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Saturday, 25 April 2026

ट्रंप का “स्मार्ट वेटिंग गेम” मे भी अमेरिका थका: होर्मुज में ब्लॉकेड, लेकिन ईरान अभी नहीं टूटा ना टूटेगा"

ट्रंप का “स्मार्ट वेटिंग गेम” मे भी अमेरिका थका: होर्मुज में ब्लॉकेड, लेकिन ईरान अभी नहीं टूटा ना टूटेगा"
-Friday World-April 25,2026 
अप्रैल 2026। होर्मुज स्ट्रेट— दुनिया के तेल का करीब 20% गुजरता है — आज “डबल ब्लॉकेड” का शिकार है। अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों और जहाजों को रोक रखा है, जबकि ईरान भी जवाबी कदम उठा रहा है। *डोनाल्ड ट्रंप न तो पूर्ण युद्ध का ऐलान कर रहे हैं, न ही ब्लॉकेड हटा रहे हैं। वे चुपचाप इंतजार कर रहे हैं कि ईरान पहले हमला करे, ताकि दुनिया भर में यह नैरेटिव बने — “युद्धविराम तोड़ने वाला ईरान है”।

यह रणनीति पहली नजर में चतुर लगती है, लेकिन गहराई में जाकर देखें तो तस्वीर जटिल है। अमेरिका के पास पूर्ण स्केल युद्ध की न तो असीमित सैन्य क्षमता बची है, न ही आर्थिक सहनशक्ति। ट्रंप का मुख्य हथियार आर्थिक दबाव है — ब्लॉकेड से ईरान को घुटनों पर लाना। लेकिन क्या ईरान इतनी जल्दी टूट जाएगा?

 ईरान की तैयारी: स्टॉकपाइल और डिस्काउंटेड ऑयल ओर ईरान की थका देने वाली स्ट्रेटजी 

ईरान ने युद्ध शुरू होने से पहले ही 100 मिलियन बैरल से ज्यादा तेल ओवरलोड करके निकाल लिया था — अपनी सामान्य क्षमता से कहीं ज्यादा। चीन को 90% तेल पहले 45 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बेचा जाता था (भारी डिस्काउंट पर)। अब युद्ध के दौरान डबल रेट मिल रहा है। अगर हर हफ्ते 12 टैंकर होर्मुज से सफलतापूर्वक निकलते रहें (जैसा पिछले 36 घंटों में हुआ, जिनमें ज्यादातर ईरान से लिंक्ड थे), तो ईरान आसानी से 4-6 महीने इस दबाव को झेल सकता है।

यहां तक कि अगर एक भी टैंकर न निकले, तब भी ईरान के पास जुलाई तक का बफर है। चीन जैसे बड़े खरीदार अभी भी डिस्काउंटेड ईरानी तेल ले रहे हैं, और ईरान ने पिछले सालों में अपनी निर्यात व्यवस्था को काफी लचीला बना लिया है।

अमेरिका और ग्लोबल इकॉनमी की मजबूरी

दूसरी तरफ तस्वीर उल्टी है। मार्च 2026 के दूसरे हफ्ते में ही ग्लोबल ऑयल मार्केट इतना तंग हो गया कि अमेरिका को रूस और ईरान पर से कुछ प्रतिबंध हटाने पड़े — सिर्फ तेल आपूर्ति बनाए रखने के लिए। मूल मकसद होर्मुज को खुला रखना था, लेकिन अमेरिका ने उल्टा ब्लॉकेड लगा दिया।

नतीजा? तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। ब्रेंट क्रूड $100-130 प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है — मुद्रास्फीति, ऊर्जा संकट और आपूर्ति श्रृंखला बाधित। अमेरिका+पश्चिमी सहयोगी खुद इस “डबल ब्लॉकेड” के बोझ को ज्यादा देर नहीं सह सकते।

ट्रंप के सामने तीन विकल्प ओर तीनो विफल 

ट्रंप के पास वास्तव में तीन रास्ते दिख रहे हैं:

1. “विजय घोषित कर भागना*: बिना युद्ध लड़े घोषणा कर दें कि “ईरान पूरी तरह टूट गया है”। समझौता न करें, बस अनिश्चितता बनाए रखें और घरेलू राजनीति में जीत का ढिंढोरा पीटें। यह सबसे आसान, लेकिन सबसे कमजोर विकल्प है।

2. पूर्ण युद्ध: मिसाइल और ड्रोन हमलों से ईरान को तबाह करने की कोशिश। लेकिन जमीनी हमला या बड़े पैमाने पर नौसैनिक कार्रवाई असंभव है। ईरान के पास असममित क्षमता है — होर्मुज में खदानें, ड्रोन हमले और तीन अमेरिकी कैरियर (अब्राहम लिंकन, जेराल्ड फोर्ड, जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश) को निशाना बनाने की धमकी। हूती भी रेड सी में खतरा बने हुए हैं। अमेरिका को भारी नुकसान का खतरा है।

3. ईमानदार कूटनीति: JCPOA जैसा कोई समझौता — परमाणु कार्यक्रम पर सीमित नियंत्रण, प्रतिबंध हटाना और क्षेत्रीय स्थिरता। ट्रंप पहले 15-सूत्री एजेंडे पर अड़े थे, लेकिन बाद में ईरान के 10-सूत्री प्रस्ताव पर कुछ लचीलापन दिखाया था। अगर बैकचैनल बातचीत चल रही है, तो यही सबसे व्यावहारिक रास्ता लगता है।

 असली सवाल: कौन पहले टूटेगा?

ईरान इस बार युद्धविराम और ब्लॉकेड को अलग-अलग नहीं देख रहा है। अगर अमेरिकी नौसेना ओमान की खाड़ी में फिर ईरानी जहाज पर फायरिंग करती है, तो ईरान जवाबी हमला शुरू कर सकता है।

ट्रंप की रणनीति “पहले हमला ईरान करे” वाली है, लेकिन ईरान ने अब तक संयम दिखाया है। इससे ट्रंप को नैतिक उच्चता मिल रही है, लेकिन आर्थिक घड़ी तेजी से टिक-टिक कर रही है।

ट्रंप इस बार “सही खेल” खेल रहे हैं — न ज्यादा आक्रामक, न ज्यादा नरम। लेकिन यह खेल लंबा नहीं चल सकता। होर्मुज में डबल ब्लॉकेड वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहा है। ईरान के पास स्टॉकपाइल और चीन जैसे खरीदार हैं, जबकि अमेरिका के पास समय कम है।

अगर बातचीत नहीं हुई, तो या तो ट्रंप को “विजय” का नाटक करना पड़ेगा, या फिर असली युद्ध की आग भड़केगी — जिसका खामियाजा पूरी दुनिया उठाएगी।

कभी-कभी सबसे बड़ी जीत बिना गोली चलाए होती है — लेकिन इसके लिए दोनों पक्षों को समझौते की मेज पर बैठना पड़ता है। ट्रंप की “वेट एंड सी” रणनीति अभी काम कर रही है, लेकिन घड़ी तेज चल रही है। ईरान टूटने से पहले ग्लोबल इकॉनमी कितना सहन कर पाएगी — यही असली टेस्ट है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World-April 25,2026