-Friday World, March 6,2026
आज के समय में जब ईरान-इज़राइल युद्ध की आग भड़क रही है, भारत के आम आदमी की रसोई में भी उसकी गर्मी महसूस हो रही है। क्या गैस सिलेंडर के लिए लाइनें लगने वाली हैं? सरकार ने इमरजेंसी पावर का इस्तेमाल कर सभी रिफाइनरी कंपनियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया है। इसका मतलब है कि देश में रसोई गैस की कमी का खतरा बहुत गंभीर हो गया है!
युद्ध की आग से शुरू हुआ संकट: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लगभग बंद! मिडिल ईस्ट में ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच युद्ध इतना तेज हो गया है कि दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग – स्ट्रेट ऑफ होर्मुज – लगभग बंद हो गया है। यह संकीर्ण समुद्री रास्ता दुनिया के 20% तेल और बड़े हिस्से के गैस का परिवहन करता है। 28 फरवरी को 91 जहाज गुजर रहे थे, जबकि अब सिर्फ 26 जहाज ही गुजर रहे हैं!
भारत इस मार्ग से 50% क्रूड ऑयल, 54% एलएनजी और लगभग सभी एलपीजी आयात करता है। युद्ध के कारण जहाज अटक गए हैं। पेट्रोनेट एलएनजी के तीन बड़े जहाज – दिशा, राहि और असीम – कतर के रास लफ्फान पोर्ट तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
कतर में एलएनजी उत्पादन बंद: भारत को 40% सप्लाई में कटौती!
कतर – दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी उत्पादक – ईरान के ड्रोन हमलों के कारण रास लफ्फान और मेसाइद प्लांट पर हमले के बाद एलएनजी उत्पादन रोक दिया है। कतर-एनर्जी ने फोर्स मेजर घोषित कर दिया है, जिसका मतलब है कि युद्ध जैसे अनिवार्य कारणों से सप्लाई नहीं दे पाएंगे।
भारत अपनी जरूरत का 40% एलएनजी (लगभग 2.7 करोड़ टन सालाना) कतर से आयात करता है। इस रुकावट से सीएनजी और पीएनजी सप्लाई में 40% तक की कमी आई है। सिटी गैस कंपनियों ने चेतावनी दी है कि अगर स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो सीएनजी-पीएनजी के दाम में बड़ा इजाफा होगा। स्पॉट मार्केट में गैस की कीमत अब $25 प्रति यूनिट पहुंच गई है – कॉन्ट्रैक्ट से दोगुनी से ज्यादा!
सरकार का इमरजेंसी आदेश: एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश! रॉयटर्स और अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत सरकार ने Essential Commodities Act, 1955 के तहत इमरजेंसी पावर का इस्तेमाल कर सभी ऑयल रिफाइनरी कंपनियों को आदेश दिया है:
- प्रोपेन और ब्यूटेन को सिर्फ एलपीजी बनाने के लिए इस्तेमाल करें।
- इस गैस को पेट्रोकेमिकल्स या अन्य उत्पादों में न इस्तेमाल करें।
- सभी प्रोपेन-ब्यूटेन का सप्लाई सरकारी कंपनियों
– इंडियन ऑयल (IOC), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) – को दें।
- इसका उद्देश्य 33.2 करोड़ एलपीजी ग्राहकों को बिना रुकावट गैस सिलेंडर मिलना सुनिश्चित करना है।
भारत में एलपीजी की मांग सालाना 33 मिलियन टन से ज्यादा है, जिसमें से 65-70% आयात से पूरी होती है और ज्यादातर मिडिल ईस्ट से आती है।
रिलायंस और प्राइवेट कंपनियों पर असर: मुनाफा घटेगा! सरकार के इस आदेश से रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी प्राइवेट कंपनियों को बड़ा झटका लगेगा। प्रोपेन-ब्यूटेन को पेट्रोकेमिकल्स (आल्काइलेट्स, पॉलीप्रोपाइलीन) में इस्तेमाल करने की बजाय एलपीजी में लगाने से कंपनियों के मार्जिन घटेंगे। पिछले साल रिलायंस ने हर महीने औसतन 4 आल्काइलेट्स कार्गो की निर्यात किया था – अब वह रुक जाएगा।
पेट्रोल-डीजल और सीएनजी पर असर: ₹500 पेट्रोल की उम्मीद?
कुछ लोग कह रहे हैं कि युद्ध बढ़ा तो पेट्रोल ₹500 हो जाएगा – लेकिन हकीकत में भारत के पास क्रूड ऑयल का स्टॉक 25 दिनों का है और रूस, अमेरिका जैसे अन्य स्रोतों से बढ़ाया जा सकता है। लेकिन एलपीजी और सीएनजी पर तुरंत असर पड़ेगा। अगर स्थिति लंबी चली तो:
- रसोई गैस के दाम बढ़ेंगे और कमी आएगी।
- सीएनजी वाहनों के लिए महंगा होगा – लोग ईवी की तरफ मुड़ेंगे।
- पीएनजी घरेलू इस्तेमाल में मुश्किल।
- फर्टिलाइजर, पावर प्लांट और इंडस्ट्री पर असर – महंगा उत्पादन, महंगी चीजें।
सरकार की तैयारी और सलाह सरकार कह रही है कि एलपीजी और क्रूड के स्टॉक "आरामदायक" हैं। अमेरिका से बात चल रही है, अन्य देशों से आयात बढ़ाने की तैयारी है। लेकिन युद्ध लंबा चला तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
आम आदमी के लिए सलाह:
- जरूरत के मुताबिक ही गैस बुक करें, ज्यादा स्टॉक न करें।
- सीएनजी वाहन चलाने वाले रूट बदलें या ईवी पर विचार करें।
- सरकारी योजनाओं (उज्ज्वला) के तहत सब्सिडी लें।
- ऊर्जा बचत करें – गैस कम इस्तेमाल करें।
यह संकट युद्ध का नतीजा है – विश्व शांति की उम्मीद रखें, लेकिन तैयार रहें! आपकी रसोई और वाहन – दोनों की देखभाल करें। जय हिंद! 🇮🇳🔥
Sajjadali Nayani ✍
Friday World, March 6,2026