वाशिंगटन — मध्य पूर्व में चल रहे अमेरिका-ईरान तनाव के बीच एक नई चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। वाशिंगटन पोस्ट की बुधवार (22 अप्रैल 2026) की रिपोर्ट के अनुसार, पेंटागन के एक गोपनीय आकलन में कहा गया है कि ईरान द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बिछाई गई बारूदी सुरंगों (sea mines) को पूरी तरह साफ करने में **छह महीने तक का समय** लग सकता है। भले ही लड़ाई रुक जाए और नाकाबंदी हटा ली जाए, फिर भी इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को पूरी तरह सुरक्षित बनाने में कई महीने लग सकते हैं।
यह आकलन हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी (House Armed Services Committee) के सदस्यों को मंगलवार को दी गई एक गुप्त ब्रीफिंग में बताया गया। विशेषज्ञों के मुताबिक, इससे वैश्विक तेल बाजार पर लंबे समय तक असर पड़ेगा और पेट्रोल-डीजल की कीमतें ऊँची बनी रह सकती हैं — यहां तक कि अमेरिकी मिडटर्म चुनावों तक भी।
पेंटागन का आकलन: 20 से ज्यादा माइन्स, साफ करने में लंबा समय
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आसपास 20 या उससे अधिक बारूदी सुरंगें बिछाई हैं। इनमें कुछ GPS-गाइडेड माइन्स भी हो सकते हैं, जो आधुनिक तकनीक से लैस हैं। पेंटागन के अधिकारियों ने कांग्रेस को बताया कि खदानों को हटाने की पूरी प्रक्रिया युद्ध समाप्त होने के बाद ही शुरू हो सकती है और इसमें छह महीने तक लग सकते हैं।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के तेल निर्यात का सबसे महत्वपूर्ण चोकपॉइंट है। इससे पहले युद्ध से पहले यहां से विश्व के लगभग 20% तेल का परिवहन होता था। अगर यह मार्ग लंबे समय तक आंशिक रूप से बंद या असुरक्षित रहा, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होगी, जिसका सीधा असर भारत, चीन, यूरोप और अमेरिका की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा।
वाशिंगटन पोस्ट ने तीन अधिकारियों के हवाले से लिखा कि यह समयसीमा युद्ध के आर्थिक प्रभाव को इस साल के अंत और उससे आगे तक बढ़ा सकती है। खदानें साफ करने का काम आसान नहीं है — इसमें विशेष नौसेना इकाइयां, रोबोटिक सिस्टम, डाइविंग टीम्स और हवाई निगरानी की जरूरत पड़ती है। ईरान की छोटी नावों से बिछाई गई कुछ माइन्स का पता लगाना और नष्ट करना और भी चुनौतीपूर्ण है।
पेंटागन का खंडन: “6 महीने का बंद होना असंभव और अस्वीकार्य”
पेंटागन ने रिपोर्ट को “असटीक” (inaccurate) बताया है। पेंटागन के प्रवक्ता **सीन पार्नेल** (Sean Parnell) ने एएफपी और अन्य मीडिया को दिए बयान में कहा:
> “हॉर्मुज जलडमरूमध्य का छह महीने के लिए बंद होना एक असंभव स्थिति है और रक्षा सचिव के लिए पूरी तरह अस्वीकार्य है।”
पार्नेल ने यह भी कहा कि “एक आकलन का मतलब यह नहीं कि वह व्यावहारिक या संभव है।” उन्होंने वाशिंगटन पोस्ट पर आरोप लगाया कि रिपोर्ट “एजेंडा” चलाने के लिए प्रकाशित की गई है। हालांकि, उन्होंने छह महीने की जगह कोई वैकल्पिक समयसीमा नहीं बताई।
यह खंडन ट्रंप प्रशासन की उस रणनीति से मेल खाता है जिसमें वे ईरान पर दबाव बनाए रखते हुए जल्द से जल्द हॉर्मुज को पूरी तरह खोलने पर जोर दे रहे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही ईरान को चेतावनी दी थी कि अगर कोई ठोस सौदा नहीं हुआ तो “बहुत सारे बम फटेंगे”।
हॉर्मुज का सामरिक महत्व: क्यों है यह इतना अहम?
