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Saturday, 7 February 2026

ट्रंप का 'SAVE अमेरिका' बड़ा दांव: चुनाव प्रक्रिया में क्रांतिकारी बदलाव की तैयारी, हाउस में वोट जल्द, सीनेट में फिलिबस्टर का खतरा!

ट्रंप का 'SAVE अमेरिका' बड़ा दांव: चुनाव प्रक्रिया में क्रांतिकारी बदलाव की तैयारी, हाउस में वोट जल्द, सीनेट में फिलिबस्टर का खतरा!
-Friday world 8/2/2026
ट्रंप की चेतावनी - 'चुनाव सुधारो या देश खो दो!' SAVE एक्ट से वोटर रजिस्ट्रेशन में नागरिकता प्रमाण अनिवार्य, फोटो आईडी हर राज्य में, 

2026 मिडटर्म से पहले राजनीतिक भूचाल वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर से दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। उनके 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' (MAGA) नारे के बाद अब 'SAVE अमेरिका' (Safeguard American Voter Eligibility Act या SAVE America Act) के जरिए वे अमेरिका की चुनावी व्यवस्था को पूरी तरह बदलने की कोशिश में जुटे हैं। ट्रंप का दावा है कि यह कानून गैर-नागरिकों को वोटिंग से रोकेगा और चुनावों की अखंडता सुनिश्चित करेगा, लेकिन डेमोक्रेट्स इसे 'मतदाता दमन' की सबसे बड़ी साजिश बता रहे हैं। 2026 के मिडटर्म चुनावों से ठीक पहले यह मुद्दा अमेरिकी राजनीति में तूफान मचा रहा है। 

ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर रिपब्लिकन नेताओं से अपील की है कि वे इस बिल को जल्द पास करें। उन्होंने कड़ी चेतावनी दी, "अमेरिका की चुनाव प्रक्रिया धांधली से भरी है, चोरी हो रही है और पूरी दुनिया में मजाक बन गई है। या तो हम इसे ठीक करेंगे, या हमारे पास कोई देश ही नहीं बचेगा।" व्हाइट हाउस के अनुसार, SAVE एक्ट का मुख्य मकसद विदेशी हस्तक्षेप रोकना और मतदाताओं की नागरिकता की सख्त जांच करना है। ट्रंप ने हाल ही में हाउस रिपब्लिकन्स से कहा कि वे इस बिल को पास करें, और यहां तक कि चुनावों को 'नेशनलाइज' करने की बात भी की, हालांकि व्हाइट हाउस ने बाद में इसे बैकट्रैक किया। 

SAVE एक्ट की मुख्य बातें: क्या बदलेगा चुनावी सिस्टम?

 SAVE एक्ट (H.R.22 और SAVE America Act के रूप में पेश) नेशनल वोटर रजिस्ट्रेशन एक्ट 1993 में बड़े संशोधन लाएगा। इसके प्रमुख प्रावधान: 

- फेडरल चुनावों में रजिस्ट्रेशन के लिए नागरिकता का दस्तावेजी प्रमाण (जैसे पासपोर्ट या जन्म प्रमाण पत्र) अनिवार्य। 

- ऑनलाइन या मेल से रजिस्ट्रेशन मुश्किल हो जाएगा, क्योंकि दस्तावेज व्यक्तिगत रूप से जमा करने होंगे। 

- हर राज्य में फोटो आईडी वोटिंग अनिवार्य, और गैर-नागरिकों को वोटर रोल से हटाने के नए कदम। 

- राज्य स्तर पर वोटर रजिस्ट्रेशन ड्राइव और मेल-इन रजिस्ट्रेशन पर रोक लग सकती है। 

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह कानून चुनावी धांधली रोकेगा। ट्रंप लंबे समय से 2020 चुनावों में फ्रॉड के आरोप लगाते रहे हैं, हालांकि अदालतों ने इन्हें खारिज किया। 2025 में उन्होंने एक्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी कर चुनावी अखंडता मजबूत करने की नीति बनाई, जिसमें नागरिकता प्रमाण पर जोर था। रिपब्लिकन सांसद चिप रॉय (टेक्सास) और माइक ली (यूटा) इस बिल के मुख्य समर्थक हैं। एलन मस्क जैसे प्रभावशाली लोग भी इसका समर्थन कर रहे हैं। 

