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Saturday, 14 February 2026

‘इजराइल के राष्ट्रपति को शर्म आनी चाहिए...’ – ट्रंप का तीखा हमला: ‘ शैतान ’ नेतन्याहू को बचाने के लिए दबाव, कार्रवाई की धमकी?

‘इजराइल के राष्ट्रपति को शर्म आनी चाहिए...’ – ट्रंप का तीखा हमला: ‘ शैतान ’ नेतन्याहू को बचाने के लिए दबाव, कार्रवाई की धमकी?
-Friday world 14th Feb 2026
वाशिंगटन से लेकर यरुशलम तक राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजराइल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग पर सीधा निशाना साधा है। व्हाइट हाउस में इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात के एक दिन बाद ट्रंप ने हर्जोग की कड़ी आलोचना की और कहा कि उन्हें ‘शर्म आनी चाहिए’। यह विवाद नेतन्याहू पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों और उन्हें माफी देने की मांग से जुड़ा है। ट्रंप का यह बयान न केवल इजराइल-अमेरिका संबंधों में तनाव पैदा कर रहा है, बल्कि मध्य पूर्व की राजनीति में नई बहस छेड़ रहा है। क्या ट्रंप वेनेजुएला जैसी ‘सैन्य कार्रवाई’ की राह पर हैं, जहां उन्होंने एक राष्ट्राध्यक्ष को अपदस्थ कर दिया था? आइए, पूरे मामले की गहराई में उतरते हैं। 

ट्रंप का सीधा हमला: ‘राष्ट्रपति को शर्म आनी चाहिए’ ट्रंप ने मीडिया से बातचीत में इजराइल के राष्ट्रपति हर्जोग पर हमला बोलते हुए कहा, “राष्ट्रपति की सबसे बड़ी शक्ति क्षमा करने की है, लेकिन वे ऐसा नहीं कर रहे। उन्हें इस पर शर्म आनी चाहिए।” यह बयान जून 2025 से चली आ रही ट्रंप की मांग का हिस्सा है, जहां वे लगातार नेतन्याहू को माफी देने की पैरवी कर रहे हैं। ट्रंप का मानना है कि नेतन्याहू ‘युद्धकाल के बेहतरीन नेता’ हैं और उनके खिलाफ मुकदमे राजनीतिक साजिश हैं। 

इस बयान से इजराइल में हड़कंप मच गया है। हर्जोग, जो इजराइल के राष्ट्रपति के रूप में प्रतीकात्मक भूमिका निभाते हैं, ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप का दबाव इजराइल की न्याय व्यवस्था पर सीधा हमला है। इजराइल में राष्ट्रपति को माफी देने का अधिकार है, लेकिन यह विवादास्पद मामलों में सावधानी से इस्तेमाल होता है। ट्रंप की यह टिप्पणी न केवल हर्जोग को शर्मिंदा करने की कोशिश है, बल्कि नेतन्याहू को बचाने की खुली कोशिश भी लगती है। 

नेतन्याहू पर क्या हैं आरोप? बेंजामिन नेतन्याहू इजराइल के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रह चुके हैं, लेकिन वे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में घिरे हैं। उनके खिलाफ तीन मुख्य मामले हैं: 

1. केस 1000: फ्रॉड और विश्वासघात – नेतन्याहू पर आरोप है कि उन्होंने अमीर व्यवसायियों से महंगे उपहार (जैसे सिगार और शैंपेन) लिए और बदले में उनके हितों को बढ़ावा दिया। 

2. केस 2000: ब्राइबरी – एक प्रमुख समाचार पत्र के मालिक से सकारात्मक कवरेज के बदले राजनीतिक फायदे देने का आरोप। 

3. केस 4000: ब्राइबरी और फ्रॉड – एक दूरसंचार कंपनी को फायदे पहुंचाने के बदले अनुकूल मीडिया कवरेज हासिल करने का मामला। 

