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Tuesday, 20 January 2026

मलक्का जलडमरूमध्य में अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन के पास ईरानी कार्गो जहाज की मौजूदगी: तनाव की नई कड़ी

मलक्का जलडमरूमध्य में अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन के पास ईरानी कार्गो जहाज की मौजूदगी: तनाव की नई कड़ी
-Friday World January 21,2026 
विश्व की सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक मलक्का जलडमरूमध्य (Straits of Malacca) इन दिनों भू-राजनीतिक तनाव का केंद्र बन गया है। यहां अमेरिका का परमाणु-संचालित विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन (CVN-72) अपने कैरियर स्ट्राइक ग्रुप (CSG) के साथ पश्चिम की ओर बढ़ रहा है, और ठीक इसी रास्ते पर एक ईरानी बल्क कैरियर जहाज अर्विन (Arvin, IMO 9193202) भी उसी दिशा में जा रहा है। यह संयोग नहीं, बल्कि बढ़ते अमेरिका-ईरान तनाव का एक रोचक और संभावित खतरनाक पहलू है। 

 घटना का विवरण समुद्री ट्रैकिंग डेटा और ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) के अनुसार, 18 जनवरी 2026 को सिंगापुर के पास मलक्का जलडमरूमध्य में यूएस नेवी के जहाजों के समूह ने ईरानी जहाज अर्विन को ओवरटेक किया। दोनों पक्ष कुछ घंटों तक काफी निकटता में रहे, जहां रडार और AIS सिस्टम से एक-दूसरे को साफ देखा जा सकता था। अमेरिकी कैरियर ग्रुप में यूएसएस अब्राहम लिंकन के अलावा कई गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर शामिल हैं, जो दक्षिण चीन सागर से मध्य पूर्व की ओर जा रहे हैं। 

ईरानी जहाज अर्विन 5 जनवरी को शंघाई से रवाना हुआ था और 4 फरवरी (कुछ रिपोर्ट्स में 31 जनवरी) को बंदर अब्बास पहुंचने वाला है। यह जहाज कई दिनों से सामान्य गति और निर्धारित मार्ग पर चल रहा था, जिससे लगता है कि अमेरिकी कैरियर ग्रुप ने इस रूट को अपनाया, न कि ईरानी जहाज ने अमेरिकी पोत का पीछा किया। फिर भी, निकटता ने सवाल खड़े कर दिए हैं – क्या यह महज संयोग है या ईरान की खुफिया जानकारी जुटाने की रणनीति? 

 अर्विन जहाज का बैकग्राउंड अर्विन एक बल्क कैरियर है, जो ईरान की इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान शिपिंग लाइंस (IRISL) से जुड़ा हुआ है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग (OFAC) ने इसे 8 जून 2020 को सेकंडरी सैंक्शंस की सूची में डाल दिया था। पिछले तीन वर्षों से यह जहाज सिर्फ चीन-ईरान रूट पर ही संचालित हो रहा है। यह कोई खास खुफिया जहाज नहीं है, जैसे कि पहले रेड सी में तैनात MV साविज या MV बेहशाद, या फुजैराह के पास लंबे समय तक घूमने वाला टैंकर बेटा (जो बाद में ईरानी नौसेना का IRINS मकरान बना)। 

फिर भी, IRISL से जुड़े किसी भी जहाज को जरूरत पड़ने पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) आसानी से खुफिया कार्यों में इस्तेमाल कर सकता है। ऐसे में अर्विन की मौजूदगी अमेरिकी नौसेना की गतिविधियों की रिपोर्टिंग के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। 

 अमेरिकी कैरियर ग्रुप की तैनाती का संदर्भ यूएसएस अब्राहम लिंकन को दक्षिण चीन सागर से अचानक मध्य पूर्व भेजा गया है। यह फैसला ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों, कथित नरसंहारों और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते टकराव के बीच लिया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह ग्रुप 25 जनवरी तक अरब सागर या फारस की खाड़ी में पहुंच सकता है। ट्रंप प्रशासन ने ईरान को चेतावनी दी है कि प्रदर्शनकारियों पर हमले जारी रहे तो अमेरिका हस्तक्षेप कर सकता है। 

यह तैनाती अमेरिकी नौसेना की रणनीति का हिस्सा लगती है, जहां इंडो-पैसिफिक से मध्य पूर्व की ओर फोर्स को रीडायरेक्ट किया जा रहा है। पेंटागन ने अभी तक आधिकारिक टिप्पणी नहीं की, लेकिन टैंकरों और रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट की मूवमेंट से लगता है कि बड़े पैमाने पर ऑपरेशन की तैयारी हो रही है। 

 क्या है खतरा? मलक्का जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे व्यस्त और संकरे समुद्री मार्गों में से एक है, जहां रोजाना लाखों बैरल तेल गुजरता है। यहां किसी भी गलतफहमी या उकसावे से बड़ा संकट पैदा हो सकता है। हालांकि दोनों जहाज सामान्य ट्रांजिट में हैं, लेकिन ईरानी जहाज की सैंक्शंड स्थिति और अमेरिकी कैरियर की तैनाती ने इसे भू-राजनीतिक ड्रामा बना दिया है।

 ईरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि अमेरिकी जहाजों पर हमला किया जा सकता है, जबकि अमेरिका डिटरेंस दिखाने पर जोर दे रहा है। यह घटना याद दिलाती है कि समुद्री मार्ग कितने संवेदनशील हैं और छोटी-सी निकटता भी बड़े युद्ध की आहट बन सकती है। 

विश्व अब मलक्का से फारस की खाड़ी तक की इस यात्रा पर नजर रखे हुए है। क्या यह सिर्फ एक संयोग है या ईरान-अमेरिका टकराव की नई शुरुआत? समय ही बताएगा, लेकिन फिलहाल तनाव का पारा लगातार बढ़ रहा है।

 Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World January 21,2026