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Friday, 17 April 2026

पूर्व भाजपा अध्यक्ष ने कांग्रेस का हाथ पकड़ा, सदन गवाह – विपक्ष में जश्न, सत्ता पक्ष में सस्पेंस!

पूर्व भाजपा अध्यक्ष ने कांग्रेस का हाथ पकड़ा, सदन गवाह – विपक्ष में जश्न, सत्ता पक्ष में सस्पेंस!
-Friday World-April 17,2026
नई दिल्ली, 17 अप्रैल 2026। संसद का गलियारा आजकल राजनीति का सबसे बड़ा थिएटर बन गया है। एक तरफ महिला आरक्षण बिल और सीमांकन (डेलिमिटेशन) पर जोरदार बहस चल रही है, दूसरी तरफ अचानक ऐसा उलटफेर हो गया कि सारे भाजपाई सांसद आँखें फाड़े देखते रह गए। 

जेपी नड्डा, भाजपा के दिग्गज नेता और पूर्व अध्यक्ष, अचानक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का हाथ थाम लेते हैं। राज्यसभा में सीढ़ियों पर खरगे साहब को सहारा देते हुए नड्डा उन्हें उनकी सीट तक छोड़ने पहुँच जाते हैं। वीडियो वायरल हो गया। सोशल मीडिया पर तूफान मच गया। कोई कह रहा है – “अरे वाह, राजनीति में भी इंसानियत बाकी है!” तो कोई व्यंग्य कस रहा है – “नड्डा जी, अब कांग्रेस में स्वागत है या बस हाथ मिलाने का ड्रामा?”

देखिए, यह दृश्य सच में दिल छू लेने वाला था। खरगे साहब सीढ़ियाँ उतर रहे थे, नड्डा जी ने आगे बढ़कर उनका हाथ पकड़ा और पूरे सम्मान से नीचे तक पहुँचाया। जैसे कोई छोटा भाई बड़े भाई का ख्याल रख रहा हो। लेकिन राजनीति में छोटी-छोटी बातें भी बड़े संदेश दे जाती हैं। खासकर जब सदन में दोनों पार्टियाँ एक-दूसरे पर चढ़ाई कर रही हों – महिला कानून को लेकर खरगे जी कह रहे हों कि “अभी लागू करो”, और नड्डा जी जवाब दे रहे हों कि “संविधान के अनुसार सही समय पर”।

फिर अचानक यह “हाथ थामना”! भाजपा के सांसद तो स्तब्ध रह गए। कोई तो फुसफुसाया – “सर, क्या हुआ? क्या हमारी लाइन बदल गई?” विपक्षी बेंच पर मुस्कानें फैल गईं। कुछ कांग्रेसियों ने तो ताली भी बजाई होगी (अंदर ही अंदर)। 

यह घटना ठीक उसी वक्त हुई जब संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम और इससे जुड़े सीमांकन बिल पर तीखी बहस चल रही थी। विपक्ष कह रहा है कि बिल में देरी हो रही है, OBC, दलित और आदिवासी हितों की अनदेखी हो रही है। भाजपा का पक्ष है कि सही तरीके से, जनगणना और सीमांकन के बाद इसे लागू किया जाएगा, ताकि महिलाओं को वाकई न्याय मिले। 

लेकिन नड्डा-खरगे वाला यह पल राजनीति की सारी कटुता को पल भर के लिए भुला गया। एक तरफ जहाँ सदन में आरोप-प्रत्यारोप के तीर चल रहे थे, वहीं गलियारे में यह “हाथ का सहारा” देखकर लग रहा था मानो दोनों नेता कह रहे हों – “सदन में लड़ाई, लेकिन इंसानियत अलग।”

व्यंग्य की बात यह है कि सोशल मीडिया पर अब मेम्स बनने लगे हैं। कोई लिख रहा है – “नड्डा जी ने कांग्रेस का हाथ थामा, क्या अब ‘इंडिया’ गठबंधन में शामिल होने का संकेत है?” दूसरे का कमेंट – “भाजपा वाले घबराओ मत, बस खरगे जी बुजुर्ग हैं, सम्मान दिया। लेकिन अगर अगली बार राहुल जी का हाथ थाम लिया तो समझ जाना पार्टी चेंज हो गई!” 

सच तो यह है कि भारतीय राजनीति में ऐसे पल विरले ही आते हैं। ज्यादातर समय तो टीवी डिबेट में चीख-पुकार, सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग और सदन में वॉकआउट ही दिखता है। लेकिन नड्डा जी का यह छोटा सा जेस्चर याद दिलाता है कि नेता भी इंसान हैं। खरगे साहब की उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए नड्डा जी का यह व्यवहार शिष्टाचार की मिसाल बन गया। 

फिर भी सवाल उठता है – क्या यह सिर्फ शिष्टाचार था या कोई गहरी रणनीति? क्योंकि महिला आरक्षण और सीमांकन बिल पर अभी लंबी बहस बाकी है। लोकसभा में एनडीए के पास पूर्ण बहुमत नहीं है, इसलिए विपक्ष का सहयोग या अनुपस्थिति दोनों ही अहम हो सकते हैं। शायद नड्डा जी का यह “हाथ” एक संदेश भी था – “हम विरोध कर सकते हैं, लेकिन सम्मान के साथ।”

राजनीतिक विश्लेषक अब इस घटना को अलग-अलग कोण से देख रहे हैं। कुछ कहते हैं कि यह भारतीय लोकतंत्र की सुंदरता है, जहाँ मतभेद के बावजूद व्यक्तिगत सम्मान बना रहता है। दूसरे तंज कसते हैं – “जब बिल पास करने में दिक्कत हो तो ऐसे जेस्चर बढ़ जाते हैं।”

जो भी हो, यह वीडियो अब वायरल हो चुका है। लोग शेयर कर रहे हैं – कुछ प्रशंसा में, कुछ मज़ाक में। भाजपा कार्यकर्ता शायद थोड़े असहज महसूस कर रहे होंगे, क्योंकि उनका पूर्व अध्यक्ष अचानक “कांग्रेस का हाथ” थामता दिख रहा है। लेकिन हकीकत यह है कि नड्डा जी ने कोई पार्टी नहीं बदली, बस एक बुजुर्ग साथी को सीढ़ी उतरने में मदद की। 

फिर भी व्यंग्य तो बनता ही है। कल को अगर कोई भाजपा सांसद पूछे – “सर, अगली बार राहुल गांधी का हाथ थामेंगे क्या?” तो नड्डा जी शायद मुस्कुराकर कह दें – “राजनीति में हाथ थामना अलग बात है, वोट थामना अलग।”

अंत में, यह छोटा सा पल हमें याद दिलाता है कि संसद सिर्फ लड़ाई का मैदान नहीं, बल्कि लोकतंत्र का मंदिर भी है। जहाँ गुस्सा, बहस और आरोप तो चलते रहते हैं, लेकिन कभी-कभी इंसानियत भी झलक जाती है। 

नड्डा जी का यह जेस्चर चाहे जितना भी सराहनीय हो, लेकिन असली सवाल यह है – महिला आरक्षण और सीमांकन बिल पर क्या फैसला होगा? क्या महिलाओं को सही समय पर न्याय मिलेगा या फिर यह भी राजनीतिक गणित का शिकार बनेगा?

फिलहाल तो सारे भाजपाई चुपचाप देख रहे हैं और सोच रहे होंगे – “अरे यार, नड्डा जी ने तो बस मदद की... या फिर कुछ और?”

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World-April 17,2026