प्रतिकात्मक तस्वीर
पुलिस से झड़प, 40+ कार्यकर्ता हिरासत में
राजकोट में गोडसे को 'देशभक्त' दिखाने वाले नाटक पर कांग्रेस का करारा जवाब! मंच तोड़ा, शो रद्द, गूंजा 'गांधी अमर रहे' का नारा** राजकोट, गुजरात: महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को केंद्र में रखकर रचे गए विवादित नाटक 'हूं नाथूराम' (या 'मैं नाथूराम गोडसे') ने एक बार फिर गुजरात की राजनीति को गरमा दिया है। शहर के प्रसिद्ध हेमू गढ़वी हॉल में आज रात 9 बजे इस नाटक का शो प्रस्तुत होने वाला था, लेकिन गुजरात कांग्रेस और एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं ने इसे शुरू होने से पहले ही जबरदस्त विरोध दर्ज कराया। कार्यकर्ताओं ने मंच पर चढ़कर सेट और प्रॉप्स में तोड़फोड़ की, जिसके कारण पूरा शो रद्द हो गया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच जोरदार झड़प हुई और पुलिस ने 40 से अधिक कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।
विरोध का मूल कारण:गांधीजी की हत्या को जस्टिफाई करने और गोडसे को हीरो बनाने का आरोप
कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आरोप है कि यह नाटक महात्मा गांधी की हत्या को उचित ठहराने का प्रयास करता है और नाथूराम गोडसे को देशभक्त के रूप में पेश करके राष्ट्रपिता के आदर्शों का अपमान करता है। उन्होंने इसे "गांधीजी के हत्यारे को महिमामंडित करने की साजिश" करार दिया। आयोजकों पर इल्ज़ाम लगा कि उन्होंने विरोध की परवाह किए बिना किसी भी कीमत पर शो कराने की जिद पकड़ ली थी, जिसके चलते कार्यकर्ता शाम को हॉल पर धावा बोलकर मंच तोड़ने पर उतर आए।
प्रदर्शन के दौरान नारे गूंजे:
- "गांधीजी अमर रहे!"
- "जब तक सूरज-चाँद रहेगा, गांधीजी तेरा नाम रहेगा!"
- "गांधीजी राष्ट्रपिता थे, गोडसे आतंकवादी था!"
ये नारे स्पष्ट करते हैं कि कांग्रेस के लिए महात्मा गांधी का सम्मान अटल है और उनके हत्यारे को किसी भी रूप में सम्मान देना अस्वीकार्य है।
घटना का क्रम: शांतिपूर्ण विरोध से हिंसक झड़प तक नाटक के आयोजन की सूचना मिलते ही कांग्रेस ने शुरुआत से विरोध दर्ज कराया था। पार्टी ने आयोजकों और हेमू गढ़वी हॉल प्रशासन से कई बार अनुरोध किया कि नाटक रद्द किया जाए, लेकिन अनुरोध ठुकरा दिए गए। नतीजतन, शो शुरू होने से ठीक पहले बड़ी संख्या में कार्यकर्ता हॉल में पहुंचे और मंच पर चढ़कर सेट, प्रॉपर्टी और अन्य सामग्री को तोड़-फोड़ दिया।
इस खबर पर डिवीजन पुलिस का बड़ा दल मौके पर पहुंचा। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की, जिसके दौरान दोनों पक्षों के बीच हाथापाई और झड़प हो गई। कई कार्यकर्ताओं को चोटें भी आईं। अंत में पुलिस ने 40 से अधिक कांग्रेसियों को गिरफ्तार कर डिवीजन पुलिस स्टेशन ले जाया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि उनके इस सशक्त विरोध के कारण ही नाटक का शो पूरी तरह रद्द हो गया।
नाटक का विवादित इतिहास: पहले सूरत-वडोदरा, अब राजकोट में बवाल यह नाटक पहले गुजरात के सूरत और वडोदरा में भी मंचित हो चुका है, जहां इसे विरोध और विवाद का सामना करना पड़ा था। कांग्रेस ने साफ घोषणा कर दी है कि अब जहां-जहां भी इस नाटक का मंचन होगा, वहां उग्र विरोध किया जाएगा और इसे हर हाल में रोका जाएगा।
यह घटना गुजरात में राजनीतिक तापमान को और बढ़ा रही है। महात्मा गांधी का जन्मस्थान पोरबंदर गुजरात में होने के कारण राज्य में उनके प्रति विशेष संवेदनशीलता है। कांग्रेस का यह कड़ा रुख एक तरफ उनके कार्यकर्ताओं में जोश भर रहा है, तो दूसरी तरफ आयोजकों और विपक्षी दलों से तीखी प्रतिक्रियाएं भी आ रही हैं।
यह घटना दर्शाती है कि भारत में गांधी-गोडसे का विवाद आज भी जीवंत और संवेदनशील बना हुआ है। कांग्रेस इसे राष्ट्रपिता के आदर्शों की रक्षा मानती है, जबकि विरोधी इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताते हैं।
Sajjadali Nayani ✍
Friday world 8/2/2026