- Friday World 14 Aug 2026
अमेरिकी नौसेना का एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन इन दिनों चर्चा में है। जहाज की असामान्य रूप से लंबी तैनाती को लेकर परिवारों, सांसदों और मीडिया में चिंताएं बढ़ गई हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, करीब 5,000 नाविकों और मरीनों वाला यह कैरियर महीनों से समुद्र में है और इसके जीवनयापन की स्थितियों तथा मानसिक स्वास्थ्य को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच अमेरिका मिडिल ईस्ट में इसकी जगह यूएसएस जॉर्ज वॉशिंगटन को तैनात करने की तैयारी कर रहा है।
यूएसएस अब्राहम लिंकन नवंबर 2025 में सैन डिएगो से रवाना हुआ था। शुरू में यह प्रशांत क्षेत्र के लिए था, लेकिन बाद में मिडिल ईस्ट की ओर मोड़ दिया गया। ईरान से जुड़े सैन्य अभियानों के दौरान जहाज ने लंबे समय तक लगातार समुद्र में रहकर ऑपरेशंस का समर्थन किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जहाज 250 दिनों से अधिक समय से समुद्र में है और पोर्ट कॉल के बिना लगातार दिनों का रिकॉर्ड भी बना चुका है। तैनाती बार-बार बढ़ाई गई, जिससे परिवारों में अनिश्चितता बढ़ी।
परिवारों और कुछ सांसदों ने जहाज पर नाविकों की मानसिक स्थिति को लेकर चिंता जताई है। टाउन हॉल बैठकों में परिवार के सदस्यों ने नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों से अपनी बात रखी। कुछ रिपोर्ट्स में थकान, मनोबल में गिरावट और मानसिक तनाव के मामलों का जिक्र है। एक मामले में नाविक के समुद्र में गिरने या कूदने की कोशिश की खबर भी आई, जिसे बचा लिया गया। नौसेना का कहना है कि उन्होंने आत्महत्या संबंधी विचारों या प्रयासों में कोई उल्लेखनीय वृद्धि नहीं देखी है और जहाज पर मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर उपलब्ध हैं।
अमेरिकी सांसद माइक लेविन ने जहाज पर खराब सुविधाओं का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने फफूंद वाले शावर, खराब शौचालय, हफ्तों तक बंद लॉन्ड्री, लंबे समय तक गर्म पानी की अनुपलब्धता, सीमित भोजन (जैसे आधा कप चावल और दो टॉर्टिला) तथा साबुन, डियोडोरेंट और टूथपेस्ट जैसी बुनियादी चीजों की कमी का जिक्र किया। अन्य सांसदों ने भी आपूर्ति की कमी, पानी की समस्या, प्लंबिंग मुद्दे और मेल सिस्टम में व्यवधान की बात कही है। रक्षा विभाग के कुछ अधिकारियों ने इन रिपोर्ट्स को अतिरंजित या गलत तरीके से पेश किया गया बताया है, जबकि प्राथमिकता मिशन-क्रिटिकल सप्लाई देने पर बताई जा रही है।
इसी बीच अमेरिकी नौसेना यूएसएस जॉर्ज वॉशिंगटन को मिडिल ईस्ट की ओर भेजने की तैयारी कर रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह कैरियर हिंद महासागर की ओर बढ़ रहा है और अब्राहम लिंकन की जगह ले सकता है। जॉर्ज वॉशिंगटन जापान में फॉरवर्ड-डिप्लॉयड कैरियर है और हाल में प्रशांत क्षेत्र से पश्चिम की ओर बढ़ा है। यह बदलाव लंबे समय से चल रही तैनाती के दबाव को कम करने की दिशा में देखा जा रहा है।
लंबी तैनाती नौसैनिक जीवन का हिस्सा होती है, लेकिन जब अवधि बढ़ जाती है, पोर्ट कॉल कम हो जाते हैं और बुनियादी सुविधाएं प्रभावित होती हैं, तो इसका असर नाविकों और उनके परिवारों पर पड़ता है। अनिश्चितता, थकान और घर से दूरी मानसिक स्वास्थ्य के लिए चुनौती बन सकती है। परिवार वाले जल्द घर लौटने की मांग कर रहे हैं, जबकि अधिकारी ऑपरेशनल जरूरतों और सुरक्षा को प्राथमिकता बता रहे हैं।
यह मामला अमेरिकी नौसेना की तैनाती नीतियों, सप्लाई चेन और क्रू के कल्याण पर व्यापक चर्चा छेड़ रहा है। कांग्रेस के कुछ सदस्यों ने जांच और जवाबदेही की मांग की है। नौसेना का रुख है कि वे हर संभव सुविधा उपलब्ध कराने की कोशिश कर रहे हैं और नाविकों का मनोबल तथा क्षमता उच्च स्तर पर है। फिर भी परिवारों की चिंताएं और सांसदों के सवाल इस बात को रेखांकित करते हैं कि लंबी सैन्य तैनातियों में मानव पहलू को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
यूएसएस अब्राहम लिंकन जैसे कैरियर वैश्विक शक्ति प्रदर्शन और क्षेत्रीय सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लेकिन जब तैनाती महीनों तक खिंच जाती है, तो बुनियादी सुविधाएं, भोजन, स्वच्छता और मानसिक समर्थन उतने ही जरूरी हो जाते हैं जितने कि हथियार और विमान। जॉर्ज वॉशिंगटन के आने से राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन अब्राहम लिंकन के नाविकों और उनके परिवारों के अनुभव इस चर्चा को आगे बढ़ाएंगे कि भविष्य की तैनातियों में सुधार कैसे लाए जाएं।
यह घटना याद दिलाती है कि आधुनिक युद्ध और लंबी समुद्री तैनातियां सिर्फ रणनीति नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की जिंदगी से भी जुड़ी होती हैं। नाविकों की सेवा का सम्मान करते हुए उनकी बुनियादी जरूरतों और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना आवश्यक है। आगे की रिपोर्ट्स और आधिकारिक अपडेट्स इस स्थिति को और स्पष्ट करेंगे।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 14 Aug 2026
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