-Friday World 1 Aug 2026
शुक्रवार को दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में जो नजारा था वो आम नहीं था। आम आदमी पार्टी द्वारा आयोजित "E20 और उपभोक्ता अधिकार" विषय पर टाउनहॉल मीटिंग में देश भर से वाहन मालिक, ऑटो एक्सपर्ट, मैकेनिक और आम नागरिक इकट्ठा हुए। AAP का दावा है कि ऑफलाइन और ऑनलाइन मिलाकर 6,00,000 से ज्यादा लोग इस चर्चा से जुड़े।
चर्चा का मुद्दा एक ही था: E20 पेट्रोल। यानी 20% इथेनॉल मिला हुआ पेट्रोल। सरकार कहती है कि ये पर्यावरण के लिए अच्छा है, किसानों की आय बढ़ाएगा और आयात घटाएगा। लेकिन सड़क पर खड़े आम आदमी का सवाल अलग है: "हमारी जेब पर बोझ क्यों? हमारी गाड़ी क्यों खराब होगी?"
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस मंच से केंद्र सरकार के सामने सीधे 3 सवाल और 3 मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि नीति बनाने से पहले लोगों से पूछना चाहिए, उन पर थोपा नहीं जाना चाहिए।
केजरीवाल की 3 बड़ी मांगें क्या हैं?
टाउनहॉल में केजरीवाल ने बहुत साफ शब्दों में सरकार के सामने अपनी बात रखी।
1. विकल्प का अधिकार: शुद्ध पेट्रोल और E20 दोनों मिलने चाहिए
केजरीवाल की सबसे बड़ी मांग है कि ग्राहक से पसंद छीन ली गई है। पेट्रोल पंप पर अब सिर्फ E20 ही मिल रहा है। जिसके पास 2023 के बाद की नई गाड़ी है उसे शायद दिक्कत न हो, लेकिन जिसके पास 10-15 साल पुरानी कार या बाइक है उसका क्या?
"जो लोग E20 इस्तेमाल करना चाहते हैं वो खुशी से करें। लेकिन जिन्हें शुद्ध पेट्रोल चाहिए, जिनकी गाड़ियां E20 के लिए बनी ही नहीं हैं, उनके पास भी विकल्प होना चाहिए। ये लोकतंत्र है, जबरदस्ती नहीं चलेगी," केजरीवाल ने कहा।
एक्सपर्ट्स ने भी इस बात का समर्थन किया। कई मैकेनिकों ने कहा कि पुरानी गाड़ियों में रबर के पाइप, कार्बोरेटर और फ्यूल पंप इथेनॉल से जंग खा जाते हैं। रिपेयर का खर्च 15 से 25 हजार तक पहुंच जाता है। आम आदमी ये खर्च कहां से निकाले?
2. E20 सस्ता करो: कम वाला महंगा क्यों?
दूसरी मांग कीमत को लेकर है। सरकार कहती है कि इथेनॉल सस्ता है, तो E20 भी सस्ता होना चाहिए। लेकिन हकीकत अलग है। ज्यादातर शहरों में E20 और सामान्य पेट्रोल का भाव लगभग बराबर ही है।
"अगर E20 में 20% सस्ता इथेनॉल मिक्स होता है, तो इसकी कीमत शुद्ध पेट्रोल से कम से कम 4 से 5 रुपये प्रति लीटर कम होनी चाहिए। माइलेज भी 8 से 10% कम मिलता है। मतलब डबल मार पड़ रही है," एक कार मालिक ने टाउनहॉल में कहा।
केजरीवाल ने मांग की कि सरकार तुरंत E20 के दाम घटाए। वरना लोगों से साफ कहो कि तुम पर्यावरण के नाम पर ज्यादा पैसे दो।
3. पेट्रोल के दाम 84 रुपये से नीचे लाओ
तीसरी और सबसे बड़ी मांग महंगाई से जुड़ी है। केजरीवाल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल के दाम पिछले कुछ समय से नीचे हैं। बैरल का भाव काफी गिरा है। तो फिर देश में पेट्रोल 100 रुपये के आसपास क्यों है?
"हमारी मांग है कि सरकार तुरंत एक्साइज ड्यूटी और टैक्स में कटौती करके पेट्रोल का भाव 84 रुपये प्रति लीटर से नीचे लाए। लोग महंगाई से त्राहि-त्राहि कर रहे हैं," उन्होंने कहा।
तो फिर इथेनॉल को बढ़ावा क्यों? केजरीवाल ने लगाया बड़ा आरोप
टाउनहॉल की सबसे चर्चित बात तब हुई जब केजरीवाल ने सीधा सवाल पूछा: "अगर इथेनॉल से ग्राहक को नुकसान है, माइलेज कम मिलता है, इंजन खराब होता है, और कीमत भी कम नहीं है, तो फिर सरकार इसे इतना बढ़ावा क्यों दे रही है?"
