-Friday World 27 March 2026
तेहरान, 27 मार्च 2026 — ईरान ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ चल रही तनावपूर्ण जंग में अपना रुख पूरी तरह साफ कर दिया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता और वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि कोई भी देश पहले युद्ध शुरू करके फिर अपनी सुविधा के अनुसार युद्धविराम की मांग नहीं कर सकता।
→ “दुश्मन युद्ध जब चाहे शुरू कर दे और जब चाहे रुकने की बात करे — यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
ईरान ने अमेरिका के प्रस्तावित सीजफायर प्लान को सिरे से खारिज कर दिया और अपनी शर्तों वाला काउंटर प्लान रखा है। तेहरान का संदेश साफ है — हम युद्ध नहीं चाहते थे, लेकिन अगर दुश्मन ने शुरू किया तो हम उसे पूरा सबक सिखाकर ही रुकेंगे।
ईरानी सशस्त्र बल पूरी तरह अलर्ट मोड में हैं। IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) और नियमित सेना दोनों ने अपनी तैयारियों का प्रदर्शन किया है। वरिष्ठ कमांडरों ने चेतावनी दी कि ईरान दुश्मन को “अविस्मरणीय सबक” (unforgettable lesson) सिखाने के लिए पूरी तरह दृढ़ है।
युद्ध की शुरुआत और ईरान का रुख
वर्तमान संघर्ष की जड़ें फरवरी 2026 के हमलों में हैं, जब अमेरिका-इजरायल गठजोड़ ने ईरान के उच्च नेतृत्व पर हमले शुरू किए। ईरान इसे “आक्रामक युद्ध” करार दे रहा है।
→ ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ कहा, “हमने कभी सीजफायर की मांग नहीं की और न ही बातचीत की। हम अपनी रक्षा जितनी देर जरूरी हो, उतनी देर तक करेंगे।”
ईरानी राज्य मीडिया और आधिकारिक प्रवक्ता एस्माइल बग़ाए ने जोर देकर कहा:
“दुश्मन युद्ध जब चाहे शुरू कर सकता है और जब चाहे सीजफायर मांग सकता है — यह नियम नहीं चलेगा। ईरान युद्ध तब खत्म करेगा जब उसकी अपनी शर्तें पूरी होंगी।”
ईरान ने अपना पांच सूत्रीय प्लान पेश किया है जिसमें शामिल हैं:
- हमलों और हत्याओं (assassinations) का पूर्ण अंत
- भविष्य में किसी भी आक्रामकता के खिलाफ मजबूत गारंटी
- युद्ध के नुकसान की भरपाई (reparations)
- शत्रुता का पूर्ण समापन
- हॉर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की संप्रभुता का सम्मान
ये शर्तें अमेरिका के 15-पॉइंट प्लान का सीधा जवाब हैं, जिसमें ईरान से परमाणु कार्यक्रम छोड़ने और हॉर्मुज स्ट्रेट खोलने की मांग की गई थी।
सैन्य तैयारियां और “अविस्मरणीय सबक”
ईरान के सशस्त्र बलों के प्रमुख कमांडरों ने बार-बार दोहराया है कि ईरानी सेना लंबे युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है, जबकि दुश्मन लंबे संघर्ष को सहन नहीं कर पाएगा।
→ IRGC कमांडरों ने कहा, “हमारे योद्धाओं की उंगलियां ट्रिगर पर हैं। कोई भी गलती महंगी पड़ेगी।”
वरिष्ठ कमांडर मोहसिन रेज़ाई और अन्य अधिकारियों ने चेतावनी दी कि अगर दुश्मन ने जमीन पर उतरने की कोशिश की तो ईरानी सैनिक उन्हें “भारी नुकसान” पहुंचाएंगे। ईरान का मानना है कि वायु हमलों से निर्णायक जीत हासिल नहीं की जा सकती, इसलिए कोई भी ग्राउंड ऑपरेशन दुश्मन के लिए घातक साबित होगा।
