Breaking

यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Wednesday, 15 April 2026

भूख: बचपन की याद नहीं, बल्कि मौत की साया गाजा के बच्चे कचरे में खाना ढूंढते हुए – और दुनिया की चुप्पी

भूख: बचपन की याद नहीं, बल्कि मौत की साया  
गाजा के बच्चे कचरे में खाना ढूंढते हुए – और दुनिया की चुप्पी-Friday World-April 15,2026
भूख कभी बचपन की मीठी याद नहीं होनी चाहिए।  
वह एक क्रूर हकीकत है जो नन्हे हाथों को कुचल देती है, आँखों से चमक छीन लेती है और कोमल शरीर को हड्डियों का पिंजरा बना देती है। आज गाजा के बर्बाद हुए इलाकों और टेंटों में हजारों बच्चे कचरे के ढेर में खाने का एक टुकड़ा तलाशते फिर रहे हैं। उनके चेहरे पर भूख की गहरी लकीरें उभर आई हैं। उनकी आँखों में वो दर्द है जिसे किसी भी बच्चे को कभी सहन नहीं करना चाहिए।

गाजा में लगभग 20 लाख की आबादी में से अधिकांश बच्चे आज तीव्र भूख और कुपोषण का शिकार हैं। 2025 में अंतरराष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा वर्गीकरण (IPC) ने गाजा में अकाल की घोषणा कर दी थी। हजारों बच्चे गंभीर कुपोषण से जूझ रहे हैं। उनका वजन तेजी से घट रहा है, रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो गई है और ठंड के कारण हाइपोथर्मिया से कई नन्हे बच्चों की जान जा चुकी है। यूनिसेफ और अन्य संगठनों के अनुसार, 2026 में भी 8 लाख से अधिक बच्चे गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। हर पाँच में से चार बच्चे संकट स्तर की भूख की चपेट में हैं।

ये बच्चे सिर्फ भूखे नहीं हैं – वे धीरे-धीरे मौत की ओर बढ़ रहे हैं।  
माता-पिता रात को उन्हें सुलाते हुए यही सोचते हैं – कल उन्हें क्या खिलाऊँगा? कचरे से मिले एक टुकड़े पर जीवन निर्भर है या मौत को गले लगाना पड़ेगा? ये दृश्य मानवता को शर्मसार करते हैं। बचपन खेल-कूद, हँसी और सपनों का समय होना चाहिए, लेकिन गाजा में वह दर्द और मौत का समय बन गया है।

इस तबाही के बीच उम्मीद की एक किरण अभी भी बाकी है। कई अंतरराष्ट्रीय मानवीय संगठन और स्थानीय स्वयंसेवक टीमें मैदान में काम कर रही हैं। वे बेसहारा परिवारों तक गर्म और पौष्टिक भोजन पहुँचा रही हैं, कुपोषित बच्चों का इलाज कर रही हैं और उनके लिए दवाइयाँ व पोषण युक्त आहार का इंतजाम कर रही हैं। लेकिन यह जीवनरक्षक काम आपके तत्काल समर्थन के बिना जारी नहीं रह सकता। अगर हम अभी कुछ नहीं करते, तो और अधिक बच्चे भूखे पेट सोएंगे और रोज-रोज और कमजोर होते जाएंगे।
यह संकट एक बड़ा सवाल भी खड़ा करता है – अरब दुनिया के अमीर देश कहाँ हैं?  
सऊदी अरब, कतर, कुवैत जैसे तेल से लबालब देश जहाँ विलासिता और ऐयाशी का माहौल है, वहाँ गाजा के भूखे बच्चों के प्रति उनका रवैया क्या है? क्या वे अमेरिका-इजरायल की रणनीतिक गुलामी में जकड़े हुए हैं या अपनी ऐयाशी में खो गए हैं?

