-Friday World-April 19,2026
नई दिल्ली, अप्रैल 2026। जब मध्य पूर्व में ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ता संघर्ष स्ट्रेट ऑफ हरमुज को प्रभावित कर रहा है, तब भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश के लिए चिंता स्वाभाविक है। 'काला सोना' कहलाने वाला क्रूड ऑयल हमारी रोजमर्रा की जिंदगी – रसोई से लेकर सड़कों पर दौड़ते वाहनों तक – का आधार है। हाल ही में प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में प्रति लीटर 2.09 रुपये की बढ़ोतरी ने इस निर्भरता की याद दिला दी है।
लेकिन सवाल यह है – भारत ऑयल और गैस के लिए दूसरे देशों पर कितना निर्भर है? 2024-25 के ताजा आंकड़ों से समझते हैं कि हमारी ऊर्जा सुरक्षा कितनी मजबूत है और कहां चुनौतियां हैं।
क्रूड ऑयल: 85-89% आयात पर निर्भरता, लेकिन स्रोत विविध
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता देश है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत की दैनिक क्रूड ऑयल खपत लगभग 5.5 से 5.6 मिलियन बैरल प्रति दिन रही। घरेलू उत्पादन इस मांग को पूरा करने में सक्षम नहीं है, इसलिए कुल जरूरत का 85% से 89% हिस्सा आयात से पूरा किया जाता है।
2024-25 के आंकड़ों के अनुसार:
- रूस सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बना रहा, जिसकी हिस्सेदारी कुल आयात में 35-37% के आसपास रही (कुछ महीनों में 36.3% तक)।
- इराक दूसरे स्थान पर, करीब 20-21% शेयर।
- सऊदी अरब तीसरे स्थान पर, लगभग 13%।
- संयुक्त अरब अमीरात (UAE) करीब 9%।
- अमेरिका और अन्य देशों का हिस्सा बाकी।
इस विविधीकरण ने भारत को फायदा पहुंचाया। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद सस्ते रूसी क्रूड ने रिफाइनरियों को अच्छा मार्जिन दिया, जबकि मध्य पूर्व के पारंपरिक स्रोतों (इराक, सऊदी, UAE) पर निर्भरता कुछ हद तक कम हुई। फिर भी, कुल मिलाकर मध्य पूर्व से अभी भी करीब 40-45% क्रूड आयात होता है, जो स्ट्रेट ऑफ हरमुज से गुजरता है।
2024-25 में भारत ने कुल लगभग 242-244 मिलियन मीट्रिक टन क्रूड ऑयल आयात किया। आयात निर्भरता मार्च 2025 तक 89.1% तक पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में थोड़ी बढ़ी है। घरेलू उत्पादन स्थिर रहने के कारण यह निर्भरता बनी हुई है।
LPG (रसोई गैस): 60-65% आयात, 90% हरमुज मार्ग से
रसोई गैस (LPG) भारत की घरेलू ऊर्जा सुरक्षा का सबसे संवेदनशील हिस्सा है। 2024-25 में भारत ने लगभग 31.3 मिलियन टन LPG की खपत की, जिसमें घरेलू उत्पादन केवल 12.8 मिलियन टन रहा। यानी करीब 60-65% LPG आयात पर निर्भर।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि LPG आयात का 90% हिस्सा स्ट्रेट ऑफ हरमुज से गुजरता है। मुख्य आपूर्तिकर्ता देश कतर, सऊदी अरब, UAE और कुवैत हैं। हाल के संघर्ष में हरमुज पर दबाव बढ़ने से LPG आयात में कमी देखी गई – मार्च-अप्रैल 2026 में कुछ महीनों में आयात आधा तक घट गया।
सरकार ने इस चुनौती का सामना करने के लिए घरेलू उत्पादन बढ़ाने के प्रयास तेज किए। रिफाइनरियों को अतिरिक्त LPG उत्पादन का निर्देश दिया गया, जिससे घरेलू उत्पादन में 25% की बढ़ोतरी हुई। साथ ही अमेरिका जैसे वैकल्पिक स्रोतों से आयात बढ़ाया गया। फिर भी, 90% हरमुज निर्भरता अभी भी जोखिम बनी हुई है।
