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November 02, 2026
भारत-इजराइल की 8000 करोड़ की महाडील फाइनल! आसमान में ही फाइटर जेट्स को ईंधन भरेंगे IAI के 6 उड़ते टैंकर, चीन-पाकिस्तान की टेंशन बढ़ी
भारत-इजराइल की 8000 करोड़ की महाडील फाइनल! आसमान में ही फाइटर जेट्स को ईंधन भरेंगे IAI के 6 उड़ते टैंकर, चीन-पाकिस्तान की टेंशन बढ़ी
-Friday World Nov 2,2026
नई दिल्ली - भारत और इजराइल के बीच रक्षा क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी डील्स में से एक अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है।
900 मिलियन डॉलर यानी लगभग 7,900 करोड़ रुपये की इस महाडील के तहत इजराइल की सरकारी रक्षा कंपनी इजराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) भारतीय वायुसेना के लिए 6 हवाई ईंधन भरने वाले विमान (Aerial Refueling Aircraft) सप्लाई करेगी। इसे "फ्लाइंग फ्यूल स्टेशन" भी कहा जाता है - मतलब आसमान में उड़ते हुए ही फाइटर जेट्स को रीफ्यूल करने वाला विमान।
#डील क्या है? 6 यात्री विमान बनेंगे जंगी टैंकर
इस डील की सबसे खास बात इसका मॉडल है। IAI नए विमान नहीं बनाएगी, बल्कि 6 सेकंड-हैंड Boeing 767 पैसेंजर विमानों को खरीद कर उन्हें मिलिट्री टैंकर में बदलेगी।
इसे कहा जाता है #MMTT - Multi-Mission Tanker Transport। IAI की Bedek Aviation Group इसमें एक्सपर्ट है। ये विमान:
- 14 घंटे तक लगातार उड़ सकते हैं
- 11,000 किलोमीटर से ज्यादा रेंज
- एक साथ 2-3 फाइटर जेट्स को ईंधन भर सकते हैं
- साथ में कार्गो, सैनिकों और मेडिकल इवैक्यूएशन का भी काम कर सकते हैं
मीडिया रिपोर्ट्स (Globes, Ctech, Times of India) के मुताबिक IAI इस टेंडर में एकमात्र योग्य बिडर बची है। रूस (Ilyushin) और यूरोप (Airbus A330 MRTT) की कंपनियों के प्रस्ताव तकनीकी और मूल्यांकन मानदंडों में फेल हो गए। अमेरिका का KC-46 Pegasus तो कीमत में दोगुना महंगा था। IAI का कन्वर्टेड टैंकर नए टैंकर से 30% से 50% सस्ता पड़ता है।
#Make in India का बड़ा फायदा - 30% काम भारत में होगा
यह डील सिर्फ खरीद नहीं, बल्कि मेक इन इंडिया की बड़ी जीत है।
समझौते के तहत कम से कम 30% कन्वर्जन का काम भारत में ही होगा। इसके लिए IAI ने 2022 में ही HAL (Hindustan Aeronautics Limited) के साथ MoU साइन किया था। HAL नासिक और बेंगलुरु में वायरिंग, स्ट्रक्चरल अपडेट और लोकल सिस्टम इंटीग्रेशन करेगा। टेक्नोलॉजी ट्रांसफर IAI करेगी।
डिलीवरी 2028 से 2030 के बीच होने की उम्मीद है। अभी यह डील कॉस्ट नेगोशिएशन कमेटी (जनवरी 2026 में बनी) से निकल कर CCS (Cabinet Committee on Security) की मंजूरी के इंतजार में है।
#भारतीय वायुसेना को क्यों चाहिए ये टैंकर?
भारतीय वायुसेना के पास अभी सिर्फ 6 Ilyushin Il-78MKI टैंकर हैं, जो रूस के हैं और 2003 में खरीदे गए थे। वे पुराने हो चुके हैं, मेंटेनेंस में भारी खर्च आता है और उपलब्धता 50% से भी कम है।
भारत को दो मोर्चों पर खतरा है - चीन और पाकिस्तान। ऐसे में:
1. लद्दाख और अरुणाचल में लंबी गश्त: बिना नीचे उतरे फाइटर जेट्स 3-4 घंटे ज्यादा हवा में रह सकते हैं।
2. हिंद महासागर में ताकत: राफेल, सुखोई-30MKI और तेजस को बिना रुके अंडमान से लेकर अदन की खाड़ी तक भेजा जा सकता है।
3. रणनीतिक बढ़त: बालाकोट जैसी स्ट्राइक के समय टैंकर नहीं होने से वायुसेना को मुश्किल हुई थी।
#IAI कौन है? भारत का पुराना दोस्त
इजराइल सरकार के अधीन काम करने वाली IAI दुनिया की टॉप एयरोस्पेस कंपनी है। यह मिलिट्री और सिविल दोनों के लिए एरियल सिस्टम बनाती है।
भारत और IAI की दोस्ती बहुत पुरानी है:
- बराक-8 / MRSAM: DRDO के साथ मिलकर बनाया गया एयर डिफेंस सिस्टम, 2017 में 2 बिलियन डॉलर (1.6 बिलियन का ऑर्डर) की डील हुई थी।
- ड्रोन और रडार: हेरोन ड्रोन, ग्रीन पाइन रडार सब IAI के ही हैं।
इस 900 मिलियन डॉलर की डील के बाद यह 2017 के बाद की सबसे बड़ी डील बन जाएगी। इजराइल ने खुद IAI के टैंकर नहीं खरीदे हैं, वह अमेरिका से KC-46 ले रहा है, लेकिन भारत के लिए यह किफायती और भरोसेमंद सौदा है।
आने वाले दिनों में जब ये 6 उड़ते टैंकर भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल होंगे, तो दुश्मन के हर कोने तक भारतीय फाइटर जेट्स की पहुंच बिना रुके हो जाएगी।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World Nov 2,2026
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