-Friday World-April 21,2026
वॉशिंगटन डीसी में शनिवार रात की वह इमरजेंसी मीटिंग अब दुनिया भर में सुर्खियों में है। पूर्व सीआईए अधिकारी लैरी जॉनसन ने दावा किया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इरान पर परमाणु हमले के लिए न्यूक्लियर कोड इस्तेमाल करने को पूरी तरह तैयार हो चुके थे। लेकिन अमेरिकी सेना के प्रमुख जनरल डैन केन ने उन्हें सख्ती से रोका। दोनों के बीच इतनी तीखी बहस हुई कि जनरल गुस्से में सिचुएशन रूम से बाहर निकल गए। यह घटना न सिर्फ अमेरिकी सिविल-मिलिट्री रिलेशंस पर सवाल खड़े कर रही है, बल्कि विश्व शांति के लिए भी बड़ा खतरा बता रही है।
वॉल स्ट्रीट जर्नल के रिपोर्ट के मुताबिक, जब इरान ने अमेरिकी विमानों को मार गिराने की खबर आई तो सिचुएशन रूम में सन्नाटा छा गया। फिर ट्रंप भड़क उठे। उन्होंने अपने सहयोगियों पर चीख-चीखकर गुस्सा उतारा। इतने गुस्से में थे कि उनके एड्स को उन्हें कुछ देर के लिए रूम से बाहर ले जाना पड़ा। लैरी जॉनसन ने 'जजिंग फ्रीडम' पॉडकास्ट में खुलासा किया, “ट्रंप न्यूक्लियर कोड इस्तेमाल करने के लिए तैयार थे। जनरल डैन केन खड़े हो गए और साफ कहा — ‘नहीं’। उन्होंने अपनी मिलिट्री अथॉरिटी का हवाला दिया। कमरे में भयंकर तनाव था, दोनों के बीच उग्र बहस हुई।”
यह दावा सिर्फ अफवाह नहीं लगता। कई रिपोर्ट्स में ट्रंप की अस्थिरता और इरान के साथ बढ़ते तनाव का जिक्र है। जनरल केन ने कथित तौर पर कहा था कि यह कदम “बहुत घृणित” होगा। उन्होंने ट्रंप को समझाने की कोशिश की कि परमाणु हमला न सिर्फ इरान बल्कि पूरे क्षेत्र को तबाह कर देगा। लेकिन ट्रंप नहीं माने। आखिरकार जनरल गुस्से में बाहर चले गए। यह घटना अमेरिकी इतिहास में शायद पहली बार ऐसी है जहां सेनाध्यक्ष ने राष्ट्रपति के परमाणु आदेश को सीधे चुनौती दी हो।
सिचुएशन रूम का वह ड्रामेटिक पल
कल्पना कीजिए — व्हाइट हाउस के अंडरग्राउंड सिचुएशन रूम में टेंशन हवा में तैर रहा है। इरान ने अमेरिकी विमानों को मार गिराया है। ट्रंप धधक रहे हैं। वे चीख रहे हैं, स्टाफ पर बरस रहे हैं। 1979 के ईरानी होस्टेज क्राइसिस की याद उन्हें सता रही है। वे बार-बार पूछ रहे हैं — “हम क्या कर रहे हैं? हम क्यों चुप हैं?” फिर अचानक न्यूक्लियर ऑप्शन पर चर्चा शुरू। ट्रंप कोड इस्तेमाल करने को तैयार। लेकिन जनरल डैन केन खड़े हो जाते हैं। उनका एक शब्द — “नो” — पूरे कमरे को हिला देता है।
लैरी जॉनसन के अनुसार, यह “ब्लो-अप” इतना तीव्र था कि ट्रंप के एड्स को उन्हें शांत करने के लिए बाहर ले जाना पड़ा। जनरल केन ने स्पष्ट कहा — यह कदम न सिर्फ गलत है बल्कि नैतिक रूप से घृणित भी। उन्होंने ट्रंप को समझाया कि परमाणु हथियार का इस्तेमाल दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की आग में झोंक देगा।
यह घटना वॉल स्ट्रीट जर्नल की उस रिपोर्ट से जुड़ी लगती है जिसमें कहा गया था कि मिलिट्री एडवाइजर्स ने ट्रंप को इरान रेस्क्यू मिशन के दौरान सिचुएशन रूम से बाहर रखा था। उनका डर था कि ट्रंप की अस्थिरता मिशन को खतरे में डाल सकती है। अब यही अस्थिरता न्यूक्लियर लेवल पर पहुंच गई।
इरान का जवाब: “हम नई पत्तियां खोलने को तैयार हैं”
दूसरी तरफ इरान भी चुप नहीं बैठा। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर ग़ालिबाफ (जिन्हें गुजराती रिपोर्ट में ‘गालिबक’ कहा गया) ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर साफ लिखा — “ट्रंप युद्धविराम का उल्लंघन कर इरान से आत्मसमर्पण चाहते हैं, लेकिन हम धमकियों के साए में बातचीत स्वीकार नहीं करेंगे। हम युद्ध के मैदान पर नई पत्तियां खोलने को पूरी तरह तैयार हैं।”
ग़ालिबाफ ने कहा कि अमेरिका इरान को घुटनों पर लाना चाहता है, लेकिन इरान ने पिछले दो हफ्तों में नई रणनीति तैयार कर ली है। अब सवाल यह है — इरान के पास क्या “नई पत्तियां” हैं?
