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Friday, 1 May 2026

विश्व संकट के बीच भारत की ‘गोल्ड पॉलिसी’ में बड़ा उलटफेर! RBI ने विदेश से 104 टन सोना वापस मंगाया

विश्व संकट के बीच भारत की ‘गोल्ड पॉलिसी’ में बड़ा उलटफेर! RBI ने विदेश से 104 टन सोना वापस मंगाया-Friday World- May 1,2026 
दुनिया युद्ध, भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता की चपेट में है। ऐसे में कई देश अब अपने सोने को विदेशी बैंकों की तिजोरियों से निकालकर अपने देश वापस ला रहे हैं। लंदन और न्यूयॉर्क की प्रसिद्ध बैंकों को अब पहले जितना सुरक्षित नहीं माना जा रहा है। 

इसी बदलते वैश्विक माहौल में भारत ने भी अपनी स्वर्ण नीति (Gold Policy) में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत ने हाल के महीनों में विदेश से 104.23 टन सोना वापस मंगाया है। अब देश का कुल 880.52 टन सोना में से लगभग 77 प्रतिशत यानी 680 टन सोना देश के अंदर RBI की सुरक्षित तिजोरियों में रखा गया है।

भारत का सोना अब ज्यादातर स्वदेश में

RBI की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक:
- कुल स्वर्ण भंडार: 880.52 टन
- देश के अंदर रखा सोना: 680 टन (77%)
- विदेश में रखा सोना: 197.67 टन (मुख्यतः बैंक ऑफ इंग्लैंड और BIS में)

साल 2023 में भारत का मात्र 37% सोना देश में था, जो अब बढ़कर 77% हो चुका है। सिर्फ पिछले छह महीनों में RBI द्वारा 104 टन से अधिक सोना विदेश से वापस लाया गया है। यह आंकड़ा साफ दर्शाता है कि भारत अब अपने सोने को विदेश पर निर्भर नहीं रखना चाहता।

 क्यों बदली भारत की सोने की नीति?

यह बदलाव अचानक नहीं है। इसके पीछे वैश्विक स्तर पर बढ़ते जोखिम मुख्य कारण हैं:

- रूस-यूक्रेन युद्ध: पश्चिमी देशों द्वारा रूस की विदेशी संपत्तियां फ्रीज करने की घटना ने पूरी दुनिया को चौंका दिया।
- अफगानिस्तान की संपत्ति जब्ती: अमेरिका द्वारा अफगानिस्तान की अरबों डॉलर की संपत्ति पर कब्जा करने की घटना ने दिखाया कि विदेश में रखी संपत्ति भी राजनीतिक फैसलों का शिकार बन सकती है।
- भू-राजनीतिक अनिश्चितता: अब कोई भी देश यह जोखिम नहीं लेना चाहता कि उसका सोना किसी अंतरराष्ट्रीय विवाद में फंस जाए या जब्त कर लिया जाए।

इन घटनाओं ने केंद्रीय बैंकों को सतर्क कर दिया है। नतीजतन, कई देश अब “अपना सोना अपने देश में” की नीति अपना रहे हैं।

 सोना स्वदेश लाने के बड़े फायदे

देश के अंदर सोना रखने के कई महत्वपूर्ण लाभ हैं:

- संकट में तत्काल उपयोग: युद्ध या आर्थिक संकट के समय विदेश से सोना लाने में समय लगता है और जोखिम बढ़ जाता है। जबकि देश में रखा सोना तुरंत उपलब्ध हो सकता है।
- पूर्ण नियंत्रण: RBI और भारतीय सरकार का सीधा नियंत्रण रहता है।
- भंडार में मजबूती: विदेशी मुद्रा भंडार में सोने का हिस्सा बढ़कर 16.7 प्रतिशत हो गया है (पहले 13.9% था)।
- राष्ट्रीय सुरक्षा: सोना अब सिर्फ आर्थिक संपत्ति नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।

वैश्विक ट्रेंड: भारत अकेला नहीं

भारत इस मामले में अकेला नहीं है। पोलैंड, हंगरी, तुर्की, चीन और कई अन्य देश भी पिछले कुछ वर्षों में अपने सोने का बड़ा हिस्सा विदेश से वापस ला चुके हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि भविष्य में यह रुझान और तेज होगा क्योंकि केंद्रीय बैंक अब सुरक्षा और स्वतंत्रता को प्राथमिकता दे रहे हैं।

सोना न केवल मुद्रास्फीति से बचाव का साधन है, बल्कि भू-राजनीतिक संकटों के समय में भी मजबूत सुरक्षा कवच साबित हो रहा है।

 भारत की दूरदर्शी रणनीति

RBI का यह कदम काफी सोचा-समझा और दूरदर्शी माना जा रहा है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना खरीदने वाला देश है। घरेलू मांग के साथ-साथ रणनीतिक स्वर्ण भंडार को भी मजबूत किया जा रहा है। अगर भविष्य में कोई बड़ा वैश्विक संकट आया तो भारत के पास पर्याप्त सोना उपलब्ध रहेगा, जिसका इस्तेमाल मुद्रा स्थिरता या अन्य जरूरतों के लिए किया जा सकेगा।

विश्व में बढ़ते युद्ध और आर्थिक अस्थिरता के इस दौर में भारत का सोना स्वदेश लाना एक स्मार्ट और सतर्क कदम है। 104 टन सोना वापस मंगाकर RBI ने न सिर्फ स्वर्ण भंडार को मजबूत किया है, बल्कि यह भी संदेश दिया है कि भारत अब अपनी महत्वपूर्ण संपत्तियों को विदेशी बैंकों पर अंधा भरोसा नहीं कर रहा।

“अपना सोना — अपना नियंत्रण”
यह आज की बदलती दुनिया की नई वित्तीय हकीकत बनती जा रही है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World- May 1,2026