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Saturday, 25 April 2026

ब्रिटेन में इज़राइल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग: 75 सांसदों ने लगाए प्रतिबंधों का प्रस्ताव

ब्रिटेन में इज़राइल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग: 75 सांसदों ने लगाए प्रतिबंधों का प्रस्ताव
-Friday World-April 25,2026 
लंदन। ब्रिटेन की राजनीति में फिलिस्तीन मुद्दे पर एक नया मोड़ आया है। हाल ही में ब्रिटिश संसद के 75 सांसदों ने एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक दिवस प्रस्ताव (Early Day Motion - EDM 2822) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें यूके सरकार से इज़राइल पर व्यापक प्रतिबंध लगाने की अपील की गई है। यह प्रस्ताव मुख्य रूप से इज़राइल द्वारा वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनी भूमि पर कब्जे और अवैध बस्तियों के विस्तार की नीति की कड़ी निंदा करता है।

प्रस्ताव लेबर पार्टी के सांसद रिचर्ड बर्गन (Richard Burgon) द्वारा पेश किया गया है। इसमें फरवरी 2026 में इज़राइली सरकार द्वारा वेस्ट बैंक की फिलिस्तीनी भूमि को "राज्य संपत्ति" के रूप में रजिस्टर करने के फैसले को अवैध करार दिया गया है। सांसदों का कहना है कि यह कदम फिलिस्तीनी क्षेत्रों पर कब्जा बढ़ाने और वास्तविक एनेक्सेशन (annexation) की दिशा में एक और प्रयास है।

 प्रस्ताव में क्या-क्या मांगे गई हैं?
सांसदों ने सरकार से निम्नलिखित सख्त कदम उठाने की मांग की है:

- इज़राइल के साथ हथियारों का व्यापार पूरी तरह रोकना (comprehensive arms embargo)।
- अवैध इज़राइली बस्तियों से जुड़े सामान और सेवाओं के व्यापार एवं निवेश पर पूर्ण प्रतिबंध।
- कब्जे को मजबूत करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं पर यात्रा प्रतिबंध (travel bans) और संपत्ति फ्रीज (asset freezes) लगाना।
- यूके-इज़राइल व्यापार समझौते को तत्काल निलंबित करना, जब तक इज़राइल अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन नहीं करता।

प्रस्ताव में गाजा में कथित युद्ध अपराधों, लेबनान में कार्रवाइयों और वेस्ट बैंक में कब्जे को गहराने का भी जिक्र है। कई समर्थक सांसदों में पूर्व लेबर नेता जेरेमी कॉर्बिन, एसएनपी के विदेश मामलों के प्रवक्ता ब्रेंडन ओ'हारा और फिलिस्तीनी मूल की एकमात्र सांसद लायला मोरान शामिल हैं।

अंतरराष्ट्रीय अदालत का फैसला: मजबूत आधार
इस प्रस्ताव में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) के जुलाई 2024 के ऐतिहासिक सलाहकार राय का स्पष्ट हवाला दिया गया है। ICJ ने कहा था कि इज़राइल की फिलिस्तीनी क्षेत्रों (वेस्ट बैंक, पूर्वी यरुशलम और गाजा) में निरंतर मौजूदगी अवैध है। अदालत ने इज़राइल को कब्जा जल्द से जल्द समाप्त करने, सभी नई बस्तियां रोकने और बस्तियों को खाली करने का आदेश दिया था।

ICJ ने सभी देशों को चेतावनी दी कि उन्हें इस अवैध स्थिति को कानूनी मान्यता नहीं देनी चाहिए, न ही कोई ऐसी सहायता करनी चाहिए जो कब्जे को बनाए रखे। साथ ही, बस्तियों से जुड़े आर्थिक या व्यापारिक सौदों से बचना चाहिए। प्रस्ताव में कहा गया है कि यूके ने रूस-यूक्रेन युद्ध में रूस पर सख्त प्रतिबंध लगाए, लेकिन इज़राइल के मामले में अंतरराष्ट्रीय कानून की उल्लंघन के बावजूद अभी तक ठोस कदम नहीं उठाए।

WAFA न्यूज एजेंसी के अनुसार, यह प्रस्ताव यूके की अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों को पूरा करने और कब्जे को बनाए रखने वाली किसी भी गतिविधि को रोकने की दिशा में है।

 यूके राजनीति में बढ़ता दबाव
यह प्रस्ताव अभी केवल एक Early Day Motion है, जिसका संसद में बहस या वोट का स्वतः अधिकार नहीं होता। लेकिन इतने बड़े पैमाने पर (75 से बढ़कर अब 82 तक पहुंचे) सांसदों का समर्थन मिलना ब्रिटेन की राजनीति में फिलिस्तीन मुद्दे पर बढ़ते दबाव का स्पष्ट संकेत है। लेबर सरकार के अंदर और विपक्ष में भी इज़राइल नीति पर असहमति बढ़ रही है।

कई विश्लेषकों का मानना है कि गाजा संघर्ष के बाद से यूके में जनमत और राजनीतिक दबाव में बदलाव आया है। मानवाधिकार संगठन, छात्र आंदोलन और सिविल सोसाइटी लगातार हथियार निर्यात बंद करने और बस्ती व्यापार पर रोक की मांग कर रही है। यह प्रस्ताव उसी व्यापक आंदोलन का संसदीय प्रतिबिंब माना जा रहा है।

संदर्भ और व्यापक परिदृश्य
वेस्ट बैंक में इज़राइली बस्तियों का विस्तार दशकों से विवाद का विषय रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इन्हें अवैध मानता है क्योंकि 1967 के बाद कब्जे वाले क्षेत्रों में बस्तियां बसाना जेनेवा कन्वेंशन का उल्लंघन है। फरवरी 2026 का फैसला इस प्रक्रिया को और तेज करने वाला कदम माना गया, जिसने वैश्विक स्तर पर आलोचना को बढ़ावा दिया।

85 से ज्यादा यूएन सदस्य देशों (यूके सहित) ने इस कदम का विरोध किया था। प्रस्ताव में कहा गया कि यूके को अब ICJ की राय के अनुरूप ठोस कार्रवाई करनी चाहिए, न कि सिर्फ बयानबाजी तक सीमित रहना चाहिए।

 आगे क्या?
अभी यह प्रस्ताव सरकार पर बाध्यकारी नहीं है, लेकिन अगर हस्ताक्षरों की संख्या और बढ़ी तो संसद में बहस की मांग मजबूत हो सकती है। रिचर्ड बर्गन ने सांसदों से अपील की है कि वे अपने स्थानीय सांसदों से इस प्रस्ताव का समर्थन करने को कहें।

यह घटना ब्रिटेन-इज़राइल संबंधों में संभावित बदलाव का संकेत दे रही है। एक ओर यूके सरकार पारंपरिक रूप से इज़राइल का समर्थन करती रही है, वहीं बढ़ते मानवीय संकट और कानूनी दबाव के कारण नीति पर पुनर्विचार की मांग तेज हो रही है।


75 (अब 82) ब्रिटिश सांसदों द्वारा इज़राइल पर प्रतिबंधों का प्रस्ताव रखना सिर्फ एक संसदीय कदम नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून, मानवाधिकार और फिलिस्तीनी न्याय की लड़ाई में बढ़ते वैश्विक दबाव का प्रतीक है। क्या ब्रिटेन सरकार ICJ के फैसले और अपने सांसदों की मांग पर अमल करेगी? समय बताएगा, लेकिन यह बहस अब यूके की राजनीति के केंद्र में आ गई है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World-April 25,2026