Breaking

यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Saturday, 11 April 2026

ईरान की ‘होर्मुज टोल-बूथ’ नीति: रियाल में अनिवार्य भुगतान, बैंक खाता जरूरी

ईरान की ‘होर्मुज टोल-बूथ’ नीति: रियाल में अनिवार्य भुगतान, बैंक खाता जरूरी
-Friday World-April 11,2026
दुनिया के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान ने एक ऐसा प्रस्ताव पेश कर दिया है जिसने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को नई चुनौती दे दी है। ईरान की संसद के राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग ने 9 से 10 पॉइंट वाले एक व्यापक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसमें होर्मुज से गुजरने वाले हर जहाज से **ईरानी रियाल** में ट्रांजिट फीस वसूलने और इसके लिए ईरान में अनिवार्य बैंक खाता खोलने की शर्त रखी गई है।

यह प्रस्ताव केवल शुल्क वसूली तक सीमित नहीं है। इसमें होर्मुज जलमार्ग पर ईरान के पूर्ण संप्रभु नियंत्रण को कानूनी रूप देने, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अमेरिका-इजरायल या प्रतिबंध लगाने वाले देशों से जुड़े जहाजों पर रोक लगाने जैसे प्रावधान भी शामिल हैं। मुंबई स्थित ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी पुष्टि की।

ईरान का कहना है कि हाल के युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई और जलमार्ग की सुरक्षा व विकास के लिए यह फीस जरूरी है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार एक बड़े ऑयल टैंकर से 20 लाख डॉलर तक की फीस मांगी जा सकती है। भुगतान केवल रियाल में अनिवार्य होगा, हालांकि कुछ मामलों में युआन या बिटकॉइन जैसी वैकल्पिक मुद्राओं की भी चर्चा हो रही है।

 होर्मुज जलमार्ग: वैश्विक तेल का गला
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। दुनिया का लगभग 20-21 प्रतिशत कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस इसी狭窄 रास्ते से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, यूएई, कुवैत और ईरान जैसे प्रमुख तेल निर्यातक देशों का पूरा निर्यात इसी मार्ग पर निर्भर है। भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा भी होर्मुज से आता है।

यदि यहां यातायात बाधित होता है या नई फीस लगाई जाती है, तो वैश्विक तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं, जिसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल, मुद्रास्फीति और हर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

 ट्रंप की दोहरी और सख्त चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति **डोनाल्ड ट्रंप** ने इस प्रस्ताव पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। ट्रुथ सोशल पर उन्होंने लिखा:

“होर्मुज से गुजरने वाले टैंकरों से फीस वसूलने की रिपोर्ट्स आई हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए। अगर हो रहा है तो तुरंत बंद कर दो!”

दूसरी पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि युद्धविराम समझौते के तहत होर्मुज को तुरंत खोलने की बात हुई थी, लेकिन ईरान बाधाएं खड़ी कर रहा है। उन्होंने इसे “dishonourable” और “शर्मनाक” बताया। ट्रंप पहले भी सख्त भाषा में चेतावनी दे चुके हैं कि अगर जलमार्ग नहीं खुला तो ईरान के पावर प्लांट और ब्रिज पर हमला हो सकता है।

ट्रंप का रुख स्पष्ट है – अमेरिका किसी भी देश को अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर “टोल-बूथ” लगाने की इजाजत नहीं देगा।

 ओमान का विरोध और अंतरराष्ट्रीय कानून
ईरान के प्रस्ताव में ओमान के साथ सहयोग की बात कही गई है, लेकिन ओमान ने साफ कहा है कि “होर्मुज में कोई टोल नहीं लगाया जा सकता”। ओमान के परिवहन मंत्री के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय समझौतों में होर्मुज पर फीस लगाने का कोई प्रावधान नहीं है।

संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) के तहत होर्मुज जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में शांतिपूर्ण जहाजों को निरंतर पारगमन का अधिकार (Right of Transit Passage) है। इसमें टोल वसूली की सामान्य प्रथा नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का यह कदम अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का उल्लंघन हो सकता है।

 भारत पर क्या असर पड़ेगा?
भारत के लिए होर्मुज अत्यंत महत्वपूर्ण है। हमारा 80 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल खाड़ी क्षेत्र से आता है। यदि फीस लगती है या यातायात प्रभावित होता है, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जो आम आदमी की जेब पर बोझ बनेगा। साथ ही, वैश्विक सप्लाई चेन पर असर पड़ेगा।

भारत जैसे बड़े आयातक देश कूटनीतिक स्तर पर इस मुद्दे पर नजर रखे हुए हैं। कई देश ईरान के साथ बातचीत बढ़ा रहे हैं ताकि जलमार्ग सुचारू रूप से खुला रहे।

आगे क्या?
यह प्रस्ताव अभी ईरान की संसद के पूर्ण सत्र, गार्जियन काउंसिल और राष्ट्रपति की मंजूरी के अधीन है। यदि लागू होता है तो शिपिंग कंपनियों को रियाल में भुगतान के लिए ईरानी बैंक खाता खोलना पड़ेगा, अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा और संभावित देरी का सामना करना पड़ेगा।

ईरान इसे अपनी संप्रभुता और युद्ध के बाद की मुआवजे की मांग के रूप में पेश कर रहा है, जबकि अमेरिका इसे “extortion” (जबरन वसूली) बता रहा है।


ईरान की होर्मुज नीति सिर्फ एक ट्रांजिट फीस नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था में अपना वजन बढ़ाने की रणनीति है। ट्रंप की सख्त चेतावनी और नाजुक युद्धविराम के बीच यह मुद्दा जल्द ही बड़े कूटनीतिक मंचों पर चर्चा का विषय बनेगा।

दुनिया अब देख रही है कि होर्मुज मुक्त जलमार्ग बना रहेगा या टोल-बूथ बनकर रह जाएगा। भारत सहित सभी प्रभावित देशों को अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और वैकल्पिक मार्गों पर विचार करने की जरूरत है।

शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए सभी पक्षों को संयम बरतना होगा, वरना तेल की कीमतों में उछाल और नया आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World-April 11,2026