-Friday World-April 21,2026
वाशिंगटन डीसी, 21 अप्रैल 2026 – अमेरिका-इज़राइल गठजोड़ द्वारा ईरान पर चल रहे युद्ध और गाजा में जारी मानवीय संकट के विरोध में सोमवार को अमेरिकी सैन्य दिग्गजों ने एक अनोखा और भावुक प्रदर्शन किया। कैनन हाउस ऑफिस बिल्डिंग के रोटुंडा में दर्जनों पूर्व सैनिकों और उनके परिवार के सदस्यों ने ध्वज-तह समारोह आयोजित किया, लाल ट्यूलिप्स थामे खड़े रहे और जोर-जोर से नारे लगाए। जब वे इमारत खाली करने से इनकार कर दिया, तो कैपिटल पुलिस ने कम से कम 62 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। यह घटना अमेरिकी इतिहास में इराक युद्ध के बाद सबसे बड़े दिग्गज-नेतृत्व वाले सविनय अवज्ञा आंदोलन के रूप में उभरी है।
'अबाउट फेस' का सशक्त गठबंधन
प्रदर्शन का नेतृत्व About Face: Veterans Against the War नामक संगठन ने किया, जो युद्ध-विरोधी दिग्गजों का प्रमुख मंच है। इसमें Veterans For Peace, Center on Conscience and War (CCW), Common Defense, Military Families Speak Out, Fayetteville Resistance Coalition और 50501 Veterans जैसे कई संगठन शामिल थे। कुल मिलाकर करीब 120-150 प्रदर्शनकारी वहां पहुंचे थे, जिनमें विकलांग दिग्गज, व्हीलचेयर पर बैठे सैनिक और मृत सैनिकों के परिवार शामिल थे।
वे सैन्य वर्दी में थे। हाथों में लाल ट्यूलिप्स थामे हुए – जो ईरानी हमलों में मारे गए लोगों की याद में रखे गए थे। उन्होंने बैनर फहराए जिन पर साफ लिखा था: “End the War on Iran” (ईरान पर युद्ध बंद करो) और “We Can’t Afford Another War” (हम एक और युद्ध का खर्च नहीं उठा सकते)।
ध्वज-तह समारोह और भावुक प्रदर्शन
रोटुंडा में सबसे मार्मिक क्षण ध्वज-तह करने का समारोह था। यह 13 अमेरिकी सैनिकों की मौत का प्रतीक था, जो अब तक इस संघर्ष में शहीद हो चुके हैं। दिग्गजों ने सैन्य अनुशासन के साथ पंक्तिबद्ध होकर खड़े होकर नारे लगाए – “No More Forever Wars!” (कोई और अनंत युद्ध नहीं!) और “Bring Our Troops Home!” (हमारे सैनिकों को घर लाओ!)।
एक पूर्व आर्मी रेंजर ग्रेग स्टोकर ने कहा कि वे कांग्रेस के स्पीकर माइक जॉनसन से मिलकर मांग करना चाहते थे कि वे युद्ध के लिए फंडिंग रोकें और सक्रिय सैनिकों को कांशेंस ऑब्जेक्टर (युद्ध का नैतिक विरोधी) का दर्जा देने की अनुमति दें। लेकिन स्पीकर नहीं आए। इसके बजाय कैपिटल पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को ज़िप-टाई (प्लास्टिक हथकड़ियां) लगाकर एक-एक करके बाहर निकाला। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए, जिनमें कई दिग्गजों को क्रच या व्हीलचेयर पर देखा गया।
युद्ध की पृष्ठभूमि और विरोध का कारण
यह प्रदर्शन फरवरी 2026 में शुरू हुए अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच तनावपूर्ण संघर्ष की पृष्ठभूमि में हुआ। परमाणु वार्ता विफल होने के बाद अमेरिका ने “Operation Epic Fury” जैसे हमले शुरू किए। प्रदर्शनकारी इसे “ट्रंप का अवैध युद्ध” बता रहे हैं। वे गाजा में इज़राइल के अभियानों, लेबनान के दक्षिणी इलाकों में कथित “एथनिक क्लीनिंग” और पूरे मध्य पूर्व में अमेरिकी हस्तक्षेप की निंदा कर रहे हैं।
About Face के सदस्यों का कहना है कि उन्होंने इराक और अफगानिस्तान में युद्ध देखा है। वे नहीं चाहते कि नई पीढ़ी वही गलतियां दोहराए। एक दिग्गज क्रिस सारसन ने कहा, “मैं पूरे देश से यहां आया हूं ताकि आज की पीढ़ी को इराक के दिग्गजों जैसी पीड़ा न झेलनी पड़े।” वे ईरान में मारे गए आम नागरिकों के लिए भी शोक व्यक्त कर रहे थे और अमेरिकी टैक्सपेयर्स के पैसे को युद्ध के बजाय स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे पर खर्च करने की मांग कर रहे थे।
गिरफ्तारियां और प्रतिक्रियाएं
कैपिटल पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दी कि वे क्षेत्र खाली करें, लेकिन वे नहीं माने। नतीजतन 62 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया। कुछ पर हमले और प्रतिरोध के आरोप भी लगे। हालांकि अधिकांश गिरफ्तारियां शांतिपूर्ण सविनय अवज्ञा के रूप में दर्ज की गईं।
यह घटना अमेरिकी जनता में युद्ध-थकान को उजागर करती है। कई लोग इसे “वेटरन्स का जागरण” बता रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया जैसे अल जजीरा, रॉयटर्स और द हिल ने इसे प्रमुखता से कवर किया। कुछ आलोचक इसे “आतंकवादियों का समर्थन” बता रहे हैं, लेकिन प्रदर्शनकारी कहते हैं कि वे केवल शांति और जवाबदेही की बात कर रहे हैं।
व्यापक संदर्भ: युद्ध की कीमत
ईरान पर यह संघर्ष दो महीने से ज्यादा चल चुका है। इसमें अमेरिकी सैनिकों की मौत के अलावा हजारों ईरानी नागरिक प्रभावित हुए हैं। गाजा में पहले से चल रहे संकट के साथ मिलाकर यह मध्य पूर्व को अस्थिर कर रहा है। दिग्गजों का मानना है कि “फॉरएवर वॉर” (अनंत युद्ध) की नीति अमेरिका की अर्थव्यवस्था, सैनिकों की मानसिक स्वास्थ्य और वैश्विक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा रही है।
वे कांग्रेस से मांग कर रहे हैं कि कोई और फंडिंग न दी जाए। साथ ही सक्रिय ड्यूटी वाले सैनिकों को नैतिक आधार पर युद्ध से इनकार करने का अधिकार दिया जाए।
निष्कर्ष: सच्चे देशभक्तों की आवाज
यह प्रदर्शन सिर्फ गिरफ्तारियों की खबर नहीं है – यह उन सैनिकों की आवाज है जिन्होंने युद्ध देखा है और अब कह रहे हैं – “बस बहुत हुआ”। वे युद्ध के पक्ष में नहीं, बल्कि शांति के पक्ष में खड़े हैं। लाल ट्यूलिप्स, तह किया गया ध्वज और जोरदार नारे – ये सब प्रतीक हैं कि असली देशभक्ति कभी-कभी सत्ता से सवाल पूछने में होती है।
अमेरिका समेत दुनिया भर में इस घटना ने बहस छेड़ दी है – क्या युद्ध वाकई जरूरी है या यह सिर्फ हथियार उद्योग और सामरिक हितों का खेल है? About Face जैसे संगठन लगातार कह रहे हैं कि सैनिक युद्ध लड़ते हैं, लेकिन शांति बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 21,2026