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Monday, 6 April 2026

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: अरुणाचल प्रदेश के भाजपा मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार की कंपनियों को 1270 करोड़ के सरकारी कॉन्ट्रैक्ट में कथित गड़बड़ी, CBI को तपास का आदेश

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: अरुणाचल प्रदेश के भाजपा मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार की कंपनियों को 1270 करोड़ के सरकारी कॉन्ट्रैक्ट में कथित गड़बड़ी, CBI को तपास का आदेश
-Friday World-April 6,2026 
नई दिल्ली, 6 अप्रैल 2026: सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू और उनके परिवार के सदस्यों से जुड़ी कंपनियों को सरकारी कामों के कॉन्ट्रैक्ट आवंटित करने के आरोपों पर गंभीर कदम उठाया है। कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को इस मामले में प्रारंभिक जांच (Preliminary Enquiry) शुरू करने का आदेश दिया है। यह जांच 1 जनवरी 2015 से 31 दिसंबर 2025 तक के पूरे 11 वर्षों में राज्य सरकार द्वारा दिए गए सार्वजनिक कार्यों, टेंडरों और कॉन्ट्रैक्ट्स की होगी, खासकर उन कंपनियों पर फोकस रहेगा जो मुख्यमंत्री या उनके परिवार से जुड़ी बताई जा रही हैं।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की बेंच ने CBI को दो सप्ताह के अंदर जांच शुरू करने और 16 सप्ताह के अंदर कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जांच में मुख्यमंत्री पेमा खांडू, उनके भाई त्सेरिंग ताशी और सौतेली मां रिनचिन ड्रेमा तथा इनसे संबंधित व्यक्तियों/कंपनियों को विशेष रूप से जांचा जाए।

 1270 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट्स का आरोप

जनहित याचिका (PIL) में दावा किया गया है कि पिछले 10 वर्षों में पेमा खांडू के परिवार की कंपनियों को लगभग 1270 करोड़ रुपये के सरकारी कॉन्ट्रैक्ट और वर्क ऑर्डर दिए गए। याचिकाकर्ता संगठनों — ‘सेव मॉन रीजन फेडरेशन’ और वॉलंटरी अरुणाचल सेना’ — की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कोर्ट में तर्क दिया कि राज्य सरकार के हलफनामे में भी कई ऐसे कॉन्ट्रैक्ट्स का जिक्र है जो परिवार की कंपनियों को बिना ठीक से टेंडर प्रक्रिया का पालन किए दिए गए।

खासतौर पर तवांग जिले में ही चार कंपनियों को 146 कामों के लिए 383 करोड़ रुपये से ज्यादा के कॉन्ट्रैक्ट मिले थे। इन कंपनियों में शामिल हैं:
- फ्रंटियर एसोसिएट्स और ब्रांड ईगल्स — मुख्यमंत्री की पत्नी त्सेरिंग डोल्मा से जुड़ी।
- आरडी कंस्ट्रक्शन— भाई ताशी खांडू से जुड़ी।
- अलायंस ट्रेडिंग कंपनी — भतीजे/भाई की पत्नी से जुड़ी।

कई काम बिना टेंडर के दिए गए, जिससे हितों का टकराव (Conflict of Interest) और भाई-भतीजावाद का आरोप लगा है। याचिका में रिनचिन ड्रेमा की कंपनी ब्रांड ईगल्स*का भी जिक्र है, जिसे विवादों के बावजूद बड़े पैमाने पर काम सौंपे गए।

 सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर पहले भी कई सुनवाइयां की थीं। दिसंबर 2025 में कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश सरकार को 2015 से 2025 तक सभी कॉन्ट्रैक्ट्स का विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया था। फरवरी 2026 में कोर्ट ने कहा था कि “आंकड़े बोलते हैं” और “यह संयोग उल्लेखनीय है” कि परिवार की कंपनियों को इतने बड़े पैमाने पर काम मिले। 

6 अप्रैल 2026 को हुई सुनवाई में कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद CBI को प्रारंभिक जांच का आदेश दे दिया। बेंच ने साफ कहा कि CBI जांच में कानून के अनुसार आगे बढ़े और जरूरत पड़ने पर पूर्ण जांच (Regular Case) भी दर्ज कर सके।

 पेमा खांडू कौन हैं?

पेमा खांडू भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं। उनके पिता दोरजी खांडू अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री थे, जिनका निधन 2011 में हुआ। पेमा खांडू 2016 से लगातार राज्य के मुख्यमंत्री हैं। वे राज्य की राजनीति में मजबूत पकड़ रखते हैं, लेकिन विपक्ष अक्सर उनके शासन पर भ्रष्टाचार और परिवारवाद के आरोप लगाता रहा है। इस मामले में राज्य सरकार ने पहले याचिका को “प्रायोजित” बताया था, लेकिन कोर्ट ने गंभीरता दिखाते हुए CBI जांच का रास्ता खोल दिया।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

इस फैसले के बाद विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है। कांग्रेस ने कहा है कि “ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा” का नारा अब खोखला साबित हो रहा है। कई विपक्षी नेताओं ने मांग की है कि पेमा खांडू को इस्तीफा दे देना चाहिए जब तक जांच पूरी न हो जाए।

भाजपा की ओर से अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि जांच का सम्मान किया जाएगा और सच्चाई सामने आएगी।

 क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

यह मामला सिर्फ एक मुख्यमंत्री के परिवार तक सीमित नहीं है। यह बड़े सवाल उठाता है:
- क्या लोकतंत्र में सत्ता में बैठे लोग अपने परिवार को सरकारी ठेके दे सकते हैं?
- टेंडर प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है, खासकर छोटे राज्यों में जहां विकास कार्यों के लिए केंद्र से भारी फंड आते हैं?
- भाई-भतीजावाद और हितों के टकराव से विकास कार्यों की गुणवत्ता और लागत पर क्या असर पड़ता है?

अरुणाचल प्रदेश जैसे सीमावर्ती राज्य में सड़कें, पुल, भवन और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च होने वाले पैसे की जवाबदेही बेहद जरूरी है। अगर आरोप सही साबित होते हैं तो यह न केवल पेमा खांडू सरकार के लिए बल्कि पूरे राजनीतिक वर्ग के लिए सबक होगा।

 आगे क्या?

CBI अब दो सप्ताह में जांच शुरू करेगी। वह सभी दस्तावेज, टेंडर फाइलें, आवंटन के आदेश और लाभार्थी कंपनियों के मालिकाना हक की जांच करेगी। अगर प्रारंभिक जांच में पर्याप्त सबूत मिले तो FIR दर्ज हो सकती है और पूरी तरह से जांच आगे बढ़ेगी। सुप्रीम कोर्ट 16 सप्ताह बाद रिपोर्ट देखकर आगे का रुख तय करेगा।

यह फैसला याद दिलाता है कि न्यायपालिका भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए है, चाहे आरोपी कोई भी हो। आम नागरिकों को उम्मीद है कि जांच निष्पक्ष, तेज और पारदर्शी होगी ताकि दोषी सजा पाएं और निर्दोष को क्लीन चिट मिले।

सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश अरुणाचल प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा सकता है। 1270 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट्स की जांच से कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल सबकी नजर CBI की रिपोर्ट पर है। क्या यह मामला बड़े घोटाले की ओर इशारा करता है या सिर्फ राजनीतिक आरोप साबित होगा? समय बताएगा। लेकिन एक बात तय है — पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतंत्र की जान है, और सुप्रीम कोर्ट ने आज उसे मजबूत किया है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-April 6,2026