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यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Saturday, 26 September 2026

September 26, 2026

मैचिंग-मैचिंग का जलवा: जब जैकेट से लेकर झुनझुने तक सब हो परफेक्ट, तभी तो बनते हैं फैशन गुरु!

मैचिंग-मैचिंग का जलवा: जब जैकेट से लेकर झुनझुने तक सब हो परफेक्ट, तभी तो बनते हैं फैशन गुरु!
- Friday World September 27,2026
कहते हैं घर में एक महिला हो तो पुरुष का पहनावा-ओढ़ावा हमेशा टिप-टॉप रहता है। सुबह ऑफिस जाते समय शर्ट, पैंट, मोजे, रूमाल, घड़ी सब कुछ करीने से निकाल कर रख देती है। कहीं बाहर जाना हो तो वह कोशिश करती है कि दोनों का आउटफिट एक-दूसरे से मेल खाए। अगर मैचिंग हो जाए तो फिर तो सोने पर सुहागा!

लेकिन जब पुरुष अकेला रहता है तो कहानी बिल्कुल अलग होती है। जो हाथ में आया पहन लिया। जींस के ऊपर बिना इस्त्री की शर्ट, फॉर्मल ट्राउजर के साथ स्पोर्ट्स टी-शर्ट, जहाँ जूते पहनने थे वहाँ हवाई चप्पल पहन कर निकल लिए। यही तो हर घर की आम कहानी है।

पर यहाँ साहब का मामला बिल्कुल अलग है। इनको देख कर लगता है कि इन्हें किसी की जरूरत ही नहीं, ये खुद ही अपने स्टाइलिस्ट हैं। इनका हर आउटफिट एकदम परफेक्ट, एकदम नपा-तुला।

लोग कहते हैं इनके पास लेगिंग्स का तो जैसे पूरा कलेक्शन है। इंद्रधनुष के सात रंग भी कम पड़ जाएं, इनके पास हर शेड, हर प्रिंट की लेगिंग्स मौजूद है। आज ऑरेंज जैकेट पहनी है तो लेगिंग्स में भी कहीं न कहीं ऑरेंज की झलक जरूर होगी। कल ग्रीन कुर्ता पहना था तो आज ग्रीन वाली बारी है।

और तो और, यहाँ देखिए कमाल! झोले में रख कर झुनझुना भी लाए हैं, वो भी जैकेट से मैचिंग! मतलब मैचिंग का इतना ख्याल कि छोटी से छोटी एक्सेसरीज भी आउटफिट से बाहर न जाए। जैकेट नारंगी तो झोला नारंगी, झोला नारंगी तो झुनझुना भी नारंगी। इसे कहते हैं डिटेलिंग पर ध्यान देना।

इसी वजह से दुनिया इनकी फैन है। आज के जमाने में जहाँ लोग ब्रांड के पीछे भागते हैं, वहीं साहब ने मैचिंग को ही ब्रांड बना दिया है। उनका यह अंदाज बताता है कि फैशन का मतलब महंगे कपड़े नहीं, बल्कि कपड़ों को सलीके से पहनना है।

सोशल मीडिया पर भी इनकी मैचिंग-मैचिंग की चर्चा खूब होती है। लोग कमेंट करते हैं - "साहब का फैशन सेंस गजब है", "हर रंग में परफेक्ट लगते हैं"।

तो सीखने वाली बात ये है कि अगर आप भी चाहते हैं कि लोग आपके स्टाइल के फैन हों, तो साहब की तरह मैचिंग पर ध्यान दीजिए। जरूरी नहीं कि हर चीज महंगी हो, जरूरी है कि हर चीज मैच करती हो। फिर चाहे वो जैकेट हो या झोले में रखा छोटा सा झुनझुना ही क्यों न हो!

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World September 27,2026

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September 26, 2026

फलस्तीन के लिए लड़ने वाले अंसारुल्लाह पर सऊदी का वार - ग्रैंड मुफ्ती के फतवे की आड़ में अमेरिका-इजराइल की याराना निभा रही है रियाद सरकार!