यह बिल अगर पास हो गया तो अमेरिका के चुनावी सिस्टम में ऐतिहासिक बदलाव आएगा। कई राज्य पहले से वोटर आईडी लागू कर चुके हैं, लेकिन फेडरल स्तर पर नागरिकता प्रमाण पहली बार अनिवार्य होगा। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इससे लाखों अमेरिकी नागरिक प्रभावित होंगे, खासकर वे जिनके पास पासपोर्ट या मूल जन्म प्रमाण पत्र नहीं है - जैसे अल्पसंख्यक, गरीब, बुजुर्ग और ग्रामीण क्षेत्रों के लोग। 

डेमोक्रेट्स का तीखा विरोध: 'यह मतदाताओं को चुप कराने की कोशिश' डेमोक्रेटिक पार्टी ने SAVE एक्ट को 'वोटर सप्रेशन' का सबसे बड़ा हमला बताया है। सीनेट लीडर चक शूमर और वोटिंग राइट्स ग्रुप जैसे ब्रेनन सेंटर, ACLU और कैंपेन लीगल सेंटर का कहना है कि यह बिल लाखों योग्य मतदाताओं को वोटिंग से वंचित कर देगा। उनका तर्क है कि अमेरिका में पहले से ही नागरिकता की शपथ ली जाती है, और गैर-नागरिक वोटिंग के मामले बेहद दुर्लभ हैं (कई राज्यों में जांच से सिर्फ 0.04% मामले मिले)। 

विपक्ष का आरोप है कि ट्रंप 2026 मिडटर्म से पहले चुनाव प्रक्रिया पर नियंत्रण जमाना चाहते हैं। यह बिल ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, मेल-इन और वोटर ड्राइव को प्रभावित करेगा, जो महामारी के दौरान लाखों लोगों के लिए उपयोगी थे। डेमोक्रेट्स ने चेतावनी दी कि सीनेट में फिलिबस्टर से इसे रोका जाएगा, और रिपब्लिकन्स को फिलिबस्टर खत्म करने की मांग करनी पड़ सकती है। 

ऐतिहासिक संदर्भ: ट्रंप की चुनाव सुधार की लड़ाई जारी ट्रंप का चुनाव सुधार अभियान 2016 से चल रहा है। 2020 हार के बाद जनवरी 6 कैपिटल हमले की घटना हुई। 2024 जीत के बाद वे इसे लागू करने में जुटे हैं। SAVE एक्ट का मूल संस्करण 2025 में हाउस से पास हुआ था, लेकिन सीनेट में अटक गया। अब 2026 में नया वर्जन (SAVE America Act) पेश किया गया है, जिसमें पोल पर नागरिकता प्रमाण की मांग हटाई गई है, लेकिन रजिस्ट्रेशन में सख्ती बरकरार है। हाउस में अगले हफ्ते वोट होने की संभावना है। 

रिपब्लिकन्स का कहना है कि कई राज्य चुनाव प्रक्रियाएं भ्रष्ट हैं, और फेडरल हस्तक्षेप जरूरी है। ट्रंप ने कहा कि कम से कम 15 जगहों पर वोटिंग को नेशनल स्तर पर नियंत्रित करना चाहिए। 

 वैश्विक प्रभाव और भारत-अमेरिका संबंध यह मुद्दा अमेरिका तक सीमित नहीं। भारत जैसे देशों में वोटर आईडी पहले से अनिवार्य है, लेकिन अमेरिका में यह विवादास्पद है। ट्रंप की नीतियां इंडो-यूएस संबंधों पर असर डालती हैं, और यह एक्ट विदेशी हस्तक्षेप (रूस, चीन) के खिलाफ है। हालांकि, डेमोक्रेट्स का कहना है कि यह अमेरिकी लोकतंत्र को कमजोर करेगा।
 

अमेरिकी लोकतंत्र का भविष्य दांव पर ट्रंप का 'SAVE अमेरिका' अभियान अमेरिकी लोकतंत्र के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। जहां रिपब्लिकन्स इसे सुरक्षा मानते हैं, वहीं डेमोक्रेट्स इसे सत्ता हथियाने की चाल। हाउस में पास होने के बाद सीनेट में फिलिबस्टर की लड़ाई होगी। क्या यह कानून बनेगा? क्या 2026 मिडटर्म बदल जाएंगे? समय बताएगा, लेकिन चुनावी प्रक्रिया पहले जैसी कभी नहीं रहेगी। 
Sajjadali Nayani ✍ 
Friday world 8/2/2026