हॉर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। यह संकीर्ण जलमार्ग दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में से एक है। यहां से सऊदी अरब, इराक, यूएई, कुवैत और ईरान का अधिकांश तेल निर्यात होता है।
- दैनिक तेल परिवहन: लगभग 21 मिलियन बैरल प्रति दिन (2025-26 के आंकड़ों के अनुसार)।
- वैश्विक हिस्सेदारी: विश्व के कुल तेल व्यापार का करीब 20%।
- भारत पर असर: भारत अपनी कुल तेल जरूरत का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। हॉर्मुज में देरी या असुरक्षा से भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं, मुद्रास्फीति बढ़ सकती है और अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ेगा।
ईरान ने पहले भी हॉर्मुज को “बंद करने” की धमकी दी है, जिसे वह अपना “बैटलफील्ड कार्ड” मानता है। युद्ध के दौरान ईरानी नौसेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने छोटी नावों और सबमरीन्स का इस्तेमाल कर माइन्स बिछाए।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव: तेल कीमतें और मुद्रास्फीति
विश्लेषकों का कहना है कि अगर हॉर्मुज पूरी तरह सुरक्षित नहीं हुआ तो तेल की कीमतें 80-100 डॉलर प्रति बैरल या उससे ऊपर बनी रह सकती हैं। इससे:
- अमेरिका में गैसोलीन की कीमतें बढ़ेंगी, जो मिडटर्म चुनावों में राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
- भारत जैसे आयातक देशों में ईंधन महंगा होने से ट्रांसपोर्ट, खाद्य पदार्थ और अन्य वस्तुओं की कीमतें प्रभावित होंगी।
- वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित होगी, जिससे मुद्रास्फीति बढ़ेगी।
कुछ विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर माइन्स साफ करने में वाकई 6 महीने लगे तो तेल बाजार में अनिश्चितता बनी रहेगी और वैकल्पिक रास्ते (जैसे सऊदी पाइपलाइन्स) की क्षमता सीमित होने से समस्या और बढ़ेगी।
ट्रंप प्रशासन की दोहरी चुनौती: सैन्य दबाव vs आर्थिक हकीकत
ट्रंप टीम ईरान के साथ संघर्षविराम को विस्तारित कर रही है और तेहरान को “एकजुट प्रस्ताव” देने का समय दे रही है। लेकिन पेंटागन का यह आकलन (भले ही खंडित किया गया हो) दिखाता है कि युद्ध के बाद भी आर्थिक परिणाम लंबे समय तक रह सकते हैं।
इजराइल और अमेरिकी हॉकिश गुट पूर्ण सैन्य कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, जबकि कूटनीतिक प्रयास (पाकिस्तान की मध्यस्थता सहित) जारी हैं। ईरान ने कहा है कि ब्लॉकेड हटाए बिना हॉर्मुज को पूरी तरह खोलना संभव नहीं।
आगे क्या?
वर्तमान में स्थिति अनिश्चित है। पेंटागन की ब्रीफिंग कांग्रेस में चर्चा का विषय बन गई है। अगर युद्धविराम टिकता है और वार्ता आगे बढ़ती है, तो खदानें साफ करने का काम तेजी से शुरू हो सकता है। लेकिन अगर तनाव बढ़ा तो हॉर्मुज में अनिश्चितता बनी रहेगी।
भारत के लिए यह स्थिति दोहरी चुनौती है — एक तरफ ऊर्जा सुरक्षा, दूसरी तरफ अमेरिका-इजराइल के साथ रणनीतिक संबंध। नई दिल्ली को संतुलित कूटनीति अपनाते हुए वैकल्पिक तेल स्रोतों (रूस, अमेरिका आदि) पर ध्यान देना होगा।
यह घटनाक्रम एक बार फिर याद दिलाता है कि आधुनिक युद्ध में पारंपरिक हथियार जैसे बारूदी सुरंगें भी कितना बड़ा आर्थिक नुकसान पहुंचा सकती हैं। दुनिया अब हॉर्मुज के खुलने और खदानों के सफाई के समय पर नजर टिकाए हुए है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 23,2026