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Tuesday, 28 April 2026

आईपीएस अजयपाल शर्मा पर विवाद की आंधी: कथित पत्नी दीप्ति शर्मा का गंभीर आरोप, शासन की SIT जांच और सच्चाई का खेल

आईपीएस अजयपाल शर्मा पर विवाद की आंधी: कथित पत्नी दीप्ति शर्मा का गंभीर आरोप, शासन की SIT जांच और सच्चाई का खेल
-Friday World-April 28,2026 
उत्तर प्रदेश पुलिस की उन हस्तियों में डॉ. अजयपाल शर्मा का नाम हमेशा चर्चा में रहा है, जिन्हें 'एनकाउंटर स्पेशलिस्ट' या 'सिंघम' जैसे खिताबों से नवाजा जाता है। गाजियाबाद में तत्कालीन एसपी के रूप में उनकी तैनाती के दौरान उन्होंने कड़े एक्शन और अपराध पर अंकुश के लिए ख्याति कमाई। लेकिन 2020 में उनके करियर पर एक ऐसा तूफान आया जो न सिर्फ उनकी निजी जिंदगी बल्कि पेशेवर छवि को भी हिला गया। गाजियाबाद की वकील दीप्ति शर्मा ने खुद को उनकी पत्नी बताते हुए लखनऊ के हजरतगंज कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया, जिसमें गंभीर आरोप लगाए गए। यह मामला सिर्फ वैवाहिक विवाद नहीं, बल्कि पुलिस पावर के दुरुपयोग, सबूत मिटाने और फर्जी मुकदमों का आरोप बन गया।

 मामला क्या है? दीप्ति शर्मा के आरोपों की पूरी तस्वीर

दीप्ति शर्मा, जो गाजियाबाद के राजेंद्र नगर, साहिबाबाद में रहती हैं और दिल्ली हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करती रही हैं, ने अपनी शिकायत में दावा किया कि 2016 में जब डॉ. अजयपाल शर्मा गाजियाबाद में एसपी सिटी के पद पर थे, तब उनकी शादी हुई थी। यह शादी गाजियाबाद में रजिस्टर्ड बताई गई। दीप्ति का कहना था कि शुरुआती दिनों में रिश्ता सामान्य रहा, लेकिन बाद में अजयपाल शर्मा के अन्य महिलाओं से कथित संबंधों को लेकर विवाद शुरू हो गया।

जब दीप्ति ने इसकी शिकायत महिला आयोग, पुलिस विभाग, इलाहाबाद हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचाई, तो आरोप है कि अजयपाल शर्मा ने अपनी प्रशासनिक ताकत का दुरुपयोग किया। दीप्ति के मुताबिक, उन्होंने वैवाहिक सबूतों को मिटाने की कोशिश की। उनके लैपटॉप, डीवीआर, टैबलेट और मोबाइल फोनों में रखे रिकॉर्डिंग्स, वीडियो क्लिप्स और अन्य दस्तावेज गायब कर दिए गए। विरोध करने पर उन्हें फर्जी ठगी के मुकदमों में फंसाकर जेल भिजवा दिया गया।

विशेष रूप से रामपुर में एसपी रहते हुए अजयपाल शर्मा पर आरोप लगा कि उन्होंने पुलिस का दुरुपयोग कर दीप्ति को सिविल लाइन थाने में ठगी के मामले में फंसाया। 18 सितंबर 2019 को उनके घर पर कुछ लोग पहुंचे और मारपीट की घटना भी बताई गई। दीप्ति ने शासन को पत्र लिखकर पूरे मामले की शिकायत की। विशेष सचिव (गृह) डॉ. अनिल कुमार सिंह के निर्देश पर हजरतगंज पुलिस ने आईपीएस डॉ. अजयपाल शर्मा, चंदन राय, उपनिरीक्षक विजय यादव और दीप्ति को गिरफ्तार करने वाली टीम के खिलाफ आईपीसी की संगीन धाराओं—409 (आपराधिक विश्वासघात), 201 (साक्ष्य गायब करना) और 120B (आपराधिक साजिश)—के तहत मुकदमा दर्ज किया।

शासन ने इस संवेदनशील मामले की जांच स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को सौंप दी। SIT ने जेल में बंद दीप्ति शर्मा का बयान दर्ज किया और अजयपाल शर्मा से भी उनका पक्ष लिया। मामले में पुलिस की भूमिका, सबूतों की हेराफेरी और पावर के दुरुपयोग जैसे मुद्दे जांच के दायरे में आए।

 अजयपाल शर्मा का पक्ष और विवाद का दूसरा पहलू

अजयपाल शर्मा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि दीप्ति शर्मा उनकी पत्नी नहीं हैं। गाजियाबाद के सब-रजिस्ट्रार कार्यालय के रिकॉर्ड में 2016 में दोनों के नाम से कोई विवाह पंजीकरण नहीं मिला। सारे सबूत मिटा दिए 
अजयपाल शर्मा ने कहा कि वे फरवरी 2017 में दूसरी महिला से विवाहित हैं और दीप्ति के आरोप बेबुनियाद हैं। उन्होंने कानूनी कार्रवाई की बात भी कही।

