-Friday World-April 10,2026
अप्रैल 2026 की शुरुआत में जब अमेरिका और ईरान ने पाकिस्तान की मध्यस्थता से दो हफ्ते का युद्धविराम (ceasefire) घोषित किया, तो पूरी दुनिया ने राहत की सांस ली। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलने की उम्मीद से तेल की कीमतें स्थिर हुईं और वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगने से बच गया। लेकिन घोषणा के कुछ घंटों बाद ही लेबनान की राजधानी बेरूत में इजरायली हवाई हमलों ने सब कुछ बदल दिया। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इन हमलों में 300 से अधिक लोग मारे गए और 1,150 से ज्यादा घायल हुए। कई बच्चे और आम नागरिक इस हमले की चपेट में आए।
यह हमला इजरायल ने 10 मिनट के अंदर 100 से ज्यादा ठिकानों पर किया, जिसे उन्होंने “ऑपरेशन Eternal Darkness” नाम दिया। इजरायली सेना का दावा था कि वे हिजबुल्लाह के कमांड सेंटरों को निशाना बना रहे थे, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मीडिया और लेबनानी अधिकारियों ने इसे “घनी आबादी वाले इलाकों पर बिना चेतावनी के हमला” बताया।
जो केंट की चेतावनी जो अनसुनी रही
अमेरिकी राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी केंद्र (National Counterterrorism Center) के निदेशक **जो केंट** ने ईरान पर अमेरिकी हमलों का विरोध करते हुए इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने साफ कहा था: “इजरायल ईरान या लेबनान पर हमला करके युद्धविराम का उल्लंघन करने की कोशिश करेगा। ट्रंप को नेतन्याहू से बहुत सावधान रहना चाहिए।”
जो केंट अमेरिकी सेना में 11 युद्ध दौरों में सेवा कर चुके हैं और सीआईए के साथ अर्धसैनिक अधिकारी के रूप में भी काम कर चुके हैं। उनकी पत्नी शैनन की मौत 2025 में सीरिया में आत्मघाती हमले में हुई थी। इतने अनुभवी व्यक्ति की चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया गया। और ठीक वही हुआ जिसकी उन्होंने भविष्यवाणी की थी।
नेतन्याहू की भूमिका और विवाद
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट रूप से कहा कि लेबनान इस ceasefire का हिस्सा नहीं है। उन्होंने पाकिस्तान द्वारा घोषित 10-पॉइंट प्लान को ठुकराते हुए कहा कि लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।
व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने भी कहा कि ईरान का मूल 10-पॉइंट पीस प्लान “कचरे में फेंक दिया गया” है और ट्रंप की “रेड लाइन्स” नहीं बदली हैं। उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने इसे “legitimate misunderstanding” बताया और कहा कि अमेरिका ने कभी लेबनान को ceasefire का हिस्सा नहीं माना।
दुनिया भर से निंदा हुई। ईरान ने इसे “grave violation” करार दिया और होर्मुज फिर से बंद करने की धमकी दी। संयुक्त राष्ट्र, ओमान, कतर, अरब लीग, रूस, चीन, तुर्किये, फ्रांस और कई यूरोपीय देशों ने हमलों की निंदा की। लेकिन निंदा से ज्यादा कुछ नहीं हुआ।
इजरायल का परमाणु कार्यक्रम और दोहरे मापदंड
इजरायल के पास अनुमानित 90 घोषित और सैकड़ों अघोषित परमाणु बम हैं, लेकिन वह परमाणु अप्रसार संधि (NPT) का सदस्य नहीं है। दुनिया के अन्य परमाणु शक्तियों ने NPT और No-First-Use पॉलिसी जैसे समझौतों को माना है, जबकि इजरायल इनसे बाहर है।
कई विश्लेषक पूछ रहे हैं – एक देश जो परमाणु हथियार रखता है लेकिन किसी अंतरराष्ट्रीय ट्रिटी से बंधा नहीं, और जिसका प्रधानमंत्री क्षेत्रीय संघर्षों को बढ़ावा दे रहा है, तो क्या वह वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा नहीं बन रहा?
अमेरिका में आंतरिक विभाजन
ट्रंप प्रशासन में भी मतभेद साफ दिख रहे हैं। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ (पूर्व फॉक्स न्यूज एंकर और कट्टर इजरायल समर्थक) और जे.डी. वेंस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। अमेरिकी कांग्रेस के कुछ सदस्य ट्रंप के खिलाफ महाभियोग की बात कर रहे हैं। रिप्रेजेंटेटिव एडेलिटा ग्रिजाल्वा ने कहा कि ट्रंप “कमांडर-इन-चीफ के रूप में काम करने की हालत में नहीं हैं।”
क्या यह ‘आज का हिटलर’ वाला आरोप सही है?
कुछ आवाजें नेतन्याहू को “आज का हिटलर” या “युद्धोन्मादी” बता रही हैं। यह आरोप अत्यधिक है, लेकिन वर्तमान घटनाक्रम – ceasefire की घोषणा के तुरंत बाद बेरूत में बड़े पैमाने पर हमले – ने क्षेत्रीय शांति की उम्मीदों को गंभीर झटका दिया है।
इजरायल का तर्क है कि वह हिजबुल्लाह जैसे समूहों से अपनी सुरक्षा कर रहा है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय मीडिया और मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि इन हमलों में सिविलियन मौतें बहुत ज्यादा हैं और चेतावनी नहीं दी गई।
आगे का रास्ता
यह ceasefire अब बेहद नाजुक है। ईरान ने होर्मुज फिर बंद करने की धमकी दी है। पाकिस्तान मध्यस्थता जारी रखने की कोशिश कर रहा है, लेकिन विश्वास का संकट गहरा गया है।
दुनिया को अब दो सवालों का जवाब ढूंढना होगा:
1. क्या इजरायल-लेबनान संघर्ष को ceasefire से अलग रखा जा सकता है?
2. क्या परमाणु हथियारों वाले देशों के लिए अलग-अलग नियम लागू होने चाहिए?
शांति की राह हमेशा कठिन होती है, लेकिन जब युद्धविराम की घोषणा के कुछ घंटों बाद ही सैकड़ों निर्दोष जानें चली जाती हैं, तो वैश्विक समुदाय को सिर्फ निंदा से आगे बढ़कर ठोस कदम उठाने होंगे।
: बेरूत में हुई बमबारी ने मिडिल ईस्ट शांति की उम्मीदों को फिर से झटका दिया है। जो केंट जैसी आवाजों को अनसुना करना महंगा पड़ सकता है। नेतन्याहू की नीतियां क्षेत्र को अस्थिर कर रही हैं, लेकिन समाधान केवल निंदा से नहीं, बल्कि संवाद और अंतरराष्ट्रीय दबाव से निकल सकता है। दुनिया को अब सच्ची शांति के लिए एकजुट होना होगा, वरना छोटे-छोटे संघर्ष बड़े युद्ध का रूप ले सकते हैं।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 10,2026