कुछ विश्लेषक मानते हैं कि इरान अगले कदम में:
- **परमाणु परीक्षण** कर सकता है और खुद को दुनिया की 10वीं परमाणु शक्ति घोषित कर सकता है।
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह बंद कर तेल आपूर्ति को ठप कर सकता है।
- या फिर प्रॉक्सी ग्रुप्स (हिजबुल्लाह, हूती, हमास) के जरिए बड़े पैमाने पर हमले तेज कर सकता है।
इरान पहले ही कह चुका है कि वह “स्टोन एज” में वापस भेजने की धमकी का जवाब देने को तैयार है। ग़ालिबाफ का बयान साफ संदेश है — हम आत्मसमर्पण नहीं करेंगे, बल्कि जवाब देंगे।
क्या ट्रंप की यह हरकत अमेरिकी लोकतंत्र के लिए खतरा है?
यह घटना सिर्फ इरान-अमेरिका टकराव नहीं, बल्कि अमेरिकी संवैधानिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाती है। क्या राष्ट्रपति को परमाणु बटन पर अकेला फैसला लेने का अधिकार है? जनरल डैन केन का “नो” क्या मिलिट्री की स्वतंत्रता का प्रतीक है या फिर सैन्य तानाशाही की शुरुआत?
विश्लेषक कहते हैं कि ट्रंप की अस्थिरता पहले भी चर्चा में रही है। 2020 में भी मिलिट्री लीडर्स ने उनके कुछ आदेशों पर सवाल उठाए थे। अब 2026 में इरान संकट के बीच यह घटना दोबारा साबित करती है कि ट्रंप की गुस्सैल प्रवृत्ति राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाल सकती है।
दुनिया भर के नेता चिंतित हैं। यूरोपीय यूनियन, चीन और रूस ने चुप्पी साध रखी है, लेकिन पर्दे के पीछे कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। क्या इरान अब परमाणु क्लब में शामिल हो जाएगा? क्या ट्रंप फिर से “मैक्सिमम प्रेशर” कैंपेन शुरू करेंगे?
आगे क्या?
अभी युद्धविराम की बातें चल रही हैं, लेकिन दोनों तरफ से धमकियां जारी हैं। ट्रंप ने इरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। इरान ने जवाब में कहा — हम धमकियों में नहीं मानेंगे।
लैरी जॉनसन का दावा अगर सही है तो यह घटना इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाएगी। एक राष्ट्रपति जो परमाणु बटन दबाने को तैयार था और एक जनरल जो खड़े होकर “नहीं” बोल गया।
यह कहानी सिर्फ दो नेताओं की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा की है। अगर इरान ने परमाणु परीक्षण कर दिया तो मध्य पूर्व में आग लग जाएगी। और अगर ट्रंप ने फिर से कोशिश की तो अमेरिका खुद अपने लोकतंत्र को चुनौती देगा।
ट्रंप-इरान टकराव अब सिर्फ राजनयिक नहीं, बल्कि परमाणु स्तर का हो चुका है। जनरल डैन केन ने दुनिया को एक बड़े संकट से बचाया हो सकता है, लेकिन सवाल बाकी हैं — अगली बार कौन रोकेगा? इरान की “नई पत्तियां” क्या होंगी? और अमेरिका-इरान के बीच यह खेल कब खत्म होगा?
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 21,2026