वाशिंगटन से एक चौंकाने वाली रिपोर्ट ने गुरुवार को वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के खिलाफ नए सैन्य विकल्पों पर सेंट्रल कमांड (CENTCOM) की ब्रीफिंग दिए जाने की खबर के बाद एशियाई बाजारों में कच्चे तेल की कीमतें 7% तक उछल गईं। ब्रेंट क्रूड 126 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया — यह स्तर 2022 के रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद का सबसे ऊंचा है।
यह घटनाक्रम सिर्फ एक सैन्य ब्रीफिंग नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था के बीच गहरे संबंध का प्रतीक बन गया है।
Axios रिपोर्ट ने मचा दिया हड़कंप
प्रसिद्ध न्यूज वेबसाइट Axios ने अनाम सूत्रों के हवाले से खुलासा किया कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान पर “छोटे और तेज” हमलों की एक विस्तृत योजना तैयार की है। इसका मकसद ईरान के साथ चल रही बातचीत में बने गतिरोध को तोड़ना है। प्रस्तावित हमलों में ईरानी बुनियादी ढांचे — जैसे पावर प्लांट, ब्रिज और तेल सुविधाएं — को निशाना बनाने की संभावना जताई गई है।
एक अन्य विकल्प में होर्मुज़ स्ट्रेट के कुछ हिस्सों पर नियंत्रण हासिल कर व्यापारिक जहाजों के लिए मार्ग फिर से खोलने की बात कही गई है। इसमें जमीनी सैनिकों की तैनाती भी शामिल हो सकती है। ट्रंप प्रशासन इस रणनीति को ईरान पर अधिकतम आर्थिक दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल करना चाहता है, ताकि तेहरान परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौते की मेज पर लौटे।
इस हफ्ते शांति वार्ता ठप पड़ती दिख रही है और होर्मुज़ स्ट्रेट प्रभावी रूप से बंद है। दुनिया का करीब 20% तेल और LNG इसी संकरे जलमार्ग से गुजरता है। ईरान की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों और अमेरिकी नौसेना की ब्लॉकेड के कारण हजारों जहाज फंस गए हैं, जिससे सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है।
तेल की कीमतों में तूफानी उछाल: 2022 के बाद सबसे ऊंचा स्तर
ब्रेंट क्रूड की कीमत गुरुवार को एशिया सत्र में 7% से ज्यादा बढ़कर 126 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई। WTI क्रूड भी 107 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है। यह उछाल इसलिए और महत्वपूर्ण है क्योंकि यह 2022 के रूस-यूक्रेन युद्ध के शुरुआती दौर के बाद का उच्चतम स्तर है, जब ऊर्जा बाजार पहले ही अस्थिर था।
विश्लेषकों का कहना है कि अगर होर्मुज़ स्ट्रेट लंबे समय तक बंद रहा तो कीमतें और ऊंची जा सकती हैं। कुछ अनुमानों में 150 डॉलर प्रति बैरल तक का जिक्र हो रहा है। इससे न सिर्फ पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ेंगी, बल्कि मुद्रास्फीति भी वैश्विक स्तर पर नई चुनौती पेश करेगी।
अमेरिका का “कमाने का नया खेल”?
आपके सवाल में जिस “कमाने के नए खेल” का जिक्र है, उसकी चर्चा बाजार विशेषज्ञों और भू-राजनीतिक विश्लेषकों में जोरों पर है। ट्रंप कई बार सैन्य या आर्थिक दबाव की धमकियां दे चुके हैं, और हर बार शेयर बाजारों में तूफानी उतार-चढ़ाव देखा गया है। कुछ आलोचक इसे “धमकी-कमाई” का चक्र बताते हैं:
- धमकी → बाजार में अनिश्चितता → वोलेटिलिटी बढ़ती है
- बड़े निवेशक और संस्थागत खिलाड़ी इस वोलेटिलिटी का फायदा उठाकर ट्रेडिंग से भारी मुनाफा कमाते हैं
- फिर कुछ हद तक शांति की खबर → बाजार स्थिर → फिर नई धमकी
हालांकि, इस बार स्थिति अलग है। ईरान युद्ध फरवरी 2026 से चल रहा है, जिसमें अमेरिका-इजराइल ने तेहरान पर हमले किए और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत की खबर आई। उसके बाद ईरान ने होर्मुज़ स्ट्रेट को प्रभावी रूप से बंद कर दिया, जबकि अमेरिका ने ईरानी जहाजों पर ब्लॉकेड लगा दिया।
नतीजा? तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, शेयर बाजार घबराहट में हैं और दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं — खासकर भारत जैसी आयातक अर्थव्यवस्थाएं — दबाव में हैं।
वैश्विक प्रभाव: भारत सहित दुनिया पर क्या असर?
भारत, जो अपना बड़ा हिस्सा कच्चा तेल मध्य पूर्व से आयात करता है, इस स्थिति से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वालों में शामिल है। बढ़ती तेल कीमतें:
- पेट्रोल-डीजल, एलपीजी और एवीएशन टर्बाइन फ्यूल महंगे कर देंगी
- परिवहन और विनिर्माण लागत बढ़ाएंगी
- मुद्रास्फीति को बढ़ावा देंगी
- रुपया कमजोर हो सकता है
शेयर बाजार पहले ही इस अनिश्चितता से प्रभावित हो चुके हैं। ऊर्जा, एविएशन, पेंट और केमिकल कंपनियां दबाव में हैं, जबकि कुछ डिफेंस और अल्टरनेटिव एनर्जी स्टॉक्स में तेजी देखी जा रही है।
क्या आगे होगा?
ट्रंप प्रशासन का रुख साफ है — ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देना है और होर्मुज़ स्ट्रेट को जल्द से जल्द खुलवाना है। CENTCOM की ब्रीफिंग में “शॉर्ट एंड पावरफुल” हमलों के अलावा स्पेशल फोर्सेस द्वारा यूरेनियम स्टॉक पर छापे की भी चर्चा है।
दूसरी ओर, ईरान ने कहा है कि अगर अमेरिकी ब्लॉकेड हटाया गया तो स्ट्रेट फिर से खोलने को तैयार है। पाकिस्तान के माध्यम से चल रही अप्रत्यक्ष बातचीत अभी गतिरोध में फंसी हुई है।
विश्लेषक चेतावनी दे रहे हैं कि अगर यह तनाव लंबा खिंचा तो न सिर्फ तेल की कीमतें 130-150 डॉलर तक पहुंच सकती हैं, बल्कि वैश्विक मंदी का खतरा भी बढ़ जाएगा।
निष्कर्ष: भू-राजनीति और अर्थव्यवस्था का खतरनाक गठजोड़
ट्रंप का ईरान पर यह नया दांव सिर्फ सैन्य रणनीति नहीं है। यह दिखाता है कि आज की दुनिया में ऊर्जा कैसे हथियार बन जाती है। होर्मुज़ स्ट्रेट की एक-एक नाव का फैसला न सिर्फ तेल की कीमत तय करता है, बल्कि करोड़ों लोगों की जेब और देशों की विकास योजनाओं को भी प्रभावित करता है।
जब तक ईरान और अमेरिका के बीच कोई ठोस समझौता नहीं होता, तब तक बाजार अनिश्चितता में रहेंगे। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे ऊर्जा क्षेत्र की वोलेटिलिटी को ध्यान में रखकर पोर्टफोलियो को संतुलित रखें।
दुनिया इस वक्त एक नाजुक मोड़ पर खड़ी है — जहां एक ब्रीफिंग, एक धमकी या एक हमला पूरे ग्लोबल इकोनॉमी को हिला सकता है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 30,2026