फलस्तीन के लिए लड़ने वाले अंसारुल्लाह पर सऊदी का वार - ग्रैंड मुफ्ती के फतवे की आड़ में अमेरिका-इजराइल की याराना निभा रही है रियाद सरकार!
-Friday World September 26, 2026
सना-यमनःजो अंसारुल्लाह आज लाल सागर में इजराइली जहाजों को रोक कर, तेल अवीव पर मिसाइलें दाग कर फलस्तीन के मजलूमों के लिए अकेला खड़ा है, उसी अंसारुल्लाह को खत्म करने के लिए सऊदी की यहूदी समर्थक सरकार ने अब धर्म के नाम पर फतवा जारी करवा दिया है।

सऊदी अरब के ग्रैंड मुफ्ती शेख सालेह बिन फौजान अल फौजान ने देश के सैनिकों से कहा है कि अंसारुल्लाह के खिलाफ आखिरी दम तक जंग करो, जान भी कुर्बान करनी पड़े तो करो। सऊदी सरकारी मीडिया SPA ने इस बयान को बड़े गर्व के साथ चलाया है।

सवाल यह है कि यह फतवा किसके लिए है? जब गाजा में बच्चे भूख से मर रहे हैं, जब इजराइल अस्पतालों और स्कूलों पर बम बरसा रहा है, तब दुनिया में अगर कोई खुल कर फलस्तीन के लिए लड़ा है तो वो यमन का अंसारुल्लाह ही है। उसी अंसारुल्लाह को सऊदी सरकार दुश्मन बता रही है।

असली खेल क्या है?

1. फलस्तीन से ध्यान भटकाना: अंसारुल्लाह ने इजराइल की आर्थिक नाकेबंदी कर दी है। इससे अमेरिका और इजराइल बौखलाए हुए हैं। सऊदी सरकार, जो अंदरखाने अब्राहम अकॉर्ड के जरिए इजराइल से हाथ मिला चुकी है, अमेरिका के इशारे पर अंसारुल्लाह पर हमला करके इजराइल की मदद कर रही है।

2. धर्म को हथियार बनाना: ग्रैंड मुफ्ती के मुंह से "वतन की हिफाजत सबसे बड़ा फर्ज है" कहलवाया जा रहा है, ताकि सऊदी के नौजवानों को लगे कि वे इस्लाम के लिए लड़ रहे हैं। हकीकत में वे इजराइल की सुरक्षा के लिए लड़ रहे हैं। जो सरकार खुद अमेरिका के सैन्य अड्डों को अपनी जमीन पर बैठाए हुए है, वह वतन की हिफाजत की बात कैसे कर सकती है?

3. अमेरिका-इजराइल की याराना: सऊदी शासक अच्छी तरह जानते हैं कि उनकी कुर्सी वाशिंगटन से बंधी है। इसलिए फलस्तीन के हक में खड़े होने वाले अंसारुल्लाह को सत्ता से बेदखल करने का आदेश दिया जा रहा है। यह यमन की जंग नहीं, यह फलस्तीन की आवाज को दबाने की जंग है।

कौन है असली मुजाहिद?

एक तरफ अंसारुल्लाह है, जिसके पास न बड़ी सेना है न अरबों डॉलर का तेल, लेकिन उसने इजराइल को कहा - "गाजा पर हमला बंद करो वरना हम तुम्हें नहीं छोड़ेंगे"। दूसरी तरफ सऊदी सरकार है जिसके पास दुनिया का सबसे महंगा हथियार है, लेकिन उसने एक बार भी इजराइल पर हमला करने वाले अंसारुल्लाह का साथ नहीं दिया, बल्कि उसी पर हमला कर दिया।

आज उम्मत देख रही है कि फलस्तीन के लिए कौन लड़ रहा है और इजराइल के लिए कौन तलवार उठा रहा है। ग्रैंड मुफ्ती का यह फतवा इतिहास में लिखा जाएगा कि जब फलस्तीन जल रहा था, तब सऊदी की बंदूकों का मुंह अंसारुल्लाह की तरफ था, इजराइल की तरफ नहीं।

Sajjadali Nayani ✍️
Friday World September 26, 2026


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September 26, 2026

બ્રેકિંગ: 28થી 30 સપ્ટેમ્બર બેંક હડતાલ! ગભરાશો નહીં, SBIએ આપ્યો મોટો ઉપાય - રવિવાર 27મીએ ખુલશે શાખાઓ, ATM ફ્રી!

