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यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Monday, 28 September 2026

September 28, 2026

ईरानी उड़ानों पर बैन से बसरा में भड़का जन-आक्रोश - ट्राइबल लीडर शेख अबू हसम अल-हरबी का इराक सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम!

ईरानी उड़ानों पर बैन से बसरा में भड़का जन-आक्रोश - ट्राइबल लीडर शेख अबू हसम अल-हरबी का इराक सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम!
- Friday World September 28,2026 
ईरान की उड़ानों पर इराक सरकार की पाबंदी ने अब इराक के सबसे अहम शहर बसरा में बवाल खड़ा कर दिया है। बसरा की सड़कों पर अवाम का गुस्सा खुलकर सामने आ गया है और ट्राइबल लीडर शेख अबू हसम अल-हरबी ने इराकी सरकार को सीधा 48 घंटे का अल्टीमेटम दे दिया है।

क्या है शेख अल-हरबी का अल्टीमेटम?

शेख अबू हसम अल-हरबी ने एक जनसभा में कहा है कि इराक सरकार तुरंत ईरानी उड़ानों पर लगाई गई पाबंदी को वापस ले। उनका कहना है कि बसरा का ईरान के साथ सदियों पुराना रिश्ता है - जमीनी, कारोबारी और सामाजिक। हर साल लाखों जायरीन ईरान से इराक और इराक से ईरान जाते हैं। इस पाबंदी से आम लोगों का रोजगार, तीर्थयात्रा और व्यापार सब ठप हो गया है।

शेख ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर सरकार ने 48 घंटे के अंदर अपना फैसला वापस नहीं लिया, तो वो अपने कबीले के लोगों के साथ बसरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट में दाखिल हो जाएंगे और किसी भी फ्लाइट को उड़ने नहीं देंगे। उनके इस बयान के बाद एयरपोर्ट के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

बसरा क्यों है इतना अहम?

बसरा इराक का आर्थिक दिल है। इराक का 80% तेल यहीं से निर्यात होता है और यह शहर ईरान की सीमा से सटा हुआ है। यहां के लोगों के ईरान के अबादान और खोर्रमशहर शहरों में रिश्तेदारियां हैं। हजारों बसरा वासी ईरान में काम करते हैं और ईरानी सामान बसरा के बाजारों में बिकता है। ऐसे में फ्लाइट बैन ने सीधे आम आदमी की जेब पर चोट की है।

दो नावों पर सवार इराकी सरकार

इराकी सरकार पर इस समय दोहरा दबाव है। एक तरफ अमेरिका का दबाव है कि ईरान की एयरलाइंस, खासकर Mahan Air और Iran Air पर पाबंदी लगाई जाए क्योंकि अमेरिका का आरोप है कि ये उड़ानें हथियारों की ढुलाई के लिए इस्तेमाल होती हैं। वहीं दूसरी तरफ, बसरा में शिया कबीलों और ईरान समर्थक गुटों का जबरदस्त विरोध है।

इराकी सरकार ने पिछले हफ्ते सुरक्षा कारणों का हवाला देकर ईरानी उड़ानों को अस्थायी रूप से निलंबित किया था, लेकिन अब यही फैसला उसके लिए गले की हड्डी बन गया है।

बड़े बुजुर्ग सही कहते हैं - दो नावों पर सवारी नहीं करनी चाहिए। इराकी सरकार को अब तय करना होगा कि वह अमेरिकी दबाव में रहेगी या अपने ही बसरा के लोगों की सुनेगी।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World September 28,2026 

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September 28, 2026

नागरिकता तय करना चुनाव आयोग का काम नहीं, गृह मंत्रालय का है: SIR मुद्दे पर पूर्व जज सुधांशु धूलिया का बड़ा बयान

नागरिकता तय करना चुनाव आयोग का काम नहीं, गृह मंत्रालय का है: SIR मुद्दे पर पूर्व जज सुधांशु धूलिया का बड़ा बयान
-Friday World September 28,2026 
देश में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर राजनीति तेज हो गई है, इसी बीच सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस सुधांशु धूलिया ने एक बड़ा संवैधानिक बयान देकर चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि, "किसी भी व्यक्ति की नागरिकता तय करना चुनाव आयोग का काम नहीं है।"

शुक्रवार को एक कार्यक्रम में बोलते हुए जस्टिस धूलिया ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने कई फैसलों में पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि नागरिकता तय करने का अधिकार सिर्फ केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आता है। चुनाव आयोग का काम वोटर लिस्ट बनाना और उसे शुद्ध रखना है, नागरिकता के सबूत मांगना नहीं।

बिहार SIR का क्या है मामला?

