October 12, 2026
MBS का किला दरक रहा है - अमेरिका से पाकिस्तान तक सबने खींचे हाथ, यमन के अंसारुल्लाह ने सऊदी अरब को बनाया जंग का मैदान
MBS का किला दरक रहा है - अमेरिका से पाकिस्तान तक सबने खींचे हाथ, यमन के अंसारुल्लाह ने सऊदी अरब को बनाया जंग का मैदान
-Friday World Oct 12,2026
सना पर हमले के बाद अंसारुल्लाह का बड़ा ऐलान - मक्का-मदीना को छोड़कर पूरा सऊदी अरब अब युद्ध क्षेत्र, क्या आले सऊद के अंत की शुरुआत हो गई?
11 साल से यमन पर बम बरसा रहे आले सऊद की हुकूमत आज खुद अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। सना इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सऊदी बमबारी के बाद अंसारुल्लाह ने वो ऐलान कर दिया जिसका डर रियाद को सालों से था। उन्होंने साफ कह दिया है कि मक्का और मदीना को छोड़कर पूरा सऊदी अरब अब जंग का मैदान है। दुनिया की सभी एयरलाइंस को चेतावनी दी गई है कि वे इन दो पवित्र शहरों के अलावा सऊदी के किसी भी एयरपोर्ट के लिए फ्लाइट बुक न करें।
यह लड़ाई शिया-सुन्नी की नहीं है, यह जालिम और मजलूम की लड़ाई है।
2015 से जारी है जुल्म की दास्तान
मार्च 2015 से सऊदी अरब ने खाड़ी देशों, अमेरिका और यूरोप के हथियारों और खुफिया मदद से दुनिया के सबसे गरीब अरब देश यमन पर बमबारी शुरू की। इस 11 साल की जंग में क्या-क्या नहीं किया गया।
यमन के सभी इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स को मलबे में बदल दिया गया। समंदर के पोर्ट्स पर कब्जा कर लिया गया ताकि दवा और खाने का एक दाना भी अंदर न जा सके। यमनी एयरवेज के जहाजों को रनवे पर ही बमबारी करके तबाह कर दिया गया। स्कूल, अस्पताल, मस्जिदें, बाजार और कब्रिस्तान तक सऊदी बमबारी से नहीं बचे।
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक इस ब्लॉकेड और बमबारी से अब तक लगभग 4 लाख यमनी शहीद हो चुके हैं, जिनमें ज्यादातर बच्चे और औरतें हैं। लेकिन तब दुनिया को सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर याद नहीं आया, तब किसी को बेगुनाहों की मौत पर अफसोस नहीं हुआ।
अब बाजी पलट गई है
यमन के अंसारुल्लाह ने इन 11 सालों में खुद को खामोशी से मजबूत किया। ईरान की मदद से नहीं, बल्कि अपने हौसले से। और सना पर ताजा हमले के बाद उन्होंने जवाबी कार्रवाई शुरू की।
पहले सऊदी अरामको के ऑयल रिफाइनरियों को ड्रोन और मिसाइलों से तबाह किया, जिससे सऊदी की आधी तेल सप्लाई रुक गई। अब निशाने पर सऊदी के एयरपोर्ट्स हैं - जेद्दा, रियाद, आभा, जाजान। जब सऊदी के एयरपोर्ट जल रहे हैं तो अब दुनिया को अचानक सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर की चिंता होने लगी है।
यह दोहरा मापदंड क्यों? जब यमन के बच्चे भूख से मर रहे थे तब दुनिया कहां थी?
MBS अकेले पड़ गए - कोई मदद को तैयार नहीं
सबसे बड़ी खबर रियाद के महल से आ रही है। मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने इस जंग से निकलने के लिए हर दरवाजा खटखटाया है।
सूत्रों के मुताबिक MBS ने अमेरिका से गुहार लगाई, इजराइल से मदद मांगी, तुर्की को मनाने की कोशिश की और पाकिस्तान से भी सैन्य मदद की भीख मांगी। लेकिन सबने साथ छोड़ दिया है।
अमेरिका अब यमन में नया फ्रंट नहीं खोलना चाहता। इजराइल खुद गाजा में फंसा हुआ है। तुर्की ने साफ कह दिया है कि वह अरबों की आपसी जंग में नहीं पड़ेगा। और पाकिस्तान ने भी अपनी सेना भेजने से इनकार कर दिया है। अरब का सबसे अमीर देश, जिसके पास दुनिया के सबसे महंगे अमेरिकी हथियार हैं, आज अरब के सबसे गरीब देश के सामने बेबस खड़ा है।
महल के अंदर खूनी रंजिश
बाहर की जंग तो एक तरफ, अंदर महल की दीवारें भी दरकने लगी हैं। रियाद से आ रही खबरों के मुताबिक शाही परिवार के अंदर MBS के खिलाफ गुस्सा बढ़ रहा है। कहा जा रहा है कि MBS ने अपनी जिद और यमन जंग की वजह से हुकूमत की नींव में ही नमक डाल दिया है।
देश का खजाना जंग में लुट रहा है, NEOM जैसा सपना धराशायी हो रहा है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सऊदी की साख गिर रही है। ऐसे में शाही परिवार में बदलाव की बातें तेज हो गई हैं। क्या जल्द ही सऊदी में बड़ी तख्तापलट होने वाली है? यह सवाल अब रियाद की गलियों में आम है।
साफ है, यह सिर्फ शुरुआत है। जब तक यमन पर जुल्म बंद नहीं होगा, तब तक सऊदी में तेल के कुएं और एयरपोर्ट सुलगते रहेंगे। एक मजलूम कौम ने एक जालिम सल्तनत को घुटनों पर ला दिया है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World Oct 12,2026
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