-Friday World 26 February 2026
भारतीय शेयर बाजार में हाल ही में एक ऐसा हादसा हुआ है, जिसने निवेशकों के दिलों में डर पैदा कर दिया। IDFC फर्स्ट बैंक, जो अपनी डिजिटल बैंकिंग और ग्राहक-केंद्रित सेवाओं के लिए जाना जाता है, अचानक एक बड़े घोटाले की चपेट में आ गया। चंडीगढ़ की एक ही शाखा में हुए इस कथित फ्रॉड ने बैंक के मार्केट कैप में करीब ₹14,438 करोड़ का भारी भरकम नुकसान पहुंचाया। शेयर की कीमत में 20% तक की भारी गिरावट आई, जो मार्च 2020 के बाद सबसे बड़ी एक दिवसीय गिरावट थी। लेकिन सवाल यह है - आखिर क्या हुआ था? कैसे एक शाखा के कुछ कर्मचारियों ने इतना बड़ा खेल खेला? और बैंक ने इसे कैसे संभाला?
घोटाले की पूरी कहानी: हरियाणा सरकार के खातों से साइफनिंग यह सब तब शुरू हुआ जब हरियाणा सरकार के कुछ विभागों ने अपनी IDFC फर्स्ट बैंक में रखी राशि को दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने का अनुरोध किया। रूटीन रिकॉन्सिलिएशन के दौरान बैंक को अजीबोगरीब विसंगति दिखी - डिपॉजिट बैलेंस में लगभग ₹590 करोड़ की कमी! जांच में पता चला कि बैंक की चंडीगढ़ सेक्टर-32 शाखा में कुछ कर्मचारियों ने हरियाणा सरकार के खातों से जुड़े अकाउंट्स में अनधिकृत और फर्जी लेन-देन किए।
मुख्य आरोपी पूर्व ब्रांच मैनेजर रिभाव रिषि (जो छह महीने पहले नौकरी छोड़ चुके थे) और रिलेशनशिप मैनेजर अभय थे। इनके साथ अभय की पत्नी स्वाति सिंगला और उनके भाई अभिषेक सिंगला भी शामिल थे। जांच में सामने आया कि फर्जी चेक और पेमेंट इंस्ट्रक्शंस के जरिए सरकारी फंड्स को एक प्राइवेट कंपनी स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स (जिसमें स्वाति और अभिषेक की हिस्सेदारी थी) में ट्रांसफर कर दिया गया। शुरुआती जांच में करीब ₹300 करोड़ की राशि इसी कंपनी के AU स्मॉल फाइनेंस बैंक अकाउंट में गई पाई गई।
हरियाणा स्टेट विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने चार लोगों को गिरफ्तार किया, जिसमें दो पूर्व बैंक कर्मचारी शामिल थे। बैंक ने तुरंत चार कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया, फॉरेंसिक ऑडिट शुरू किया, पुलिस में शिकायत दर्ज की और RBI को सूचित किया।
बैंक की त्वरित कार्रवाई: पूरा पैसा लौटा दिया! सबसे महत्वपूर्ण बात - IDFC फर्स्ट बैंक ने तुरंत हरियाणा सरकार के विभागों को 100% मूल राशि और ब्याज सहित कुल ₹583 करोड़ का भुगतान कर दिया। बैंक ने कहा, "यह घटना अलग-थलग है, सिर्फ एक शाखा और एक क्लाइंट ग्रुप से जुड़ी है। सिस्टम-लेवल कोई समस्या नहीं है।" बैंक ने ग्राहक-केंद्रित नीति पर जोर देते हुए कहा कि "ग्राहक फर्स्ट" उनके DNA में है, इसलिए जांच चल रही होने के बावजूद उन्होंने तुरंत पैसा लौटाया।
हरियाणा सरकार ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी और IDFC फर्स्ट बैंक (साथ ही AU स्मॉल फाइनेंस बैंक) को अपनी पैनल से हटा दिया, साथ ही विभागों को इन बैंकों से अकाउंट बंद करने के निर्देश दिए।
मार्केट पर भारी असर: ₹14,438 करोड़ का धुआं-धुआं! घोटाले की खबर फैलते ही सोमवार को बैंक के शेयर 20% तक गिर गए। पिछले क्लोजिंग प्राइस से ₹83 के आसपास से गिरकर इंट्राडे लो ₹66.85 तक पहुंच गए। एक ही सत्र में मार्केट कैपिटलाइजेशन में ₹14,438 करोड़ का नुकसान! LIC और भारत सरकार जैसे बड़े शेयरधारकों को भी करोड़ों का मार्क-टू-मार्केट लॉस हुआ। निवेशकों में गवर्नेंस और इंटरनल कंट्रोल पर सवाल उठे, क्योंकि फ्रॉड राशि बैंक के Q3 नेट प्रॉफिट (₹503 करोड़) से भी ज्यादा थी।
बाद में शेयर में थोड़ी रिकवरी दिखी, लेकिन सेंटीमेंट पर असर गहरा रहा। कुछ एनालिस्ट्स का मानना है कि बैंक की मजबूत कैपिटल पोजीशन (16.22% CAR) और कम NPA के कारण लॉन्ग-टर्म में रिकवरी हो सकती है।
सबक: बैंकिंग में भरोसा सबसे बड़ा पूंजी यह घटना भारतीय बैंकिंग सेक्टर के लिए चेतावनी है। एक छोटी-सी शाखा में मिडिल और लोअर लेवल के कर्मचारियों की सांठगांठ ने कितना बड़ा नुकसान पहुंचाया। फर्जी चेक जैसी पुरानी तकनीक आज भी काम कर सकती है, अगर इंटरनल कंट्रोल कमजोर हों। लेकिन IDFC फर्स्ट बैंक की त्वरित प्रतिक्रिया और पैसा लौटाने से ग्राहक भरोसा कुछ हद तक बरकरार रहा।
निवेशकों के लिए यह याद दिलाता है कि बाजार में कोई भी खबर कितनी तेजी से वैल्यूएशन बदल सकती है। ₹590 करोड़ का फ्रॉड ₹14,000+ करोड़ का मार्केट लॉस दे सकता है - क्योंकि भरोसा टूटने पर नुकसान की गिनती नहीं होती!
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 26 February 2026