Breaking

यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Thursday, 20 August 2026

घुसपैठ के दावे झूठे, लेकिन बॉर्डर पर समस्या है: किरेन रिजिजू का बड़ा और साफ बयान

घुसपैठ के दावे झूठे, लेकिन बॉर्डर पर समस्या है: किरेन रिजिजू का बड़ा और साफ बयान
- Friday World 20 Aug 2026
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री और अरुणाचल प्रदेश के सांसद किरेन रिजिजू ने भारत-चीन सीमा यानी एलएसी (लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल) को लेकर एक महत्वपूर्ण और स्पष्ट बयान दिया है। उन्होंने उन अफवाहों और दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है जिनमें कहा जा रहा था कि चीनी सेना अरुणाचल प्रदेश में 60 किलोमीटर अंदर तक घुस गई है। साथ ही उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सीमा पर समस्या जरूर है, क्योंकि कई इलाकों में बॉर्डर का साफ सीमांकन नहीं हुआ है।

रिजिजू ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीन के बीच बहुत लंबी सीमा है। जमीन पर बॉर्डर पिलर या स्पष्ट रेखा नहीं खिंची हुई है। यह समस्या नई नहीं है। जब तिब्बत एक अलग राष्ट्र था, तब भी भारत और तिब्बत के बीच सीमा का पूरा परिसीमन नहीं हुआ था। ऊंचे और दुर्गम इलाकों में गांव नहीं होते। गांव मुख्य रूप से घाटियों में बसे होते हैं। स्थानीय लोग परंपरा से पशु चराने, शिकार करने या व्यापार के लिए ऊपरी इलाकों में जाते रहे हैं। सीमांकन न होने के कारण दोनों देशों की सेनाओं के बीच समय-समय पर तनाव पैदा होता रहता है।

मंत्री ने जोर देकर कहा कि “जो लोग कहते हैं कि चीन 60 किलोमीटर अंदर आ गया है और अलग-अलग वीडियो शेयर करके हमें बदनाम करने की कोशिश करते हैं, वे गलत हैं। बॉर्डर पर समस्या है। अरुणाचल के कुछ गांवों के लोगों ने सीमा की समस्या को लेकर चिंता जताई है और वह चिंता जायज है क्योंकि सीमा का सीमांकन नहीं हुआ है।” उन्होंने साफ किया कि यह स्थिति ऐसी नहीं है कि चीन ने किसी भारतीय गांव पर कब्जा कर लिया हो। कुछ जमीन पर उनकी नजर इसलिए है क्योंकि वहां सीमांकन नहीं है। हमारे लोग मानते हैं कि हमारी जमीन आगे तक जाती है, जबकि चीन की तरफ के गांवों के लोग, जिनमें तिब्बती और स्थानीय लोग शामिल हैं, दावा करते हैं कि उनकी जमीन अंदर तक जाती है। इससे भ्रम की स्थिति बनती है।

रिजिजू ने चेतावनी दी कि ऐसी झूठी खबरें और असंबंधित तस्वीरें (कई बार बांग्लादेश या अन्य जगहों की) शेयर करना भारतीय सेना और सुरक्षा बलों के मनोबल को तोड़ता है तथा देश में भ्रम फैलाता है। यह सही नहीं है। उन्होंने बताया कि ऊंची चोटियों पर चीनी सेना की गतिविधियां जरूर बढ़ी हैं। स्थानीय लोगों की इस चिंता को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

अतीत की नीतियां और बुनियादी ढांचे का अंतर
मंत्री ने सीमा विवाद के मूल कारणों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि चीन ने पहले से ही सीमा के पास सड़कें, हाईवे और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना शुरू कर दिया था। कांग्रेस शासनकाल में तत्कालीन रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी ने संसद में यह बयान दिया था कि अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में सड़कें न बनाना भारत सरकार की नीति है। दूसरी तरफ चीन लगातार सड़कें और कैंप बनाता रहा। हमारे पास सड़क न होने और चीन द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा कर लेने के कारण ऊंचाई वाले इलाकों में उन्होंने कुछ जगहों पर अपनी उपस्थिति मजबूत कर ली।

मोदी सरकार में इस नीति को बदला गया। सीमा क्षेत्रों के विकास को अब शीर्ष प्राथमिकता दी जा रही है। रिजिजू ने बताया कि वे खुद माजा, गालेमो और तक्सिंग जैसे इलाकों में गए ताकि बुनियादी ढांचे के काम तेज किए जा सकें। पहले सीमाओं की अनदेखी हुई थी, अब यह सरकार की प्राथमिकता है। भारतीय सेना और आईटीबीपी की गश्त बढ़ाई गई है। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जा रही है।

स्थानीय चिंताएं और राष्ट्रीय सुरक्षा
अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले के कुछ आदिवासी संगठनों ने पिछले कुछ वर्षों में चरागाह, शिकार और खेती की जमीन को लेकर चिंता जताई थी। रिजिजू ने इन चिंताओं को वैध माना, लेकिन उन्हें घुसपैठ या कब्जे के रूप में पेश करने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि ट्रांसग्रेशन (दोनों तरफ से सीमा पार करने की घटनाएं) सीमांकन न होने के कारण होती हैं, लेकिन इन्हें घुसपैठ नहीं कहा जा सकता। भारतीय सेना ने भी मीडिया में आए कुछ रिपोर्टों को गलत और आधारहीन बताया था।

यह मुद्दा सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है। अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है और चीन के दावों का कोई ऐतिहासिक आधार नहीं है। सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों के संबंधों के लिए जरूरी है। सरकार स्थानीय लोगों की समस्याओं का समाधान करने और भारतीय क्षेत्र की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

रिजिजू के इस बयान से दो बातें साफ होती हैं। पहली, अफवाहों और गलत सूचनाओं से बचना चाहिए क्योंकि वे सेना के मनोबल को प्रभावित करती हैं। दूसरी, सीमांकन की कमी और अतीत में इंफ्रास्ट्रक्चर की उपेक्षा के कारण समस्याएं बनी हुई हैं, जिन्हें वर्तमान सरकार संभाल रही है। ऊंची चोटियों पर बढ़ी चीनी गतिविधियां चिंता का विषय हैं और इन्हें गंभीरता से लिया जा रहा है।

अरुणाचल की दुर्गम पहाड़ियां, बर्फीली चोटियां और घाटियां भारत की सुरक्षा की पहली पंक्ति हैं। यहां तैनात जवान कठिन परिस्थितियों में डटे हुए हैं। जनता और मीडिया का फर्ज है कि वे सही जानकारी फैलाएं, न कि अफवाहें। सीमा पर समस्या है, लेकिन घुसपैठ के अतिरंजित दावे गलत हैं। सच्चाई को समझकर आगे बढ़ना ही सही रास्ता है। सरकार और सेना दोनों तरफ से तैयार हैं। अरुणाचल की रक्षा और विकास साथ-साथ चल रहे हैं।

यह बयान उन लोगों के लिए भी जवाब है जो बार-बार बिना तथ्यों के आरोप लगाते हैं। सीमा मुद्दा संवेदनशील है। इसमें राजनीति से ऊपर उठकर सोचने की जरूरत है। किरेन रिजिजू जैसे स्थानीय सांसद और मंत्री की बातों से स्थिति और साफ होती है। भारत अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए पूरी तरह सक्षम और सतर्क है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 20 Aug 2026

#IndiaChinaBorder #ArunachalPradesh #KirenRijiju #LAC #NoChineseIntrusion #BorderSecurity #ModiGovt #NationalSecurity #NortheastIndia #ChinaBorderIssue