ये मुकदमे 2019 से चल रहे हैं और नेतन्याहू को ‘आतंकवादी’ करार देने वाले आलोचक इन्हें फिलिस्तीन पर इजराइल की आक्रामक नीतियों से जोड़ते हैं। फिलिस्तीन समर्थक समूहों का कहना है कि नेतन्याहू की सरकार ने गाजा और वेस्ट बैंक में मानवाधिकार उल्लंघनों को बढ़ावा दिया, जिसे ‘राज्य प्रायोजित आतंकवाद’ कहा जाता है। ट्रंप का नेतन्याहू को समर्थन इसी वजह से विवादास्पद है। 

ट्रंप की सहानुभूति: फिलिस्तीन हमले और वेनेजुएला कनेक्शन** ट्रंप ने नेतन्याहू की तारीफ में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने कहा, “बेंजामिन युद्ध के समय के महान नेता हैं।” जब पत्रकारों ने 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के लिए नेतन्याहू की जिम्मेदारी पर सवाल किया, तो ट्रंप ने कहा, “हर कोई कुछ हद तक जिम्मेदार है, लेकिन यह ऐसा हमला था जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी।” ट्रंप ने हमास को दोषी ठहराया, लेकिन नेतन्याहू को बचाते हुए कहा कि इजराइल की सुरक्षा में उनकी भूमिका अहम है। 

यह सहानुभूति वेनेजुएला की घटना से जुड़ी लगती है। ट्रंप ने जनवरी 2026 में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अपदस्थ कर गिरफ्तार करवाया था, जिसे उन्होंने ‘न्याय की जीत’ बताया। अब आलोचक कह रहे हैं कि ट्रंप नेतन्याहू को बचाने के लिए इजराइल पर वैसा ही दबाव बना रहे हैं। अगर हर्जोग माफी नहीं देते, तो क्या ट्रंप कोई ‘वेनेजुएला स्टाइल’ कार्रवाई की धमकी दे रहे हैं? यह सवाल अंतरराष्ट्रीय राजनीति में गूंज रहा है। 

ट्रंप की रणनीति: राजनीतिक फायदा या दोस्ती? ट्रंप का यह रुख उनकी विदेश नीति का हिस्सा लगता है। उन्होंने हमेशा इजराइल को मजबूत समर्थन दिया – अब्राहम समझौते से लेकर गोलन हाइट्स को मान्यता तक। लेकिन नेतन्याहू पर दबाव 2026 के मध्यावधि चुनावों से जुड़ा लगता है। अमेरिका में यहूदी वोट बैंक और रिपब्लिकन समर्थक ट्रंप की इजराइल नीति की तारीफ करते हैं। वहीं, डेमोक्रेट्स इसे ‘तानाशाही’ बताते हैं। 

फिलिस्तीन के लिए यह और दुखद है। 7 अक्टूबर 2023 के हमले के बाद इजराइल की जवाबी कार्रवाई में हजारों फिलिस्तीनी मारे गए। ट्रंप का नेतन्याहू को ‘आतंकवादी’ से बचाना फिलिस्तीन समर्थकों के लिए अपमानजनक है। :

 शर्म की बात किसके लिए?** ट्रंप का बयान कि ‘इजराइल के राष्ट्रपति को शर्म आनी चाहिए’ ने वैश्विक बहस छेड़ दी है। क्या हर्जोग झुकेंगे? या इजराइल की न्याय व्यवस्था स्वतंत्र रहेगी? ट्रंप की सहानुभूति नेतन्याहू को बचा सकती है, लेकिन यह मध्य पूर्व की शांति को खतरे में डाल सकती है। वेनेजुएला जैसी कार्रवाई अगर इजराइल पर थोपी गई, तो क्या होगा? सवाल कई हैं, लेकिन एक बात साफ है – ट्रंप की आक्रामक शैली वैश्विक राजनीति को नई दिशा दे रही है। 

अब देखना यह है कि यह दबाव कितना असरदार साबित होता है और फिलिस्तीन जैसे मुद्दों पर क्या प्रभाव पड़ता है। 

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday world 14th Feb 2026