दरअसल इस बयान की जड़ जुलाई 2025 में है। तब बिहार में वोटर लिस्ट के SIR को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। उस बेंच में जस्टिस धूलिया और जस्टिस जॉयमाल्य बागची थे। तब उन्होंने SIR पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था, लेकिन चुनाव आयोग को कहा था कि आधार कार्ड, वोटर आईडी और राशन कार्ड जैसे सामान्य दस्तावेजों पर भी विचार करो, बहुत ज्यादा सख्त शर्तें मत लगाओ।

शुक्रवार को उसी टिप्पणी पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा, "उस समय मैं सिर्फ एक-दो दिन के लिए वेकेशन जज था। मेरे सामने पूरी दलीलें नहीं हुई थीं। किसी ने SIR पर रोक लगाने की मांग नहीं की थी, इसलिए मैंने रोक का आदेश नहीं दिया, लेकिन आधार समेत अन्य दस्तावेजों को लेकर अंतरिम आदेश दिया था।"

वोटर के लिए नागरिक होना जरूरी, पर...

जस्टिस धूलिया ने कहा कि हां, वोटर के लिए भारतीय नागरिक होना जरूरी है, यह संविधान का अनुच्छेद 326 कहता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि चुनाव आयोग हर वोटर से नागरिकता का सबूत मांगे। यह काम Citizenship Act, 1955 के तहत गृह मंत्रालय का है।

चुनाव आयोग में आंतरिक आपत्ति पर क्या बोले?

उनसे यह भी पूछा गया था कि रिपोर्ट्स के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार चुनाव आयोग के फैसलों पर रिकॉर्ड पर आपत्ति दर्ज कराई है।

इस पर जस्टिस धूलिया ने कहा कि अगर चुनाव आयोग के फैसले सिर्फ मुख्य चुनाव आयुक्त के स्तर पर ही लिए जा रहे हैं, तो यह एक गंभीर मामला है। हालांकि अभी पूरी स्थिति स्पष्ट नहीं है, इसलिए इस पर अभी से किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

गोवा के 97 वोटरों का मामला

गोवा में 97 वोटरों के नाम फाइनल लिस्ट में शामिल नहीं होने पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखा था। इस पर जस्टिस धूलिया ने कहा कि अदालत की अवमानना (Contempt) तभी मानी जाएगी जब यह साबित हो कि आदेश का जानबूझकर उल्लंघन हुआ है। हो सकता है कि चुनाव आयोग ने निर्देश दिए हों, लेकिन निचले स्तर के किसी अधिकारी ने उसका पालन न किया हो।

कुल मिलाकर, जस्टिस धूलिया का बयान एक बार फिर साफ करता है कि भारत में नागरिकता और मताधिकार दो अलग-अलग चीजें हैं और दोनों की सीमा संविधान ने तय की है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World September 28,2026 


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September 28, 2026

नाना पाटेकर ने नाती के कान में अज़ान दिलवाई? 120 मदरसा बच्चों को तोहफा, वायरल दावे ने मचाई सनसनी!

नाना पाटेकर ने नाती के कान में अज़ान दिलवाई? 120 मदरसा बच्चों को तोहफा, वायरल दावे ने मचाई सनसनी!
-Friday World September 28,2026 
बॉलीवुड के बेबाक और बेखौफ अभिनेता नाना पाटेकर एक बार फिर चर्चा में हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक दावे के मुताबिक, उन्होंने अपने नाती के जन्म पर पारंपरिक रस्मों की जगह एक अलग और दिल को छू लेने वाली पहल की है।

वायरल दावे में क्या कहा जा रहा है?

