-Friday World Jul 22 2026
काठमांडू। नेपाल सरकार ने १ रुपए के सिक्के पर छपे विवादित राष्ट्रीय नक्शे को हटाने के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। इस नक्शे में भारत के लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा क्षेत्रों को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया है। नेपाल राष्ट्रीय बैंक (NRB) द्वारा लाए गए प्रस्ताव में इन विवादित क्षेत्रों वाले नक्शे की जगह मुस्तांग के प्राचीन लो घेकर बौद्ध मठ की तस्वीर लगाने का सुझाव दिया गया था, लेकिन राजनीतिक और जनता के विरोध के बाद सरकार ने इसे ठुकरा दिया। अब नया संशोधित प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है जिसमें बौद्ध मठ के साथ-साथ विवादित नक्शा भी शामिल रहेगा।
यह घटनाक्रम नेपाल-भारत के लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। दोनों देशों के बीच यह मुद्दा सालों से कूटनीतिक तनाव का कारण बना हुआ है, और अब इसे करेंसी डिजाइन के जरिए और मजबूती से सामने लाया जा रहा है।
विवाद का पूरा मामला
नेपाल राष्ट्रीय बैंक ने कुछ समय पहले १ रुपए के नए सिक्के के डिजाइन में बदलाव का प्रस्ताव रखा था। प्रस्ताव के मुताबिक, वर्तमान नक्शे की जगह मुस्तांग जिले के ऊपरी हिस्से में स्थित लो घेकर मठ की छवि लगाई जाए। इसका उद्देश्य नेपाल की सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा देना था। नेपाल की मौजूदा करेंसी पर पहले से ही पशुपतिनाथ मंदिर, जानकी मंदिर जैसी हिंदू धार्मिक स्थलें अंकित हैं। बैंक का मानना था कि बौद्ध विरासत को भी समुचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
लो घेकर मठ ८वीं शताब्दी में गुरु पद्मसंभव (गुरु रिनपोचे) द्वारा स्थापित माना जाता है। यह न केवल नेपाल का प्राचीनतम बौद्ध मठ है बल्कि पूरे हिमालयी क्षेत्र में इसकी ऐतिहासिक अहमियत है। इस मठ को शामिल करने से मुस्तांग क्षेत्र में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद थी।
हालांकि, जैसे ही मीडिया में यह खबर फैली कि नक्शा हटाया जा सकता है, नेपाल की संसद, राजनीतिक दल और आम जनता में तीखा विरोध शुरू हो गया। कई नेताओं ने इसे राष्ट्रीय अखंडता पर हमला बताया। नतीजतन, सरकार ने नेपाल राष्ट्रीय बैंक को निर्देश दिया कि नए डिजाइन में लो घेकर मठ के साथ-साथ नेपाल का पूरा राष्ट्रीय नक्शा भी बरकरार रखा जाए।
प्रस्ताव की पृष्ठभूमि
अधिकारियों के अनुसार, यह प्रस्ताव वर्तमान सरकार बनने से पहले ही तैयार होना शुरू हो चुका था। इसका मुख्य मकसद नेपाल की करेंसी को और अधिक समावेशी बनाना था। नेपाल राष्ट्रीय बैंक के एक अधिकारी ने बताया, “हमारी कई नोटों और सिक्कों पर हिंदू तीर्थस्थल पहले से अंकित हैं। बौद्ध संस्कृति को भी जगह देने की जरूरत महसूस हुई। लो घेकर मठ का चुनाव इसीलिए किया गया क्योंकि इसका ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व बहुत गहरा है।”
फिर भी, नक्शे को हटाने का सुझाव विवादास्पद साबित हुआ। नेपाल में राष्ट्रवाद की भावना मजबूत है, खासकर भारत के साथ सीमा मुद्दे पर। २०२० में नेपाल ने अपना नया राजनीतिक नक्शा जारी किया था जिसमें लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को शामिल किया गया। भारत ने इसे खारिज करते हुए कहा था कि ये क्षेत्र उसके हिस्से हैं और यह एकतरफा कदम है।
भारत-नेपाल संबंधों पर असर
