदार: 'नूरा कुश्ती' की भीख!

अब असली तमाशा – अमेरिका ने 'मैच फिक्सिंग' वाली अपील की! अनाम सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट्स में कहा गया कि वाशिंगटन ने तेहरान को मैसेज भेजा: "हमें अपनी नाक बचाने के लिए एक 'लिमिटेड हमला' करने दो – सिर्फ न्यूक्लियर साइट्स पर। बदले में तुम हमारे बेस पर थोड़ा-बहुत धमाका कर लेना।" यह एक तरह का 'स्टेज्ड' हमला था, ताकि ट्रंप घरेलू दर्शकों को दिखा सकें कि उन्होंने ईरान को 'सबक सिखाया', और ईरान भी अपनी इज्जत बचा ले। लेकिन ईरान ने इसे बच्चों का खेल बताते हुए ठुकरा दिया। शमखानी ने X पर पोस्ट किया: "लिमिटेड स्ट्राइक एक भ्रम है। कोई भी हमला युद्ध की शुरुआत होगा – और जवाब तत्काल, पूर्ण और अभूतपूर्व होगा।" तेहरान ने साफ कर दिया कि इस बार कोई 'कंट्रोल्ड' खेल नहीं चलेगा – अगर हमला हुआ तो अमेरिकी बेस मलबे में बदल जाएंगे।

 असली वजह: ईरान का 'खौफ' जो वाशिंगटन के सीने में गड़ा है
यह सब 'शांति की अपील' से नहीं रुका, बल्कि उस खौफ से रुका है जो ईरान ने अमेरिका के दिल में उतार दिया है। ईरान के पास हजारों बैलिस्टिक मिसाइलें, ड्रोन और असिमेट्रिक युद्ध की क्षमता है। अमेरिका के मध्य पूर्व में 8-10 बड़े बेस हैं – अल उदैद (कतर), बहरीन का फिफ्थ फ्लीट HQ, जॉर्डन, कुवैत, सऊदी अरब आदि। ईरान ने 2025 में ही अल उदैद पर मिसाइल दागी थी। IRGC कहता है: "ये बेस हमारी कमजोरी नहीं, अमेरिका की सबसे बड़ी कमजोरी हैं।"

सबसे बड़ा हथियार है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज – जहां से दुनिया का 20% तेल गुजरता है। ईरान ने बार-बार चेतावनी दी है कि हमला हुआ तो स्ट्रेट बंद हो जाएगा – माइंस, स्पीडबोट्स, सबमरीन्स और क्रूज मिसाइलों से। भले पूर्ण ब्लॉकेज न हो, लेकिन कुछ हमलों से ही शिपिंग रुक जाएगी, इंश्योरेंस रेट्स आसमान छू लेंगे और तेल $10-20 प्रति बैरल उछल सकता है। चीन, भारत, जापान, यूरोप – सब तबाह हो जाएंगे। हूतियों ने लाल सागर में पहले ही शिपिंग को प्रभावित किया है; होर्मुज बंद हुआ तो वैश्विक अर्थव्यवस्था हाहाकार मचा देगी।


ईरान जानता है कि उसका तेल-आधारित अर्थव्यवस्था भी प्रभावित होगी, लेकिन यह 'एस इन द होल' (आखिरी हथियार) है जो डिटरेंस बनाए रखता है। अगर अमेरिका को जरा भी यकीन होता कि तख्तापलट हो जाएगा, तो वह न सऊदी की सुनता, न तुर्की की। लेकिन ईरान ने साफ कर दिया: हमला हुआ तो पूरे मिडिल ईस्ट के अमेरिकी ठिकाने मलबे में बदल जाएंगे, और दुनिया तेल के लिए तरस जाएगी।

 असली पावर गेम
यह 'सुपरपावर' की बेबसी का तमाशा है। अमेरिका और इजराइल गिड़गिड़ा रहे हैं, जबकि ईरान बेबाकी से कह रहा है – "हम तैयार हैं!" जंग किसी की अपील से नहीं रुकती, बल्कि उस खौफ से रुकती है जो दुश्मन के सीने में गड़ा हो। ईरान ने यह खौफ गाड़ दिया है। अब सवाल यह है: क्या ट्रंप 'डील' कर लेगा, या कोई गलती से 'डर की दीवार' टूट जाएगी और क्षेत्रीय युद्ध छिड़ जाएगा?

सज्जाद अली नयानी ✍  
फ्राइडे वर्ल्ड | 4 फरवरी 2026


Tuesday, 3 February 2026

February 03, 2026

भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर किसानों का गुस्सा: 'मोदी सरकार ने ट्रंप के आगे घुटने टेके, खेती बर्बाद हो जाएगी!'

भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर किसानों का गुस्सा: 'मोदी सरकार ने ट्रंप के आगे घुटने टेके, खेती बर्बाद हो जाएगी!' -Friday world 4/2/2026

"ट्रंप की जीत या किसानों की हार? भारत-अमेरिका ट्रेड डील में 'घुटने टेकने' का आरोप, SKM ने कहा – अमेरिकी साम्राज्यवाद के आगे झुक गई सरकार!" 

