ट्रंप के खिलाफ अमेरिका में जोरदार विरोध, NATO का खुला समर्थन न मिलने से पीछे हटने की कयास!
2026 की इस भयंकर जंग में अब तक की सबसे बड़ी खबर सामने आई है। इज़राइल ने रूस के माध्यम से ईरान को युद्धविराम का प्रस्ताव भेजा, लेकिन तेहरान ने इसे सीधे ठुकरा दिया। यह प्रस्ताव ऐसे समय आया जब अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, और NATO देश अमेरिका-इज़राइल को खुलकर समर्थन देने से कतरा रहे हैं। खबरों के मुताबिक, ट्रंप की जंग से पीछे हटने की आशंका बढ़ते ही इज़राइल ने यह कूटनीतिक कदम उठाया।
जंग का बैकग्राउंड: फरवरी 2026 के अंत में अमेरिका और इज़राइल ने मिलकर ईरान पर बड़े हमले शुरू किए, जिसे "Operation Epic Fury" नाम दिया गया। इन हमलों में ईरान के परमाणु ठिकाने, मिसाइल साइट्स, मिलिट्री बेस और यहां तक कि सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की शहादत की खबरें आईं। ईरान ने जवाब में ड्रोन-मिसाइल अटैक किए, जिसमें खाड़ी के अमेरिकी बेस, UAE, सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन और यहां तक कि साइप्रस में ब्रिटिश RAF अक्रोटिरी बेस भी शामिल थे। ईरान ने 15 से ज्यादा देशों और 27 अमेरिकी बेस पर हमले किए, जिससे जंग मिडिल ईस्ट से यूरोप तक फैल गई।
ट्रंप – "ईरान के साथ कोई डील नहीं, लेकिन ईरान ने इनकार कर दिया। तेहरान का कहना है कि जंग जारी रहेगी जब तक अमेरिका-इज़राइल को "अपरिवर्तनीय नुकसान" न पहुंचे और क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण बदल न जाए। ईरान ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि उन्होंने डिप्लोमेसी को कमजोर किया और हमले से बातचीत का रास्ता बंद किया।
रूस के जरिए युद्धविराम प्रस्ताव: रिपोर्ट्स के अनुसार, इज़राइल ने रूस को मीडिएटर बनाकर ईरान को युद्धविराम का ऑफर दिया। रूस, जो ईरान का करीबी सहयोगी है और अमेरिका-इज़राइल हमलों की निंदा कर चुका है, ने इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया। रूस ने पहले भी सीजफायर की अपील की थी और ईरान को इंटेलिजेंस शेयर करने की खबरें आईं। लेकिन ईरान ने प्रस्ताव को ठुकरा दिया, क्योंकि वह इसे "कमजोरी का संकेत" मानता है। ईरान का स्टैंड साफ है – कोई बातचीत नहीं जब तक हमले रुक नहीं जाते और क्षेत्रीय संतुलन बहाल नहीं होता। अमेरिका में ट्रंप के खिलाफ प्रदर्शन:
अमेरिका में ट्रंप की ईरान नीति के खिलाफ बड़े विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतरे, "No War with Iran" के नारे लगाए। पोल्स दिखाते हैं कि ज्यादातर अमेरिकी इस जंग से असहमत हैं और लंबे संघर्ष की आशंका जता रहे हैं। ट्रंप पर आरोप है कि उन्होंने बिना ठोस सबूत के ईरान पर हमला किया और अब "रिजीम चेंज" की कोशिश कर रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि ट्रंप प्रशासन ने ईरान में विरोध को भड़काने की कोशिश की, लेकिन अब घरेलू विरोध बढ़ रहा है।
NATO का अनिच्छुक रवैया: NATO देश अमेरिका को पूरा समर्थन नहीं दे रहे। ब्रिटेन, फ्रांस, स्पेन जैसे देशों ने सीमित डिफेंसिव सपोर्ट दिया, लेकिन इटली और स्पेन ने हमलों को "अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन" बताया। NATO चीफ मार्क रुट्टे ने "व्यापक समर्थन" की बात कही, लेकिन कई देश "हिचकिचाहट" दिखा रहे हैं। ईरान ने चेतावनी दी कि जो देश अमेरिका-इज़राइल के साथ आएंगे, वे "लीगिटिमेट टारगेट" होंगे। साइप्रस में ब्रिटिश बेस पर ईरानी ड्रोन हमले के बाद NATO में तनाव बढ़ा। ट्रंप ने NATO सहयोगियों पर दबाव डाला, लेकिन यूरोपीय देश जंग में सीधे शामिल होने से बच रहे हैं।
ट्रंप के पीछे हटने की अफवाहें: जैसे ही NATO का खुला समर्थन न मिला और घरेलू विरोध तेज हुआ, ट्रंप की जंग से पीछे हटने की कयास लगने लगीं। इज़राइल का रूस के जरिए प्रस्ताव इसी बैकग्राउंड में आया। इज़राइल को डर है कि लंबी जंग में अमेरिकी सपोर्ट कमजोर पड़ सकता है। लेकिन ईरान का इनकार से जंग और तेज होने की आशंका है। ईरान ने कहा कि वह "अपरिवर्तनीय क्षति" पहुंचाने तक रुकेगा नहीं।
दुनिया की नजरें: यह जंग अब सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं। तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में खतरा बढ़ा है। रूस और चीन ने अमेरिका-इज़राइल की निंदा की और सीजफायर की अपील की। ईरान की मजबूत जवाबी कार्रवाई ने दिखाया कि असिमेट्रिक वारफेयर से सुपरपावर को चुनौती दी जा सकती है।
क्या होगा आगे?
ईरान के इनकार से जंग और लंबी खिंच सकती है। ट्रंप " को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ रहा है। इज़राइल का प्रस्ताव ठुकराया जाना दिखाता है कि तेहरान अभी पीछे नहीं हटेगा। दुनिया सांस रोके देख रही है – क्या डिप्लोमेसी का रास्ता खुलेगा, या जंग और विस्तार लेगी?
Sajjadali Nayani ✍
Friday World March 7,2026