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Sunday, 8 February 2026

गुजरात के भावनगर में जश्न-ए-बकियतुल्लाह मौलाना कल्बे जव्वाद साहब की जोशीली उपस्थिति ने कौम को दिया नया जोश!

गुजरात के भावनगर में जश्न-ए-बकियतुल्लाह मौलाना कल्बे जव्वाद साहब की जोशीली उपस्थिति ने कौम को दिया नया जोश!
-Friday world 8/2/2026
भावनगर, गुजरात: शिया समुदाय के प्रमुख ओलमा और लोकप्रिय रहनुमा मौलाना सैयद कल्बे जव्वाद नक़वी साहब की प्रेरक मौजूदगी ने भावनगर में आयोजित जश्न-ए-बकियतुल्लाह को ऐतिहासिक और भावुक बना दिया। यह जश्न हजरत इमाम महदी (अलैहिस्सलाम) की विलादत (जन्म) के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, जहां "बकियतुल्लाह" का मतलब अल्लाह का बाकी रहने वाला नूर—यानी हजरत इमाम महदी (अ.स.)—होता है। 

शिया मान्यता के अनुसार, इमाम महदी (अ.स.) अल्लाह की रहमत का आखिरी इमाम हैं, जो गैबत में हैं और ज़हूर (प्रकट होने) के समय दुनिया में इंसाफ और अमन कायम करेंगे।
 तहरीके कर्बला कमेटी और भावनगर KSI जमात की नई बॉडी ने इस खास मौके पर मौलाना साहब का पूरे जोश, सम्मान और उत्साह के साथ स्वागत किया। 
    
   स्वागत समारोह में मौलाना कल्बे जव्वाद साहब को शाल ओढ़ाई गई, मोमेंटो भेंट किया गया मौलाना साहब ने मुस्कुराते हुए सभी का दुआएं दीं और कहा कि यह प्यार इमाम महदी (अ.स.) के नूर की बारकत है, जो कौम को एकजुट रखता है।

 स्वागत के बाद मौलाना कल्बे जव्वाद साहब ने पूरे जज्बे और जोश के साथ कौम को खिताब दिया। अपनी मशहूर और दिल को छू लेने वाली शैली में उन्होंने जश्न-ए-बकियतुल्लाह के गहरे मायने बताए। उन्होंने कहा, "बकियतुल्लाह यानी अल्लाह का बाकी रहने वाला—यह हजरत इमाम महदी (अ.स.) हैं, जिनकी विलादत (जन्म) 15 शाबान को हुई थी। यह नूर कभी खत्म नहीं होता। आज हम इस जश्न में इमाम ज़मान (अ.स.) के इंतजार में अपनी तैयारी मजबूत करते हैं—नफरत, जुल्म और फूट से दूर रहकर मोहब्बत, इंसाफ और अमन की राह अपनाते हैं।" 

मौलाना साहब ने खास तौर पर युवाओं से अपील की कि वे इमाम महदी (अ.स.) की शिक्षाओं को समझें, कर्बला की तहरीर को दिल में बसाएं और समाज में एकता का पैगाम फैलाएं। उनकी बातों ने मौजूद लोगों के दिलों को छू लिया

यह कार्यक्रम शिया कौम की एकजुटता, मौलाना कल्बे जव्वाद साहब के प्रति गहरा लगाव और इमाम महदी (अ.स.) की विलादत पर खुशी का प्रतीक बना। तहरीके कर्बला कमेटी टीम ने आयोजन को सफल बनाने में पूरी मेहनत की, जिसकी तारीफ हर तरफ हो रही है। 

मौलाना कल्बे जव्वाद साहब, जो लखनऊ के इमाम-ए-जुमा और शिया समुदाय के प्रमुख चेहरों में शुमार हैं, ने कहा, "कौम का यह प्यार हमारी सबसे बड़ी ताकत है। जश्न-ए-बकियतुल्लाह हमें याद दिलाता है कि इमाम महदी (अ.स.) का नूर हमेशा चमकता रहेगा और एक दिन ज़हूर होकर दुनिया को इंसाफ से भर देगा।" 

भावनगर में यह जश्न धार्मिक सद्भाव, कौमी एकता और इमाम ज़मान (अ.स.) के इंतजार का शानदार उदाहरण साबित हुआ। हजारों लोगों का जोश और मौजूदगी ने साबित कर दिया कि इमाम महदी (अ.स.) की विलादत पूरे भारत में खुशी का पैगाम है!

 Sajjadali Nayani ✍
 Friday world 8/2/2026