ईरानी संसद के स्पीकर और अन्य नेताओं ने भी कहा कि “ईरानी राष्ट्र कभी दुश्मन को उसके मंसूबों में सफल नहीं होने देगा।”
बहु-मोर्चे की चुनौती और क्षेत्रीय प्रभाव
वर्तमान जंग केवल इजरायल-ईरान तक सीमित नहीं है। ईरान ने गल्फ देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों और संपत्तियों पर जवाबी कार्रवाई की है। कुछ हमलों में कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ईंधन टैंक प्रभावित हुए, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है।
ईरान ने स्पष्ट किया कि पड़ोसी देशों को निशाना नहीं बनाया जा रहा, बल्कि अमेरिकी ठिकानों को टारगेट किया जा रहा है जो इन देशों की जमीन पर मौजूद हैं। राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने पड़ोसियों से माफी मांगी और कहा कि अगर वे अमेरिका-इजरायल को मदद नहीं करेंगे तो ईरान उन पर हमला नहीं करेगा।
हॉर्मुज स्ट्रेट — विश्व के तेल व्यापार का 20% गुजरता है — पर ईरान का नियंत्रण इस जंग का सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक पहलू बन गया है। ईरान ने चेतावनी दी कि अगर उसकी संप्रभुता पर सवाल उठाया गया तो क्षेत्रीय तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित होगी।
इजरायल की आंतरिक स्थिति और ईरान का फायदा
इजरायल की ओर से ईरान पर लगातार हवाई हमले जारी हैं, लेकिन इजरायली सेना खुद आंतरिक संकट से जूझ रही है। IDF चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल एयाल ज़ामिर ने सुरक्षा कैबिनेट को चेतावनी दी कि सेना “खुद में ढहने” वाली है।
→ उन्होंने “10 लाल झंडे” उठाते हुए कहा कि रिजर्व सैनिक थक चुके हैं, छठी-सातवीं बार ड्यूटी पर बुलाए जा रहे हैं और मनपावर की भारी कमी है।
विपक्षी नेता यायर लापिड ने इसे “सुरक्षा आपदा” बताया। इजरायली मीडिया (टाइम्स ऑफ इजरायल, जेरूसलम पोस्ट) ने रिपोर्ट किया कि रिजर्व रिपोर्टिंग दर कई यूनिट्स में काफी गिर गई है।
ईरान इस स्थिति को अच्छी तरह जानता है और मान रहा है कि समय उसके पक्ष में है। तेहरान का मानना है कि लंबा युद्ध इजरायल और अमेरिका दोनों को आर्थिक, सैन्य और राजनीतिक रूप से कमजोर करेगा।
ईरान ने साफ कर दिया है कि वह दबाव में आकर सीजफायर स्वीकार नहीं करेगा। युद्ध तब तक जारी रहेगा जब तक:
- आक्रामकता पूरी तरह रुक न जाए
- ईरान की शर्तें पूरी न हों
- भविष्य की सुरक्षा की गारंटी न मिल जाए
अमेरिका की ओर से पाकिस्तान के माध्यम से भेजा गया 15-पॉइंट प्लान फिलहाल ठंडे बस्ते में है। दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े हुए हैं, जिससे क्षेत्र में और बढ़ोतरी की आशंका है।
ईरान का संदेश दुनिया को साफ है — युद्ध की शुरुआत करने वाले मनमर्जी से नहीं रुक सकते। तेहरान की सैन्य तैयारियां, रणनीतिक धैर्य और स्पष्ट शर्तें दिखाती हैं कि यह जंग आसानी से खत्म होने वाली नहीं है। दुश्मन को सबक सिखाने की ईरानी दृढ़ता क्षेत्रीय सुरक्षा की नई सच्चाई बन गई है।
अब फैसला अमेरिका और इजरायल को करना है — या तो ईरान की चेतावनी को गंभीरता से लें या फिर लंबे, महंगे और अनिश्चित युद्ध के लिए तैयार रहें।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 27 March 2026