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Friday, 27 March 2026

"इसराइल की सेना में दरार: आर्मी चीफ का खुली चेतावनी – “फौज खुद में ढहने वाली है, सैनिक थक चुके हैं”

"इसराइल की सेना में दरार: आर्मी चीफ का खुली चेतावनी – “फौज खुद में ढहने वाली है, सैनिक थक चुके हैं”-Friday World March 27,3026
                हिजडाइल ने मानी हार 
यरुशलम। 27 मार्च 2026। इजरायली सेना के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल एयाल ज़ामिर ने सुरक्षा कैबिनेट की बैठक में एक ऐसा बयान दिया जिसने पूरे इजरायल को हिला दिया। उन्होंने चेतावनी दी – “मैं IDF के ढहने से पहले 10 लाल झंडे उठा रहा हूं।” सेना पर भारी दबाव, रिजर्व सैनिकों की थकान, मनपावर की कमी और कई मोर्चों पर लगातार लड़ाई के कारण इजरायली डिफेंस फोर्सेज (IDF) खुद में सिमटकर ढहने की कगार पर पहुंच गई है। 

यरुशलम पोस्ट, टाइम्स ऑफ इजरायल और अन्य प्रमुख इजरायली अखबारों ने इस खबर को प्रमुखता से छापा। ज़ामिर ने साफ कहा कि बिना तत्काल सुधार के सेना बुनियादी सुरक्षा मिशनों को भी अंजाम देने में असमर्थ हो जाएगी। रिजर्व सैनिकों की थकान इतनी गहरी है कि कई यूनिट्स में रिपोर्टिंग दर 40-50% तक गिर गई है। कुछ सैनिक खुले तौर पर लड़ने से इनकार कर रहे हैं, जबकि कई घरेलू दबाव, आर्थिक परेशानी और युद्ध के उद्देश्य पर सवाल उठाते हुए ड्यूटी पर नहीं पहुंच रहे। 

 युद्ध की थकान: सैनिकों की चीख 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले के बाद इजरायल ने गाजा, लेबनान, यमन (हूती) और ईरान समर्थित मोर्चों पर एक साथ लड़ाई लड़ी। रिजर्व सैनिकों को कई बार बुलाया गया– कुछ ने 270 दिन से ज्यादा सेवा की। अब थकान चरम पर है। 

रिपोर्ट्स के अनुसार:

 - रिजर्व फोर्सेज पर भारी बोझ पड़ा है। 

- कई सैनिक शारीरिक और मानसिक थकान (PTSD) से जूझ रहे हैं। 

- कुछ यूनिट्स में 40-50% सैनिक रिपोर्ट नहीं कर रहे। 

- हारेडी (अति-रूढ़िवादी यहूदी) समुदाय की भर्ती में कमी को लेकर भी गुस्सा बढ़ रहा है। 

जनरल ज़ामिर ने कैबिनेट में कहा कि सैनिक “worn out and exhausted” हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार तुरंत कदम उठाए, वरना सेना “collapse in on itself” कर जाएगी। यह बयान इजरायली मीडिया में लीक होने के बाद विपक्षी नेता यायर लापिड ने इसे “सुरक्षा आपदा” करार दिया। 

रिफ्यूजल की बढ़ती लहर यह पहला मौका नहीं जब इजरायली सैनिक लड़ाई से मुंह मोड़ रहे हैं। 2025 में ही कई घटनाएं सामने आईं: 

- गाजा में लड़ाई से इनकार करने वाले सैनिकों को जेल भेजा गया, लेकिन बाद में सजा माफ कर दी गई। 

- 130 से ज्यादा रिजर्व सैनिकों ने पत्र लिखकर कहा 

– “अगर बंधकों की रिहाई नहीं हुई तो हम सेवा नहीं करेंगे।” 

- कुछ सैनिकों ने नैतिक आधार पर इनकार किया, जबकि ज्यादातर थकान और राजनीतिक निराशा का हवाला दिया। 

एक रिजर्व सैनिक ने मीडिया को बताया, “हम अपनी जान क्यों दें जब सरकार स्पष्ट लक्ष्य नहीं रख रही? परिवार, नौकरी सब बर्बाद हो रहा है।” दूसरे ने कहा, “यह युद्ध अब राजनीतिक बचाव बन गया है, सैनिकों की कुर्बानी पर।” 

टाइम्स ऑफ इजरायल और हारेत्ज़ ने रिपोर्ट किया कि रिजर्व डिप्लॉयमेंट 30% तक कम करने के आदेश दिए गए हैं, क्योंकि थकान असहनीय हो गई है। कुछ कमांडरों ने सैनिकों को ब्रेक देने की मांग की, लेकिन प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के दबाव में लड़ाई जारी रखने पर जोर है। 

बहु-मोर्चे की जंग और आंतरिक संकट 

इजरायल फिलहाल चार मोर्चों पर सक्रिय है – गाजा में हमास के खिलाफ, लेबनान में हिजबुल्लाह, यमन में हूती और ईरान के साथ तनाव। इतनी व्यापक लड़ाई के लिए पर्याप्त सैनिक नहीं हैं। ज़ामिर ने चेतावनी दी कि बिना अतिरिक्त भर्ती और सुधार के रूटीन ऑपरेशंस भी प्रभावित होंगे।

 विपक्ष का आरोप है कि सरकार हारेडी समुदाय को भर्ती से छूट देकर सेना को कमजोर कर रही है। रिजर्व सैनिकों में गुस्सा है – “हम बार-बार क्यों जाएं जबकि कुछ समुदाय कभी नहीं जाते?” 

यह संकट सिर्फ सैन्य नहीं, सामाजिक भी है। इजरायली समाज में IDF को “लोगों की सेना” माना जाता है। लेकिन अब सैनिक खुद पूछ रहे हैं – “यह देश हमारी कुर्बानी के लायक है?” 

क्या कहते हैं विशेषज्ञ? सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि लंबे युद्ध ने IDF की तैयारियों को प्रभावित किया है। उपकरण घिस चुके हैं, सैनिक थक चुके हैं और मनोबल गिर रहा है। अगर सरकार ने तुरंत बंधक सौदे या युद्धविराम पर विचार नहीं किया तो स्थिति और बिगड़ सकती है। 

एक पूर्व कमांडर ने कहा, “सैनिक थकान मानव शरीर की सीमा से बाहर है। वे लड़ रहे हैं, लेकिन उनका विश्वास टूट रहा है।” 

आगे क्या? जनरल ज़ामिर का बयान इजरायल के लिए wakeup call है। अगर मनपावर की कमी और थकान को नजरअंदाज किया गया तो न सिर्फ युद्ध क्षमता प्रभावित होगी, बल्कि देश की सुरक्षा व्यवस्था भी खतरे में पड़ सकती है। 

इस बीच, तेल अवीव में प्रदर्शन जारी हैं। परिवार और रिजर्व सैनिक बंधकों की रिहाई और युद्ध समाप्ति की मांग कर रहे हैं। 

इजरायल की सेना, जो हमेशा अजेय मानी जाती रही, आज अपनी आंतरिक थकान से जूझ रही है। आर्मी चीफ का बयान साफ संकेत देता है – सैनिक कह रहे हैं, “हम थक चुके हैं।” अब फैसला सरकार को करना है – या तो सैनिकों को राहत दो, या देश को और बड़े संकट का सामना करना पड़ेगा। 

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World March 27,3026