-Friday World-April 19,2026
नई दिल्ली, अप्रैल 2026। जब पूरी दुनिया ईरान-अमेरिका तनाव और स्ट्रेट ऑफ हरमुज में जहाजों की रुकावट से उत्पन्न ऊर्जा संकट से जूझ रही थी, तब भारत ने न सिर्फ चुनौती का सामना किया बल्कि उसे अवसर में बदल दिया। LPG संकट अब लगभग समाप्त हो चुका है और प्राकृतिक गैस (नेचुरल गैस) की स्पॉट मार्केट कीमतें 25 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (MMBtu) से गिरकर 16 डॉलर के आसपास पहुंच गई हैं। इस गिरावट ने भारतीय कंपनियों को बड़े पैमाने पर खरीदारी करने का मौका दिया है।
यह फैसला भारत के लिए गेमचेंजर साबित हो रहा है। ईरान युद्ध के बावजूद भारत ने अपनी गैस सप्लाई चेन को मजबूत बनाए रखा और ऊर्जा सुरक्षा को नई मजबूती दी।
संकट की शुरुआत: स्ट्रेट ऑफ हरमुज और कतर का हमला
फरवरी-मार्च 2026 में ईरान-अमेरिका (और इजराइल) के बीच बढ़े तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला दिया। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हरमुज को प्रभावित किया, जिससे दुनिया के करीब 20% तेल और गैस का परिवहन बाधित हो गया। इसके साथ ही कतर के रास लाफान (Ras Laffan) LNG प्लांट पर हमले से दुनिया की सबसे बड़ी LNG सुविधा गंभीर रूप से प्रभावित हुई।
रास लाफान दुनिया का सबसे बड़ा LNG निर्यात केंद्र है, जो वैश्विक LNG सप्लाई का लगभग 20% हिस्सा संभालता था। हमले के बाद कतर एनर्जी ने फोर्स मेज्योर घोषित किया और उत्पादन में 17% की कमी आ गई, जिसकी मरम्मत में 3 से 5 साल लग सकते हैं। नतीजा? एशिया में LNG की कीमतें आसमान छू गईं। जापान-कोरिया मार्कर (JKM) स्पॉट कीमतें 25 डॉलर/MMBtu तक पहुंच गईं।
भारत जैसे देशों पर इसका सीधा असर पड़ा। भारत अपनी LNG जरूरतों का बड़ा हिस्सा कतर और UAE से पूरा करता है, जो स्ट्रेट ऑफ हरमुज से गुजरता है। मार्च 2026 में भारत का LNG आयात पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 14-20% घट गया। घरेलू LPG की मांग पर दबाव बढ़ा, क्योंकि LPG भी मुख्य रूप से इसी रूट से आता है। कई शहरों में सिलेंडर की कतारें लगीं, होटल-रेस्तरां और छोटे उद्योगों को परेशानी हुई। सरकार ने इमरजेंसी पावर का इस्तेमाल कर रिफाइनरियों को अधिक LPG उत्पादन का निर्देश दिया और घरेलू सप्लाई को प्राथमिकता दी।
भारत की रणनीति: विविधीकरण का कमाल
लेकिन भारत इस संकट से घबराया नहीं। पिछले कई वर्षों से भारत ने अपनी ऊर्जा निर्भरता को डायवर्सिफाई करने की दिशा में ठोस कदम उठाए थे। ईरान पर तेल-गैस की निर्भरता पहले से ही कम की जा चुकी थी। अब रूस, अमेरिका, ओमान, नाइजीरिया और अन्य देशों से सप्लाई बढ़ाई गई।
सरकार ने वैकल्पिक स्रोतों से क्रूड और LNG आयात शुरू किया। भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन उर्जा सुरक्षा के तहत क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षा के लिए युद्धपोत तैनात किए। साथ ही, पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) नेटवर्क का विस्तार तेज किया गया ताकि भविष्य में LPG पर निर्भरता कम हो सके।
परिणाम सकारात्मक रहा। घरेलू LPG उत्पादन 25% बढ़ा। गर्मियों में मांग में मौसमी कमी भी आई, जिससे बुकिंग 50 लाख से घटकर 46-50 लाख प्रतिदिन रह गई। अब स्थिति पहले से काफी बेहतर है और LPG संकट का समाधान निकल आया है।
कीमतों में भारी गिरावट: 25 डॉलर से 16 डॉलर तक
संकट की शुरुआत में ग्लोबल स्पॉट मार्केट में नेचुरल गैस की कीमतें 25 डॉलर/MMBtu तक पहुंच गई थीं। ऊंची कीमतों के कारण कई भारतीय कंपनियां स्पॉट मार्केट के टेंडर रद्द कर रही थीं। लेकिन अप्रैल 2026 में स्थिति बदली। कंडीशनल सीजफायर की खबरों और सप्लाई में कुछ सुधार के बाद JKM कीमतें गिरकर 16 डॉलर/MMBtu के आसपास आ गईं। एक महीने से ज्यादा समय का सबसे निचला स्तर!
