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Monday, 13 April 2026

कनाडा ने अमेरिका को दिया बड़ा झटका!ईरान-अमेरिका युद्धविराम के बीच रक्षा बजट का 70% अब अमेरिकी कंपनियों को नहीं जाएगा

कनाडा ने अमेरिका को दिया बड़ा झटका!ईरान-अमेरिका युद्धविराम के बीच रक्षा बजट का 70% अब अमेरिकी कंपनियों को नहीं जाएगा
-Friday World-April 13,2026 
दुनिया के सबसे करीबी सहयोगी देशों में से एक कनाडा ने अमेरिका के लिए अनपेक्षित आर्थिक और रणनीतिक झटका दिया है। ईरान और अमेरिका के बीच दो सप्ताह का युद्धविराम चल रहा है, पाकिस्तान में हुई लंबी बातचीत बेनतीजा रही है, और खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर है—इसी बीच कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने ऐलान किया कि अब कनाडा अपना रक्षा बजट का 70 प्रतिशत अमेरिकी कंपनियों को नहीं भेजेगा। 

यह फैसला न सिर्फ अमेरिकी रक्षा उद्योग के लिए बड़ा नुकसान है, बल्कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए भी राजनीतिक और आर्थिक रूप से बड़ा झटका माना जा रहा है। कार्नी ने स्पष्ट शब्दों में कहा— “हमारे सैन्य बजट का हर डॉलर का 70 सेंट अमेरिका को भेजने के दिन अब खत्म हो गए।” इस घोषणा पर लिबरल पार्टी के राष्ट्रीय सम्मेलन में खड़े होकर तालियां बजीं।

ईरान-अमेरिका संघर्ष की पृष्ठभूमि
फरवरी 2026 में अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान पर बड़े हमले किए थे। इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर **आयतुल्लाह अली खामेनी** समेत कई उच्च अधिकारी मारे गए। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की, जिससे पूरे क्षेत्र में भयंकर युद्ध छिड़ गया। 

40 दिनों से अधिक चले इस संघर्ष में दोनों पक्षों के हथियारों का भारी नुकसान हुआ। अमेरिका और इजरायल को अपने रक्षा भंडार की कमी महसूस हुई, जिसके कारण उनका रक्षा बजट बढ़ाना पड़ा। ईरान की तरफ से भी मिसाइल और ड्रोन हमलों में भारी क्षति हुई। 

अप्रैल 2026 में पाकिस्तान की मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच इस्लामाबाद में लंबी बातचीत हुई, लेकिन कोई ठोस समझौता नहीं हो सका। फिलहाल दो सप्ताह का युद्धविराम लागू है, जो 22 अप्रैल तक चलने वाला है। इस दौरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और परमाणु मुद्दे पर चर्चा का प्रयास जारी है, लेकिन दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं।

इसी संकटपूर्ण माहौल में कनाडा का यह कदम अमेरिका के लिए अतिरिक्त चुनौती बन गया है।

कनाडा का नया रक्षा औद्योगिक रणनीति: ‘Buy Canadian’
प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने मॉन्ट्रियल में लिबरल पार्टी के सम्मेलन में कहा कि कनाडा अब अपनी रक्षा खरीद का बड़ा हिस्सा घरेलू उद्योग को देगा। पहले कनाडा अपना लगभग 70 प्रतिशत रक्षा खर्च अमेरिकी कंपनियों पर करता था। अब यह प्रतिशत उलट जाएगा—70 प्रतिशत खर्च कनाडाई कंपनियों और गैर-अमेरिकी स्रोतों पर होगा।

इस फैसले के मुख्य उद्देश्य:
- स्थानीय उद्योग को मजबूत करना: कनाडा अपनी सैन्य क्षमता को स्वदेशी उत्पादन से बढ़ाना चाहता है।
- रोजगार सृजन: अगले 10 वर्षों में 1,25,000 नए उच्च वेतन वाले रोजगार पैदा करना।
- आत्मनिर्भरता: अमेरिका पर निर्भरता कम करके रणनीतिक स्वायत्तता हासिल करना।
- निर्यात बढ़ाना: कनाडाई रक्षा उत्पादों का निर्यात 50 प्रतिशत बढ़ाना।