ये देश अपार संपदा के मालिक हैं। वे लग्जरी होटल, शानदार जीवनशैली और विश्वस्तरीय इवेंट्स पर अरबों डॉलर खर्च कर सकते हैं, लेकिन गाजा के भूखे बच्चों तक पर्याप्त मदद पहुँचाने में वे पीछे रह जाते हैं। कतर ने कुछ मानवीय सहायता दी है, सऊदी अरब ने भी कुछ योगदान किया है, लेकिन यह बिल्कुल अपर्याप्त है। जब लाखों बच्चे मौत के मुंह में हैं, तब इन देशों के नेता वैश्विक राजनीति में अमेरिका-इजरायल के साथ संतुलन बनाए रखने में व्यस्त दिखते हैं। वे फिलिस्तीनी मुद्दे पर महंगे भाषण देते हैं, लेकिन वास्तविक मदद और सहायता राशि पहुँचाने में धीमे पड़ जाते हैं। इसे दोहरा चरित्र (hypocrisy) ही कहा जाएगा।

एक तरफ वे इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) में बैठकें करते हैं और गाजा के मुद्दे पर प्रस्ताव पास करते हैं, दूसरी तरफ उनके व्यापारिक और राजनीतिक हित अमेरिका-इजरायल से जुड़े रहते हैं। अगर ये अरब देश सच में फिलिस्तीन के लोगों के हित में हैं, तो उन्हें तुरंत और बड़े पैमाने पर मदद करनी चाहिए। उनके तेल के डॉलर से गाजा में फूड वेयरहाउस बनाए जा सकते हैं, पोषण कार्यक्रम चलाए जा सकते हैं और हजारों बच्चों की जान बचाई जा सकती है। लेकिन हकीकत यह है कि विलासिता और ऐयाशी की लालच में मानवता पीछे छूट जाती है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस मामले में नाकाम रहा है। संयुक्त राष्ट्र, यूनिसेफ, वर्ल्ड फूड प्रोग्राम जैसी संस्थाएँ चेतावनियाँ जारी करती हैं, रिपोर्ट तैयार करती हैं, लेकिन जब असली मदद पहुँचाने की बात आती है तो रुकावटें आ जाती हैं। सीजफायर के बाद भी स्थिति में खास सुधार नहीं हुआ। 2025 के सीजफायर के बावजूद लाखों लोग अभी भी भुखमरी की कगार पर हैं।

यह संकट हर व्यक्ति की जिम्मेदारी भी है। जो कोई भी यह लेख पढ़ रहा है, उसे सोचना चाहिए कि वह क्या कर सकता है। छोटी मदद भी बड़ी ताकत बन सकती है। मानवीय संगठनों को दान देना, आवाज उठाना, सोशल मीडिया पर जागरूकता फैलाना और सरकारों पर दबाव बनाना – ये सब जरूरी है। गाजा के बच्चों के लिए दुनिया की चुप्पी तोड़नी होगी।

भूख आज राजनीतिक हथियार बन चुकी है। जब खाने को युद्ध का साधन बना दिया जाता है, तो मानवता हार जाती है। गाजा के बच्चों का भविष्य अंधकारमय है, लेकिन अगर दुनिया जाग जाए तो इस अंधकार को दूर किया जा सकता है। अरब देशों को अपनी संपदा और प्रभाव का इस्तेमाल करके मजबूत कदम उठाने चाहिए। उन्हें ऐयाशी को एक तरफ रखकर मानवता को प्राथमिकता देनी चाहिए।

हमें यह समझना चाहिए कि आज गाजा के बच्चे जो पीड़ा झेल रहे हैं, वह किसी भी बच्चे के साथ नहीं होनी चाहिए। भूख को बचपन की याद नहीं बनने देना चाहिए, बल्कि उसे इतिहास का वो काला पन्ना बनाना चाहिए जिसे हम सब मिलकर मिटा दें।

आज ही कुछ करें।  
क्योंकि हर पल गाजा में एक बच्चा भूख से और कमजोर होता जा रहा है। उसकी आँखों में उम्मीद बनी रहे, इसके लिए हम सब जिम्मेदार हैं।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-April 15,2026