यह लगभग 35-40% की गिरावट थी। भारतीय कंपनियों ने इस मौके का फायदा उठाया। भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL), GAIL इंडिया लिमिटेड और गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (GSPC) ने अप्रैल-जून 2026 की डिलीवरी के लिए स्पॉट मार्केट से बड़े जत्थे में गैस खरीदी। व्यापारियों के अनुसार, ये खरीदारी औसतन 16 डॉलर/MMBtu से भी कम कीमत पर हुई।
15 अप्रैल को बाजार बंद होने के समय की गई ये खरीदारी पिछले कम खरीद के मुकाबले एक बड़ा बदलाव दर्शाती है। इससे भारत की ऊर्जा कंपनियों को लागत बचत हुई और औद्योगिक-घरेलू दोनों क्षेत्रों में सप्लाई स्थिर रही।
LPG संकट क्यों समाप्त हुआ?
- मौसमी राहत: गर्मियों में LPG की मांग स्वाभाविक रूप से कम होती है।
- घरेलू उत्पादन बढ़ोतरी: रिफाइनरियों को अधिक LPG बनाने का निर्देश दिया गया।
- वैकल्पिक आयात: अमेरिका, रूस और अन्य स्रोतों से सप्लाई बढ़ाई गई।
- PNG विस्तार: पाइप्ड गैस कनेक्शनों में तेजी आई, जिससे सिलेंडर पर दबाव कम हुआ।
- सरकारी प्रबंधन: सब्सिडी वाले घरेलू LPG को प्राथमिकता दी गई और व्यावसायिक उपयोग पर नियंत्रण रखा गया।
अब स्थिति सामान्य हो रही है। सरकार का कहना है कि डिलीवरी साइकल 2.5 दिनों में बना हुआ है और पैनिक की कोई जरूरत नहीं।
भारत के लिए सबक और भविष्य की रणनीति
यह संकट भारत की ऊर्जा सुरक्षा की मजबूती का प्रमाण है। जहां कई देश अभी भी संकट से जूझ रहे हैं, वहां भारत ने विविधीकरण, रणनीतिक खरीदारी और घरेलू उत्पादन बढ़ाकर स्थिति संभाल ली।
भविष्य में ऐसे संकटों से बचने के लिए भारत को और मजबूत कदम उठाने चाहिए:
- LNG और LPG के लिए **स्ट्रैटेजिक रिजर्व** बढ़ाना (वर्तमान में LPG का रिजर्व बहुत कम है)।
- पाइप्ड नेचुरल गैस और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का तेज विस्तार।
- घरेलू गैस उत्पादन (खासकर KG बेसिन और अन्य क्षेत्रों में) को बढ़ावा।
- रूस, अमेरिका और अफ्रीकी देशों के साथ लॉन्ग-टर्म LNG समझौते।
- नवीकरणीय ऊर्जा और हाइड्रोजन जैसे वैकल्पिक स्रोतों पर निवेश।
ईरान-अमेरिका तनाव ने एक बार फिर याद दिलाया कि भू-राजनीति ऊर्जा बाजार को कितना प्रभावित कर सकती है। लेकिन भारत की सक्रिय कूटनीति, विविध स्रोतों पर निर्भरता और बाजार के अवसरों का फायदा उठाने की क्षमता ने साबित कर दिया कि हम संकट को अवसर में बदल सकते हैं।
LPG संकट खत्म हो चुका है और गैस की सस्ती कीमतों ने भारतीय कंपनियों को नई ताकत दी है। यह भारत की ऊर्जा कूटनीति की जीत है। आगे भी सतर्क रहते हुए विविधीकरण की राह पर चलना ही दीर्घकालिक समाधान है।
भारत अब न सिर्फ संकट झेल रहा है, बल्कि उसे पार करके आगे बढ़ रहा है। ऊर्जा सुरक्षा = राष्ट्र सुरक्षा।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 19,2026