भारतीय मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म्स पर चल रही खबरों के अनुसार, नाना पाटेकर ने महाराष्ट्र के एक मदरसे के शिक्षक को अपने घर बुलाया और अपने नवजात नाती के कान में अज़ान दिलवाई। कहा जा रहा है कि उन्होंने अज़ान का अनुवाद जब समझा तो उन्हें एक अजीब सा सुकून मिला और इसी सुकून को वह अपने नाती की जिंदगी की पहली आवाज बनाना चाहते थे।

इतना ही नहीं, दावे में यह भी कहा गया है कि उन्होंने उस मदरसे के 120 से अधिक बच्चों के लिए नए कपड़े, बेहतरीन खाने का इंतजाम किया और जमीन पर बैठकर बच्चों के साथ खाना भी खाया।

नाना का कथित जवाब - "मैं अपने दम पर जीता हूँ"

जब इस फैसले को लेकर कुछ कट्टरपंथी हलकों से आलोचना की बात सामने आई तो नाना पाटेकर ने कथित तौर पर बेबाक अंदाज में कहा, "मैं अपने दम पर कमाता और जीता हूँ, मुझे किसी की परवाह नहीं।"

यह बयान उनके पुराने बयानों से मेल भी खाता है, जहां वे अक्सर कहते हैं कि इंसानियत धर्म से बड़ी है।

सच्चाई क्या है? फैक्ट-चेक जरूरी

आपको बता दें कि यह खबर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, लेकिन कई फैक्ट-चेक चैनलों ने इस तस्वीर और दावे को 
बेबुनियाद बताया है। नाना पाटेकर या उनके परिवार की ओर से अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ecab

सोशल मीडिया पर इस तरह की भावनात्मक खबरें अक्सर बिना पुष्टि के फैल जाती हैं। इसलिए किसी भी दावे को अंतिम सत्य मानने से पहले विश्वसनीय स्रोत से पुष्टि जरूर करें।

फिर भी, अगर यह दावा सच भी हो तो यह भारत की गंगा-जमुनी तहजीब और नाना पाटेकर की इंसानियत पसंद सोच का एक खूबसूरत उदाहरण है। जब कोई इंसान पूर्वाग्रह की पट्टी उतारकर सत्य और सुकून की तलाश में निकलता है, तो कोई भी आलोचना उसकी सोच को नहीं रोक सकती।

Sajjadali Nayani ✍ 
 Friday World September 28,2026 

#NanaPatekar #ViralNews #Azan #Bollywood #FactCheck #InterfaithHarmony #Madrasa #HumanityFirst #AzanControversy #GangaJamuniTehzeeb

Sunday, 27 September 2026

September 27, 2026

होर्मुज में बिना इजाजत घुसे तो खैर नहीं - ईरान का सख्त अल्टीमेटम, मिसाइल हमलों से थर्राया समंदर!

होर्मुज में बिना इजाजत घुसे तो खैर नहीं - ईरान का सख्त अल्टीमेटम, मिसाइल हमलों से थर्राया समंदर!
- Friday World September 28,2026 
फारस की खाड़ी में तनाव अब युद्ध के मुहाने पर पहुंच गया है। ईरान ने साफ कर दिया है कि बिना उसकी इजाजत के होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले किसी भी जहाज को बख्शा नहीं जाएगा और ऐसे जहाजों को ईरानी मिसाइल हमलों का निशाना बनाया जा रहा है।

क्या कहा ईरान ने?

ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि होर्मुज स्ट्रेट ईरान की संप्रभुता का हिस्सा है और यहां से गुजरने वाले हर जहाज को ईरानी नौसेना को सूचित करना होगा। जो जहाज अंतरराष्ट्रीय नियमों और ईरान के आदेश का पालन नहीं करेंगे, उनकी किस्मत साफ है।

पिछले दो हफ्तों में कम से कम 3 ऑयल टैंकरों पर कथित तौर पर ईरानी तटीय मिसाइलों से हमले के दावे किए जा रहे हैं। हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इन हमलों को लेकर चुप्पी साध रखी है।

होर्मुज स्ट्रेट क्यों है दुनिया की नब्ज?