यह घटना दोनों देशों के बीच संबंधों को फिर से प्रभावित कर सकती है। भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा है, सांस्कृतिक और धार्मिक रिश्ते गहरे हैं, लेकिन सीमा विवाद समय-समय पर कूटनीतिक चुनौतियां पैदा करता रहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सिक्के पर नक्शा रखना प्रतीकात्मक है, लेकिन यह नेपाल की घरेलू राजनीति में राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने का माध्यम भी बन सकता है।
नेपाल की मुख्य विपक्षी पार्टियां और कुछ सत्ताधारी घटक दल पहले से ही भारत के साथ सीमा मुद्दे पर सख्त रुख अपनाने की वकालत करते रहे हैं। ऐसे में सिक्के पर नक्शा बरकरार रखना उनके लिए राजनीतिक लाभ का साधन साबित हो सकता है।
सांस्कृतिक विरासत और आर्थिक महत्व
नेपाल सरकार का दावा है कि यह कदम सांस्कृतिक समावेशिता को बढ़ावा देने के लिए है। लो घेकर मठ को शामिल करने से अपर मुस्तांग क्षेत्र, जो पहले से ही पर्यटकों के बीच लोकप्रिय है, और अधिक आकर्षक बन सकता है। मुस्तांग की प्राचीन गुफाएं, बौद्ध संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य पहले से ही विश्व स्तर पर जाना जाता है।
दूसरी ओर, आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि करेंसी डिजाइन में बदलाव से नई नोटों और सिक्कों के प्रचलन में देरी हो सकती है, जिसका असर अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। नेपाल की अर्थव्यवस्था पर्यटन, रेमिटेंस और कृषि पर निर्भर है। सांस्कृतिक प्रतीकों का इस्तेमाल पर्यटन को बढ़ावा देने में मददगार साबित हो सकता है।
ऐतिहासिक संदर्भ
लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा क्षेत्र ब्रिटिश काल के मानचित्रों और १८१६ के सुगौली संधि से जुड़े हैं। दोनों देश अपने-अपने दावों के समर्थन में ऐतिहासिक दस्तावेज पेश करते रहे हैं। २०२० के बाद दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय वार्ता हुई, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकला।
नेपाल के नए नक्शे को उसके संविधान में भी शामिल किया गया है, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है। भारत का रुख स्पष्ट है कि यह क्षेत्र उसके अखंड भाग हैं और नेपाल का नक्शा गलत है।
आगे की संभावनाएं
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि नया सिक्का कब जारी होगा। नेपाल राष्ट्रीय बैंक संशोधित डिजाइन पर काम कर रहा है। इसमें लो घेकर मठ के साथ पूरा नक्शा दिखाया जाएगा। इस फैसले से नेपाल की घरेलू राजनीति में स्थिरता आएगी, लेकिन भारत के साथ कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की जरूरत बनी रहेगी।
दोनों पड़ोसी देशों को चाहिए कि वे इस मुद्दे को सुलझाने के लिए द्विपक्षीय वार्ता को मजबूत करें। खुली सीमा, साझा संस्कृति और आर्थिक सहयोग दोनों देशों के लिए फायदेमंद हैं। प्रतीकात्मक कदमों की बजाय संवाद से समस्याओं का समाधान निकालना बेहतर होगा।
यह घटना दर्शाती है कि छोटे-छोटे प्रतीक भी बड़े राजनीतिक और कूटनीतिक संदेश दे सकते हैं। नेपाल की करेंसी पर विवादित नक्शा बरकरार रखना उसकी राष्ट्रीय भावना को मजबूत करने का प्रयास है, लेकिन क्षेत्रीय स्थिरता के लिए संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता है।
Sajjadali Nayani ✍
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