બ્રેકિંગ: 28થી 30 સપ્ટેમ્બર બેંક હડતાલ! ગભરાશો નહીં, SBIએ આપ્યો મોટો ઉપાય - રવિવાર 27મીએ ખુલશે શાખાઓ, ATM ફ્રી!
-Friday World September 26,2026 
પ્રિય ગ્રાહક માટે મહત્વના સમાચાર છે. જો તમારે બેંકનું કોઈ અગત્યનું કામ હોય તો આ સમાચાર ધ્યાનથી વાંચો. યુનાઇટેડ ફોરમ ઓફ બેંક યુનિયન્સ (UFBU) એ 28 થી 30 સપ્ટેમ્બર 2026 દરમિયાન 3 દિવસની દેશવ્યાપી બેંક હડતાલનું એલાન કર્યું છે. આ હડતાલ પાંચ દિવસીય બેંકિંગ સહિતની અનેક માંગણીઓને લઈને છે.

આ હડતાલ શનિવાર અને રવિવારની રજા સાથે મળીને 5 દિવસ સુધી બેંકિંગ સેવાઓ ઠપ્પ થઈ શકે છે, તેથી કેન્દ્ર સરકાર અને રિઝર્વ બેંક ઓફ ઈન્ડિયા એક્શનમાં આવી ગયા છે.

SBIનો ગ્રાહકો માટે મોટો નિર્ણય:

દેશની સૌથી મોટી બેંક સ્ટેટ બેંક ઓફ ઇન્ડિયા (SBI) એ ગ્રાહકોની સુવિધા માટે બે મોટી જાહેરાતો કરી છે: f863

 1. રવિવાર 27 સપ્ટેમ્બરે બધી શાખાઓ ખુલ્લી રહેશે: સામાન્ય રીતે રવિવારે બેંકો બંધ હોય છે, પરંતુ આ વખતે સરકારના આદેશ બાદ તમામ પબ્લિક સેક્ટર બેંકો અને ગ્રામીણ બેંકો રવિવારે ખુલ્લી રહેશે. SBIએ તેના X હેન્ડલ પર કહ્યું છે - "તમારું કોઈ બેંકિંગ કામ બાકી છે આ રવિવારે? અમે તમારા માટે ખુલ્લા છીએ!" તમે રવિવારે તમારી નજીકની શાખામાં જઈને જમા, ઉપાડ, ચેક ક્લિયરન્સ જેવા કામ પતાવી શકો છો. 173c

 2. 28થી 30 સપ્ટેમ્બર સુધી ATM ટ્રાન્ઝેક્શન ફ્રી: હડતાલ દરમિયાન રોકડની અછત ન સર્જાય તે માટે SBIએ ત્રણેય દિવસ માટે ATM ચાર્જ માફ કરી દીધો છે. એટલે કે તમે કોઈપણ બેંકના ATMમાંથી પૈસા ઉપાડશો તો પણ કોઈ ઇન્ટર-બેંક ચાર્જ લાગશે નહીં. 49b0

ડિજિટલ સેવાઓ ચાલુ રહેશે:

SBIએ સ્પષ્ટ કર્યું છે કે હડતાલ દરમિયાન તેની ડિજિટલ સેવાઓ જેમ કે YONO એપ, ઇન્ટરનેટ બેંકિંગ, મોબાઇલ બેંકિંગ, WhatsApp બેંકિંગ અને UPI, IMPS, NEFT, RTGS જેવી સેવાઓ સંપૂર્ણપણે ચાલુ રહેશે. તમને શાખાએ જવાની જરૂર નહીં પડે. f863

ગ્રાહકોએ શું કરવું?

