April 29, 2026
इजरायल में दोहरी विफलता: सेना 'सभी मोर्चों पर हारी', नेतन्याहू को सख्त सजा देने के पक्ष में आम जनता
इजरायल में दोहरी विफलता: सेना 'सभी मोर्चों पर हारी', नेतन्याहू को सख्त सजा देने के पक्ष में आम जनता-Friday World-April 29,2026
इजरायल की राजनीति और सुरक्षा स्थिति इन दिनों गहरे संकट से गुजर रही है। एक हालिया सर्वेक्षण ने चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे हैं — अधिकांश इजरायली नागरिक मानते हैं कि उनकी सेना गाजा, लेबनान और ईरान समेत सभी मोर्चों पर विफल रही है। वहीं, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लंबे समय से चल रहे भ्रष्टाचार मुकदमे में लगभग हर दिन सुनवाई स्थगित होने के बीच, इजरायली जनता उन्हें कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग कर रही है।
यह दोहरी विफलता — सैन्य और नैतिक — इजरायल की आंतरिक राजनीति को हिला रही है और नेतन्याहू की सरकार पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
सर्वेक्षण का 충격: "कोई मोर्चा नहीं जीता"
हाल के एक विश्वसनीय सर्वेक्षण में **57 प्रतिशत** इजरायलियों ने स्पष्ट कहा कि उनकी सेना ने **किसी भी मोर्चे पर विजय** हासिल नहीं की। केवल 28 प्रतिशत ने किसी एक मोर्चे पर सफलता मानी। गाजा में लंबे संघर्ष, लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ अभियान और ईरान से टकराव — तीनों जगह इजरायल की रणनीति को जनता ने असफल करार दिया है।
इजरायली मीडिया और सुरक्षा विशेषज्ञों का भी यही कहना है कि "पूर्ण विजय" का दावा खोखला साबित हुआ। हिजबुल्लाह की कमान अभी भी सक्रिय है, गाजा में हमास पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ और ईरान के खिलाफ हवाई अभियान के बावजूद क्षेत्रीय खतरा कम नहीं हुआ।
सेना प्रमुख ने खुद स्वीकार किया है कि 2026 भी "सभी मोर्चों पर लड़ाई का साल" हो सकता है। इससे साफ है कि इजरायल की "फॉरएवर वॉर" नीति थकान और निराशा पैदा कर रही है। आम इजरायली अब शांति और सुरक्षा दोनों चाहते हैं, न कि अनंत युद्ध।
भ्रष्टाचार मुकदमे में लगातार देरी: जनता का गुस्सा
नेतन्याहू पर भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और विश्वासघात के गंभीर आरोप हैं। मुकदमा 2020 से चल रहा है, लेकिन युद्ध का बहाना बनाकर सुनवाई बार-बार टाली जा रही है। हाल ही में फिर दो महीने की देरी के बाद गवाही शुरू होनी थी, जिसे "सुरक्षा कारणों" का हवाला देकर रद्द कर दिया गया।
इजरायली जनता इस देरी से बेहद नाराज है। अधिकांश लोग मानते हैं कि प्रधानमंत्री पद का दुरुपयोग कर नेतन्याहू न्याय से बचने की कोशिश कर रहे हैं। सर्वेक्षणों में साफ दिखता है कि बहुमत उन्हें सख्त सजा देने के पक्ष में है।
आलोचक कहते हैं — युद्ध जारी रखकर मुकदमे को टालना लोकतंत्र के लिए खतरा है। राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग ने भी कहा है कि क्षमादान से पहले सभी पक्षों के बीच समझौते की कोशिश होनी चाहिए। ट्रंप जैसे सहयोगी क्षमादान की वकालत कर रहे हैं, लेकिन इजरायल की जनता और न्यायपालिका इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं दिख रही।
नेतन्याहू की राजनीति: सत्ता बचाने का खेल?
नेतन्याहू पर आरोप है कि वे व्यक्तिगत बचाव के लिए देश को लगातार युद्ध की स्थिति में रख रहे हैं। जितना अधिक युद्ध, उतनी अधिक देरी मुकदमे में। लेकिन इस रणनीति का खामियाजा इजरायली समाज भुगत रहा है — आर्थिक नुकसान, सैनिकों की थकान, सामाजिक विभाजन और अंतरराष्ट्रीय अलगाव।
विपक्षी नेता यायर लापिड और नफ्ताली बेनेट जैसे लोग खुलकर कह रहे हैं कि नेतन्याहू की प्राथमिकता अब देश नहीं, अपनी कुर्सी और कानूनी सुरक्षा बचाना है। प्रदर्शनकारी अदालत के बाहर जमा होकर न्याय की मांग कर रहे हैं।
इजरायल के सामने चुनौतियां
यह स्थिति इजरायल के लोकतंत्र की परीक्षा है। एक तरफ सैन्य विफलता की स्वीकारोक्ति, दूसरी तरफ भ्रष्टाचार के आरोपों में फंसे प्रधानमंत्री। जनता अब थक चुकी है — न चाहती है अनंत युद्ध, न चाहती है कि नेता कानून से ऊपर रहें।
सुरक्षा विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि "फॉरएवर वॉर" नीति इजरायल को कमजोर कर रही है। सच्ची सुरक्षा सैन्य कार्रवाई से ज्यादा कूटनीति, आंतरिक एकता और जवाबदेही से आती है।
अंत में...
इजरायल में हो रहे इन घटनाक्रम से साफ है कि सत्ता और न्याय के बीच टकराव गहराता जा रहा है। सर्वेक्षण स्पष्ट संदेश दे रहे हैं — सेना सभी मोर्चों पर विफल रही और जनता नेतन्याहू को सख्त सजा चाहती है।
अब देखना यह है कि इजरायल की न्यायपालिका और जनता इस चुनौती का सामना कैसे करती है। क्या युद्ध का बहाना न्याय को हमेशा टालता रहेगा, या लोकतंत्र की आवाज मजबूत होगी?
सच्चा नेता वह होता है जो देश की सुरक्षा के साथ-साथ कानून का सम्मान भी करता है। इजरायल की जनता अब यही उम्मीद कर रही है। देरी और बहानों का समय खत्म होना चाहिए। जवाबदेही और पारदर्शिता ही किसी लोकतंत्र की असली ताकत होती है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 29,2026