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Tuesday, 21 April 2026

तेल की कीमतों में उछाल: हॉर्मुज स्ट्रेट में आग, ईरान का ऐतिहासिक ऐलान – अब तेल युआन-रियाल में, डॉलर का 50 साल पुराना दबदबा खत्म! ब्रेंट क्रूड 653.5 युआन प्रति बैरल!

तेल की कीमतों में उछाल: हॉर्मुज स्ट्रेट में आग, ईरान का ऐतिहासिक ऐलान – अब तेल युआन-रियाल में, डॉलर का 50 साल पुराना दबदबा खत्म! ब्रेंट क्रूड 653.5 युआन प्रति बैरल!
-Friday World-April 21,2026
नई दिल्ली/बीजिंग/तेहरान, 21 अप्रैल 2026: दुनिया भर के तेल बाजार में एक बार फिर उथल-पुथल मच गई है। सोमवार को एशियाई बाजारों में ब्रेंट क्रूड की कीमत में 7 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई। भारतीय समय के अनुसार दोपहर 2 बजे तक कीमत 95.9 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि शुक्रवार को यह 90.40 डॉलर के आसपास थी। इस उछाल का मुख्य कारण हॉर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर लगातार हमले, अमेरिका द्वारा ईरानी तेल टैंकरों को जब्त करना और अमेरिका-ईरान शांति वार्ता को लेकर दोनों तरफ से आ रहे मिले-जुले व उलटे संदेश हैं।

लेकिन सबसे बड़ा झटका ईरान की तरफ से आया है। तेहरान ने स्पष्ट ऐलान किया है कि अब तेल की खरीद-बिक्री डॉलर में नहीं, बल्कि चीनी युआन या ईरानी रियाल में होगी। अमेरिकी डॉलर का 50 साल पुराना “पेट्रोडॉलर” दबदबा खत्म हो गया है। साथ ही ईरान ने हॉर्मुज स्ट्रेट में टोल टैक्स पर भी राहत का ऐलान किया – अगर खरीदारी युआन या रियाल में की जाए तो टोल फ्री (मुक्त), जबकि डॉलर में खरीदारी करने पर प्रति बैरल **एक डॉलर** का टोल युआन या रियाल में ही चुकाना होगा। यह कदम वैश्विक ऊर्जा व्यापार की दिशा बदलने वाला माना जा रहा है।

 हॉर्मुज स्ट्रेट: दुनिया का तेल गला
हॉर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे संवेदनशील जलमार्ग है। यहां से रोजाना 2.1 करोड़ बैरल कच्चा तेल गुजरता है – यानी दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल व्यापार। ईरान इस स्ट्रेट के दोनों किनारों पर नियंत्रण रखता है। पिछले कुछ दिनों में यहां ईरानी नौसेना द्वारा जहाजों पर हमले और अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी टैंकरों को जब्त किए जाने की घटनाओं ने पूरे बाजार को हिला दिया।

सूत्रों के अनुसार, अमेरिका ने हाल ही में दो ईरानी तेल टैंकरों को “प्रतिबंधों का उल्लंघन” के आरोप में जब्त किया। इसके जवाब में ईरान ने क्षेत्र में अपना सैन्य अभ्यास तेज कर दिया। इसी बीच पाकिस्तान में चल रही अमेरिका-ईरान शांति वार्ता पर दोनों तरफ से विरोधाभासी बयान आ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तो ईरान के “वार्ता से हटने” के दावे को खारिज करते हुए कहा था कि वे ईरानी नेताओं से मिलने को तैयार हैं, लेकिन तेहरान की तरफ से अभी भी सख्त रुख देखा जा रहा है। इन मिले-जुले संदेशों ने बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी।

 ब्रेंट क्रूड में 7% उछाल – क्या कहते हैं आंकड़े?
- शुक्रवार बंद भाव: 90.40 डॉलर प्रति बैरल
- सोमवार उच्चतम: 95.9 डॉलर प्रति बैरल (7%+ उछाल)
- वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI): 92.80 डॉलर तक पहुंचा
- भारतीय समय दोपहर 2 बजे: हल्की गिरावट के बाद भी 94.50 डॉलर के ऊपर स्थिर

