-Friday World-April 20,2026
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि उनकी सुरक्षा व्यवस्था संभालने वाले अधिकारियों के घर पर छापेमारी (रेड) कर उन्हें डराने और मारने की साजिश रची जा रही है। ममता ने स्पष्ट शब्दों में कहा — “मेरी सिक्योरिटी का ध्यान रखने वाले के घर पर रेड कर रहे हैं। आपका क्या इरादा है? क्या आप मुझे मारवाकर बंगाल जीतना चाहते हो? अगर मुझे मारकर बंगाल जीतने की कोशिश कर रहे हैं, तो कोशिश मत करें। माकपा के समय में भी मारने की कई कोशिशें हुई हैं।”
यह बयान बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले आया है, जब राज्य में राजनीतिक तापमान चरम पर है। ममता बनर्जी का आरोप है कि केंद्र सरकार प्रवर्तन निदेशालय (ED) और अन्य केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग करके उनकी सुरक्षा को कमजोर कर रही है और उन्हें राजनीतिक रूप से खत्म करने की प्लानिंग कर रही है।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में ED ने कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी संतानु सिन्हा बिस्वास के घर पर छापा मारा। यह अधिकारी ममता बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े माने जाते हैं। ममता ने इसे अपनी जान को खतरा बताते हुए केंद्र पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि उनकी सुरक्षा से जुड़े लोगों को निशाना बनाया जा रहा है, ताकि उनकी सुरक्षा कमजोर हो और कोई बड़ा हादसा हो सके।
ममता का यह बयान सिर्फ एक आरोप नहीं, बल्कि एक लंबे सिलसिले का हिस्सा है। इससे पहले जनवरी 2026 में ED ने TMC से जुड़ी चुनावी सलाहकार कंपनी I-PAC के दफ्तर और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर पर छापेमारी की थी। उस दौरान ममता खुद मौके पर पहुंचीं और विवादास्पद रूप से कुछ फाइलें और डिवाइस ले जाने का आरोप लगा। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में सुनवाई हुई, जहां कोर्ट ने ममता के हस्तक्षेप को “असामान्य और खुशी की बात नहीं” बताया। ED ने ममता और राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ CBI जांच की मांग की थी।
अब फिर सुरक्षा अधिकारी के घर पर रेड होने के बाद ममता ने इसे “जानलेवा साजिश” करार दिया। उन्होंने याद दिलाया कि वामपंथी शासन (माकपा) के समय में भी उनके ऊपर कई जानलेवा हमले हुए थे। ममता का संदेश साफ है — केंद्र सरकार उन्हें राजनीतिक रूप से कमजोर करने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को निशाना बना रही है।
केंद्र सरकार का पक्ष और राजनीतिक बहस
भाजपा और केंद्र सरकार ने ममता के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि ED की कार्रवाई कानूनी है और भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग जैसे मामलों में हो रही है। कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है। भाजपा नेताओं का आरोप है कि ममता “पीड़ित कार्ड” खेल रही हैं और केंद्र की एजेंसियों को बदनाम करने की कोशिश कर रही हैं।
विपक्षी दलों और TMC समर्थकों का कहना है कि 2026 के बंगाल चुनाव से पहले केंद्र ED-CBI का इस्तेमाल करके TMC को कमजोर करने की रणनीति बना रहा है। ममता के समर्थक पूछते हैं — क्यों सिर्फ बंगाल में ही इतनी रेड हो रही हैं? क्यों ममता की सुरक्षा से जुड़े लोगों को टारगेट किया जा रहा है?