होर्मुज स्ट्रेट सिर्फ 33 किलोमीटर चौड़ा है लेकिन दुनिया के कुल कच्चे तेल का 21% और LNG का 25% यहीं से गुजरता है। सऊदी अरब, कुवैत, ईराक, कतर और UAE का पूरा तेल निर्यात इसी रास्ते पर निर्भर है। अगर यह बंद होता है तो कच्चे तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर जा सकती है।

भारत के लिए भी यह बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत का 60% से ज्यादा कच्चा तेल इसी रास्ते से आता है।

ईरान की मिसाइल ताकत

ईरान ने होर्मुज के किनारे Hormuz-2, Khalij Fars, Qader और Abu Mahdi जैसी एंटी-शिप मिसाइलें तैनात कर रखी हैं। इनकी रेंज 300 KM से लेकर 1000 KM तक है और ये चलती हुई जहाज को भी निशाना बना सकती हैं। ईरान का कहना है कि ये मिसाइलें GPS जैमिंग प्रूफ हैं और किसी भी बड़े युद्धपोत को डुबो सकती हैं।

अमेरिका का जवाब

अमेरिका ने कहा है कि होर्मुज अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है और किसी भी देश को इसे बंद करने का अधिकार नहीं है। अमेरिका ने खाड़ी में अपने दो एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात किए हैं लेकिन जानकारों का कहना है कि ईरानी मिसाइलों के खतरे के कारण वे भी 1000 KM दूर से ही गश्त कर रहे हैं।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World September 28,2026 

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September 27, 2026

उज्जैन में शाही मस्जिद के पास सड़क चौड़ीकरण पर बवाल - अवैध अतिक्रमण हटाने गई टीम पर हंगामा, पुलिस ने दागे आंसू गैस के गोले!

उज्जैन में शाही मस्जिद के पास सड़क चौड़ीकरण पर बवाल - अवैध अतिक्रमण हटाने गई टीम पर हंगामा, पुलिस ने दागे आंसू गैस के गोले!
- Friday World September 28,2026 
                  प्रतीकात्मक तस्वीर 

मध्य प्रदेश के धार्मिक नगरी उज्जैन से बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां शाही मस्जिद के पास सड़क चौड़ीकरण के दौरान जमकर हंगामा हो गया। नगर निगम की टीम जब मस्जिद के कथित अवैध अतिक्रमण को हटाने पहुंची तो बड़ी संख्या में लोग विरोध में इकट्ठा हो गए और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। हालात बिगड़ते देख सुरक्षा बलों को आंसू गैस के गोले दागने पड़े।

क्या है पूरा मामला?

उज्जैन नगर निगम का कहना है कि महाकाल लोक के बाद शहर में ट्रैफिक बढ़ गया है, इसलिए मुख्य सड़कों को चौड़ा किया जा रहा है। इसी प्रोजेक्ट के तहत शाही मस्जिद के सामने सड़क की जमीन पर हुए अतिक्रमण को हटाने का नोटिस दिया गया था। निगम के अधिकारियों के मुताबिक मस्जिद की चहारदीवारी का कुछ हिस्सा सरकारी सड़क की जमीन पर बना हुआ है।

आज सुबह JCB और पुलिस बल के साथ टीम मौके पर पहुंची तो मस्जिद कमेटी और स्थानीय लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते भीड़ बढ़ गई और नारेबाजी शुरू हो गई। पुलिस ने लोगों को समझाने की कोशिश की लेकिन जब भीड़ उग्र होने लगी तो भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्का बल प्रयोग और आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा।

प्रशासन का पक्ष

उज्जैन कलेक्टर और SP ने कहा है कि यह कार्रवाई किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह शहर के विकास और ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए जरूरी है। उन्होंने बताया कि इस सड़क पर महाकाल मंदिर जाने वाले लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ लगती है। नोटिस पहले ही दिया जा चुका था और यह अतिक्रमण सरकारी नक्शे में दर्ज है। स्थिति अब नियंत्रण में है और भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

मस्जिद पक्ष का कहना

वहीं मस्जिद कमेटी का कहना है कि मस्जिद 200 साल पुरानी है और यह वक्फ की संपत्ति है, कोई अतिक्रमण नहीं है। बिना पूरी पैमाइश और कोर्ट के आदेश के कार्रवाई गलत है।

फिलहाल इलाके में गंभीर धारा ए लागू कर दी गई है और इंटरनेट सेवाएं कुछ समय के लिए बंद की गई हैं।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World September 28,2026 

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September 27, 2026

होर्मुज में अमेरिका की नाकेबंदी का दावा, पर हकीकत में ईरानी मिसाइल से 1200 KM दूर भागा USS बुश? सैटेलाइट तस्वीरों ने खोली पोल!

