-Friday World 14th Feb 2026
मध्य पूर्व और पश्चिम एशिया की स्थिति तेजी से तनावपूर्ण हो रही है। ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका ने ईरान को सैन्य कार्रवाई की खुली धमकी दे दी है, जबकि ईरान ने किसी भी कीमत पर झुकने से इनकार कर दिया है। ऐसे में इस विवाद में अब चीन ने सीधे एंट्री ले ली है। म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस (MSC 2026) में चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने अमेरिका को सीधे चेतावनी दी है – ‘ईरान मामले में सावधानी बरतें, नहीं तो मध्य पूर्व की शांति खतरे में पड़ जाएगी।’
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को ‘सैन्य उद्देश्यों’ वाला बताते हुए जून 2025 में कुछ सुविधाओं पर कार्रवाई का दावा किया था। ईरान ने इसे आक्रामकता करार दिया और जवाबी कदम उठाने की बात कही। इस बीच, म्यूनिख में 14 फरवरी 2026 को वांग यी ने कहा कि ईरान की मौजूदा स्थिति पूरे मध्य पूर्व को प्रभावित कर रही है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा:
“अमेरिका को ईरान के साथ बातचीत में सावधानी बरतनी चाहिए। यह स्थिति मध्य पूर्व की शांति पर सीधा असर डाल रही है। नए विवाद पैदा करने के बजाय मध्यस्थता और संवाद से समस्याओं का हल निकालना चाहिए।”
वांग यी ने जोर दिया कि किसी भी पक्ष को नया संघर्ष शुरू नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ईरान से जुड़े मुद्दे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बेहद संवेदनशील हैं और सभी को संयम बरतना होगा। यह चेतावनी अमेरिका के लिए साफ संदेश है कि चीन ईरान के साथ अपने मजबूत संबंधों के कारण इस मामले में निष्क्रिय नहीं रहेगा।
यूक्रेन युद्ध पर यूरोप को कड़ी नसीहत चीन के विदेश मंत्री ने म्यूनिख कॉन्फ्रेंस में यूक्रेन युद्ध पर भी यूरोप को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि यूक्रेन का संकट जड़ से खत्म करना जरूरी है। यूरोपीय देशों को इस झगड़े को सिर्फ बाहर से नहीं देखना चाहिए। वांग यी ने यूरोपियन यूनियन से अपील की कि वे खुद पहल करें और संकट का समाधान निकालें। उन्होंने कहा:
“यूक्रेन का संकट सिर्फ यूरोप का नहीं, बल्कि वैश्विक है। यूरोप को रूस और यूक्रेन के बीच चल रही बातचीत का समर्थन करना चाहिए, लेकिन खुद भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। जड़ों से समस्या हल होनी चाहिए, सिर्फ सतही उपाय नहीं चलेंगे।”
चीन ने बार-बार कहा है कि वह यूक्रेन युद्ध में तटस्थ है और शांति वार्ता का समर्थन करता है। वांग यी ने यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबीहा से मुलाकात में भी कहा कि चीन यूक्रेन को मानवीय सहायता देगा और राजनीतिक समाधान के लिए सहयोग करेगा।
अमेरिका-चीन टकराव के बीच बैकग्राउंड म्यूनिख कॉन्फ्रेंस में वांग यी के बयान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के भाषण के ठीक बाद आए। रुबियो ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खतरा बताया और यूरोप से मजबूत रुख अपनाने की मांग की। वहीं वांग यी ने ताइवान, जापान और वैश्विक व्यवस्था पर भी अमेरिका पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अमेरिका अगर ताइवान के जरिए चीन को तोड़ने की कोशिश करेगा तो टकराव हो सकता है।
चीन ने साफ किया कि वह अमेरिका के साथ ‘सकारात्मक और व्यावहारिक’ रिश्ते चाहता है, लेकिन लाल रेखा पार करने पर तैयार भी है।
मध्य पूर्व की अस्थिरता और वैश्विक प्रभाव ईरान-अमेरिका टकराव अब सिर्फ द्विपक्षीय नहीं रहा। इसने पूरे मध्य पूर्व को अस्थिर कर दिया है – इजराइल, सऊदी अरब, तुर्की सब प्रभावित हैं। चीन, जो ईरान का बड़ा आर्थिक साझेदार है, अब खुले तौर पर अमेरिका को चेतावनी दे रहा है। यह दिखाता है कि बीजिंग मध्य पूर्व में अपनी भूमिका बढ़ाना चाहता है और अमेरिकी एकतरफा कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं करेगा।
यूरोप के लिए भी यह संदेश है कि यूक्रेन के अलावा मध्य पूर्व के मुद्दे भी वैश्विक सुरक्षा से जुड़े हैं। अगर ईरान-अमेरिका युद्ध हुआ तो ऊर्जा संकट, प्रवासन और आतंकवाद जैसी समस्याएं यूरोप तक पहुंच सकती हैं।
संवाद या टकराव?** म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस 2026 ने दिखाया कि दुनिया दो ध्रुवों में बंट रही है। एक तरफ अमेरिका और उसके सहयोगी, दूसरी तरफ चीन और उसके साझेदार। वांग यी का बयान साफ है
– संवाद और मध्यस्थता से समस्याएं सुलझाएं, युद्ध से नहीं। लेकिन अगर अमेरिका ईरान पर सैन्य कार्रवाई करता है तो चीन चुप नहीं बैठेगा।
क्या दुनिया फिर से ठंडे युद्ध की ओर बढ़ रही है? या संवाद से रास्ता निकलेगा? मध्य पूर्व की शांति अब बड़े सवालों के घेरे में है। समय बताएगा कि ‘ईरान मामले में संभलकर रहो’ की चेतावनी कितनी असरदार साबित होती है।
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Sajjadali Nayani ✍
Friday World 14th Feb 2026