-Friday World 15th Feb 2026
नई दिल्ली, 15 फरवरी 2026: भारतीय राजनीति में एक बार फिर गरमागरम बहस छिड़ गई है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील को लेकर जमकर निशाना साधा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने पीएम मोदी के हालिया इंटरव्यू को 'स्क्रिप्टेड और हताशा भरी पीआर एक्सरसाइज' करार देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री 'झुके भी हैं और थके भी हैं'। यह बयान अमेरिका के साथ ट्रेड डील, किसानों के मुद्दों और केंद्रीय बजट की आलोचना से ध्यान भटकाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
क्या है विवाद का केंद्र? फरवरी 2026 की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम ट्रेड डील की घोषणा की। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर दावा किया कि भारत अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ और नॉन-टैरिफ बैरियर्स को जीरो करेगा। बदले में अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ को 25% से घटाकर 18% करेगा। ट्रंप ने इसे 'मोदी की रिक्वेस्ट' पर हुआ समझौता बताया, जिसमें भारत अमेरिका से ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, कृषि और अन्य उत्पादों की बड़ी खरीद पर सहमत हुआ है।
हालांकि, डील की पूरी डिटेल्स अभी सार्वजनिक नहीं हुई हैं। अमेरिका ने अपनी फैक्टशीट में कुछ बदलाव भी किए – जैसे दालों (pulses) का जिक्र हटाना और 500 अरब डॉलर की खरीद को 'प्रतिबद्ध' से 'इरादा' में बदलना। भारत सरकार ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जोर दिया कि किसानों के हित सुरक्षित हैं – चावल, गेहूं, दूध, मोटे अनाज जैसे संवेदनशील उत्पाद डील से बाहर रखे गए हैं।
कांग्रेस का हमला और जयराम रमेश का बयान 15 फरवरी 2026 को पीएम मोदी ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में बजट को 'तैयारी और प्रेरणा से उपजा' बताया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक स्थिरता से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और भारत 38 देशों के साथ FTA पर काम कर रहा है।
इस इंटरव्यू के तुरंत बाद जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा:
"प्रधानमंत्री जानते हैं कि इस साल का बजट एक फीका बजट रहा है और इसमें दिमागी थकान के सारे निशान दिख रहे हैं। मार्केट ने नकारात्मक प्रतिक्रिया दी है और निवेशक प्रभावित नहीं हुए हैं। इसलिए, उन्हें बजट पेश होने के 15 दिन बाद और संसद में विपक्ष की तरफ से इसकी बुराई किए जाने के कुछ दिनों बाद इंटरव्यू देने की जरूरत महसूस हुई।"
रमेश ने आगे कहा, "ट्रेड डील पर अमेरिका के सामने सरेंडर करने की वजह से घेरे में आए और हमले झेल रहे प्रधानमंत्री अब हेडलाइन मैनेजमेंट के अपने पसंदीदा तरीके का सहारा ले रहे हैं। वह लाखों किसानों के साथ अपने धोखे और दूसरी हार से ध्यान हटाने की कोशिश कर रहे हैं…प्रधानमंत्री झुके भी हैं और थके भी हैं।"
कांग्रेस का दावा है कि यह डील भारतीय किसानों, लघु उद्योगों और व्यापारियों के लिए 'काला दिन' साबित होगी। पार्टी ने इसे 'एकतरफा समर्पण' करार दिया और संसद में पूरी डिटेल्स साझा करने की मांग की।
राहुल गांधी के सवाल और किसानों की नाराजगी इससे पहले राहुल गांधी ने लोकसभा में पीएम मोदी से 5 सवाल पूछे थे, जिसमें कृषि बाजार खोलने, उद्योगों पर असर, रूस से तेल खरीद बंद करने की शर्त और 'मेक इन इंडिया' की स्थिति शामिल थी। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने डील को 'भारतीय कृषि का अमेरिकी मल्टीनेशनल कंपनियों के सामने आत्मसमर्पण' बताया और देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन का ऐलान किया। किसान संगठनों का कहना है कि अमेरिकी कृषि उत्पादों की बाढ़ से स्थानीय किसान प्रभावित होंगे।
सरकार का बचाव सरकार का पक्ष है कि डील से एक्सपोर्ट बढ़ेगा, रोजगार आएगा और अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। पीएम मोदी ने कहा कि यह बजट 'मजबूरी का नहीं, तैयारियों का' है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि कोई भी ऐसा उत्पाद डील में शामिल नहीं है जो किसानों को नुकसान पहुंचाए।
राजनीतिक मायने यह विवाद 2026 के राजनीतिक माहौल को और गरमा रहा है। कांग्रेस इसे मोदी सरकार की 'दूसरी हार' बता रही है – पहली हार किसान कानूनों की वापसी को मानते हुए। विपक्ष एकजुट होकर किसानों और व्यापारियों के मुद्दे पर सरकार को घेर रहा है। वहीं, भाजपा इसे विदेश नीति और आर्थिक कूटनीति की सफलता के रूप में पेश कर रही है।
ट्रेड डील पर पारदर्शिता की मांग बढ़ रही है। यदि सरकार डिटेल्स नहीं साझा करती, तो संसद में हंगामा और बढ़ सकता है। यह घटना दिखाती है कि अंतरराष्ट्रीय समझौते कितनी तेजी से घरेलू राजनीति का मुद्दा बन जाते हैं। क्या यह डील भारत के लिए वरदान साबित होगी या अभिशाप? आने वाला समय बताएगा।
Sajjadali Nayani ✍
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