- તમારું અગત્યનું બ્રાન્ચનું કામ હોય તો રવિવાર, 27 સપ્ટેમ્બરે પતાવી લો.
- હડતાલ દરમિયાન ઓનલાઇન પેમેન્ટનો ઉપયોગ કરો.
- કોઈ પણ મદદ માટે SBIના 24x7 ટોલ ફ્રી નંબર 18001234 / 18002100 પર સંપર્ક કરો.

આમ, સરકાર અને SBIએ મળીને એવી વ્યવસ્થા કરી છે કે સામાન્ય જનતાને હડતાલથી ઓછામાં ઓછી તકલીફ પડે.

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World September 26,2026 

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September 26, 2026

RTI से हड़कंप: 13 करोड़ वोटर लिस्ट से गायब, चुनाव आयोग ने कहा- "ये फैसला हमने लिया ही नहीं", लोकतंत्र पर उठे बड़े सवाल

RTI से हड़कंप: 13 करोड़ वोटर लिस्ट से गायब, चुनाव आयोग ने कहा- "ये फैसला हमने लिया ही नहीं", लोकतंत्र पर उठे बड़े सवाल
- Friday World September 26,2026 
नई दिल्ली। देश में चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। RTI एक्टिविस्ट अंजलि भारद्वाज के एक खुलासे ने चुनाव आयोग (ECI) को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

दरअसल अंजलि भारद्वाज ने RTI के तहत चुनाव आयोग से 'SIR' (Special Intensive Revision) प्रक्रिया और कथित तौर पर 13 करोड़ वोटरों के नाम काटे जाने से जुड़ी फाइलों, नोटिंग और आदेशों की जानकारी मांगी थी। आरटीआई के जवाब में आयोग के अधिकारी ने लिखित में यह जवाब दिया कि इस तरह का कोई फैसला चुनाव आयोग ने लिया ही नहीं है।

यह जवाब सामने आते ही सियासी और सामाजिक हलकों में भूचाल आ गया है। सवाल यह है कि अगर वोटर लिस्ट से नाम हटाने का इतना बड़ा फैसला चुनाव आयोग ने नहीं लिया, तो फिर यह फैसला किसने लिया और किसके आदेश पर देश भर में वोटर लिस्ट में संशोधन किया गया?

वरिष्ठ पत्रकार ने दागे तीखे सवाल

इस सनसनीखेज खुलासे पर वरिष्ठ पत्रकार कृष्णकांत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखते हुए सवाल उठाया, "अगर यह फैसला आयोग का नहीं था, तो फिर देश की वोटर लिस्ट तैयार कौन कर रहा है? क्या लोकतंत्र के लुटेरों ने चुनाव आयोग को पूरी तरह बंधक बना लिया है जो सत्ता के मनमुताबिक वोटर चुन रहे हैं?"

उनका कहना है कि वोटर लिस्ट ही लोकतंत्र की आत्मा है और अगर उसी से छेड़छाड़ हो रही है तो यह बेहद चिंताजनक है।

क्या है SIR प्रक्रिया?

SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण, एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत चुनाव आयोग घर-घर जाकर वोटर लिस्ट को अपडेट करता है। इसमें मृत, डुप्लीकेट, या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं और नए वोटरों के नाम जोड़े जाते हैं। यह एक नियमित प्रक्रिया है, लेकिन इस बार पैमाना बहुत बड़ा बताया जा रहा है।

विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया की आड़ में चुन-चुन कर कुछ वर्गों के वोट काटे जा रहे हैं। हालांकि चुनाव आयोग हमेशा कहता आया है कि यह एक पारदर्शी और कानून के तहत की जाने वाली प्रक्रिया है।

क्या कहता है चुनाव आयोग?