कार्नी सरकार ने पहले ही रक्षा खर्च को GDP का 2 प्रतिशत करने का लक्ष्य पूरा कर लिया है और 2035 तक इसे 5 प्रतिशत तक ले जाने की योजना है। नई रक्षा औद्योगिक रणनीति के तहत अगले 10 वर्षों में 180 बिलियन डॉलर की खरीदारी और 290 बिलियन डॉलर की पूंजी निवेश के अवसर पैदा होंगे।

 क्यों लिया कनाडा ने यह कदम?
कनाडा लंबे समय से अमेरिकी रक्षा उपकरणों पर निर्भर रहा है। लेकिन ट्रंप प्रशासन के दौरान व्यापार तनाव बढ़ा। ट्रंप ने कनाडा पर टैरिफ की धमकियां दीं और दोनों देशों के बीच संबंधों में खटास आई। 

ईरान युद्ध ने वैश्विक स्तर पर हथियारों की मांग बढ़ा दी। अमेरिका को अपने सहयोगियों से ज्यादा सपोर्ट की जरूरत है, लेकिन कनाडा अब कह रहा है— “हम अपनी सुरक्षा के लिए खुद मजबूत बनेंगे, किसी और पर आश्रित नहीं रहेंगे।”

यह फैसला न सिर्फ आर्थिक है, बल्कि राजनीतिक संदेश भी है। कनाडा NATO का सदस्य है और ट्रंप अक्सर NATO देशों को ज्यादा खर्च करने के लिए दबाव डालते रहे हैं। अब कनाडा कह रहा है कि हम खर्च तो बढ़ा रहे हैं, लेकिन पैसा अमेरिका को नहीं, बल्कि अपने यहां लगाएंगे।

 अमेरिका पर क्या असर पड़ेगा?
अमेरिकी रक्षा उद्योग सऊदी अरब, ऑस्ट्रेलिया, खाड़ी देशों और NATO सहयोगियों पर काफी निर्भर है। कनाडा से आने वाला बड़ा ऑर्डर इन कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण था। 

अगर कनाडा जैसे अन्य सहयोगी भी इसी रास्ते पर चले, तो अमेरिकी रक्षा निर्यात को बड़ा झटका लग सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ट्रंप प्रशासन की “America First” नीति के खिलाफ एक स्पष्ट चुनौती है।

 वैश्विक रक्षा समीकरण कैसे बदलेंगे?
-NATO पर असर: NATO में सदस्य देशों का रक्षा खर्च GDP का 2 प्रतिशत होना चाहिए। कनाडा ने इसे पूरा किया, लेकिन खर्च का तरीका बदल दिया।
- खाड़ी देश: सऊदी अरब और अन्य खाड़ी राष्ट्र अभी भी अमेरिका से हथियार खरीदते हैं, लेकिन अगर कनाडा जैसा मॉडल सफल हुआ तो अन्य देश भी स्वदेशी उत्पादन पर जोर दे सकते हैं।
- भारत और अन्य उभरते देश: कई देश पहले से ही आत्मनिर्भर रक्षा नीति अपना रहे हैं। कनाडा का यह कदम वैश्विक रुझान को और मजबूत कर सकता है।

 आगे क्या होगा?
अभी युद्धविराम नाजुक है। अगर ईरान-अमेरिका के बीच फिर तनाव बढ़ा तो वैश्विक हथियार बाजार और गर्म हो जाएगा। कनाडा का फैसला दिखाता है कि सहयोगी देश भी अब अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

मार्क कार्नी की यह घोषणा कनाडा को “मजबूत कनाडा” बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा— “हम कनाडाई स्टील, कनाडाई एल्युमिनियम और कनाडाई विशेषज्ञता से अपनी सुरक्षा बनाएंगे।”

दुनिया अब देख रही है कि ट्रंप प्रशासन इस चुनौती का कैसे जवाब देता है। क्या अन्य NATO देश भी इसी राह पर चलेंगे? या अमेरिका कोई नया समझौता करके स्थिति संभालेगा?

यह घटनाक्रम साबित करता है कि आज की दुनिया में कोई भी देश दूसरे पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहता। आर्थिक स्वायत्तता और रणनीतिक स्वतंत्रता अब हर बड़े देश की प्राथमिकता बन गई है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-April 13,2026