मिडिल ईस्ट में आग लग गई है!
28 फरवरी 2026 को इज़राइल और अमेरिका ने संयुक्त रूप से ईरान पर बड़े पैमाने पर हमला किया, जिसे इज़राइल ने "पूर्वनिवारक कार्रवाई" और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने "मेजर कॉम्बैट ऑपरेशंस" करार दिया। तेहरान में विस्फोटों की गूंज सुनाई दी, ईरानी सुप्रीम लीडर के परिसर सहित सैन्य और सरकारी ठिकाने निशाना बने। लेकिन ईरान चुप नहीं बैठा – उसने तुरंत जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी, जो इतिहास की सबसे बड़ी मिसाइल-ड्रोन हमलों में से एक मानी जा रही है।
ईरानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने "पहली लहर" में सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन लॉन्च किए। सूत्रों के मुताबिक, कुल 400 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइल और 300 से अधिक ड्रोन एक साथ छोड़े गए। ये हमले सिर्फ इज़राइल तक सीमित नहीं रहे
– कुवैत, अबू धाबी (UAE), सऊदी अरब, बहरीन, कतर और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी एयर बेस भी प्रमुख निशाने बने।
- कतर का अल उदैद एयर बेस (अमेरिका का सबसे बड़ा क्षेत्रीय बेस) पर मिसाइलें गिरीं, जहां पैट्रियट डिफेंस सिस्टम ने कुछ को रोक लिया लेकिन विस्फोटों की खबरें आईं।
- बहरीन में US फिफ्थ फ्लीट हेडक्वार्टर पर हमला, जहां अमेरिकी नौसेना का मुख्यालय है।
- कुवैत के अली अल सलेम एयर बेस और UAE के अल धाफरा बेस पर भी मिसाइलें दागी गईं।
- जॉर्डन और अन्य क्षेत्रीय ठिकानों पर भी रिपोर्ट्स हैं कि ईरानी मिसाइलें पहुंचीं।
सबसे चौंकाने वाली खबर: अमेरिकी विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन (Abraham Lincoln Carrier Strike Group) को भी ईरानी मिसाइलों का निशाना बनाया गया। यह कैरियर ग्रुप अरब सागर में तैनात था, जहां फी-35C फाइटर्स और अन्य एसेट्स के साथ यह अमेरिकी नौसेना का प्रमुख हमला साधन है। ईरान ने हाइपरसोनिक मिसाइलों की ताकत का दावा किया है, जो अमेरिकी कैरियर को निशाना बनाने में सक्षम हो सकती हैं। हालांकि, अमेरिकी डिफेंस सिस्टम ने अधिकांश को रोक लिया, लेकिन हमले की तीव्रता से क्षेत्र में खलबली मच गई।
ईरान का दावा है कि यह कार्रवाई "क्रशिंग रिवेंज" है – पिछले जून 2025 के 12-दिन के युद्ध में इज़राइल-अमेरिका ने ईरानी न्यूक्लियर साइट्स पर हमला किया था, जिसके जवाब में ईरान ने अल उदैद पर मिसाइल दागी थीं। अब फिर वही पैटर्न दोहराया गया, लेकिन इस बार स्केल बहुत बड़ा है। ईरानी मीडिया इसे "शक्तिशाली और विनाशकारी" बता रहा है, जबकि पश्चिमी मीडिया इसे "सीमित" या "अधिकांश इंटरसेप्ट" करार दे रहा है।
गोदी मीडिया का दोहरा चेहरा अमेरिका-इज़राइल समर्थक मीडिया (जैसे CNN, Fox, आदि) सिर्फ "ईरानी हमला" बता कर बात खत्म कर देता है। वे नुकसान की पूरी तस्वीर नहीं दिखाते – कितनी मिसाइलें सफल रहीं, कितने बेस प्रभावित हुए, अब्राहम लिंकन पर क्या असर पड़ा – इन सब पर पर्दा डाल देते हैं। जबकि ईरानी और क्षेत्रीय स्रोत दावा करते हैं कि अमेरिकी बेसों पर "भारी नुकसान" हुआ है। हकीकत यह है कि इंटरसेप्शन रेट हाई है (पिछले हमलों में 85-90%), लेकिन इतनी बड़ी संख्या में हमले से डिफेंस सिस्टम पर दबाव पड़ता है।
क्षेत्रीय प्रभाव
- UAE, कतर, कुवैत ने अपना एयरस्पेस बंद कर दिया। - इज़राइल में इमरजेंसी घोषित, सायरन बज रहे हैं।
- ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिकन लोगों से "सरकार बदलने" की अपील की, जो एक बड़ा राजनीतिक संदेश है।
- तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, क्योंकि गल्फ में तनाव बढ़ गया है।
ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर हमले जारी रहे तो और बड़ी कार्रवाई होगी। क्या यह युद्ध पूरे मिडिल ईस्ट को निगल लेगा? या डिप्लोमेसी काम आएगी? फिलहाल, ईरान की जबरदस्त जवाबी कार्रवाई ने दुनिया को हिला दिया है – और यह सिर्फ शुरुआत हो सकती है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 28 February 2026