होर्मुज में अमेरिका की नाकेबंदी का दावा, पर हकीकत में ईरानी मिसाइल से 1200 KM दूर भागा USS बुश? सैटेलाइट तस्वीरों ने खोली पोल!
-Friday World September 28,2026 
अमेरिका और ईरान के बीच फारस की खाड़ी में एक बार फिर जबरदस्त तनाव का माहौल है। एक तरफ अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य में नाकेबंदी और ईरानी तेल टैंकरों को रोकने के दावे कर रहा है, वहीं सोशल मीडिया पर वायरल हो रही सैटेलाइट तस्वीरें कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं।

दावा किया जा रहा है कि ईरान की एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइल को देखते ही अमेरिका का सुपर एयरक्राफ्ट कैरियर USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश को 1200 किलोमीटर की दूरी बनानी पड़ी और वह दुम दबाकर पीछे हट गया।

क्या है वायरल सैटेलाइट तस्वीरों में?

टेलीग्राम और X (पूर्व ट्विटर) पर शेयर की जा रही सैटेलाइट इमेजरी के मुताबिक, ईरान के होर्मोजगन प्रांत के बंदर अब्बास के पास ईरानी तटीय मिसाइल बैटरी से Hormuz-2 एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइल दागी गई। यह मिसाइल 30 किमी की ऊंचाई तक गई और Mach 4 की स्पीड से USS बुश की ओर बढ़ी।

तस्वीरों में दिखाया जा रहा है कि मिसाइल के प्रोजेक्टेड इम्पैक्ट ज़ोन को देखकर अमेरिकी कैरियर स्ट्राइक ग्रुप ने अपना कोर्स 240 डिग्री दक्षिण-पश्चिम की ओर बदल दिया और वह ओमान की मुसंदम प्रायद्वीप की ओर खिसक गया। कुछ ओपन सोर्स इंटेलिजेंस अकाउंट्स का दावा है कि कैरियर ने ईरानी तट से 1200 KM की दूरी बना ली है।

होर्मुज क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

होर्मुज जलडमरूमध्य सिर्फ 39 KM चौड़ा है, लेकिन दुनिया का 20% तेल यहीं से गुजरता है। इसे दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण चोकपॉइंट माना जाता है। अमेरिका यहां Freedom of Navigation के नाम पर अपने युद्धपोत तैनात रखता है, जबकि ईरान इसे अपना रणनीतिक हथियार मानता है।

अमेरिका की नाकेबंदी का दावा कितना सच?

पेंटागन ने पिछले हफ्ते कहा था कि वह ईरान से जुड़े प्रतिबंधित तेल ले जा रहे जहाजों को रोकेगा। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि USS बुश जैसे कैरियर को भी ईरान की नई मिसाइलों से खतरा है। ईरान के पास अब Khalij Fars, Hormuz-2 और Fattah जैसी हाइपरसोनिक मिसाइलें हैं जो 1500 KM तक एयरक्राफ्ट कैरियर को निशाना बना सकती हैं।

सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि 1200 KM की दूरी का मतलब है कि अमेरिकी लड़ाकू विमानों की स्ट्राइक रेंज भी कम हो जाएगी। F-18 की कॉम्बैट रेंज 700 KM है, इसलिए कैरियर को दूर रहने पर उसे हवाई हमले के लिए टैंकर सपोर्ट लेना पड़ेगा।

आधिकारिक पुष्टि नहीं, लेकिन संकेत साफ हैं

अमेरिकी नौसेना ने अभी तक इस घटना पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। लेकिन सैटेलाइट तस्वीरें अगर सच हैं तो यह अमेरिकी नेवी के लिए बड़ा झटका है। इससे पहले भी यमन के हूतियों ने लाल सागर में अमेरिकी जहाजों को पीछे हटने पर मजबूर किया था।

ईरान की रणनीति साफ है - सीधी जंग नहीं, बल्कि एंटी-एक्सेस/एरिया डिनायल (A2/AD) से अमेरिका को खाड़ी से दूर रखो।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World September 28,2026 

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September 27, 2026

पकौड़ा बेचो के बाद अब 'टैक्सी चलाओ' - डिप्टी CM ब्रजेश पाठक के बयान पर बवाल, युवा बोले - तेल आसमान पर, सवारी कहाँ से लाएं?