फरवरी 2026 की शुरुआत में भारत और अमेरिका के बीच घोषित ट्रेड डील ने पूरे देश में राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ऐलान किया कि भारत के साथ 'ट्रेड डील' हो गई है, जिसमें अमेरिका भारतीय सामानों पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर देगा। बदले में भारत ने रूसी तेल की खरीद बंद करने और अमेरिका से ऊर्जा, तकनीक, कृषि उत्पादों आदि में 500 अरब डॉलर की खरीदारी बढ़ाने का वादा किया है (ट्रंप के दावे के अनुसार)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसे 'मेड इन इंडिया' उत्पादों के लिए बड़ी राहत बताया और ट्रंप का आभार जताया। 

लेकिन इस डील की घोषणा के साथ ही किसान संगठनों और विपक्ष ने तीखा विरोध शुरू कर दिया। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने इसे 'किसानों के साथ विश्वासघात' करार दिया और कहा कि सरकार अमेरिकी साम्राज्यवाद के आगे घुटने टेक चुकी है। SKM के नेताओं का आरोप है कि अमेरिका की अत्यधिक सब्सिडी वाले कृषि उत्पाद (जैसे सोयाबीन, मक्का, गेहूं) भारतीय बाजार में सस्ते दाम पर घुस आएंगे, जिससे स्थानीय किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) भी नहीं मिलेगा और खेती का पूरा ढांचा चरमरा जाएगा। 

किसानों की मुख्य शिकायतें क्या हैं? - शून्य टैरिफ का खतरा: ट्रंप के दावों के मुताबिक भारत ने अमेरिकी सामानों पर टैरिफ शून्य करने की दिशा में कदम उठाए हैं। SKM का कहना है कि इससे अमेरिका के 18.8 लाख किसानों के उत्पाद 14.65 करोड़ भारतीय किसानों के बाजार पर छा जाएंगे। डेयरी और पशुपालन क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित होगा, जहां अमेरिकी दूध उत्पाद सस्ते आने से अमूल जैसी सहकारी संस्थाएं मुश्किल में पड़ सकती हैं। 

- रूसी तेल छोड़ अमेरिकी तेल: डील में भारत रूसी तेल की खरीद बंद कर अमेरिका (और संभवतः वेनेजुएला) से तेल खरीदेगा। किसान संगठनों का कहना है कि यह ऊर्जा सुरक्षा पर असर डालेगा और अप्रत्यक्ष रूप से कृषि लागत बढ़ाएगा। 

- 2020-21 आंदोलन की याद: SKM ने याद दिलाया कि तीन कृषि कानूनों के खिलाफ लाखों किसानों ने साल भर आंदोलन किया था। अब फिर वही डर है कि विदेशी उत्पादों से बाजार भर जाएगा और किसान बर्बाद हो जाएंगे। राकेश टिकैत जैसे नेताओं ने कहा, "कॉरपोरेट का कब्जा हो जाएगा, किसान सड़कों पर उतरेंगे।" 

- **विपक्ष का हमला:** कांग्रेस, AAP और अन्य विपक्षी दलों ने संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। राहुल गांधी और अन्य नेताओं ने कहा कि सरकार 'स्पिन' फैला रही है और डील के पूरे विवरण छिपा रही है। संजय सिंह ने इसे 'किसानों के साथ धोखा' बताया। 

सरकार का बचाव और फायदे सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित हैं। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया, "किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं हुआ। अनाज, मक्का, सोयाबीन और GM फूड को बाहर रखा गया है।" निश्चित रूप से कुछ आयात छूटें तभी लागू होंगी जब स्थानीय उद्योगों को नुकसान न हो। डील के फायदे: 

- भारतीय टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी, लेदर और मरीन प्रोडक्ट्स पर अमेरिकी टैरिफ 18% रह जाएगा, जो निर्यात बढ़ाएगा। 

- टेक्नोलॉजी, चिप्स, परमाणु उपकरण और LNG की आयात बढ़ेगी, जो भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी।

 - वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि इससे 'मेक इन इंडिया' को नया वेग मिलेगा और रोजगार बढ़ेंगे। 

क्या होगा आगे? डील अभी अंतिम रूप ले रही है। संयुक्त बयान जल्द जारी होगा। लेकिन किसान संगठनों ने 12 फरवरी को आम हड़ताल की घोषणा की है। अगर डील में कृषि पर कोई छूट दी गई तो विरोध और तेज हो सकता है। ट्रंप की 'ट्रेड वॉर' से राहत मिली है, लेकिन भारतीय किसानों के लिए यह 'राहत' या 'नई मुसीबत' साबित होगी – यह समय बताएगा। 

यह डील भारत-अमेरिका संबंधों में नया अध्याय है, लेकिन घरेलू स्तर पर यह किसानों के भविष्य का सवाल बन गई है। क्या सरकार किसानों को आश्वस्त कर पाएगी, या फिर सड़कों पर नया आंदोलन शुरू हो जाएगा? 

Sajjadali Nayani ✍
 Friday world 4/2/2026