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Wednesday, 4 February 2026

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: छूटे हुए लाभों की कीमत क्या है? ट्रंप के साथ सौदा: भारत ने क्या दिया और क्या पाया?

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: छूटे हुए लाभों की कीमत क्या है? ट्रंप के साथ सौदा: भारत ने क्या दिया और क्या पाया? -Friday world 4/2/2026

फरवरी 2026 में भारत और अमेरिका के बीच घोषित व्यापार समझौते ने सुर्खियां बटोरीं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक्स पर दावा किया कि भारत ने रूसी तेल खरीद बंद करने, अमेरिकी वस्तुओं पर शुल्क और गैर-शुल्क बाधाएं शून्य करने, और 500 अरब डॉलर से अधिक अमेरिकी सामान खरीदने का वादा किया है। बदले में, अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया—जिसमें रूसी तेल खरीद पर लगी 25% अतिरिक्त पेनल्टी टैरिफ भी हटा दी गई। 

यह समझौता भारत के लिए राहत की तरह लगता है, क्योंकि 2025 से लगे उच्च टैरिफ ने निर्यातकों को परेशान किया था। लेकिन कई सवाल उठते हैं: क्या यह सौदा वाकई संतुलित है? भारत ने क्या-क्या छोड़ा और बदले में ठोस क्या मिला? भारत ने क्या-क्या छोड़ा?

 1. रूसी तेल खरीद पर ब्रेक: ट्रंप ने कहा कि पीएम मोदी ने रूसी तेल आयात रोकने का वादा किया। भारत ने पहले रूस से सस्ता तेल (प्रति बैरल 16 डॉलर तक छूट) खरीदकर ऊर्जा लागत कम की थी। अब अमेरिका और संभवतः वेनेजुएला से तेल लेना होगा। रूस के साथ पुराने संबंधों पर असर पड़ सकता है—एक मित्र देश से दूरी बढ़ सकती है। 

2. ईरान से तेल और संबंधों में कटौती: भारत पहले से ही ईरान से तेल नहीं खरीद रहा था (2019 से अमेरिकी दबाव में)। अब चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट पर भी संकट है। 2026 के बजट में चाबहार के लिए कोई आवंटन नहीं। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण 6 महीने की छूट (अप्रैल 2026 तक) मिली थी, लेकिन भारत ने गतिविधियां कम कर दीं। यह पोर्ट अफगानिस्तान, मध्य एशिया तक पहुंच का वैकल्पिक रास्ता था—पाकिस्तान को बायपास करने वाला। अब यह रणनीतिक संपत्ति खतरे में है। 

3. स्वतंत्र विदेश नीति पर सवाल: अमेरिका जहां कहेगा, वहीं से तेल लेना—यह बहुपक्षीय नीति से एकतरफा निर्भरता की ओर इशारा करता है। रूस और ईरान जैसे देशों से दूरी बढ़ने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा और भू-राजनीतिक संतुलन प्रभावित हो सकता है।

 4. अमेरिकी वस्तुओं पर शुल्क शून्य: ट्रंप का दावा है कि भारत ने अमेरिकी सामानों पर टैरिफ और गैर-टैरिफ बैरियर शून्य कर दिए। हालांकि भारत ने स्पष्ट नहीं किया, लेकिन कुछ रिपोर्ट्स में औद्योगिक सामानों पर टैरिफ 13.5% से शून्य होने की बात है। संवेदनशील कृषि क्षेत्र को कुछ सुरक्षा मिली है, लेकिन अमेरिकी कृषि उत्पादों (जैसे बादाम, सेब, वाइन) के लिए बाजार खुल रहा है। 

5. किसानों को अमेरिकी बाजार में छोड़ना?: अमेरिकी कृषि मंत्री ने कहा कि भारत अमेरिकी फार्म उत्पादों के लिए बड़ा बाजार बनेगा। कुछ कृषि उत्पादों के लिए बाजार पहुंच दी गई है। भारतीय किसानों को सस्ते आयात से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है—खासकर दालें, नट्स, फल आदि में।

 6. 500 अरब डॉलर अमेरिकी सामान खरीदने का वादा: ऊर्जा, रक्षा, विमान, टेलीकॉम, फार्मा आदि में अमेरिकी खरीद बढ़ानी होगी। यह भारत के लिए महंगा सौदा हो सकता है, क्योंकि अमेरिकी सामान अक्सर महंगे होते हैं। 

बदले में भारत को क्या ठोस लाभ मिला?

- टैरिफ में बड़ी राहत: भारतीय निर्यात पर 50% से 18% टैरिफ—यह टेक्सटाइल, फार्मा, केमिकल, ज्वेलरी, समुद्री उत्पादों जैसे क्षेत्रों के लिए बड़ा बूस्ट है। FIEO जैसे संगठनों ने कहा कि इससे निर्यातकों को एशियाई प्रतिस्पर्धियों (वियतनाम, बांग्लादेश) के बराबर मौका मिलेगा। 

- निर्यात बढ़ोतरी की उम्मीद: उच्च टैरिफ हटने से अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान सस्ते होंगे। स्टॉक मार्केट और रुपये में तेजी आई। 

- रणनीतिक साझेदारी मजबूत: अमेरिका के साथ बेहतर संबंध—रक्षा, तकनीक, ऊर्जा में सहयोग बढ़ सकता है। 

लेकिन सवाल यह है: क्या ये लाभ स्थायी और संतुलित हैं? टैरिफ कटौती एकतरफा लगती है—अमेरिका ने पेनल्टी हटाई, लेकिन भारत ने कई रणनीतिक क्षेत्र छोड़े। रूसी तेल छूटने से ऊर्जा लागत बढ़ सकती है। चाबहार छूटने से क्षेत्रीय पहुंच कमजोर होगी। किसानों पर आयात का दबाव बढ़ेगा। 

 सौदा या समझौता? यह समझौता भारत की 'मित्र देशों के साथ संतुलन' नीति की परीक्षा है। ट्रंप के दावों में अतिशयोक्ति हो सकती है—भारत ने कई बिंदुओं की पुष्टि नहीं की। लेकिन सच्चाई यह है कि उच्च टैरिफ के दबाव में भारत को कुछ रियायतें देनी पड़ीं। ठोस लाभ निर्यात बढ़ोतरी में दिखेगा, लेकिन लंबे समय में स्वतंत्र विदेश नीति, ऊर्जा सुरक्षा और किसानों की रक्षा पर असर पड़ सकता है। 

क्या यह 'विकसित भारत' की राह पर मजबूत कदम है या रणनीतिक समझौता? समय बताएगा, लेकिन फिलहाल बहस जारी है—भारत ने क्या खोया और क्या पाया? 
Sajjadali Nayani ✍ 
Friday world 4/2/2026