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Thursday, 30 April 2026

अमेरिकी जनता का स्पष्ट संदेश: ईरान पर युद्ध उचित नहीं था – 63% का मानना अधिकांश अमेरिकी नागरिकों ने ईरान पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को गलत ठहराया है।

अमेरिकी जनता का स्पष्ट संदेश: ईरान पर युद्ध उचित नहीं था – 63% का मानना अधिकांश अमेरिकी नागरिकों ने ईरान पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को गलत ठहराया है।-Friday World-April 30,2026 
मार्केट लॉ स्कूल के हालिया सर्वेक्षण के अनुसार, 63 प्रतिशत अमेरिकियों का मानना है कि ईरान पर हमले शुरू करने के लिए पर्याप्त कारण नहीं थे, जबकि केवल 26 प्रतिशत ने इसे उचित ठहराया।

Reuters/Ipsos के एक अन्य सर्वे में तो यह आंकड़ा और भी चौंकाने वाला है – सिर्फ 26 प्रतिशत अमेरिकियों ने कहा कि ईरान में की गई सैन्य कार्रवाई “worth it” थी, यानी लागत और फायदे के हिसाब से सही थी।

ये आंकड़े 2026 के शुरू में शुरू हुए अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच आए हैं, जब संयुक्त अमेरिकी-इजरायली हमलों ने क्षेत्र में तनाव को नई ऊंचाई दी। प्यू रिसर्च, क्विनिपियाक, मारिस्ट और एबीसी न्यूज जैसे प्रमुख संस्थानों के लगभग सभी सर्वेक्षणों में एक ही तस्वीर उभरकर आई है – अधिकांश अमेरिकी इस युद्ध के खिलाफ हैं।
 पार्टी लाइन पर गहरी विभाजन
जनमत सर्वेक्षणों में सबसे दिलचस्प बात **पार्टीगत विभाजन** है। रिपब्लिकन वोटरों में समर्थन अपेक्षाकृत ज्यादा है (कई सर्वे में 70% के आसपास), लेकिन डेमोक्रेट्स और इंडिपेंडेंट्स में विरोध भारी है। उदाहरण के लिए:

- मार्केट पोल में डेमोक्रेट्स में 94% ने कहा कि पर्याप्त कारण नहीं थे।
- प्यू रिसर्च में डेमोक्रेट्स ने 88% “wrong decision” बताया।
- इंडिपेंडेंट वोटर भी ज्यादातर मामलों में विरोधी रुख अपनाते दिखे।

ट्रंप प्रशासन की ईरान नीति को लेकर भी असंतोष साफ है। प्यू के अनुसार करीब **61 प्रतिशत** अमेरिकियों ने ट्रंप के संघर्ष संचालन को नापसंद किया।
       क्यों विरोध कर रहे हैं अमेरिकी?
सर्वेक्षणों से कई कारण सामने आए हैं:

1. अपर्याप्त औचित्य: कई लोगों का मानना है कि ईरान तत्काल खतरा नहीं था। क्विनिपियाक पोल में 55% ने कहा कि ईरान ने अमेरिका पर आसन्न सैन्य खतरा नहीं पैदा किया था।
2. लंबे युद्ध का डर: अधिकांश अमेरिकी मानते हैं कि यह संघर्ष महीनों या सालों तक चल सकता है। जमीनी सैनिक भेजने का विचार तो लगभग 74-80% लोगों ने खारिज कर दिया।
3. आर्थिक प्रभाव: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर तनाव के कारण तेल की कीमतें बढ़ीं, जिससे आम अमेरिकी की जेब पर बोझ पड़ा। कई सर्वे में लोगों ने व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति पर नकारात्मक असर जताया।
4. सुरक्षा की चिंता: Reuters/Ipsos जैसे पोल में कम लोग मानते हैं कि ये कार्रवाई अमेरिका को ज्यादा सुरक्षित बनाएगी। बल्कि कई का कहना है कि स्थिति और बिगड़ सकती है।
5. युद्ध थकान: इराक और अफगानिस्तान के अनुभव के बाद अमेरिकी जनता विदेशी सैन्य अभियानों से सतर्क हो चुकी है।

 क्या कहते हैं प्रमुख सर्वेक्षण?
- Marquette Law School (अप्रैल 2026): 63% – पर्याप्त कारण नहीं थे।
- Reuters/Ipsos: केवल 26% ने कार्रवाई को “worth it” बताया; 60% ने डिसअप्रूव किया।
- Pew Research (मार्च 2026): 59% ने स्ट्राइक को wrong decision बताया; ट्रंप हैंडलिंग पर 61% असंतुष्ट।
- Quinnipiac: 53% ने सैन्य कार्रवाई का विरोध किया; जमीनी सैनिकों के खिलाफ 74%।
- AP-NORC और अन्य* बहुमत ने कार्रवाई को “too far” या “excessive” माना।

ये आंकड़े समय के साथ थोड़े बदल सकते हैं, लेकिन कुल मिलाकर ट्रेंड साफ है – अमेरिकी जनता इस संघर्ष को “war of choice” मान रही है, न कि अनिवार्य राष्ट्रीय सुरक्षा की जरूरत।

 इसका मतलब क्या है?
यह जनमत अमेरिकी लोकतंत्र की ताकत भी दिखाता है, जहां सरकार की विदेश नीति पर जनता की राय मायने रखती है। हालांकि नीति-निर्माता अक्सर राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक हितों को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन जब घरेलू स्तर पर महंगाई, गैस कीमतें और सैनिकों की सुरक्षा जैसे मुद्दे जुड़ जाते हैं, तो जनसमर्थन तेजी से घट सकता है।

ईरान पर हमले के बाद क्षेत्रीय स्थिरता, परमाणु प्रसार और अमेरिका-मध्य पूर्व संबंधों पर लंबे समय तक बहस छिड़ी रहेगी। लेकिन फिलहाल अमेरिकी जनता का संदेश स्पष्ट है: यह युद्ध ज्यादातर नागरिकों को उचित नहीं लगा।

63% बनाम 26% का यह अंतर सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि एक बड़े सामाजिक-राजनीतिक संदेश को दर्शाता है। अमेरिका में युद्ध थकान गहरी है और विदेशी सैन्य अभियान अब आसानी से जनसमर्थन हासिल नहीं कर पा रहे। भविष्य में कोई भी प्रशासन इस जनमत को नजरअंदाज नहीं कर सकता।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World-April 30,2026