अभी तक चुनाव आयोग की तरफ से इस RTI जवाब पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रेस बयान नहीं आया है। आयोग का सामान्य पक्ष यह रहता है कि वोटर लिस्ट से नाम हटाने की प्रक्रिया Booth Level Officer (BLO) द्वारा फील्ड वेरिफिकेशन के बाद ही होती है और इसका अंतिम फैसला ERO (Electoral Registration Officer) लेता है।

लेकिन RTI में "फैसला आयोग ने लिया ही नहीं" जैसे जवाब ने संदेह को और गहरा कर दिया है। RTI कार्यकर्ताओं का कहना है कि आयोग को फाइल नोटिंग और आदेश की कॉपी सार्वजनिक करनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।

यह मामला अब सिर्फ वोटर लिस्ट का नहीं, बल्कि चुनाव आयोग की स्वायत्तता और विश्वसनीयता का बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि क्या चुनाव आयोग इस पूरे मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करता है या नहीं।

 यह आर्टिकल RTI एक्टिविस्ट के दावे और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। पाठकों से अनुरोध है कि वोटर लिस्ट से संबंधित आधिकारिक जानकारी के लिए https://voters.eci.gov.in और https://elections24.eci.gov.in पर ही भरोसा करें।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World September 26,2026 

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September 26, 2026

जिनपिंग की 3 दिन की यात्रा बेनतीजा खत्म, जाते-जाते ट्रंप ने ईरान पर दी कड़ी चेतावनी - "मदद बर्दाश्त नहीं"

जिनपिंग की 3 दिन की यात्रा बेनतीजा खत्म, जाते-जाते ट्रंप ने ईरान पर दी कड़ी चेतावनी - "मदद बर्दाश्त नहीं"
-Friday World September 26,2026 
दुनिया  सबसे बड़ी महाशक्ति चीन और ईरान से हारा हुआ अमेरिका के बीच हुई बहुप्रतीक्षित मुलाकात आखिर बिना किसी बड़ी डील के खत्म हो गई है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तीन दिवसीय अमेरिका यात्रा शुक्रवार को पूरी हुई और वह वाशिंगटन से बीजिंग के लिए रवाना हो गए। इस यात्रा पर पूरी दुनिया की नजर थी, लेकिन नतीजा उम्मीद के मुताबिक नहीं निकला। चीन के जिनपिंग ने ट्रंप को कोई भाव नही दिया 

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच व्यापार, ईरान संकट, यूक्रेन युद्ध, ताइवान मुद्दा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे बेहद संवेदनशील मुद्दों पर कई घंटों तक बंद कमरे में बातचीत हुई। बाहर से तो दोनों नेताओं ने दोस्ती दिखाने की कोशिश की, लेकिन अंदर की कहानी कुछ और ही थी।

जिनपिंग के रवाना होते ही ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल अकाउंट पर दोनों की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा - "America is back"। यह छोटा सा कैप्शन ही इस पूरी यात्रा का सार बता रहा था कि अमेरिका झुकने वाला नहीं है।

ईरान पर ट्रंप की दो टूक चेतावनी लेकिन जिनपिंग ने चेतावनी व्हाइट हाउस के डस्टबीन मे डाल दी।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस पूरी बैठक का सबसे गंभीर मुद्दा पश्चिम एशिया का तनाव और ईरान रहा। ट्रंप ने शी जिनपिंग को साफ शब्दों में चेतावनी दी कि चीन किसी भी तरह से ईरान की मदद न करे।

चीन में अमेरिकी राजदूत डेविड परड्यू के हवाले से बताया गया है कि ट्रंप ने कहा, ईरान को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष, सैन्य या आर्थिक, किसी भी तरह की सहायता देना अमेरिका को बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं होगा। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब रिपोर्ट्स हैं कि चीन प्रतिबंधों के बावजूद ईरान से सस्ता क्रूड ऑयल खरीद रहा है और उसे हथियारों की सप्लाई भी कर सकता है।

जवाब में चीन ने अमेरिका को आश्वासन दिया है कि वह ईरान को ऐसी कोई मदद नहीं देगा। लेकिन जानकार मानते हैं कि यह सिर्फ कूटनीतिक बयान है।

