-Friday World-April 21,2026
तेल अवीव/यरूशलम- इजरायल की खुफिया दुनिया में उस वक्त सन्नाटा पसर गया जब मोसाद प्रमुख डेविड बार्निया ने एक बंद कमरे में हुए स्मरण समारोह में पहली बार कबूल किया कि ईरान के खिलाफ चल रहे 'ऑपरेशन रोरिंग लायन' यानी 'दहाड़ता हुआ शेर' अभियान के दौरान उनका एक एजेंट मारा गया। एजेंट को केवल सांकेतिक नाम 'मेम' से पुकारा गया। यह मोसाद के इतिहास में दुर्लभ मौका है जब किसी सक्रिय अभियान के बीच एजेंसी ने अपने अधिकारी की मौत को सार्वजनिक रूप से स्वीकारा है।
क्या बोले मोसाद प्रमुख?
मंगलवार को हुए स्मृति कार्यक्रम में डेविड बार्निया ने कहा कि 'मेम' ने ईरान के परमाणु और सैन्य कार्यक्रमों से जुड़ी "अहम सूचनाएं जुटाने और निर्णायक अभियानों को अंजाम देने" में मुख्य भूमिका निभाई। बार्निया के शब्दों में, "हम ईरान की हर उस परियोजना पर सबसे गहरी नजर रखे हुए हैं जिनके बारे में हमें जानकारी है। हम वहीं थे, वहीं हैं और वहीं रहेंगे।"
हालांकि मोसाद ने 'मेम' की असल पहचान, मौत की तारीख, तरीका और जगह उजागर नहीं की। केवल इतना बताया गया कि उसकी मौत इजरायल की सीमाओं के बाहर हुई और वह सीधे ईरान के खिलाफ चल रहे 12-दिवसीय युद्ध से जुड़ा था। जून 2025 में हुए इस युद्ध में इजरायल ने ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर बड़े हवाई हमले किए थे, जो बाद में अमेरिका की मध्यस्थता से हुए संघर्ष-विराम पर खत्म हुआ।
ऑपरेशन दहाड़ता हुआ शेर' क्या था?
इजरायली सूत्रों के अनुसार, 'ऑपरेशन रोरिंग लायन' एक बहु-स्तरीय अभियान था जिसमें मोसाद के एजेंट महीनों पहले ईरान में घुसपैठ कर चुके थे। रिपोर्ट्स बताती हैं कि इजरायल ने ईरान के अंदर ही सटीक हथियार तैनात कर दिए थे और हवाई हमलों के साथ-साथ जमीनी तोड़फोड़ भी की गई। इस अभियान में मोसाद और इजरायली सेना ने वर्षों की खुफिया जानकारी का इस्तेमाल किया, जिसमें कमांडरों और परमाणु वैज्ञानिकों को निशाना बनाया गया।
इजरायल के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल इयाल जमीर ने बाद में कहा कि इन हमलों से "ईरानी परमाणु कार्यक्रम को गहरा, व्यापक और कठोर झटका लगा है और वह वर्षों पीछे चला गया है"।
पर्दे के पीछे की जंग: मोसाद बनाम ईरान
ईरान और इजरायल के बीच दशकों से 'छाया युद्ध' चल रहा है। इजरायल ईरान पर परमाणु हथियार बनाने का आरोप लगाता है, जबकि ईरान इसे शांतिपूर्ण ऊर्जा कार्यक्रम बताता है। इस दौरान दोनों देशों ने एक-दूसरे पर साइबर हमले, वैज्ञानिकों की हत्या और तोड़फोड़ के आरोप लगाए हैं।
युद्ध के दौरान और बाद में ईरान ने भी कई लोगों को मोसाद से जुड़े होने के आरोप में फांसी दी। जून 2025 में ईरान की न्यायपालिका ने दो लोगों, मोहम्मद मसूम-शाही और हामेद वालीदी को मोसाद से जुड़े जासूसी नेटवर्क का सदस्य बताकर फांसी दी। ईरान ने दावा किया कि इन्हें इराकी कुर्दिस्तान में ट्रेनिंग मिली थी। एक अन्य मामले में एस्माइल फेकरी को भी मोसाद एजेंट बताकर फांसी दी गई।
'मेम' कौन था? मोसाद की चुप्पी क्यों?
मोसाद अपनी परंपरा के अनुसार मारे गए एजेंटों की पहचान छुपाता है ताकि उनके परिवार और नेटवर्क को खतरा न हो। 'मेम' नाम हिब्रू वर्णमाला का 13वां अक्षर है, जिसका प्रतीकात्मक अर्थ 'पानी' या 'रहस्य' भी माना जाता है। एजेंसी ने केवल इतना कहा कि वह ईरान के कार्यक्रमों की जानकारी जुटाने में "महत्वपूर्ण" था।
डेविड बार्निया ने इसी भाषण में अमेरिकी CIA को "मुख्य साझेदार" बताते हुए धन्यवाद दिया और कहा कि CIA के सहयोग के बिना ऑपरेशन संभव नहीं था। इससे साफ है कि ईरान के खिलाफ अभियान अकेले इजरायल का नहीं था।
क्या यह पहली बार है?
मोसाद प्रमुख बनने के बाद से डेविड बार्निया को 'गैजेट-प्रेमी किलिंग मशीन' की छवि मिली है। उन्हें नवंबर 2020 में ईरान के परमाणु वैज्ञानिक मोहसिन फखरीजादेह की हत्या के पीछे का 'आर्किटेक्ट' भी माना जाता है। लेकिन किसी एजेंट की मौत को खुद स्वीकार करना मोसाद के लिए असामान्य है। आमतौर पर इजरायल ऐसे मामलों पर "न पुष्टि, न इनकार" की नीति अपनाता है।
आगे क्या?
बार्निया ने साफ किया कि मोसाद का मिशन खत्म नहीं हुआ। "हम सतर्क रहेंगे। ईरान में जिन परियोजनाओं के बारे में हमें पता है, उन पर सबसे गहरी नजर रखेंगे"। वहीं ईरान ने भी इजरायली हमलों को "राजकीय आतंकवाद" करार देते हुए जवाबी कार्रवाई का अधिकार जताया है।
: 'मेम' नाम के एजेंट की मौत की स्वतंत्र पुष्टि अभी सार्वजनिक स्रोतों में उपलब्ध नहीं है। मोसाद के बयान के अलावा घटना का समय, स्थान और परिस्थितियां गोपनीय रखी गई हैं। ईरान-इजरायल संघर्ष से जुड़ी कई खबरें सोशल मीडिया पर अपुष्ट दावों के साथ फैलती रही हैं, इसलिए आधिकारिक सूचनाओं का इंतजार करना जरूरी है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 21,2026