नेचुरल गैस और LNG: 50% से अधिक आयात, कतर सबसे बड़ा स्रोत
प्राकृतिक गैस की बात करें तो भारत अपनी जरूरत का 50% से अधिक LNG (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) के रूप में आयात करता है। 2024-25 में कुल LNG आयात 27 मिलियन टन से अधिक रहा, जिसमें कतर का हिस्सा 40-41% (लगभग 11.2 मिलियन टन) था।
कतर के अलावा UAE, अमेरिका, ओमान, नाइजीरिया और अंगोला जैसे देश भी महत्वपूर्ण स्रोत हैं। लेकिन मध्य पूर्व (खासकर कतर और UAE) से आने वाला LNG भी हरमुज स्ट्रेट से गुजरता है। संघर्ष की वजह से मार्च 2026 में कतर से LNG सप्लाई में भारी कमी देखी गई, जिससे स्पॉट मार्केट कीमतें बढ़ीं।
भारत ने LNG स्रोतों को विविध बनाने की दिशा में काम किया है। अमेरिका के साथ लॉन्ग-टर्म समझौते बढ़ाए गए हैं, लेकिन कुल निर्भरता अभी भी आयात पर बनी हुई है।
भारत की रणनीति: विविधीकरण और घरेलू प्रयास
ईरान-अमेरिका तनाव ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भू-राजनीतिक जोखिम ऊर्जा सुरक्षा को कितना प्रभावित कर सकते हैं। लेकिन भारत ने पिछले वर्षों में कई सकारात्मक कदम उठाए हैं:
1. स्रोत विविधीकरण: रूस पर निर्भरता बढ़ाकर मध्य पूर्व के बोझ को कम किया।
2. घरेलू उत्पादन बढ़ावा: LPG में 25% वृद्धि, केजी बेसिन और अन्य क्षेत्रों में गैस उत्पादन को प्रोत्साहन।
3. वैकल्पिक मार्ग: अमेरिका, अफ्रीका और अन्य क्षेत्रों से आयात बढ़ाना।
4. रणनीतिक भंडारण: कुछ हद तक स्टॉक बनाए रखना और PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) नेटवर्क का विस्तार।
5. नवीकरणीय ऊर्जा: सोलर, विंड और हाइड्रोजन पर जोर, ताकि लंबे समय में जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम हो।
इन प्रयासों के बावजूद चुनौतियां बाकी हैं। घरेलू तेल-गैस उत्पादन बढ़ाने की गति धीमी है। रिफाइनिंग क्षमता अच्छी है, लेकिन कच्चे माल पर विदेशी निर्भरता ऊंची बनी हुई है।
भविष्य की राह: आत्मनिर्भरता की दिशा में
2024-25 के आंकड़े स्पष्ट बताते हैं कि भारत अभी भी क्रूड ऑयल में 85-89%, LPG में 60-65% और LNG में 50%+ आयात पर निर्भर है। हरमुज स्ट्रेट पर 50% से अधिक क्रूड और 90% LPG का गुजरना जोखिम को बढ़ाता है।
सरकार का फोकस अब और मजबूत विविधीकरण, घरेलू अन्वेषण (Exploration), पाइप्ड गैस नेटवर्क विस्तार और नवीकरणीय ऊर्जा पर है। 'मिशन 500' जैसे भारत-अमेरिका व्यापार लक्ष्य भी ऊर्जा सहयोग को बढ़ावा दे रहे हैं।
: ईरान-अमेरिका तनाव ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा की परीक्षा ली है। 2024-25 के आंकड़े दिखाते हैं कि हमने विविधीकरण से कुछ हद तक सुरक्षा हासिल की है, लेकिन पूर्ण आत्मनिर्भरता अभी दूर है। सतर्क कूटनीति, रणनीतिक खरीदारी और घरेलू क्षमता बढ़ाने से ही हम ऐसे संकटों को बेहतर तरीके से पार कर सकते हैं।
ऊर्जा सुरक्षा = राष्ट्र सुरक्षा। भारत इस चुनौती को अवसर में बदलने की क्षमता रखता है – जैसा कि रूसी क्रूड के मामले में दिखा। आगे की राह विविधता, नवाचार और आत्मनिर्भरता की होनी चाहिए।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 19,2026