होर्मुज स्ट्रेट - चीन की कमजोर नस

ईरान का मुद्दा चीन के लिए जीवन-मरण का सवाल है। चीन अपनी जरूरत का 40% से ज्यादा कच्चा तेल पश्चिम एशिया से मंगाता है, जो होर्मुज स्ट्रेट से होकर आता है। अगर ईरान-अमेरिका युद्ध होता है और होर्मुज बंद होता है, तो सबसे बड़ी मार चीन की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगी।

इसीलिए चीनी सरकारी एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, शी जिनपिंग ने अमेरिका और ईरान दोनों से अपील की है कि वे बातचीत की टेबल पर लौटें और जून में बने समझौते के फ्रेमवर्क पर विवाद सुलझाएं। चीन युद्ध नहीं, शांति चाहता है ताकि उसका तेल व्यापार चलता रहे।

व्यापार पर सिर्फ सीजफायर, कोई नई डील नहीं

इस मुलाकात का एकमात्र ठोस नतीजा व्यापार मोर्चे पर दिखा। दोनों देशों ने पहले से चल रहे ट्रेड सीजफायर को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है। यानी टैरिफ वॉर को अभी कुछ समय के लिए रोका गया है, लेकिन कोई नया व्यापक व्यापार समझौता नहीं हुआ है।

AI जैसे भविष्य के मुद्दे पर भी कोई सहमति नहीं बन सकी। अमेरिका चाहता है कि चीन AI चिप्स और तकनीक का सैन्य इस्तेमाल न करे, जबकि चीन इसे अपने विकास पर रोक मानता है।

व्हाइट हाउस का टूर और पावर शो

दूसरे दिन ट्रंप ने शी जिनपिंग को मित्र बताते हुए व्हाइट हाउस का भव्य टूर कराया। उन्हें 50 करोड़ डॉलर का नया हेलीपैड दिखाया गया, US नेशनल आर्काइव्स में अमेरिकी संविधान और स्वतंत्रता की घोषणा के मूल दस्तावेज दिखाए गए। यह अमेरिका की ताकत और वैभव का शो था। लेकिन इस शो के पीछे कोई डील नहीं निकली।

कुल मिलाकर, तीन दिन की यह हाई-प्रोफाइल समिट फोटो-ऑप से ज्यादा कुछ नहीं रही। ईरान पर टकराव बरकरार है और व्यापार पर सिर्फ अस्थायी विराम है। अब देखना होगा कि वाशिंगटन से बीजिंग लौटे शी जिनपिंग ईरान को लेकर क्या फैसला लेते हैं।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World September 26,2026 

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September 26, 2026

ड्रोन वॉरफेयर के गंभीर आरोपों के बीच 1 अमेरिकी और 6 यूक्रेनी नागरिकों को विदेश जाने की इजाजत, कोर्ट के फैसले से सियासी तूफान!

ड्रोन वॉरफेयर के गंभीर आरोपों के बीच 1 अमेरिकी और 6 यूक्रेनी नागरिकों को विदेश जाने की इजाजत, कोर्ट के फैसले से सियासी तूफान!
-Friday World September 26,2026



देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी NIA द्वारा UAPA जैसे गंभीर कानून के तहत जांच के बीच दिल्ली की एक स्पेशल कोर्ट ने एक ऐसा फैसला दिया है जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल NIA जज प्रशांत शर्मा ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक और 6 यूक्रेनी नागरिकों को एक महीने के लिए अपने देश जाने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने उनके पासपोर्ट रिलीज करने का आदेश दिया है। इस आदेश के बाद वैनडाइक शुक्रवार शाम को अमेरिका के लिए रवाना हो गया।

कोर्ट ने शर्त रखी है कि इन सभी विदेशी नागरिकों को 24 घंटे के अंदर अपना सटीक विदेशी पता, फोन नंबर, ईमेल आईडी और एक करीबी संपर्क व्यक्ति की जानकारी NIA को देनी होगी। और जब भी जरूरत होगी, उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जांच में शामिल होना पड़ेगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि उन्हें 30 दिन के अंदर भारत वापस आना होगा। वैनडाइक ने 21 अक्टूबर की वापसी की टिकट बुक की है।

