- Friday World 12 Aug 2026
आधुनिक युद्ध सिर्फ मिसाइलों और जेट्स का नहीं, बल्कि उन छोटी-छोटी दुर्लभ धातुओं का भी है जिन्हें आंखों से देखना भी मुश्किल है। अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य महाशक्ति है। उसके पास अत्याधुनिक फाइटर जेट, मिसाइल डिफेंस सिस्टम और वैश्विक नेटवर्क है। लेकिन एक ऐसा हथियार है जो बिना एक भी गोली चलाए उसकी पूरी सैन्य मशीनरी को रोक सकता है। यह हथियार न मिसाइल है, न परमाणु बम। यह है रेयर अर्थ मेटल्स।
ये 17 तत्व—नीओडिमियम, डिस्प्रोसियम, समेरियम, टर्बियम, यट्रियम और अन्य—आधुनिक हथियारों की रीढ़ हैं। एक F-35 फाइटर जेट में सैकड़ों किलोग्राम रेयर अर्थ सामग्री लगती है। रडार, सेंसर, इलेक्ट्रिक मोटर्स, इंजन के पार्ट्स और हाई-टेम्परेचर मैग्नेट सब इन पर निर्भर हैं। समेरियम-कोबाल्ट मैग्नेट के बिना मिसाइल का गाइडेंस सिस्टम और एक्ट्यूएटर्स काम नहीं करते। पैट्रियट, THAAD और प्रिसिजन गाइडेड मिसाइलें—लगभग हर उन्नत हथियार इन धातुओं के बिना अधूरा है।
समस्या यह है कि चीन इन पर लगभग पूरा नियंत्रण रखता है। माइनिंग में उसका हिस्सा करीब 60 प्रतिशत है, लेकिन असली ताकत प्रोसेसिंग और मैग्नेट निर्माण में है—दुनिया की 85 से 90 प्रतिशत प्रोसेसिंग चीन के हाथ में। अमेरिका अपने रेयर अर्थ का करीब 70 प्रतिशत चीन से आयात करता है। कुछ हेवी रेयर अर्थ्स पर निर्भरता लगभग 100 प्रतिशत तक पहुंच जाती है।
हाल के वर्षों में चीन ने एक्सपोर्ट कंट्रोल कड़े किए हैं। लाइसेंसिंग नियम, कुछ तत्वों पर पाबंदी और अमेरिकी कंपनियों को निशाना बनाने की रणनीति से वह धीरे-धीरे दबाव बढ़ा रहा है। अगर सप्लाई पूरी तरह रुक जाए या और सख्त हो जाए, तो अमेरिकी डिफेंस कंपनियों के पास कच्चा माल खत्म हो सकता है। नई मिसाइलें नहीं बन पाएंगी, फाइटर जेट उत्पादन धीमा पड़ जाएगा और खाली हो रहे स्टॉक को भरना लगभग असंभव हो जाएगा।
यह खतरा तब और गंभीर हो जाता है जब अमेरिकी हथियार भंडार पहले से दबाव में हैं। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार पैट्रियट इंटरसेप्टर का स्टॉक काफी कम हो चुका है। THAAD और अन्य हाई-एंड सिस्टम भी प्रभावित दिखते हैं। पेंटागन उत्पादन बढ़ाने की कोशिश कर रहा है—कंपनियों को तेज योजनाएं बनाने के निर्देश, लॉकहीड मार्टिन जैसी कंपनियों के साथ समझौते, पैट्रियट उत्पादन तीन गुना और THAAD चार गुना बढ़ाने के लक्ष्य, नई फैक्टरियां और बजट बढ़ोतरी। लेकिन ये सब प्रयास अधूरे रह जाएंगे जब तक रेयर अर्थ की सप्लाई सुरक्षित नहीं हो जाती। जितनी चाहें फैक्टरियां बना लो, जितना पैसा लगा लो—अगर कच्चा माल नहीं मिलेगा तो उत्पादन रुक जाएगा।
अमेरिका इस निर्भरता को कम करने की कोशिश कर रहा है। घरेलू माइनिंग, प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने और सहयोगी देशों के साथ आपूर्ति श्रृंखला बनाने के प्रयास चल रहे हैं। लेकिन रेयर अर्थ प्रोसेसिंग जटिल, महंगी और पर्यावरण की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण है। चीन ने दशकों में यह क्षमता विकसित की है। एक रात में विकल्प तैयार नहीं हो सकते।
यह सिर्फ सैन्य मुद्दा नहीं है। रेयर अर्थ इलेक्ट्रिक वाहन, विंड टर्बाइन, स्मार्टफोन और कई नागरिक तकनीकों में भी जरूरी हैं। लेकिन सैन्य क्षेत्र में इसकी कमी का असर तुरंत और गहरा हो सकता है। एक तरफ मौजूदा संघर्षों से स्टॉक खाली हो रहे हैं, दूसरी तरफ उन्हें दोबारा भरने का रास्ता काफी हद तक एक देश के हाथ में है। यह स्थिति रणनीतिक रूप से नाजुक है।
भविष्य में अमेरिका और उसके सहयोगियों को आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लानी होगी। नई माइंस, प्रोसेसिंग प्लांट, रीसाइक्लिंग तकनीक और वैकल्पिक सामग्रियों पर शोध जरूरी है। चीन भी जानता है कि यह उसका सबसे प्रभावी दबाव का साधन है, इसलिए वह इसे सावधानी से इस्तेमाल करता है। पूरी तरह सप्लाई रोकना दोनों पक्षों के लिए महंगा पड़ सकता है, लेकिन नियंत्रित कटौती या अनिश्चितता ही काफी है दबाव बनाने के लिए।
रेयर अर्थ मेटल्स आधुनिक शक्ति संतुलन का छिपा हुआ चेहरा हैं। जो देश इन्हें नियंत्रित करता है, वह बिना गोली चलाए भी प्रतिद्वंद्वी की सैन्य क्षमता को प्रभावित कर सकता है। अमेरिका आज इसी वास्तविकता का सामना कर रहा है। सैन्य महाशक्ति होने के बावजूद कुछ छोटे तत्वों की कमी उसे कमजोर बना सकती है। यह कहानी सिर्फ धातुओं की नहीं, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, रणनीतिक निर्भरता और भविष्य की युद्ध क्षमता की है। जो देश समय रहते इस जाल से बाहर निकलेगा, वही लंबे समय में मजबूत रहेगा।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 12 Aug 2026
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