तेहरान, 19 अप्रैल 2026— ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने इजराइल और अमेरिका की नीतियों पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि इजराइल लोगों को मारने पर गर्व करता है, लेकिन अमेरिका फिर भी ईरान को आतंकी देश का लेबल लगाता है। यह बयान 19 अप्रैल 2026 को दिया गया, जब क्षेत्रीय तनाव चरम पर है और मध्य पूर्व में संघर्ष की आंच तेज हो रही है।
पेजेशकियान ने स्पष्ट शब्दों में पूछा, “इजराइल लोगों को मारने पर गर्व करता है, फिर भी अमेरिका ईरान को आतंकी देश कहता है। बताइए, हमने किसे मारा है?” उनका यह बयान इजराइल की कथित लक्षित हत्याओं (targeted assassinations) और अमेरिका की दोहरी नीति (double standards) पर सीधा प्रहार है।
पेजेशकियान का पूरा संदेश: दोहरी मापदंड की निंदा
ईरानी राष्ट्रपति ने अपने भाषण में कहा कि इजराइल खुले तौर पर हत्याओं का दावा करता है और उन्हें अपनी उपलब्धि मानता है। इसके बावजूद, वाशिंगटन ईरान को “आतंकवादी राज्य” करार देता है। पेजेशकियान ने जोर देकर कहा कि ईरान ने किसी की हत्या नहीं की है, जबकि इजराइल की कार्रवाइयों में निर्दोष लोगों की जान जा रही है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान-अमेरिका-इजराइल के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। हाल के महीनों में इजराइल ने ईरानी अधिकारियों और वैज्ञानिकों पर हमलों की जिम्मेदारी ली है, जिन्हें तेहरान “आतंकवादी कृत्य” मानता है। अमेरिका इन कार्रवाइयों का समर्थन करता रहा है और ईरान पर परमाणु कार्यक्रम तथा क्षेत्रीय अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाता है।
पेजेशकियान ने आगे कहा, “यह दोहरी मापदंड स्पष्ट है। जो खुद हत्याओं पर गर्व करता है, वही दूसरों को आतंकी बताता है।” उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह इस असंगति को पहचाने और ईरान के खिलाफ लगाए गए आरोपों की सच्चाई जांचे।
पृष्ठभूमि: ईरान-अमेरिका-इजराइल त्रिकोण
ईरान लंबे समय से अमेरिका और इजराइल को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानता है। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से दोनों देशों के बीच संबंध बेहद तनावपूर्ण रहे हैं। अमेरिका ईरान पर प्रतिबंध लगाए हुए है और उसे “स्पॉन्सर ऑफ टेररिज्म” कहता है। इजराइल तो ईरान को अस्तित्व का खतरा मानता है, खासकर उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर।
हाल के वर्षों में:
- इजराइल ने कई ईरानी परमाणु वैज्ञानिकों की हत्या की जिम्मेदारी ली।
- अमेरिका ने इजराइल की सुरक्षा के लिए अरबों डॉलर की सैन्य सहायता दी।
- ईरान ने जवाब में प्रॉक्सी ग्रुप्स (हिजबुल्लाह, हमास आदि) के माध्यम से क्षेत्र में अपनी उपस्थिति मजबूत की।
पेजेशकियान का यह बयान इन घटनाओं की पृष्ठभूमि में आया है। उन्होंने कहा कि ईरान कभी भी युद्ध शुरू करने वाला नहीं रहा, लेकिन अगर हमला हुआ तो वह मजबूती से जवाब देगा।
अमेरिका की दोहरी नीति पर सवाल
ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिका पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन इजराइल की हर कार्रवाई को जस्टिफाई करता है, लेकिन ईरान की किसी भी रक्षा कार्रवाई को “आतंकवाद” बताता है।
“अमेरिका इजराइल के लिए प्रॉक्सी की भूमिका निभा रहा है। क्या यह अमेरिकी जनता के हित में है?” — यह सवाल उन्होंने पहले भी अमेरिकी लोगों को लिखे ओपन लेटर में उठाया था।
पेजेशकियान ने जोर दिया कि ईरान का संघर्ष इजराइल और अमेरिका की आक्रामक नीतियों के खिलाफ है, न कि आम अमेरिकियों या अन्य देशों के खिलाफ। उन्होंने पड़ोसी देशों से भी अपील की कि वे इजराइल-अमेरिका की साजिशों में न फंसें।
वैश्विक प्रतिक्रिया और प्रभाव
यह बयान अंतरराष्ट्रीय मीडिया में तेजी से फैला। कई देशों ने इसे ईरान की मजबूत कूटनीतिक प्रतिक्रिया माना,
- ईरानी मीडिया (मिल्लात टाइम्स आदि) ने इसे राष्ट्रपति की साहसिक आवाज बताया।
- पश्चिमी मीडिया में इसे ईरान की रक्षा रणनीति का हिस्सा बताया गया।
- सोशल मीडिया पर #Pezeshkian और #DoubleStandards जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि पेजेशकियान का यह भाषण घरेलू समर्थन बढ़ाने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मंच पर ईरान की स्थिति मजबूत करने का प्रयास है। ईरान के अंदर आर्थिक दबाव और प्रतिबंधों के बावजूद राष्ट्रपति जनता को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं।
ईरान की स्थिति: संघर्ष और प्रतिरोध
मसूद पेजेशकियान 2024 में राष्ट्रपति बने थे। सुधारवादी विचारधारा वाले पेजेशकियान ने सत्ता संभालते ही कहा था कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा।
उनके नेतृत्व में ईरान ने:
- क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने की कोशिश की।
- अमेरिका-इजराइल के खिलाफ कूटनीतिक मोर्चा मजबूत किया।
- आंतरिक चुनौतियों (महंगाई, बेरोजगारी) के बावजूद राष्ट्रीय एकता पर जोर दिया।
पेजेशकियान का 19 अप्रैल का बयान इसी रणनीति का हिस्सा लगता है। उन्होंने कहा कि दुनिया को देखना चाहिए कि असली आतंकवादी कौन है — जो स्कूलों, अस्पतालों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले करता है या जो अपनी रक्षा करता है।
निष्कर्ष: दोहरी मापदंड का अंत कब?
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान का यह बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति में दोहरी मापदंड (double standards) की बहस को फिर से जीवंत कर देता है। इजराइल की कार्रवाइयों को “आत्मरक्षा” कहना और ईरान की किसी भी प्रतिक्रिया को “आतंकवाद” बताना — यह विरोधाभास अब छिप नहीं सकता।
पेजेशकियान ने सही मायने में पूछा है — अगर इजराइल हत्याओं पर गर्व करता है, तो अमेरिका ईरान को आतंकी क्यों कहता है? जवाब शायद अंतरराष्ट्रीय कानून, मानवाधिकार और सच्ची न्याय की मांग में छिपा है।
जब तक बड़े शक्तिशाली देश अपनी सुविधा के अनुसार नियम बदलते रहेंगे, तब तक मध्य पूर्व में शांति दूर ही रहेगी। ईरान की यह आवाज सिर्फ तेहरान की नहीं, बल्कि उन सभी देशों की है जो पश्चिमी दोहरी नीति से त्रस्त हैं।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 22,2026