यह मामला यूपी पुलिस के अंदरूनी लॉबी वॉर से भी जुड़ा माना गया। कुछ रिपोर्ट्स में इसे दो शक्तिशाली आईपीएस गुटों के बीच टकराव का हिस्सा बताया गया। अजयपाल शर्मा पहले से ही भ्रष्टाचार और ट्रांसफर-पोस्टिंग में गड़बड़ी के आरोपों में घिरे थे, जिसमें SIT और विजिलेंस की जांच चल रही थी। दीप्ति वाला मामला इन जांचों में अतिरिक्त मोड़ लाया।

दूसरी ओर, दीप्ति शर्मा के खिलाफ भी गाजियाबाद, रामपुर, बुलंदशहर और नोएडा में कई मुकदमे दर्ज थे—ठगी, आईटी एक्ट आदि। SIT ने इन मुकदमों की जांच CBCID को सौंपने की सिफारिश की। दीप्ति उस समय दासना जेल में बंद थीं, जहां SIT ने कोर्ट की अनुमति से उनका बयान दर्ज किया।

क्या कहती है जांच और निष्कर्ष?

SIT की रिपोर्ट और सब-रजिस्ट्रार के रिकॉर्ड ने शादी के दावे को गलत साबित किया। कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दीप्ति शर्मा के आरोपों में बुनियादी सबूतों की कमी पाई गई या वे पर्याप्त नहीं ठहरे। अजयपाल शर्मा को बाद में इन विवादों से क्लीन चिट मिली मानी जाती है, हालांकि उनका प्रमोशन कुछ समय के लिए अटका रहा।

यह मामला पुलिस अधिकारियों की निजी जिंदगी, पावर के दुरुपयोग और फर्जी शिकायतों के जोखिम को उजागर करता है। एक ओर जहां कोई महिला अपनी शिकायत लेकर शासन तक पहुंचती है, वहीं दूसरी ओर सिस्टम को दुरुपयोग से बचाने की जरूरत भी सामने आती है। कानूनी प्रक्रिया ने दोनों पक्षों को सुनने का मौका दिया—SIT ने बयान लिए, सबूतों की जांच की और शासन को रिपोर्ट सौंपी।

 बड़े सबक और पुलिस सुधार की जरूरत

यह घटना यूपी पुलिस के लिए कई सबक लेकर आई:

- पावर का दुरुपयोग: कोई भी अधिकारी अपनी पदवी का इस्तेमाल निजी विवाद सुलझाने के लिए न करे। पुलिस तंत्र को निष्पक्ष रहना चाहिए।
- महिला सुरक्षा और शिकायत: महिलाओं की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए, लेकिन बिना ठोस सबूत के कार्रवाई से पहले सावधानी बरती जाए।
- सबूत संरक्षण: डिजिटल सबूत (मोबाइल, लैपटॉप) की सुरक्षा और चेन ऑफ कस्टडी महत्वपूर्ण है।
- पारदर्शिता: आईपीएस अधिकारियों की निजी और पेशेवर जिंदगी के बीच स्पष्ट सीमा होनी चाहिए।

अजयपाल शर्मा जैसे 'एनकाउंटर मैन' की बहादुरी और अपराध नियंत्रण में योगदान सराहनीय रहा है, लेकिन विवादों ने उनकी छवि पर सवाल भी खड़े किए। दीप्ति शर्मा का मामला दर्शाता है कि निजी रिश्तों में टूटन कैसे बड़े कानूनी और प्रशासनिक संकट पैदा कर सकती है।

आज जब पुलिस सुधार, जवाबदेही और महिला सशक्तिकरण पर जोर दिया जा रहा है, ऐसे मामले हमें याद दिलाते हैं कि कानून सबके लिए समान होना चाहिए—चाहे आरोपी कोई भी हो। SIT जैसी जांच प्रक्रियाएं सच्चाई सामने लाने में मदद करती हैं, लेकिन सिस्टम को और मजबूत बनाने की जरूरत है ताकि फर्जी आरोप और पावर का दुरुपयोग दोनों पर अंकुश लग सके।

यह कहानी सिर्फ एक आईपीएस अधिकारी और एक वकील की नहीं, बल्कि सत्ता, विश्वास और न्याय की जटिलताओं की है। अंत में, जांच एजेंसियों और अदालतों पर भरोसा ही सही राह दिखाता है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-April 28,2026 

 यह आर्टिकल उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्ट्स, समाचारों और आधिकारिक बयानों पर आधारित है। यह किसी पक्ष को दोषी या निर्दोष ठहराने का प्रयास नहीं है, बल्कि घटनाक्रम को निष्पक्ष रूप से प्रस्तुत करता है। कानूनी मामलों में अंतिम फैसला अदालत करती है।