यह उछाल सिर्फ एक दिन का नहीं है। पिछले एक हफ्ते में ब्रेंट क्रूड में कुल 12 प्रतिशत की तेजी आई है। ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक गोल्डमैन सैक्स ने चेतावनी दी है कि अगर तनाव और बढ़ा तो कीमत 110 डॉलर तक जा सकती है।

 ईरान का ऐतिहासिक कदम: डॉलर को बाईपास, युआन-रियाल का उदय
ईरान के तेल मंत्री ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “अमेरिकी डॉलर का दौर अब खत्म हुआ। हम अपने तेल खरीदारों से युआन और रियाल में भुगतान की मांग करेंगे। हॉर्मुज स्ट्रेट में टोल टैक्स भी इसी मुद्रा में होगा। जो देश डॉलर छोड़कर युआन या रियाल में खरीदेंगे, उन्हें टोल फ्री मिलेगा। डॉलर में खरीदने वालों को प्रति बैरल एक डॉलर अतिरिक्त टोल चुकाना होगा – वो भी युआन या रियाल में।”

यह फैसला चीन और रूस जैसे देशों के लिए बड़ा तोहफा है। चीन पहले से ही ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है और युआन में भुगतान कर रहा है। भारत, जो ईरान से 10 प्रतिशत तेल आयात करता है, अब नई व्यवस्था पर गंभीरता से विचार कर रहा है।

पेट्रोडॉलर सिस्टम का अंत क्यों?
1970 के दशक से अमेरिका और सऊदी अरब के समझौते के बाद दुनिया का तेल व्यापार डॉलर में होता था। इससे अमेरिकी डॉलर को वैश्विक मुद्रा का दर्जा मिला। ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद तेहरान ने 2018 से ही युआन, रुपये और रियाल में व्यापार शुरू किया था, लेकिन अब इसे आधिकारिक नीति बना दिया गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम:
- अमेरिकी प्रतिबंधों को बेअसर करेगा
- BRICS देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) की मुद्रा सहयोग को बढ़ावा देगा
- डॉलर की मांग घटाएगा, जिससे अमेरिकी ब्याज दरों पर दबाव पड़ेगा

भारत पर क्या असर?
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। हर 1 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से भारत को सालाना लगभग 1.5 अरब डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ता है। 95.9 डॉलर के स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतें 3-5 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ सकती हैं। सरकार ने पहले ही रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

लेकिन अच्छी खबर यह है कि ईरान की नई नीति भारत को फायदा दे सकती है। अगर भारत युआन या रुपये में भुगतान करता है तो हॉर्मुज टोल फ्री मिलेगा। इससे आयात लागत में 8-10 प्रतिशत की बचत हो सकती है।

 वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
- चीन: सबसे बड़ा फायदा। युआन अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बनेगा।
- अमेरिका: डॉलर की कमजोरी, महंगाई बढ़ने का खतरा।
- यूरोप: ऊर्जा संकट गहरा सकता है।
- स्टॉक मार्केट: एशियाई बाजारों में गिरावट, लेकिन तेल कंपनियों के शेयर चढ़े।

आगे क्या?
अभी अमेरिका-ईरान वार्ता पाकिस्तान में जारी है। अगर कोई समझौता हुआ तो तनाव कम हो सकता है। लेकिन ईरान का युआन-रियाल वाला ऐलान अपरिवर्तनीय लग रहा है। ओपेक+ देशों की बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा होने वाली है।

विश्लेषक डॉ. रवि कुमार (एनर्जी इकोनॉमिस्ट) कहते हैं, “यह सिर्फ तेल की कीमतों का मुद्दा नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन बदलने का क्षण है। डॉलर का दबदबा कम होने से नई दुनिया उभर रही है।”

 हॉर्मुज स्ट्रेट में जारी तनाव ने तेल को 95.9 डॉलर पर पहुंचा दिया है, लेकिन ईरान का डॉलर-विरोधी कदम इससे कहीं बड़ा है। दुनिया अब दो खेमों में बंट गई है – एक डॉलर पक्ष और दूसरा युआन-रियाल पक्ष। भारत जैसे देशों के लिए यह चुनौती भी है और अवसर भी। अब देखना यह है कि अगले कुछ दिनों में वार्ता का नतीजा क्या निकलता है और कीमतें 100 डॉलर के पार जाती हैं या नहीं।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World-April 21,2026