यह विवाद बंगाल की सियासत को और गर्म कर रहा है। एक तरफ ममता “मुझे मारने की साजिश” का रोना रो रही हैं, तो दूसरी तरफ भाजपा उन्हें “एजेंसियों से डरने वाली” बता रही है।
राजनीति में सुरक्षा और साजिश के आरोप — पुराना खेल
भारतीय राजनीति में “जान का खतरा” और “साजिश” के आरोप नई बात नहीं हैं। इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी — लगभग हर बड़े नेता पर कभी न कभी ऐसे आरोप लगे हैं। लेकिन ममता बनर्जी का मामला इसलिए अलग है क्योंकि वे खुद एक मुख्यमंत्री हैं और उनकी सुरक्षा राज्य तथा केंद्र दोनों की जिम्मेदारी है।
ममता ने कहा — “अगर आप मुझे मारकर बंगाल जीतना चाहते हैं तो कोशिश मत करें।” यह बयान काफी आक्रामक है और चुनावी रणनीति का हिस्सा लगता है। वे अपनी छवि “पीड़ित” और “लड़ाकू” दोनों के रूप में पेश कर रही हैं।
दूसरी तरफ, केंद्र सरकार का तर्क है कि भ्रष्टाचार की जांच को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। ED के अनुसार, कई मामले में बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग और कोयला घोटाले जैसे मुद्दे सामने आए हैं, जिनमें TMC से जुड़े लोग शामिल बताए जा रहे हैं।
बंगाल चुनाव 2026: सुरक्षा vs राजनीति
बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 नजदीक हैं। पिछले चुनावों में हिंसा, बूथ कैप्चरिंग और राजनीतिक हत्याओं की खबरें आई थीं। ऐसे में ममता का “जान का खतरा” वाला बयान चुनावी माहौल को और तनावपूर्ण बना रहा है।
कुछ सवाल जो उठ रहे हैं:
- क्या वाकई ममता की सुरक्षा में कोई कमी की जा रही है?
- क्या ED की रेड सिर्फ कानूनी प्रक्रिया है या राजनीतिक प्रतिशोध?
- क्या मुख्यमंत्री की सुरक्षा से जुड़े अधिकारी भी जांच के दायरे में आ सकते हैं?
- क्या केंद्र और राज्य सरकार के बीच यह टकराव आम आदमी की सुरक्षा और विकास को प्रभावित करेगा?
इन सवालों के जवाब अभी स्पष्ट नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट और अन्य अदालतें इन मुद्दों पर सुनवाई कर रही हैं। लेकिन राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है।
सबक क्या है?
ममता बनर्जी का बयान एक बार फिर दिखाता है कि भारतीय राजनीति में “सुरक्षा” और “साजिश” जैसे मुद्दे कितनी आसानी से चुनावी हथियार बन जाते हैं। एक तरफ मुख्यमंत्री कह रही हैं कि उनकी जान खतरे में है, दूसरी तरफ केंद्र कह रहा है कि कानून का राज चल रहा है।
लेकिन असली सवाल यह है — क्या आम बंगाली नागरिक इन आरोपों से सुरक्षित महसूस कर रहा है? क्या राज्य में कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार मुक्ति और विकास पर ध्यान दिया जा रहा है, या सिर्फ सत्ता की लड़ाई चल रही है?
ममता बनर्जी की सुरक्षा हर नागरिक की तरह महत्वपूर्ण है। लेकिन अगर सुरक्षा के नाम पर राजनीतिक एजेंसियों का दुरुपयोग हो रहा है, तो वह भी लोकतंत्र के लिए खतरा है। दोनों पक्षों को संयम बरतना चाहिए। जांच निष्पक्ष हो, सुरक्षा मजबूत हो और राजनीति विकास पर केंद्रित हो।
लो भाईयों, बंगाल की सियासत फिर गरमा गई है। ममता बनर्जी “जान का खतरा” बता रही हैं, केंद्र “कानून का राज”। 2026 का चुनाव कौन जीतेगा, यह तो समय बताएगा, लेकिन फिलहाल दोनों तरफ से आरोपों की बौछार जारी है।
सच्चाई सामने आए, चाहे वह किसी भी पक्ष की हो। लोकतंत्र में सुरक्षा सबकी होनी चाहिए — मुख्यमंत्री की भी और आम आदमी की भी। साजिश के आरोपों से ऊपर उठकर काम करना ही असली नेतृत्व है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 20,2026