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Monday, 27 April 2026

बंगाल मे ममता की नारी शक्ति का लोहा ममता के विजय रथ को रोकना आसान नही तीसरी बार पूर्ण बहुमत से TMC की सरकार

बंगाल मे ममता की नारी शक्ति का लोहा ममता के विजय रथ को रोकना आसान नही तीसरी बार पूर्ण बहुमत से TMC की सरकार
-Friday World-April 28,2026 
पश्चिम बंगाल की राजनीति हमेशा से उबाल भरी रही है। 2026 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर ममता बनर्जी ने नारी शक्ति का दम दिखाने का दावा किया है। चुनाव प्रचार के दौरान ममता ने कहा कि भारत में जितने भी भाजपा के मुख्यमंत्री हैं, उनमें से गुजरात के मुख्यमंत्री को छोड़कर बाकी सब बंगाल में प्रचार करने आए। उनका इशारा साफ था – "मैं अकेली महिला हूं, लेकिन मेरी ताकत नारी शक्ति की है।" 

चुनाव दो चरणों में (23 और 29 अप्रैल 2026) हो रहे हैं। नतीजे 4 मई को आने वाले हैं। ममता और तृणमूल कांग्रेस (TMC) एक बार फिर सत्ता मे वापसी करेगी 

जबकि भाजपा बड़े बदलाव का दावा कर रही है। लेकिन कीस बेज पर सरकार बनाए गी 

 ममता का 'लोहा' और नारी शक्ति का नारा
ममता बनर्जी लंबे समय से खुद को नारी शक्ति की प्रतीक बताती रही हैं। उन्होंने महिलाओं के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं चलाईं, जैसे लक्ष्मीर भंडार, कन्याश्री आदि। चुनावी रैलियों में वे बार-बार कह रही हैं कि बंगाल में महिला सशक्तिकरण का मॉडल देश के सामने है। 

उनका तर्क है कि भाजपा के 16 मुख्यमंत्री (2026 तक) में से ज्यादातर पुरुष हैं और वे बंगाल में प्रचार करने आए हैं, लेकिन असली लड़ाई नारी शक्ति बनाम संगठित ताकत की है। ममता ने दावा किया कि TMC 226+ सीटें जीतेगी। कुछ ओपिनियन पोल TMC को 174-184 सीटों के आसपास दिखा रहे हैं, जबकि भाजपा को 130-150 के बीच। कुछ सर्वे तो इसे टाईट फाइट बता रहे हैं।

ममता की यह रणनीति बंगाल की महिला मतदाताओं को एकजुट करने की कोशिश लगती है। 2021 में भी TMC ने महिला वोटों के सहारे भारी जीत हासिल की थी। लेकिन इस बार हिंसा, भ्रष्टाचार और विकास के मुद्दों पर विपक्ष हमलावर है।

 बंगाल चुनाव: भाजपा 90 सीटें पार कर पाएगी?
आपका अनुमान है कि BJP 90 सीटें क्रॉस नहीं कर पाएगी। वर्तमान स्थिति में यह अनुमान काफी हद तक तर्कसंगत लगता है। 

- 2021 में भाजपा ने 77 सीटें जीती थीं (वोट शेयर करीब 38%)।
- 2024 लोकसभा में भी भाजपा ने बंगाल में अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन विधानसभा स्तर पर TMC की पकड़ अभी भी मजबूत दिख रही है।
- ओपिनियन पोल (मार्च-अप्रैल 2026) में BJP को 110+ सीटों का अनुमान भी कुछ नेताओं (जैसे अमित शाह) ने लगाया, लेकिन ज्यादातर स्वतंत्र सर्वे TMC को बहुमत (148+) देते हैं, हालांकि कम अंतर से।

भाजपा का दावा है कि "दीदी जा रही है, भाजपा आ रही है"। अमित शाह और पीएम मोदी ने भारी प्रचार किया। लेकिन बंगाल की जटिल जाति-समुदाय समीकरण, मुस्लिम वोट (करीब 27-30%) और TMC की स्थानीय पकड़ को देखते हुए 90-100 सीटें पार करना भी भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। अगर TMC 160+ सीटें लाती है, तो ममता की ताकत बरकरार रहेगी।

वास्तविकता: चुनाव  मे दक्षिण और मध्य बंगाल में TMC की दीवार मजबूत। कोई स्पर्धा भी नही कांग्रेस और लेफ्ट अलग लड़ रहे हैं, जो वोट काट सकते हैं।

 राहुल गांधी का 'डर' और विपक्ष की एकता
आपने सही नोट किया – राहुल गांधी ममता की संभावित जीत से "डरे-सहमे" दिख रहे हैं। बंगाल प्रचार के दौरान राहुल ने न सिर्फ भाजपा, बल्कि TMC पर भी तीखे हमले किए। उन्होंने कहा:

- ममता ने बंगाल को पोलराइज किया, जिससे भाजपा को जगह मिली।
- TMC भ्रष्ट है, महिलाएं असुरक्षित हैं, युवा परेशान हैं।
- मोदी और ममता "एक-दूसरे के साथ काम" करते हैं।

TMC ने राहुल पर पलटवार किया और यहां तक कहा कि वे "BJP के लिए काम कर रहे हैं"। राहुल की यह रणनीति कांग्रेस को अलग पहचान देने की कोशिश लगती है। INDIA ब्लॉक में दरार साफ दिख रही है।

पूरे विपक्ष का ममता के इर्द-गिर्द रहना: यह आंशिक रूप से सही है। 2024 लोकसभा चुनाव से पहले कई क्षेत्रीय दल (DMK, Shiv Sena UBT, SP आदि) ने ममता को 2029 का संभावित PM फेस बताया। लेकिन बंगाल चुनाव के बाद TMC मजबूत हुई, तो ममता राष्ट्रीय विपक्ष की आवाज बन सकती हैं। कुछ TMC नेता तो कह रहे हैं कि ममता 2029 में PM बनेंगी या ज्योति बसु का रिकॉर्ड तोड़ेंगी।

हालांकि, कांग्रेस (राहुल-खड़गे) ममता को अपना मुख्य प्रतिद्वंद्वी नहीं मानती। वे खुद को मोदी का असली विकल्प बताते हैं। क्षेत्रीय दल भी अपनी सीमाएं रखते हैं। ममता की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा बंगाल की जीत पर निर्भर करेगी। 

 बंगाल के बाद ममता का राष्ट्रीय किरदार: 2029 की दावेदारी?
ममता बनर्जी ने कहा है कि बंगाल जीतने के बाद वे दिल्ली में भाजपा को "खत्म" करने का लक्ष्य रखेंगी। कुछ TMC नेता खुलकर 2029 में उन्हें PM कैंडिडेट बताते हैं। 

- मजबूत पक्ष: अगर TMC 180+ सीटें जीती, तो ममता की छवि "अजेय" बनेगी। वे महिला नेता, लंबे अनुभव वाली, और भाजपा-विरोधी चेहरा हैं। कुछ विपक्षी दल (खासकर दक्षिण भारत और पूर्वी राज्य) उन्हें समर्थन दे सकते हैं।
- कमजोर पक्ष: ममता की पकड़ मुख्य रूप से बंगाल तक सीमित है। राष्ट्रीय स्तर पर उनकी पार्टी का विस्तार नहीं हुआ। कांग्रेस और अन्य बड़े दल राहुल गांधी या किसी सामूहिक चेहरे को प्राथमिकता दे सकते हैं। भ्रष्टाचार के आरोप, सांप्रदायिक पोलराइजेशन के मुद्दे और केंद्र के साथ टकराव भी बाधा बन सकते हैं।

2029 अभी दूर है। बंगाल 2026 के नतीजे, 2027-28 के अन्य राज्य चुनाव और राष्ट्रीय माहौल तय करेंगे। फिलहाल ममता बंगाल से अपनी रणनीति की शुरुआत करेगी 

 नारी शक्ति या राजनीतिक गणित?
ममता बनर्जी ने बंगाल चुनाव में नारी शक्ति का लोहा मनवाने की कोशिश की है। वे अकेली महिला CM के रूप में कई भाजपा CMों के खिलाफ लड़ रही हैं। उनका दावा है कि बंगाल के बाद वे राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय होंगी और 2029 में PM पद की दावेदार बनेंगी। 

लेकिन सच्चाई जटिल है। ओपिनियन पोल करीबी मुकाबला दिखा रहे हैं। भाजपा 90 सीटें पार कर सकती है या नहीं – यह 4 मई को तय होगा। राहुल गांधी का हमला TMC पर दिखाता है कि विपक्ष में एकता सिर्फ कागजी है। पूरा विपक्ष ममता के इर्द-गिर्द नहीं, बल्कि अपनी-अपनी कुर्सी बचाने में लगा है।

बंगाल चुनाव भारतीय राजनीति का आईना है। यहां की जीत या हार सिर्फ दीदी की नहीं, बल्कि क्षेत्रीय शक्तियों बनाम केंद्र की लड़ाई का प्रतीक बन गई है। **नारी शक्ति** का नारा अच्छा है, लेकिन अंतिम फैसला मतदाता करेंगे – विकास, सुरक्षा, भ्रष्टाचार और स्थानीय मुद्दों पर।

चुनावी नतीजे आने तक इंतजार करें। बंगाल हमेशा सरप्राइज देता है। अगर ममता मजबूत वापसी करती हैं, तो 2029 की चर्चा और तेज होगी। वरना, विपक्षी एकता का सपना फिर टूट सकता है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-April 28,2026