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Friday, 6 March 2026

मोदी का मास्टरस्ट्रोक: ईरान-इज़राइल-अमेरिका युद्ध के बीच अमेरिका ने दी रूस से तेल खरीदने की 30 दिन की छूट

मोदी का मास्टरस्ट्रोक: ईरान-इज़राइल-अमेरिका युद्ध के बीच अमेरिका ने दी रूस से तेल खरीदने की 30 दिन की छूट -Friday 🌎 World-March 6,2026 
भारत को मिली बड़ी राहत, तेल संकट से बचा सकता है देश!
ईरान-इज़राइल युद्ध और अमेरिका की सीधी भागीदारी से मिडिल ईस्ट में आग भड़क रही है, जिससे वैश्विक तेल बाजार डगमगा गया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण मार्ग पर खतरा मंडरा रहा है, जहाँ से भारत अपनी 50% से ज्यादा क्रूड ऑयल और LNG आयात करता है। ऐसे में रसोई गैस, CNG-PNG और पेट्रोल-डीजल के दामों में उछाल का डर सता रहा था। लेकिन ठीक इसी वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीति ने कमाल कर दिया 
– अमेरिका ने भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट (waiver) दे दी है! 

यह फैसला अमेरिकी ट्रेजरी विभाग (US Treasury) ने गुरुवार को जारी किया। ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा: "ग्लोबल ऑयल मार्केट में सप्लाई बनाए रखने के लिए हमने भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने की 30 दिन की छूट दी है। यह छोटी अवधि की व्यवस्था है, जो रूस को बड़ा फायदा नहीं पहुंचाएगी।" (स्रोत: रॉयटर्स, आज तक, एबीपी लाइव, बीबीसी हिंदी, एनडीटीवी आदि)। 

 क्या है यह 30 दिन की छूट और क्यों आई? - पृष्ठभूमि: ईरान के ड्रोन हमलों और युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है। रूसी तेल के कई टैंकर समुद्र में फंसे हुए थे, क्योंकि अमेरिकी प्रतिबंधों (sanctions) के कारण वे भारत नहीं पहुंच पा रहे थे। 

- अमेरिका का यू-टर्न: पहले अमेरिका भारत पर रूसी तेल आयात कम करने का दबाव बना रहा था और 25% अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया था। लेकिन अब ईरान युद्ध से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई पर दबाव बढ़ने से वाशिंगटन ने राहत दी। यह छूट उन रूसी तेल के लिए है जो 5 मार्च 2026 तक जहाजों पर लोड हो चुका था। यह 3 अप्रैल 2026 तक वैध रहेगी। 

- फायदा भारत को: इससे फंसे रूसी टैंकरों को रास्ता मिलेगा। भारतीय रिफाइनरियां (IOC, HPCL, BPCL, रिलायंस आदि) रूसी क्रूड खरीद सकेंगी, जो सस्ता है (अन्य स्रोतों से 10-15 डॉलर प्रति बैरल कम)। इससे तेल संकट कम होगा, पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रह सकते हैं और LPG/CNG की कमी से राहत मिलेगी। 

PM मोदी का मास्टर स्ट्रोक: कूटनीति का कमाल! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के साथ मजबूत संबंध बनाए रखते हुए रूस से दोस्ती भी निभाई। यूक्रेन युद्ध के बाद भी भारत ने रूस से तेल आयात बढ़ाया, जिससे सालाना अरबों डॉलर की बचत हुई। अब जब ईरान युद्ध से मिडिल ईस्ट का रास्ता बंद हो रहा है, मोदी की बैलेंस्ड डिप्लोमेसी काम आई – अमेरिका ने खुद छूट दी! यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीतिक ताकत का सबूत है। 

ट्रंप प्रशासन (जो अब फिर सत्ता में है) ने कहा कि यह "शॉर्ट-टर्म मेजर" है, लेकिन भारत के लिए यह जीवनरक्षक साबित हो सकता है। अगर युद्ध लंबा चला तो यह छूट बढ़ सकती है या अन्य विकल्प तलाशे जा सकते हैं। 

भारत पर क्या असर पड़ेगा? 

- तेल संकट से राहत: रूस से सस्ता क्रूड मिलने से रिफाइनरियां चलती रहेंगी। LPG उत्पादन बढ़ेगा, CNG/PNG दामों में अचानक उछाल नहीं आएगा। 

- पेट्रोल-डीजल स्थिर: ₹500 पेट्रोल की अफवाहें कम होंगी। भारत के पास 25 दिनों का क्रूड स्टॉक है, रूस से सप्लाई जारी रहने से और मजबूती मिलेगी। 

- इकोनॉमी को फायदा: इंडस्ट्री, ट्रांसपोर्ट और घरेलू खपत पर असर कम होगा। EV की तरफ शिफ्ट धीमा पड़ेगा। 

- कूटनीतिक जीत: भारत ने अमेरिका, रूस और मिडिल ईस्ट सबके साथ बैलेंस बनाया। यह "मल्टी-अलाइनमेंट" की मिसाल है। 


चुनौतियां अभी बाकी यह छूट सिर्फ 30 दिन की है। अगर युद्ध बढ़ा तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह बंद हो सकता है। भारत को अमेरिका, रूस, सऊदी, UAE जैसे अन्य स्रोतों से डाइवर्सिफाई करना होगा। साथ ही, ग्लोबल ऑयल प्राइस बढ़ने से महंगाई का खतरा बना रहेगा।

 प्रधानमंत्री मोदी का यह "मास्टर स्ट्रोक" दिखाता है कि भारत अब सिर्फ ऊर्जा आयातक नहीं, बल्कि ग्लोबल प्लेयर है। जय हिंद! 🇮🇳🛢️

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday 🌎 World-March 6,2026