पकौड़ा बेचो के बाद अब 'टैक्सी चलाओ' - डिप्टी CM ब्रजेश पाठक के बयान पर बवाल, युवा बोले - तेल आसमान पर, सवारी कहाँ से लाएं?
- Friday World September 28,2026 
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक का एक बयान इस समय सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है और विपक्ष को बैठे-बिठाए मुद्दा मिल गया है। लखनऊ में 'भारत टैक्सी' सेवा के शुभारंभ कार्यक्रम में उन्होंने कहा - "नौकरी के चक्कर में मत पड़ो, ई-रिक्शा / टैक्सी ले लो, खूब चलाओ और खूब पैसा कमाओ।"

सरकार इसे स्वरोजगार बता रही है, लेकिन बेरोजगार युवा इसे 'पकौड़ा बेचो' के बाद 'टैक्सी चलाओ' का नया वर्जन बता रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?

23 सितंबर को लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी, कानपुर और प्रयागराज में सहकारिता मंत्रालय की 'भारत टैक्सी' योजना लॉन्च हुई। यह ड्राइवर-ओनर मॉडल है जिसमें कमीशन नहीं कटेगा और कमाई सीधे ड्राइवर के खाते में जाएगी। इसी मंच से ब्रजेश पाठक ने युवाओं से इस योजना से जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा - "अपनी गाड़ी, अपना ड्राइवर और कमाई भी अपने घर में रहेगी।"

इस बयान का वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर अलग एंगल से वायरल हो गया, जिसमें लग रहा है कि सरकार युवाओं को सरकारी नौकरी की जगह टैक्सी चलाने की सलाह दे रही है। ABP Live के मुताबिक इस पर सपा सांसद पुष्पेंद्र सरोज समेत कई नेताओं ने निशाना साधा है।

युवाओं के 3 बड़े सवाल - जिनका जवाब सरकार को देना चाहिए

 1. पेट्रोल-डीजल-CNG आसमान पर तो कमाई कैसे?
देश में पेट्रोल करीब 100-110 रुपये, डीजल 95-98 रुपये और CNG 80-85 रुपये किलो के पार है। ई-रिक्शा की बैटरी भी 40-50 हजार की आती है। ऐसे में रोज 500-700 कमाने के लिए 300 रुपये का तेल/CNG फूंकना पड़ेगा, बचेगा क्या?

 2. बेरोजगारी रिकॉर्ड स्तर पर
CMIE के आंकड़ों के मुताबिक युवा बेरोजगारी अब तक के उच्च स्तर पर है। युवा कह रहे हैं कि इंजीनियरिंग, B.A., M.A. करके क्या टैक्सी चलाने के लिए पढ़ाई की थी?

 3. ट्रेन-बस ही खाली तो टैक्सी में कौन बैठेगा?
वायरल पोस्ट में यूजर्स लिख रहे हैं - "2014 से पहले ट्रेन और सरकारी बस में करंट टिकट नहीं मिलता था, आज जेब में पैसा नहीं है इसलिए ट्रेन-बस खाली दौड़ रही हैं, तो टैक्सी में सवारी कौन करेगा और पकौड़े कौन खाएगा?"

सरकार का पक्ष क्या है?

सरकार का कहना है कि भारत टैक्सी से अब तक देश में 40 हजार ड्राइवर जुड़ चुके हैं और पिछले 6 महीने में 100 करोड़ से ज्यादा की कमाई सीधे उनके खातों में गई है। यह नौकरी का विकल्प नहीं, स्वरोजगार का एक अतिरिक्त अवसर है।

लेकिन विपक्ष कह रहा है कि स्वरोजगार के नाम पर सरकार अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है। असली रोजगार तो सरकारी भर्ती और फैक्ट्रियों से आएगा, टैक्सी चलाने से नहीं।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World September 28,2026 

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