आरोप क्या हैं? - ड्रोन वॉरफेयर की ट्रेनिंग

NIA का आरोप बहुत गंभीर है। एजेंसी का कहना है कि ये 7 लोग दिसंबर 2025 में भारत आए, बिना परमिट के मिजोरम के रास्ते म्यांमार में घुसे और वहां लगभग 3 महीने तक म्यांमार के सशस्त्र विद्रोही समूहों - चिन नेशनल फ्रंट (CNF) और कचिन इंडिपेंडेंस आर्मी (KIA) को ड्रोन वॉरफेयर, ड्रोन ऑपरेशन, ड्रोन असेंबली और जैमिंग टेक्नोलॉजी की ट्रेनिंग दी। इस मिशन को एक विद्रोही कमांडर के जरिए फंड किया गया था।

इन सभी को 13 मार्च 2026 को गिरफ्तार किया गया था। वैनडाइक तिहाड़ जेल में और 6 यूक्रेनी रोहिणी जेल में बंद थे।

तो फिर कोर्ट ने जाने क्यों दिया? - कानूनी पेंच

असल पेंच चार्जशीट में है। NIA ने UAPA के तहत 180 दिन के अंदर चार्जशीट दाखिल नहीं की। 8 सितंबर को एजेंसी ने जो पहली चार्जशीट दाखिल की, उसमें UAPA नहीं, बल्कि सिर्फ इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 की धारा 21 और 23 लगाई गई थी, जो अवैध प्रवेश और वीजा उल्लंघन से जुड़ी हैं।

कोर्ट ने इस चार्जशीट को "piecemeal" यानी अधूरी बताया। कोर्ट ने कहा कि जब तक UAPA के तहत चार्जशीट नहीं आती, आरोपियों का डिफॉल्ट जमानत का वैधानिक अधिकार बनता है। इसी आधार पर 18 सितंबर को वैनडाइक और 23 सितंबर को 6 यूक्रेनियों को डिफॉल्ट जमानत मिली। इमिग्रेशन केस में 5.5 लाख रुपये जुर्माना भरने के बाद उन्हें उस मामले से डिस्चार्ज कर दिया गया।

सबसे बड़ी बात - सुनवाई के दौरान NIA के स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर राहुल त्यागी ने खुद कहा कि एजेंसी को फिलहाल इनकी भारत में फिजिकल मौजूदगी की जरूरत नहीं है। UAPA की जांच अभी समय लेगी।

राजनीति गरमाई - कांग्रेस ने उठाए सवाल

जैसे ही विदेशी नागरिकों के जाने की खबर आई, कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोल दिया। राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने कहा, "हमारे Compromised PM ने फिर वही किया। साफ है कि अमेरिकी दबाव में यह फैसला हुआ, लेकिन भारत को बदले में क्या मिला? मोदी देश के चुनाव, संस्थाओं और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करने में नाकाम रहे हैं।"

विपक्ष पूछ रहा है कि इन लोगों को भारतीय वीजा कैसे मिला? वे बिना वैध प्रक्रिया के म्यांमार कैसे पहुंचे? क्या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इतने गंभीर मामले में विदेशी दबाव काम कर रहा है? हालांकि सरकार और NIA की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

NIA का कहना है कि UAPA के तहत जांच अभी भी जारी है और जरूरत पड़ने पर सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की जा सकती है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World September 26,2026

#NIA #UAPA #DroneWarfare #MatthewVanDyke #DelhiCourt #NationalSecurity #MyanmarIssue #CongressVsBJP #IndiaUSRelations #BreakingNews
September 26, 2026

36 साल का रिकॉर्ड टूटा: मिडटर्म से पहले ट्रंप की लोकप्रियता 32% पर लुढ़की, व्हाइट हाउस में हड़कंप!