उन्होंने आरोप लगाया कि इस नीति के पीछे अमेरिका का दबाव है। "हमने जांच की तो पता चला कि अमेरिका चाहता है कि भारत ज्यादा इथेनॉल खरीदे। हमारे किसानों और पर्यावरण के नाम पर एक नई लॉबी खड़ी की जा रही है। लेकिन इसकी कीमत आम आदमी चुकाएगा?"
इस बयान के बाद हॉल में नारेबाजी होने लगी। कई लोगों ने कहा कि सरकार ने कोई बड़ा अध्ययन किए बिना ही ये फैसला ले लिया।
सरकार की तैयारी: E25, E30 और E40 आ रहा है?
केजरीवाल ने आगे चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि सरकार अब E25 और E30 पर "अध्ययन" कर रही है। लेकिन ये शब्द सिर्फ दिखावा है।
"ये अध्ययन पूरा होने से पहले ही आपको पेट्रोल पंप पर E25, E30 और भविष्य में E40 भी मिल जाएगा। पहले E10 लाए, फिर E20 जबरदस्ती दे दिया। अब और ज्यादा इथेनॉल वाला ईंधन आएगा। किसी ने नहीं पूछा कि आपकी 2015 की बाइक का क्या होगा?"
ऑटो इंडस्ट्री के कुछ एक्सपर्ट्स ने भी टाउनहॉल में कहा कि भारत में 70% से ज्यादा गाड़ियां E20 कंपेटिबल नहीं हैं। उन्हें E20 इस्तेमाल करने से लंबे समय में इंजन में दिक्कत आ सकती है। सरकार को पहले सभी गाड़ियों को कंपेटिबल बनाना चाहिए, फिर ईंधन बदलना चाहिए।
लोग क्या कह रहे हैं? जमीन की हकीकत
टाउनहॉल में आए गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान और UP के वाहन मालिकों ने अपने अनुभव साझा किए।
अहमदाबाद के एक डिलीवरी बॉय ने कहा: "मेरी 2018 की बाइक है। E20 भरवाने के बाद माइलेज 45 से 38 पर आ गया। रोज 100 रुपये का फर्क पड़ता है।"
दिल्ली के एक टैक्सी ड्राइवर ने कहा: "हम CNG से पेट्रोल पर आए क्योंकि CNG मिलती नहीं। अब पेट्रोल भी महंगा और कम चलता है। हमारा गुजारा कैसे होगा?"
कई लोगों ने ये भी शिकायत की कि पेट्रोल पंप पर "यही ईंधन है" कहकर दूसरा विकल्प नहीं दिया जा रहा।
पर्यावरण बनाम उपभोक्ता अधिकार? बैलेंस कहां है?
सरकार का तर्क है कि इथेनॉल से चीनी के दाम स्थिर रहते हैं, किसानों को अतिरिक्त आय मिलती है, और विदेशी तेल पर निर्भरता घटती है। साथ में CO2 उत्सर्जन भी कम होता है।
लेकिन AAP और टाउनहॉल में आए एक्सपर्ट्स का कहना है कि पर्यावरण के नाम पर ग्राहक को सजा नहीं दी जा सकती। अगर वाकई पर्यावरण बचाना है तो पहले सार्वजनिक परिवहन सुधारो, इलेक्ट्रिक गाड़ियों को सस्ता करो। सिर्फ आम आदमी की गाड़ी में महंगा और कम माइलेज देने वाला ईंधन मत डालो।
आगे का रास्ता क्या?
टाउनहॉल के अंत में AAP ने एक प्रस्ताव पास किया। इसमें 3 मुख्य मांगें सरकार तक पहुंचाने का फैसला लिया गया। साथ ही देशभर में "शुद्ध पेट्रोल बचाओ" हस्ताक्षर अभियान चलाने की भी घोषणा की।
केजरीवाल ने कहा: "हम इथेनॉल के खिलाफ नहीं हैं। हम जबरदस्ती के खिलाफ हैं। पहले लोगों को समझाओ, विकल्प दो, कीमत कम करो, फिर नीति लागू करो।"
अब सवाल ये है कि सरकार इन 3 मांगों पर क्या जवाब देती है। एक तरफ ऊर्जा सुरक्षा और किसानों की बात है, दूसरी तरफ करोड़ों वाहन मालिकों की चिंता है। इन दोनों के बीच का रास्ता निकालना सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।
क्योंकि आखिर में बात सीधी है: नीति लोगों के लिए होती है, लोग नीति के लिए नहीं।
Sajjadali Nayani ✍
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