36 साल का रिकॉर्ड टूटा: मिडटर्म से पहले ट्रंप की लोकप्रियता 32% पर लुढ़की, व्हाइट हाउस में हड़कंप!
-Friday World September 26,2016 
अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को होने वाले मिडटर्म चुनावों से ठीक पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए बुरी खबर आई है। वॉल स्ट्रीट जर्नल के लेटेस्ट पोलिंग सर्वे के मुताबिक ट्रंप का अप्रूवल रेटिंग गिरकर सिर्फ 32 प्रतिशत पर आ गया है।

यह आंकड़ा सामान्य नहीं है। 1990 के बाद यानी पिछले 36 सालों में मिडटर्म चुनाव से पहले किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति की यह सबसे कम रेटिंग है। इससे पहले इतनी कम रेटिंग किसी राष्ट्रपति की नहीं देखी गई। जो ट्रंप कुछ दिन पहले तक रिपब्लिकन पार्टी की बड़ी जीत का दावा कर रहे थे, उनके लिए यह सर्वे किसी बड़े झटके से कम नहीं है।

आखिर क्यों गिरी रेटिंग? दो बड़े कारण

सर्वे में शामिल लोगों से जब नाराजगी की वजह पूछी गई तो दो बातें सबसे आगे निकलकर आईं।

 1. महंगाई और अर्थव्यवस्था: अमेरिका में पिछले कुछ महीनों में महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। पेट्रोल-डीजल और रोजमर्रा की चीजों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। मध्यम वर्गीय परिवार खुद को आर्थिक दबाव में महसूस कर रहा है। ट्रंप प्रशासन इस मोर्चे पर लोगों को राहत देने में नाकाम रहा है।

 2. विदेश नीति और युद्ध का डर: दूसरा बड़ा कारण है मध्य-पूर्व में बढ़ता तनाव। ईरान के साथ अमेरिका का सैन्य टकराव बढ़ रहा है। लोग नहीं चाहते कि अमेरिका एक और बड़े युद्ध में फंसे। इससे देश में असुरक्षा और चिंता का माहौल है।

ईरान वाला बयान बना आग में घी

इसी बीच ईरान को लेकर ट्रंप के सख्त बयानों ने विवाद को और बढ़ा दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने पश्चिम एशिया में शांति के लिए 7 दिन के सीजफायर का प्रस्ताव दिया था। इसमें होर्मुज स्ट्रेट को खोलना और परमाणु बातचीत फिर से शुरू करने की बात थी। लेकिन ट्रंप ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया।

अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से खबर है कि ट्रंप ने इशारा किया है कि मिडटर्म चुनाव खत्म होते ही ईरान पर फिर से बमबारी शुरू की जा सकती है। 22 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में अपने भाषण के दौरान ट्रंप ने कहा था, "मेरे पास दो विकल्प हैं - एक ईरान के साथ समझौता करना या इस्लामिक रिपब्लिक का तेजी से पूरी तरह सफाया कर देना। मुझे यकीन है कि चुनाव के बाद वे खुद समझौते के लिए तैयार हो जाएंगे।" इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी आलोचना हो रही है।

अब ट्रंप का प्लान क्या है?

रेटिंग गिरने के बाद रिपब्लिकन खेमे में हलचल तेज हो गई है। पॉलिटिको की रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप अब डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं। वह अपनी पार्टी के पारंपरिक गढ़ों में ताबड़तोड़ रैलियां करने जा रहे हैं।

उनके निशाने पर आयोवा, फ्लोरिडा, टेक्सास, अलास्का और ओक्लाहोमा जैसे राज्य हैं, जहां रिपब्लिकन का जनाधार मजबूत माना जाता है। ट्रंप वहां जाकर अपने उम्मीदवारों के लिए वोट मांगेंगे और अपनी छवि सुधारने की कोशिश करेंगे।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ट्रंप चुनाव से पहले के इस एक महीने में अपनी गिरी हुई लोकप्रियता को वापस पा सकेंगे? क्या महंगाई और युद्ध के डर के बीच अमेरिकी जनता उन पर फिर से भरोसा करेगी? 3 नवंबर का नतीजा न सिर्फ कांग्रेस का भविष्य तय करेगा, बल्कि 2028 के राष्ट्रपति चुनाव की दिशा भी तय कर देगा।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World September 26,2016 

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